१,,,,,,यह रोने का समय नहीं है चाची बल्कि अपने आप को संभालने का समय है अपने आप को इस मुसीबत से निकालने का समय है तुम्हें भी वही करना चाहिए जो चाचा ने तुम्हारे साथ किया है,,,,,,,(रंजीत अपनी चाची को सांत्वना देने के बहाने उसकी चिकनी पीठ को सहला रहा था और ऐसा करने में उसे अद्भुत आनंद के साथ-साथ उत्तेजना का अनुभव हो रहा था पहली मर्तबा वह अपनी चाची को संपूर्ण रूप से नग्न अवस्था में देखा था उसके नंगे बदन का कसक उसकी आंखों में पूरी तरह से नशा बनकर छाया हुआ था इससे पहले उसने कभी भी अपनी चाची को इस रूप में देखा नहीं था और ना ही कभी अपनी चाची के बारे में अपने मन में गंदे विचार लाया था लेकिन अपनी चाची को अपने ही चाचा से चुदवाते हुए देखकर उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर उसके दूध जैसा गोरा बदन देखकर उसकी बड़ी बड़ी गांड देखकर और उसके मुख से निकलने वाली गर्मागर्म सिसकारी की आवाज सुनकर उसका मन और इमान पूरी तरह से डोल चुका था,,,, लाख कोशिश के बावजूद भी वह अपने मन पर काबू नहीं कर पाया था तब जाकर वह अपनी चाची को भोगने के लिए इस तरह का खेल रच डाला था अपने ही चाचा के साथ वह गद्दारी करते हुए उसे शराब पिलाकर शराब के नशे में सारी हकीकत उसके ही मुंह से उगलवा लिया था जिसे सुनकर रंजीत की चाची एकदम सदमे में आ चुकी थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह बेहद शर्मिंदा थी और अपनी किस्मत पर वही जा रही थी वैसी का सहारा लेते हुए अपने आप को संभालने के लिए वह अपने ही भतीजे का कंधे का सहारा लेकर रो रही थी,,,,,)
रंजीत सिंह इस तरह से अपनी चाची के कपड़ों को खोलते हुए

चाची मैं तुम्हें बहुत पहले ही यह सब बता देना चाहता था लेकिन मुझे डर लगता था कि कहीं हकीकत जाने के बाद तुम्हें विश्वास नहीं हुआ तो मेरा जीना दूभर हो जाएगा,,,, लेकिन जब मेरी आंखों के सामने ही चाचा जी ने लाला की बहन के साथ अश्लील हरकत की है और अपना मन का इरादा बताएं तब मुझसे रहा नहीं गया और तब मैं चाचा जी की सच्चाई तुम्हारे सामने लाना चाहता था इसीलिए आज यह सब नाटक रचना पड़ा,,,,, यही सही मौका है चाची अपनी आंख पर पड़े पर्दे को हटाकर सच्चाई को हकीकत को देखने की कोशिश करो अगर तुम नहीं जागी तो चाचा जी तुम्हें हमेशा के लिए सुला देंगे ,,,, जिस नाम का सिंदूर तुम अपने माथे पर सजाती हो उसी के नाम का सिंदूर कोई और लगाने लगेगा और तुम राख हो जाओगे क्योंकि तुम चाचा जी को नहीं जानती चाचा जी तुम्हें देखने में सीधे साधे लगते हैं लेकिन जल्लाद है जल्लाद तुम्हें रास्ते से हटाने का पूरा मन बना लिए हैं,,,,
(हकीकत को सुनने के बाद रंजीत की चाची अंदर ही अंदर सिहर उठी थी उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें वह एकदम घबराई हुई थी अपने कानों से अपने पति की दरिंदगी भरी बातों को सुनकर उनके इरादों को जानकर और रंजीत के मुंह से सारी हकीकत को सुनने के बाद उसे भी लगने लगा था कि उसके पति उसे मार डालेंगे उसे अपने रास्ते से हटाकर उसकी सौतन को घर में लाकर उसे बीवी का दर्जा देंगे,,,,, वह अपने आप को संभालते हुए रंजीत के कंधों पर से अपने सिर को उठाई और रंजीत की आंखों में देखते हुए बोली,,,,)
