राजू अपनी मां को वेध के वहां ले जाने के लिए तैयार हो चुका था,,,,,, राजू के मन में अपनी मां का साथ पाने के लिए उत्सुकता बहुत थी आज दूसरी बार वह अपनी मां को बैलगाड़ी में कहीं लेकर जा रहा था पहली बार का सफर तो उसके लिए बेहद मनमोहक और उत्तेजना पूर्ण था,,,, पहली सफर के दौरान जिस तरह की वार्तालाप दोनों के बीच हो रही थी उसी को लेकर राजू आज भी उत्साहित,,,, आसमान में रह-रहकर बादल उमड़ा रहे थे बरसात होने की संभावना ज्यादा थी,, लेकिन अभी बारिश बिल्कुल भी नहीं पड रही थी,,, सफर थोड़ा ज्यादा लंबा था शाम हो सकती थी इसलिए मधु चाहती थी कि जल्द से जल्द वहां जाकर वापस लौट आए,,,,,,।
बैलगाड़ी घर के बाहर खड़ी थी हरिया और उसकी बहन गुलाबी बैलगाड़ी के पास में ही खड़े थे राजू बैलगाड़ी के नीचे खड़ा था वह अपनी मां का बैलगाड़ी में बैठने का इंतजार कर रहा था,,,।
जाओ बेल गाड़ी में बैठो और हो सके तो जल्दी आने की कोशिश करना क्योंकि बरसात कभी भी आ सकती है शाम ढलने से पहले आ जाओ तो अच्छा है,,,
चिंता मत करो मैं जल्दी ही आऊंगी,,,(इतना कहने के साथ ही मधु बैलगाड़ी के ऊपरी हिस्से पर एक पाव रखकर चढ़ने की कोशिश करने लगे और ऐसा करने पर उसकी बड़ी-बड़ी गांड का घेराव कुछ ज्यादा ही बड़ा नजर आने लगा,,, जिस पर नजर पड़ते ही राजू के लंड में हरकत होने लगी,,,,,,, अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड देखकर राजू के मुंह में पानी आने लगा,,,, और देखते ही देखते मधु बैलगाड़ी पर चढ़कर बैठ गई,,,,)
तू बिल्कुल भी चिंता मत करो पिताजी मैं जल्दी जाऊंगा और जल्दी लेकर आऊंगा,,(और इतना कहने के साथ ही बैलगाड़ी पर जाकर बैठ गया और बैल को हांक कर बैलगाड़ी आगे बढ़ा दिया बेल गाड़ी के पहिए में बंधे घुंघरू शोर करने लगे,,,,,, मधु पीछे नजर घुमाकर तब तक देखती रही जब तक कि उसका पति और गुलाबी दोनों आंखों से ओझल नहीं हो गए थोड़ी ही देर में बैलगाड़ी गांव से बाहर निकल आई थी,,,, मौसम बड़ा सुहावना लग रहा था धूप हल्की हल्की पड़ रही थी जिसकी वजह से गर्मी का एहसास बिल्कुल भी नहीं हो रहा था चारों तरफ हरियाली होने की वजह से यह सफर और भी ज्यादा मनमोहक लग रहा था,,,
राजू भाई गाड़ी में बैठा बैठा कुछ देर पहले के उस नजारे के बारे में सोच कर मस्त हो रहा था जब उसकी माइक पर रखकर बैलगाड़ी पर चढ़ने की तैयारी कर रही थी और उसी समय उसकी बड़ी-बड़ी गांड उभर कर सामने आ गई थी,,, राजू को अपनी मां की बड़ी-बड़ी गांड का बेहद आकर्षण था पूरे गांव भर में घूम लेने के बाद यहां तक कि अपनी बहन बुआ के साथ साथ हवेली की छोटी मालकिन सोने की भी मत बस कर देने वाली गांड देखने के बावजूद भी उसे सबसे खूबसूरत गांड अपनी मां की लगती थी,,,, अपनी मां की गांड के बारे में सोच कर ही राजू के तन बदन में हलचल सी होने लगी थी,,,,, दोनों मां बेटों के बीच किसी भी प्रकार की वार्तालाप नहीं हो रही थी दोनों के बीच चुप्पी सी फैली हुई थी मधु अपने बेटे के साथ के पहले सफर का अनुभव के बारे में अच्छी तरह से वाकिफ थी पहली सफर में जिस तरह का अनुभव से हुआ था उसे लेकर वह काफी रोमांचित और शर्मिंदगी का अहसास भी कर रही थी,,,, मधु को अच्छी तरह से मालूम था कि उसका बेटा किस तरह