सूरज की आंखे खुली और वो नहाकर आ रहा और उसके बाद दोनो ने साथ में नाश्ता किया और सूरज बोला:”
” मम्मी आज मैं भी आपके साथ ऑफिस चलूंगा।
सुलिप्सा उसकी बात सुनकर खुश हुई और बोली:”
” ठीक हैं ये तो अच्छी बात है। मुझे खुशी हुई कि तुमने काम पर ध्यान देना शुरू कर दिया।
उसके बाद दोनो ऑफिस में पहुंच गए और सुलिप्सा उसे काम के बारे में समझाती रही। पुरे दिन सिर्फ काम ही काम रहा और दोनो ने ही एक दूसरे के करीब आने की कोई कोशिश नही करी और शाम को जब ऑफिस से निकलने का समय हुआ तो एक जरूरी मीटिंग हुई क्योंकि कुछ कस्टमर थे जो बिना किसी भी प्लान के आ गए थे और उनका ऑर्डर इतना बड़ा था कि सुलिप्सा खुशी खुशी रुक गई।
मीटिंग करीब रात को आठ बजे तक चली और सुलिप्सा को का आज ही करीब दस बजे रात को दुबई जाना तय हुआ। सूरज को बड़ी निराशा हुई क्योंकि वो नही जा पा रहा था।
सुलिप्सा भी अकेली नही जाना चाहती थी लेकिन चाह कर मजबूर थी और सूरज से बोली:”
” बेटा तुम दिल छोटा मत करो, दो दिन की सिर्फ बात है उसके बाद मैं आ जाऊंगी।
सूरज:” लेकिन मम्मी मेरा दिल नही लगेगा आपके बिना।
सुलिप्सा:” बस ये दो दिन निकाल लो किसी तरह, उसके बाद कभी तुमसे दूर नही जाऊंगी। इतना बड़ा ऑर्डर है कि पूरी जिंदगी की काम करने की जरूरत नही पड़ेगी हमे।
सूरज ने अपनी मां को स्माइल दी और सुलिप्सा उड़ चली दुबई। मन तो उसका भी नही था लेकिन कोई उपाय नहीं था उसके पास।
सूरज शाम को घर आ गया और उसका बिलकुल भी मन नही लग रहा था। खाना वो बाहर ही खा आया था और थोड़ी देर के बाद सो गया। अगले दिन उसकी फोन की घंटी की आवाज से नींद खुली और बात की तो पता चला उसकी मां सुलिप्सा थी तो उसकी खुशी का ठिकाना न रहा।
सूरज:” कैसी हो मम्मी ?
सुलिप्सा:” ठीक हु बेटा, तुम बताओ रात अच्छे से सोए ना ?
सूरज:” हान नींद आ गई थी बस अब ऑफिस के लिए जाऊंगा।
सुलिप्सा:” देख ले मन करे तो चले जाना नही तो घर ही आराम कर लेना तुम।
सूरज:” नही मम्मी, आप भी नही हो तो मेरा जाना बेहद जरूरी हो जाता हैं फिर तो।
सुलिप्सा:” अच्छा ये तो अच्छी बात है। मतलब तुम अब जिम्मेदार बन गए हो एकदम। तुम तैयार हो जाओ। शाम को बात करती हू।
सुलिप्सा ने फोन काट दिया और शाम शाम को दोनो की बात हुई और अगले दिन सुलिप्सा को वापिस आना था। लेकिन किसी कारणवश उसका काम बढ़ गया और वो एक हफ्ते बाद ही आ सकती थी तो उसने रात को सूरज को फोन किया।
सुलिप्सा:” क्या कर रहे हों सूरज तुम?
सूरज:” कुछ नही मम्मी। बस आज मैं खुश हू कि कल आप वापिस आ जायेगी।
सुलिप्सा ने उसे सारी बात बताई तो उसका मूड खराब हो गया और बोला:”
” मम्मी ये क्या बात हुई भला? आपको तो कल आना था न, मेरा बिलकुल भी नही मन लग रहा आपके बिना।
सुलिप्सा:” बेटा बस ये दिन किसी तरह निकाल लो। मन तो मेरा भी नही लग रहा है। तेरी बहुत याद आती हैं मुझे।लेकिन मजबूरी है।
सूरज:” मजबूरी समझता हू मां लेकिन इस दिल का क्या करू अपने ?