अपनी चाची के खूबसूरत हुस्न को देखकर पागल होता हुआ रंजीत

मैं क्या करूं रंजीत मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा है तू ही कोई रास्ता दिखा मैं मरना नहीं चाहती,,,,
पागल हो गई हो क्या जी मेरे होते हुए तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता चाचा जी तुम्हें मार नहीं सकते मैं तुम्हें वादा करता हूं अब मैं तुम्हारे और चाचाजी के बीच ढाल बनकर खड़ा रहूंगा मुझ पर तो भरोसा है ना चाची,,,,(ऐसा कहते हुए रंजीत उत्तेजना से भरा जा रहा था वह धीरे-धीरे अपनी चाची के खूबसूरत गोल गोल चेहरे को अपने दोनों हथेली में ले लिया था मानो जैसे एक पति या प्रेमी अपनी प्रेमिका या पत्नी के खूबसूरत चेहरे को अपनी दोनों हथेलियों में ले लेता है,,,,, आज किसी भी तरह से वह अपनी चाची को हासिल कर लेना चाहता था क्योंकि उसके चाचा जी पूरी तरह से नशे की हालत में अपने कमरे में डूब कर सो रहे थे और यही मौका भी था अपनी चाची को बहकाने का,,,, रंजीत की हरकत से एक अजीब सी हलचल उसकी चाची के भी तन बदन में होने लगी थी वह भी ना जाने क्यों अपने पति की हकीकत जानने के बाद अपने भतीजे के प्रति जैसे उसका प्यार उमड़ रहा हो इस तरह से उसकी आंखों में अजीब सी खुमारी जाने लगी थी वह अपने भतीजे की आंखों में देखे जा रही थी और रंजीत अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,) बोलो ना चाची मुझ पर तो भरोसा है ना तुम्हें,,,,
अब तो तेरा ही भरोसा है रे मैं तो इस हवेली में बिल्कुल अकेली पड़ गई हूं,,,
रंजीत सिंह और उसकी चाची कुछ इस तरह से

ऐसा कभी मत सोचना चाची अभी मैं जिंदा हूं,,, चाचा जी ना जाने क्यों घर में इतनी खूबसूरत बीवी छोड़कर बाहर औरतों के पीछे घूमते रहते हैं जिसे अपने घर में लाना चाहते हैं वह तुम्हारी खूबसूरती के आगे तुम्हारे पैरों की धूल बराबर भी नहीं है,,,,,,,(इस तरह की तारीफ से युक्त बातें करते हुए रंजीत अपने होठों को अपनी चाची के लाल-लाल होठों की तरफ बढ़ाई जा रहा था और एक औरत होने के नाते अपनी खूबसूरती की तारीफ सुनकर वह गदगद हुए जा रही थी वह भी भावनाओं में बहकर आई थी और देखते ही देखते रंजीत अपने प्यासे होठों को अपनी चाची के लाल-लाल होठों पर रख दिया पल भर के लिए उसकी चाची अपने होठों को पीछे खींचने की कोशिश की क्योंकि वह भी एक संस्कारी औरत थी लेकिन रंजीत की बातों को सुनकर उसके बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी जिस के बहकावे में आकर वह अपने आप को रोक नहीं पाई और जैसे ही हो आपने लाल-लाल होठों को पीछे की तरफ ले गई थी वैसे ही हल्के से उसे आगे की तरफ लाई बस फिर क्या था रंजीत को खुला दौर में