से धीरे-धीरे उसके साथ खुलने लगा था और रह-रहकर गंदे शब्दों का प्रयोग कर रहा था और कुए पर पानी पीते वक्त जिस तरह से वह उसे ढूंढता हुआ पत्थर के पीछे झांक कर देखा था उस पल को याद करके मधु के बदन में अभी भी सिहरन सी दौड़ जाती थी,,,, मधु को अच्छी तरह से याद था कि वह पत्थर के पीछे बड़े जोरों की आई पेशाब से मुक्ति पाने के लिए अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर नंगी गांड लिए बैठकर पेशाब कर रही थी और उसी समय उसका बेटा वहां पर आ गया था दोनों की नजरे आपस में टकरा गई थी,,,,, उस समय मधु की हालत जो हुई थी उसके बारे में सोच कर ही उसके तन बदन में हलचल सी मच जाती थी वह तुरंत शर्म से लाल हो गई थी राजू का तो पता नहीं वह अच्छी तरह से जानती थी कि राजू को उस नजारे को देखकर मजा ही आ गया होगा,,,, क्योंकि अनुभव से भरी हुई मधु मर्दों के चेहरे पर औरतों के अंगों को देखने के बाद किस तरह की रेख रूपा नजर आती है उससे अच्छी तरह से वाकिफ थी,,,
इसलिए सफर के पहले अनुभव को लेकर मधु इस समय थोड़ा चिंतित नजर आ रही थी कि कहीं उसका बेटा ऐसी वैसी हरकत ना कर दे इसीलिए वह अपने बेटे से बात करने से कतरा रही थी,,,,। दोनों के बीच की चुप्पी को तोड़ते हुए राजू ही पहल करता हुआ बोला,,,।
क्या मां सच में तुम्हारी तबीयत खराब है,,,
क्यों तुझे विश्वास नहीं हो रहा है क्या,,,
नहीं ऐसी बात नहीं है तुम मुझे कहीं से भी बीमार नहीं लग रही हो चेहरे पर पहले की तरह ही रौनक है आवाज भी एकदम बेहतर है,,,,।
अरे बुद्धू रह रह कर मुझे बुखार आ जाता है इसीलिए तो परेशान हुं,,,,
अच्छा तो यह बात है,,,
तुझे कहां मेरी फिक्र रहती है सारा दिन इधर-उधर घूमता रहता है घर पर रहे तब ना तुझे पता चले,,,,
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है मा,,,, मैं तो तुमसे हमेशा बात करना चाहता हूं तुम्हारे पास रहना चाहता हूं लेकिन तुम ही हो जो मुझसे कतराती रहती हो मुझसे बात तक नहीं करती,,,
पागल हो गया क्या तू मैं भला तुझसे क्यों कतराने लगी,,,, तू कोई गैर है क्या,,,
पता नहीं लेकिन तुम शायद समझती हो,,,,
यह तु कैसी बातें कर रहा है राजू,,,, एकदम अनजान इंसान की तरह तु बातें कर रहा है,,,,,,
क्या करूं तुमने मुझे अनजान बना दी हो,,,, शायद मुझसे कोई गलती हो गई होगी,,,,
नहीं तो ऐसा बिल्कुल भी नहीं है,,,(मधु एकदम साजिक रूप से बात कर रही थी लेकिन राजू के मन में कुछ और चल रहा था धीरे-धीरे वह अपनी गाड़ी को पटरी पर लाना चाहता था इसलिए बात की शुरुआत इस तरह से कर रहा था)
नहीं मां तुम झूठ बोल रही हो,,,,
मैं भला तुझसे झूठ क्यों बोलूंगी,,,,
हो सकता है मेरी हरकत की वजह से तुम मुझसे नाराज हो गई हो,,,
Raju or uski ma
हरकत,,,(मधु राजू के कहने का मतलब को समझ नहीं पा रही थी लेकिन उसे कुछ कुछ समझ में आ रहा था कि राजू किस बारे में बात कर रहा है इसलिए भाई राजू के मुंह से जानना चाहती थी कि वह ऐसा क्यों बोल रहा है,,)
हां मां वही हरकत,,,, खेत में जो मैं तुम्हारी आंखों के सामने अपने पजामे को नीचे कर दिया था,,, और तुम्हें दिखा रहा था इसलिए शायद तुम नाराज हो,,,,।