सुलिप्सा:” दिल को समझाओ और इंतजार करो मेरा तुम। मन बहलाने के लिए दारू पी लेना तुम मेरी तरफ से तुम्हे पूरी छूट है।
सूरज:” नही मम्मी, आपके बिना अब कभी नहीं पियूंगा। आप आयेगी तब भी पियूंगा अब।
सुलिप्सा उसका मन बहलाने के लिए मजाक करती हुई बोली:”
” अच्छा जी और फिर तुम बहक जाते हो तो कुछ भी बोल देते हो ।
सूरज भी जैसे तैयार ही बैठा था ये सब बात करने के लिए तो तपाक से बोला:”
” मम्मी अब गलत तो कुछ नही बोलता, सच ही तो बोलता हूं सब कुछ,।
सुलिप्सा:” अच्छा जी, तो सच सिर्फ दारू पीकर बोलते हो और बाकी बिना दारू के सब झूठ।
सूरज:” बात क्या हैं कि दारू पीकर थोड़ी हिम्मत मिल जाती है और शर्म भी लगती।
सुलिप्सा उसकी बात सुनकर हंस पड़ी और बोली:”
” अच्छा तभी तो पूरे बेशर्म बन जाते हो और मेरे लिप्स के बारे में क्या क्या बोलते हो तुम !!
सूरज ने आंखे बंद ली और उसकी आंखो के आगे सुलिप्सा के लिप्स आ गए तो बोला:”
” सच में मम्मी आपके लिप्स बेहद खूबसूरत हैं, एकदम रसीले लिप्स में मेरी मम्मी सुलिप्सा के बिलकुल चूसने लायक, होंठो में भरकर पूरा रस निचोड़ने लायक, दबा दबा कर चूसने लायक।
सुलिप्सा का दिल उसकी बात सुनकर जोर से धड़क उठा और बोली:”
” अच्छा सुनो ना मुझे अब काम होगा, बाद में बात करती हू।
सूरज:” क्या मम्मी आप तो डर ही गई। अच्छा चलो आप कर लो काम।
सुलिप्सा:” डर और तुझसे भला, बच्चे हो तुम मेरे सामने। घर आकर तेरी अच्छे से खबर लूंगी इस बार।
सूरज:” सोच लो मैं अब बच्चा नही रहा बल्कि जवान मर्द बन गया हु। कहीं आपको बाद में पछताना न पड़े।
सुलिप्सा उसकी बात सुनकर हंस पड़ी और बोली:” अच्छा ठीक हैं जवान मर्द जी, अब फोन रखो क्या फोन पर ही अपनी सारी मर्दानगी दिखाओगे।
इतना कहकर सुलिप्सा ने हंसकर फोन काट दिया और सूरज के आराम से बेड पर लेट कर सोने की कोशिश करने लगा लेकिन उसे नींद नही आ रही थी क्योंकि अपनी मम्मी की बात सुनकर उसका लंड अकड़ रहा था लेकिन उसने अपने ऊपर संयम रखा और जैसे तैसे नींद के आगोश में चला गया।
धीरे धीरे दिन निकलते रहे और सूरज और सुलिप्सा रोज फोन पर बात करते रहे और हंसी मजाक चलता रहा। अंततः एक हफ्ता निकल गया और आज सुलिप्सा को वापिस आना था तो सूरज बेहद खुश था और उसके तन बदन में उत्तेजना सी दौड़ गई थी।
शाम को करीब 9 बजे उसकी फ्लाइट आई और सूरज अपनी मम्मी से लिपट गया और सुलिप्सा भी उसके बिना तड़प रही थी वो उसने भी अपने बेटे को अपनी बांहों में कस लिया और उसके बाद दोनो ने घर की तरफ चल पड़े।
सुलिप्सा नहाकर आ गई और बिलकुल फूल की तरह ताजी खिली हुई लग रही थी और उसने आज रात फिर अच्छे से मेक अप किया मानो किसी पार्टी में जाना हो। उसने आज एक नई लाल रंग की ड्रेस पहनी जो वो दुबई से लेकर आई थी और उस ड्रेस में उसका शरीर बेहद अच्छे से झलक रहा था। सुलिप्सा की चुचियों की गोलाई करीब दो इंच झलक रही थी और सूरज उसे देखकर बेहद खुश हुआ और बोला:”.
” वाव मम्मी, आप बेहद खूबसूरत लग रही है, कहीं पार्टी में जाना है क्या आपको ?
सुलिप्सा:” क्यों घर में अच्छे कपड़े नही पहन सकते क्या ?
सूरज:” नही मम्मी मेरा मतलब नही था, आप रोज पहना कीजिए ना बेहद अच्छी लग रही है आप।
सुलिप्सा;” ये ड्रेस में दुबई से लाई हु। और बताओ क्या क्या किया मेरे बाद तुमने ?
