राजू अब लाला की जायदाद का आधा मालिक बन चुका था मालिक बनने का एहसास कुछ और ही होता है और यही एहसास मे राजु पूरी तरह से मस्त हो गया था,,,,
राजू को सब कुछ एक सपना सा लग रहा था लेकिन जैसे ही वह गोदाम पर पहुंचा गोदाम के सारे मजदूर उसे मालिक का दर्जा देने लगे जो कि कुछ देर पहले ही लाला आकर सब लोगों को इतना कर दिया था कि आज से कारोबार की जिम्मेदारी राजू के ही सर पर है और राजू भी तुम लोगों का मालिक है ऐसा समझना और राजू के व्यवहार पर किसी भी प्रकार की बदतमीजी नहीं होनी चाहिए,,,
गोदाम के मजदूर से लेकर खेतों के मजदूर की और भी लोग जो लोग हवेली से जुड़े काम कर रहे थे सभी लोग राजू को मालिक मालिक कह कर पुकार रहे थे और राजू का सीना गदगद हो जा रहा था यह खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल चुकी थी सब लोग राजू की किस्मत पर बहुत खुश हो रहे थे क्योंकि राजू से किसी की भी दुश्मनी नहीं थी राजू हमेशा किसी न किसी की मदद किसी भी रूप में करता ही रहता था इसलिए सभी लोग राजू से खुश थे,,,,,,, राजू इस बात की खबर सबसे पहले झुमरी को देना चाहता था इसलिए वह घोड़े पर सवार होकर झुमरी के घर की तरफ निकल गया और यह घोड़ा लाला की हवेली का था जो कि हवेली की शोभा बढ़ा रहा था राजू ने गोदाम में काम करते हुए घोड़ा चलाना भी सीख लिया था इसलिए उसे बिल्कुल भी दिक्कत नहीं आ रही थी और देखते ही देखते झुमरी के घर पहुंच गया,,,, झुमरी के घर के सामने पहुंचते ही उसकी नजर झुमरी की मां पर गई पहले तो झुमरी मां राजू को पहचान ही नहीं पाई क्योंकि उसने कभी राजू को घोड़े पर सवार नहीं देखी थी इसलिए राजू मुस्कुरा रहा था और घोड़े से उतर कर वह हाथ जोड़कर नमस्कार किया और बोला,,,।
कैसी हो सासू मां,,,,(राजू के इस तरह से कहने पर भी ज्वेलरी की मां कुछ समझ नहीं पाई तो राजू मुस्कुराता हुआ बोला) अरे अपने दामाद को नहीं पहचान रही हो तब कैसे अपनी बेटी को मुझे दोगी,,,,
अरे राजू तो मैं तो पहचान ही नहीं पाए मुझे तो लगा कोई जमींदार का बेटा आ गया है,,,
ऐसा ही समझो सासु मां,,,,, मैं अब मालिक बन गया हूं,,,,
क्या तू सच कह रहा है राजू पर ऐसा कैसे हो सकता है,,,
यूं समझ लो सासु मां किस्मत मुझ पर मेहरबान हो गई है,,,,
(राजू और झुमरी की मां के बीच शारीरिक संबंध का रिश्ता था राजू मौका मिलने पर झुमरी की मां की जमकर चुदाई करता था और इसमें खुद श्याम ने ही साथ दिया था लेकिन अब राजू झुमरी से विवाह करना चाहता था और इस रिश्ते से झुमरी कि मां उसकी सांस बन चुकी थी जब-जब राजू झुमरी की मां को सासू मां कहकर संबोधित करता था तब तक झुमरी की मां के तन बदन में हलचल सी मच जाती थी क्योंकि उसे बड़ा अजीब सा लगता था कि जिस लड़के से वह चुदवा कर अपनी प्यास बुझा रही थी उसी को अपना दमाद बनाने वाली थी और उसे अपनी जवान बेटी देने वाली थी,,,,)
यह तो बड़ी खुशी की बात है राजू अब तो मेरी बेटी तेरे साथ राज करेंगे,,,,
क्यों सांसु मा तुम नहीं करोगी,,,
जवान और खूबसूरत औरत पाकर तुझे मेरी याद क्यों आएगी भला,,,
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है सासु मां तुम्हारी बुर तो झुमरी की बुर से भी बहुत खूबसूरत है,,,
(बुर वाली बातें सुनकर झुमरी की एकदम से चौक ते हुए बोली,,,)
हाय दैया तूने कब देखा,,,,
क्या बात कर रही हो सासू मां जो दमाद अपनी सास की बुर देख सकता है उसे चोद सकता है तो अपनी होने वाली बीवी की बुर को भला कैसे छोड़ेगा,,,,
और झुमरी तेरे साथ करने के लिए मान गई थी,,,
झुमरी अब बच्ची नहीं है और मेरे साथ विवाह करना चाहती हो तुम भला अपनी बुर मुझे देने में इंकार क्यों करेंगी,,,,
चलो यह तो ठीक ही हो गया मेरी बेटी तुम्हारे साथ खुशी से अपना जीवन बिताएंगी और वह भी एकदम रानी बनकर,,,
हां सासू मां मैं झुमरी कोई तुम रानी बनाकर रखूंगा इसीलिए तो यह खबर उसे सुनाने के लिए आया हूं लेकिन झुमरी है कहां,,,,?
