राजू अपनी मां को अपना काम दिखाने के लिए गोदाम पर ले कर आया था और यहां पर उसकी कामलीला की शुरुआत हो चुकी थी जिसमें उसकी मां खुद उसका साथ दे रही थी क्योंकि वह भी यही चाहती थी,, दोपहर का समय था चारों तरफ सुनसान था वैसे भी जंगल के जैसे पेड़ पौधों से घिरा हुआ यह जगह जैसा ही लगता था और आज का दिन राजू के लिए भी बहुत खास था क्योंकि आज काम करने वाले मजदूर छुट्टी पर थे गोदाम पर कोई नहीं था गोदाम पर क्या गोदाम के आसपास की जगह पर भी कहने के लिए भी इंसान नहीं थे चारों तरफ सुनसान था इसीलिए तो राजू पूरी तरह से निश्चिंत था और गोदाम में अपनी मां को ले जाकर के बड़े-बड़े आम दिखाते हुए उसे अपने ब्लाउस उतारने के लिए कह रहा था ताकि वह अपनी मां की चूची से और दशहरी आम की गोलाई से अच्छी तरह से नाप ले सके,,,, और उसकी मां भी उसकी बात मानते हुए अपने ब्लाउज के बटन खोलना शुरू कर दी थी,,,।

धीरे-धीरे गोदाम का वातावरण पूरी तरह से गर्म होता जा रहा था फिर तो पहले से ही घोड़े की सवारी करके राजू का लंड पूरी तरह से खड़ा हो चुका था और गोदाम में वह अपनी मां को अपने ब्लाउज उतारने के लिए बोल रहा था और मधु भी अपने बेटे की बात मानते हुए अपने ब्लाउज के बटन को खोल रही थी जैसे-जैसे ब्लाउज का बटन खुलता जा रहा था वैसे वैसे राजू की उत्तेजना बढ़ती जा रही थी ,,,,,, और जैसे-जैसे ब्लाउज के बटन खोल रहा था वैसे वैसे मधु की लाजवाब रसीली चूचियों की झलक मिलती जा रही थी और उस झलक को पाकर उत्तेजना के मारे राजू अपने हथेली में लिए दोनों हाथों को कस के दबाता जा रहा था,,, मधु मुस्कुरा रही थी उसके चेहरे पर कामुक मुस्कान थी उसके तन बदन में भी हलचल में चली थी अपने बेटे के सामने इस तरह से गोदाम के अंदर अपने ब्लाउज के बटन खोलने में वह भी पूरी तरह से उत्तेजित हुए जा रही थी,,,,,
गोदाम पर किसी के ना होने का भाव दोनों मां बेटों के चेहरे पर एकदम साफ झलक रहा था दोनों पूरी तरह से निश्चिंत देते किसी बात का डर उन्हें बिल्कुल भी नहीं था ना तो किसी के आने का और ना ही किसी के देखे जाने का इसलिए दोनों बेफिक्र होकर एक दूसरे से मजा लेने की तैयारी कर रहे थे और इसी की शुरुआत करते हुए मधु अपने बेटे की आंखों के सामने ही उसे अपनी चूची के दर्शन कराने के लिए अपने ब्लाउज के बटन को रही थी और देखते ही देखते अपने ब्लाउज का आखिरी बटन खोल कर वह अपने दोनों कबूतरों को अपने ब्लाउज के कैद से एक दम से आजाद कर दी,,,,

दोनों चूची के नंगे होते हैं इस अद्भुत नजारे को देखकर राजू की आंखें फटी की फटी रह गई ऐसा बिल्कुल भी नहीं था कि राजू पहली बार अपनी मां की लंबी चुचियों को देख रहा है लेकिन नई जगह पर नए माहौल में पहले जैसे हालात भी पूरी तरह से बदले हुए और नयापन लिए हुए होते हैं और यही हाल है इस समय राजू का भी था अपनी मां की चूची से जी भर के खेल लेने के बाद भी उसे ऐसा लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां की चूची को पहली बार देख रहा हो आश्चर्य से अपनी मां की सूचियों को देखते हुए वह बोला,,,।
बाप रे बहुत खूबसूरत हैं,,,,
(अपने बेटे के मुंह से अपनी चूचियों की तारीफ सुनकर मधु गदगद हुए जा रही थी और मंद मंद मुस्कुरा रही थी,,, और राजू अपनी दोनों हथेलियों में लिए हुए दशहरी यहां जो कि वह भी आकार में कुछ ज्यादा ही बड़े थे उन्हें अपनी मां को दिखाते हुए बोला,,,)
देखो मैं दशहरी आम इतने बड़े बड़े होने के बावजूद भी तुम्हारी चूची के आगे कितने छोटे हैं,,,(दोनों दशहरी आम को अपनी मां की दोनों चुचियों से सटाते हुए बोला,,,)

हारे मुझे तो यकीन ही नहीं हो रहा है दशहरी आम को देखकर मुझे नहीं लग रहा था कि मेरी चूची ईससे भी बड़ी होगी,,,,
सच में मां मुझे भी यकीन नहीं हो रहा था लेकिन सब कुछ आंखों के सामने ही देख लो तुम्हारी चूची इस दशहरी आम से भी ज्यादा लाजवाब है मैं कहता था ना तुम्हारी दशहरी आम के आगे तो गोदाम का बड़ा सारा दशहरी आम फीका पड़ जाए,,,,(ऐसा कहते हुए राजू दशहरी आम के ऊपरी हिस्से के उस छोटे से छेद को खोलने लगा और गोल-गोल घुमाते हुए उसे उंगली के सारे से खोलकर उसे पूरी तरह से चूसने के लिए तैयार कर दिया और अपनी मां को दशहरी आम थमाते हुए बोला,,,)
लो मा तुम इस दशहरी आम का मजा लो तुम्हें बहुत पसंद है ना और मैं तुम्हारी इस,,(अपनी मां की बड़ी बड़ी चूचियों की तरफ देखते हुए) दशहरी आम को चूसने का मजा लेता हूं,,,।