चुका था इतने से ही वह अपनी चाची की भावनाओं को समझ गया था और अगले ही पल अपने होठों को तुरंत आगे बढ़ाया और अपनी चाची के लाल लाल होठों को अपने मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया,,,, रंजीत की चाची पूरी तरह से मस्त हो गई वह भी अपने भतीजे का साथ देने लगी अच्छे बुरे के बीच का फर्क करने की क्षमता उसमें बिल्कुल भी नहीं रह गई थी वह एक तरफ अपने पति की बेवफाई से ग्रस्त थी और दूसरी तरफ अपने भतीजे की बातों से मस्त थी इसलिए इस समय उसे यह सब बिल्कुल भी गलत नहीं लग रहा था रंजीत तो इसी पल के लिए पागल था इसी पल का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रहा था और वह पल आज उसकी मुट्ठी में आ चुका था वह पागलों की तरह अपनी चाची के लाल लाल होठों का रसपान करते हुए उसे अपनी बाहों की कैद में कसने लगा था देखते ही देखते अपनी चाची को अपनी छाती से एकदम से लगाकर उसके होठों का रसपान कर रहा था और उसकी कड़क चूचियों को अपनी छाती पर चुभता हुआ महसूस कर रहा,,,,,था,,,, और मन ही मन अपने चाचा को गाली देते हुए बोल रहा था कि मादरचोद कितना बेवकूफ है मैं इतनी सुंदर औरत है फिर भी बाहर भटकता रहता है,,,,,, रंजीत पहली बार इतनी सुंदर नारी को अपनी बाहों में लेकर उसके होठों का रसपान कर रहा था जभी सच था कि अभी तक उसकी चाची को गर्भवती होने का मौका प्राप्त नहीं हुआ था इसलिए वह और ज्यादा दुखी थी,,,,,,।
अपनी चाची की बुर से खेलता हुआ रंजीत

रंजीत किसी भी तरह से अपनी पकड़ को ढीली नहीं करना चाहता था वह जानता था कि अगर किसी भी वक्त उसकी चाची का स्त्रीत्व जाग गया तो यह सुनहरा मौका उसके जीवन की कालीख बनकर रह जाएगी इसीलिए वो किसी भी तरह से अपनी चाची पर पूरी तरह से काबू कर लेना चाहता था और इसीलिए वह अपनी चाची को बाहों में लिए हुए ही उसे बिस्तर पर झुकाना शुरू कर दिया और देखते-देखते वह अपनी चाची को पीठ के बल लेटा कर उसके ऊपर पूरी तरह से छा गया था,,,,,,, रंजीत अपनी चाची को पीट के बल लेटा कर उसके ऊपर उसकी दोनों टांगों के बीच लेटा हुआ था,,,, जिससे उसकी चाची को अपनी दोनों टांगों के बीच अपनी बुर पर अपने भतीजे का लंड ठोकर मारता हुआ महसूस हो रहा था,,, और इस एहसास से तो वह और ज्यादा व्याकुल हुए जा रही थी,,,,,।
रंजीत अपनी उत्तेजना को काबू नहीं कर पा रहा था और पल-पल अपनी चाची की उत्तेजना को बढ़ाता जा रहा था और लगातार अपनी चाची को पूरी तरह से मदहोश कर देने के हेतु वह जानता था कि उसका लंड इस समय साड़ी के ऊपर से ही उसकी चाची की बुर पर ठोकर मार रहा है ,,, इसलिए बाहर अपनी कमर को अपनी चाची की बुर पर उठाता गिराता था जिससे यह एहसास हो रहा था कि मानो कि जैसे वह उसकी चुदाई कर रहा हो,,,, रंजीत की चाची मदहोश में जा रही थी अभी भी दोनों के बीच चुंबन का क्रियाकलाप जारी था इसी दौरान वह नीचे से भी अपनी चाची को मदहोश करते हुए उसके दोनों खरबूजा को भी दोनों हाथों में पकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा भले ही रंजीत की चाची के खरबूजे ब्लाउज के अंदर कैद थे लेकिन फिर भी रंजीत को एहसास हो रहा था कि मानों जैसे वह अपनी चाची की नंगी चूचियों को दबा रहा हो,,,,,,
