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डिनर ख़तम ही हुआ था की सरला का मोबाइल बजता है। सरला मोबाइल देखते हुआ तेरे पापा का फ़ोन है।
अरुण: उठाओ और बात करो कॉल स्पीकर पे डाल दो।
सरला; हेलो।
रमेश: जाके एक कॉल भी नहीं की जा सकती।
सरल: वो मेरे मोबाइल पानी मैं गिर गया था।
रमेश: तो अरुन के फोन से कर लेती पर तुम्हे क्या मतलब पति जिए या मरे।
सरला: वो ऐसा कुछ नहीं है ।
रमेश: बताओ कब आ रहे हो।
सरल: कल रात की टिकट्स है।
रमेश: नहीं आज ही निकलो मुझे कहीं बाहर जाना है ।
सरला: पर टिस्कट्स।
रमेश: कैंसिल नहीं हो सकती ।
तूम से तो बात करना बेकार अरुन से बात कराओ।
अरून: हाँ पापा
रमेश: सब ठीक है।
अरुण: हाँ
रमेश : बेटा आज ही निकलो मुझे ऑफिस के काम से २ दिन बाहर जाना है।
सरला नहीं का इशारा करती है ।
पर अरुन हाँ बोल देता है।
अरुण: ओके पापा अभी जो भी ट्रैन मिलेगी हम उससे निकलते है और कॉल डिसकनेक्ट कर देता है।
सरला: मना किया था न मै।
मेरा मन नहीं भरा अभी।
अरुण: किस से मेरे मुसल से ।
सरला:हाँ मुझे अभी और खाना है इसे।
अरुण: वहाँ खाना इसे।
सरला: पर वह कैसे
अरुण: सुना नहीं दो दिन उन्हें बाहर जाना है।
तो बाकि का हनीमून घर पे।
सरला: खुश होते हुए मतलब यहाँ १ दिन और वहाँ दो दिन और।
सरला राजी हो जाती है।
दोनो पैकिंग सुरु करते है और आधे घंटे में रूम खाली कर कैब पकड़ लेते है स्टेशन के लिये
स्टेशन पहुच कर अरुन ट्रैन और टिकट्स कन्फर्म करता है और टिकट्स ले कर प्लेटफार्म पे दोनों ट्रैन का इंतज़ार करने लगते है। टिकेट्स ३ टायरAC का था साइड वाली दोनों बर्थ।
ट्रेन आने के बाद दोनों अपनी सीट पे बैठते है और अपनी साइड का पर्दा कर लेते है।
सरला: कुछ करना है क्या।
अरुण: जैसे की ।
सरला: मेरी बाजानी है क्या
अरुण: आगे या पीछे।
सरला: जो आप का मन करे।
अरुण और किसी ने देख लिया तो।
सरल: जानती हूँ रश है पर अब आप मेरी लिए हुए बिना सोते नहीं है और अब मेरे होते हुए आप प्यासे सोये मुझे ये मंज़ूर नही।
अरुण: सरला का हाथ पकड़ कर मेरे लिए तुम्हारी ख़ुशी ज्यादा मायने रखते है।
तो अब सो जाओ सुबह तक इसकी सुजन कम कर लो कल से फिर इसकी दो दिन तक बेहरमी से बजाना है।
तब तक माफ़ किया।
सरला: थैंक यु सो मच जान पक्का न आप रह लोगे ना।
अरुण: हाँ मेरी जान पर घर पर मना मत करना नहीं तो तुम्हे जबरदस्ती चोदुँगा और पडोसी तुम्हारी चीख सुन रहे होंगे समझी।
सरला: हाँ
और दोनों हँस्ते हुए सो जाते है ।

कल देखते है घर पे कैसे सुहागरात मनती है।

दोनो की आँख तब खुलती है जब उनका स्टेशन आ जाता है।
रमेश का फोन आता है।
और दोनों रमेश से बात करके अपने स्टेशन पे उतर जाते है और टैक्सी पकड़ कर अपने घर आते है।
रमेश गेट खोलता है ।
आ गये ।
और दोनों अंदर आ जाते है
रमेश सरला से
तूम लँगड़ा के क्यों चल रही हो

सरला: वो वो
अरुण: वो पापा मम्मी स्टेशन पे फिसल गयी जल्दी के चक्कर में।
रमेश: कुछ तो सही कर लिया करो।
सरला कुछ नहीं बोलति।
रमेश:मेरी पैकिंग हो गयी है मैं निकल रहा हू।
अरुण: कब तक आओगे।
रमेश: आज सैटरडे है मंडे को आ जाऊँगा।
अरुण: मैं छोड दू स्टेशन।
रमेश: नहीं रहने दे टैक्सी बुला ली है।
सरला: ये छोड़ आयेंगे आप को।
रमेश: ओके चल मैं तो इसलिए मना कर रहा था की थका हुआ होगा।
अरुण: कोई बात नहीं मैं चलता हू।
और दोनों चले जाते है।
सरला अरुन को आवाज़ देती है।
रमेश: अब क्या हुआ।
अरून सरला के पास जाता है ।
सरला अरुन को घर की डुप्लीकेट चाभी देती है।
इसे ले जाओ पता नहीं कहीं मैं सो जाऊँ।
अरून ओके तुम आराम करो।
सरला गेट बंद कर लेती है।
और अरुन को मेसेज करती है की मेरे फेवरेट हलवाई से रस मलाई ले आये जो उसकी फेवरेट थी
और इस तरह २ घंटे गुजर जाते है।
अरून पापा को छोड़ के रस मलाई लेते हुए घर पहुचता है।
डोरबेल बजता है।
पर उसे याद आता है की कहीं सरला सो न गई हो
और डुप्लीकेट चाभी से गेट खोलता है और गेट
बन्द कर के अंदर आता है और सरला को आवाज़ देता है।
जान कहाँ हो
और सरला के रूम में आ जाता है।

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