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राजू की युक्ति से मधु की बहुत खुश थी,,,, कब घर में सभी एक दूसरे के राजदार बन चुके थे केवल हरिया इस बात से अनजान था कि उसके बेटे का संबंध है उसकी छोटी बहन के साथ है,,,,, राजू अपनी बुआ को रोज जो देता है इस बात से हरिया बिलकुल बेखबर था लेकिन इस बात का भी डर अब राजू में बिल्कुल भी नहीं था,,,, अपने पिताजी को अपनी बुआ के साथ चुदाई करते हुए देख लिया है इस बात को अपनी मां से बताते हुए उसकी मां को बिल्कुल भी अच्छा नहीं हुआ था क्योंकि उसकी मां पहले से ही अपनी ननद और अपने पति के बीच के रिश्ते को जानती थी इस बात की हैरानी राजू को भी थी लेकिन,,,, किस बात से राजू भी खुश था कि उसकी मां अपने ही पति और अपनी मेहनत के बारे में जानकारी इसलिए खामोश थी कि अगर हरिया राजू और उसे रंगे हाथ पकड़ ले तो वह अपने पति का राज बता कर उसका मुंह बंद करवा सकती है,,,,

Raju k dwara apne pitaji ko batayi gayi mangadhant kahani k dwara

दोपहर में ही राजू अपनी बुआ और अपनी मां की जबरदस्त चुदाई करके दोनों को तृप्त कर चुका था,,,, एक साथ दो दो औरतों को चोदने का अनुभव प्राप्त करके राजू की मर्दाना ताकत मानव की ओर ज्यादा बढ़ चुकी थी उसे बिल्कुल भी थकान या कमजोरी महसूस नहीं होती थी बल्कि वह एक साथ दो दो बुर को पाकर और ज्यादा मस्त हो जाता था कभी अपनी मां की बुर में डालता तो कभी लंड को निकाल कर अपनी बुआ की बुर में डाल देता है ऐसा करने में उसे अद्भुत सुख प्राप्त हो रहा था,,,,, लेकिन इस बात से वह कभी इंकार नहीं कर सकता था कि सबसे ज्यादा मजा उसे अपनी मां की बुर से प्राप्त होता था,,,।

दिन भर आज बैलगाड़ी चलाने में हरिया का मन बिल्कुल भी नहीं लग रहा था उसे यही चिंता सताए जा रही थी कि घर पर क्या हुआ होगा राजू अपनी मां के साथ क्या किया होगा क्या उसकी मां कुछ करने की होगी राजू की हरकत पर उसका क्या रवैया होगा,,,, हरिया को अपनी बीवी पर पूरा भरोसा था कि वह अपने बेटे को उसकी गलत हरकत को अंजाम नहीं होने देगी लेकिन इस बात का डर हरिया के मन में बैठ चुका था कि राजू का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और तगड़ा है और कहीं राजू ने अपनी मां को अपने मोटे तगड़े लंबे लंड के दर्शन करा दिए थे जो नहीं होना चाहिए वह हो जाएगा क्योंकि हरिया भी औरत की सबसे बड़ी कमजोरी को समझता था,,, और औरत की सबसे बड़ी कमजोरी होती है मर्दाना ताकत से भरा हुआ लंबा मोटा लंड,,, जोकि राजू के पास था और इसीलिए हरिया के मन में घबराहट भी हो रही थी इस बात को सोचकर वह हैरान हो रहा था कि अगर सच में अपने ही बेटे के साथ मधु ने संबंध बना ली तो क्या होगा,,,, वह तो कहीं का नहीं रह जाएगा लेकिन इस बात की भी तसल्ली उसने थी कि अगर वाकई में राजू ने यह बात बता दिया कि गुलाबी के साथ वह क्या कर रहा था तब तो और भी गजब हो जाएगा,,,, खयालों की इसी उधेड़बुन में लगे हुए वह‌ अपने घर कब पहुंच गया उसे पता ही नहीं चला,,,,

