सुबह जब हरिया कि नींद खुली तो उसकी बीवी उसकी बाहों में थी एकदम नंगी,,,,,,, उसकी बड़ी बड़ी दूध से भरी हुई चूचियां उसकी चौड़ी छाती में अठखेलियां कर रही थी,,,,, मधु की खूबसूरत मासूम चेहरे को देखकर हरिया को उस पर बहुत प्यार आ रहा था और वह उसके माथे को चूम लिया,,, सुबह का समय था पक्षियों के कलरव की आवाज से पूरा शमा गूंज रहा था,,,,,,प्राकृतिक रूप से सुबह का समय होने की वजह से और बाहों में खूबसूरत बीवी के खूबसूरत नंगे बदन की गर्मी के कारण हरिया का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था,,,,,,,,, एक बार फिर से हरिया का ईमान डोल गया था हालांकि वह सुबह सुबह कभी भी इस तरह की हरकत करता नहीं था लेकिन,,,आज उसके ऊपर मधु के खूबसूरत जिस्म का नशा सवार हो चुका था,,,,, वह अपने सीने में चुप रहे अपनी बीवी की खूबसूरत बड़ी-बड़ी चूचियां की निप्पल को थोड़ा सा नीचे झुककर अपने मुंह में भर लिया उसे चूसना शुरू कर दिया,,,,, ,,,मधु अभी भी पूरी तरह से गहरी नींद में थी इसलिए उसे ऐसा एहसास हो रहा था कि उसका छोटा बेटा उसका दूध पी रहा है इसलिए बोला आराम से लेटी रही,,,, और हरिया अपनी बीवी की चूची पीने में पूरी तरह से मस्त हो चुका था,,,,यही एक पल ऐसा होता था जब हरिया अपने सारे दुख-दर्द लाचारी बेबसी को भूल जाता था और इस पल को पूरी तरह से जीने में जुट जाता था,,,,,,,,, और यही हकीकत है दुनिया के हर मर्द का यही हाल होता है चाहे कितना भी दुख सर पर हो लेकिन बिस्तर में वह सब दर्द दुख भूल जाते हैं जब उनकी बाहों में उनकी खूबसूरत बीवी या कोई खूबसूरत औरत होती है,,, अगर बिस्तर में भी मर्द संभोग के लिए लालायित ना हो तो समझ लो वास्तव में वह इंसान कुछ ज्यादा ही परेशान हैं या तो उसमें संभोग करने की शक्ति नहीं है,,,,,,।
लेकिन हरिया ऐसे मर्दों ने से बिल्कुल भी नहीं था दिन भर वह एक बेहद अच्छा इंसान बना रहता था लेकिन रात को बिस्तर में अपनी बीवी के साथ एक असली मर्द का रुप धारण कर लेता था,,, और उसकी बीवी भी बिस्तर में उससे इसी तरह की उम्मीद रखती थी जिस पर वह पूरी तरह से खरा उतरता था और यही कारण था कि मधु गांव की और गांव के चारों तरफ के पास पड़ोस वाले गांव की औरतों में सबसे ज्यादा खूबसूरत और मादक बदन वाली औरत थी ,,, जिसके पीछे गांव के सारे मर्द लार टपकाए घूमते रहते थे लेकिन मधु ने आज तक किसी गैर मर्द की तरफ आंख उठाकर नहीं देखी थी और ना ही किसी मर्द को अपने पास भी भटकने दी थी,,, वह पूरी तरह से अपने पति की वफादार थी एकदम पतिव्रता,,,,,,,,, दूसरे मर्दों का नाम लेना भी उसके लिए पाप था,,,,,,।
