राजू पढ़ने जाने के लिए तैयार हो गया था,,,, उसके मन में भी बेहद उत्सुकता,, थी,,,, पढ़ने के लिए नहीं बल्कि सोनी से मिलने के लिए उसके बाद खुशबू को अपने अंदर महसूस करने के लिए,,,, उसका गोरा चिकना बदन राजू के मन भा गया था,,,,,,,, जब इतनी खूबसूरत मैम साब पढ़ाने वाली होंगी तो पढ़ने में मन किसका लगेगा,,,,,,,अच्छे से तैयार होकर बालों में तेल लगाकर कभी करके घर से निकल गया था और वह भी अपनी मां और अपनी डूबा का आशीर्वाद देकर अपनी मां का पैर छूकर आशीर्वाद लेकिन उसे किसी भी प्रकार की दिक्कत नजर नहीं आ रही थी लेकिन उसकी मां की कया अनुसार उसकी बुआ के पैर छूने में उसे शर्म महसूस हो रही थी क्योंकि उसकी बुआ के साथ उसके शारीरिक संबंध जो बन गए थे और वह उस औरत के पैर छूकर कैसे आशीर्वाद ले सकता है जिसकी रात भर चुदाई करता हो,,,,,,, पैर छूते वक्त भी राजू कैसा महसूस हो रहा था कि वह उसके पैर नहीं बल्कि उसकी बुर को हाथ लगा रहा हो,,,, राजू की असहजता को गुलाटी अच्छी तरह से पहचान गई थी इसलिए बात को संभालते हुए उस पर जोर देने लगी पैर छूने के लिए और वह पैर छु कर चला गया,, गुलाबी को भी अपने भतीजे को आशीर्वाद देने में असहजता महसूस हो रही थी लेकिन फिर भी वह उसे आशीर्वाद दे दि वह भी अपने मन में यही सोच रही थी कि जो लड़का रात भर अपने मोटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई करता हूं भला हुआ कैसे ऐसे लड़के को आशीर्वाद दे सकती है,,,, क्योंकि दोनों के बीच बुआ और भतीजा का रिश्ता तो खत्म हो चुका था एक औरत और मर्द का रिश्ता शुरू हो गया था,,,,।
दूसरे लड़के की पढ़ने के लिए तैयार हो चुके थे और रास्ते में सब इकट्ठा हो गए श्याम को राजू से पहले से ही जलन होती थी जब वह कमला चाची से बातें किया करता था और कमला चाची उसके ऊपर पूरी तरह से फिदा रहती थी अब तो छोटी मालकिन क्यों वहां पढ़ने जाना था और श्याम इसीलिए राजू से असहजता महसूस कर रहा था क्योंकि राजू उन सब में सबसे आकर्षक लड़का था और जब से हमने उसके मोटे तगड़े और लंबे लंड को देखा है तब से तो वह राजू से और ज्यादा जलने लगा है,,,, वह जानता था कि छोटी मालकिन भी उस पर ही फिदा हो जाएगी और उन लोगों की दाल गलने वाली नहीं है इसीलिए तो वहां छोटी मालकिन को राजू के बारे में बता ही नहीं रहा था वह तो अपने आप ही वह राजू का पता लगा ली थी,,,,,,
रास्ते में साथ साथ जाते हुए श्याम राजू को एक तरह से धमकाते हुए बोल रहा था,,,।
देख राजु वहां पर किसी भी प्रकार की चालाकी मत करना,,,,,, नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा,,,,
क्या कर लेगा तू,,,, बोलना क्या कर लेगा तु,,, मैं वहां पर पढ़ने जा रहा हूं तेरी तरह ताका झांकी करने के लिए नहीं,,,,
