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सरिता अब खुद घोड़ी बन कर चुदवा रही थी। उसका पति एक कोने में बेहोश पड़ा था। एक ने उसके बाल पकड़ रखे थे और उसके मुंह में धक्के लगा रहा था। दूसरा उसकी कमर पकड़ कर चूत में धक्के मार रहा था। सरिता अब खुद पूरा जोर लगा रही थी। वो अपनी हालत अपने पति जैसी नही करवाना चाहती थी। बाकी दोनों जमीन पर बैठे सुस्ता रहे थे। चारों थक चुके थे। आधी रात बीत चुकी थी। थोड़ी देर में दोनो सरिता के मुंह और चूत में झड़ गए। सरिता निढाल होके उसी खाट पर फेल गई। पर इतने में तीसरा आया और फिर से सरिता को घोड़ी बना लिया। और लन्ड उसकी चूत में धकेल दिया। सरिता थक कर चूर हो रखी थी पर फिर भी किसी तरह घोड़ी बनी हुई थी। तभी चौथा उठा। उसने दीवार के एक कोने से फोन उठाया जिसमे वीडियो कॉल चल रही थी। “बोलो साहब इतना काफी है या कुछ और भी करना है?” उसने फोन में बोला।
“अपना काम निपटा के दोनो को खत्म कर दो। तुम्हारी जमानत का इंतजाम हो जायेगा” फोन से आवाज आई।
ईतना सुनते ही सरिता के कान खड़े हो गए। वो अचानक तीसरे वाले से खुद को छुड़वा कर बैठ गई। और फोन की तरफ हाथ जोड़ कर बैठ गई। “साहब भगवान के लिए बक्श दो। हमसे गलती हो गई। आप जो बोलेंगे वो करेंगे। भगवान के लिए हमे जान से मत मारो।” सरिता जोर जोर से रोने लगी।
“अपना काम निपटाओ। अभी इसे मत मारना। बताता हु।” फोन से आवाज आई। पहलवान ने वापस फोन दीवार पे रखा जहा से दूसरे इंसान को सब दिख रहा था। वापिस आकर उसने सरिता को फिर बालो से पकड़ा और खाट पे लेट गया और उसे अपने ऊपर खींच लिया। सरिता समझ गई। उसने खुद लन्ड अपनी चूत में डाला और ऊपर नीचे होने लगी। सरिता बहुत घबराई हुई थी। ऊपर नीचे होते हुए बोली। “प्लीज हमको मत मारो। हम सब करेंगे।”
“पक्का सब करेगी न।?”
“हां।” और पूरे जोर से ऊपर नीचे होने लगी। सरिता एक बार फिर झड़ी। अब वो सह नही पाई और कैदी की छाती पर लुढ़क गई। लन्ड अभी भी उसके अंदर था। पीछे से उसके फैले हुए चूतड अलग ही नजारा दे रहे थे।

बाबा ने किंजल के मुंह से अपना लन्ड निकाला और उसे अपने लन्ड पे बिठा लिया। किंजल ने अब आराम से लन्ड अन्दर ले लिया। वो पूरी गीली थी। लन्ड फचक से अंदर चला गया। बिट्टू की जीभ से किंजल कई बार झड़ चुकी थी। किंजल अब लन्ड पे ऊपर नीचे होने लगी। किंजल को अब इस बूढ़े से चुदाने में मजा आ रहा था। दूसरा वो चाहती थी की किसी तरह ये सब खतम हो और वो वापिस जाए।
किंजल अब बाबा की छाती पे वजन डाल के फटाफट ऊपर नीचे हो रही थी। बिचारी कमसिन चूत हर 2 मिनट में झड़ रही थी। पर वो लगी रही। बाबा नीचे लेटा उसके चूचे मसल रहा था। 6 – 7 बार झड़ने के बाद किंजल की हिम्मत जवाब दे गई। अब उस से हिला नही जा रहा था। अब किंजल रुक गई और जोर जोर से सांस लेने लगी। बाबा का लन्ड अभी भी खड़ा था। बाबा ने किंजल को कमर से पकड़ा और घुमा के अपने नीचे ले लिया। और दनादन पेलना शुरू किया। किंजल इतनी स्पीड सह नही पा रही थी। उसके पेट में दर्द शुरू हो गया। लेकिन उसके दर्द में बाबा को मजा आ रहा था। कुछ देर चोद के बाबा ने किंजल की चूत से अपना लन्ड निकाला। किंजल को कुछ सांस आया। और हांफने लगी। उसकी चूत पूरी फैली हुई थी। मानो चूत भी सांस ले रही हो।