सूरज:” बस कुछ खास नहीं, आपको याद करता था और ठीक से नींद भी नही आती थी मुझे।
सुलिप्सा:” क्यों भला तुम्हे बोला तो था कि आराम से दारू पीकर सो जाया करो।
सूरज:” नही मम्मी, मन ही नही किया अकेले पीने का, अच्छा नही लगता आपके बिना, जब तक आप अपने हाथ से नही पिलाती मन नही करता पीने के लिए मेरा।
सुलिप्सा:” अच्छा चलो अब फिकर मत करो, मैं आ गई हु ना आज।।
सूरज इतना सुनते ही बिना कुछ बोले सीधे कमरे में गया और बॉटल लेकर आया और टेबल पर रख दिया और बोला:”
” मम्मी आओ फिर हो जाए एक एक पैग।
सुलिप्सा अदा से इठलाती हुई उठी और दारू की बॉटल से पैग बनाने लगी और फिर सोफे पर सूरज के पास ही बैठ गई और उसके ग्लास से अपना ग्लास टकराया और दोनो ने एक दूसरे को देखते हुए घूंट भरी और सूरज ने एक सांस में पैग खाली कर दिया और बोला:”
” मम्मी आपके हाथ से पीने में मजा हैं, अपने हाथ से पिलाओ न आप मुझे।
सुलिप्सा उसकी तरफ झुक गई उसकी चूचियां थोड़ी और ज्यादा गोलाकार होकर बाहर को उभर गई और उसने अपने ग्लास उसके मुंह से लगा दिया तो सूरज ने उसकी आंखों में देखते हुए एक घूंट भरा और फिर उसकी चूचियां देखते हुए बोला:”
” मम्मी आपके होंठो से छूने के बाद दारू का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है।
सुलिप्सा ने अपने लिप्स पर जीभ फिराई और उसकी तरफ सरक कर बिलकुल उससे सटते हुए बोली:”
” अच्छा जी ऐसा क्यों भला?
सूरज:” क्योंकि आपके रसीले होंठों का रस जो घुल जाता हैं इसमें मेरी सेक्सी मम्मी।
सुलिप्सा को भी हल्की हल्की चढ़ गई थी और उसे अपने बेटे के मुंह से सेक्सी सुनकर मजा आया और उसकी जांघ पर हाथ रखकर बोली:”
” तुम जब देखो मेरे होंठो के पीछे पड़े रहते हो। ऐसा क्या है मेरे होंठो में सूरज ?
सूरज ने अपना हाथ उसके कंधे पर रखा और उसके करीब होते हुए अपनी उंगली को उसके लिप्स पर छूकर अपने मुंह में भर लिया और चूसते हुए बोला:”
” मादक रस, मदभरा रस, रसीला रस सुलिप्सा का।
सुलिप्सा उसकी बात सुनकर बहकने लगी और दूसरा पैग बनाने लगी लेकिन बॉटल खाली हो गई तो सूरज दूसरी बॉटल लेने अंदर चला गया और मदहोश सी सुलिप्सा अपनी मोबाइल में सेल्फी लेने लगी। मदहोशी के कारण उसकी ड्रेस घुटनों से सरक गई और उसकी दोनो टांगे जांघो तक नंगी हो गई और सुलिप्सा ने मोबाइल में देखते हुए अपने बालो को पीछे को झटका सा दिया तो उसकी ड्रेस उसकी चुचियों पर से से खिसक गई और उसकी आधे से ज्यादा चूची नजर आने लगी। बीच से उसका सीना पूरी तरह से खुल गया था और सुलिप्सा बिलकुल कामदेवी लग रही थी मानो किसी की तपस्या भंग करने के लिए एकदम तैयार। सूरज जैसे ही बॉटल लेकर आया और उसकी नजर सुलिप्सा पर पड़ी तो उसकी आंखे खुली की खुली रह गई।

सुलिप्सा उसे देखकर स्माइल देते हुए अपने अपने होंठो को जीभ से और ज्यादा रसीला बनाने लगी और सूरज का लंड अकड़ना शुरू हो गया और सूरज उसके पास बैठ गया और उसने जान बूझकर अपने पैर को सुलिप्सा के पैर के उपर रखा और सहलाते हुए बोला
” क्या बात है आज की रात तो आप कयामत ढा रही हो। क्या किसी की जान ही ले लोगी ?
सुलिप्सा ने उसके पैर में अपना नाखून हल्का सा घुसा दिया और उसके हाथ से बॉटल लेकर पैग बनाते हुए बोली
” ले ली लुंगी आज किसी की जान मैं। तुम क्यों डर रहे हो बच्चे की तरह भला ?