इसीलिए कह रहा हूं कि वहां पर ज्यादा बनने की कोशिश मत करना,,,,(श्याम की बात सुनकर दूसरे लड़के उन दोनों को समझाते हुए अलग कर दिए,,, श्याम इस बात से हैरान था कि,,,वह कभी पलट कर जवाब नहीं देता था लेकिन अब उसकी बात का जवाब देने लगा था,,, यह बदलाव राजु में कैसे आया यह उसके समझ के बाहर था,,,, शायद यह बदलाव राजू मैं औरतों की संगत के कारण आया था वह बड़े अच्छे तरीके से औरतों को अपने लंड से संतुष्टि प्रदान कर रहा था,,,शायद औरतों को संतुष्टि प्रदान करने की ताकत की वजह से ही उसके व्यक्तित्व में बदलाव आने लगा था,,,,।
दूसरी तरफ सोनी बहुत खुश थी,,,,घर में बने गुसलखाने में वह अपने सारे कपड़े उतार कर एकदम नंगी होकर नहा रही थी,,, वैसे तो अगर वह ना भी ना आए तो कोई कह नहीं सकता था कि वह नहाई नहीं है एकदम गोरी चिट्टी होने के नाते वह हमेशा तरोताजा दिखाई देती थी लेकिन आज का दिन उसके लिए भी बहुत खास था आज वह अपने हुस्न का जादू पूरी तरह से राजू पर बिखेर देना चाहती थी,,,, इसलिए अपने बदन को रगड़ रगड़ कर नहा रही थी,,,,,,,
Soni nangi hone k bad
बड़े घराने की होने के नाते घर में ही सब सुख सुविधा मौजूद थीं,,, घर में बने गुशलखाने में आदम कद का आईना लगा हुआ थाजिसमें सोनी अपने प्रतिबिंब को देख रही थी और मन ही मन अपनी खूबसूरती पर गर्व कर रही थी,,,,,, एक-एक करके अपने सारे कपड़े उतार कर वह नंगी हो चुकी थी,,,,। केवल उसके बदन पर मरून रंग की कच्छी थी,,,,,, वह जानती थी कि गांव में कोई भी औरत कच्छी नहीं पहनती थी,,, और वैसे भी गांव में किसी औरत को कच्छी के बारे में कुछ भी पता नहीं था,,, इसलिए तो गांव की औरतें साड़ी के अंदर और सलवार के अंदर नंगी ही रहती है,,, शायद सोनी भी दूसरी औरतों की तरह कभी कच्छी ना पहनती अगर वह,,, अपने पति के साथ कुछ दिन के लिए शहर रहने ना गई होती कौन से निकलकर शहर पहुंचने के बाद वहां की चकाचौंध भरी जिंदगी देकर सोनी पूरी तरह से पागल हो गई थी,,, जल्द ही वहां पर उसने एक सहेली बना ली थी और उसी के चलते उसे इस बात का ज्ञान हुआ कि,,, साड़ी के अंदर और ब्लाउज के अंदर औरतों के लिए पहनने के लिए एक और वस्त्र होता है जिसे ब्रा और पेंटी कहा जाता है,,, लेकिन सोनी ब्लाउज के अंदर पहनने वाले वस्त्र को बुरा तो कहती थी लेकिन साड़ी के अंदर पहनने वाली पैंटी को कच्छी कहती थी,,,, और अपने सहेली के द्वारा वह अपने लिए दर्जनों अंतर्वस्त्र खरीद कर रखी थी उसकी जिंदगी बड़े अच्छे से कट रही थी लेकिन दुर्भाग्यवश उसके पति का देहांत हो गया और वह फिर से गांव वापस आ गई और अपने बड़े भाई के घर रहने लगी,,,, यहां पर आकर वह ब्रा पहनना बंद कर दी क्योंकि उसके भाई ने उसकी चूचियों को दबा दबा कर एकदम खरबूजा जैसा कर दिया था और ब्रा का साइज छोटा था और कभी कबार वह किसी खास मौके पर कच्छी पहनी थी थी जिसमें उसे काफी उतेजना का अनुभव होता था,,,।
Soni raju ko yad karke mast hote huye