सिन्हा सोनिया की गांड में उंगली कर रहा था। और साथ में सोनिया चूतड ऊपर नीचे कर अपनी चूत से उसके लन्ड को चोद रही थी। सिन्हा को अब सोनिया को चोदने में मजा आ रहा था। उसने धक्का देकर सोनिया को अपने ऊपर से उतारा और उठ कर बैठ गया। और उंगली के इशारे से सोनिया को फिर अपने पास बुलाया। सोनिया पास आकर सिन्हा की गोद में बैठ गई और दोनो टांगे उसकी कमर पर लपेट ली। लन्ड अब फिर सोनिया की चूत में था। सोनिया के कस कर सिन्हा के गले में बाहें डाली और आगे पीछे होने लगी। दोनो के होंठ एक दूसरे को खा रहे थे। अब सिन्हा अपने लन्ड पर सोनिया की कसी हुई चूत और अपनी जांघो पर बार टकराते उसके चूतड़ों की थाप से नही पाया और सारी पिचकारी सोनिया की चूत में छोड़ दी। और पीछे की तरफ लुढ़क गया।

सरिता उस पहलवान की छाती पर सर रख हान्फ ही रही थी की उसे उसके चूतड़ों पर किसी के हाथ महसूस हुए। जैसे कोई उसके चूतड फेला रहा हो। उसने झट से हरकत कर पीछे मुड़ के देख तो पहले वाला केदी उसके गांड़ के छेद पर लन्ड टीका रहा था। वो उठने ही लगी थी घबरा कर की नीचे वाले पहलवान ने उसकी पीठ पर बाहें लपेट कर उसे वापिस अपनी छाती से कस लिया। सरिता डर के मारे छटपटाने लगी। उसे समझ आ गया था क्या होने वाला है। “ऐसा मत करो। बहुत दर्द होगा। प्लीज नही।” सरिता छटपटाते हुए रोते हुए गिड़गिड़ाई।
“अभी तो बोल रही थी सब करेगी। नही होता तो ठीक है। हम अपना काम करते है।” सरिता चुप हो गई। पर अभी भी छटपटा रही थी। पीछे वाले पहलवान ने उसकी पिंडलियों पर घुटने रख दिए। सरिता दर्द से चिल्लाई। नीचे वाले का लन्ड उसकी चूत में जड़ तक समाया हुआ था। पीछे वाले ने टोपा अंदर घुसाया। ऐसे तो सरिता की गांड़ उसकी हत्थे की चूदाई से खुल गई थी। पर इन सबसे लन्ड हत्थे जितने ही थे। जेसे जैसे लन्ड अन्दर जा रहा था सरिता की चीख गूंज रही थी। जब लन्ड गांड़ में पूरा चला ज्ञाबतो नीचे वाले ने भी कमर ऊपर नीचे कर लन्ड में हरकत शुरू की। एक साथ दोनो तरफ होती हरकत में सरिता दर्द से पागल हो रहीं थी। पर दर्द में भी एक मजा आ रहा था। अब दोनो लन्ड दोनो छेदों में आराम से अंदर बाहर हो रहे थे। अब सरिता को दर्द कम था। मजा भी आने लगा। एक साथ दोनो छेदों में घिसाई से चूत बार बार झड़ने लगी। दोनो छेदों में लन्ड होने से चूत और गंद दोनो टाइट थी। दोनो पहलवान इतनी टाइट छेद को झेल नही पाए और सरिता के दोनो छेदों को अपने माल़ से भर दिया। और हांफने लगे। सरिता अब बेहोशी जेसी हालत में थी। वही लुढ़क गई। गांड़ और चूत दोनो जगह से वीर्य बह रहा था।

