अगले दिन सुबह सूरज देर तक सोता रहा और सुलिप्सा ने भी उसे नही उठाया। करीब बजे वो उठा और उसके बाद दोनो मां बेटे साथ में नाश्ता करने लगे और सुलिप्सा बोली:”
” सूरज तुझे याद हैं न आज शाम को हमे मधु के घर जाना है।
सूरज:” हान मम्मी याद हैं मुझे। बस मुझे अजय के घर जाना होगा ताकि उसे दारू की बॉटल देकर आ जाऊ।
सुलिप्सा:” क्या तुम सच में अब कभी दारू नही पियोगे ?
सूरज:” नही मम्मी, कभी नहीं, बस अब मैं आपको कभी कोई शिकायत का मौका नही दूंगा बल्कि आपको हमेशा खुश रखूंगा।
सुलिप्सा उसकी बात सुनकर बड़ी खुश हुई और भाव वश उसका गाल चूम लिया तो सूरज खुशी से झूम उठा और उसके बाद दोनो ने अच्छे से नाश्ता किया। सुलिप्सा की नजरे एक बार की पेंट पर पड़ी बिलकुल उसकी जांघो के बीच लेकिन उसे कुछ भी नही नजर आया। सुलिप्सा को यकीन सा नही हो रहा था कि इतना भयंकर हथियार कहां गायब सा हो गया था। खैर दोनो ने अच्छे से नाश्ता किया और उसके बाद सूरज दारू की बॉटल लेकर चल पड़ा अजय के घर की तरफ।
सुलिप्सा को आज घर में से एक बहुत मादक खुशबू सी महसूस हो रही थी और सुलिप्सा सफाई में लग गई और अपने कमरे की सफाई करने के बाद जैसे ही वो सूरज के कमरे के सामने पहुंची तो वो मादक खुशबू तेज महसूस हुई और सुलिप्सा कमरे में सफाई करने लगी और वो खुशबू उसके दिमाग पर हावी हो गई थी और सुलिप्सा सफाई छोड़कर उस खुश्बू की खोज में लग गई और वो अपनी सुंदर सी नाक से सूंघती हुई धीरे धीरे पंखे के बिलकुल नीचे आ खड़ी हुई। अब उसे खुशबू बेहद तेज महसूस हो रही थी और सुलिप्सा ने देखा कि खुशबू छत पर से आ रही है तो उसकी नजरे पंखे पर टिक गई और उसे कुछ सफेद सफेद सा चिपका हुआ दिखाई दिया और सुलिप्सा की आंखो के आगे रात की घटना घूम गई। सुलिप्सा को यकीन हो गया कि जरूर ये खुशबू उसके बेटे के वीर्य की हो सकती हैं। सुलिप्सा उस खुश्बू को बिलकुल पास से महसूस करने के लिए तड़प सी रही थी और उसने कुर्सी को बेड पर रखा और उस पर सावधानी से खड़ी हो गई और पंखे को जैसे ही पकड़ा तो उसके हाथ वीर्य से चिपक से गए और सुलिप्सा का पूरा बदन कांप उठा और सुलिप्सा ने अच्छे से अपने हाथ को पंखे और फिराया और सूंघने लगी तो उसकी आंखे मदहोशी में बंद हो गई। सुलिप्सा ने जी भरकर उस मादक गंध को सूंघा और उसके दिलो दिमाग पर वो गंध इस तरह हावी होती चली गई कि सुलिप्सा अपने होश खो बैठी और अब वो उंगली को सिर्फ सूंघ ही नही रही थी बल्कि अपनी नाक पर रगड़ सा रखी थी और वीर्य की एक बूंद टपक कर उसके होंठो पर जा पड़ी और सुलिप्सा की जीभ अपने आप बेकाबू सी होकर बाहर निकल आई और उसे चाट लिया। उफ्फफ्फ सुलिप्सा की उम्मीद से कहीं ज्यादा स्वादिष्ट और फिर तो जैसे कमाल ही हो गया और सुलिप्सा की उंगली उसके मुंह में घुस गई और बावली सी होकर वो पंखे पर लटकी हुई सी आंखे बंद किए अपनी उंगलियों को बारी बारी से चूस रही