(मधु समझ गई कि उसका बेटा उसी हरकत के बारे में बात कर रहा है और मधु इस तरह की बातें नहीं करना चाहती थी,,, लेकिन राजू जानबूझकर उसी तरह की बातें कर रहा था,,, मधु को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने बेटे की बात का वह क्या जवाब दें,,,, इसलिए वह उससे कुछ बोल नहीं रही थी और दूसरी तरफ नजर घुमा ली थी राजू यह बात अच्छी तरह से समझ रहा था कि उसकी बात को सुनकर उसकी मां शर्म आ रही है और वह इसी शर्म को तो दूर करना चाहता था क्योंकि वह जानता था कि उसके और उसकी मां के बीच में सिर्फ शर्म का ही पर्दा है,, वरना जिस तरह से उसने अपनी मां को अपने लंड के दर्शन कराए थे उसकी मां भी दूसरी औरतों की तरह उसके नीचे आ गई होती,,, कुछ देर की खामोशी के बाद राजू फिर बोला,,,)
बोलो ना मा उसी बात से नाराज होना,,,, मैं जानता हूं तुम उसी बात से नाराज हो शायद मुझसे गलती हो गई थी लेकिन मैं तुम्हारे मन में क्या चल रहा है यह समझ नहीं पाया था,,,,(बैलगाड़ी को रस्सी के सहारे आगे बढ़ाते हुए राजू अपनी बात को भी आगे बढ़ा रहा था वह जानता था कि उस दिन के सफर की तरह आज का सफर भी यादगार होने वाला है,,,,) जिस तरह से तुम मुझे खेतों में लेकर गई थी मुझे ऐसा ही लग रहा था कि शायद तुम कुछ करवाना चाहती हो,,,,(मधु अपने बेटे के मुंह से कुछ करवाने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी और उसके मतलब को समझकर एकदम शर्म से लाल हुई जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा उसी से इस तरह की बातें कैसे कर सकता है,,,) और इसीलिए मैं भी तुम्हारे साथ खेतों में चला गया और तुम भी तो कुछ बोल ही नहीं बस खेत के एकदम बीचोबीच ले जाकर खड़ी हो गई मुझे ऐसा लगा कि शायद तुम हम दोनों के लिए अच्छी जगह ढूंढ रही हो,,,,।
अरे अरे यह कैसी बातें कर रहा है तू तुझे शर्म नहीं आती इस तरह की बातें करते हुए,,,,
इसमें शर्म कैसी मां उस दिन मेरी जगह कोई और होता तो उसे भी ऐसा ही लगता,,,, शादी में जब तुम्हें मैं छोड़ने के लिए जा रहा था तू हम दोनों जिस तरह से खुलकर बातें कर रहे थे तुम्हें बिल्कुल भी ऐतराज नहीं था मुझे तो ऐसा ही लग रहा था कि तुम शायद तैयार हो तुम्हें भी यह सब अच्छा लगेगा,,,, इसीलिए तो जल्दबाजी में मैंने खेत में अपना पजामा नीचे कर दिया था,,,,(राजू को इस बात का भी डर लग रहा था कि कहीं उसकी जल्दबाजी से बना बनाया काम बिगड़ ना जाए इसलिए वह अपनी बातों को दुरुस्त करता हुआ बोला) मुझे तुम्हारा हाथ पकड़ कर अपने लंड पर नहीं रखना चाहिए था,,,(राजू जानबूझकर अपने मुंह से लंड शब्द का प्रयोग किया था और अपने बेटे के मुंह से इस शब्द का प्रयोग सुनकर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,,,, मधु को राजू के मुंह से लंड शब्द सुनकर अपनी दोनों टांगों के बीच की पतली दरार में हरकत महसूस होने लगी,,, आखिरकार जैसे भी हो उसने भी तो अपने बेटे के लंड की मोटाई लंबाई और कड़कपन को देखी थी और अपनी हथेली में दबाकर उसकी गरमाहट को महसूस भी की थी उसकी गर्माहट से वह अपनी बुर को पिघलता हुआ भी महसूस की थी इसलिए तो इस समय भी उसके तन बदन में हलचल उठ रही थी,,,) मुझसे यही गलती हो गई मैं जल्दबाजी में वह कर गया जो मुझे कभी नहीं करना चाहिए था इसके लिए मैं माफी चाहता हूं,,,,,.