अंदर नहा रही है,,,
ओहहहह मैं अभी झुमरी से मिल कर आता हूं,,,(इतना कहते ही राजू अंदर कमरे की तरफ जाने लगा और पीछे से आवाज देते हुए झुमरी की मां बोली)
अरे अरे कुछ करना नहीं विवाह हो जाए उसके बाद मैं तुझे नहीं रोकूंगी,,,
तुम चिंता मत करो सासु मां मैं सिर्फ झुमरी से मिलने आया हूं,,,(और इतना कहने के साथ अभी राजू अंदर वाले कमरे पर पहुंच गया जहां पर उसने पहली बार झुमरी को नहाते हुए देखा था उसके बदन को देखा था उसकी नग्न जवानी को देखा था और तभी से वह झुमरी का दीवाना हो गया था,,, आज भी राजू झुमरी को नहाते हुए देख रहा था बस फर्क इतना था कि उस दिन तू मेरी पूरी तरह से नंगी थी और आज वह कुर्ती पहनी हुई थी लेकिन उसके बदन पर सलवार नहीं थी लेकिन पानी से भीगी होने की वजह से उसकी कुर्ती उसके नितंबों से इस तरह से चिपक गई गई थी कि कपड़े मैं होने के बावजूद भी उसका हर एक रंग साफ नजर आया था,,,, जिसे देखते ही राजु का लंड खड़ा हो गया था,,,, झुमरी को इस अवस्था में देखकर भले ही राजू का लैंड खड़ा हो गया था लेकिन राजु इस समय कुछ करने के लिए नहीं आया था बल्कि खुशखबरी सुनाने के लिए आया था इसलिए वह पीछे से आवाज लगाता हुआ बोला,,,।
झुमरी,,,,
(झुमरी एकदम से चौक गई और पीछे की तरफ देखी तो राजू खड़ा था तब उसे राहत महसूस हुई उसे लगा कि कोई और आ गया है,,,,)
तुम यहां कैसे मां बाहर ही है ऐसे में तुम अंदर तक आ गए,,,
अरे तुम चिंता मत करो मेरी सासू मां ने ही मुझे अंदर भेजी है,,,,
क्या,,,?