आईने के सामने खड़ी होकर,,, सोनी अपनी कच्छी को अपनी नाजुक उंगलियों में फंसाकर धीरे-धीरे उतारना शुरू कर दी,,,,, और देखते ही देखते अपनी मांसल चिकनी सुडोल जांघों से होते हुए वह अपनी लंबी टांग में से उस मारो नारंग की कच्छी को निकालकर वही नीचे रखदी,,, और बड़ी प्यार भरी नजरों से अपनी दोनों टांगों के बीच बस दो इंच की ऊभरी हुई दरार को देखने के लिए जो भी हल्के हल्के बालों से घीरी हुई थी,,,,, अपनी हथेली को उस पर रखकर हल्के से दबाते हुए अपने मन में सोचने लगी कि मर्दों की सबसे बड़ी कमजोरी यही है जिसके चलते और इस दुनिया में किसी को भी अपने वश में कर सकती हैं अपना मनचाहा काम करा सकती है,,,,,, जैसा कि वह अपनी बुरके बदोलत अपने भाई को पूरी तरह से अपने वश में की हुई थी,,, और उसका भाई भी अपनी छोटी बहन के रूप जाल में पूरी तरह से बंध सा गया था,,,।
Soni ki masti
सोनी अपनी बुर और हां तेरी रख कर उसे हल्के हल्के से सहला भी रही थी और उसे रगड़ कर गर्म भी कर रही थी,,, जिससे उसके बदन में उत्तेजना की लहर दौड़ने लगी थी,,,
Soni raju k sath is tarah ki kalpna karte huye
उसे राजू याद आने लगा,,,, उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड हवा में लहराता हुआ नजर आने लगा जिसके बदौलत सोनी इतना तर कट रची थी,,,,यह सारा ताम झाम राजू के मोटे तगड़े लंबे लंड के प्रति आकर्षण का ही नतीजा था,,,वह किसी भी कीमत पर राजु के मोटे तगड़े लंबे लंड को अपनी बुर के अंदर लेना चाहती थी,,,,, उत्तेजना से भरी हुई सोनी वैसे भी पहले से ही कामुक औरत थी,,, और इस समय राजू टैलेंट को याद करके वह पूरी तरह मदहोश हो सो चुकी थी,,, उसकी बुर से काम रस टपक रहा था,,, ऊससे रहा नहीं जा रहा था और वह,,,, गुसलखाना का दरवाजा खोलकर गुसलखाने से बाहर निकल गई,, और वह भी एकदम नंगी,,, बेझिझक उसके चेहरे पर शर्म का कोई भाव नहीं था,,, वैसे भी वह जानती थी कि घर में कोई भी नहीं है और वह इस समय पूरी हवेली में एकदम अकेली थी इसलिए वह भी झिझक बिना कपड़ों के गुशल खाने से बाहर निकल गई थी और चहल कदमी करते हुए रसोई घर की तरफ जा रही थी,,,,
उसकी चाल एकदम मादक थी उसके नितंबों की थिरकन अद्भुत थी,,, कमर की बलखाहट,,, कयामत ढा रही थी छातियों की शोभा बढ़ा रही दोनों दशहरी आम सीना ताने किसी सरहद पर तैनात जवान कि तरह आगे बढ़ रही थी,,, दिन रात लाला मुंह में भरकर दबाती हुई अपनी बहन की चूची और कार आसान कर रहा था लेकिन फिर भी सोनी की चूचीयों की कडकपन बरकरार थी,,,, पतली कमर के नीचे मैं मदमस्त उभार ली हुई गांड,,, कि दोनों फांकें आपस में रगड़ खा रही थी जिससे पूरे बदन में और ज्यादा गर्मी पैदा हो रही थी,,, सोनी अपनी खूबसूरती और अपनी खूबसूरत बदन पर गर्व करते हुए और ज्यादा इतरा कर चल रही थी वह तो अच्छा था कि इस हार ने उसे देखने वाला इस समय कोई नहीं था अगर उसे हिसाब में कोई देख लेता तो शायद उसके साथ मनमानी करने पर उतारू हो जाता या तो देख भर पानी से ही उसका पानी निकल जाता वैसे भी सोने कीमत मस्त जवानी बेलगाम थी,,, और बेलगाम जवानी को काबू में करने के लिए हट्टा कट्टा नौजवान की जरूरत थी,,, जो अपने मदमस्त मोटे तगड़े लंबे लंड रुपी खूंटे में बांध सके,,,,
Soni raju ko yad karke began se maja le rahi thi