थी। सुलिप्सा ने जी भरकर अपनी उंगलियों को चाटा और जितना चाटती उतनी ही प्यास और बढ़ती गई और सुलिप्सा को जब सुकून नहीं मिला तो वो अपने पंजों के बाल थोड़ा सा उचकी और एक आह भरते हुए पंखे की पंखड़ी को चाटने लगी और जब तक चाटती रही जब तक कि उसने सब कुछ अपने अंदर नही समेट लिया। अन्त में सब कुछ चाट लेने के बाद सुलिप्सा मदहोश सी नीचे उतरी और आंखे बंद करके बिस्तर पर लेट गई। कल से अब तक जो वो कर रही थी उसे खुद अपने आप पर यकीन नही हो रहा था। सुलिप्सा अभी सोच ही रही थी कि उसे सूरज ने आने की आवाज सुनाई दी और सुलिप्सा सफाई में जुट गई।
धीरे धीरे शाम होने लगी और सुलिप्सा सूरज से बोली:”
” चलो अब तुम जल्दी से तैयार हो जाओ, फिर हमे निकलना होगा मधु के घर के लिए।
सूरज नहाने के लिए चला गया और सुलिप्सा नहाने के बाद तैयार होने लगी। उसने एक गहरे नीले रंग की साड़ी पहन ली जिसमे वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। हल्का सा मेक अप करने के बाद लाल रंग की लिपिस्टिक लगाई और अपने बालो को खुला ही छोड़ दिया। सच मे उसने खुद को शीशे में देखा तो खुद ही शर्मा गई क्योंकि वो सच बेहद खूबसूरत लग रही थी।
सूरज भी तैयार होकर आ गया और अपनी मम्मी के रूप सौंदर्य की तारीफ किए बिना न रह सका और बोला:”
” वाव मम्मी, आप इस साड़ी में बेहद खूबसूरत लग रही है। भगवान बुरी नजर से बचाए आपको आज।
सुलिप्सा अपनी तारीफ सुनकर हंस पड़ी और बोली:”
” चल चल बाते बंद कर कर और जल्दी से गाड़ी निकाल नही तो लेट हो जायेंगे।
सूरज ने गाड़ी निकाली और दोनो मधु के घर की तरफ चल पड़े। करीब 9 बजे दोनो पहुंच गए और मधु ने जोरदार तरीके से उनका स्वागत किया और सूरज ने मधु को नमस्ते करी तो सूरज को देखकर बोली:”
” ये सूरज हैं न, छोटा बच्चा था जब देखा था। अब तो देखो पूरा जवान मर्द बन गया है।
सूरज ने उसे बस हल्की सी स्माइल दी और सुलिप्सा बोली:”
” बड़ा हो गया है अब मेरा बेटा। बच्चा थोड़े ही ना रहेगा हमेशा।
मधु:” हान वो बात है। चलो तुम लोग हल्का कुछ खा लो। मैं आती हूं अभी।
मधु चली गई और सुलिप्सा मन ही मन उसे गालियां देने लगी कि मेरे बेटे को कैसे नजर लगा रही थी। खैर दोनो ने हल्का सा कुछ खाया और तभी मधु बोली:”
” इधर तो आओ सुलिप्सा तुझे अपनी कुछ सहेलियों से मिलवाती हु आज।
सुलिप्सा सूरज को वही रहने को बोलके मधु के साथ चली गई और मधु उसे लेकर हॉल में आ गई जहां उसकी सहेलियां बैठी हुई थी और मधु ने सबको एक दूसरे से मिलवाया तो सभी सुलिप्सा की सुंदरता देखकर अंदर ही अंदर जल उठी।
मधु:” बैठो सुलिप्सा मैं सबके लिए ड्रिंक मंगाती हू।
ड्रिंक की बात सुनकर सुलिप्सा को याद आ गया कि मधु ने उसे आज के लिए पीने के लिए कहा था और खुद अपने बेटे को पीने के लिए मना कर चुकी सुलिप्सा खुद कैसे पी सकती थी तो वो मधु से बोली:”
” मधु मेरे लिए एक कोल्ड ड्रिंक मंगवा लेना बस।