(अपने बेटे की बात मानते हुए मुस्कुरा कर मैं तो अपने बेटे के हाथ से बड़े से दशहरी आम को थाम ली और अपनी छाती को अपने बेटे की तरफ आगे कर दी और राजू भी बेइज्जत अपने दोनों हाथ आगे बढ़ाकर अपनी मां की दोनों चुचियों को थाम लिया और उसे जोर जोर से दबाता हुआ अपनी मां की तरफ देखा और फिर धीरे से अपने होठों को अपनी मां के किसमिस पर रखकर चूसना शुरू कर दिया अपने बेटे की हरकत से मधु पूरी तरह से सीहोर उठी और अगले ही पल वह भी दशहरी आम को अपने मुंह से लगाकर उसके मीठे रस का आनंद लेने लगी,,,, राजू अपनी मां की चूचियों को पाकर पूरी तरह से उत्तेजित और आनंदित हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोश हुआ जा रहा था और अपनी मां को भी पूरी तरह से मस्त कर रहा था वह दोनों हाथों में अपनी मां की दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह लेकर दबा दबा कर दोनों का दूध पी रहा था,,,, और उत्तेजित अवस्था में मधु दशहरी आम को अपने मुंह में लेकर जोर-जोर से चुस रही थी,,,,,,, मां बेटे दोनों पूरी तरह से काम पिपासा हो चुके थे राजू अपनी मां की दोनों चूचियों को दशहरी आम की तरह दबा दबा कर उस का रस निकालकर पी रहा था वह रह रह कर जितना हो सकता था उसने अपनी मां की चुची को अपने मुंह में लेकर पीने की कोशिश कर रहा था,,,, उसका मन तो कर रहा था कि पूरा का पूरा अपने मुंह में लेकर पी जाए लेकिन ऐसा कर सकना उसके बस में नहीं था क्योंकि उसकी मां की सूचियों का आकार उसके मुंह से कुछ ज्यादा ही बड़ा था और विशाल तौर पर था,,,, लेकिन फिर भी राजू हार नहीं मान रहा था दोनों चूचियों को बारी-बारी से मुंह में लेकर पी रहा था,,,,, और अपने बेटे की हरकत पर मधु के मुंह से गरमा गरम सिसकारियां निकल रही थी वह अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव करते हुए दशहरी आम को बड़ी जोर जोर से अपनी हथेली में लेकर दबा दबा कर चुस रही थी,,,, अत्यधिक उत्तेजना के चलते वह दशहरी आम को इतनी जोर से दबा देती थी कि आम का रस उसके होठों से निकलकर उसके से होकर बहने लगता था जो कि सीधे उसकी चुचियों के बीचो बीच पहुंच जा रहा था क्या देखकर राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी,,,,

राजू से रहा नहीं जा रहा था और मधु के मुंह में से टपक रहे आम के रस को वह उसकी चुचियों के बीचो बीच से अपनी जीभ लगाकर चाट रहा था,,,, इससे मधु की उत्तेजना और मदहोशी दोनों बढ़ती जा रही थी वह अपने बेटे से अपनी चूची चूसाई का अत्यधिक आनंद लूट रही थी,,,,, दोनों हाथों को चूची पर रखकर जोर-जोर से मसलते हुए राजू अपनी जी बाहर निकाल कर आम के रस को अपनी जीभ से लपेट तेरे ऊपर की तरफ बढ़ रहा था जैसे-जैसे मधु के मुंह में से आम का रस टपक कर जिस जिस रंगों से होकर गुजर रहा था राजू उसी अंगों को अपने होठों से चाटता हुआ ऊपर की तरफ बढ़ रहा था और देखते ही देखते राजू अपनी मां के लाल लाल होठों के करीब आ गया और अगले ही पल अपनी मां के हाथ में से दोनों दशहरी आम को लेकर उन्हें दूर फेंक दिया और अपनी मां की हथेली को अपनी हथेली में भरकर अंगुलियों को अंगुलियों से सटाकर इतनी कसके दबाया की मधु के मुंह से आह निकल गई और इसी आह के साथ राजू अपने प्यासे होठों को अपनी मां के रस भरे हो तो पर लगा दिया और उसका रसपान करना शुरू कर दिया,,,,

राजू की यह हरकत इतनी कलात्मक और उत्तेजना तमक थी कि मधु के तन बदन में आग लग गई उसकी बुर से पानी का रस टपक में लगा हुआ पूरी तरह से मदहोश हो गई और एकदम से अपने बेटे की छाती से सट गई,,,, हालात अब दोनों मां बेटों के काबू में बिल्कुल भी नहीं था,,,, गांव से दूर जंगल जैसे स्थल के बीचो-बीच बने गोदाम में मां बेटे दोनों पूरी तरह से काम बइह्वल होकर,,, एक दूसरे में समाने की कोशिश कर रहे थे,,,,, देखते ही देखते राजू अपने दोनों हाथेली को अपनी मां की हथेलियों से छुड़ाकर अपनी हथेली को ठीक अपनी मां के पीछे लाकर उसकी बड़ी बड़ी गांड पर जमा दिया और उसे जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया ऐसा करने पर पीछे से तो उसे मजा मिल ही रहा था लेकिन आगे से भी मधु को आनंद प्राप्त होने लगा क्योंकि आगे से दोनों टांगों के बीच उसकी दूर पर सीधे-सीधे उसके बेटे के लंड की रगड़ महसूस हो रही थी जो कि अभी भी पजामे के अंदर केद था,,, बार-बार हो रही लंड की दस्तक को अपनी बुर के ऊपर महसूस करके,,, मधु से बिल्कुल भी रहा नहीं गया और वहां अपना हाथ सीधे अपने बेटे के पजामे में डाल दिया और उसके नंगे लंड को अपने हथेली में पकड़कर दबा दी,,,, मधु अपने अंदर कितनी अत्यधिक उत्तेजना का अनुभव कर रही थी या उसकी हथेली का दबाव ही बता रहा था जिससे राजू के मुंह से हल्की सी आह निकल गई थी और इसी आह के साथ राजू अपनी मां की साड़ी को ऊपर की तरफ उठाना शुरू कर दिया था,,,, और देखते ही देखते वह अपनी मां की साड़ी को कमर तक उठाकर उसकी नंगी गांड पर अपनी दोनों हथेलियों की रगड़ बढ़ाना शुरू कर दिया नंगी गांड पर हथेली घुमाने का मजा ही कुछ और होता है इस बात को राजू से बेहतर कौन जान सकता था राजू पागलों की तरह अपनी मां की नंगी गांड से खेल रहा था,,,,
ओहहह मां,,,,आहहहहह तेरी गांड कितनी मस्त है रे मन करता है ऐसे दिन भर चाटता रहूं,,,
ओहहहह मेरे राजा बेटा तो तुझे रोका किसने है मेरा भी तो मन करता है कि तेरे लंड को दिन-रात मुंह में लेकर चुस्ती रहूं कितना मोटा और लंबा है,,,,, तेरी लंड को मैं अपनी बुर में लेकर में एकदम धन्य हो जाती है,,,,आहहहहह कितना गर्म है यह तो मेरा पानी निकाल देगा,,,,

ओहहहह मेरी छिनार लंड का तो काम ही है औरत का पानी निकालना ,,,, देखना अभी मैं कैसे तेरा पानी निकलता हूं तो एकदम मस्त हो जाएगी,,,,,आहहहहहह ,,(एक हाथ आगे की तरफ लाकर अपनी मां की बुर पर रख दिया और उसे अपनी हथेली से झगड़ते हुए गर्म करने लगा जो की पूरी तरह से काम रस से चिपचिपी हो चुकी थी,,,, अपनी बुर पर अपने बेटे की हथेली को महसूस करते हैं मधु की हालत और ज्यादा खराब होने लगी उसके मुख से बड़ी जोर जोर से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि सुनसान जगह पर और वह भी गोदाम के अंदर उसकी गरमा-गरम सिसकारी सुनने वाला और कोई नहीं था इसलिए वह दिल खोलकर गरमा गरम सिसकारी लेकर मजे ले रही थी,,,,।
कुछ देर तक राजू इसी तरह से अपनी मां के अंगों से खेलता रहा और पूरी तरह से उत्तेजना के सागर में गोते लगा रहा था लंड की आदत पूरी तरह से खराब हो चुकी थी वह अपनी औकात में आ चुका था वह किसी भी वक्त अपनी मां की बुर में जाने के लिए तड़प रहा था अपनी मां की बुर की अंदरूनी दीवारों की गर्मी और उसकी रगड़ को पाकर मस्त होना चाहता था,,,,, राजू अपने लंड की बेताबी को अच्छी तरह से समझता था लेकिन उसकी जरूरत भी पूरी करना उसके लिए प्रमुख था इसलिए वह बिना कुछ बोले अपनी मां के कदमों को दोनों हाथों से पकड़ लिया और उसे नीचे की तरफ दबाव देने लगा मधु जो की पूरी तरह से परिपक्व थी वह अपने बेटे की हरकत और उसके सारे को अच्छी तरह से समझती थी और वैसे भी वह अपने बेटे के लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने के लिए तड़प रही थी,,,, इसलिए वह अपने बेटे के दबाव के तहत धीरे-धीरे नीचे की तरफ झुकने लगी और देखते ही देखते वह एकदम से झुककर घोड़ी बन गई वह घुटनों के बल नहीं थी लेकिन झुकी हुई थी और तुरंत अपने दोनों हाथों से अपने बेटे के पजामे को एक झटके से खींचकर उसके घुटनों तक पहुंचा दी,,,,