इसीलिए तो हरिया अपनी बीवी को भरपूर सुख देते हुए उसकी लाजवाब खरबूजे जैसी गोल गोल चुचियों को बारी-बारी से मुंह में भर कर पी रहा था,,,,,,,, हरिया भी जैसा रात को सोया था वैसा ही था एकदम नंगा,,वह, एक हाथ से अपने लंड को पकड़ कर धीरे धीरे सहला रहा था एक तरह से वह अपनी बीवी की बुर में लंड डालने के लिए अपने लंड को तैयार कर रहा था जो कि पहले से ही तैयार खड़ा था,,,,,,,
गर्मी के मौसम में सुबह की चलती शीतल हवा से बदन में ठंडक में भर देती थी लेकिन हरिया के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं था क्योंकि खटिया में वह अपनी खूबसूरत बीवी के साथ था और वह भी एक दम नंगा,,, जिसकी गर्म जवानी की तपन से सुबह के ठंडक में भी उसके माथे से पसीने छूटने लगे थे,,,,,, सुबह की पहली किरण धरती पर अपनी आभा बिखेरे इससे पहले हरिया अपनी जगह बना लेना चाहता था इसलिए अपने हाथों से निद्राधीन मधु को सरका कर पीठ के बल लेटाते हुए तुरंत उसकी मोटी मोटी जांघों के बीच आ गया,,,मधु पूरी तरह से नींद में थी लेकिन फिर भी हरिया की कामुक हरकत की वजह से उसकी गुलाबी बुर से ओस की बूंदे टपकना शुरू हो गई थी,,,, हरिया अपनी जगह बना चुका था वह एक नजर अपनी बीवी के खूबसूरत चेहरे की तरह डाला वह अभी भी पूरी तरह से नींद में थी उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारे की तरह छातियों पर लोट रही थी,,,,,, उसकी गुलाबी बुर की गुलाबी पत्तियां हल्की सी अपनी पंखुड़ियों को खोले हुए थी,,, जिसके बीच मधु का गहरा छेद नजर आ रहा था और ऐसा लग रहा था कि मानो जैसे वह खुद हीअपने पति के मोटे लंबे लंड को अपने अंदर आने के लिए आमंत्रित कर रही हो,,,,,,
अपनी बीवी की रसीली बुर को देखकर हरिया के मुंह में पानी आ रहा था,,, और वह ढेर सारा थूक अपने लंड के सुपाड़े पर लगाकर उसे अपनी बीवी के बुर के गुलाबी छेद पर जैसे ही लगाया वैसे ही मधु की नींद खुल गई,,,, पहले तो वह एकदम से घबरा गई कि कौन उसके ऊपर चढ़ा हुआ है,,, जैसे ही उसे इस बात का एहसास हुआ कि उसका पति उसे चोदने जा रहा है तो वह उसे रोकते हुए बोली ,,,।
हाय दैया यह क्या कर रहे हो जी,,,,
देख नहीं रही हो रानी मैं तुम्हें चोदने जा रहा हूं,,,,(हल्का सा मुस्कुराता हुआ हरिया बोला,,,,)
नहीं नहीं ये कोई समय है देख नहीं रहे हो सुबह हो रही है,,,
तो क्या हुआ मेरी रानी,,,, क्या सुबह-सुबह औरत को चोदा नहीं जाता,,,
अरे सब के उठने का समय हो गया है यह समय ठीक नहीं है यह सब काम के लिए,,, आप उठ जाइए और मुझे भी उठने दीजिए कपड़े भी नहीं पहने हैं,,,।
यह सब काम के लिए कपड़े पहनना जरूरी नहीं होता उसे उतारना जरुरी होता है,,,,
नहीं नहीं मैं कुछ सुनना नहीं चाहती आप उठिए,,,,।
पागल हो गई हो मेरी रानी,,, मयखाने में आकर शराब ना पिया जाए ऐसा कभी हो सकता है,,,।
अरे मैं तुम्हारी बीवी हूं कोई शराब की दुकान नहीं,,,
शराब की दुकान ही हो,,, रानी तुम्हारे बदन के कोने कोने में शराब का नशा है जिसे पी लेने के बाद और कोई नशे की जरूरत नहीं होती,,,।