लेकिन इसमें मेरी कोई गलती नहीं है तुम हो ही इतनी खूबसूरत कि तुम्हें देखकर किसी का भी मन बहक जाता है,,, सच में मां तुम बहुत खूबसूरत हो तुम्हारी जैसी खूबसूरत औरत मैंने आज तक नहीं देखा,,,,(मधु जानती थी कि उस दिन की तरह ही आज भी उसका बेटा उसकी खूबसूरती की तारीफ कर रहा है लेकिन आज भी उसके मुंह से अपनी खूबसूरती की तारीफ और जिस तरह की अश्लील बातें वो कर रहा था उसे सुनकर उसके तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी)
चल ये सब बातें मत कर मुझे अच्छा नहीं लगता,,,
कोई बात नहीं मैं तो तुम्हारी खूबसूरती की तारीफ कर रहा था और वैसे भी कोई झूठ झूठ की तारीफ थोड़ी कर रहा था तुम हो खूबसूरत तभी तो,,,,।
(राजू के बाद खामोश हो गया वह नहीं चाहता था कि उसकी मां किसी भी तरह से नाराज हो जाए क्योंकि वह इस सफर को यादगार बनाना चाहता था उसे पूरी उम्मीद थी कि सफर के दौरान जरूर कुछ ना कुछ होगा इसलिए वह खामोश रहा,,,, लेकिन उसकी यह खामोशी मधु को अच्छी नहीं लग रही थी मधु चाहती थी कि वह कुछ ना कुछ बोलता रहे क्योंकि उसकी अश्लील बातें भी उसे अच्छी लग रही थी उसके तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रही थी खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की उस पतली गुलाबी लकीर में हलचल हो रही थी,,,,,, मधु दोनों के बीच की खामोशी को तोड़ना चाहती थी वह राजू से बात करने का बहाना ढूंढ रही थी,,,,, वह दोनों गांव से काफी दूर आ चुके थे दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था चारों तरफ खेत ही खेत थे बस थोड़ी थोड़ी दूर पर खेतों में कोई काम करता हुआ नजर आ जा रहा था बाकी सड़क पूरी तरह से खाली थी,,,,, मौसम बहुत ही सुहाना था ना धूप में छांव थी ठंडी ठंडी हवा चल रही थी आसमान में बादल जगह जगह पर नजर आ रहे थे कभी ऐसा लग रहा था कि बारिश होगी तो कभी ऐसा लग रहा था कि बारिश नहीं होगी,,,, तभी बात की शुरुआत करते हुए मधु बोली,,,)
अच्छा एक बात बता राजू तू अपने पिताजी की तरह बीड़ी या कोई नशा तो नहीं करता ना,,,
नहीं मैं बिल्कुल मैं ना तो बीड़ी पीता हूं और ना ही नशा करता हूं तभी तो मेरा शरीर देखो कैसा गठीला है,,,,
हां सो तो है देखना तू नशा पत्ती मत करने लगना,,, नशा में कुछ नहीं रखा है,,,,
मैं जानता हूं मां नशा करना बुरी बात है,,,,,,,
तेरे दोस्त लोग,,,,
लगभग लगभग तो कोई नशा नहीं करता,,,,
लेकिन मुझे लगता है कि तेरी संगत गंदे लड़कों से है तभी तो इस तरह की बातें करता है,,,
किस तरह की,,,(राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसकी मां क्या कहना चाह रही है लेकिन फिर भी वह जानबूझकर अपनी मां के मुंह से सुनना चाहता था)
अरे उसी तरह की जिस तरह की तू अभी बातें कर रहा था गंदी गंदी,,,,
अब क्या करूं मैं गांव में लड़के ही इसी तरह के हैं तो जाऊं तो जाऊं कहां,,,,,,,,