मधु का दिल जोरों से धड़क रहा था गोदाम के अंदर इस तरह की हरकत का मजा लेने का यह पहला अनुभव था इसलिए वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजना का अनुभव कर रही थी अपने बेटे के मोटे तगड़े लंबे लंड को देखकर उसकी बुर से काम रस अमृत की भूत बनकर टपक रही थी,,,, अपनी बेटी के लंड को अपने लाल-लाल होठों को खोल कर उसे अंदर लेने से पहले वह अपनी नजर उठा कर अपने बेटे की तरफ देखने लगी राजू भी अपनी मां को ही देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकराई और दोनों एकदम से मदहोश हो गए और अगले ही पल मधु अपने लाल-लाल होठों के बीच अपने बेटे के लंड के मोटे सुपाड़े को लेकर उसे चूसते हुए अंदर की तरफ ले जाने लगी,,,, और राजू इस अनुभव में पूरी तरह से डूबता हुआ अपनी आंखों को बंद कर लिया और हल्की-हल्की सांसे लेता हुआ अपनी मां के इस नेक कार्य में हाथ बढ़ाता हुआ अपनी कमर को आगे की तरफ खेल रहा था जिससे उसकी मां उसके समूचे लंड को अपने गले तक उतार कर उसकी चूसाई कर सके क्योंकि राजू इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि लंड को उसकी मां की बुर के अंदर डालने से पहले उसकी सेवा सत्कार होना बेहद जरूरी था ताकि वह बोर के अंदर जाकर पूरी तरह से तबाही मचा सके,,,
राजू से शारीरिक संबंध बनाने से पहले लंड चुस्ती में मधु को इतनी ज्यादा काबिलियत प्राप्त नहीं हुई थी क्योंकि उसे चूसने के लिए उसके पति का छोटा सा लंड मिलता था जिसे मुंह में लेकर उसे महसूस नहीं होता था कि वह लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने ही है उसे तो ऐसा ही लगता था कि जैसे बबूल की टहनी तोड़कर वह मुंह में लेकर अपना दांत साफ कर रही है लेकिन राजू का लंड प्राप्त होते ही उसके दर्शन मात्र से ही वह पूरी तरह से धन्य हो चुकी थी और उसे मुंह में लेने के बाद तो उसे इस बात का एहसास हुआ कि मर्द का असली लंड कैसा होता है और सही मायने में मर्द कैसा होता है,,,, वैसे भी अब उसकी नजर में राजू भी असली मर्द का हकदार था जो कि पूरी तरह से उसे अपनी भुजाओं में रहकर उसकी जवानी की गर्मी को शांत करता था,,,,

देखते ही देखते मधु अपने बेटे के लंड को अपने गले तक उतार कर चुसाई का आनंद ले रही थी और उसे दे भी रही थी,,,, राजू को पूरी तरह से मदहोश हो चुका था वैसे जिस तरह से मधु अपने बेटे के लंड की बुलाई पर अपने लाल-लाल होठों का दबाव बनाकर गोल सा छल्ला बनाई थी राजू को तो ऐसा ही लग रहा था कि जैसे वह अपनी मां के मुंह में नहीं बल्कि उसकी बुर में अपना लंड डाला हुआ है इसीलिए तो वह अपनी कमर को होले होले हिलाता हुआ अपनी ही मां के मुंह को चोद रहा था,,,,, कुछ देर तक इसी तरह से मजा लेने के बाद खुद मधु की हालत खराब होने लगी उसकी बुर में चीटियां रेंगने लगे वजह से जल्द अपने बेटे के लंड को अपनी बुर की गहराई में महसूस करना चाहती थी,,,, इसलिए वह अपने बेटे के कहने से पहले ही अपनी बेटी के लंड को अपने मुंह में से बाहर निकाल ली और गहरी गहरी सांस लेते हुए अपनी साड़ी को उसी तरह से उठाए हुए खड़ी हो गई और अपने बेटे की आंखों के सामने ही अपनी हथेली को पहले जीभ से चाट कर उसे अपनी बुर पर लगाकर उसे जोर-जोर से रगड़ते हुए बोली,,,,।
सहहहह आहहहहह मेरे राजा अब मुझसे बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा है मेरी बणर तेरे लंड़ के लिए तड़प रही है अब जल्द से जल्द अपने लंड को मेरी बुर में डालकर मेरी प्यास बुझा दे,,,,आहहहहह मेरे राजा,,,आहहहहहह,,,,।
(मधु पूरी तरह से मदहोश हुए जा रही थी वह उसी तरह से अपनी हथेली को अपनी बुर पकड़ते हुए अपनी गांड को गोल गोल घुमा रही थी और अपनी मां की इस हालत को देखकर राजू से बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं हो रहा था वह पूरी तरह से मतवाला हो चुका था अपनी मां पर चढ़ने के लिए इसीलिए वह तुरंत पेड़ का सहारा देकर अपने पजामे को उतार फेंक दिया हूं कुर्ते को भी निकाल कर एकदम नंगा हो गया लेकिन अभी भी उसकी मां साड़ी में थी,,,,, राजू का भी मन कर रहा था कि अपनी मां की बुर में लंड डालकर लेकिन उसकी बुर की हालत देख कर उसके मुंह में पानी आ रहा था वह अपनी मां की बुर के काम रस को पीना चाहता था,,,, इसलिए वह आगे बढ़ा और तुरंत घुटनों के बल बैठ गया और अपनी मां की हथेली को अपने हाथ से पकड़ कर हटाने लगा और दोनों हाथों से अपनी मां की गांड को पकड़कर अपनी तरफ खींच लिया और उसकी बुर पर अपने होंठ रख कर जितना हो सकता था उतनी अपनी जीभ को बुर की गहराई में डाल कर उसकी मलाई को चाटना शुरू कर दिया,,,