रंजीत सिंह और उसकी चाची

रंजीत की चाची की नथुने से गरमा गरम सांसे अंदर बाहर हो रही थी जिससे रंजीत और ज्यादा मदहोश हो जा रहा था वह अपनी चाची के लाल-लाल होठों का रसपान करते हुए भी उसके ब्लाउज का बटन खोलने लगा और देखते ही देखते वह अपनी चाची के ब्लाउज के सारे बटन को खोल कर उसकी चूचियों को ब्लाउज की कैद से आजाद कर दिया,,,,,,, इस दौरान रंजीत की चाची ने उसे रोकने की बिल्कुल भी कोशिश नहीं की थी और इसी से रंजीत की हिम्मत बढ़ने लगी थी और उसे इस बात का एहसास हो गया था कि आप उसकी चाची रुकने वाली नहीं है और इसी अवसर का लाभ लेते हुए वह अपने होठों को अपनी चाची के होठों से अलग किया और धीरे से वह अपने चेहरे को ऊपर की तरफ उठाया और अपनी नजरों को अपनी चाची की दोनों चुचियों पर स्थिर कर दिया और गहरी गहरी सांस लेते हुए बोला,,,,।
विक्रम सिंह की बीवी अपने भतीजे से मजा लेते हुए

मैंने आज तक इतनी लाजवाब और खूबसूरत चुचियां नहीं देखी तुम सच में चाची स्वर्ग की अप्सरा लगती हो,,,,(और इतना कहने के साथ ही अपनी चाची की दोनों नंगी सूचियों को दोनों हाथों में पकड़ लिया और उसे जोर जोर से दबाने लगा रंजीत की चाची को भी स्वर्ग का आनंद प्राप्त हो रहा था वह रंजीत की तरफ देखी और रंजीत अपनी चाची की तरफ दोनों की नजरें आपस में टकराई और शर्म की लालिमा रंजीत की चाची के गोरे गालों पर छाने लगी और वह सुर्ख लाल हो गए इसी मौके का फायदा उठाते हुए रंजीत अपनी चाची की आंखों में आंखें डाल कर देखते हुए,,,,,,, धीरे से अपनी चाची की चूची के छुआरे को अपने होठों के बीच ले लिया और जैसे ही वह अपने होठों के बीच अपनी चाची के छुहारे को लिया उसकी चाची एकदम से सिहर उठी और उसके मुख से गर्मागर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,यसयहहहहहहह आहहहहहहहह,,,।
विक्रम सिंह की बीवी मजा लेते हुए

यह आवाज आजादी की थी अपने पति की कैद से छूटने की आजादी अपने पति की बेवफाई से बदला लेने की आजादी अपने खूबसूरती पर गर्व करने की आजादी और अपने बदन की प्यास को सही मायने में बुझाने की आजादी और इस आवाज को सुनकर रंजीत सिंह पूरी तरह से मदहोश हो गया और पागलों की तरह जितना हो सकता था उतना अपनी चाची की चूची को छुहारा सहित अपने मुंह में लेकर पीना शुरू कर दिया ऐसा लग रहा था कि मानो कोई छोटा बच्चा उसका दूध पी रहा हो,,, रणजीत सिंह की बीवी भी पूरी तरह से मजा ले रही थी आज तक उसने अपने पति के साथ इस तरह का आनंद प्राप्त नहीं की थी क्योंकि वह बिस्तर पर अपने पति का साथ शर्म और संस्कार के मारे थे नहीं पाती थी,,,, लेकिन आज उसके दिल में भी कहीं ना कहीं अपने पति से बदला लेने की आग थी जिसकी बदौलत वह अपने भतीजे के साथ बिस्तर पर उसका पूरा साथ देते हुए आनंद ले रही थी,,,,,
