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अगले दिन सुबह सूरज उठा तो देखा कि 9 बज गए हैं और अभी तक उसे उठाया नही गया तो उसे बड़ी हैरानी हुई। राधा नही आने वाली है ये तो उसे पता था लेकिन उसकी मम्मी ने उसे अब तक क्यों नही उठाया ये बात उसे जरूर हैरान कर रही थी।

वो उठा और अपनी मम्मी के कमरे मे गया तो देखा कि सुलिप्सा बेड पर लेटी हुई थी और कुछ बुदबुदा सा रही थीं। चेहरा लाल पड़ा हुआ था और सूरज ने हाथ पकड़ कर देखा तो पता चला कि उन्हें बहुत तेज बुखार था। सूरज ने जल्दी से डॉक्टर को फोन किया और ठंडे पानी की पट्टियां अपनी मां के माथे पर रखने लगा। थोड़ी देर बाद सुलिप्सा को आराम मिला तो उसने आंखे खोल दी और सूरज बोला:”

” मम्मी आपको बहुत तेज बुखार है,मैने डॉक्टर को फोन कर दिया है आता ही होगा वो।

सुलिप्सा कुछ नही बोली और चुप लेटी रही और सूरज अपना काम करता रहा। थोड़ी देर के बाद डॉक्टर आ गया और उसने जरूरी दवाई दे दी और सूरज से बोला:”

” इन्हे हाई फीवर हुआ है। एक से दो दिन लग सकते हैं ठीक होने में। इन्हे पूरी तरह से आराम करने देना ताकि जल्दी ठीक हो जाए।

सूरज ने हां में अपनी गर्दन हिलाई और डॉक्टर चला गया। सूरज ने अपनी मां के लिए कुछ नाश्ते का हल्का फुल्का सामान बनाया और उनके साथ बैठकर खाया और फिर दवाई दे दी। सुलिप्सा देख रही थी कि कभी एक ग्लास गर्म पानी नही करने वाले लड़के ने नाश्ता बना दिया था और उसका बड़ा ध्यान रख रहा था।

सुलिप्सा ने दवाई खाई तो उसका बुखार हल्का कम हो गया और उठकर बाहर आ गई और सफाई करने के लिए झाड़ू उठाने लगी तो सूरज आया बोला:”

” मम्मी आप काम मत करो, आप आराम से बेड पर लेट जाओ।

सुलिप्सा:” अरे मैं काम नही करूंगी तो क्या तुम काम करोगे सफाई का ? राधा तो अब कुछ दिन आने वाली नही है।

सूरज ने अपनी मां के हाथ से झाड़ू ले ली और बोली:”

” हां तो क्या हुआ ? मैं कर दूंगा सफाई, भला इसमे गलत ही क्या हैं ? अपने घर की सफाई करना तो अच्छी बात है।

सुलिप्सा उसकी बात सुनकर खुश हुई और बोली:”

” करने में और कहने में बहुत फर्क होता हैं। वैसे चलो शुरू करो फिर तुम। मैं भी तो देखूं तुम्हारी सफाई।

सूरज ने कोई जवाब नही दिया और झाड़ू से सफाई करने लगा। सुलिप्सा ध्यान से देख रही थी कि उसका बेटा कैसे अच्छे से बैठ बैठ कर सफाई कर रहा था लेकिन फैन चलने के कारण हल्का कूड़ा उड़ रहा था और सूरज उसे बार बार से साफ करने की कोशिश कर रहा था। सुलिप्सा हंस पड़ी और बोली:”

” अरे कितनी बार साफ करते रहोगे ? पहले फैन बंद करो ना।

सूरज ने अपनी मां की बात सुनी तो अपनी मूर्खता का एहसास हुआ और पंखे को बंद कर दिया और स्माइल करते हुए कहा:”

” ओह सच में मैं तो बिलकुल भूल ही गया था पंखे को बंद करने के लिए।

इतना कहकर सूरज फिर से सफाई में लग गया और देखते ही देखते थोड़ी ही देर में उसने अच्छे से सफाई कर दी तो सुलिप्सा उसकी तारीफ करते हुए बोली:”

” सूरज सच में सफाई तो तूने अच्छी करी है। लड़का तो तू ठीक हैं बस अपनी कुछ गंदी आदत छोड़ तो अच्छा हो।

सूरज:” अच्छा ठीक हैं, मैं अब आपको शिकायत का कोई मौका नही दूंगा। बस आप जल्दी से ठीक हो जाओ।

सुलिप्सा:” अच्छा ताकि तेरी काम करने से जान बच सके।

सूरज:” नही मम्मी, बस आप खुश रहती हो तो अच्छा लगता हैं। आपके सिवा इस दुनिया में मेरा कोई है भी तो नहीं।

सुलिप्सा:” अच्छा जी। बाते तो बड़ी बड़ी कर रहा है। कही सत्संग में गया था क्या ?