दोनों मां बेटों की इस तरह की हरकत से हालात बद से बदतर हुआ जा रहा था दोनों कि तन बदन में चुदाई की लहर उठ रही थी दोनों एक दूसरे में सामान्य के लिए तड़प रहे थे लेकिन राजू था कि अपनी मां की प्यास को और ज्यादा बढ़ा रहा था,,,,, लेकिन जल्द ही वह पल आ गया जब लंड और बुर का संगम होने वाला था लेकिन इस संगम से पहले राजू ने अपनी मां के बदन पर बचे हुए कपड़े को भी उतार कर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया बड़े से कोई धाम के अंदर मां बेटे पूरी तरह से नग्न अवस्था में हो चुके थे,,,,, राजू ने अपनी मां की चुदाई करने के लिए जमीन पर बिस्तर नहीं लगाया ना कोई चटाई बिछा या वह सीधे अपनी मां को गोद में उठाकर नारंगी के ढेर में ले गया और उसी पर लेटा कर अपनी मां की दोनों टांगों को फैला दिया और फिर अपने मोटे तगड़े लंड को एक झटके में ही अपनी मां की बुर में डालकर उसे बच्चेदानी तक पहुंचा दिया जिससे मधु के मुंह से जोर की चीख निकल गई लेकिन इस चीज की परवाह किए बिना राजू तुरंत अपनी मां की दोनों चूचियों को हथेली में भरकर थाम लिया और उस का सहारा लेकर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, मधु कभी सपने में भी नहीं सोची थी कि उसका बेटा इस तरह से बेरहमी से उसकी चुदाई करेगा लेकिन इस बेरहमी में भी उसका प्यार झलक रहा था वह पूरी तरह से अपनी बेटी की चुदाई का मजा लेते हुए मस्त हुए जा रही थी वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसका पति इस तरह की जबरदस्त चुदाई कभी नहीं कर पाता जिस तरह कि उसका बेटा उसे चोद रहा है,,,,,।
आहहह आहहहह बेटा मेरे लाल तेरा लंड मेरे बच्चेदानी तक पहुंच रहा है,,,,,,,

, पहुंचने दे मेरी रानी जितनी बार तेरे बच्चेदानी से लंड टकराएगा तुझे उतना ज्यादा मजा आएगा देखना आज मैं तुझे ऐसा जो दूंगा कि तू जिंदगी भर याद रखेंगी ,,,,,,
आहहहह आहहहहह ऊफफफ,,,,,आहहहहहह बहुत मजा आ रहा है मेरे बेटे मेरे राजा तेरा लंड पाकर में धन्य हो गई हुं,,,
मैं भी तेरी बुर पआकर मस्त हो गया हूं,,,आहहहह कितनी गर्म है तेरी बुर,,,,,,
(राजू जबरदस्त प्रहार कर रहा था उसका हर एक धक्का मधु के नीचे पड़े संतरे को दबा दे रहा था जिससे संतरे दबकर उसका रस बाहर निकल जा रहा था लेकिन इसकी परवाह राजू को बिल्कुल भी नहीं थी,,,, संतरे के ढेर पर लेटी हुई मधु को किसी भी प्रकार की दिक्कत नहीं आ रही थी लेकिन उसका हर एक धक्का हर बार दो-तीन संतरो का रस बाहर निकाल रहा था मधु की बुर से रस निकलने से पहले संतरे का रस निकल जा रहा था,,,,, संतरे के ढेर पर चुदवाने का मजा ही कुछ और था इस बात का एहसास मधु को अच्छी तरह से हो रहा था नीचे चटाई बिस्तर या गद्दे से ज्यादा मजा संतरे पर आ रहा था राजू पागलों की तरह अपनी मां को चोद रहा था कभी दोनों टांगों को उठाकर अपने कंधे पर रख लेता तो कभी जांघों को पकड़कर उसे चौड़ा कर दे रहा था तो कभी छातियों पर के दोनों गुब्बारों को जोर से पकड़ कर दबा दे रहा था जिस तरह की मेहनत राजू अपनी मां के ऊपर कर रहा था उसी तरह का साथ मधु कि अपने बेटे को दे रहे थे क्योंकि जिस तरह से राजू बेरहमी से अपनी मां की चुदाई कर रहा था अगर मधु की जगह दूसरी कोई औरत होती तो उसे अपना लंड बाहर निकालने के लिए बोल देती लेकिन मधु की हिम्मत थी कि वह अपने बेटे का साथ बराबर दे रही थी और इस पल का बराबर मजा ले रही थी,,,,।
बुर की अंदरूनी दीवारों पर राजू का लंड हर बार रगड़ रगड़ कर अंदर बाहर हो रहा था जिससे मधु की बुर से लगातार काम रस बाहर निकल रहा था,,,,,,, राजू की मेहनत लग रही थी मधु के चेहरे का रंग लाल गुलाबी होता जा रहा था वह पूरी तरह से मदहोशी के आलम में डूबती चली जा रही थी और देखते-देखते आधे घंटे की जबरदस्त चुदाई के बाद मधु के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज बड़ी तेज हो गई वह चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुकी थी और यही हाल राजू का भी था राजू जोर जोर से धक्के लगा रहा था क्योंकि किसी भी वक्त उसका लंड पानी पी सकता था और यही हाल था इसलिए उसे पूरी तरह से अपनी बाहों में भर कर उसे अपने सीने से लगा लिया और अपनी कमर को मशीन की तरह के पीछे करने लगा इतनी तेज आगे पीछे हो रही थी कि उसकी ठाप से जांघ से चांघ टकराने की आवाज बड़ी ही मादकता बिखेर रही थी,,,,, आखिरकार दोनों की मेहनत रंग लाई और दोनों एक साथ झड़ना शुरू हो गए दोनों पसीने से तरबतर हो चुके दोनों एकदम मदहोश हो चुके थे राजू अपने लंड को अपनी मां की बुर में तब तक धंसाय रहा जब तक की उसका लावा पूरी तरह से उसकी मां की बुर में खाली ना हो गया,,,,, इसके बाद गहरी सांस लेते हुए अपनी मां की बुर में से अपना लंड बाहर निकाल कर उसके बगल में ढेर हो गया दोनों कुछ देर तक बिना कुछ बोले गोदाम के ऊपरी हिस्से को देख रहे थे दोनों की सांसें दुरुस्त हुई तो दोनों एक दूसरे को देखने लगे राजू अपनी मां को चोद कर मस्त हो चुका था,,,,,।
मधु धीरे से उठ कर बैठ गई,,,, और गहरी सांस लेते हुए बोली,,,।
सच में राजू तू बहुत मजा देता है,,,