विक्रम सिंह की बीवी की खूबसूरती के मामले में किसी से कम नहीं थी गोरा बदन मांसल देह बड़े-बड़े गोल-गोल नितंब खरबूजे जैसी चूचियां एक मर्द को आकर्षित करने के लिए सब कुछ उसके पास था लेकिन विक्रम सिंह औरतों का शौकीन था इसलिए घर की मुर्गी उसके लिए दाल बराबर थी लेकिन आज इसी दाल से रंजीत अपनी भूख मिटा रहा था,,,,,, रंजीत भी कई दिनों से प्यासा था झुमरी की कसर वह अपनी चाची से उतार लेना चाहता था इसलिए उसकी बड़ी बड़ी चूचीयो से बराबर का खेल रहा था,,,,, रंजीत सिंह भी इस खेल में पूरी तरह से खिलाड़ी था क्योंकि वह भी सही जवानी का स्वाद चख चुका था इसलिए बिस्तर पर देर ना करते हुए वह तुरंत अपनी चाची की साड़ी की गिठान को खोलने लगा और उसकी चूची का रसपान लगातार करते रहा,,,, देखते ही देखते स्तनपान करते हुए भी रंजीत अपनी चाची की साड़ी को खोलना शुरू कर दिया और उसकी चाची भी उसका पूरा सहयोग देते हुए शादी को उतारने में उसकी मदद करने लगी,,,,।
अपनी चाची की जमकर चुदाई करता हुआ रंजीत

साड़ी के उतरते ही रंजीत सिंह पेटीकोट की डोरी को अपने हाथ से पकड़ कर जोर से खींच लिया और कमर पर कसी हुई पेटीकोट एकदम से ढीली हो गई,,,, और फिर पेटीकोट को उतारे बिना ही पेटीकोट के अंदर अपना हाथ ले जाकर वहां सीधे अपनी हथेली को अपनी चाची की बुर पर रख दिया जो की पूरी तरह से दहक रही थी,,,,, अपनी गरमा गरम बुर पर अपने भतीजे की हथेली को महसूस करते ही वह एकदम से पानी पानी हो गई और एकदम से कसमसाने लगी,,,,सहहहहह आहहहहहहह
क्या हुआ चाची बहुत मजा आ रहा है क्या,,,,
पूछ मत ना जाने क्या हो रहा है बदन में,,,,
चाची तुम बहुत खूबसूरत हो स्वर्ग से उतरी हुई आप सारा की तरह लगती हो लेकिन फिर भी तुम्हारा यह हाल है शायद चाचा जी तुम्हारे लायक बिल्कुल भी नहीं है,,,,, तभी तो तुम्हें जीवन का इतना अनमोल सुख देने में असफल साबित हो रहे हैं लेकिन तुम चिंता मत करो चाचा मैं तुम्हारी सारी जरूरतें पूरी करूंगा,,,,,(ऐसा कहते हुए रंजीत सिंह अपनी चाची की मदहोशी को और ज्यादा बढ़ाते हुए उंगली से उसकी बुर को कुरेद ने लगा जिससे उसकी चाची की मदहोशी और ज्यादा बढ़ते जा रही थी,,,,,,,, और फिर एक बार फिर से अपनी चाची के लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख दिया जिसका साथ उसकी चाची बराबर देने लगी और फिर थोड़ी ही देर में वहां अपनी चाची के लाल लाल होठों से अपने होठों को हटाकर धीरे-धीरे चुंबन करता हुआ नीचे की तरफ बढ़ने लगा जैसे ही नाभि के करीब आया वह अपनी जीभ निकालकर अपनी चाची की गहरी नाभि को चाटना शुरू कर दिया जिससे उसकी चाची की मदहोशी और ज्यादा बढ़ने लगी वह पूरी तरह से मस्त है जा रही थी बार-बार उसकी बुर से मदन रस का बहाव हो रहा था,,,,।
रंजीत सिंह और उसकी चाची