क्या सब इसी तरह की बातें करते हैं आपस में,,,
तो क्या मां,,,,,
तभी तो भी उन्हीं लोग की तरह बातें करता है लेकिन वह लोग तो अपनी मां से इस तरह की बातें नहीं करते होंगे जिस तरह से तू मुझसे करता है,,,,
यह तो नहीं मालूम लेकिन जिस तरह से तुम बोल रही थी ना कि तू नशा तो नहीं करता है मैं सच कहूं तो मुझे खूबसूरती का नशा है,,,,,, मेरी खूबसूरती का नशा मुझे सिर्फ तुमसे मिलता है तुम्हें देखते ही मुझे ना जाने क्या होने लगता है मुझे नशा होने लगता है,,,,
तू फिर शुरू हो गया,,,,
तो क्या करूं मौसम इतना सुहावना है और मेरे साथ इतनी खूबसूरत औरत होगी तो इस तरह की बातें तो होंगी ही होंगी,,,
पागल मत बन मैं कोई औरत नहीं बल्कि तेरी मां हूं,,,
लेकिन उससे पहले तुम एक औरत तुम्हारी भी जरूरते है,,, जिस तरह से दूसरी औरतों को कुछ ज्यादा की लालच होती है उस तरह से तुम्हारे मन में भी कुछ ज्यादा पाने की लालच होगी,,,।
क्या मतलब मैं तेरा मतलब नहीं समझी,,,
अब इतनी भी नादान ना बनो ,,, तुम अच्छी तरह से समझती हो मैं क्या बोलना चाह रहा हूं,,,
कसम से मैं नहीं समझ पा रही हूं कि तू क्या बोलना चाह रहा है मुझे चाहते कि कभी ना तो लालच ही है और ना ही उम्मीद,,,,
धन दौलत की बात नहीं कर रहा हूं अपने लिए सुख संतुष्टि और तृप्ति की बात कर रहा हूं,,,,
नहीं तो ऐसा कुछ भी नहीं है सब तरह से तो मैं सुखी हूं,,,
सब तरह से हो लेकिन एक मामले में तुम अभी भी पूरी तरह से संतुष्ट नहीं हो और सुखी नहीं हो,,,,
तू बोलना क्या चाह रहा है,,,,
मैं बहुत कुछ बोलना चाह रहा हूं लेकिन डर लगता है कि कहीं तुम नाराज ना हो जाओ क्योंकि मैं सब कुछ सह सकता हूं लेकिन तुम्हारी नाराजगी नहीं सह सकता,,,।
(अपने बेटे की बात सुनकर मधु का दिल धक-धक कर रहा था उसे इतना तो आभास हो गया था कि उसका बेटा कुछ गंदा ही बोलने वाला है लेकिन क्या बोलने वाला है इस बारे में उसे पता नहीं था और यही वह राजू के मुंह से सुनना चाहती थी इसलिए वह बोली)
नहीं मैं नाराज नहीं होऊंगी,,, मैं सुनना चाहती हूं कि मैं किस मामले में सुखी नहीं हूं जरा मैं भी तो देखूं क्या सच में मेरी जिंदगी अधूरी चल रही है,,,
हां मां में सच कह रहा हूं,,,,
तो बताना,,,,
नहीं जाने दो तुम नाराज हो गई तो मैं अपने आप को माफ नहीं कर पाऊंगा,,,,(राजू समझ गया था कि उसकी मां उसके मुंह से सुनना चाहती है लेकिन राजू से थोड़ा और तड़पाना चाहता था उसे और उकसाना चाहता था इसलिए बात को इधर-उधर घुमा रहा था,,,)
राजू मैं बोली ना मैं नाराज नहीं होऊंगी,,,,
और अगर नाराज हो गई तो,,,,
पागल मत बन मैं कह रही हूं ना,,,
तो खाओ मेरी कसम कि मेरी बात का अगर बुरा लगेगा तो तुम मुझसे नाराज बिल्कुल भी नहीं होगी,,,
यह कैसी बातें कर रहा है मैं तेरी कसम कभी खाई हूं क्या,,,?