सूरज अपनी मां के बात सुनकर हंस पड़ा और बोली:”

” नही मम्मी, इतनी जानकारी तो सबको होती है। और फिर अपना अच्छा बुरा तो मैं खुद ही समझ सकता हु ना।

सुलिप्सा:” चल देखती हु। कितना अच्छा बुरा समझता हैं तू, वादा कर कि कल से मेरे साथ ऑफिस के काम देखेगा और दारू पीना बंद कर देगा।

सूरज दारू की बात सुनकर थोड़ी देर चुप रहा तो सुलिप्स बोली:”

” क्या सांप सूंघ गया दारू के नाम पर तुझे ? बोलो ना अभी तो बड़ी बड़ी बाते कर रहे थे तुम।

सूरज ने अपनी आंखे उठाई और अपनी मां का हाथ पकड़ कर बोला:” ठीक हैं मम्मी। आपकी कसम आज के बाद कभी दारू को हाथ भी नहीं लगाऊंगा।

सुलिप्सा अपने बेटे की बात सुनकर बड़ी खुश हुई और खुशी खुशी उसे गले लगा लिया। कई सालो के बाद उसने अपने बेटे को इतनी खुशी से गले लगाया था और सूरज भी अपनी मां से लिपट सा गया। सुलिप्सा से खुशी खुशी उसका गाल चूम लिया और बोली:”

” मैं आज बेहद खुश हूं बेटा। तुम नही जानते तुमने मुझे कितनी बड़ी खुशी दी है।

उसके बाद सुलिप्सा वापिस बेड पर लेट गई और सूरज सुलिप्सा के कहे अनुसार कुछ घर का जरूरी सामान लेने के लिए निकल गया।

सुलिप्सा को अब अच्छा लग रहा था और वो खाना बनाने लगी। मिक्सी खराब हो गई थी तो सुलिप्सा सिल पर मसाला पीस रही थी तभी सूरज छत पर से आया और अपनी मम्मी को काम करते हुए देखकर बोला:”

” मम्मी आप आराम करो ना। मैं होटल से खाना ले आऊंगा या फिर खुद ही बना दूंगा।

सुलिप्सा:” अरे मैं अब ठीक हु बेटा। थोड़ा काम करने से बदन खुल जायेगा तो अच्छा लगेगा मुझे फिर।

सूरज अपनी मां की बात सुनकर कुछ नही बोला और सुलिप्सा धीरे धीरे सिल पर मसाला पीसने लगीं। सफेद रंग के ब्लाउस में वो बेहद खूबसूरत लग रही थी और उसकी चूचियो का बेहद हल्का सा उभार चमक रहा था और हिलने से उसकी चूचियां धीरे धीरे हिल कर अपना आकार साबित कर रही थी।

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सूरज की नजर जैसे ही अपनी मम्मी की छाती पर पड़ी तो सूरज को समझ नही आया कि क्या करे। लेकिन एक बात तो थी कि उसकी मम्मी की छाती बेहद खूबसूरत लग रही थीं। सूरज अपने मन को समझाता रहा लेकिन अंततः हार गया और फिर से उसकी नजरे अपनी मां की चुचियों पर जा टिकी और सूरज ने पूरे गौर से उसकी भरपूर चुचियों के आकार का मुआयना किया तो उसे एहसास हुआ कि उसकी मां की चुचियों का आकार किसी भी तरह से पक्के नारियल से थोड़ा सा भी कम नहीं है।

मसाला पीस गया तो सुलिप्सा अंदर किचन में चली गई और सूरज भी चुपचाप अपने कमरे में चला गया। सूरज की आंखों के आगे बार बार उसकी मां की चुचियों का आकार झलक रहा था और सूरज सही गलत ने उलझा हुआ था।

करीब 9 बजे तक खाना बन गया और सूरज ने अपनी मां के साथ बैठ कर खाना खाया और फिर सूरज बर्तन उठा कर धोने चला तो सुलिप्सा हंसने लगी और बोली:”

” बस करो तुम, मैं खुद बर्तन धो लूंगी। मेरी तबियत ठीक हैं अब।

सूरज:” नही मम्मी, आप अभी आराम करो। मैं नही चाहता हूं कि आपको मेरे होते हुए थोड़ी भी दिक्कत हो।