Raju apni ma ki chuchi se khelta hua

बेल गाड़ी लेकर जब वह घर पहुंचा तो रात हो चुकी थी चारों तरफ अंधेरा छा चुका था लोग अपने अपने घरों में लालटेन की रोशनी में खाना बना रहे थे,,,,, वैसे तो हरिया को भी भूख लग गई थी लेकिन उसकी उत्सुकता थी दिन के बारे में जानने की कि आज राजू ने क्या किया इसीलिए बैलगाड़ी को अपने घर के सामने खड़ी करके बेल को बैलगाड़ी से अलग करके वह पीछे की तरफ ले गया और उसे चारा पानी देकर वापस घर में आ गया और राजू को इशारा से अपने पास बुला कर उसे खेतों की तरफ ले कर चल दिया,,,, और उससे धीरे-धीरे बात करते हुए बोला,,,

क्या हुआ आज दिन में,,,(हरिया के मन में उत्सुकता भरी हुई थी जो कि उसके शब्दों से साफ झलक रहे थे राजू चाहता तो उसके और उसकी मां के बीच क्या हुआ वह ना बता कर अपने पिता को तसल्ली दे सकता था लेकिन वह ऐसा करना भी नहीं चाहता था क्योंकि वह जानबूझकर अपने पिता को अपनी और अपनी मां के बीच के बीच के संबंध के बारे में बताना चाहता था ताकि भविष्य में इस रिश्ते को लेकर कोई गलतफहमी ना हो,,,, और दोनों मां बेटे इसी तरह से मजा लेते रहें,,,,,)

क्या जानना जरूरी है,,,,!

Raju or uski ma

हां हां क्यों नहीं मैं जानना चाहता हूं कितने में क्या हुआ,,,?

अगर ना जानो तो अच्छा ही है,,,,

क्या मतलब,,,,,, तू कहना क्या चाहता है,,,,

कुछ भी नहीं कहना चाहता मैं खामोश रहना चाहता हूं ताकि सब कुछ ऐसे ही चलता रहे,,,

देख रहा हूं तुम मुझसे पहेलियां मत  बुझा मुझे साफ-साफ बता के दिन में क्या हुआ,,,,,

अगर बता दिया तो हो सकता है कि तुम्हारा विश्वास मां के ऊपर से उठ जाए,,,,

नहीं राजू ऐसा नहीं हो सकता तेरी मां ऐसी बिल्कुल भी नहीं है वह तो बहुत सीधी-सादी और संस्कारी औरत है,,,,

Madhu or raju

तभी तो कह रहा हूं कि कुछ भी जानने की जरूरत नहीं है,,,,(गांव से दूर आकर खेतों के पास आकर राजू और हरिया दोनों खड़े हो गए,,,,, चारों तरफ अंधेरा ही अंधेरा था इसलिए किसी के देखे जाने का डर भी नहीं था पर यहां पर वह इत्मीनान से बात कर सकता था,,,,)

