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अपनी बीवी की अपने ही बेटे के साथ काम लीला को देखकर हरीया अंदर ही अंदर टूट चुका था उसे अपने बीवी और अपने बेटे से इस तरह की उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी लेकिन इस तरह से वह अपने मन में यही सोच रहा था कि यह सब उसके ही करनी का फल है अगर वह अपनी छोटी बहन के साथ शारीरिक संबंध बनाते हुए पकड़ा ना जाता तो शायद उसका बेटा इस तरह की हिम्मत कभी ना करता क्योंकि वह अपने बेटे को अच्छी तरह से जानता था लेकिन इस बात को वह बिल्कुल भी नहीं जानता था कि राजू पहले का राजू नहीं रहा था वह बिल्कुल बदल चुका था हरिया को ऐसा ही लग रहा था कि उसके पकड़े जाने के बाद ही राजू अपनी मां के साथ सारे संबंध बनाकर उसके साथ मजा कर रहा था लेकिन यह नहीं जानता था कि उसकी बहन के साथ संबंध बनाने से पहले ही राजू अपनी मां की चुदाई करना शुरू कर दिया था,,,,,,,,

रात को जो कुछ भी अपनी आंखों से हरियाने देखा था वह दृश्य बार-बार उसकी आंखों के सामने घूमने लगते थे जिसके बारे में सोच कर ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी थी जहां एक तरफ उसे अपने बीवी और बेटे पर गुस्सा आता था वही दोनों की कामलीला का नजारा देख कर उसके बारे में सोच कर उसके तन बदन में भी उत्तेजना कि लहर दौड़ने लगती थी जिस तरह से उसके बेटे ने अपनी मर्दानगी भरी ताकत के तौर पर अपने मोटे तगड़े लंड को अपनी मां की बुर में डाला था वह हरिया के लिए काबिले तारीफ था ऐसा हरिया सोच रहा था,,,,,,, क्योंकि पहली बार में ही राजू ने जिस तरह से मेहनत करके अपनी मां को अपनी मर्दानगी ताकत का दीवाना बना दिया था उसे देखकर खुद हरिया हैरान था वैसे तो अपने बेटे के मोटे तगड़े लंड को देख कर उसे इसी तरह की उम्मीद थी लेकिन यह उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी कि उसकी बीवी इतनी जल्दी मान जाएगी,,,,

Raju or soni

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हरिया इस बारे में ही सोच रहा था कि कैसे उसकी बीवी बेशर्म रंडी की तरह अपने ही बेटे के साथ चुदाई का मजा लूट रही थी उसे बिल्कुल भी शर्म नहीं आई किसी से उसने जन्म दिया उसी के लंड को अपनी बुर में लेकर मस्त हो रही थी,,,, हरिया यही सोच रहा था कि अपने बेटे की मनसा जाने के बाद उसकी बीवी उसे धक्के देकर कमरे से बाहर निकाल देगी लेकिन सब कुछ पलट चुका था जिसे धक्का देकर कमरे से बाहर निकालना था उसे खुद अपनी दोनों टांगे फैलाकर उसे अपने ऊपर ले कर उसके धक्कों का मजा ले रही थी,,,,,

सुबह जब हरिया घर पर पहुंचा तो अपनी बीवी और अपने बेटे से नजर मिलाने तक की उसमें ताकत नहीं बची थी वह पूरी तरह से टूट चुका था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि इस मुसीबत से कैसे निकला जाए,,,, घर पर पहुंचते ही मधु तुरंत एक लोटा पानी भर कर अपने पति के पास गई और उसे पानी भरे लौटे को पकड़ाते हुए बोली,,,।

आप आ गए आप तो चले जाते हैं लेकिन रात भर मेरी क्या हालत होती है आप नहीं जानते आपके बिना तो मेरी रात गुजरती नहीं है रात भर में खटिया पर करवट बदलते रह गई,,,,