रंजीत सिंह आज बहुत खुश था क्योंकि पहली बार वह अपनी चाची को हासिल करने कि सोचा और आज उसकी चाची बिस्तर पर थी जिसके कपड़े उतार कर वह उसे नंगी करने जा रहा था देखते ही देखते रंजीत अपनी चाची की पेटीकोट को दोनों हाथों से पकड़कर उसे नीचे की तरफ किसके लगा लेकिन भारी-भरकम गांड के दबाव के नीचे होने के कारण पेटीकोट नीचे की तरफ नहीं सरक रही थी,,, जिसके कारण खुद उसकी चाची उसका साथ देते हुए अपनी भारी-भरकम गांड को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा ली और,, रंजीत ने तुरंत पेटीकोट को एक झटके से नीचे की तरफ खींच लिया और अगले ही पल वह अपनी चाची को पूरी तरह से निर्वस्त्र कर दिया उसकी चाची अपने ही बिस्तर पर पूरी तरह से नंगी थी,,,,, अपनी चाची के गोरे-गोरे नंगे बदन को देखते ही रंजीत की आंखें चोंधीया गई,,,, उत्तेजना के मारे उसकी सांसे ऊपर नीचे होने लगी ,,,,,, आज तक उसने इतनी खूबसूरत औरत नहीं देखा था इसलिए फटी आंखों से अपनी चाची की जवानी को देखते हुए वह बोला,,,।
चाची सच में चाचा एकदम पागल है तुम्हारी जैसी जवानी से भरी हुई औरत पाकर भी दूसरी औरतों के पीछे घूम रहे कसम से मेरी अगर ऐसी औरत होती तो मैं तो दिन रात उसे बिस्तर पर लेकर ऐसे ही पड़ा रहता,,,।
(इतना सुनते ही वह एकदम से शर्मा गई और शर्मा कर अपनी नजर को दूसरी तरफ घुमा ली रंजीत भी औरतों को खुश करना अच्छी तरह से जानता था इसलिए धीरे-धीरे वह अपनी चाची की दोनों टांगों के बीच अपनी जगह बना लिया और अपनी चाची की बुर के करीब अपने होठों को ले जाकर के गहरी सांस लेकर उसकी खुशबू को अपने अंदर लेने लगा जिसके कारण उत्तेजना के मारे रंजीत की चाची उसकी तरफ देखने लगी और रंजीत भी अपनी चाची की तरफ देखने लगा दोनों की नजरें आपस में टकराई लेकिन इस बार रंजीत की चाची शर्मा कर अपनी नजरों को दूसरी तरफ नहीं घुमाई बस रंजीत को देखती रही व रंजीत की हरकत को देखना चाहती थी और देखते-देखते रंजीत अपनी चाची की आंखों में देखते हुए अपने होठों को अपनी चाची की फूली हुई बुर पर रख दिया जो की कचोरी की तरह एकदम फुल चुकी थी,,,, रंजीत की इस हरकत पर उसकी चाची एकदम से सिहर उठी उत्तेजना के गोले उसके बदन से उठने लगे उत्तेजना की चिंगारी उसके बदन के हर एक कोने से फुटने लगी और वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और कसमसाने लगी,,,, उसकी मोटी मोटी जांघों में थरथराहट होने लगी और रंजीत तुरंत अपने दोनों हाथों से उसकी मोटी मोटी जाऊंगा को थाम लिया और अपनी फोटो को पागलों की तरह उसकी बुर पर रगड़ना शुरु कर दिया यह अद्भुत था रंजीत की चाची के लिए क्योंकि इस तरह से धीरे-धीरे प्यार तो उसके पति ने भी नहीं किया था लेकिन आज रंजीत सिंह पूरी तरह से अपनी चाची पर छा गया था और अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी बुर को चाटना शुरू कर दिया था वह मदहोश में जा रही थी वह बिस्तर पर तड़पा रही थी उत्तेजना के मारे अपने सर को इधर उधर भटक रहे थे और रंजीत पागलों की तरह अपनी चाची की बुर को रसमलाई की तरह चाट रहा था,,,,।
