माँ की अधूरी इच्छा – Update 118 | Incest Sex Story

माँ की अधूरी इच्छा - Seductive Incest Sex Story
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अरुण: पर यहाँ तो सब है।
सरला: वो मुझ पे छोड दे उसका मैं इन्तज़ाम कर दूंगी तू बस उसकी फाड़ देना जिससे की कल वो चल न पाये और जब तेरे पापा उससे पूछे क्या हुआ।
तो मैं देखना चाहती हूँ क्या जवाब देती है साली रंडी।

अरुन सरला की साडी उपर करते हुए।
सरला: क्या कर रहे हो जान।
अरुण: तुम्हारी चुत चाटने की तयारी।
सरला: अभी रहने दो जानू कोई भी आ सकती है।
अरुण: पर कल भी तुम प्यासी रह गई थी और आज भी।
सरला: कोई बात नहीं जब ये चलि जाये तो खूब मन भर के चुदवाऊँगी। फिर देखती हुँ कितना चोदोगे ।
अरुण: वादा याद नहीं है क्या जान।
अरुण: सब याद है तभी तो मना कर रही हु अभी मुझे पता है एक दिन आप को मिल जाये तो आप मेरी गाण्ड और चुत की बैंड बजा दोगे और चलने लायक भी नहीं छोडोगे।
और अरुन के लिप्स पे किस करती है।
सरला: बस एक बार प्रीति की फाड़ दो आप जैसे भी और चाल बिगाड दो ।अच्छा भला हनीमून चल रहा था आ गई पति से लड कर हमारा हनीमून ख़राब करने अब तुम इसकी चाल ख़राब कर दो।
तभी दरवाजा की बेल बजति है।
बाहर नीतू आई थी।
सरला और अरुन नीतू की आवाज़ सुन लेते है उनको ऐसा लगता है की जैसे नीतू बाहर दरवाजा पे हो और उनको देख रही हो।
सरला को तो पता था की नीतू सब देख रही होगी पर अरुन को पता नहीं था।
सरला से अरुण।
माँ रीतू गेट पे थी क्या।
सरला: शायद उसने सब देख लिया है अब तुझे उसे भी पटाना पड़ेगा नहीं तो हो सकता है तेरे पापा से बोल दे
मेरे और तेरी चुदाई के बारे में।
तभी नीतू की आवाज़ आती है ।
माँ ये आ गई।
सरला: रवि आ गया क्या शायद ।
अरुण: पर रवि के होते हुए नीतू की कैसे मारूँगा।
सरला: उसका भी मैं इन्तज़ाम कर दूंगी बस उसकी भी फाड़ देना ।
और बोल कर बाहर निकल जाती है।
थोड़ी देर में अरुन और प्रीति भी बाहर आ जाते है।
सरला किचन में सब के लिए चाय बनाने चली जाती है और नीतू भी पीछे २ पहुच जाती है।
सरला: दरवाजा से आवाज़ देना जरुरी था।
नीतू: क्या हुआ ।
सरला: अरुन को शक़ हो गया और मुझे उससे बोलना पड़ा की वो तुझे पटाकर तेरी फाड़ दे नहीं तो हो सकता है तू पापा से बोल दे।
नीतू: वो क्या बोले।
सरला: मौका मांग रहा था।
नीतू: बोली नहीं वो तो खोल कर लेटी है जा चढ जा।
सरला: बेशरम चुप कर उसे नहीं बताना की तुझे पता है हमारे बारे में नहीं तो ग़ुस्सा होगा की मैंने उससे नहीं बताया ।
बस इस तरह पेश आना जैसे कुछ नहीं जानती।