सब हैरानी से उसकी तरफ देखने लगी और मधु बोली:”
” ये क्या बात हुई भला ? आज तो तुम्हे पीनी ही पड़ेगी, कोई बहाना नहीं चलने वाला।
सुलिप्सा कुछ बोलती उससे पहली ही मधु की एक सहेली बोली:”
” रहने दे ना, कोई जबरदस्ती कर रही है, हर किसी के बस की बात थोड़े ही ना होती हैं ड्रिंक करना।
दूसरी:” हान मधु, क्या फायदा, बंदर क्या जाने अदरक का स्वाद भला।
मधु:” चुप रहो तुम सब, सुलिप्सा ने मुझसे वादा किया था कि आज वो मेरी खुशी के लिए पी लेगी।
पहली सहेली:” इससे न हो पायेगा, गिरी पड़ी रहेगी अगर पी भी ली तो
सुलिप्सा:” बस बहुत हो गई तुम्हारी बकवास। ठीक है मधु लेकिन ध्यान रखना सिर्फ एक ही पैग लुंगी।
मधु खुशी से झूम उठी और बोली;” ये बात हुई न मेरी जान, आज मेरी पार्टी में तूने चार चांद लगा दिए।
इसके बाद मधु पैग लेकर आ गई और उसके बाद सभी पीने लगी। ये एक खास किस्म की हल्के मीठे शरबत की तरह की दारू थी बिलकुल भी तीखी नही और एकदम बिलकुल स्वादिष्ट। सबसे बड़ी बात ये थी कि पहला घूंट अन्दर जाते ही मदहोशी शुरू होने लगती थी।
मधु:” कैसी लग रही है तुझे सुलिप्सा ? कोई दिक्कत तो नही न ?
सुलिप्सा पर भी तेजी से असर हुआ आधा पैग पीते ही वो स्माइल करते हुए बोली:”
” लग तो अच्छी ही रही है, लोग बिना वजह दारू को बदनाम करते हैं।
उसके बाद सुलिप्सा ने एक के बाद एक बड़े घूंट भरे और पैग को खत्म कर दिया तो मधु उसके लिए दूसरा पैग बनाते हुए बोली:”
” सच में सुलिप्सा, ये बहुत अच्छी चीज होती है। अच्छा बता कैसा लग रहा है तुझे ?
सुलिप्सा खड़ी हुई और उसके पास आकर हंसते हुए उसका गाल चूम लिया और बोली:”
” बहुत अच्छा लग रहा है मेरी जान, ऐसा लग रहा है जैसे मैं आकाश में उड़ रही हूं। तुम बहुत अच्छी हो मधु।
सुलिप्सा की बात सुनकर मधु की सभी सहेलियां हंसने लगी तो सुलिप्सा बोली:”
” देख न ये सब सोच रही है कि मुझे दारू चढ़ गई है। मैं आपके पूरे होश में हू ना मधु !!
मधु ने उसे वापिस नीचे बैठाया और बोली:”
” हान तुम बिलकुल ठीक हो, इनको सोचने दो। ले एक पैग और पिएगी क्या ?
मधु ने पैग दिया तो सुलिप्सा ने पकड़ लिया पीने लगी। थोड़ी देर के बाद बाद मधु की सहेलियां चली गई तो सुलिप्सा बोली:”
” मधु अच्छा अब तू खुश हैं न, देख मैने तेरी बात मान ली है आज।
मधु:” हान बहुत खुश हूं मेरी जान। तू बैठ मैं अभी आती हूं।
मधु चली गई तो सुलिप्सा को अपने बेटे की याद आई और उठने लगी तो उसे लगा कि वो गिर सकती है इसलिए वापिस बैठ गई और सूरज को फोन किया और बोली:”
” अरे सूरज बेटा मैं हॉल में बैठी हुई हु, इधर ही आ जाओ मेरे पास तुम।
सूरज हॉल में आ गया और अपनी मम्मी को देखकर उसे मानो यकीन सा नही हुआ। उसकी आंखे लाल और चढ़ी हुई लग रही थी और देखने से ही साफ महसूस हो रहा था कि उसने पी रखी है। सूरज अपनी मम्मी को देख ही रहा था कि सुलिप्सा स्माइल करते हुए बोली:”
” ऐसे क्या देख रहा है?