Soni or raju ka bistar par Masti

(हरिया हैरान था अपनी बीवी की सती सावित्री वाली बातों को सुनकर उसे यकीन नहीं हो रहा था कि इस समय जो सती सावित्री संस्कारी बनी हुई है रात में एकदम बेशर्म रंडी बन जाती है हरिया का मन तो कर रहा था कि इसी समय अपनी बीवी को बता दे कि वह रात भर अपने बेटे के साथ क्या गुल खिला रही थी लेकिन ऐसा करना उसके लिए भी मुश्किल पैदा कर सकता था क्योंकि राजू ने अभी तक अपनी मां को गुलाबी और उसके बारे में कुछ भी नहीं बताया था अगर वह रात वाली घटना को बता देगा तो राजू तुरंत गुलाबी का जिक्र छेड़ देगा और ऐसे में घर का माहौल पूरी तरह से बिगड़ जाएगा इसलिए अपने आप को संभालते हुए बोला,,,)

क्या करूं रानी अब समाज व्यवहार को देखना पड़ता है इसलिए जाना पड़ा वरना मुझे भी तुम्हारे बिना नींद नहीं आती,,,, मुझे यकीन है तुम्हें भी नहीं आई होगी,,,,

Lala ki bahan soni ko apna lund dikhata raju

हां पिताजी मुझे भी ऐसा ही लग रहा है देख नहीं रही हो मम्मी की आंखें एकदम लाल है लग रहा है सारी रात जाग रही थी,,,,(अपने पिताजी की तरफ देख कर राजू मुस्कुराते हुए बोला तो हरिया को ऐसा लगा कि मानो जैसे राजू अपने बोले गए शब्दों का बाड़ उसकी छाती पर छोड़ रहा है,,,, वह राजू की बात का बिल्कुल भी जवाब नहीं दिया और फिर हाथ मुंह धो कर नित्य कर्म में लग गया,,,, मधु मुस्कुराते हुए राजू की तरफ देखकर घर का काम करने लगे क्योंकि रात भर राजू ने उसकी जमकर सेवा किया था जिसके फलस्वरूप इस समय वह थोड़ा सा लंगड़ा कर चल रही थी क्योंकि जिस तरह के धक्के राजू उसकी बुर में लगा रहा था वह बेहद दर्दनाक के साथ-साथ आनंददायक भी था जिसका आनंद वह भरपूर ले चुकी थी,,,,

राजू नित्य दिन हवेली आया जाया करता था और सोने की जवानी का स्वाद भी चख लिया करता था,,,, गोदाम का हिसाब किताब देने लाला के पास जाना था इसलिए राजू जल्द ही हवेली की तरफ निकल गया था,,,, हवेली में पहुंचते ही लाला और सोनी के जोर जोर के हंसने की आवाज आने लगी तो राजू भी मुस्कुराता हुआ बोला,,,।

Raju soni ko uskike kamre k kone me chodta hua

क्या बात है आज मालिक और छोटी मालकिन कुछ ज्यादा ही खुश नजर आ रहे हैं,,,,

अरे राजू तुम आओ आओ सही समय पर आए हो आ जाओ नाश्ता कर लो,,,(राजू की तरफ देखकर लाला बोला और उसकी तरफ एक कुर्सी आगे बढ़ा दिया क्योंकि अब लाला राजू को अपने घर का ही सदस्य समझने लगा था और राजू को देखकर सोने की अंदर ही अंदर मुस्कुराने लगी,,,, राजू तुरंत कुर्सी पर बैठते हुए बोला)

अरे बताओ तो किस बात पर इतना टहाका लगाया जा रहा है,,,,,

Raju ko mast karti huyi soni

अरे राजू पहले नाश्ता तो करो,,,,(इतना कहने के साथ ही सोनी चाय का कप नाश्ता राजू की तरफ बढ़ा दी और लाला जो कि अभी भी हंसे जा रहा था वह हंसते हुए बोला,,,)

अरे राजू बात ही कुछ ऐसी है अगर सुनोगे तो तुम भी हंसते रह जाओगे,,,

ऐसी कौन सी बात है लाला जी,,,,

अरे वह विक्रम है ना विक्रम सिंह अपना सबसे बड़ा दुश्मन जो अपने आप को तीस मार खान समझता है,,,

हां उसे क्या हुआ,,,,?