सूरज ने एक हाथ उसके नंगे कंधे पर रख दिया और उसकी आंखो में देखते हुए कहा
” डर नही लगता मुझे, बच्चा नही बल्कि भरपूर मर्द बन गया हु मैं अब, एक मजबूत जवान मर्द।
सुलिप्सा ने पैग उठाया और उसके होंठो से लगाती हुई बोली:”
” अच्छा जी कहीं सारी मर्दानगी हवा में न उड़ जाएं तुम्हारी। लो पियो अब
इतना कहकर सुलिप्सा ने उसके मुंह से पैग लगा दिया तो सूरज ने वापस पैग को उसके होंठो पर लगा दिया और बोला:”
” जब तुम सुलिप्सा के होंठो का रस ना मिल जाए तब क्या दारू का क्या मजा
और इतना कहकर उसका कंधा दबा दिया तो सुलिप्सा अंदर ही अंदर सिसक उठी और उसने न सिर्फ पैग को होठों से छुआ बल्कि अपनी पूरी जीभ निकाल कर ग्लास में गोल गोल घुमा दी और सूरज का लंड उसके काबू से बाहर हो गया और उसकी हाफ पैंट को आगे से उठा दिया और सुलिप्सा ने सूरज को देखते हुए एक जोरदार घूंट भरा और ग्लास को उसके होंठो से छुआ दिया और सूरज उसका कंधा सहलाते हुए एक ही सांस में पूरा पैग खाली कर गया और सुलिप्सा फिर से पैग बनाने लगी लेकिन नशे के कारण उसके हाथ से बॉटल गिर गई या उसने जान बूझकर गिराई और सूरज बॉटल को उठाने के लिए ठीक सुलिप्सा के पीछे पहुंच गया और सुलिप्सा को पीछे से देखने के बाद सूरज का लंड मानो उसकी पैंट फाड़कर बाहर आने पर उतारू हो गया।
सुलिप्सा की कमर लगभग पूरी नंगी थी और बस ड्रेस की पतली सी डोरिया बंधी हुई थी। नीचे से ड्रेस उसकी गांड़ पर बस नाम मात्र के लिए थी और उसकी गांड़ की दोनो गोलाई साफ नंगी नजर आ रही थी और सूरज का मन किया कि उसकी इस मोटी गांड़ को दोनो हाथो से दबोच डाले।

तभी सुलिप्सा बॉटल का ढक्कन उठाने के लिए नीचे को झुकी और मानो कमरे में आग लग गई और सूरज जल उठा। सुलिप्सा के झुकते ही उसकी ड्रेस उपर को खिसक गई और उसकी पूरी की पूरी नंगी गांड़ सूरज की आंखो के आगे आ गई और सूरज ने आज पहली बार अपनी मां की नंगी गांड़ को देखा और उसने अपने लंड को जोर से मसल डाला और उसकी गांड़ देखते हुए बॉटल उठाने लगा। तभी सुलिप्सा ने मानो उसकी जान ही निकाल डाली और नीचे को पूरी झुक गई और सूरज पागल सा हो गया क्योंकि उसकी गांड़ के साथ साथ उसकी चूत भी अब पूरी नंगी होकर खुल गई।
छोटी सी खूबसूरत सी कसी हुई चूत जिस पर सिमटे हुए उसकी चूत के गीले लिप्स साबित कर रहे थे कि सुलिप्सा कितनी तड़प रही है। एक ढक्कन उठाने में सुलिप्सा ने करीब दो मिनट लगाई और उठने के बाद भी थोड़ी देर ऐसे ही झुकी रही और फिर से सीधी हो गई। सूरज अब अंदर तक जल उठा और उसके पास ही बैठ गया अपने खड़े हुए लंड के साथ जिस पर नजर पड़ते ही सुलिप्सा की चूची उछल उछल पड़ी और उसकी चूत से और रस बह चला मानो जंग की तैयारी कर रही हो।
सुलिप्सा ने एक पैग और बनाया और अपने पीने के बाद सूरज की जांघ पर अपनी जांघ रखते हुए उसकी तरफ खिसक गई और पैग को उसके होंठो से लगा दिया। सूरज ने अपनी जांघें खोल कर सुलिप्सा का स्वागत किया और पीते हुए बोला:”
” मम्मी आपकी ड्रेस कमाल की हैं, पीछे से तो बिलकुल सेक्सी हैं आपकी ड्रेस।
सुलिप्सा समझ गई कि उसका तीर निशाने पर लगा हैं और उसकी जांघ सहलाते हुए बोली:”
” अच्छा जी, ऐसा क्या है इस ड्रेस में पीछे भला?
