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राजू बड़ी बेसब्री से आम के बगीचे में श्याम का इंतजार कर रहा था,,,,राजू के बाद अच्छी तरह से जानता था कि श्याम आप उसे से आंख मिलाकर बात करने लायक बिल्कुल भी नहीं बचा था,,, वह पूरी तरह से राजू की मुट्ठी में आ गया था,,, आपमके पेड़ के नीचे बैठा बैठा राजू मां और बेटे के बीच हुए सारे संबंध के बारे में सोच रहा था,,,, अपने मन में अपने आप से ही बातें कर रहा था कि श्याम भला अपनी ही मां को क्यों चोदने का क्या श्याम को उसकी मां अच्छी लगती थी,,,, अपने सवाल का जवाब अपने आप से ही देते हुए राजू अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,, श्याम की मां ज्यादा खूबसूरत भले ही ना हो लेकिन,,एक मर्द को अपनी तरफ आकर्षित कर सके ऐसी बनावट उसके बदन की बराबर है बड़ी बड़ी गांड बड़ी-बड़ी चूचियां चलती है तो उसकी मटकती गांड देखकर किसी का भी लंड खड़ा हो जाए,,,,,,, वह तो खुद अपनी आंखों से उसे चुदवाते हुए देखा था उसकी बड़ी बड़ी गांड की तरफ वो खुद आकर्षित हुआ जा रहा था,,,। राजू अपने आप से ही बोला,,, जरूर श्याम अपनी मां को एकदम नंगी देख लिया होगा और अपनी मां को नंगी देखने के बाद उससे रहा नहीं जा रहा होगा,,,, और दोनों के बीच शारीरिक संबंध स्थापित हो गया,,,

राजू आम के पेड़ के नीचे बैठा बैठा श्याम और उसकी मां के बारे में बहुत कुछ सोच रहा था कि दोनों के बीच किस तरह से शारीरिक संबंध स्थापित हुआ होगा लेकिन यह समझ में नहीं आ रहा था कि क्या अपनी ही मां को चोदना ठीक है यह हो कैसे जाता है,,,, अपने ही सवालों का जवाब ढूंढने में राजू पूरी तरह से व्यस्त था राजू खुद अपनी मां की तरफ आकर्षित हो चुका था उसकी बड़ी-बड़ी खरबूजे जैसी चूचियां को देखकर उसकी लार टपकने लगती थी,,, अपनी ही मां की बड़ी बड़ी गांड देखकर उसके पजामे मैं हलचल होने लगती थी,,,, यह सब सोचने के बाद राजू अपने मन को तसल्ली देते हुए अपने आप से ही बोला,,,।

श्याम की किस्मत बहुत अच्छी है जो अपनी मां की चुदाई करता रहता है उसकी मां भी उसे बड़े प्यार से चोदने देती है,, कमी  बस यही है कि वह पूरी तरह से संतुष्ट नहीं कर पाता ,,,,उसकी मां को संपूर्ण रुप से संतुष्टि नहीं मिलती जिस तरह की वह हकदार थी,,,श्याम को अपनी मां की चुदाई करता हुआ वह देख चुका था इसलिए अपने मन में सोचने लगा कि घरेलू रिश्ते में चुदाई कोई बड़ी बात नहीं है और ना ही गंदी बस दो जिस्मो का मिलन है,,,, वैसे भी वह अपनी बड़ी बुआ की चुदाई रोज कर ही रहा था जिसमें उसकी  बुआ की पूरी तरह से राजामंदी थी,,,, घर में भी अगर बुर का जुगाड़ हो जाए तो बाहर जाने की जरूरत ही नहीं है श्याम भी नहीं कर रहा था,,,, जो कि दोनों की जरूरत थी श्याम की भी और उसकी बातें थी क्योंकि उसकी मां बरसों से अकेले ही थी पति के देहांत के बाद शरीर सुख उसे मिटा नहीं था शायद यही कारण था कि वह अपने बेटे की तरफ आकर्षित हो गई और उसके साथ चुदाई करवा कर अपनी प्यास बुझाने लगी और यही जरूरत श्याम की  भी थी,,, श्याम जवान लड़का था उसके बदन में जवानी का जोश भरा हुआ था खास करके औरतों के लिए,,, और वैसे भी श्याम जिस उम्र के दौर में था और श्याम की मां जिस उम्र के इस दौर में गुजर रही थी ऐसे में दोनों का पैर फिसल ना लाजमी था और एक बार फिर फिसलने के बाद दोनों साथ अपने आप को संभाल नहीं पाए होंगे रोज एक दूसरे से अपनी प्यास मिटाते आ रहे होंगे,,,,।

श्याम की वर्तमान स्थिति को देखकर राजू को अपनी स्थिति दयनीय नजर आ रही थी,,,, वैसे तो राजू श्याम से हर मामले में एक कदम आगे ही था लेकिन इस मामले में अपने आप पिछड़ा हुआ महसूस कर रहा था,,,, श्याम की मां उसे चोदने देती थी,,,, यही राजू के लिए अपनी किस्मत को कोसने का कारण मिल गया था,,,, भले ही गांव की औरतें उसके सामने अपनी दोनों टांगे फैलाकर अपनी बुर परोस देती है लेकिन उसे जब भी अपनी मां का ख्याल आता था तब तक उसे सब कुछ फीका सा नजर आता था उसे वह पर अभी भी याद है जब वह कुए पर से पानी निकाल रहा था और रस्सी को खींचने के लिए ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा था जिसकी वजह से पजामे में खड़ा लंड साड़ी के ऊपर से ही उसकी मां की गुलाबी बुर पर ठोकर मार रही थी,,, उस पल राजू अपने आप को दुनिया का सबसे किस्मत वाला इंसान समझ रहा था,,,। लेकिन इस समय सबसे किस्मत वाला इंसान था तो श्याम और उसी का इंतजार करते हुए राजू के दिमाग में ढेर सारी बातें चल रही थी,,,,।