तुम भी मुझे बहुत मजा देती हो,,,,(राजू भी धीरे से उठते हुए बोला,,,,,, यह सुनकर मधु मुस्कुराने लगी और अपने पीछे नजर घुमा कर देखी तो बहुत सारे संतरे दब चुके थे जिसमें से उसका रोशनी कर गया था उसे देखकर मधु मुस्कुराने लगी और उसे मुस्कुराता हुआ देखकर राजू बोला,,,)
तुम्हारी बुर की तरह इनका भी पानी निकल गया है,,,
निकालने वाला तू भी है मेरा भी और संतरे का भी,,,,,(धीरे से उठते हुए) चल मैं भी देखूं तो कैसे काम होता है,,,,
(ऐसा कहते हुए मधु उठकर खड़ी हो गई और अपनी साड़ी उठाकर अपने बदन से लपेटने को हुई ही थी कि राजू उसके हाथ से साड़ी खींच कर फेंक दिया और बोला)
बिना कपड़ों के एकदम नंगी होकर,,,
(अपने बेटे की बात सुनकर मुस्कुराने लगी और बोली)
कोई आ गया तो,,,,
कोई नहीं आएगा तभी तो कह रहा हूं,,,,,(और इतना कहते हुए राजू लकड़ी की आम की पेटी के पास गया जो कि खाली थी,,, और बड़े-बड़े आम को लेकर तराजू पर रखने लगा और अपनी मां से बोला,,,)
लाओ तराजू पर आम को रखो जब 10 किलो हो जाए तो उसे 10 किलो आम को उस आपकी खाली पेटी में रखना है हर एक पेटी में 10 किलो आम होता है,,,
(इतना सुनते ही मधु नीचे झुककर बड़े-बड़े आम को उठाकर तराजू पर रखने लगी आज मधु के साथ-साथ राजू को भी एक हजरत अनुभव हो रहा था नंगे होकर काम करने का और अभी एक औरत के साथ और वह औरत खुद की सगी मां होने के नाते राजू की उत्तेजना और ज्यादा बढ़ती जा रही थी क्योंकि उसकी मां जब जब नीचे झुककर आम उठा रही थी,,,, के बड़े-बड़े तरबूज और भी ज्यादा बाहर निकल कर राजू के आनंद को बढ़ा दे रहे थे राजू को बहुत मजा आ रहा था अपनी मां को इस अवस्था में काम करते थे खबर देखते ही देखते उसकी मां लगभग 5 पेटी को आम से भर चुकी थी और कुछ दशहरी आम को जो की बहुत ही अच्छे अच्छे थे उन्हें अलग निकालनी थी घर ले जाने के लिए लेकिन काम करते-करते उसे बड़े जोरों की पेशाब लग गई थी तो वह इधर उधर देख रही थी यह देखकर राजू बोला,,,,।
क्या हुआ ऐसे क्यों देख रही हो,,,?
मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,
Raju godaam me apni ma k sath

तो इसमें क्या हुआ चलो मैं बताता हूं कहां करना है,,,,,
(इतना कहने के साथ ही नग्न अवस्था में ही वह अपनी मां को गोदाम के पीछे वाली जगह पर ले गया वहां का दरवाजा थोड़ा छोटा था उसे खोलकर व गोदाम से बाहर आ गया चारों तरफ बड़े-बड़े पेड़ घनी झाड़ियां थी किसी के देखे जाने का डर यहां बिल्कुल भी नहीं था और सामने ही नदी बह रही थी यह देख कर मधु एकदम से उत्साहित हो गई और बोली)
हाय भैया यहां तो नदी भी है कितना खूबसूरत नजारा है,,,
सो तो है और इस खूबसूरत नजारे को और भी ज्यादा खूबसूरत तुम ने बना दी हो एकदम नंगी होकर,,,,, मुझे तो गर्मी लग रही है मैं नहाने जा रहा हूं तुम पेशाब कर लो,,,,
(इतना कहने के साथ ही राजू नंगा ही नदी की तरफ आगे बढ़ने लगा और मधु अपने बेटे को जाते हुए देख रही थी उसकी गांड को देख रही थी और अपने बेटे के गांड को देख कर उसे इस बात का एहसास हो रहा था कि चाहे जैसी भी औरतों की गांड ही सबसे ज्यादा खूबसूरत लगती है और इतना सोचते हुए वह वहीं पर बैठ गई और पेशाब करने लगी उसकी बुर से निकल रही पेशाब की धार के साथ-साथ सीटी की आवाज राजू के कानों में पड़ी तो है पीछे मुड़ कर देखने लगा और अपनी मां को के साथ करता हुआ देखकर वह मुस्कुराने लगा,,,, और राजू को मुस्कुराता हुआ देखकर मधु शर्मा गई,,,, ऐसा नहीं था कि मधु पहली बार अपने बेटे के सामने पेशाब कर रही थी वह कई बार अपने बेटे के साथ पेशाब करके चुकी है और उसके सामने भी कर चुकी है इसलिए उसे बिल्कुल भी फर्क नहीं पड़ रहा था लेकिन नजर से नजर मिलने से वो शर्मा गई थी देखते ही देखते राजू नदी में उतर गया था अपने बेटे को नदी में उसके ठंडे पानी में नहाता देखकर मधु से भी रहा नहीं गया क्योंकि वह भी पसीने से तरबतर हो चुकी थी और संतरे का रस उसके बदन पर लग चुका था इसलिए थोड़ा असहज महसूस कर रही थी इसलिए वह भी सुनसान जगह का फायदा उठाते हुए धीरे से नदी में उतर गई और अगले ही पर मां बेटे दोनों नदी के पानी में नहाना शुरू कर दिए दोनों एक दूसरे के बदन से खेल भी रहे थे राजू बार-बार अपनी मां को अपनी तरफ खींच कर उसे अपनी बाहों में लेकर उसके बदन को दबा दे रहा था उसे चूम ले रहा था उसकी चूची को मुंह में लेकर पी रहा था दोनों बड़े उत्साहित होकर अलग-अलग तरीके से नदी में नहाने का मजा ले रहे थे देखते ही देखते दिन गुजरने वाला था दोनों नदी में से बाहर निकले और राजू तुरंत अपनी मां को अपनी गोद में उठा लिया,,,,

अरे यह क्या कर रहा है,,,,?
कुछ नहीं तुम्हें गोद में उठाना मुझे बहुत अच्छा लगता है,,,,
(और इतना कहने के साथ ही वह अपनी मां को गोद में उठाए हुए यही गोदाम के एक छोटे से दरवाजे से अंदर प्रवेश किया और अपनी मां को गोद में लिए हुए ही वह दरवाजे को बंद कर दिया,,,, मधु अपने बेटे की गोद में ही थी और वह मुस्कुराते हुए बोली,,,)
चल बहुत समय हो गया शाम होने वाली है अब हमें घर चलना चाहिए,,,,
Raju apni ma k sath nadi me

मैं भी यही सोच रहा था लेकिन तुम्हें नहाता हुआ देखकर तुम्हारी गांड देखकर मेरा मन बहक गया है,,,
तो,,,,(इतना कहकर मधु मुस्कुराने लगी तो राजू उसे तुरंत अपनी गोद में से नीचे उतारा और उसे आम की पेटी के सामने खड़ा कर दिया,,,, मधु भी उसी तरह से खड़ी हो गई उसे लगा कि राजू पीछे से आज उसकी लेने वाला है इसलिए उसके बदन में भी हलचल मच रही थी,,,, राजू ठीक अपनी मां के पीछे खड़ा हो गया और उसकी दोनों टांगों को फैला कर घुटनों के बल बैठ गया और उंगली से उसकी बुर को कुरेदेते हुए अगले ही पल अपने होठों को अपनी मां की गांड के छोटे से छेद से लगा दिया और उसे जी से चाटना शुरू कर दिया अपनी गांड के छेद पर अपने बेटे की जीभ को महसूस करते हैं उसके तन बदन में सिहरन सी दौड़ गई पल भर में मधु को इस बात का एहसास होगा कि उसका बेटा गलत इरादे से उसकी गांड को चाट रहा है,,,, वह समझ गई कि उसका बेटा क्या करने वाला है वह बहुत बार अपने पति से गांड मरवा चुकी थी और यह सुख वह अपने बेटे को भी दे चुकी थी लेकिन उसके पति के लेने में उसके बेटे के लंड में जमीन आसमान का फर्क था उसके पति का लंड उसकी गांड के छेद में बड़े आराम से अंदर बाहर हो जाता था लेकिन उसके बेटे का लंड बड़ी मशक्कत करने के बाद गांड के अंदर घुसता था और बवाल मचा देता था इसीलिए उसे होने वाले दर्द का अहसास होने लगा और उसके बदन में अजीब सी हलचल होने लगी लेकिन वह बेटे को इनकार नहीं कर सकती थी बहुत दिन हो भी चुके तो उसे गांड मरवा इसलिए आज वह इस गोदाम में गांड मराई का सुख भोग लेना चाहती थी इसीलिए अपने बेटे का साथ देते हुए अपनी दोनों टांगों को कुछ ज्यादा ही खोल दी,,,
Raju apni m k sath maja kartA huA