सूरज की जांघें खुलने से सुलिप्सा उसकी गोद में पूरी तरह से चढ़ गया था और सूरज का खड़ा लंड उसकी जांघो में घुस गया तो सुलिप्सा के मुंह से आह निकल पड़ी और सूरज बोला:”
” मम्मी ड्रेस पीछे से आपकी कमर का कटाव अच्छे से दिखा रही है और ये भी।
इतना कहकर उसने अपने पेट का जवाब सुलिप्सा की गांड़ पर दिया तो सुलिप्सा जान बूझकर शर्मा गई और उसका गाल चूम कर बोली:”
” धत तेरी की, बेशर्म कहीं का।
सूरज ने खाली पैग एक तरफ रख दिया और दोनो के चेहरे अब बिलकुल सामने थे तो सूरज उसके होंठो को देखते हुए बोला:
” सुलिप्सा के रसीले लिप्स चूसने लायक लिप्स।
और इतना कहकर अपने लिप्स को बिलकुल उसके लिप्स के पास ले गया और सुलिप्सा की गर्म सांसे उसे अपने चेहरे पर महसूस हुई सूरज उसके होंठो की तरफ बढ़ा तो सुलिप्सा का हाथ बीच में आ गया और सूरज ने उसके हाथ को अपनी जीभ से चाटने लगा और मदहोश सुलिप्सा की भी जीभ बाहर निकल आई और एक पल के लिए सूरज की जीभ से टकरा कर अपने हाथ को ठीक वही चाटने लगी जहां सूरज ने उसे चाटा था। दोनो की आंखे टकराई और फिर दोनो के होंठ। होंठो के टकराते ही सूरज ने उसे अपनी गोद ने मे गिरा दिया और पागलों की तरह उसके होंठो का रस निचोड़ने लगा। सुलिप्सा के दोनो होठों को सूरज जोर जोर से चूस रहा था बिलकुल बेसब्र सा होकर।
जैसे ही दोनो के होंठ अलग हुए तो सुलिप्सा उसकी गोद से उठने लगी और जान बूझकर उसका लंड सहला दिया और उसकी गोद से खड़ी हो गई और दोनो हाथ उपर करते हुए एक अंगड़ाई ली और ड्रेस को उपर को खिसक गई और उसकी दोनो चूचियां बस नाम मात्र के लिए बने पारदर्शी कपड़े में सूरज को पूरी नंगी नजर आई

अपनी मां की गोल गोल सख्त कसी हुई बड़ी बड़ी चूचियां देखकर सूरज खड़ा हुआ और अपनी हाफ पैंट को उतार फैंका और उसकी तरफ आगे बढ़ा और उसका हाथ पकड़ लिया तो सुलिप्सा उसे तड़पाते हुए अपना हाथ छुड़ाया और उसके कान में सेक्सी आवाज में लगभग आह भरते हुए बोली
” रात बहुत हो गई, अब जाने दीजिए ना मुझे आप।
इतना कहकर उसने जान बूझकर अपनी ड्रेस का पीछे का हुक खोल दिया और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी। सूरज उसे जाते हुए देख ही रहा था कि तभी सुलिप्सा की ड्रेस पूरी की पूरी नीचे गिर गई और सुलिप्सा सिर से लेकर पैर तक बिलकुल नंगी उसकी आंखो के सामने आ गई। सूरज के आगे सुलिप्सा का सारा खजाना खुल गया था और क्या देखे क्या न देखे सूरज को समझ नही आ रहा था और तभी सुलिप्सा ने सूरज की आंखो में देखते हुए उसे स्माइल दी और अपनी ड्रेस का एक सिरा हाथ से पकड़ा और ऐसे ही फर्श पर घसीटते हुए बिलकुल नंगी ही अपने रूम की तरफ चल पड़ी
सुलिप्सा जान बूझकर सेक्सी आवाज में सीटी बजाती हुई धीरे धीरे चलती हुई इस कदर मटक रही थी कि उसकी गांड़ इधर उधर कूद कूद पड़ रही थी और सूरज से अब बर्दाश्त नही हुआ और वो तेजी से उसकी तरफ लपका और सुलिप्सा जान बूझकर धीरे धीरे चलती हुई कब से इसी इंतजार में थी उसकी बेटा उसे पीछे से एक मजबूत मर्द की तरह दबोच ले।