सूरज:” कुछ नही मम्मी, आज आप बड़ी खुश लग रही है।
सुलिप्सा खड़ी और तभी गिरने को हुई तो फिर से बैठ गई और बोली:”
” क्यों मैं तुझे खुश अच्छी नही लगती हु क्या ?
सूरज:” नही मम्मी मैं तो हमेशा चाहता हूं कि आप हमेशा खुश रहो।
सुलिप्सा ने अपनी आंखे नचाती हुई बोली:” अच्छा इधर आ मेरे पास तुझे एक बात बताती हूं मैं आ जा मेरे पास बैठ।
सूरज हंसता हुआ अपनी मम्मी के पास चला गया तो सुलिप्सा बोली:”
” देख तुझे एक राज की बात बताती हूं। मैने आज ये पी ली है।
इतना कहकर उसने दारू की बॉटल सूरज को दिखाई और बोली:” लेकिन तुम ये मत सोचना कि मुझे नशा हो गया है, मैं बिलकुल होश में हू।
सूरज:” हान मम्मी आप बिल्कुल होश में हो मुझे पता है। लेकिन आपने आज कैसे पी ली ?
सुलिप्सा:” अरे वो मधु जिद कर रही थी तो पीनी पड़ी। वैसे दारू इतनी खराब भी नही है मैं तुझे बेकार ही मैं रोकती हू।
सूरज हंस पड़ा तो सुलिप्सा बोली:”
” हसंता क्यों है, चल रुक न तु भी ले न एक पैग, बहुत अच्छी होती हैं ये वाली दारू।
इतना कहकर सुलिप्सा ने उसकी तरफ बोटल बढ़ा दी तो सूरज बोला:”
” नही मम्मी, मैं अब नही पी सकता, आप तो जानती हैं मैने आपकी कसम खाई हैं ।
सुलिप्सा धीरे से खड़ी हुई और पास पहुंच गई और उसके ऊपर झुकती हुई सी बोली:”
” अब तुझे मेरी ही कसम देती हु, पी ले तू भी आज मेरी खुशी के लिए सूरज।
इतना कहकर उसने स्माइल देते हुए सूरज को तिरछी नज़रों से देखा तो उसके बालो की आवारा लटे उसके चेहरे पर झूल गई
सुलिप्सा ने जोर से अपनी बालो को झटका तो वो संतुलन खोकर उसकी गोद में जा गिरी और बोली:”
” देख न मुझे इतना ज्यादा नशा नहीं हुआ है, बस पांव फिसल गया था मेरा।
उसकी गोद में बैठे बैठे ही उसने एक पैग बनाया और उसके होंठो को लगा दिया तो सूरज ने अपना मुंह खोला और एक घूंट भर ली तो सुलिप्सा खुश होते हुए बोली:”
” शाबाश ये हुई ना मर्दों वाली बात। एक घूंट मैं भी पी लूं क्या ?
सूरज को भला क्यों इंकार होता तो उसने हां में सिर हिला दिया और सुलिप्सा ने ग्लास को अपने होंठों से लगा लिया और एक घूंट भर ली और फिर से अपने बेटे के मुंह से लगा दिया। सूरज को यकीन नहीं हो रहा था कि उसकी मां उसकी गोद में बैठ कर उसे पिला रही थीं वो भी अपनी झूठी दारू। इस समय हॉल में कोई नही था और होता भी तो किसे फिकर थी। एक पैग पीने के बाद सूरज को भी चढ़ने लगी और सुलिप्सा ने उसे दो पैग और पिला दिए। सूरज अब पूरी तरह से मदहोश था और उसकी नजरे बार बार अपनी मां की छाती पर कुछ ढूंढ रही थीं लेकिन साड़ी का पल्लू ठीक होने के कारण कुछ नही दिख रहा था। बॉटल खत्म हो गई तो सुलिप्सा ने उसे एक तरफ उछाल दिया और उसकी गोद से खड़ी होकर बोली:
” खेल खत्म पैसा हजम।
रात के 11 बज गए थे तो उसके बाद दोनो मधु को बोलकर अपने घर की तरफ चल पड़े। मधु ने जाते जाते कुछ बॉटल सुलिप्सा को गिफ्ट में दी और रास्ते भर सुलिप्सा बहकी बहकी बाते करती रही और बोली:”
” तुझे पता है मधु क्या बोल रही थी तेरे बारे में?