2 दिन पहले ही कहा जाता है कि उस पर जंगली सूअर ने हमला कर दिया उसे लहुलुहान कर दिया,,,,

क्या बात कर रहे हैं लाला जी सच में,,,,

हां हां बिल्कुल सही बात है अच्छा ही हुआ अगर जंगली सूअर थोड़ा और जोर दिखाया होता तो मार ही डालता और सारा मामला ही खत्म हो जाता,,,,।

(लाला की बात सुनते ही राजू समझ गया कि गोदाम में उसी ने विक्रम सिंह की जमकर पिटाई किया था और उसी की खबर आपकी तरफ फैल रही है राजू चाहता तो लाला को हकीकत बता सकता था कि जंगली सूअर ने नहीं बल्कि उसने विक्रम सिंह को लहूलुहान कर दिया था लेकिन कारण भी क्या देता अगर कोई और कारण होता तो वह बता देता लेकिन कारण के पीछे उसकी मां थी जिसको चोदने के लिए वह गोदाम पर ले गया था और उस की जबरदस्त चुदाई करते हुए विक्रम सिंह उसे देख लिया था और विक्रम सिंह भी खूबसूरत औरत को देखकर उसकी बुर में अपना लंड डालकर अपनी वासना को शांत करना चाहता था जिसके एवज में राजू ने उसकी जमकर धुलाई किया था और उसे अधमरा छोड़ दिया था,,,, इसलिए राजू लाला को हकीकत नहीं बताया और वह भी लाला की बात पर हंसते हुए बोला,,,)

Raju Soni ki ghamasan chudai karta hua

यह तो बहुत अच्छा हुआ लालाजी आप सही कह रहे हैं अगर विक्रम सिंह को सुअर मार दिया होता तो सारा किस्सा ही खत्म हो जाता,,,,,

लेकिन लगता है राजू की विक्रम सिंह की मौत तुम्हारे यहां तो लिखी है तभी वह सूअर से बच गया,,,

लगता तो ऐसा ही है छोटी मालकिन,,,,

क्या राजू तुम भी छोटी मालकिन छोटी मालकिन लगा रखे हो मैं अच्छी तरह से जानता हूं कि तुम दोनों के बीच किस तरह का संबंध है इसलिए तुम हवेली के अंदर छोटी मालकिन नहीं बल्कि सोनी कहा करो क्योंकि तुम दोनों के बीच रिश्ता ही कुछ ऐसा है,,,,

बात तो सही है मालिक,,,(मुस्कुराते हुए और अपने भैया की बात सुनकर सोनी भी शरमा गई) लेकिन आदत पड़ गई है ना इसके लिए,,,

तो क्या हुआ आदत को बदल डालो,,,,,

ठीक है मालिक जैसा आप कहें,,,, और हां मैं आम की पेटियों का हिसाब लाया था अगर देख लेते तो अच्छा होता,,,,

राजू तुम अभी भी नहीं समझे मैंने तुम्हें आधा मालिक बना दीया,, हूं फिर भी तुम मुझे हिसाब किताब दिखाने आ जाते हो तुम्हें खुद समझ लेना चाहिए,,,

बात तो सही है मालिक लेकिन फिर भी एक बार देख लेते तो मुझे भी तसल्ली मिल जाती,,,,

Raju or lala ki bahan soni

क्या राजू तुम भी आधे जमीदार हो लेकिन अपने आप को बदल नहीं पा रहे हो,,,(इतना कहते हुए हिसाब किताब का बहीखाता अपने हाथ में लेकर देखने लगा और थोड़ी देर उसे देखने के बाद तसल्ली के साथ बोला)

बहुत सही राजू तुम्हारी देख रेख मैं व्यापार और ज्यादा बढ़ रहा है जिसकी मुझे बहुत खुशी है,,,,,,, अच्छा तुम एक जगह काम से जा रहा हूं,,,,, तुम दोनों बातें करो,,,