हां आखिरकार में इस घर का दामाद हूं जब चाहे तब आ सकता हूं जा सकता हूं,,,
दमाद हो नहीं होने वाले हो,,, अब थोड़ा इज्जत से रहा करो मां क्या सोचेगी,,,।
(राजू से बात को अच्छी तरह से जानता था कि एक इज्जत दार परिवार के लिए और एक इज्जतदार दामाद के लिए यह सब शोभा नहीं देता इसीलिए अपनी मर्यादा को समझता था वह अच्छी तरह से जानता था कि झुमरी को इस बात का भनक तक नहीं है कि राजू और उसकी मां के बीच किस तरह का संबंध है और खुद उसके भाई और उसकी मां के बीच किस तरह का संबंध है वरना झुमरी इस तरह की बात नहीं करती और राजू उसे बताना भी नहीं चाहता था इसलिए बोला,,)
झुमरी नहाते हुए

ठीक है ठीक है मैं जानता हूं मैं तो सिर्फ तुम्हें यह पता नहीं आया था कि मेरी किस्मत एकदम बदल गई है,,,
क्यों क्या हुआ,,,?(झुमरी उसी तरह से अपने बदन पर पानी डालते हुए बोली और उसकी गोल गोल नितंब पानी से गीली कुर्ती के ऊपर झलक ने लगी)
लाला ने मुझे अपने कारोबार जमीन जायदाद और हवेली का आधा मालिक बना दिया है,,,
क्या कह रहे हो राजू,,,
एकदम ठीक कह रहा हूं झुमरी तभी तो हवेली का घोड़ा लेकर आया हूं जो कि तुम्हारे घर के सामने ही खड़ा है अब मैं घोड़े पर ही घूमुंगा,,,
यह तो बहुत खुशी की बात है राजू मैं तुम आज बहुत खुश हूं,,,,,
अच्छा तो मैं चलता हूं,,,,(इतना क्या कर रहा है तू घर के बाहर आ गया तो देखा कि श्याम भी वहीं खड़ा था और घोड़े को सहला रहा था यह देखकर राजू बोला)
अच्छा हुआ तू श्याम इधर मिल गया,,,
क्यों क्या हुआ और यह घोड़ा कहां से ले आया,,,
सब अपना ही है और हां कल से गोदाम पर आ जाना और दो चार अपने दोस्तों को भी लेते आना,,,
क्यों क्या हुआ,,,?
हुआ कुछ नहीं बस तुम लोगों को नौकरी दे रहा हूं गोदाम पर आकर काम करना गोदाम का काम संभालना सब कुछ तेरे जिम्मेदारी पर और तुझे सब काम कराना है तू मजदूरों का मालिक रहेगा,,,, समझ रहा है ना और तुझे अच्छे पैसे भी मिलेंगे,,,
अरे यह तो बहुत अच्छा है राजू,,,,(श्याम की मां एकदम खुश होते हुए बोली,) दिन भर इधर-उधर घूमता रहता है थोड़े पैसे आने लगेंगे तो अच्छा ही होगा,,,
इसीलिए तो मैं इधर आया हूं चाची,,,, तुम चिंता मत करो श्याम भी कमाने लगेगा,,,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह घोड़े पर बैठ गया और श्याम को धीरे से बोला) आखिरकार साले के लिए इतना तो फर्ज बनता ही है,,,,
साले भाग जा,,,,,(श्याम के मुंह से इतना सुनकर राजू मुस्कुराता हुआ घोड़ा लेकर आगे बढ़ गया और बोला)
कल पहुंच जाना,,,,
ठीक है पहुंच जाऊंगा,,,,।
दूसरे दिन शयाम को सारा काम समझा कर राजू दूसरे कामों में ध्यान देने लगा,,,, राजू के दोस्त लोग भी बहुत खुश हो गए थे क्योंकि उन लोगों के हाथ में भी अब पैसा आने लगा था,,,,, राजू की मां और उसके पिताजी राजू की इस कामयाबी पर बहुत खुश हो रहे थे गर्व कर रहे थे क्योंकि जिस तरह से राजू तरक्की कर रहा था उसे देखते हुए मां-बाप दोनों का सीना गर्व से चौड़ा होता जा रहा था,,,, लाला भी राजू के काम से बहुत खुश था उसे अपने फैसले पर संतुष्टि हो रही थी कि उसने अपनी जायदाद को अपनी हवेली को गलत हाथों में नहीं दिया था,,,,
कुछ दिन ऐसे ही गुजर गए तो मधु एक दिन राजु से बोली,,,
राजू तू तो बड़ा आदमी बन गया है मुझे भी तो अपने गोदाम पर ले चल मैं भी तो देखूं क्या काम हो रहा है,,,,
दशहरी आम को लकड़ी के छोटे-छोटे बक्से में भरकर शहर भेजा जा रहा है इस समय तो गोदाम पर यही काम हो रहा है क्योंकि लाला के आम के बगीचे बहुत हैं और इतना आम हुआ है कि पूछो मत,,,