इतना तो तय था कि श्याम की मां की चुदाई करने का मन राजू ने बना लिया था अभी भी उसे श्याम की मां की बड़ी-बड़ी गांड हीलती हुई नजर आ रही थी श्याम का अपनी  ही मां की बुर में लंड घुसा कर अपन‌ी कमर हीलाना याद आ रहा था और वह उस पल को याद करके पूरी तरह से उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,,,, श्याम पूरी तरह से उसकी मुट्ठी में आ गया था एक तरह से अब वह उसकी कठपुतली बनने जा रहा था,,,,,,शयाम को अपनी मां की चुदाई करते हुए पकड़ लेना एक तरह से राजू के लिए ही अच्छा हो गया था क्योंकि एक श्याम ही था जो उसके रास्ते का पत्थर बन कर उसका रास्ता रोकता था अब उसका रास्ता भी एकदम साफ हो गया था,,,,, राजु बड़ी बेसब्री से श्याम का इंतजार कर रहा था और श्याम की मां के बारे में सोच कर उसका लंड पूरी तरह से अपनी औकात में आ गया था,,,,

एक तरफ जहां राजू बहुत खुश था वहीं दूसरी तरफ शाम के चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थी उसके दिल की धड़कन आम के बगीचे की तरफ कदम बढ़ाते हुए ओर तेजी से धड़क रही थी,,,अपने मन में यही सोच रहा था कि वह पहुंचने पर राजू उसके साथ कैसी प्रतिक्रिया करेगा उसे क्या बोलेगा क्या कहेगा अपना मुंह बंद करने के एवज में उससे क्या मांगेगा जहां तक मुंह बंद करने के एवज में कुछ मांगने का सवाल था तो श्याम को पहले से ही यह अनुमान हो रहा था कि अपना मुंह बंद करने के एवज में जरूर वह उसकी मां की चुदाई करना चाहेगा,,,, और अगर ऐसा हुआ तो वह क्या कहेगा कैसे कहेगा,,, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,,,यही सोच रहा था कि उसके लिए कितनी शर्म की बात होगी कि वह खुद बोलेगा कि वह उसकी मां को चोद सकता है,,, इसमें उसकी बिल्कुल भी नाराजगी नहीं है बल्कि उसकी पूरी तरह से सहमति है,,,, यह ख्याल मन में आते ही वह शर्म से पानी पानी हुआ जा रहा था,,, उसे अपने ऊपर ही गुस्सा आ रहा था कि वह दरवाजा बंद क्यों नहीं किया,,, अगर दरवाजा बंद रहता तो शायद आज यह नोबत नहीं आती,,,,,,, जहां एक तरफ वह इस बात से शर्म का अनुभव कर रहा था कि राजू उसकी मां की चुदाई करेगा तभी अपना मुंह बंद रखेगा और दूसरी तरफ वह इस बारे में कल्पना भी करने लगा था कि जब राजू का लंड उसकी मां की बुर में जाएगा तो उसकी मां को कैसा लगेगा क्योंकि श्याम यह बात अच्छी तरह से जानता था कि राजू अपने नाम के आगे उसका लंड आधा ही है और वैसे भी उसकी मां को थोड़ा लंबा और मोटा,,,लंड चाहिए था जिससे वह पूरी तरह से संतुष्ट हो सके और जैसा उसकी मां को चाहिए था ,,, उससे भी बेहतर राजू के पास था,,,,श्याम अपने मन में सोचने लगा कि इतना तो तय है कि अगर राजू का लंड उसकी मां की बुर में गया तो उसकी मां पूरी तरह से राजू की दीवानी हो जाएगी तब उसका क्या होगा,,,, यही सब सोचकर श्याम एकदम से हैरान हुआ जा रहा था और आखिर वह कर भी क्या सकता था जिस तरह के हालात पैदा हुए थे उस तरह के हालात से वहभाग भी नहीं सकता था यार राजू को इंकार भी नहीं कर सकता था वह पूरी तरह से राजू के जाल में फंसता चला जा रहा था,,,,लेकिन एक बात से मैं और ज्यादा परेशान था कि अगर मुंह बंद रखने के एवज में अगर वह उसकी मां की चुदाई करना ना चाहे तो और वह जो कुछ भी देखा है वह सारी बातों को गांव में बता दे तो तब क्या होगा,,,, यह सोचकर ही उसके पसीने छूट रहे थे किसी और औरत या लड़की के साथ उसके शारीरिक संबंध होता तो शायद वह इतना परेशान नहीं होता लेकिन यहां तो खुद अपनी मां के साथ चुदाई करते हुए राजु ने उसे पकड़ा था,,,, इस बात को लेकर उसकी परेशानी और बढ़ती जा रही थी,,,।

यही सब सोचता हुआ वह आम के बगीचे पर पहुंच ही मेरा जहां पर एक बड़े से पेड़ के नीचे राजू आराम से बैठकर उसकी तरफ ही देख रहा था और मुस्कुरा रहा था उसकी मुस्कुराहट में बहुत सारे राज छिपे हुए थे जो कि उससे बात करने पर ही पता चलने वाला था,,,,।

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