नहीं मुझे तो बता जानना जरूरी है,,,, मैं अंधेरे में नहीं रहना चाहता,,,,

और मा को ना जाने कब से अंधेरे में रख रहे हो उसका क्या

वह तो मेरी गलती थी राजू जोकि अनजाने में हो गई,,,,

ऐसी कैसी गलती पिताजी कि समझ में नहीं आया क्या गलत क्या सही क्या है,,,, चोदने तक की प्रक्रिया तक पहुंचने मैं भी समय लगता है तब तक तो आप को होश आ जाना चाहिए कि आप क्या कर रहे हैं,,,,, माना कि आपने कुछ ऐसा देख लिया होगा बुआ में जिसे देख कर आपका दिमाग एकदम मदहोश हो गया होगा उनका कोई अंग देख लिए होंगे कुछ भी हो सकता है उनकी चूची उनकी कमरिया उनकी बोल दो कि अनजाने में ही तुम्हारी आंखों में तुम्हारी नजर में आ गई होगी,,,, काम करते हुए या पेशाब करते हुए कुछ तो देखोगे तभी तो तुम्हारे दिमाग में ऐसा ख्याल आया कि बुआ की चुदाई करने में मजा आएगा लेकिन,,,, बाकी दोनों टांगों के बीच पहुंचने में भी समय लगता है उनके कपड़े उतारना पड़ता है सलवार उतारनी पडी होगी कुर्ती उतारनी पडी होगी,,,,, माना कि बुआ की बुर देखकर तुम पागल हो गए होंगे लेकिन,,, जब तुम अपनी धोती उतार कर अपना लंड बुआ की बुर में डालने की तैयारी कीए होगे तब तो तुम्हें समझ जाना चाहिए कि तुम्हारे नीचे जो औरत है वह तुम्हारी बीवी नहीं बल्कि तुम्हारी बहन है,,,,, लेकिन ऐसा क्या तुम्हारे दिमाग में बिल्कुल भी नहीं आया होगा क्योंकि तुम्हारे द्वारा की गई यह गलती नहीं बल्कि तुम्हारे हवस का परिणाम है,,,,,।

(राजू अपने पिताजी के सामने ही अश्लील शब्दों में बातें कर रहा था उसे आप अपने पिता का बिल्कुल भी डर नहीं था वह अपने पिता के सामने कभी खुलकर बातें कर रहा था और उसकी बातों को सुनकर हरिया भी हैरान था लेकिन क्या करता गलती किए हुए पकड़े गया था इसलिए उसकी जुबान भी खामोश थी लेकिन अपने बेटे की बात सुनकर वह बोला)

लेकिन जो तू अपनी मां के साथ करना चाह रहा है वह क्या है वह भी तो एक हवस है,,,,।

हां इस बात को मैं मानता हूं कि मैं जो करने जा रहा था वह भी हवस है लेकिन वह तुम्हारी गलती की भरपाई है अपना मुंह बंद करने के लिए मैं ऐसा बिल्कुल भी ना करता मेरे मन में औरतों को लेकर इस तरह के ख्याल बिल्कुल भी नहीं आते थे लेकिन जब से मैंने तुम्हें अपनी ही बहन की बुर में लंड डालते हुए देखा हूं तब से ना जाने मेरे बदन में किस तरह की हरकत हो रही है बार-बार मेरा लंड खड़ा हो जा रहा है,,,,, और तो और तुम्हारे इस प्रस्ताव पर मेरा दिमाग एकदम से झन्ना गया कि मैं भी बुआ के साथ वह सब कुछ कर सकता हूं जो तुम कर रहे थे,,,,, इससे पहले मेरे मन में इस तरह की बातें कभी नहीं आती थी लेकिन तुम्हारे चलते मैं भी सोच में पड़ गया कि वाकई में औरत के साथ मजा आता होगा तभी तो तुम अपनी बहन के साथ चुदाई कर रहे थे,,,,

जब तुम्हारी हालत इस कदर खराब हो गई थी तो तुम्हें भी गुलाबी के साथ कर लेना चाहिए था ना,,,,

मेरी हालत देख कर मुझे भी यही ख्याल आया लेकिन इतना अच्छा मौका अपने अपने हाथ से भला कैसे जाने दे सकता था पहला अनुभव मैं बुआ के साथ नहीं बल्कि मां के साथ लेना चाहता था,,,, क्योंकि कई मायने में मां बहुत खूबसूरत है मुझे पूछने रानी होती है कि तुम मां जैसी खूबसूरत औरत को छोड़कर अपनी बहन के साथ शारीरिक संबंध बना लिए,,,, जबकि मां के साथ तुम्हें हर खुशी मिल रही थी,,,, और मेरी नजर में क्या  सभी के नजर में मां की खूबसूरती का कोई दूसरा जोड़ आऊ है इसलिए मैं पहली बार ही मां को चोदना चाहता था,,,,,

तू मुझसे पहेलियां मत बुझा सिर्फ यह बता तेरी मां ने तुझे कुछ करने दि या फिर मार कर भगा दी,,,,,