ठीक है मालिक,,,,,

(लाला अपनी जगह से उठा और हाथ में अपनी छड़ी लेकर मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया और राजू जैसे इसी मौके की ताक में था वह तुरंत अपनी जगह से खड़ा हुआ और सोनी के लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करने लगा सोनी भी बेल की तरह उसके बदन से लिपट गई और राजू तुरंत उसे अपनी जगह से खड़ी करते हुए उसकी साड़ी को चुंबन करने के साथ ही ऊपर की तरफ उठाने लगाओ देखते-देखते कमर तक उसकी सारी को उठाकर उसे उसकी कमर से पकड़ कर हल्का सा उठाया और नाश्ते की टेबल पर बैठा दिया और तुरंत उसकी दोनों टांगों को चोरी करके उसकी नाजुक गुलाब की पंखुड़ी जैसी बुर को अपनी हथेली से टटोलने लगा इतने से ही सोनी की गर्म सांसे अंदर बाहर होने लगी,,,,, सोनी की बुर काफी गर्म थी जिसकी गर्माहट को अपनी हथेली में महसूस करते हैं राजू का लंड एकदम से खड़ा हो गया और वह तुरंत एक हाथ से सोने की बुर को मसलते हुए और दूसरे हाथ से अपने पजामे को नीचे करते हुए बोला,,,,)

Soni ki lete huye raj

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जब देखो तब तुम्हारी बुर एकदम गरम रहती है एकदम तैयार लंड लेने के लिए,,,,

तुम भी तो जब देखो तब अपना लंड खड़ा करके ही मुझसे मिलने आते हो,,,

क्या करूं रानी तुम्हारी पुर से लग रहा नहीं जाता इसलिए तो पागल की तरह तुम्हारे घर आ जाता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू तुरंत सोनी की दोनों टांगों को थोड़ा सा खोलते हुए अपने लिए जगह बनाया और अपने मोटे तगड़े लंड को एक ही बार में सोने की बुर में डाल दिया और अपने दोनों हाथों को सोनी के पीछे की तरफ ले जाकर उसकी गांड को थाम लिया और अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया यह पहली बार था जब राजू सोनी को खाने की टेबल पर बैठा कर चोद रहा था जल्दबाजी से किया गया संभोग भी अद्भुत सुख प्रदान करता है जिसका एहसास राजू और सोनी दोनों को बराबर हो रहा था सोनी पागलों की तरह राजू को अपनी बाहों में कस के दबा ली थी और राजू एकदम उत्तेजित अवस्था में अपनी कमर को जोर-जोर से आगे पीछे करके हिला रहा था,,,, इस तरह से खाने की टेबल पर बैठा कर चोदने की वजह से सोनी की बुर कुछ ज्यादा ही कसी हुई लग रही थी जिससे दोनों को बहुत मजा आ रहा था,,,,

Soni or raju

दोनों को लाला से पकड़े जाने का डर अब बिल्कुल भी नहीं था दोनों निश्चिंत और निडर हो चुके थे दोनों इसी तरह से जब भी मौका मिलता था एक दूसरे में समाने की भरपूर कोशिश करते थे राजू सोनी को अद्भुत सुख प्रदान कर रहा था जिससे उसकी जवानी और भी ज्यादा निखरती चली जा रही थी इसीलिए तो राजू सोनी का दीवाना था,,,,, राजू के तेज धक्के सोनी को अद्भुत सुख प्रदान कर रहे थे राजू अपनी क्रियाकलाप को बढ़ाते हुए दोनों हाथों को उसकी गांड से हटाकर उसके ब्लाउज पर रखकर उसके बटन को खोल रहा था और पल भर में ही जल्दबाजी दिखाता हुआ राजू सोनी के ब्लाउज के सारे बटन को खोल चुका था और उसकी दोनों दशहरी आम को हाथों में लेकर दबा दबा कर उसे मुंह में लेकर पीना शुरु कर दिया था,,,,