सूरज ने फर्श पर घिसट रही उसकी साड़ी पर पैर रख दिया तो साड़ी खींच गई और सुलिप्सा की चूत में मधुर सीटी सी बज उठी और उसने पलटकर देखा तो सुरज उसकी साड़ी के पल्लू पर खड़ा हुआ था और उसकी साड़ी के उपर चलता हुआ धीरे धीरे उसकी तरफ बढ़ने लगा और सुलिप्सा का बदन कांपने लगा और इशारे से अपनी गर्दन हिलाकर उसे आने से इंकार करने लगी। गर्दन हिलने से उसकी चूचियां भी हिली । सूरज उसकी हिलती हुई चूचियां देखकर इशारा कि उसकी चूचियां हिल हिल कर उसे बुला रही हैं तो सुलिप्सा ने हल्के से थप्पड़ अपनी चुचियों पर मारे मानो उन्हे डांट रही हो और सूरज उसकी इस हरकत पर बावला सा हो गया और सुलिप्सा की आंखो मे देखते अपनी टांगो से अंडर वियर को बाहर निकालने लगा तो सुलिप्सा ने एक हाथ से अपनी चूत को ढककर दूसरे हाथ की उंगली को अपने दांतों तले दबा लिया और गर्दन हिला कर मना करने लगी । अब सूरज उसके बेहद करीब आ गया था और अपने अंडर वियर को बाहर निकाल फेंका और उसका लंड अपनी पूरी मोटाई लंबाई का तगड़ा प्रदर्शन करते हुए एक झटके से बाहर निकला और सुलिप्सा के मुंह से एक घुटी घूटी सी चींख निकल पड़ी
” हाय्य्य भगवान, तुम आदमी हो या राक्षस।
इतना कहकर थरथर कांपती हुई सुलिप्सा साड़ी छोड़कर अपने कमरे की तरफ नंगी ही भागी तो सूरज ने उसे गेट के पास ही अपनी मजबूत बांहों में पीछे से दबोच लिया और सुलिप्सा का पूरा बदन एक बार फिर से मचल कर कांप उठा और दोनो चुचियों को ढकते हुए उसने अपनी जांघो को कस लिया और बोली
” आआह्ह सूरज बेटा, ये क्या कर रहे हो तुम!! छोड़ दो मुझे
सूरज ने उसके हाथ उसकी चूचियों पर से हटाते हुए उसकी चूचियों को अपनी चौड़ी हथेलियों में भर लिया और जोर से मसलते हुए बोला:”
” अह्ह्ह् मेरी जान, मेरी मम्मी वही तो कर रहा हूं जो तुम चाहती हो सुलिप्सा।
सुलिप्सा अपनी चुचियों के दबाए जाने से मस्ती से सिसक उठी और उसके हाथो पर अपने हाथो को रखते हुए बोली
” हाय्य यूईईईईई मैं तो बस मजाक कर रही थी, देख ये पाप होगा, मत कर मैं तेरी सगी मां हु
सुलिप्सा ने अपने बेटे के हाथ अपनी चूचियों पर से हटाने की जरा भी कोशिश नही करी और सूरज उसकी चुचियों के तने निप्पलों को सख्ती से मसल दिया और बोला:”
” अह्ह्ह सुलिप्सा, देख न तेरे तने हुए निप्पल और उछलती हुई चूचियां कह रही है कि ये पाप नहीं होगा!!
सुलिप्सा अपने बेटे की बात सुनकर थर थर कांप उठी और सूरज ने उसकी गर्दन चूमते हुए बोला:”
” आह सुलिप्सा मेरी जान, अभी से क्यों कांप उठी, आज तुझे दिखाऊंगा कि मैं बच्चा नही बल्कि भरपूर जवान मर्द हू।
सुलिप्सा के सीने में मीठा मीठा दर्द भर गया और वो दर्द और मस्ती से सिसकते हुए बोली:”
” आह्ह्ह्ह्ह छोड़ दो मुझे, तुम भरपूर मर्द हो मैं तो ऐसे ही बस मजाक कर रही थी।
सूरज ने अपने लंड को उसकी गांड़ पर जोर से रगड़ा और बोला:” आज तेरी खैर नहीं सुलिप्सा, आज तुझे दिखाऊंगा कि मैं बच्चा नही हु बल्कि बच्चा पैदा करने लायक हो गया हु।
इतना कहकर सूरज ने पूरी ताकत से उसकी चूचियां मसल डाली तो सुलिप्सा दर्द से तड़प उठी और
सुलिप्सा उसकी बात सुनकर सिहर उठी और और अपने हाथो को उसके हाथो पर रखते हुए बोली;”
” आह्ह्ह्ह् मार ही डालेगा क्या मुझे, हाय भगवान कहां फंस गई कुछ तो रहम कर मुझ पर।
सुलिप्सा जान बूझकर उसे जोश दिलाने के लिए ऐसी बाते कर रही थी और सूरज ने अपने लिप्स उसकी गर्दन पर रखे और जोर जोर से चूसने लगा तो सुलिप्सा मचल उठी और उसके हाथो पर अपने हाथो का जोर डालने लगी और सूरज और जोर जोर से उसकी चूचियां मसलने लगा और सुलिप्सा दर्द और मस्ती से सिसकने लगी और उसकी जांघें खुलने लगी जिससे लंड अब सीधे उसकी उसकी गांड़ से लेकर चूत तक छूने लगा और सुपाड़ा चूत से छूते ही चूत रस से पानी पानी हो गया तो सूरज लंड का सुपाड़ा उसकी चूत पर रगड़ते हुए उसके कान में सेक्सी आवाज में बोला
” आह्ह्ह् सुलिप्सा, लगता है तेरे नीचे के होंठ में ज्यादा रस हैं, देख न कैसे रस टपक रहा है उपर से ज्यादा रसीले हैं मेरी जान।