बाबा ने खींच कर किंजल को घोड़ी बनाया और लन्ड एक झटके में चूत में पेल दिया। अब बाबा भि ठक चुका था और नशा सर पर था। वो जल्दी सब निपटने के मूड में था।लन्ड सीधा बच्चे दानी से टकराया। किंजल को चीख निकली। अभी दर्द से उबरने को थी की उसे सरिता की चीखें सुनाई देने लगी। जिसे सुन कर वो घबरा गई। इधर बाबा ने दनादन धक्के लगाने शुरू कर दिए। हर धक्के में किंजल आगे को खिसक जाती। बाबा ने कस कर उसकी कमर को पकड़ा और गहराई तक धक्के लगाता जा रहा था। किंजल की सिसकियां अब चीखों में बदल गई। 5 मिनट और धक्के लगा कर बाबा ने अचानक अपना लन्ड बाहर निकल लिया और किंजल को बालो से पकड़ा और अपने लन्ड को किंजल के मुंह में डाल दिया। किंजल अचानक इस धक्के को समझ नही पाई। उसकी चूत के रस से लिबड़ा हुआ लन्ड अब उसके मुंह में था। किंजल को उबकाई आने लगी लेकिन बाबा ने मुंह में धक्के लगाने जारी रखे। अचानक बाबा ने लन्ड उसके गले तक ठूंस दिया। आधा लन्ड अभी भी किंजल के छोटे से मुंह से बाहर था। बाबा की टांगे कांपने लगी और उसके अंडकोष खाली होने लगे। सारा वीर्य किंजल के गले में उतरने लगा। किंजल की आंखे बाहर आने लगी। उसकी सांस रुक गईं थी। बाबा 30 सेकंड तक इस ही रहा। किंजल को लगा वो अभी मर जायेगी। तभी बाबा ने लन्ड बाहर निकाल लिया। किंजल ने जोर को सांस ली और उसे उल्टी आने लगी। उसने पास में सारा वीर्य और खाना वापिस उलट दिया। किंजल को चक्कर आने लगे और वही बेहोश होकर गिर गई।

सोनिया बाथरूम में गई। खुद को साफ किया। और वापिस सिन्हा के पास आई। सिन्हा अभी भी बेड पर टेक लगा कर नंगा बैठा था। टांगे फैला रखी थी। नशा अब उसके सर पर चढ़ा हुआ था। सोनिया ने पास आकर उसके लन्ड को सहलाना शुरू किया। सिन्हा ने उसका हाथ पकड़ लिया और हटाते हुए बोला। “बस अब। अपने कपड़े उठा और जा यहां से। मुझे नींद आ रहीं है। बाहर मेरे गार्ड को भी खुश कर देना। मेरा खास आदमी है।” सिन्हा ने आंखे बंद में बोला और सोनिया को झटक दिया। सोनिया की आंखों में आसूं आ गए। ऐसा लगा की वो कोई सड़कछाप रण्डी हो। सोनिया बाहर ड्राइंग रूम में आ गई जहा उसके कपड़े रखे थे। उसने कपड़े उठाए ही थे कि बाहर का दरवाजा खुला और गार्ड अंदर आया।
“साहब किधर है?” उसने अंदर आते ही पूछा।
“अंदर हैं। सो गए।” सोनिया खुद को कपड़ों से छुपाते हुए बोला। गार्ड उसके नंगे शरीर को ऊपर से नीचे देखने लगा। जिसे छुपाने की नाकाम सी कोशिश सोनिया कर रही थी। गार्ड पास आया। सोनिया के हाथ कांपने लगे। उसे गार्ड की आंखों में वहशीपन दिख रहा था। अगर सिन्हा ने ना बोला होता तो सोनिया उसका पूरा विरोध करती। गार्ड भी समझ गया कि साहब ने पहले की तरह ये चिड़िया भी उसकी झोली में डाल दी है।
मदन(गार्ड) सोनिया की तरफ बढ़ने लगा। सोनिया के हाथ कांप रहे थे। हाथ में पकड़े कपड़ों को उसने कस के सीने से लगा लिया। मदन सोनिया के इतना पास आ गया कि सोनिया की सांसों को भी महसूस कर पा रहा था।

एक पहलवान उठा और फोन पकड़ लिया। “साहब क्या करना है?”
“ऐ सरिता। रघु तो कल का सूरज नही देखने वाला। तेरा क्या खयाल है अब?” फोन से आवाज आई।
“साहब, माफ कर दो साहब। आप जो बोलोगे वो करूंगी। बस इस बार छोड़ दो।” सरिता हाथ जोड़ फोन की तरफ देखते हुए गिड़गिड़ाई।
“तो एक काम कर। रघु को परलोक तू भेज दे। तुझे माफ कर देंगें।”
“जी??” सरिता सहम गई । उसे समझ आ गया था फोन पर क्या बोला है।
“समझ नही आया तो तुम दोनो को भेज देते है। जल्दी कर।” फोन से फिर आवाज आई।
सरिता खड़ी हुई। हाथ जोड़ फोन की तरफ देखती रही। दिमाग सुन्न हो गया था। पहलवान ने बालो से पकड़ लिया। “सुना नही क्या साहब ने क्या बोला। “
उसने दूसरा हाथ सरिता की गर्दन पर दबा दिया। सरिता ने झट से हां में गर्दन हिलाई। पहलवान ने उसे बालो से पकड़ रघु के ऊपर धकेल दिया। सरिता बेहोश रघु के ऊपर गिरी। रघु के शरीर में कोई हलचल नहीं थी। उसने रोते हुए चारों की तरफ देखा। चारों उसे ही घूर रहे थे। उसने रघु का सर अपनी गोद में रखा। फिर अपनी बाजू को पीछे से उसके गले में डाल के दबाना शुरू किया। रघु को सांस रुकने लगी। बेहोशी में उसका शरीर छटपटाने लगा। हाथ पैर सलामत नही थे। कुछ कर नही सकता था। छटपटाहट में उसकी बेहोशी टूटने लगी। आधे मिनट के बाद चेहरा लाल होने लगा। आंखे लाल होकर बाहर आने लगी। सरिता रोए जा रही थी। अगले 1 मिनट में रघु का शरीर शांत हो गया। सरिता ने पकड़ ढीली की और वही उसके ऊपर सर रख रोने लगी। पहलवान पास आया। उसने रघु की सांस और नब्ज चेक की और दूसरे कैदी को इशारा किया।
“साहब काम हो गया।” उसने फोन पर कहा। और फोन काट दिया।
दो जनों ने सरिता को दोनो बाजुओं से पकड़ा और घसीट कर बाहर ले जाने लगे। सरिता आखरी बार भीगी आंखों से रघु की लाश को देख रही थी।