एक औरत होने के नाते सोनी अच्छी तरह से जानती थी कि मर्दों की यह हरकत औरत को और भी ज्यादा आनंदित कर देती है और यही सोनी के साथ भी हो रहा था राजू पागलों की तरह सोनी की चुचियों को दशहरी आम की तरह दबा दबा कर मुंह में लेकर पी रहा था और नीचे से अपनी कमर हिलाता हुआ अपने मोटे लंड को उसकी चिकनी बुर में अंदर बाहर कर रहा था,,,,,, पल भर में ही दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे राजू की मेहनत रंग ला रही थी लाला की बहन पूरी तरह से मस्ती के सागर में हिलोरे मार रही थी वह सातवें आसमान में उड़ रही थी उसे अद्भुत आनंद का एहसास केवल राजू ही दे सकता था और दे रहा था हर धक्के के साथ उसका लंड उसके बच्चेदानी से जा टकराया था जिससे उसका मजा दुगुना हो जाता,,,,,

आखिरकार राजू के धक्कों की गति तेज हो गई और सोनी की सांसे ऊपर नीचे होने लगी क्योंकि दोनों चर्मसुख के बेहद करीब पहुंच चुके थे और राजू इस समय उसकी दोनों चूचियों से हाथ हटाकर उसे कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया था और अपनी कमर बड़ी तेजी से ही जा रहा था ऐसा करने पर खाने की टेबल पूरी तरह से हच मचा जा रही थी और उस पर रखे हुए पानी के गिलास हिलते हुए नीचे गिरना शुरू हो गए थे एक बड़े से चांदी के कटोरे में फल फ्रूट रखा हुआ था और वह भी राजू के तेज दुखों को संभालना पाने की वजह से धीरे-धीरे नीचे गिरते जा रहे थे देखते ही देखते राजू ने अपनी जवानी का जोश दिखाते हुए अपने तेज धक्कों से सोनी के तन बदन में तो आग लगाई रहा था लेकिन खाने की टेबल की भी हालत खराब कर दे रहा था और जब तक उसका पानी निकलता तब तक खाने की टेबल पर एक भी बर्तन रहने गए थे सब आवाज करते हुए नीचे गिर चुके थे और राजू आखरी पर सोनी को उसी खाने की टेबल पर पीठ के बल लेटा दिया और उसकी दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखकर उसकी दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह अपनी हथेली में दबाकर धक्के पर धक्का लगाना शुरू कर दिया था और देखते ही देखते दोनों अद्भुत चरम सुख को प्राप्त करके ढेर हो चुके थे,,,,

कुछ देर तक मुझे किसी तरह से सोनी के ऊपर पड़ा रहा जैसे ही दोनों की सांसे दुरुस्त हुई राजू अपने लंड को सोनी की बुर में से बाहर निकाल कर सोनी की साड़ी से ही अपने लंड पर लगी मलाई को साफ किया और सोनी भी गहरी सांस लेते हुए पहले तो खाने की टेबल पर बैठ ही रह गई और फिर जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि राजू ने उसकी चुदाई करते हुए खाने की टेबल को पूरी तरह से खाली कर दिया है और सारे बर्तन नीचे गिरे हैं तो यह देखकर थोड़ा सा गुस्सा दिखाते हुए बोली,,,।

यह क्या किया राजू मजा लेने के साथ-साथ मुझे सजा भी दे दिया ना अब यह सारा काम कौन करेगा,,,

हम दोनों मिलकर करेंगे मेरी रानी,,,(अपने पजामे को खींचकर ऊपर की तरफ करते हुए और फिर सोनी की तरफ बढ़कर उसके लाल-लाल होठों पर अपने होंठ रख कर उसे चुंबन करते हुए प्यार से उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर उसे उठाते हुए नीचे रखते हुए बोला,,) तुम्हें किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं दूंगा मैं हूं ना,,,

तुम तो हो मैं जानती हूं लेकिन तुम तो एकदम पागल हो जाते हो मुझे चोदते चोदते ऐसा लगता है कि मैं कहीं भाग जाऊंगी,,,