राजू मुझे भी तो ले चल अपनी गोदाम पर मैं भी देखना चाहती हूं और मुझे भी दशहरी आम बहुत पसंद है वहां से थोड़ी बदाम लेकर आ जाऊंगी,,,,
थोड़े बहुत क्यों पूरा का पूरा लेकर आ जाओ और वैसे भी उस दशहरी आम से कहीं ज्यादा खूबसूरत और मिठास से भरे हुए तुम्हारे दशहरी आम है,,,,(इतना सुनते ही मधु एकदम से हड़बड़ा कर दरवाजे की तरफ देखने लगी क्योंकि घर पर हरिया मौजूद था और वह नहीं चाहती थी कि जिस तरह की बातें उसका बेटा कर रहा है इसकी भनक उसके पति को कानों तक पहुंचे इसलिए वह धीरे से बोली)
अरे पागल तेरे पिताजी घर पर ही हूं अगर सुन लिए तो गजब हो जाएगा,,,,
पिताजी घर के पीछे गए हैं बेल को चारा देने इतनी जल्दी नहीं आएंगे,,,
तो,,,(मधु आश्चर्य से राजू की तरफ देखते हुए बोली क्यों कि वह उसके कहने के मतलब को अच्छी तरह से समझ रही थी और राजू बोला)
तो,,,, कल तुम्हें गोदाम के दशहरी आम खिलाऊंगा लेकिन आज मुझे अपने दशहरी आम खिला दो,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां के ब्लाउज पर रखकर ब्लाउज के ऊपर से ही उसकी बड़ी बड़ी चूची को दबाने लगा यह देखकर मधु को अच्छा तो लग रहा था लेकिन डर भी लग रहा था इसलिए वह पीछे हो गई तो राजू आगे बढ़ कर उसकी खबर में हाथ डालकर उसे अपनी तरफ खींच लिया और एकदम अपने बदन से हटा लिया और उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला)
तुम बिल्कुल भी मत डरो,,,, पिताजी इतनी जल्दी नहीं आएंगे तब तक तो अपना काम भी हो जाएगा,,,
कैसा काम,,,,,?
जैसा कि मेरी रानी को पता ही नहीं,,,(और इतना कहने की शादी है राजू अपनी मां को बाहों में भरे हुए ही उसकी बड़ी बड़ी गांड को साड़ी के ऊपर से दबाते हुए धीरे-धीरे साड़ी के ऊपर करने लगा इस समय घर में गुलाबी भी मौजूद नहीं थी वह हरिया घर के पीछे बेल को चारा पानी देने गया था और इसी के मौके का फायदा उठाते हुए राजू अपनी मां के साथ मस्ती कर रहा था,,,, मधु अपने बेटे की पकड़ से छूटने की कोशिश कर रही थी लेकिन राजू की मजबूत भुज३ओ से वह छूट नहीं पा रही थी,,,, ऐसा नहीं था कि राजू की हरकत से मधु को मजा नहीं आ रहा था,,, मधु भी पूरी तरह से आनंदित हो रही थी और भाभी अंदर ही अंदर यह चाह रही थी कि राजू उसके साथ जबरदस्ती करते हुए उसे चोदे,,, और फिर भी अपने पति के डर से वह राजू की पकड़ से छूटने की कोशिश करते हुए बोली,,,)
राजू रहने दे कुछ समझा कर तेरे पिताजी घर पर मौजूद है किसी भी वक्त इधर आ जाएंगे अगर हम दोनों की इस हालत में देखेंगे तो गजब हो जाएगा,,,
कुछ गजब नहीं होगा मां बस एक बार साड़ी उठाकर झुक जाओ जल्दी जल्दी काम हो जाएगा बहुत दिन हो गए हैं तुम्हारी बुर का मजा लिए,,,,
अरे मैं कभी इंकार कर रही हूं बाद में कर लेना ना,,,
नहीं मुझे तो अभी तुम्हारी चाहिए,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपनी मां की साड़ी पर कमर तक उठाकर कमर के नीचे उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया था उसकी बड़ी बड़ी नंगी गोरी गोरी गांड पर अपने दोनों हाथों से ही रखकर से जोर-जोर से दबाकर उसके लाल-लाल होठों को अपने होठों से लगाकर उसका रस पी रहा था मधु भी पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी और राजू वक्त की नजाकत को अच्छी तरह से जानता था इसलिए वह तुरंत अपनी मां को पीछे घुमा कर दीवाल का सहारा लेकर उसे झुका दिया और उसकी गोल-गोल बड़ी बड़ी गांड को अपनी तरफ खींच कर उसके गुलाबी छेद में अपना लंड डाला कर एक झटके में पूरा का पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में उतार दिया,,,,
