अरुण: ये हुई न बात मेरी पर्सनल रांड।
आज कॉलेज से आने के बाद तुम्हारी चुत लूँगा।
सरला: ओके मैं तैयार रहुंगी।
अरुण: पर बुआ और नीतू ।
सरला: आप उनकी चिंता मत करो मैं मैनेज कर लुंगी।
बस अब कस कर चोद देना मेरी चूत में भी खुजली हो रही है ।
अरुण: कहाँ चुत या गाण्ड में या दोनो में।
सरला: दोनों नहीं तीनो जगह बस आप आ जाओ।
और किस करके कॉल डिसकनेक्ट कर देती है।
नीतु वही किचन में खड़ी थी और सारी बात सुन रही थी।
नीतू: माँ आप न एकदम ।
सरला: क्या एकदम।
नीतू: सच में एक नंबर की।
सरला: क्या एक नंबर कि।
नीतू: वो वो जो पापा आप को बोलते है।
सरला: क्या रांड ।
नीतू: वो हां माँ।
सरला: बेशरम भाई बोलने दे जो बोलता है अब तू भी बोल रही है अपनी माँ को रांड तो सुन।
हा मैं एक नंबर की रांड हो अपने अरुन की और मुझे उसकी रंडी कहलाने में कोई शरम नहीं है।
और तुझे भी तो उसकी रांड बनने का शॉक चढा है।
नीतू: ऐसा नहीं है और आँख झुका लेती है।
सरला: मेरी आँखों मैं देख कर बोल। नहीं है अपने भाई की रांड बनने की इच्छा।
नीतू: हाँ हाँ बनूँगी मैं अपने भाई की रांड रखेल जो वो बोलेगा वो बनूँगी तुम्हे कोई प्रोब्लम।
सरला: मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं ।क्या तू उसका मुसल ले पायेगी ।
नीतू: जब आप ले सकती हो तो मैं क्यों नहीं शुरु में थोड़ी प्रॉब्लम होगी पर मेरा भाई मेरी आराम से लेंगा।
सरला: क्यों तू कोई राजकुमारी है।
मेरी तो वो बड़ी बेरहमी से लेता है और मुझे तो बड़े मज़े आते है।
नीतू: मैं भी अपने भाई को उसकी मर्ज़ी से दूंगी जैसे वो लेगा वैसे दूँगी।
बस आप एक बार सेटिंग करा दो।
सरला: हाँ रे बेशरम कैसे अपने भाई के लंड की दीवानी हो गई है पति यही पे है और इसे भाई का मूसल चाहिये।
नीतू: क्यों आप के पति नहीं है आप क्यों लेती हो बेटे का वो भी अपनी बेटी के सामने।
सरला: लुंगी क्या कर लेगी
नीतू ; मैं भी लुंगी ।
और दोनों हँस पड़ती है।
थोड़ी देर बाद
सरला: नीतू
नीतू: हाँ माँ।
सरला: तेरे पापा आने वाले है।
और तुझे पता है वो आज नहीं माननेवाले।
नीतू: फिर ।
सरला: कुछ कर न अपनी बुआ का।
नीतू : पर क्या करूं वो कही जाने वाली तो है नही।
सरला: कुछ तो सोच।
नीतू: माँ तुम कितनी बेशरम हो गई हो अपनी बेटी से
बोल रही हो मेरे चूदने का इन्तज़ाम करवा दे मेरे बेटे से।
सरला: प्लीज नीतू अभी मज़ाक़ नहीं अगर उन्हें मेरी चूत नहीं मिली तो वो ग़ुस्सा हो जाएंगे।
नीतू: ओके बाबा कुछ करती हूँ।
पर मेरा क्या होगा।
सरला: मतलब ।
नीतू: मेरा नंबर कब आयेगा।
सरला: पहले मेरी जुगाड़ लगा फिर मैं तेरा करती हूँ।
क्या समय आ गया है अपने पति का लंड लेने के लिए जुगाड़ लगवानी पड़ रही है।
और दोनों हँस पडते है।
तभी प्रीति आ जाती है।
किस बात पे हँस रहे हो दोनो।
नीतू;यही सोच रहे थे की अगर भाई आप को सेट कर लेता है तो क्या होगा।
प्रीति: पहले तो वो ऐसे करेगा नहीं और करेगा भी तो क्या हुआ बुआ हु थोड़ा तो उस की हेल्प कर सकती हुँ।
बेचारे की कोई गर्ल फ्रेंड नहीं है ।
मेरे साथ ही मन बहला लेगा थोड़ी बहुत मस्ती कर लेगा अपनी बुआ के साथ।
और तीनो हँसने लगते है।
प्रीति: वैसे कब आएगा हमारा लवर बॉय।
सरला: वो आने वाले है।
प्रीति: क्या बोली।
आने वाले है।
सरला: मतलब आप के होने वाले बॉय फ्रेंड को तो रेस्पेक्ट देनी पडेगी।
नीतू: आखिर हमारे फुफा जी जो है।
प्रीति: रुक अभी बड़ी आयी फुफा जी की बच्ची
और नीतू भाग जाती है और प्रीति भी उसके पिछे
और दोनों अरुन के रूम में।
प्रीति: बड़ी बदमाश हो गई है तो शादी के बाद।
