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प्रीति सरला से
क्यूं कर रही हो ऐसा अब तो अरुन ने भी बोल दिया है
वो भी तुम से प्यार करता है ।
पकड़ लो इसका हाथ ज़िन्दगी मज़े से कटेगी।
सरला: चुप रहो तुम।
प्रीति कुछ बोलने वाली थी ।
तभी प्रीति का सेल बजता है।
प्रीति: हेलो।
और उधर से कूछ बोला जाता है।
ठीक है मैं निकल रही हुँ।
सरला: क्या हुआ और कहा निकल रही हो।
प्रीति: वो रानी और उसके पति में झगड़ा हो गया है और वो घर आ गई है।
मुझे जाना पड़ेगा वो स्टेशन पे मेरा वेट कर रहे है।
ओर पैकिंग करने चली जाती है।
रानी वही है जिसकी चुत दिलाने की प्रीति अरुन को बोली है।
रानी प्रीति की सब से बड़ी बेटी थी जिसकी भी एक एक साल की बेटी थी।
प्रीति पैकिंग कर के बाहर आ जाती है।
अरुण से:अरून क्या तू मुझे स्टेशन तक छोड सकता है।
अरून हाँ बुआ।
और दोनों घर से निकल जाते है।

टैक्सी में
प्रीति: अरुन सॉरी मैं अपना वादा पूरा नहीं कर पाई।
मुझे जाना पड़ रहा है।
अरुण: कोई बात नहीं मेरी ही किस्मत ख़राब है जो आप की गाण्ड नहीं मिल पायी।
प्रीति: टेंशन न ले मैं जल्दी आउंगी फिर दोनों मज़े करेंगे
और अब की बार रानी को भी साथ लाऊँगी।
और उसकी भी दिला दुँगी।वह सरला की तरह नखरे नहीं करेगी मेरी बेटी मेरे एक इशारे पे तेरे निचे आ जाएगी।
अरुण : आप नहीं आई तो।
प्रीति: तो तुझे बुला लुंगी और मेरे घर पे तुझे वो सब दूंगी जो तू बोलेगा।
इतने में स्टेशन आ जाता है और अरुन प्रीति को सुभाष के पास छोड़ कर घर के लिए निकल जाता है।

घर पहुच कर डोरबेल बजाता है।
दरवजा सरला खोलती है
अरुन अंदर आ जाता है।
सरला दरवाजा बंद करती है
और जैसे ही दरवाजा बंद होता है
दोनो माँ बेटा एक दूसरे को ऐसे हग करते है जैसे कितने बरसो से बिछडे प्रेमि।
और एक दूसरे को चुमते चाटने लगते है।
और भूल जाते है की घर पर नीतू भी है।
काफी देर तक नीतू उनदोनो का प्यार देखती रहती है।

जब बरदास्त नहीं होता तो।
धीरे से माँ ओ मा
तभी सरला को याद आता है
और नीतू को देखते हुए उसकी तरफ एक बाँह फ़ैला देती है और नीतू भाग कर उसके गले लग जाती है
और सरला अपने दोनों बच्चो को चुमने लगती है
अरून सरला की ऑंखों में देखता है जैसे पूछ रहा हो
नीतू।
सरला ऑंखों से इशारा करती है।
और अरुन सरला और नीतू को अपनी बाँहों में भर लेता है।
नीतु एकदम सिसक पड़ती है क्यों की पहली बार अरुन ने उसकी जवानी में पेहली बार इतनी कस कर भीचा था।
और सरला और नीतू को किस करते लगता है उनके चेहरे पर।
नीतू: आह पापा।
अरुण: नीतू को देखते हुए।
नीतू: ऐसे क्या देख रहे हो जब माँ से प्यार किया और शादी की तो मैं आप की बेटी हुई और उस हिसाब से आप मेरे पापा।
और आज आप की बेटी और बहन माँ के साथ आप को शेयर करना चाहती है और अपने माँ की सौतन बनना चाहती है।
सरला: नीतू के काँधे पे मारते हुए मेरी सौतन बनेगी।
नीतू: हाँ।
सरला: अरुन से , बना ले इसे भी अपनी रांड नो २ और फाड़ दे इसकी भी। कोई रहम कत करना इसपे, मेरी सौतन बनना इतना आसान नहीं है बुआ को देखा कैसे लंगड़ा कर चल रही थी तेरा भी यहि हाल होगा।
नीतू: नहीं होगा मेरे पापा मुझे धीरे से प्यार करेंगे
उन्हें पता है उनका बहुत बड़ा है और उनकी बेटी की चुत और गाण्ड छोटी सी है।
हैं ना पापा।
अरुण: हाँ बेटी मुझे पता है मेरी रानी बेटी अभी छोटी है
इसलिए पापा बेटी को बड़े प्यार से प्यार करेंगे।
नीतू: देखा माँ
पापा क्या बोल रहे है।
सरला: जानती हूँ बेटी ये ऐसे ही है सब की आराम से मारेंगे पर मेरी बेरहमी से ।
हैं ना जान।
अरुण: हाँ मेरी रांड नंबर १ ।
सरला: वो तो मैं हूँ।
अरुण: मुझे रांड नंबर २ भी तुम्हारी बजह से मिल रही है।
सरला: तो चले आप के रूम में रांड नंबर २ का उद्घाटन करने।
अरुण: चलो और दोनों सरला और नीतू को अपनी दोनों बाँहों मैं उठाता है और अपने रूम में आ जाता है।
सरला: देखा नीतू कितनी ताक़त है मेरे बेटे में।
अपनी दोनों रांडो को अपनी गोदी में उठा लाया।
नीतू ; देखा है माँ कितना बड़ा है बिलकुल लोहे की रोड की तरह।

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