पिताजी सुनोगे तो तुम्हारे होश उड़ जाएंगे,,,,, लेकिन तुम्हारा मानना भी एकदम सही था इतनी आसानी से माने मुझे अपना दी नहीं,,,,,

मतलब कि तूने अपनी मां को,,,,

हां पिताजी तुम ठीक ही सोच रहे हो लेकिन उसके लिए भी मुझे बहुत पापड़ बेलने पड़े,,,,,

(इतना सुनते ही हरिया एक बड़े से पत्थर पर बैठ गए उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसे अपनी बीवी पर पूरा भरोसा था उसे पूरा यकीन था कि वह राजू के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं करेगी तू कितने वर्षों में वह अपनी बीवी के चरित्र को अच्छी तरह से समझ गया था लेकिन इस बात से भी वह इनकार नहीं कर पा रहा था कि इतने वर्षों में वह भी अपनी बीवी के साथ ही शारीरिक संबंध बनाकर संतुष्टि का अहसास प्राप्त कर रहा था लेकिन कुछ ही महीनों में उसका चरित्र बदल चुका था,,, और भाई यही सोच रहा था कि जब इतने बरसों में उसका चरित्र बदल  सकता है तो उसकी बीवी का क्यों नहीं,,,,) पिताजी आप बिल्कुल भी चिंता मत करिए इस बात की तसल्ली रख ली कि मैंने मां को कुछ नहीं बताया अगर बता देता तो सोचो सब कुछ बदल जाता और तो और मेरी वजह से अब आप को खुली छूट मिल गई है आप बुआ के साथ अपनी काम क्रीड़ा जारी रख सकते हैं,,,,

वह सब तो ठीक है राजू लेकिन मुझे मधु से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं थी,,,,

उम्मीद तो मुझे भी बिल्कुल भी नहीं थी मुझे इसी बात का डर था कि मां मुझे भगा देगी छूने नहीं देगी और इसके लिए मुझे बहुत कुछ करना पड़ा था तब जाकर में मां की चुदाई कर सका,,,,

लेकिन यह सब हुआ कैसे मतलब की मधु ऐसी औरत बिल्कुल भी नहीं है तेरी हिम्मत कैसे हो गई इतना कुछ करने की,,,,

क्या करूं पिताजी मुझे इतना तो पक्का यकीन हो गया था कि मेरी इस हरकत का आप किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया नहीं देंगे,,,, आपकी तरफ से और बुआ की तरफ से मेरा डर एकदम से खत्म हो गया था और एक औरत को चोदने का सोच कर ही मेरे तन बदन में अजीब सी हलचल मची हुई थी इसलिए मुझे तो हिम्मत दिखाना ही था क्योंकि मुझे अच्छी तरह से मालूम था कि डर के आगे ही जीत प्राप्त होती है मुझे इस डर से जीतना था,,,, और फिर मैं मां को बहलाने में लग गया,,,, और जानते हो पिताजी मैंने क्या किया,,,,

Madhu ki raseeli haseen boor

क्या किया,,,?(भारी मन से हरिया बोला)

मैं नहाने के लिए मां से ही एक बाल्टी पानी आंगन में ही मनाया मैं किसी भी तरह से मां को अपना लंड दिखाना चाहता था क्योंकि गांव की आवारा लड़कों के साथ मुझे इतना तो पता ही चल गया था कि औरतों की सबसे बड़ी कमजोरी मर्दों का लंड होता है,,,, इसीलिए मैं किसी भी तरह से मां को अपना लंड दिखाने की फिराक में लग गया,,,,,,(राजू की यह बनी बनाई बातें क्यों ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था लेकिन वह जानबूझकर अपने पिता को झूठ मूठ की कहानी सुना रहा था और हरिया भी बड़े ध्यान से अपने बेटे की कहानी को सुन रहा था)

फिर क्या हुआ,,,?