तब तो तुम जरूर नाराज हो जाओगी क्योंकि बात ही कुछ ऐसी है,,,,,,
अच्छा तेरी कसम बस अब तो बता दे,,,,
चलो ठीक है जब तुम इतना कह रही हो तो बता देता हूं और तुम कसम खाई हो नाराज बिल्कुल भी मत होना,,,,
(इतना कहने के साथ ही राजू का दिल जोरों से धड़क रहा था बैल अपनी लय में आगे बढ़ रहा था बेल के पैरों में और पैसे में बंधा घूंगरू पूरे शांत वातावरण में शोर मचा रहा था,,,, दूर दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था चारों तरफ हरियाली छाई हुई थी ऐसा मौसम देखकर राजू का मन भी कुछ करने को कह रहा था लेकिन अपने आप को बड़ी मुश्किल से संभाले हुए था,,,,, कुछ देर तक वह खामोश रहा होगा देखना चाहता था कि उसकी मां फिर बोलती है या नहीं तभी थोड़ी देर गुजरा ही था कि फिर मधु बोली,,)
क्या हुआ खामोश क्यों हो गया,,,
नहीं मैं सोच रहा था कि क्या मुझे तुमसे इस तरह की बातें करनी चाहिए या नहीं करनी चाहिए,,,
अरे तो तू इतना सब तो तू मुझसे बोल चुका है और तो और खेत में जिस तरह की हरकत किया था उसे देखते हुए तुझे शर्म आ रही है मैं तो सोचकर ही हैरान हो रही हूं,,, अगर मैं तेरी हरकत से तेरी बात से नाराज हुई होती तो मैं कब से तेरे पिताजी से बता दी होती और तेरे पिताजी मार मार कर तेरी हालत खराब कर दी होते लेकिन मैं जानती हूं कि इस उम्र में जवान लड़कों से गलती हो जाती है इसलिए मैं तेरी बात पर पर्दा डाल चुकी हूं और तू है कि,,,,,
क्या सच में तुमने पिताजी से कुछ नहीं बताई हो,,,
अगर बता दी होती तो क्या तू इस हालत में होता,,,
हां बात तो सच है,,,,(इतना कहकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि उसकी हरकत के बारे में उसकी मां ने अभी तक उसके पिताजी को नहीं बताई है और ना ही किसी को बताएगी इसका मतलब साफ है कि उसकी मां को भी उसकी हरकतें अच्छी लग रही थी बस शर्म और मर्यादा का पर्दा दोनों के बीच आड़े आ रहा है,,,, राजू अपने मन में सोचने लगा कि अगर यह शर्म और मर्यादा का पर्दा दोनों के बीच से हट जाए तो उसे उसकी मां की दोनों टांगों के बीच जाने से कोई नहीं रोक सकता और उसे या पर्दा खुद ही दूर करना होगा इसलिए वह बोला,,,)
देखो मैं जो कुछ भी कहने वाला हूं उसे सुनकर तुम्हें थोड़ा गुस्सा भी आएगा या तुम उसे मानने से इनकार करो लेकिन हकीकत यही है कि तुम्हें भी ज्यादा की उम्मीद है,,,
अरे बताएगा भी,,,
देखो मैं तुम सब बातों में एकदम सुखी हो परिवार से लेकर धन दौलत खेतों में खलियान में जानवरों से सभी तरह से सुखी संपन्न हो लेकिन बिस्तर में अभी भी तुम पूरी तरह से पर्याप्त नहीं हो,,,
क्या,,, मैं अभी भी नहीं समझी तु क्या कह रहा है,,,
मैं यह कहना चाह रहा हूं मां की मुझे नहीं लगता कि पिताजी तुम्हारी प्यास बुझा पाते होंगे,,,,
यह क्या कह रहा है तू पागल तो नहीं हो गया तुझे इस तरह की बात करने में शर्म भी नहीं आ रही है,,,
देखो मैं कह रहा था ना तुम नाराज हो जाओगी अभी तुमने मेरी बात पूरी सुनी ही कहा हो,,,,
(अपने बेटे की बातें सुनकर मधु का दिल जोरो से धड़कने लगा उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी उसे समझ में आ गया था कि उसका बेटा किस मामले की बात कर रहा था,,,, राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