इधर बिट्टू बेहोश किंजल पर पानी के छींटे मार रहा था। उसने किंजल को उठाया और उसे कपड़े पहनाने लगा। किंजल किसी तरह खड़ी हुई। उसकी टांगे कांप रही थी। उसने देखा बाबा बिस्तर पर नंगा लुढ़का पड़ा था। उसका मोटा पेट बाहर निकला हुआ था और खर्राटे मार रहा था। कुछ देर पहले किंजल उसके नीचे थी। किंजल को खुद पे घिन आ रही थी की कैसे इस बूढ़े ने बेचारी फूल जैसी किंजल को रगड़ा था। पर किंजल को नही पता था कि ये तो सिर्फ शुरुआत है। किंजल लंगड़ा कर चल रही थी। किसी तरह वो दर्द से कराहती दरवाजे से बाहर निकली। सामने सरिता को नंगा ही गाड़ी में बिठा रहे थे। महिला गार्ड सरिता को जिंदा देख हैरान थी। उसे बताया गया था कि सरिता जिंदा वापिस नही आयेगी। किंजल धीरे धीरे चलते हुए गाड़ी के पास पहुंची। किंजल पिछली सीट पर बैठ गई। सरिता शून्य सी नंगी ही सबसे पीछे की सीट पर बैठी थी। अंधेरे में काले रंग की वजह से ठीक से दिखाई भी नही दे रही थी। छोटी मोटी चोरी तक तो ठीक था। पर किसी की जान लेना उसके लिए नया था। वो भी उसका खुद का पति। गाड़ी चल पड़ी। और गेस्ट हाउस के बाहर रुक गई।

अंदर गाड़ी की लाइट देख मदन ने अपना लन्ड सोनिया के मुंह से बाहर निकाला और सोनिया को घुटनों से खड़ा कर सोफे पे झुका दिया। और पीछे से उसकी चूत में लन्ड डाल दिया। सोनिया जो कुछ देर पहले उचक ऊचक कर चुदवा रही थी अब किसी रोबोट की तरह चुद रही थी। 10 मिनट धक्के लगा कर मदन सोनिया की चूत में झड़ गया। मदन ने सोनिया के टी शर्ट से अपना लन्ड साफ किया । “चल जल्दी से कपड़े पहन। तेरी गाड़ी आ गई।” मदन बेल्ट बांधता हुआ बोला। सोनिया ने फटाफट ब्रा पहनी और टी शर्ट पहनी। टी शर्ट मदन के वीर्य से चिपचिपी हो रखी थी। बदबू आ रही थी। किसी तरह सोनिया ने टी शर्ट पहन ली। जैसे ही सोनिया ने पैंटी उठाई, मदन ने उसके हाथ से छीन ली। सोनिया ने उसकी तरफ देखा। तो मदन पैंटी सूंघता हुआ बोला। “जानेमन अपनी चुदायी की एक निशानी तो छोड़ जा।”
सोनिया ने पजामा उठाया और ऐसे ही पहन लिया। मदन ने दरवाजा खोला और सोनिया फटाफट जाके गाड़ी में बैठ गई। गाड़ी में देखा तो पीछे सरिता बिना कपड़ों के खोई हुई थी। और किंजल बेसुध खिड़की से सर लगा कर बैठी थी। सोनिया को बेचारी किंजल पर तरस आया। उसके लिए पहली बार था। उसने किंजल का हाथ पकड़ लिया। सुबह के 3:30 बज चुके थे। गाड़ी धीरे
धीरे गेट की तरफ बढ़ने लगी।

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