मां के बाल्टी लाने से पहले ही मैं अपने सारे कपड़े उतार कर एक छोटा सा टावल लपेट लिया और मां को चोदने के नाम से ही मेरा लंड पहले से ही खड़ा हो चुका था जो कि टावल में तंबू बनाया हुआ था मैं अच्छी तरह से जानता था कि मां की नजर मेरे लंड पर जरूर पड़ेगी क्योंकि मेरे लंड की हालत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी और जैसे ही मां पानी से भरी बाल्टी लेकर आई और मेरे सोचने के मुताबिक ही मां की नजर मेरे लंड पर पड़ी और मां नीचे नजरों से मेरी दोनों टांगों के बीच के नजारे को ही देख रही थी,,,,, मैं मन ही मन खुश होने लगा,,,,,(अपने बेटे के मुंह से बनी बनाई कहानी को सुनकर हरिया का दिल जोरों से धड़क रहा था)

और जैसे ही माने पानी से भरी बाल्टी को मेरे पास रखी में लोटे से पानी निकाल कर अपने बदन पर डाल दिया था कि वह छोटा सा और पतला सा टूवाल एकदम से गीला होकर मेरे लंड से चिपक जाए और ऐसा ही हुआ पल भर में ही वह छोटा सा कपड़ा मेरे लंड पर एकदम से चिपक गया और गीला होने के नाते मेरा मोटा तगड़ा लंबा लंड एकदम साफ उभरकर नजर आने लगा मां की नजर मेरे लंड से बिल्कुल भी नहीं हट रही थी वह प्यासी आंखों से मेरी तरफ ही देख रही थी,,,,

फिर क्या हुआ,,,?(हरिया धड़कते दिल के साथ बोला)

फिर क्या था मां अपने काम में लगी हुई थी लेकिन तिरछी नजरों से मेरी तरफ देख रही थी वह कुछ बोल नहीं रही थी और वह मेरे लंड को ही देख रही थी मैं किसी भी तरह से अपने टावल को अपने बदन से अलग करना चाहता था,,,, और फिर मैंने पीठ मलने के बहाने मां को अपने करीब जिला है और मां बेझिझक मेरे करीब आ गई और मेरी पीठ को अपनी हथेली से मिलने लगी मैं खड़ा था मेरे ठीक पीछे ना करके मैं बार-बार पीछे मुड़ कर देख रहा था मेरी नजर मां की बड़ी बड़ी चूची ऊपर चली जा रही थी जो कि ब्लाउज का फायदा बटन खुला होने के नाते और ज्यादा बड़ी नजर आ रही थी,,,,,, मा भी किसी तरह से मेरी दोनों टांगों के बीच देखने की कोशिश कर रही थी और मैं उसकी इस कोशिश को सफल करने के लिए जानबूझकर अपने  टुवाल को उतार कर फेंक दिया और एकदम नंगा हो गया और ठीक उनकी तरफ मुंह करके खड़ा हो गया मां एकदम से आश्चर्यचकित हो गई है उनका मुंह खुला का खुला रह गया और वह पागलों की तरह मेरे लंड को देख रही थी क्योंकि पूरी तरह से टनटनाकर खड़ा था,,,, मां कुछ भी बोल नहीं पा रही थी और मैं तुरंत मौका देखकर मां का हाथ पकड़कर अपने लंड पर रहती है और मां भी एकदम उत्तेजित होकर मेरे लंड को अपनी हथेली में महसूस करते ही कस के दबा दी मैं एकदम से मस्त हो गया लेकिन अगले ही पल मां को जैसे होश आ गया होगा कि हम दोनों के बीच रिश्ता कैसा है और वह तूने तो अपने हाथ को हटा दें और नजर को दूसरी तरफ घुमा ली,,,,, लेकिन मेरे तन बदन में आग लग चुकी थी मैं पागल हो चुका था मां की हथेली का स्पर्श पाकर मेरा लंड बाकी दूर में जाने के लिए तड़प उठा था,,,,, और मैं पीछे से जाकर मां को अपनी बाहों में भर लिया जिससे मेरा लंड सीधे उनकी बड़ी-बड़ी गांड में रगड़ने लगा,,,