सोनी के लिए यह पहली बार नहीं था कि वह हवेली में इधर से उधर पूरे कपड़े उतार कर नंगी घूम रही हो ऐसा वह पहले भी कर चुकी थी,,,, खास करके लाला की मौजूदगी में क्योंकि वह खुद,,, अपनी छोटी बहन सोनी को घर में उसकी मौजूदगी में जब वह उस की चुदाई करके मस्त हो गया हो तब उसे बिना कपड़ों के हवेली में घूमने के लिए रहता था ताकि वह घर में इधर से उधर नंगी घूमती हुई अपनी बहन की नंगी बड़ी बड़ी गांड को देखकर और उसकी रबड़ के गेंद की तरह उछलती हुई चुचियों को देखकर फिर से जोश में आ सके और फिर से अपने लंड को खड़ा करके उसकी बुर में डालकर उसकी चुदाई कर सके और ऐसा होता भी था,,,,,
बिना कपड़ों के घर में इधर से उधर खूब मैंने सोनी को भी ज्यादा तेजना का अनुभव होता था और वैसे भी वह इस समय काफी उत्तेजित हो चुकी थी,,, रसोई घर में पहुंचते हैं अपने हाथों से तोड़ कर लाई हुई ताजी सब्जियों के बीच रखे हुए उस मोटे तगड़े लंबे बैगन को ढुंढने लगी जो कि वह आज सुबह-सुबह ही खेतों में जाकर सब्जियों के साथ तोड़कर अपने लिए लाई थी,,, उसे हाथ में लेते ही उसके गोरे गोरे गाल शर्म के मारे लाल हो गए ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके हाथों में बैगन नहीं राजू का लंड आ गया हो,,,
वह तुरंत उस बेगन को लेकर वापस गुसल खाने में आ गई,,,।
ऐसा लग रहा था कि जैसे वह गुसल खाने में बेगन नहीं बल्कि किसी जवान लड़की को लेकर आई हो इस तरह से वह काफी उत्साहित नजर आ रही थी,,, वह अपनी हथेली में उस बेगन की मोटाई को लेकर राजू के लंड के बारे में सोच रही थी,,, अपने मन में उस बैगन की तुलना राजू के लंड से कर रही थी,,,, उस पर ढेर सारा थूक लगाकर वह एक टांग उठा कर टेबल पर रख दी और उस बैगन के टॉप को अपनी गुलाबी दूर के छेद के मुहाने पर रखकर धीरे धीरे उसे अंदर की तरफ जाने लगी और अपनी आंखों को बंद कर ली,,, आंखों को बंद करके वह राजू के बारे में कल्पना कर रही थी ऐसा लग रहा था कि जैसे राजू उसकी पतली कमर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपने मौटे तगड़े लंड को उसकी बुर में डाल रहा हो,,,। इस ख्याल से सोनी पूरी तरह से उत्तेजित हो गई थी और एक ही बार में,, पूरे बैगन को अपनी बुर की गहराई में डाल दी,,, कुर्सी धीरे धीरे अंदर बाहर करते हो यह सोचने लगी कि राजू अपने लंड को उसकी बुर में डालकर धीरे-धीरे अपनी कमर हिला कर उसे चोद रहा है,,,,।
Nahane k bad
यह ख्याल उसके लिए पूरी तरह से मदहोश कर देने वाला था वह एकदम मस्त हुए जा रही थी,,,,ओहहह राजू और जोर से राजू और जोर से,,,, ऐसा कहते हुए सोनी पूरी तरह से बावली होकर बैगन से मजा ले रही थी,,,, और देखते ही देखते वह एकदम से झड़ गई,,, इतनी ज्यादा उत्तेजना का अनुभव वह पहली बार कर रही थी,,,, शांत होने के बाद वह बैंगन का पानी से धोकर वही रख दीऔर नहाने के बाद उसे अपने साथ वापस लेकर आई और रसोई घर में रखकर अपने कमरे की तरफ चल दी और वह भी उसी तरह से एकदम नंगी,,,,।
Taiyar hone k bad
थोड़ी ही देर में वो बड़े अच्छे से तैयार हो गई सोनी पहले से ही ज्यादा खूबसूरत थी लेकिन आज उसकी खूबसूरती निखर कर सामने आ रही थी और वह,,, आम के बगीचे की तरफ चल दी,,,।