इतना कहकर सूरज अंदर चला गया और बर्तन धोने लगा। बर्तन धोते धोते उसके हाथ से कांच का ग्लास छूटा और टूट कर गिर गया तो सुलिप्सा हंसती हुई उसके पास आई और बोली:”

” कर दिया न नुकसान तुमने, अच्छा मजाक छोड़ो कहीं लगा तो नही न कांच।

सूरज झेंप सा गया और बोला:”

” हाथ से स्लिप होकर छूट गया। अच्छा हुआ हैं कि हाथ में नही लगा मुझे। बस धूल ही गए हैं बर्तन तो सभी।

सूरज ने सभी बर्तन धोने के बाद उन्हें किचन में रख दिया और दोनो मां बेटे सोने की तैयारी करने लगे। सुलिप्सा अब बिल्कुल ठीक महसूस कर रही थी और सूरज से बोली:”

” अच्छा सूरज कल हम शाम को दोनो मधु के यहां चलेंगे। उसकी शादी की सालगिरह हैं तो उनसे बुलाया है।

सूरज:” ठीक हैं मम्मी जैसे आपको ठीक लगे। बुलाया है तो जाना ही चाहिए।

सुलिप्सा:” हान कल शाम को कहीं इधर उधर मत भाग जाना तुम। मेरे साथ चलना।

सूरज: आप बेफिक्र रहिए। मैं आपके साथ चलूंगा।

सुलिप्सा अपने बेटे को अच्छे से परखना चाहती थी कि उसने आज अपनी मम्मी की कसम खाई थी कि आज के बाद दारू छोड़ देगा वो सच्ची हैं या बस सिर्फ बाते ही बना रहा था। सुलिप्सा ने अपनी पास रखी हुई उसकी दारू की बॉटल निकाली और बोली:”

” ये तुम्हारी बॉटल मैं उठा लाई थी उस दिन। अब एक काम करो आज मैं तुमसे बेहद खुश हूं। तुमने घर का काम किया और मेरा इतने अच्छे से ध्यान रखा। तुम चाहो तो आज की रात पी सकते हो।

सूरज:” कैसी बाते कर रही है आप ? मुझे नही चाहिए अब ये सब। मैंने छोड़ दिया है।

सुलिप्सा:” अरे कोई बात नही। मन करे तो पीना नही तो मत पीना। अभी मेरे पास से ले जाओ और अगर नही पीनी तो कल अपने किसी दोस्त को दे देना तुम। मुझे नही रखनी अपने पास ये दारू की बॉटल।

इतना कहकर उसने सूरज के हाथ में जबरदस्ती बोटल थामा दी और बोली:”

” मुझे अब नींद आ रही है। मुझे सोना होगा काफी कमजोरी आ गई है। गुड़ नाइट बेटा।

इतना कहकर सुलिप्सा ने अपने रूम की लाइट बंद कर दी और सूरज गुड नाईट बोलकर बॉटल लेकर अपने रूम में आ गया। सूरज ने बॉटल को एक तरफ रखा दिया क्योंकि वो किसी भी हाल में अब दारू नही पी सकता था और आराम से बेड पर लेट गया। सूरज को नींद नहीं आ रही थी तो वो अपने मोबाइल में लग गया और उसने फिर से अपने दोस्त विजय द्वारा भेजा गया लिंक खोल लिया प्यासी कामवाली।

मूवी को देखते देखते सूरज की हालत खराब होने लगी और सीमा के चेहरे के उत्तेजक भाव उसकी उत्तेजना और बढ़ा रहे थे। गर्मी का मौसम तो था ही और उपर से जवानी की गर्मी, सूरज ने अपने सारे कपड़े उतार फेंके और अब सिर्फ अंडर वियर में लेटे हुए मूवी देखा रहा था। देखते ही देखते उसका लंड कब लोहा बन गया उसे पता ही नही चला और सूरज अब उसके अंडर वियर में हाथ डालकर उसके लंड को सहला रहा था।

दूसरी तरफ सुलिप्सा सूरज के जाने के थोड़ी देर बाद रूम से निकली और दबे पांव उसके रूम की तरफ चल पड़ी। वो ये जान लेना चाहती थी कि क्या उसके बेटे ने सच में उसकी सच्ची कसम खाई हैं। सुलिप्सा धीरे से उसके दरवाजे पर पहुंची और जैसा ही अंदर झांका तो उसकी आंखे पूरी की पूरी खुली की खुली रह गई।