Raju or uski ma

मां मुझसे अपने आप को छुड़ाने की भरपूर कोशिश कर रही थी लेकिन मैं मां को छोड़ने को तैयार ही नहीं था मां की गांड का स्पर्श पाकर मेरा लंड पूरी तरह से बवाल मचाने पर उतारू हो चुका था मैं सीधे सीधे ब्लाउज के ऊपर से ही मां की चूची को पकड़कर दबाते हुए बोला,,,,

क्या हुआ मैं तुम भी तो मेरा लंड देख रही थी तुम्हें भी मजा आ रहा है ना,,,,

नहीं राजू यह गलत है यह तू क्या कर रहा है पागल हो गया क्या,,,,

(मां की बातें सुनकर मैं समझ गया था कि अगर मैं पीछे हट गया तो मां मुझे कुछ भी करने नहीं देगी इसलिए मैं जबरदस्ती करता हुआ मां के ब्लाउज के सारे बटन खोल दिया और उनकी नंगी चूची को हाथ में लेकर दबाने लगा,,, उनका विरोध थोड़ा कम होने लगा था उनके मुख से अजीब सी आवाज आने लगी थी मुझे लगने लगा था कि शायद मां को भी अच्छा लग रहा है लेकिन वह फिर मुझे धक्का देकर हटा दी लेकिन ऐसा करने पर जो वह मेरी तरफ घूमी तो उनका नजर फिर से मिलने पर पड़ गई और मेरे अपने लंड को हाथ में लेकर उसे मुट्ठी आते हुए मां की तरफ आगे बढ़ने लगा मां की नजर विरोध करने के बावजूद भी मेरे लंड पर टिकी हुई थी शायद मां ने अब तक इस तरह का मोटा तगड़ा लंड नहीं देखी थी,,, मैं आगे बढ़ता हुआ बोला,,,

क्या हुआ मां पकड़ कर देखो कितना मजा आ रहा है,,,

राजू तू पागल हो गया है तेरे पिताजी को पता चला तो तुझे मार-मार कर घर से भगा देंगे तुम समझ नहीं रहा है कि तू कितना गलत कर रहा है,,,,

नहीं मां यह बिल्कुल भी गलत नहीं है जो कुछ भी हो रहा है उसे हो जाने दो,,,,

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नहीं नहीं मैं तुझे ऐसा कुछ भी करने नहीं दूंगी,,,,,

(मां की बात सुनकर मैं समझ गया कि पिताजी जो कुछ भी कह रहे थे सच कह रहे थे लेकिन मैं एक बार फिर से मां को अपनी बाहों में भर लिया और उनके लाल लाल होंठों पर अपने होंठ रख कर चूसना शुरू कर दिया आखिरकार वह एक औरत थी और मैं मर्दाना ताकत से भरा हुआ नौजवान लड़का अपनी मर्दानगी भरी गर्मी से मां के हौसले को पूरी तरह से पिघला दिया था,,,, पीछे से अपनी गांड पर मेरे मोटे तगड़े लंड की रगड को तो वह बर्दाश्त कर गई थी लेकिन आगे से अपनी बुर पर मेरे लंड की ठोकर को बर्दाश्त नहीं कर पाई और पूरी तरह से मेरी बाहों में समा गई और अपना विरोध छोड़ दी,,, और इसी मौके का फायदा उठाते हुए मैंने तुरंत मां को अपनी गोद में उठा लिया क्योंकि बुआ भी घर पर नहीं थी और मैं मां को होने के कमरे में ले जाकर के खटिया पर पटक दिया और फिर उनकी दोनों टांगों के बीच आकर उनकी साड़ी को पूरी तरह से खोलकर उन्हें नंगी कर दिया एक बार नंगी हो जाने के बाद मां के बदन में भी उत्तेजना की लार दूंगा लगी बाकी प्यासी नजरों से मेरी लंड की तरफ देखने लगी और मैं अगले ही पल बिना कुछ बोले अपने मोटे तगड़े लंड पर थोड़ा सा थूक लगाकर मां की बुर में डालना शुरू कर दिया,,,, और वाकई में पीताजी मां की बुर इतनी कसी हुई थी कि मेरा मोटा लंड उसमें जा ही रहा था,,,, फिर पता है मैंने क्या कहा,,,?