ओके माँ।
और दोनों बाहर आ जाती है चाय ले कर और सब मिलकर नास्ता करते है ।
तभी रवि कहता है की उसका काम हो गया है अब वो और नीतू घर जायेंगे पर प्रीति उन दोनो को रोक लेती है
और थोड़ी देर बाद रमेश भी आ जाता है।
और सब मिलकर बात करते है और हसी मज़ाक़ और खाने की तैयारी होती है ।
और आज प्रीति और नीतू अरुन को किसी और नज़र से देख रही थी।
जैसे कह रही हो आज नहीं छोडेंगे कच्चा खा जाएंगे
और अरुन समझ नहीं पा रहा था किस को लाइन दे किसको नही।
तभी दरवाजे पे बेल बजती है अरुन दरवाजा खोलता है
और सामने सुभाष खड़ा था।
यानी अरुन के फुफा जी और प्रीति के हसबैंड।
और उनको लेके अंदर आ जाता है।
प्रीति सुभाष को देख कर उसका मूड ख़राब हो जाता है।
कहाँ वो अरुन को पटाने की सोच रही थी और कहा उसका पति आ गया अब अरुन से कैसे चुदबायेगी।
वो सब मिलकर प्रीति को समझाते है की ग़ुस्सा छोड दे और घर चली जाये।
वैसे चलि भी जाती। अरुन नहीं होता तो पर अब उसे अरुन का लंड चाहिए था।
और वो उसके बिना नहीं जाना चाहती थी। इसलिए उसने सुभाष को रुकने के लिए राजी कर लिया।

रमेश अपने परिवार को देख कर खुश था पर उसे क्या पता था की उसके घर में बेटे ने उसकी जगह ले ली है और अब वो घर की सभी औरतो का मालिक अरुन है।
और उस घर की सभी औरतें उसके एक इशारा पे उसके निचे लेटने को तैयार हो रही है।
और यही हाल प्रीति का था उसने ठान लिया था की आज अरुन से चुदवा कर रहेगी।
तभी
प्रीति: अरुन अब आई हु तो सोच रही कुछ शॉपिंग कर लूँ। फिर ये आ गए है ले जाने के लिए।
सुभाष: मैं ले चलता हूँ।
प्रीति: नहीं आप रहने दो मैं अरुन के साथ उसकी बाइक पे चली जाऊँगी।

रमेश: हाँ बेटा जा बुआ को ले जा ।
प्रीति: अरुन मैं अभी तयार हो कर आई।
अरून सरला को देखता है ,और सरला उसको परमिशन दे देती है।
अरुण: बुआ रुको मुझे भी चेंज करना है।
और दोनों साथ साथ रूम में आते है ।
और अब अरुन अपनी माँ की आज्ञा का पालन करता है और वो ये की प्रीति की फाड़नी है ।
ओर उसका दिमाग तेजी से काम कर रहा था।
अरुण: बुआ साथ चलना है तो मेरी पसंद के कपडे पहनने पडेंगे।
प्रीति: तो इस में क्या प्रॉब्लम है बता।
अरुण: इतना आसान नहीं है मेरी पसंद के कपडे।
प्रीति: बोल तो सही ।
अरुण: मुझे ब्लैक कलर पसंद है।
प्रीति: हाँ मेरे पास है ब्लैक साडी ।
अरुण: खाली साडी से नहीं होगा।
प्रीति; है ब्लाउज और पेटीकोट भी है।
अरुण: उससे भी नहीं होगा।
प्रीति: अब क्या रह गया ।
अरुण: बोलू बुरा तो नहीं मानोगी।
प्रीति: अगर दोस्ती करनी है तो बुरा क्या मानना।
अरुण: तो मुझे सब कुछ ब्लैक चाहिये।
ब्लैक साडी , ब्लाऊज, पेटीकोट , ब्लैक ब्रा और ब्लैक पेंटी।
प्रीति: मतलब।
अरुण: सब कुछ साफ़ बोला है।
प्रीति: बेशरम अपनी बुआ से कोई ऐसे बोलता है।
अरुण: मैं तो ऐसे ही बोलता हु अब आप की मर्ज़ी गर्ल फ्रेंड बनना है तो जल्दी करो।
प्रीति: अगर मैं ब्लैक ब्रा पेंटी नहीं पहनी तो तुझे कैसे पता चलेगा।।
अरुण: टाइम आएगा तो चेक कर लुँगा और अगर नहीं पहनी तो दोस्ती खतम।
प्रीति: अरे अरे मेरा बेटा नाराज हो गया अपनी बुआ से जा बाहर वेट कर मैं चेंज करके आती हुँ।
और अरुन बाहर आ जाता है।

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