देखो मैं इसमें दो राय बिल्कुल भी नहीं है कि तुम्हारे जैसी खूबसूरत औरत पूरे गांव में कोई भी नहीं है तुम्हारा गदराया बदन खूबसूरत मचलती जवानी पर काबू पाना पिताजी के बस में बिल्कुल भी नहीं है पिताजी तुम्हारी उफान मारती जवानी पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाते,,, तुम्हारी खूबसूरत बदन की मचलती जवानी पर काबू पाना पिताजी के बस में बिल्कुल भी नहीं है,,,,
तू कहना क्या चाह रहा है कि मैं अभी तक तेरे पिताजी से खुश नहीं हूं,,,
यह तो मन को बहलावा देने वाली बात है मा,,,,(जिस तरह से मधु उसकी बात में हम ही भर रही थी उसकी बातों को सुन रही थी उसे देखते फिर राजू में हिम्मत आने लगी थी और राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए और एकदम खुले शब्दों में बोला) सच कहूं तो मैं पिताजी के लंड से तुम्हारी जवानी की प्यास बिल्कुल भी नहीं पिघलती होगी बल्कि पिताजी की हरकत से तुम्हारी प्यास और बढ़ जाती हो कि वह तो तुम संस्कारी औरत हो इसलिए पिताजी से ही खुश रहना की कोशिश करती हो लेकिन सच तो यही है कि तुम्हारी जवानी पर काबू पाने के लिए मर्दाना ताकत से भरे हुए मर्द की जरूरत है जिसके मोटे तगड़े लंबे लंड से तुम्हारी बुर का जमा हुआ पानी एक ही धक्के में लावा बनकर पिघल कर बाहर आ जाए,,,,(अपनी बेटी की इतनी गंदी बात सुनकर मधु का दिल बिल्कुल भी काबू में नहीं था वह बड़े जोरों से धड़क रहा था,,, उसे अपनी बुर से नमकीन पानी बहता हुआ महसूस हो रहा था वह अपने बेटे की बात सुनकर ही झड़ने लगी थी,,,, और यही हाल राजू का भी था उसका लंड पूरी तरह से अपने काबू से बाहर हो गया था वह किसी भी वक्त उसके पजामे को फाड़ कर बाहर आने के लिए मचल रहा था लंड का कड़क पन भी एकदम बढ़ गया था ऐसा लग रहा था कि लंड की नसें किसी भी वक्त फट जाएंगी,,, अपनी मां की खामोशी देखकर राजू समझ गया था कि वह उसकी बात सुनकर चारों खाने चित हो गई है और इसीलिए वह अपनी बात को और ज्यादा आगे बढ़ाते हुए बोला,,) सच में मां तुम्हें पूरी तरह से तृप्त करने की ताकत पिताजी में बिल्कुल भी नहीं है तुम्हें मोटा और लंबा लंड चाहिए पिताजी से दोगुना से भी ज्यादा जो तुम्हारी बुर की अंदरूनी दीवारों को फैलाता हुआ अंदर की तरफ जाए और उसकी रगड़ से तुम्हारी दूर का नमकीन रस बाहर निकलने लगे तुम्हारी बुर को पहले ही धक्के में एकदम गोल छल्ले की तरह बना दे तब जाकर तुम्हारी जवानी पर काबू पा पाएगा,,,, मुझे पूरा यकीन है कि पिताजी के पास ऐसा दमखम बिल्कुल भी नहीं है और ना ही ऐसा मोटा तगड़ा लंड है,,,,,,,,
(मधु को तो समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या कहें उससे तो कुछ बोला ही नहीं जा रहा था वह अपने बेटे की इतनी गंदी बात सुनकर वो झड़ चुकी थी और इस तरह से झड़ने पर वह खुद हैरान थी,,, कि उसके बेटे की हरकत पर नहीं बल्कि उसकी अश्लील गंदी बातों को सुनकर ही उसका पानी निकल चुका था,,, राजू की भी हालत खराब थी उसे इस बात का डर था कि कहीं उसकी मां सच में नाराज ना हो जाए इसलिए,,,, वह एकदम से खुश होता हुआ अपनी मां से बोला,,,)
अरे वह देखो मा बाजार आ गया,,,,,
(सामने की तरफ मधु नजर दौड़ाई तो देखी सचमुच में बाजार आ रहा था और वह सब बातों को भूल कर खुश हो गई क्योंकि बरसों बाद वह बाजार में आई थी,,,.)