सुलिप्सा की चूत अपनी तारीफ सुनकर झनझना उठी और सुलिप्सा एक झटके के साथ पलटी और उसके पैरो पर चढ़ कर उससे कसकर लिपट गई और उसके लिप्स चूसने लगी। सूरज भी उसका साथ देने लगा और सुलिप्सा की एक टांग को हल्का सा उठा दिया और लंड उसकी चूत के मुंह पर जा लगा और सुलिप्सा ने पागल सी होकर अपने मुंह को खोल दिया सूरज की जीभ उसके मुंह में घुस गई और दोनो बेसब्र से होकर एक दूसरे की जीभ बारी बारी से चूस रहे थे। नीचे लंड अपने आप उसकी चूत के होंठो को चूमते हुए अपनी छाप छोड़ रहा था और चूत पूरी तरह से पानी पानी होकर उसका साथ दे रही थी और सूरज के लंड का सुपाड़ा पूरा भीग गया था और चूत पर दबाव डाल रहा था जिससे सुलिप्सा पागल सी हुई जा रही थी। तभी सुपाड़ा ठीक चूत के मुंह पर आ गया और एक दूसरे के होंठ चूसते दोनो की आंखे टकराई और सूरज दोनो हाथों से उसकी गांड़ थामकर लंड का दबाव दिया तो लंड का मोटा सुपाड़ा अंदर घुसने लगा और सुलिप्सा की आंखे दर्द से फैलने लगी तो सूरज ने जोर का धक्का दिया और पूरा सुपाड़ा अन्दर घुस गया तो तो दर्द से कराहती हुई सुलिप्सा उसकी गर्दन में हाथ लपेट कर उससे लिपट गई और सूरज ने अपने दोनो हाथो से उसकी गांड़ को थाम लिया। लंड का सुपाड़ा अभी तक उसकी चूत में घुसा हुआ था और सुलिप्सा की चूत के लिप्स लंड पर पूरी सख्ती से चिपके हुए थे।
सूरज ने एक बार फिर से अपने होंठो को अपनी मां के होंठो से जोड़ दिया और सुलिप्सा भी उसका साथ देने लगी। सुलिप्सा की दोनो चूचियां सूरज की छाती में घुसी हुई थी और सूरज ने सुलिप्सा की आंखो में देखते हुए लंड का दबाव दिया तो सुलिप्सा की आंखे दर्द से फैलने लगी और और अपने हाथो का दबाव उसकी गर्दन पर बढ़ा दिया। सुलिप्सा का दर्द देखकर सूरज ने लंड को बाहर की तरफ खींचा तो सुलिप्सा तड़प सी उठी और अपनी जांघो को कस लिया मानो लंड को बाहर नही निकलने देना चाहती हो। सूरज ने अपनी मां की पूरी सहमति मिलते ही जोर का धक्का लगाया और लंड सुपाड़े के साथ दो इंच और अंदर सरक गया और सुलिप्सा जोर से कराह पड़ी और उसके होंठो पर काट लिया। सूरज ने एक बार से अपनी मां की आंखो में देखा और सुलिप्सा ने दर्द में भी उसे स्माइल दी और फिर शर्मा सी गई और अगले ही पल फिर से उसकी आंखो में देखने लगी और अपने होंठो को सेक्सी अंदाज में सिकोड़ा तो सूरज ने एक जोरदार धक्का लगाया और आधा लंड उसकी मां की चूत में घुसा दिया और सुलिप्सा इस बार दर्द से बुरी तरह से कराह पड़ी और उसके कंधे पर अपने दांत गडा दिए।
सूरज खड़ा हुआ था उसकी मम्मी उसकी गोद में थी और आधा लंड चूत के अंदर घुस गया था। बेड पर चुदाई होती है शायद दोनो ही भूल गए थे और सूरज ने अपनी लंबी जीभ निकाल कर अपनी मां की गर्दन को जानवर की तरह चाटना शुरु कर दिया तो सुलिप्सा की चूत से और रस बह चला मानो अपनी चूत को और शक्ति प्रदान कर रही हो। सूरज ने उसकी आंखो में देखा और फिर अपनी कमर को हल्का सा पीछे को किया अपने लिप्स उसके लिप्स पर रख कर एक जोरदार धक्का लगाया तो लंड उसकी चूत की धज्जी उड़ाते हुए दो इंच और अंदर घुस गया और सुलिप्सा के मुंह से घुटी घुटी सी चींख निकल पड़ी। सुलिप्सा की आंखो की पुतलियां दर्द के मारे घूम गई और वो किसी चुंबक की तरह सूरज से चिपक गई थी मानो दर्द भगाने की कोशिश कर रही हो। सुलिप्सा की चूत बिलकुल पूरी भर गई थी और करीब दो इंच लंड अभी भी बाहर था जिसका सुलिप्सा को एहसास नही था। लंड चूत में घुसाने के साथ ही सूरज ने लंड को थोड़ा