अपनी खूबसूरत चाची पर रंजीत सिंह अपना दम दिखाते हुए

लेकिन अब उसके लिए सब्र करना बड़ा मुश्किल हो जा रहा था क्योंकि अब उसकी चाची से भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह तुरंत अपनी चाची की बुर पर से अपने होठों को हटाया और तुरंत अपने कपड़ों को उतारकर एकदम नंगा हो गया अपने भतीजे के मोटे तगड़े लंड को देखकर विक्रम सिंह की औरत के बदन में अजीब सी हलचल होने लगी वह मदहोश होने लगी और अगले ही पल रंजीत सिंह दोनों टांगों के बीच जगह बनाते हुए अपने लंड को अपनी चाची की बुर में डालना शुरू कर दिया पहले से ही रंजीत की चाची की बुर पानी पानी हो चुकी थी इसलिए गीली बुर पाकर एक झटके में ही रंजीत का लंड उसकी चाची की बुर में घुस गया और फिर वह अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,।
रंजीत सिंह की चाची मदहोश हुए जा रही थी वह इतनी उत्तेजना कभी भी महसूस नहीं की थी जितना कि आज महसूस कर रही थी,,,, रंजीत अपनी चाची की बड़ी बड़ी चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर अपनी कमर हिला रहा था और उसकी चाची पूरी तरह से मस्त होकर अपने भतीजे से छुड़वा रही थी आज पहली मर्तबा था जब वह अपने पति को छोड़कर किसी गैर मर्द के साथ जिस्मानी ताल्लुकात बना रही थी और इस संबंध से वह पूरी तरह से तृप्त हो रही थी वह मस्त हो रही थी इतना सुख से आज तक कभी प्राप्त नहीं हुआ था शायद विक्रम सिंह ही उसके साथ बिस्तर पर नरमी से कभी पेश नहीं आता था बस जब भी आता था तो उसे नंगी करके चोदने लगता था जिससे उसकी बुर कभी गीली हो ही नहीं पाती थी और उसे दर्द महसूस होता था लेकिन रंजीत ने उसे आज उसे अद्भुत सुख प्रदान किया था,,,,,,,,,
रंजीत सिंह और उसकी चाची

थोड़ी ही देर में दोनों गर्म सांसों के साथ झड़ गए और रंजीत अपनी चाची के बगल में ही पीठ के बल धम्म से गिर गया और गहरी गहरी सांस लेने लगा,,,, थोड़ी देर बाद जब आशंका तूफान शांत हुआ तो उसकी चाची बोली,,,,
अगर उनको पता चल गया तो,,,
चाचा को कभी भी पता नहीं चलेगा तुमने जो आज की हो यह चाचा जी की बेवफाई का बदला है और इसे हमेशा अपने सीने में संजो कर रखना क्योंकि ऐसे पति के साथ पत्नियों को ऐसा ही सलूक करना चाहिए और देखना चाचा जी तुम्हें रास्ते से कभी नहीं हटा पाएंगे क्योंकि अब तुम मेरी अमानत हो और मैं तुम्हारा बाल भी बांका नहीं होने दूंगा,,,,,।
(अपने भतीजे की बात सुनकर वह एकदम गदगद हो गई और खुद उसके माथे पर अपने होंठ रख कर उसे चुम ली आज रंजीत बहुत खुश था क्योंकि आज उसकी खूबसूरत चाची उसकी हो चुकी थी रंजीत सिंह के दिमाग में बड़ी गहरी चाल चल रही थी वह अपने चाचा को अपने रास्ते से हटा देना चाहता था और फिर उसकी जायदाद के साथ-साथ उसकी बीवी पर भी पूरी तरह से कब्जा कर लेना चाहता था क्योंकि आज उसकी बीवी भी उसकी हो चुकी थी और जिस तरह का जहर रंजीत ने अपनी चाची के कानों में