राजू पागलों की तरह अपनी मां की गांड के छोटे से छेद को जीभ से चाट रहा था उसकी जीभ का गांड के छोटे से छेद पर इधर-उधर घूमना मधु के बदन में अंगारे भर रहा था वह पूरी तरह से तैयार हो चुकी थी गांड मरवाने के लिए,,,, कुछ देर तक अपने थूक और अपने जीभ से अपनी मां की गांड के छोटे से छेद को पूरी तरह से चिकनाहट से भरते हुए वहां धीरे से खड़ा हुआ और अपनी मां की गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाने लगा था कि उसके गांड का छेद ग्राम आराम से दिखाई दे और अगले ही पल राजू अपने लंड को आगे बढ़ाते हुए अपने से बड़े को गांड के छोटे से छेद पर लगाकर अपनी मां से बोला,,,।
राजू अपनी मां को उठाकर ले जाता हुआ

अब तैयार हो जा मेरी जान अब तुझे बहुत मजा आने वाला है,,,,
संभाल कर राजा बहुत दुखता है,,,,
चिंता मत कर आज बड़े आराम से करूंगा,,,
(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने लंड को पकड़ तो उसके सुपाडे को अपनी मां की गांड के छोटे से छेद के अंदर डालना शुरू कर दिया,,, थुक से सनी हुई गांड का वो छोटा सा छेद चिकनाहट लिए हुए था इसलिए धीरे-धीरे करके राजू के लंड का सुपारा मधु की गांड के छेद में उतरता चला गया और देखते ही देखते राजू पसीने से तरबतर होकर अपने फ्रेंड को अपनी मां की गांड में डालने में कामयाब हो गया और जैसे ही पूरा का पूरा लंड मधु की गांड की गहराई में उतर गया वैसे ही राजू के चेहरे पर प्रसन्नता के भाव नजर आने लगे और वह अपनी मां की कमर पकड़ लिया और बोला,,,,)
अब आएगा असली मजा,,,
(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया वह अपनी मां की गांड मार रहा था मधु को भी बहुत मजा आ रहा था अपने पति के लंड को अपनी गांड की गहराई में महसूस नहीं कर पाती थी लेकिन अपने बेटे के लैंड को अपनी गांड की गहराई के साथ साथ वह उसकी मजबूती को भी अपनी गांड में महसूस कर पाती थी उसे ऐसा लगता था कि कहीं उसके बेटे के लंड के कारण उसकी गांड फट ना जाए,,,, देखते देखते मधु की गांड कैसे छोटा सा छेद राजू के लंड की गोलाई का छल्ला बन जाए और बड़े आराम से अंदर बाहर होने लगा मधु और राजू दोनों पूरी तरह से नंगे थे राजू अपना दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची पकड़कर उसे दबाते हुए अपनी कमर हिला रहा था उसे अपनी मां की गांड मारने में बहुत मजा आ रहा था ऐसा नहीं था कि अपनी मां की बुर में उसे मजा नहीं आता था अपनी मां की बुर में तो उसे अत्यधिक मजा आता था लेकिन कभी-कभी गांड मारने का शुख भी वह भोग लेता था,,,,,।

पूरे गोदाम में मधु की गरमा गरम सिसकारी की आवाज गूंज रही थी शाम ढल चुकी थी लेकिन अभी अंधेरा नहीं हुआ था मधु को गोदाम में आए काफी समय हो चुका था और इस दौरान राजू ने अपनी मां को जबरदस्त मदहोशी और आनंद की पराकाष्ठा का अनुभव कराया था मधु पूरी तरह से मस्त हो चुकी थी अपने बेटे के साथ गोदाम पर आना एकदम सफल हो चुका था मधु पागलों की तरह अपने बेटे से अपनी गांड मरवा रही थी और राजू अपने मोटे लंड से अपनी मां की गांड मार रहा था,,,,, देखते ही देखते दोनों चर्मसुख के बेहद करीब पहुंच गए थे लेकिन मधु की चीखें बहुत दूर-दूर तक पहुंच रही थी,,,,, और देखते ही देखते दोनों एक से ज्यादा झड़ना शुरू हो गए लेकिन जैसे ही दोनों के अंगों से गर्म पानी का फव्वारा फुटा वैसे ही गोदाम का दरवाजा खुल गया जिसे बंद करते समय राज्य में कड़ी नहीं लगाया था और जैसे ही गोदाम का दरवाजा खुला मधु और राजू दोनों की नजरें गोदाम के दरवाजे पर पहुंची और देखेगी वहां पर एक आदमी खड़ा था उसे पहचानते राजू को बिल्कुल भी देर नहीं लगी वह कोई और नहीं बल्कि विक्रम सिंह था और विक्रम सिंह गोदाम के अंदर के नजारे को देखकर पूरी तरह से पागल हो गया उसकी आंखों के सामने एक जवान लड़का एक खूबसूरत औरत की चुदाई कर रहा था हालांकि विक्रम सिंह को इस बात का एहसास बिल्कुल भी नहीं था कि वह जवान लड़का कौन है और औरत कौन है और उसे यह भी नहीं मालूम था कि इस समय वह जवान लड़का उस औरत की गांड मार रहा था ना की बुर,,,, विक्रम सिंह कहने से ही औरतों के मामले में ढीला था वह पतलून का बिल्कुल ही ढीला था एक खूबसूरत औरत को एकदम नंगी अवस्था में चुदवाते हुए देखकर उसका ईमान डोल गया उसके बदन में हरकत होने लगी उसका लंड एकदम खड़ा हो गया और वो एकदम से गोदाम के अंदर प्रवेश करते हुए जोर से चिल्लाया,,,,
यह सब क्या हो रहा है,,,,।
(गोदाम का दरवाजा खुलते ही और उस अनजान इंसान को देखते ही मधु की हालत एकदम से खराब हो गई थी वो एकदम से चौक गई थी,,,, क्योंकि मधु उस अनजान आदमी के सामने पूरी तरह से नंगी थी और अपने ही बेटे से चुदवाया ही थी उस अनजान इंसान ने सब कुछ देख लिया था जिस राज पर आज तक पर्दा डाला हुआ था आज वह राज खुल चुका था मधु एकदम से घबरा गई थी राजू दरवाजे पर विक्रम सिंह को देखते ही अपने लंड को बाहर निकाल दिया था लेकिन लंड में से पानी की पिचकारी अभी भी निकल रही थी मधु बिल्कुल भी देर किए बिना तुरंत आगे बढ़ी और अपने कपड़े लेकर उससे अपने नंगे बदन को ढकने की कोशिश करने लगी,,, लेकिन राजू चरम सुख की प्रक्रिया से गुजर रहा था इसलिए उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें विक्रम सिंह की आंखों के सामने ही उसके लंड से पाने की पिचकारी निकल रही थी,,,,, जोकि विक्रम सिंह एकदम साफ तौर पर देख रहा था,,,, विक्रम सिंह चिल्लाकर थोड़ा आगे बढ़ा तब तक राजू के लंड से पानी की पिचकारी निकल चुकी थी उसे इस बात का एहसास हुआ कि वह किस हालात में और तुरंत अपने कपड़े को उठाना और उसे पहनते हुए बोला,,,)
तुम कौन हो यहां क्या कर रहे हो,,,,,(राजु यह बिल्कुल भी जताना नहीं चाहता था कि उसे मालूम है कि यह इंसान कौन है इसलिए अंजान बनता हुआ वह बोला,,,)
पहले तू बता तू जहां क्या कर रहा है मजदूरी करने आते हो और यहां पर यह काम करते हो एक औरत को मजदूरी पर लाकर उसको चोद रहे हो,,,,
(विक्रम सिंह की बात को सुनकर राजू को थोड़ी तसल्ली हुई कि विक्रम सिंह यह नहीं जानता था कि दोनों मां बेटे हैं इसलिए वह निश्चिंत और निडर होकर बोला)
तुम्हें ईससे कोई मतलब,,,,,
Madhu ekdam mast hoti huyi