बातें बनाना तो कोई आपसे सीखे,,अब, बस करिए मुझे उतनी दीजिए,,,, बहुत काम पड़ा है,,,।
कर लेना मुन्ना कि मां,,,,(इतना कहते ही हरिया ने अपनी कमर को जोर से झटका दिया,,, और उसका मोटा तगड़ा लंड गच्च आवाज के साथ पूरा का पूरा मधु की बुर में समा गया,,, मधु ईसके लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं थी,,, इसलिए वह दर्द से चिल्ला उठी,,,)
हाय दैया मर गई रे,,,,,आहहहहह,,,, दुखने लगा है जी,,,
अरे धीरे से नहीं तो राजु और गुलाबी जाग जाएंगे,,, प्रतिदिन बच्चों की मां हो गई है लेकिन फिर भी अभी भी दुखता है,,,।
तो क्या इतनी जोर से डालोगे तो दुखेगा नही,,,, जल्दी करो नहीं तो गुलाबी जाग जाएगी,,,
जब तक तुम्हें चोद नही लेता तब तक कोई जागेगा नही,,,
( और इतना कहने के साथ ही हरिया अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,, हरिया को बहुत मजा आ रहा था तीन तीन बच्चों की मां होने के बावजूद भी मधु की बुर ढीली नहीं पड़ी थी,,, इसीलिए तो हरिया पूरी तरह से अपनी बीवी पर बावला चुका था मधु भी,,, चुदाई का मजा ले रही थी,,, अपनी नजरों को उठाकर अपनी दोनों टांगों के बीच देख रही थी क्योंकि उसे भी बहुत ताज्जुब होता था जब उसके पति का मौका लंबा लंड बड़े आराम से उसकी बुर के छोटे से छेद में पूरा का पूरा घुस जाता था,,,,हरिया दोनों हाथों से अपनी बीवी के बड़े-बड़े चुचियों को पकड़कर दशहरी आम की तरह दबा दबा कर चोद रहा था,,,, पूरी तरह से अपने आप पर काबू करने के बावजूद भी उसके मुख से गर्म सिसकारी की आवाज फूट पड़ रही थी,,,,, थोड़ी देर बाद ही हरिया उसके ऊपर ढेर हो गया,,,, दोनों जल्दी से खटिया पर से उठे और अपने अपने कपड़े पहन कर अपने काम में लग गए,,, मधु घर के बाहर जाते जाते गुलाबी के कमरे की सिटकनी खटका कर उसे आवाज देकर चली गई,,, दरवाजे पर सिटकनी की आवाज सुनते ही गुलाबी की नींद एकदम से खुल गई,,,, और जब वह अपने हालात पर गौर की तो एकदम शर्म से पानी पानी हो गई,,,रात को अपने भैया और भाभी की गरमा गरम चुदाई की आवाज सुनकर वह अपनी सलवार की डोरी को खोलकर अपने हाथ से,, उंगली से अपनी बदन की गर्मी को शांत की थी लेकिन वापस सलवार की डोरी को उठा देना भूल गई थी और वह गहरी नींद में सो गई थी जो कि उसकी सलवार उसके घुटनों के नीचे चली गई थी और वह कमर के नीचे पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,,,, और वह खुद अपने भतीजे राजू को अपनी बाहों में कस के दबा कर सोई हुई थी जिसकी वजह से उसे अपनी दोनों टांगों के बीच कुछ चुभता हुआ महसूस हो रहा था,,, थोड़ा सा उठकर अपनी नजरों को नीचे की तरफ की तो हैरान रह गई क्योंकि उसकी दोनों टांगों के बीच चुभने वाली चीज कुछ और नहीं बल्कि,,,, राजू का लंड था जो कि पजामे में फुल कर तंबू बना हुआ था,,,, पल भर में ही गुलाबी की सांसे तेज हो गई और ऐसा होना लाजिमी था क्योंकि वह पूरी तरह से जवान हो गई थी,,, उसके अंगों का मादक उभार उसकी भरपूर जवानी की गवाही दे रहा था,,,।