सा बाहर निकाला और फिर से घुसा दिया तो सुलिप्सा दर्द से कराह उठी और बेड की तरफ इशारा करके अपनी इच्छा जाहिर करी कि मैं बेड पर चुदना चाहती हूं और साहिल ने लंड घुसे घुसे ही उसे बेड पर लिटाया और उसके खुद उसके उपर। सूरज ने दोनो हाथों में उसकी चुचियों को भर लिया और हल्के हल्के मसलते हुए लंड को उसकी चूत में घुमाने सा लगा तो सुलिप्सा सिसक उठी और सूरज ने लंड को पूरा का पूरा बाहर निकाला और एक ही धक्के में फिर से पहले जितना घुसा दिया तो सुलिप्सा दर्द से कराह उठी क्योंकि उसकी चूत फिर से फैल गई थी। सूरज ने हल्के हल्के धक्के लगाने शुरू किए तो सुलिप्सा दर्द से कराहती हुई सिसकने लगी और उसकी चूत पूरी रसीली होने लगी। कुछ मिनट के बाद उसकी चूत पूरी चिकनी हो गई तो लंड अब अच्छे से अंदर बाहर होने लगा और सुलिप्सा ने मस्ती में आकर अपने बेटे के होंठो को चूमा तो सूरज ने उसकी चूत में थोड़ा और तेज धक्के लगाने शुरू कर दिए और सुलिप्सा को अब दर्द के साथ साथ मजे का भी एहसास होने लगा और उसकी गांड़ उपर उठने लगी तो सूरज ने उसके दोनो कंधो को जोर से पकड़ा और कचकचा कर एक जोरदार धक्का लगाया तो लंड उसकी चूत में पूरा का पूरा जड़ तक घुस गई और सुलिप्सा दर्द से कराहती हुई जोर से सिसक उठी
” आह्ह्ह्ह्ह मार डाला मुझे, उफ्फ हाय भगवान!!
लंड ने पूरा घुसते ही उसकी बच्चेदानी को हिला दिया और सुलिप्सा दर्द भारी सिसकियां लेने लगी और उसने बेड शीट को दबोच लिया और सूरज ने धक्के लगाने शुरू कर दिए तो सुलिप्सा दर्द से कराह कर उसे इधर उधर धलेकने लगी क्योंकि लंड उसकी बच्चेदानी को टकरा रहा था जिससे उसे दर्द हो रहा था। सूरज ने उसकी कोई परवाह नहीं करी और तेज तेज धक्के लगाने लगा तो सुलिप्सा दर्द के कराहती हुई गर्दन इधर उधर पटक रही थी और सूरज धक्के मारता रहा और देखते ही देखते सुलिप्सा का दर्द कम होता चला गया और मजा आना शुरू हुआ तो उसके हाथ सूरज की गर्दन में लिपट गए और जांघें पूरी चौड़ाई पर फ़ैल गई तो सूरज ने अब कसकर धक्के मारने शुरू किए और सुलिप्सा की फैलती सिकुड़ती हुई बच्चेदानी इस बात का पक्का सुबूत थी कि सुलिप्सा दर्द के साथ साथ मजा भरपूर लूट रही हैं। वो अब सिर्फ सिसक नही रही थी बल्कि जोर दिया से मस्ती भरी किलकारियां सी मार रही थी और लंड चूत के मिलन से निकलती हुई मधुर आवाज दोनो को पूरा मदहोश कर रही थी। सुलिप्सा की चूत आज उसे भरपूर मजा दे रही थी और सुलिप्सा जानती थी कि मुकाबला बराबरी का नही था लेकिन फिर भी अपनी गांड़ उठा उठा कर अपनी चूत को चुदवा रही थी। सूरज उसकी चुचियों को जोर जोर से कस कस कर दबाते हुए मसलते हुए धक्के लगा रहा था और उसके लंड की गति हर धक्के पर बढ़ती जा रही थी और सुलिप्सा की चूत में तूफान सा आने लगा और सुलिप्सा पागल सी होकर सिसक उठी
” सुलिप्सा की चूत सूरज का लंड घपागप घपागाप।
सूरज सुलिप्सा की आह्ह सुनकर बेकाबू सा हो गया और सतासत फटाफट लंड पेलने लगा और सुलिप्सा का मुंह हर धक्के पर और ज्यादा खुलता और दोनो मां बेटे एक दूसरे को चूमते हुए अपनी तरफ से पूरी ताकत लगा रहे थे और अंततः एक जोरदार चींख के साथ दोनो एक साथ झड़ गए और सूरज ने अपनी मां की चूत में वीर्य की झड़ी सी लगा दी मानो चूत नही बल्कि खेत की सिंचाई कर रहा हो।
दोनो एक दूसरे से लिपटे हुए अपनी सांसों पर काबू पाने की कोशिश करते हुए एक दूसरे को प्यार से चूम रहे थे। एक ऐसी लड़ाई जिस्मों की लड़ाई जिसमे सुलिप्सा आज अपना सब कुछ हार कर भी सब कुछ जीत गई थी।