मेरा नाम विक्रम सिंह है और यह सब बहुत जल्द मेरा होने वाला है,,,,, हरामजादे मेरे होने वाले गोदाम में औरत को लाकर उसे चोदता है,,,(मधु की तरफ देखते हुए विक्रम सिंह डोला राजू समझ गया था कि विक्रम की नजर उसकी मां के ऊपर है उसकी खूबसूरती पर है क्योंकि जिस हालात में है वह उसकी मां को देखा था राजू को समझते देर नहीं लगी थी कि विक्रम सिंह का ईमान डोल गया था)
तुम कोई भी हो मैं तुम्हें नहीं जानता लेकिन हम लोग क्या कर रहे हैं तुम्हें से कोई वास्ता नहीं होना चाहिए,,,,
मामूली सा मजदूर मुझसे जबान लडाता है,,,हैई औरत तू इधर आ और हां कपड़े नीचे फेंक दे नंगी ही आ,,,,।
(अपनी मां के लिए विक्रम सिंह के मुंह से इस तरह की बात सुनकर राजू का खून खोलने लगा था राजू बावरा हुआ जा रहा था वह पूरी तरह से क्रोधित हो गया था और विक्रम सिंह अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला)
तू चाहे जो भी हो लेकिन है मस्त करारी तुझे देखकर ही मेरा लैंड खड़ा हो गया तेरी गोरी गोरी गांड एकदम गोल-गोल देखकर तो मेरे लंड की हालत खराब होने लगी है इतनी मामूली औरत होने के बावजूद भी तुझ में खूबसूरती कुट कूट कर भरी हुई है,,,,(राजू गुस्से में विक्रम सिंह की तरफ देख रहा था और मधु विक्रम सिंह की बातों से शर्म से पानी-पानी हो जा रही थी वह विक्रम सिंह से घबरा भी रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें उसका वजन अभी भी पूरी तरह से नंगा था वह सिर्फ अपने कपड़ों से अपने नंगे पन को ढकी हुई थी जिसे विक्रम सिंह हटाने के लिए बोल रहा था अगर वह ऐसा कर देती तो वह विक्रम सिंह की आंखों के सामने एक बार फिर से नंगी हो जाती और वह ऐसा बिल्कुल भी नहीं चाहती थी क्योंकि वह आज तक अनजान मर्द के सामने कभी नंगी नहीं हुई थी)
विक्रम सिंह तुझे एक औरत के बारे में इस तरह की बातें नहीं करनी चाहिए,,,,
Raju apni ma ko Puri tarah se mast karta hua

हरामजादे तेरी हिम्मत मेरा नाम लेता है तेरी औकात क्या है वह तो इस औरत की वजह से मेरा मुंह बंद है वरना तेरा सर धड़ से अलग कर दिया होता इस औरत की खूबसूरती ने मुझे पागल कर दिया है अच्छा ही हुआ कि मैं आज इधर आ गया और तुझे इस औरत को चोदते हुए देख लिया वरना इतना खूबसूरत चीज में कभी नहीं देख पाता इसे तो मेरे महल में होना चाहिए मेरी रानी बनकर रोज मेरा बिस्तर गर्म करना चाहिए देख नहीं रहा इसकी चुची दशहरी आम से भी बड़ी बड़ी है,,,,। साली एकदम छिनार लगती है,,,,
(राजू अपने मन में कुछ सोच रहा था वरना एक अनजान आदमी को अपनी मां के लिए इतनी गंदी गंदी बात करते हुए देख कर वह अपने आप पर बिल्कुल भी काबू नहीं कर पाता लेकिन वह आगे का कुछ सोच रहा था विक्रम सिंह वही था जिसके बारे में लाला ने बताया था और जिसके आने पर लाल आपकी खुद की हालत खराब हो गई थी इसलिए राजू समझता था कि विक्रम सिंह कोई मामूली इंसान बिल्कुल भी नहीं है इसीलिए उसे इस तरह से टक्कर लेना ठीक नहीं था और इसी इंसान से छुटकारा भी पढ़ा था इसलिए अपने मन में कुछ सोच रहा था और इसीलिए वह अभी तक अपनी मां के लिए उसके मुंह से इस तरह की गंदी गंदी बातें सुन रहा था लेकिन अब धीरे-धीरे विक्रम सिंह राजू की मां की तरफ आगे बढ़ रहा था उसके नंगे बदन को देख कर उसकी आंखों में वासना के दौरे साफ नजर आ रहे थे वह किसी भी कीमत पर राजू की मां को चोदना चाहता था क्योंकि उसकी बड़ी-बड़ी दशहरी आम जैसी चूची देख कर उसका मन ललित गया था उसकी गोरी गोरी गोर गोर गाल देखकर उसकी हालत खराब हो गई थी,,,, अगर शायद राजू की मां को वहां कपड़ों में देखता है तो शायद इस तरह से उसकी हालत इतनी खराब ना होती लेकिन वहां उसे चुदवाते हुए एकदम नंगी देख चुका था इसलिए वह अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था और राजू के सामने ही उसकी मां की तरफ आगे बढ़ रहा था इस बात से अनजान की राजू और भारत के बीच किस तरह का संबंध है दोनों मां बेटे हैं और इस बात राजू को भी राहत है कि विक्रम सिंह नहीं जानता था कि वह दोनों के बीच मां बेटे का रिश्ता है वह विक्रम सिंह के लिए अनजान था उसकी मां अनजान थे वह दोनों गोदाम में काम करने वाले मजदूर ही थे विक्रम सिंह की नजर में इसलिए राजू कुछ सोच रहा था कुछ आगे का सोच रहा था इसीलिए खामोश था,,,। और विक्रम सिंह आगे बढ़ रहा था उसके लंड की अकड़ बढ़ती जा रही थी उसे लगने लगा था कि आज वह इस खूबसूरत औरत की चुदाई करके ही रहेगा अपनी बदन की गर्मी को शांत करके ही रहेगा इसलिए वह आगे बढ़ रहा था क्योंकि वह पूरी तरह से निश्चिंत कावा जानता था कि यह मजदूर लोग उसका कुछ नहीं कर पाएंगे और उसकी बात मान लेंगे लेकिन वह नहीं जानता था कि उसका पाला किस से पड़ा है,,,)
हरामजादी कितनी खूबसूरत है रे तू गांव की होने के बावजूद महलों की रानी लगती है तेरा अंग एकदम खरा सोना है तेरे अंग अंग से मधुर रस बह रहा है तेरी चूची से तेरी बुर ,,,,से आज तेरी बुर में अपना लंड डालकर अपनी गर्मी शांत करूंगा,,,
(विक्रम सिंह के मुंह से अपनी मां के लिए इतनी गंदी गंदी बातें सुनकर राजु को ऐसा लग रहा था कि जैसे उसके कानों में कोई कर्म लोहा पिघलाकर डाल रहा हो वह गुस्से से अपनी मुट्ठी को भींच लिया था,,,, देखते ही देखते विक्रम सिंह मधु के एकदम करीब पहुंच गया था मधु शर्म से पानी पानी में जा रही थी कि अनजान मर्दों को अपनी करीब वह पहली बार महसूस कर रही थी और एकदम नंगी अवस्था में उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें और से इस बात का अचंभा हो रहा था कि उसका बेटा कुछ कर क्यों नहीं पा रहा है,,,,)