सूरज :” क्या बोल रही थी आंटी ?
सुलिप्सा:” बोल रही थी तेरा बेटा जवान हो गया है, पूरा मर्द बन गया है। ऐसे बोल रही थी मानो मुझे तो पता ही नहीं कि तुम अब बच्चे नही मर्द बन गए हो भरपूर मर्द।
इतना कहकर उसने एक नजर सूरज पर सिर से पांव तक डाली तो सूरज समझ गया कि उसकी मम्मी बहक गई है। तभी सामने से आ रही गाड़ी को बचाने के लिए सूरज ने तेजी से गाड़ी को घुमाया तो सुलिप्सा की साड़ी का पल्लू सरक गया और चुचियों का उभार आगे से थोड़ा सा नजर आने लगा। सूरज ने सामने शीशे में देखा तो वो मचल सा गया और उसने सीधी नजरे डाली तो उसे ये दृश्य बेहद आकर्षक लगा। नीले रंग के ब्लाउस में उसकी गोरी गोरी चुचियों का उभार कहर ही ढा रहा था। सुलिप्सा को एहसास था कि उसका बेटा उसके सीने के उभार देख रहा है लेकिन उसने अपना पल्लू ठीक करना जरूरी नही समझा और बोली
” सूरज वैसे तुझे पार्टी में कैसा लगा आज ?
सूरज :” मम्मी अच्छा जी लगा। लेकिन आपने आज सच में कमाल कर दिया।
सुलिप्सा एक हाथ उसकी जांघ पर रखा और बोली:”
” मुझे लग रहा था कि तुम्हे शायद बुरा लगेगा कि तुम्हे मना करती थी और खुद पी ली मैने।
सूरज अपनी जांघ पर अपनी मां का हाथ महसूस करके बैचेन होने लगा और बोला:”
” नही मम्मी, बल्कि मुझे तो खुशी हुई कि आप खुलकर अपनी जिंदगी जी रही है इतने सालो के बाद।
सुलिप्सा:” थैंक्स बेटा मुझे समझने के लिए। तुम जवान होने के साथ साथ बहुत समझदार भी हो गए हो।
इतना कहकर उसने उसने सूरज का गाल चूम लिया और सूरज का बदन कांप उठा जिससे उसके लंड में तनाव आना शुरू हो गया और सड़क में गड्ढे में सूरज ब्रेक लगाता तो सुलिप्सा को झटका लगता और उसकी चूचियां बाहर आने को तड़प पड़ती और उसका हाथ सूरज की जांघ पर कस जाता। सूरज भी जवान मर्द था और इनका असर उस पर सीधा और पूरा हुआ और उसका लंड एक बार फिर से सीधा खड़ा होकर सख्त रॉड मे तब्दील हो गया था। दोनो घर के करीब पहुंचे ही थे कि सामने से एक कुत्ता आ गया और उसे बचाने के लिए सूरज ने गाड़ी घुमाते हुए ब्रेक लगाया तो एक झटके से सुलिप्सा का हाथ फिसल कर उसके लंड को जा लगा और सुलिप्सा का हाथ अपने आप पीछे हट गया लेकिन उसे एहसास हो गया था कि उसके बेटे का लंड किस हाल में आ गया है। वहीं सूरज इससे और उत्तेजित हो गया और करीब एक बजे वो अपने घर पहुंच गए।
गाड़ी पार्क करने के बाद दोनो गाड़ी से बाहर निकले और सुलिप्सा लड़खड़ाती हुई अंदर की तरफ चल पड़ी। सूरज का लंड बिलकुल सीधा खड़ा हुआ था और समझ नही आ रहा था कि उसकी मां देखेगी तो उसके बारे में क्या सोचेगी।
दोनो घर के अंदर पहुंच गए और सूरज ने गेट बंद किया और दोनो हॉल में आ गए। सुलिप्सा की आंखे मदहोशी और नशे की वजह से लाल सुर्ख हुई पड़ी थी और उसकी साड़ी का पल्लू पूरी तरह से अस्त व्यस्त था जिसकी उसे कोई फिकर ही नही थी। सूरज नजरे बचा बचा कर उसकी चूचियों का उभार देख ही रहा था और सुलिप्सा खुद ही अपने आप में मदहोश सी हुई खड़ी हुई थी और बोली:”
” अच्छा सूरज मैं अब चलती हु, बहुत ज्यादा थक गई हु ना आज!!