क्या करूं जान तुम्हारी बुर में लंड डालते ही मैं पागल हो जाता हूं मन करता है कि लंड को बाहर निकाल कर मैं खुद तुम्हारी बुर में घुस जाऊं,,,,

ईतना मजा आने लगता है तुमको,,,(सोनी हंसते हुए बोली)

पूछो मत जान की कितना मजा आता है,,,,

चलो अच्छा अब जल्दी से सब बर्तन को उठा कर रखो मैं साफ कर देती हूं,,,।

(फिर उसके बाद दोनों जल्दी से बर्तन उठा कर उसको सही जगह पर रखने लगी और नीचे गिरे फल को उठाकर चांदी के कटोरे में रखने लगी थोड़ी देर में सब कुछ पहले जैसा हो गया और राजू मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया,,,, दूसरी तरफ हरिया परेशान था वह किसी भी तरह से इस काम क्रीड़ा को बंद करना चाहता था क्योंकि वह समझ गया था कि राजू के मोटे तगड़े लंड पहुंचकर बीवी अपनी बुर में लेकर उसकी दीवानी हो चुकी है अब राजू जब चाहे तब अपनी ही मां को चोद कर मजा ले लेगा और उसकी मां भी उसे इंकार नहीं कर पाएगी देने में,,,, तभी उसके मन में एक युक्ति आई और वह मन ही मन खुश होने लगा शाम ढलते ही जैसे वह घर पर पहुंचा और खाना खाते समय वह बोला,,,)

अगले सप्ताह गुलाबी को देखने वाले आ रहे हैं और उसी समय सगाई भी कर देंगे,,,(इतना सुनते ही गुलाबी एकदम से चौक गई और हैरान होते हुए अपने भैया की तरफ देखने लगी और फिर अपनी भाभी की तरफ राजू भी हैरान था क्योंकि यह तो बड़े जल्दबाजी की बात थी,,,)

इतनी जल्दी,,,(हाथ में निवाला पकड़े हुए ही मधु बोली)

हां तो क्या हुआ अब ज्यादा देर करना उचित नहीं है लड़के वालों को लड़की पसंद है बिना देखे ही क्योंकि तुम्हारे भैया ही रिश्ता तय करवा रहे हैं और रिश्तेदार भी बहुत अच्छे हैं इसलिए मैं कोई गलती नहीं करना चाहता और मैं यह सोच रहा था कि राजू की भी शादी झुमरी के साथ जल्द से जल्द तय करके निपटा दिया जाए,,,

(हरिया एक तीर से दो निशाना लगाया था वह जल्द से जल्द झुमरी का विवाह करके उसे इस घर से रुखसत कर देना चाहता था और राजू की शादी झुमरी से करके झुमरी को इस घर में जल्दी से लेकर आना चाहता था ताकि राजू अपनी मां की तरफ ध्यान ना दे सके और गुलाबी भी विवाह करके अपने घर पर सुखी से रहे और वह भी अपनी आदत को बदल कर केवल अपनी बीवी की बुर पर ध्यान देता रहेगा और घर में झुमरी के होने से राजू अपनी मां को चोदने के बारे में सोच भी नहीं पाएगा इससे हरिया के मन से भारी बोझ उतर जाएगा,,,, झुमरी से इतनी जल्दी विवाह होने के बारे में सोच कर राजू मन ही मन बहुत खुश हो रहा था लेकिन गुलाबी और मधु दोनों उदास हो चुकी थी क्योंकि गुलाबी और मधु दोनों अच्छी तरह से जानती थी कि झुमरी के आ जाने के बाद घर में राजू उन दोनों को चुदाई का मजा दे नहीं पाएगा इसलिए दोनों यही चाहती थी कि अभी इतनी जल्दी विवाह ना हो लेकिन वह दोनों कुछ कर सकने की स्थिति में बिल्कुल भी नहीं थी,,,,,,, हरिया अपनी चालाकी से मन ही मन बहुत खुश हो रहा था,,,,, और हरिया ने यह भी कहा था कि जल्द ही वह झुमरी की मां से मिलकर शादी तय कर देगा,,,,, इसी खुशी में हरिया रात को अपनी बीवी को जमकर चोदा लेकिन मधु को अब अपने पति के लंड से बिल्कुल भी संतुष्टि नहीं मिलती थी उसे तो अपने बेटे का बमपिलाट लंड ही अपनी बुर में चाहिए था,,,,,,