क्या कहा,,,(कंपकपाते होठों से हरिया ने बोला,,,)

मैंने कहा कि तेरा मोटा और लंबा है थोड़ा सा थुक लगा ले वरना घुस नहीं पाएगा,,,,

क्या,,तेरी मां ने ऐसा कहा,,,(एकदम आश्चर्यचकित होकर हरिया बोला)

हां पिताजी मैंने ऐसा ही कहा मैं भी मां की बात सुनकर एकदम उत्तेजित हो गया और मां के कहे अनुसार ढेर सारा थूक मां की बुर और अपने लंड पर लगाएं और उसके बाद जैसे ही मैंने अपने लंड को मां की बुर में डालना शुरू किया वह बड़े आराम से अंदर घुस गया और उसके बाद तो मैंने मां की जमकर चुदाई करना शुरू कर दिया,,,,

मुझे तो लगा कि अकेले कहीं बाहर में खत्म हो गया लेकिन इसके बाद दो बार और माने चुदवाई और खुद अपने मुंह से कह कर वरना मैं एक ही बार चोद कर घर से चला गया होता लेकिन तीन बार चुदाई करते करते शाम हो गई थी,,,,

(अपने बेटे के मुंह से अपने बेटे और अपनी बीवी की कामलीला सुनकर हरिया एकदम पसीने से तरबतर हो चुका था उसे यकीन नहीं हो रहा था कि जो कुछ भी राजू ने कहा है उसमें जरा भी सच्चाई है लेकिन उसके पास मानने के सिवा और कोई रास्ता भी नहीं था अब वहां बैठे रहने से कोई फायदा नहीं था हरिया की उत्सुकता राजू ने अपनी बातों से खत्म कर दिया था राजू अच्छी तरह से जानता था कि हरिया अपनी बीवी से उसके द्वारा बताई गई कहानी पूछेगा नहीं इसीलिए राजू मंघड़ंत नमक मिर्च लगाकर एक कहानी सुना दिया था जिसे सुनकर हरिया की खुद की हालत खराब हो गई थी अपनी जगह से उठा और गांव की तरफ चलने लगा लेकिन फिर भी वह बोला)

मुझे मधु से ऐसी उम्मीद बिल्कुल भी नहीं दे रहा जो लेकिन ना जाने क्यों मेरा दिल कह रहा है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ होगा,,,,

तुमसे बहुत प्यार करते हो ना पिता जी इसके लिए लेकिन अगर तुम्हें मेरी बातों पर यकीन नहीं आ रहा है तो अपनी आंखों से देख सकते हो,,,

मतलब,,,,

मतलब कि आज की रात तो नहीं लेकिन कल बहाना करके रात को चले जाना कि मैं बगल वाले गांव में शादी में जा रहा हूं और उसके बाद वहां जाना नहीं और 2 घंटे बाद दबे पांव घर में चले आना मैं मां के कमरे का दरवाजा हल्का सा खोल कर रख लूंगा और फिर अपनी आंखों से देख लेना कि मेरी बातों में सच्चाई है कि नहीं,,,,,

ठीक है राजू,,,,, लेकिन तूने अपना मुंह बंद करने के लिए बहुत बड़ी कीमत मुझसे चुकवा लिया है,,,

क्या करूं पिताजी तुम्हारी गलती भी तो बहुत बड़ी थी इसलिए हर्जाना भी तो बहुत बड़ा चुकाना ही होता,,,,(राजू मुस्कुराता हुआ बोला और दोनों घर पर पहुंच गए)

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