हाय भगवान क्या मैं सच देखा रही हु क्योंकि उसे अपनी आंखो पर भरोसा नहीं हो रहा था। अंदर सूरज अंडर वियर में हाथ डाले अपना लंड सहला रहा था और एक बहुत बड़ा सा उभार उसे साफ दिखाई दिया। सूरज के मोबाइल से सीमा कामवाली की मस्ती भरी सिसकियां निकल कर सूरज के साथ साथ अब सुलिप्सा को भी सुनाई पड़ रही थी। सुलिप्सा को एक बात तो समझ तो समझ आ गई थी कि उस दिन उसे इतना दर्द क्यों हुआ था जब गलती से सूरज ने उसे राधा समझ कर दबोच लिया था। सुलिप्सा अपने बेटे के लंड के आकार को सही से समझ रही थी कि कितना बड़ा होगा। सुलिप्सा का मन किया कि वो वापिस चली जाए लेकिन उसके कदम एक इंच भी नही हिले मानो उसके शरीर ने ही उसका साथ छोड़ दिया था। सुलिप्सा के मन में अब एक इच्छा जाग रही थी कि काश मुझे अपने बेटे का लंड सही से एक बार देखने को मिल जाता।

मोबाइल में क्या चल रहा था ये तो सुलिप्सा नही देख पा रही थी लेकिन मोबाइल से आती सिसकियां पल पल बढ़ती जा रही थी और सूरज के हाथ की गति भी बढ़ रही थी। सुलिप्सा अब लंड के दर्शन के लिए तड़प सी रही थीं और तभी मानो ईश्वर ने उसकी प्रार्थना सुन ली और सूरज के हाथ उसके अंडर वियर को नीचे करते चले गए और उसका लंड एक झटके के उछलता हुआ बाहर निकल आया और लंड के साथ ही सुलिप्सा के मुंह के मुंह से दबी दबी सी आह निकल पड़ी क्योंकि उसने सपने में भी नहीं सोचा था कि ऐसे भी लंड होते है। वो हैरानी से अपनी आंखो को पूरा खोल रही थी कि क्या मैं सच देख रही हूं। देखते ही देखते सूरज ने लंड को अपने हाथ में भर लिया और सुलिप्सा ने देखा कि लंड पूरा हाथ मे समाने के बाद भी कम से कम 4 इंच बाहर निकला हुआ था। सुलिप्सा को याद आया कि कैसे ये लंड शायद थोड़ा सा घुसा होगा उस दिन, उफ्फ कितना दर्द हुआ था मुझे। ये याद आते ही सुलिप्सा की चूत के होंठो में सनसनाहट सी हुई और सुलिप्सा के मन में बस एक ही विचार आया कि अगर ये लंड उसकी चूत में पूरा घुस गया होता तो उसका क्या हाल होता

उफ्फ सुलिप्सा के मुंह से सिसकी निकल पड़ी ये सोचते ही और और उसे एहसास हुआ कि वो कितना गलत सोच रही थी और सुलिप्सा को अब अपनी सोच पर बुरा लगा तो अपने रूम की तरफ चल पड़ी। सुलिप्सा ने कुछ ही कदम आगे बढ़ाए थे कि उसका मन फिर से डोल गया और सुलिप्सा के मन में एक बार फिर से अपने बेटे का लंड देखने की इच्छा जाग उठी। सुलिप्सा एक जगह पर ठिठक सी गई और सोचने लगी कि क्या ये सही है!! नही नही मुझे ऐसा नहीं करना चाहिए ये पाप होगा।

लेकिन दिल ने गवाही दी कि देखने से भला क्या पाप होगा। कुछ थोड़े ही ना करने जा रही थी तू उसके साथ, सिर्फ देख ले एक बार अच्छे से, क्या पता फिर कभी मौका मिलेगा भी या नहीं ऐसे देख पाने का।

थोड़ी देर पहले ही तो था देखा था अब क्या हो गया, बिलकुल वैसा ही होगा जैसे पहले था, नही नही अब तो मैं भूल ही गई कि कैसा दिखता था, पहले ठीक से नही देख पाई थी न मैं, इस बार अच्छे से देखूंगी, एकदम ठीक से। अपने आपसे लड़ती सुलिप्सा आखिर कार एक अंतिम बार खुद को अपने बेटे के लंड को देखने की इच्छा से नही रोक पाई और उसके कदम उसके बेटे के कमरे की तरफ बढ़ गए। वो देखना चाहती थी अपने बेटे के लंड को, बिलकुल पूरे लंड को, लंड के सिरे से लेकर जड़ तक, उसकी पूरी लंबाई और मोटाई को अपनी आंखो से महसूस करना चाहती थीं।

