सरला भी कहाँ हार मानने वाली थी.
अरुण को बेड पर लिटाती है.
और अपने कपडे उतार कर अरुन के उपर ६९ पोजीशन में लेट जाती है
और अपनी चुत अरुन के मुह पे रगडने लगती है।
चुस मेरे राजा अपनी ममा की चुत और बोलते हुए अरुन के लंड को मुह में भर लेती है
और चुसने लगती है।
ओर अरुन सरला के चुत के दाने को मुह में भर कर चाटने और चुस्ने लगता है।
और दोनों की सिसकारियां उनके गले में घुट जाती है।
दोनों एक दूसरे को पूरा मजा देने की कोशिश करते रह्ते है और कोई भी कम नहीं पड़ता चाहता था।
और दोनों के मुह से गुगुगुग्गु सपर सपर की आवाज़ निकल रही थी
और सरला के चुत पे से मुह हटा कर जान क्या हुआ चुसो न ।
सरला: चूस तो रही हूँ मेरी जान मेरे राजा आज पेट भर के चुसने दे मुझे और चुसने लगती है।
अरुन सिसकारी लेता है और उसकी चुत में मुह घुसा देता है
और चुसते चुसते दोनों थक जाते है।
और कहते है न कोशिश करने वालो की हार नहीं होती और अरुन सरला के चूत के क्लिट को मुह में रख कर दाँतो से काटने लगता है और उसकी चुत में ऊँगली डाल कर चोदने लगता है ।
ऐसा करने से सरला का सरीर अकड जाता है और वो अरुन के मुह में पानी छोड देति है।
अरून उसकी चुत चाट कर साफ़ कर देता है
और सरला थोड़ी कमज़ोर पड़ जाती है।
थोड़ी देर बाद फिर से अरुन का लंड चुसने लगती है
और थोड़ी देर चुसने के बाद अरुन का सरीर भी ऐंठने लगता है और सरला के मुह में जोर जोर से पेलकर अपना वीर्य छोड़ देता है।दोनों वही बेड पे थक कर लेट जाते है।
अरुण:कैसा लगा
सरला: बहुत अच्छा पर इस बार थका दिया तुम ने
मुह दर्द कर गया।
अरुण: ज्यादा थक गई मा।
सरला: नहीं बेटे बड़ा मजा आया इतना बड़ा मुसल चुसने में।
और दोनों यु ही बात करते करते फिर से गरम होने लगे।
अरुण: सरला के मम्मे छेड़ते हुए
सरला: क्या कर रहा है।
अरुण: छेड रहा हू।
सरला: क्या
अरुण: तुम्हारी रसीली चूचियां।
सरला: क्यु
अरुण: अभी तो शुरुआत हुई है पूरी रात बाकि है।
सरला: अच्छा अब क्या करना है।
अरुण: मुह का तो हो गया।
सरला: हाँ समझ गई जो तूने होटल रूम में कही थी
की । तीनो की लेगा मुह की तो ले ली अब।
अरुण: चुत और गाण्ड की
और अरुन खड़ा हो जाता है।
सरला: कहा जा रहा है
अरुण: आप भी उठो
सरला: पर क्यु
अरुण: सुहागरात मनानी है।
सरला: हाँ पर ।
अरुण: कुछ नहीं बोलता और बेड शीट्स उठाता है
और सरला का हाथ पकड़ कर टेंट हाउस से बाहर जाने लगाता है।
सरला: कहा जा रहे हो।
अरुण: सुहागरात मनाने।
सरला: पर
अरुण: आप की सुहागरात खुले आसमान में मनेगी।
और सरला को बाहर ले आता है।
सरला: कपडे तो पहनने दे।
अरुण: कपडे पहन कर क्या करोगी फिर उतारने पडेंगे
सरला: पर मैं नंगी हू।
अरुण: मैं भी
सरला: कोई देख लेगा।
अरुण: रात के १ बज रहे है कोई नहीं होगा और बाहर आ जाता है।
मन तो सरला का भी था खुले आसमान के निचे नंगे हो कर समुन्दर के किनारे सुहागरात मनाने का पर कोई देख न ले इसलिए डर रही थी।
अरून सरला का हाथ पकड़ टेंट हाउस की रौशनी के बीच सरला को एक सुनसान जगह पानी के किनारे बेड शीट्स बिछा के लीटा देता है और खुद भी लेट जाता है
सरला: अरुन के सिने पे सर रख कर कितना अच्छा लग रहा है समुन्दर की लहरें खुला आसमान और मैं तुम्हारी बाँहों में नंगी चूदने ने की लिए तैयार।
अरुण: उठता है।
सरला: क्या हुआ अरुण।
अरुण: बस अभी आया और उठ कर टेंट हाउस में जाता है और आइस क्यूब जो उसने मँगाया था लेके आता है।
सरला: इसका का क्या करोगे।
अरुण: देखती जाओ।
और आईस क्यूब उठा कर सरला के निप्पल पर लगाने लगता है।
सरला: आआआअह्ह अरुन ये क्या कर रहा है।
अरुण: कुछ नही मेरी जान
बरफ लगने से सरला के निप्पल खड़े हो जाते है जैसे अंगुर का दाना।
और अरुन झुक के एक निप्पल मुह में ले लेता है।