हाय मेरी रानी तू कितनी खूबसूरत है तुझे यह लड़का कितना देता होगा ₹2 ₹3 या यह दशहरी आम की पेटी मेरे साथ रहेगी तो रानी बनाकर रखूंगा अपनी हवेली में तुझे जगा दूंगा बस एक बार अपनी जवानी का रस मुझे पिला दे,,,,(पर ऐसा कहते हुए विक्रम सिंह अपना हाथ आगे बढ़ाकर मधु ने जिस कपड़े से अपने नंगे बदन को ढकी हुई थी उस कपड़े को अपने हाथ से पकड़ कर उसे एक झटके से खींच लिया और राजू की मां को नंगी कर दिया मधु एक बार फिर से उस अनजान आदमी के सामने एकदम से नंगी हो गई हो एकदम से घबरा रही रोने लगी और उसके मुंह से जोर से चीख निकली,,,)
राजु,,,,,ऊऊऊऊऊऊऊऊ,,,,,
(राजू का खून खोल गया राजू की आंखों के सामने विक्रम सिंह उसकी मां के कपड़े को खींचकर उसे नंगी कर दिया था विक्रम सिंह की आंखों के सामने एक बार फिर से मधु के नंगी होते ही और उसकी चीख सुनकर राजु से बिल्कुल भी नहीं रहा गया और वह अपनी मुट्ठी को भींचते हुए चिल्लाया और जोर से विक्रम सिंह की तरफ दौड़ लगा दिया,,,)
विक्रम सिंह हरामजादे,,,,,,(और फिर दौड़ते हुए विक्रम सिंह कुछ समझ पाता उसे अपने कंधे पर उठा लिया और उसे वहीं जमीन पर उठाकर पटक दिया पहले ही बार में विक्रम सिंह एकदम चारों खाने चित हो गया था राजू की पकड़ और उसकी पटाखे इतनी जबरदस्त थी कि विक्रम सिंह को तारे नजर आने लगे राजू पूरी तरह से क्रोधित अवस्था में था क्योंकि आज विक्रम सिंह ने उसकी मां की इज्जत पर हाथ डाला था राजू तुरंत उसके सीने पर सवार हो गया और उसके मुंह पर अपनी मुट्ठी से वार करने लगा राजू उसे पागलों की तरह मार रहा था उसके मुंह से खून निकलने लगा वह उसका पैर पकड़कर इधर से उधर घसीट दे रहा था विक्रम सिंह को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि राजू जैसे छोकरी में इतनी हिम्मत हो कि वह पूरी तरह से चारों खाने चित हो गया था,,,,,,,,, राजू का गुस्सा देखकर मधु एकदम से घबरा गई थी वह नंगी ही राजू को रोकने की कोशिश करने लगी,,,)
जाने दे जाने दे छोड़ ईसे मर जाएगा यह,,, खामखा बात का बतंगड़ बन जाएगा,,,
नहीं मैं इसे बिल्कुल भी नहीं छोडूंगा जिसे जान से मार डालूंगा इसलिए तुम्हारी इज्जत पर हाथ डाला है,,,
(मैं तो समझ गई कि राजू रोकने वाला नहीं है और जिस तरह से वहां उसकी पिटाई कर रहा है वह उसे मार डालेगा इसलिए वह जोर से चिल्लाते हुए बोली,,,)
राजू तुझे मेरी कसम छोड़ दीजिए,,,,
(कसम सुनते ही राज एकदम से रुक गया वह अपनी मां की कसम तोड़ना नहीं चाहता था इसलिए अपने गुस्से पर एकदम काबू करते हुए वह विक्रम सिंह के गिरेबान को छोड़ दिया और अपनी जगह पर खड़ा होकर गहरी गहरी सांस लेने का वह अपनी मां की तरफ देखा उसे छुड़ाने के चक्कर में मधु एक बार फिर से पूरी तरह से नंगी हो चुकी थी,,,, राजू विक्रम सिंह की तरफ देखा हुआ है एकदम से बेहोश हो गया था,,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि विक्रम सिंह को इस हालात में गोदाम पर छोड़ देना अच्छी बात नहीं है इसलिए वह अपनी मां से बोला)
तुम अपने कपड़े पहनो मैं इसे ठिकाने लगा कर आता हूं,,,
ईसे मारना नहीं नहीं तो यह मर जाएगा,,,
तुम चिंता मत करो मैं थोड़ी ही देर में इसे दूर कहीं छोड़ कर आता हूं वरना लाला के सर पर मुसीबत आ जाएगी,,,।
(और इतना कहने के साथ ही राजू विक्रम सिंह को घसीटा हुआ गोदाम से बाहर ले गया और घोड़े पर किसी तरह से चढ़ा कर उसे घोड़े पर सवार होकर उसे दूर घनी झाड़ियों में जाकर छोड़ दिया और वापस आकर अपनी मां को वापस घोड़े पर बैठा कर घर की तरफ ले जाने लगा लेकिन इससे पहले वह गोदाम को बंद करके और अपनी मां के द्वारा पसंद किए गए आम की पेटी को एक बड़े से थैले में भरकर उसे घोड़े के एक साइट पर लटका दिया,,, और फिर घर की तरफ निकल गया,,,)