खोला था उसके चलते उसकी चाची को बिल्कुल भी शक नहीं होता,,,,, थोड़ी देर में रंजीत सिंह की चाची गहरी नींद में सोने लगी और रंजीत सिंह धीरे से बिस्तर पर से उठा और अपने कपड़े पहन कर अपनी चाची के कमरे से बाहर आ गया लेकिन दरवाजा हल्का सा खुला छोड़ दिया था वजह से ही कमरे से बाहर निकल कर आगे की तरफ जाने लगा पीछे से घर का नौकर उसे अपनी मालकिन के कमरे से निकलता हुआ देख लिया और साथ में यह भी देख लिया कि वह अपने कपड़ों को दुरुस्त कर रहा था अपने कुर्ते के बटन को बंद कर रहा था उसे कुछ दाल में काला नजर आया,,,, वो धीरे से अपनी मालकिन की कमरे की तरफ गया तो दरवाजा हल्का सा खुला हुआ था और वह थोड़े से खुलें दरवाजे के अंदर झांका तो अंदर का नजारा देखकर दंग रह गया,,,,, अंदर उसकी मालकिन एकदम नंगी पीठ के बल लेटी हुई थी और उसकी गोरी गोरी बड़ी बड़ी गांड दिखाई दे रही थी और यह नजारा देखकर विक्रम सिंह का नौकर एकदम से चौक गया और वह तुरंत उस जगह से हट गया,,,,,
पहली बार विक्रम सिंह की बीवी चुदाई से मस्त हुई थी

धीरे-धीरे शाम ढलने लगी थी,,,, विक्रम सिंह अपने भतीजे के साथ बैठा हुआ था लेकिन आज वह अपने भतीजे को देखकर अंदर ही अंदर क्रोधित नजर आ रहा था उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था उसने तुरंत अपने भतीजे को आदेश दिया,,,,।
रंजीत हम कल का इंतजार नहीं कर सकते कल तक हो सकता है कि लाला कोई जुगाड़ कर ले या कुछ नया बवाल खड़ा कर दे इसलिए इसी समय अपने आदमी को ले जाओ और लाला उसकी बहन को उठाकर गोदाम पर पहुंचे मैं भी वहीं पहुंचता हूं,,,,
यह हुई ना बात चाचा जी,,,, कल करे सो आज कर,,,,, मैं भी अपने आदमियों को इकट्ठा करता हूं और लाला और उसकी बहन को उठा कर लाता हूं,,,,
जा जल्दी कर मैं गोदाम के लिए निकलता हूं देखना कोई गड़बड़ ना हो,,,,

कोई गड़बड़ नहीं होगी चाचा जी,,,,,
(और इतना कहने के साथ ही वह अपने आदमियों के साथ लाला की हवेली के लिए निकल गया विक्रम सिंह अपने भतीजे को जाते हुए देख रहा था और मन में ठान लिया था कि आज रंजीत का भी काम तमाम हो जाएगा क्योंकि उसके नौकर ने सब कुछ विक्रम सिंह को बता दिया था और जब से विक्रम सिंह अपनी बीवी और अपने भतीजे की करतूत के बारे में सुना था तब से वह आग बबूला हो रहा था उसके सर पर खून सवार था लेकिन वह अपने भतीजे को ऐसी मौत नहीं देना चाहता था जिससे लोगों को शक हो कि एक चाचा ने ही अपने भतीजे को मार डाला वह उसे इस तरह से मारना चाहता था कि किसी को कानों कान खबर तक ना हो किसी को शक ना हो कि उसके भतीजे को मारा किसने,,,,, तभी वह अपनी बीवी की तरफ देखा जो कि घर का काम कर रही थी ,,,, और अपने मन में ही कहा कि इससे तुम्हें बाद में निपट लूंगा बहुत आग लगी है इसकी दूर में,,,,।
इतना कहने के साथ ही वह भी गोदाम के लिए निकल गया आज के आज वह अपना सारा हिसाब-किताब पूरा कर लेना चाहता था लाला के साथ भी और अपने भतीजे के साथ भी,,,।