नीतू: नहीं बुआ ऐसा नहीं है।
मै इसलिए बोल रही हूँ मेरे भाई का भला हो जायेगा आप जैसे गर्ल फ्रेंड को पा कर।
प्रीति: तो बन जाऊँ उसकी गर्ल फ्रेंड।
नीतू: मैं बन जाती पर वो मेरा भाई है और आप का भतीजा।
प्रीति: पर ये गलत है नीतू।
नीतु: ऐसा नहीं है बुआ किसी को पता नहीं चलेगा जब तक आप यहाँ हो तब तक बना लो। भाई का भी भला हो जायेगा और आप का भी टाइम पास हो जाएगा।
प्रीति: पर बोलूँगी क्या उससे।
नीतू: क्या बुआ आप इतनी समझदार हो आप को क्या समझाना ।
प्रीति: चल आने दे उसे जितना हो सकता है हेल्प कर दूंगी उसकी।
नीतु मन ही मन एक बार अरुन के निचे आ गई न फिर पता चलेगा की तुम उसकी हेल्प करोगी या वो तुझे भी रांड बना के चोद देगा फिर उसके पीछे २ अपनी चुत और गाण्ड लेके घुमति रहना और वो तुम्हे अपने पीछे पीछे घूमाता रहेगा।
नीतु प्रीति से
आप यहाँ अराम कर लो अरुन आएगा तो। बता दुँगी।
प्रीति: चलती हूँ उसी के रूम मैं वेट करती ही तेरे फुफाजी का और हँस देती है।
नीतू: अच्छा जी फुफा जी ।
प्रीति: हाँ जब बॉय फ्रेंड बनाना है तो तेरे फुफाजी हुए ना।
और नीतू बाहर आ जाती है और प्रीति अरुन के बेड पे लेट जाती है।
और सोचती है अरुन कितना हॅंडसम है काश ये मेरा पति होता।
चलो बॉय फ्रेंड बना कर ही मज़े लेती हु उनके बस का तो कुछ है नहीं ५० साल के हो गये है अब तो उनका खड़ा भी नहीं होता।
कितने साल हो गये चुत में लुंड लिए हुए और
सोचते २ सो जाती है।
बाहर नीतू आकर सरला को प्लान समझाती है।
और दोनों अरुन के आने का वेट करते है।
अपने टाइम पे अरुन गेट पे
नीतू: माँ पापा आ गये आप जाओ अपने रूम में और सरला चलि जाती है।
और नीतू गेट खोलती है ।
अरुन नीतू से नज़र नहीं मिलाता।
माँ कहा है।
नीतू : आप के रूम में।
अरून सीधे अपने रूम में आ जाता है।
और रूम की लाइट ऑफ़ थी इसलिए वो ये नहीं देख पता बेड पे सरला है या प्रीति है।
और यही प्लान था नीतू और सरला का।
और अरुन धीरे से बेड के पास जाता है और प्रीति के पीछे लेट जाता है और अपना हाथ से प्रीति के मम्मे मसलने लगता है ।
मम्मे मसलने की बजह से प्रीति की आँख खुल जाती है।
पर प्रीति कुछ बोलति नहीं है।
तभी अरुन को एहसास होता है ये सरला नहीं है
और वो पीछे है जाता है।
अरुन के रुकने की बजह से प्रीति भी परेशान हो जाती है इसे क्या हुआ।
अरून बेड से उठता है तब प्रीति अरुन को आवाज़ देती है।
प्रीति: अरुन ।
अरुण कुछ नहीं बोलता।
प्रीति: अरुन क्या हुआ।
अरुण: कुछ नहीं बुआ।
प्रीति: ये क्या कर रहे थे।
अरुण: वो सॉरी बुआ मैं वो ।
प्रीति:मैं वो क्या तू किसी का वेट कर रहे थे।
अरुण: नहीं ऐसी बात नहीं है।
प्रीति: तो जो तुम ने शुरु किया उसे रोक क्यों दिया।
अरुण: वो मुझसे गलती हो गई।
प्रीति: मैंने कहा क्या की गलती हो गई
अरुण: पर आप मेरी बुआ हो।
प्रीति: मैंने कुछ कहा क्या ।
और अरुन के सर को पकड़ कर अपनी ओर खींचती है और अपने होठ अरुन के होंठो पे रख देती है।
और किस करने लगती है।
और बाहर सरला और नीतू सब देख रही थी।
सरला को पूरा यकीन था की उसका पति उसे धोखा नहीं देगा पर ये सब को देख कर सरला का ट्रस्ट हिलने लगता है और सोचती है जैसे प्रीति ने रमेश को उससे शुरु में अलग किया था अब उसके बेटे को भी छीन लेगी।
और उसकी आँखों में ऑंसू आ जाते है।
नीतू: सरला को देख कर- माँ क्या आप को भाई पे यकीं नहीं है।
सरला: है पर अपनी किस्मत पे नहीं ।
नीतू: पर माँ आप तो यही चाहती थी
सरला: चाहती थी पर अपने तरीके से ना की प्रीति की मर्ज़ी से।

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