इतना कहकर वो अपने दोनो हाथों को सिर के उपर ले गई और मदहोशी में जान बूझकर अपनी आंखे बंद करते हुए एक जोरदार अंगड़ाई ली जिससे उसकी चूचियां पूरी तरह से तनकर उभर गई मानो वो आजाद होने के तड़प रही थी।

सुलिप्सा ने जान बूझकर अपनी आंखो को देर तक बंद रखा ताकि उसका बेटा बिना किसी संकोच के जी भरकर उसकी चूचियां देख सके और सूरज ने मौके का भरपूर फायदा उठाया और बिलकुल करीब से आज सब कुछ साफ साफ देखा और तभी सुलिप्सा ने एक झटके से अपनी आंखे खोल दी तो सूरज को अपनी चुचियों की तरफ देखते हुए पाकर बोली:”
” ठीक हैं अब तुम सो जाओ।
इतना कहकर वो आगे बढ़ी तो सूरज ने पूरी हिम्मत करके उसका हाथ पकड़ लिया और बोला:”
” मम्मी रुको न थोड़ी देर, अच्छा लग रहा है आपसे बात करके।
सुलिप्सा भी कब जाना चाह रही थी वो तो बस बहाना बना रही थी और उससे हाथ छुड़ा कर बोली:”
” रात बहुत हो गई है, उपर से नशे होने से मैं पहले से ही मदहोश सी हु। मुझे अब जाने दीजिए ना आप प्लीज मेरी कसम आपको!!
सुलिप्सा ने ऐसे जवाब दिया मानो बेटे से नही बल्कि अपने प्रेमी से बात कर रही हो और इतना कहकर पलट गई और आंखे बंद करके चेहरे पर सेक्सी भाव लिए अपनी चुचियों के उभार को उंगलियों से छूती हुई वही खड़ी हो गई।

सूरज अपनी मम्मी की अदाओं का दीवाना बन गया और बोला:”
” मम्मी आप सुबह देर तक सो लेना,अभी रुक जाओ ना मेरे लिए प्लीज थोड़ी सी देर बस। वैसे एक बात कहूं
सुलिप्सा ने फिर से अपनी आंखे खोली और बोली:”
” हान कहो ना तुम ? क्या कहना चाहते हो ?
सूरज सोफे पर बैठ गया और बोला:” मम्मी रहने दीजिए आपको शायद बुरा लग जाए।
सुलिप्सा को एहसास हो गया था कि उसकी बेटा जरूर कुछ उत्तेजक बात बोलने वाला हैं लेकिन डर या शर्मा रहा है तो सुलिप्सा ने अपना मजबूत दांव चला और उसके सामने घुटनों के बल झुकते हुए धीमे से सेक्सी स्माइल करते हुए बोली:”
” मुझे तुम्हारी कोई बात बुरी नही लग सकती, बोलो ना क्या बोलना चाहते हो आप ?
सुलिप्सा उसके सामने पूरी झुकी हुई थी जिससे उसकी चूचियां पूरी तरह से ब्लाउस से आधे से ज्यादा बाहर छलक रही थी और उसके लाल सुर्ख रसीले होंठ सूरज को ललचा रहे थे।

सूरज का धैर्य जवाब दे गया और उसके चेहरे के करीब आते हुए बोला
” मम्मी आज आप बेहद सेक्सी और कामुक लग रही है।
सुलिप्सा ने उसे सेक्सी सी स्माइल दी और उसका गाल छूकर बोली:”
” ओह माई गॉड तुम भी ना बहक गए हो आज पीकर।
सूरज बिना किसी शर्म और डर के उसके रसीले होंठों को देखते हुए बोला:”
” आपको पता है सुलिप्सा आपका नाम क्यों रखा गया होगा ?