सुलिप्सा एक बार फिर से अपने बेटे के रूम के सामने खड़ी हुई थी और इस बार उसकी सांसे तेज थी और आंखे लाल होकर दहक सी रही थी। हस्त मैथुन से अनजान सूरज ऐसे ही बस सुकून के लिए लंड को मसल रहा था और उसे बड़ा मजा आ रहा था। सुलिप्सा बार बार ठीक से देखने की कोशिश कर रही थी लेकिन सूरज के हाथ में होने के कारण लंड एक साथ पूरा नहीं देख पा रही थी और तभी सूरज के हाथ रूके और अपने मुंह की तरफ बढ़ गए। लंड अब बिल्कुल किसी रॉकेट की तरह सीधा समकोण पर खड़ा हुआ था। एक दम अपने पूरे आकार में, अपनी पूरी लंबाई चौड़ाई के साथ और सुलिप्सा ने लंड को देखते देखते अपने नीचे के होंठ को दांतो से काट दिया। लंड को भरपूर निहारने के बाद सुलिप्सा ने देखा कि सूरज ने अपने मुंह से ढेर सारा थूक हाथ में लिया और फिर से लंड को पकड़ लिया और सहलाने लगा। लंड पूरा चिकना होकर अब उसके हाथो में फिसल रहा था सूरज के चेहरे पर अजीब से उत्तेजक भाव उभर आए थे और सुलिप्सा मदहोश सी हुई ये सब देख रही थी। चिकना लंड तेजी से उसके हाथ में फिसल रहा था और लंड और उंगलियों के छूने से चप चप चप की आवाजे निकल कर सूरज को पागल सा कर रही थी क्योंकि यही आवाजे सेक्स के समय लंड चूत के घर्षण से निकलती हुई उसने सुनी थी। सूरज के हाथ अब जोर जोर से लंड को रगड़ रहे थे और सुलिप्सा खुद चप चप की आवाज से बहकी हुई सी पूरी तरह से बदहवास लंड को देख रही थी। तभी सूरज को अजीब सा मजा आने लगा और उसके मुंह से अपने आप ही अजीब सी सिसकियां निकलने लगी तो सुलिप्सा पागल सी हो गई और उसका पूरा बदन कांप उठा। सूरज के हाथ की गति इतनी तेज थी कि अब सुलिप्सा को लंड भी नाम मात्र के लिए दिखाई दे रहा था और तभी सूरज ने जोर से आह भरी और अह्ह्ह्हह आह्ह्ह्हह करते हुए सिसकने लगा और उसके हाथ इतनी तेजी से लंड पर चल रहे थे मानो वो अपने लंड को उखाड़ देना चाहता हो। सूरज का पुरा बदन लंड के साथ साथ हिल रहा था और सूरज बार बार अपनी जीभ अपने सूख गए होंठो पर फेर रहा था। सुलिप्सा सूरज की इतनी उत्तेजक हरकते देखकर समझ गई थी कि उसका बेटा अब पूरा का पूरा मर्द बन गया है जो दुनिया की किसी भी औरत को चीखने चिल्लाने पर मजबूर कर देगा।

तभी सूरज के मुंह से एक जोरदार आह निकल पड़ी

” आह मर गया, उफ्फ मम्मी बचा ले मुझे!!

और इसके साथ ही उसके लंड से जोरदार वीर्य की पिचकारी निकली और सीधी छत की तरफ पंखे पर जा गिरी। सूरज की आंखे बंद हो गई और हाथ चलते रहे। एक के बाद एक कई सारी पिचकारी निकलती रही और पंखे को भिगो सा दिया। वीर्य का दबाव कम हुआ तो सूरज के हाथ में भरने लगा और सूरज मस्ती में डूबा हुआ तब तक मसलता रहा जब तक कि आखिरी बूंद नहीं निकल गई। सूरज थका हुआ सा अपनी उखड़ी सांसों को काबू में करने लगा और सुलिप्सा अपने बेटे का इतना भयानक स्खलन देखकर अपने दांतो तले उंगली दबा बैठी और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी। सुलिप्सा का पूरा बदन अकड़ सा रहा था और बड़ी मुश्किल से वो पूरी रात करवट बदलती रही। दूसरी तरफ सूरज इस अदभुत सूख का एहसास करने के बाद सुकून की नींद में चला गया।

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