माँ की अधूरी इच्छा – Update 120 | Incest Sex Story

माँ की अधूरी इच्छा - Seductive Incest Sex Story
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मुवी ख़तम होने के बाद।
सब अपने २ बेड पे।
प्रीति सुभाष और अरुन तीनो रूम में।
कपडे चेंज करते है।
सुभाष बाथरूम में।
अरुण: वो गिफ्ट दिया था वही पहन कर सोना।
प्रीति: ओके बाबा।
अरुण : जाओ दूध ले आओ।
प्रीति:अभी लाई।
कुछ देर बाद
सुभाष दूध पिते हुए
और प्रीति चेंज करने चली जाती है।
सुभाष अरुन से।
सुभाष: देख तेरी बुआ को ।रात के १२ बजे नहा रही है।
अरुण: हो सकता है गर्मी लग रही हो।
सुभाष: हाँ हो सकता है पर अपने घर में कभी नहीं नहाती इतना लेट।
तभी प्रीति बाथरूम से बाहर आ जाती है।
उसने नाइटी पहने हुई थी।
और ड्रेसिंग टेबल पे अपना मेकअप करते हुए
सुभाष कुछ बोलना चाहता है पर दूध पिने की बजह से नीन्द आ जाती है क्योंकी प्रीति ने अरुन से चुदने के लिए सुभाष के दूध में नीन्द की गोलियां मिला दी थी जो अरुन ने मेडिकल स्टोर से खरीद के दी थी।
प्रीति आवाज़ देते हुए ।
अरुण: डोंट वरी अब ये सुबह से पहले नहीं उठेंगे।
मेकअप ख़तम करने के बाद प्रीति बेड पर आती है और सुभाष से बात करते हुए।
उठ जाओ आप देखो नहीं तो तुम्हारा ये भतीजा तुम्हारी बीवी को तुम्हारे सामने चोद देगा। बचा लो मुझे इस से
प्लीज बचा लो।
अरुण: अब ये नहीं उठेंगे चलो आ जाओ अपने नए पति के पास।

प्रीति उठ कर अरुन के पास आती है।
प्रीति : तुम्हे शरम नहीं आएगी मुझे मेरे पति के सामने चोदते हुए।
नही मेरी जान और उठ कर बाथरूम चला जाता है और थोड़ी देर बाद नहा कर सिर्फ टॉवल में बाहर आता है।
प्रीति अरुन को देखते हुए
अपनी बाँहे फैला देती है।
और अरुन आ कर उसकी बाँहों में समां जाता है।
प्रीति: हम कुछ गलत तो नहीं कर रहे।
अरुण: अगर आप को गलत लग रहा है तो मैं चला जाता हूँ।
प्रीति: नहीं नहीं मैं तो पूछ रही थी।
अरुण; अब मत पूछना।
प्रीति: ओके नहीं पूछुँगी।
बाहर दो इंसान ऐसे थे जिन्हे नीन्द नहीं आ रही थी सरला और नीतू पर समझ नहीं पा रही थी की क्या करे।
अंदर।
बेड पे सुभाष लेटा था ।
प्रीति: अब भी टाइम है बचा लो अपनी बीवी को इस लड़के के चगुल से फिर काफी देर हो जायेगी।
पर सुभाष तो गहरी नींद में सो रहा था।
प्रीति: नहीं उठ रहे ये अरुन तुझे जो करना है कर ले मैं इनकी तरफ से परमिशन देती हू।
बना ले मुझे अपनी बीबी।
और अरुन प्रीति को बेड पे बैठा देता है।
और अपनी टॉवल उतार देता है।
पोसिशन प्रीति बेड पे अपनी टांगे लटका कर बैठी थी
और अरुन का लंड उस के मुह के सामने था ।
अरुण: लो चुसो इसे मेरी जान।
प्रीति की ऑंखें फटी की फटी रह जाती है
और कुछ आवाज़ नहीं निकलती।
अरुण: क्या हुआ सुरु करो।
प्रीति: ये क्या है।
अरुण: तुम्हारा होने वाला असली पति का लण्ड।
प्रीति: ये तो किसी डण्डे की तरह है।
अरुण: तो क्या हुआ मेरी जान चुसो इसे।
और प्रीति के दोनों हाथ पकड़ कर अपने लंड पे रख देता है।
प्रीति ड़रते हुए अरुन के लंड को पकड़ती है।
ये तो बहुत बड़ा है अरुन मैं नहीं ले पाऊँगी इसे और ड़रते २ उस पर हाथ फेरती है।
अरुण: कुछ नहीं होगा बहुत आराम से करुँगा।
अभी तुम पहले इसे चुसो जल्दी से।