सुलिप्सा अपने बेटे की नजरों से उसका इशारा समझ गई और अपने लिप्स पर जीभ फिरा कर बिलकुल रसीले करते हुए लगभग सिसकी:”
” बताओ तो जरा ?
सूरज ने अपनी मम्मी का एक हाथ पकड़ लिया और उसके चेहरे के करीब अपने होंठ लाते हुए बोला:”
” क्योंकि आपके लिप्स दुनिया में सबसे अच्छे हैं, एक दम नाजुक, मुलायम, रसीले और होंठो में भरकर चूसने लायक।
सुलिप्सा के चेहरे पर शर्म की लाली सी दौड़ गई और अपना हाथ छुड़ाते हुए बोली
” आप भी ना बस, छोड़िए अब मुझे जाने दीजिए। आप बहक रहे हो अब।
इतना कहकर सुलिप्सा अपना हाथ छुड़ाकर उसकी तरफ जीभ निकाल कर पलटी और धीरे धीरे से दो कदम आगे बढ़ी और गिरने का नाटक करने लगी मानो सूरज को बुलावा दे रही हो और सूरज भी नादान नही था। वो अपने खड़े लंड के साथ आगे बढ़ा और सुलिप्सा को पीछे से अपनी बांहों में भर लिया।
” उफ्फ आज तो गिर ही जाती मैं तो, अच्छा किया तुमने अपनी मजबूत बांहों में कस लिया।
सुलिप्सा ने जान बूझकर कस लिया बोला और
सूरज उससे अब बिल्कुल सट गया और उसके नंगे पेट पर अपने दोनो हाथों को बांधते हुए अपने लंड को उसकी गांड़ के उभार से मिला दिया और बोला:”
” आह मम्मी, आपके जवान बेटे के होते हुए भला आप कैसे गिर सकती है!!
अपनी गांड़ पर लंड का एहसास होते ही सुलिप्सा उत्तेजना से बेहाल हो गई और सूरज के हाथो मे अपना हाथ देते हुए अपना चेहरा हल्का सा पीछे मोड़ती हुई मादक आवाज में बोली
” आखिर मेरे भरपूर मर्द, जवान बेटे की जवानी मेरे काम आ ही गई आज।
सुलिप्सा के मुड़ने के उसके रसीले लिप्स एक बार फिर से सूरज को दिख गए और सूरज अपनी उंगलियों को उसकी उंगलियों में फांसते हुए लंड के सुपाड़े को उसकी गांड़ की गहराई में रगड़ते हुए बोला:”
” बिलकुल मम्मी, मेरी पूरी मर्दानगी, पूरी जवानी सिर्फ तेरे काम आने के लिए ही है पूरी तरह से दिन रात।
इतना कहकर उसने अपना चेहरा सुलिप्सा के गाल के करीब कर दिया और सुलिप्सा ने मदहोशी से पागल होकर उसके हाथो को अपने पेट पर दबा दिया और हल्की सी घूम गई जिससे अब दोनो के होंठ बिलकुल आमने सामने थे और सुलिप्सा के लिप्स कांप रहे थे। सूरज ने अपनी दोनो टांगो को उसकी टांगो मे फसाते हुए उसकी टांगो को पूरा खोल दिया और लंड उसकी गांड़ की गोलाई को छूता हुआ उसकी चूत तक पहुंच गया और सूरज ने अपने होंठो को आगे बढ़ाया तो सुलिप्सा ने अपनी आंखे बंद कर ली और एक झटके के साथ सुलिप्सा के लिप्स सूरज के लिप्स से जुड़ गए और दोनो एक दम पागल से होकर एक दूसरे के होंठ चूसने लगे। कभी सूरज उसके होंठ चूसता तो कभी सुलिप्सा।
तभी सुलिप्सा का हाथ टेबल पर रखे जग से टकराया और वो एक जोरदार आवाज के साथ गिरकर टूट गया। इस झटके के साथ दोनो की आंखे खुल गई और सुलिप्सा शर्म के मारे अपने कमरे में चली गई।






Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.