उत्तेजना के मारे गुलाबी का गला सूखने लगा था उसकी जिंदगी का यह पहला मौका था जब उसकी दोनों टांगों के बीच किसी मर्दाना अंग का स्पर्श हो रहा था,,,,,,, अपने भतीजे को लेकर गुलाबी के मन में कभी गलत भावना नहीं आ रही थी लेकिन इस समय ना जाने क्यों उसका मन बावरा हुआ जा रहा था,,,, पजामे में बना तंबू,,, राजू के बलिष्ठ अंग को और ज्यादा उभार दे रहा था जिस पर नजर पड़ते ही और उसका रगड़ अपनी दोनों टांगों के बीच महसूस करते ही गुलाबी कि बुर अपने आप गीली होने लगी,,,। सब कुछ जानते हुए भी गुलाबी राजू को अपनी बाहों से आजाद नहीं की थी क्योंकि उसके मर्दाना अंग का रगड़ उसके मखमली अंग पर हलचल पैदा कर रहा था,,,, ना चाहते हुए भी ना जाने क्यों उसके मन में यह खयाल आया किकाश राजू का लंड उसके पजामा से बाहर होता तो वह अपनी खुद की आंखों से उस के नंगे लंड को देख पाते क्योंकि अब तक उसने अपनी जिंदगी में एक जवान लंड को देखी भी नहीं थी,,,,,,, वह ना चाहते हुए भी अपना एक हाथ आगे बढ़ा कर पजामे के ऊपर से ही राजु के लंड को पकड़ना चाहती थीं उसे छूना चाहती थी लेकिन तभी उसके मन में ख्याल आया कि,,,, कहीं राजु जाति नहीं रहा है और जानबूझकर यह नाटक कर रहा हो,,, जानबूझकर अपने लंड़ को उसकी दोनों टांगों के बीच सटाया हो,,, यह ख्याल आते ही गुलाबी घबरा गई,,, क्योंकि राजू अभी भी उसकी बाहों में था,,, वह बड़े गौर से राजू के चेहरे की तरफ देखने लगी,,,, लेकिन यह उसे ज्ञात हो चुका था कि राजू पूरी तरह से नींद में था,,,,,, और जो कुछ भी हो रहा था उसमें राजू की कोई भी गलती नहीं थी,,, यह शायद उसकी बुर की ही गर्मी की ताकत है कि राजू के लंड को खड़ा कर दी थी,,, ख्याल मन में आते ही गुलाबी के होठों पर मुस्कान तैरने लगी,,,राजू के पूरी तरह से गहरी नींद में होने की वजह से गुलाबी इस मौके का फायदा उठा लेना चाहती थी वह उसके लंड को छूकर देखना चाहती थीं ,,, और इसीलिए वह अपना हाथ आगे बढ़ा भी चुकी थी लेकिन तभी उसके अंतरात्मा से जैसे कोई आवाज आई हो अपने हाथ को वही रोक ली,,, क्योंकि अच्छी तरह से जानती थी कि जो कुछ भी हो करने जा रही थी वह बिल्कुल गलत था उसके संस्कार के खिलाफ था,,,। इसलिए वहां तुरंत अपने हाथ पीछे ले ली,,, धीरे से राजू को अपने से अलग करके खटिया पर से उठी और अपने सलवार की डोरी को बांधने लगी,,,, उसके बाद राजू को उठाने लगी मुन्ना भी उसके पास में सोया था उसे गोद में उठाकर,,, राजू को उठाई तो वह भी आंखों को मलते हुए उठ गया,,, और गुलाबी मुन्ना को बाहर ले कर चली गई,,,।