और अरुन अपने लंड को प्रीति के गालो पे और मुह पे रगडने लगता है।
अरुण: जल्दी से मूँह खोलों ।
प्रीति थोड़ा सा मुह खोल देती है।
और अरुन के लिए इतना ही काफी था और अपने लंड का टोपा प्रीति के मुँह में पेल देता है।
और प्रीति टोपे को जीभ से चाटने लगती है।
अरुण: आह शाबाश ऐसे ही चाट।
हाहह और थोड़ा अंदर घुसा देता है।
प्रीति रुकने का इशारा करती है ।
और जितना मुँह में था उसे अंदर बाहर करती है।
अरुण: बहुत अच्छा बुआ आह ओह आह सी चुसो
ऐसे ही तुम एक्सपर्ट हो बुआ लण्ड चुसने में
और अपना लंड और घूसाने लगता है।
प्रीति उसे रुकने को बोलती है और
उतना ही चुसती है ।
अरुन प्रीति का एक हाथ अपने टट्टों पे रख देता है
और प्रीति उन्हें सहलाने लगती है।और अपनी स्पीड बढ़ा देती है।
अरुण: आह आ मौसी आह सी धीरे धीरे मेरी जान मजा आ रहा है तू तो एक्सपर्ट रंडी है।
प्रीति अरुन के मुह से ये सुन के रुक जाती है।
अरुण: क्या हुआ मेरी रांड मुँह क्यों रोक दिए चूस जल्दी २।
अभी तो बहुत कुछ करने है।
और प्रीति बिना कुछ बोले लंड चुसना फिर से शूरु कर देती है।
अरुण: आह ओह माँ आह सी प्रीति मेरी जान।
ऐसे ही चूस अपने नए खसम के लंड को।
आह ओह मज़ा आ रहा है।
अरून अपना और लंड घुसाने लगता है प्रीति रुकने का इशारा करती है।
अरुण: क्या हुआ मेरी रांड इसको पूरा नहीं ले पा रही
क्यूं फुफा का छोटा है क्या मेरे से ।
प्रीति हाँ में सर हिलाती है पर लंड को चुसती रहती है।
अरुण: अगर मेरे से मज़े लेने है तो पूरा लेना पडेगा।
प्रीति हाँ में सर हिला देती है।
अरुण: चल अभी इतना ही चूस फिर तेरी चुत की बारी और फिर गाण्ड की।
गाण्ड वाली बात पे प्रीति रुक जाती है।
अरुण: रुक नहीं तो और टाइम लगेगा चुसती रह।
और प्रीति चालु हो जाती है।

बाहर सरला और नीतू दोनों इतनी बैचन हो गई की उस वक़्त दोनों अरुन के रूम की खिड़की से झाँक रही थी
सरला और नीतू को बुरा तो लग रहा था पर मर्ज़ी तो सरला की थी तो ये सब तो सहना पडेगा।

अंदर।प्रीति का बुरा हाल था चूस चूस कर पर अरुन था की झड नहीं रहा था।
नीतु सरला से ।
माँ भाई तो झड नहीं रहा।
सरला: वो ऐसे नहीं झडेगा जब तक कोई उससे किसीकी बातें नहीं करेगा।
नीतू: फिर बुआ की तो हालत ख़राब हो जाएंगी।
सरला: हाँ तभी पता चलेगा उसे की पति से दूरी क्या होती है।
अरुण: आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ अअअअअअअ ुह्ह्हह्ह्ह्ह ऊऊऊऊह माआआआआ आआह्ह्ह्हह्ह सीईईई आआआ चुसू मेरी जान
क्या हुआ मेरी रांड को ।थक गई क्या
प्रीति हाँ में सर हिलाती है।
तो ठीक है अपनी बेटी को बुला ले वो चूस देगी ।
वो तो एक बच्चे की माँ है कुछ सिखाया है उसे या वो भी तेरे जैसी है।
प्रीति अरुन को घुरते हुए।
अरुण: घुर क्या रही है।
जलदी कर नहीं तो रहने दे ।मैं कोई और इन्तज़ाम करता हूँ।
प्रीति ना में सर हिलाती है।
और जोर जोर से चुसने लगती है।

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