दूसरे दिन राजू गोदाम की तरफ जा रहा था लेकिन किसी काम की वजह से वह दूसरे रास्ते से जा रहा था और वहां रास्ते में उसे कमला चाची की बहू मिल गई जिसे देखते ही राजू एकदम खुश होते हुए बोला,,,।

क्या बात है भाभी बहुत दिनों बाद दिख रही हो मायके चली गई थी क्या,,,

मैं तो यही हूं बबुआ लेकिन तुम ही नजर नहीं आते लगता है कि अब हमारे से मन भर गया है,,,

ऐसा कैसे हो सकता है भाभी,,,,,, भला भाभी से किसी देवर का मन भरा है,,,

तो आते क्यों नहीं हो हमारे घर पर,,,,

वैसे क्या है ना भाभी अब कामकाज कुछ ज्यादा बढ़ गया है इसलिए समय नहीं मिलता वैसे एक बात कहूं,,,,,

क्या,,,,?(गांव की बहू होने के नाते कमला चाची की बहू घूंघट डाल कर रखती थी लेकिन राजू से बात करते हुए हल्का से घूंघट को अपने होठों के ऊपर तक उठाई हुई थी जिससे राजू को केवल उसके लाल लाल होंठ नजर आ रहे थे और उस की भरी हुई चुचीया,,, जिसे देखकर उसका लंड खड़ा हो चुका था जिस पर खुद कमला चाची की बहू की नजर पड़ चुकी थी इसीलिए उसकी बुर से काम रस टपक रहा था,,,)

यही कि बस ऐसे ही बुला रही हो कि मेरे लिए अपनी दोनों टांगे खोल दोगी,,,,

(राजू की बात सुनते हैं उसके होठों पर मुस्कान आ गई और उसके लाल-लाल होठों पर मुस्कान को देखकर राजू की हालत खराब होने लगी और राजू फिर बोला)

अब ऐसे मुस्कुराते रहोगी या बताओ गी भी,,,

जो तुम चाहते हो वह करूंगी पहले चलो तो सही,,,

हो मेरी भाभी कितनी अच्छी हो तुम चलो जल्दी से चलते हैं अब तो मुझसे रहा नहीं जा रहा है,,,,,

रुको पहले मैं घर में जाऊंगी फिर थोड़ी देर में तुम घर में आ जाना मैं दरवाजा खुला रखुगी,,,,

कमला चाची नहीं है क्या घर पर,,,

नहीं वह पड़ोस में पूजा है वहां गई है इसलिए तो तुम्हें बुला रही हूं,,,

ओहहह मेरी भाभी तब तो बहुत मजा आ जाएगा,,,।

(मुस्कुराते हुए कमला चाची की बहू अपने घर की तरफ जाने लगी और पीछे पीछे राजू चारों तरफ नजर घुमाता हुआ कमला चाची की बहू के पीछे पीछे उसकी गोलाकार नितंबों की चाल को देखते हुए आगे बढ़ने लगा थोड़ी देर में कमला चाची की बहू अपने घर के दरवाजे पर खड़ी हो गई और चारों तरफ देखकर राजू की तरफ देखकर उंगली से इशारा करके उसे अंदर आने के लिए थोड़ी और वह दरवाजा खोलकर अंदर चली गई थोड़ी देर में राजू भी पीछे-पीछे कमला चाची के घर में प्रवेश कर गया और तुरंत दरवाजे को बंद कर दिया लेकिन दरवाजे पर सिटकनी मारना भूल गया,,)

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