आहहहह ,,,,, देखना बेटा तेरे पिताजी ना जाए,,,(दरवाजे की तरफ नजर गड़ाए हुए वह बोली,,,,)
तुम चिंता मत करो मैं पिताजी के आने से पहले ही तुम्हारा पानी निकाल दूंगा,,,,
(राजू इतना कहने के साथ ही अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर दिया था वह अपनी मां को दिन के उजाले में चोद रहा था अपने पिताजी की उपस्थिति में जो कि किसी भी वक्त कमरे में आ सकते थे लेकिन ऐसा लग रहा था कि राजू को अपने पिताजी की उपस्थिति का भी किसी भी प्रकार का भय नहीं लग रहा था वह कुछ ज्यादा ही उत्तेजित होकर अपनी मां को चोद रहा था और इस चुदाई से मधु पूरी तरह से आनंदित हो रही थी उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी की आवाज निकल रही थी जिसे सुनकर राज्यों का जोश बढ़ता जा रहा था चोदते चोदते राजू अपनी मां की एक टांग उठा कर उसे अपनी कमर पर लपेटना चाहा लेकिन घोड़ी बनी हुई मधु को इस स्थिति में उसकी टांग उठा कर अपनी कमर पर लपेट नहीं सकता था इसलिए उसके घुटनों को अपने हाथ से पकड़ कर थोड़ा सा उठा दिया और इस अवस्था में वह अपनी मां को चोदना शुरू कर दिया इस अवस्था में मधु की कुछ ज्यादा ही खुली हुई नजर आ रही थी जिसमें राजू का लंड बड़े आराम से अंदर बाहर हो रहा था,,,,,
ज्यादा समय राजू और मधु दोनों के पास नहीं था राजू के मोटे तगड़े लंड से जबरदस्त चुदाई के कारण मधु पानी पानी हुई जा रही थी,,,, मधु इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि अचानक हुई चुदाई से कुछ ज्यादा ही मजा आता है और कुछ देर पहले मधु चुदवाने के बारे में सोच भी नहीं रही थी लेकिन दशहरी आम का जिक्र आते ही अपनी मां की चुचियों को देखकर राजू का मन डोल गया और जिसके परिणाम स्वरुप वह इस समय अपनी मां की जबरदस्त चुदाई कर रहा था,,, मधु बार-बार दरवाजे की तरफ देख रही थी क्योंकि उसे डर था कि कहीं राजू के पिताजी नाम आ जाए वह एक तरफ राजू के पिताजी के आने से डर भी रही थी और दूसरी तरफ राजू के लंड का मजा भी ले रही थी देखते ही देखते मधु की सांसे तेज होने लगी वह अपने चरम सुख के करीब पहुंच रही थी उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी और वह भी पीछे की तरफ अपनी बड़ी बड़ी गांड को धक्का दे रही थी राजू का साथ दे रही थी राजू भी अपने धक्कों को बढ़ा दिया था और देखते ही देखते मधु का पानी निकल गया और राजू अपना पानी निकालने के लिए जबरदस्त धक्के पर धक्का मार रहा था और जैसे ही उसे दरवाजे पर सूखी हुई घास पर किसी के चलने की आवाज आई वैसे ही खुद राजू का भी पानी छूट गया लेकिन वह जानता था कि उसके पिताजी घर में प्रवेश कर रहे हैं इसलिए तुरंत अपना लंड बाहर निकाल लिया और एक पिचकारी सीधा लंड के निकलने से मधु की गोरी गोरी गांड पर गिर गई और राजू तुरंत अपनी मां की साड़ी को उसकी कमर से खींच कर नीचे कर दिया,,,, और अपने लंड को जो कि अभी भी रह रह कर उसमें से पिचकारी निकल रही थी उसे अपने पजामे के अंदर डाल दिया,,,,, राजू ने सही समय पर स्फूर्ति दिखाते हुए सब कुछ सही कर दिया था हाथ में बाल्टी लिए हरिया घर के अंदर प्रवेश किया और दोनों को घर के कोने में खड़ा पाकर बोला,,,।
मां बेटे में क्या खिचड़ी पक रही है,,,
(इतना सुनते ही मधु एकदम से सक पका गई,,,, लेकिन तभी बात को संभालते हुए राजू बोला,,,)
वो वो मां कह रही थी कि उसे भी गोदाम का काम देखना है वह भी थोड़ा घूमना चाहती है,,,,
क्यों ऐसा क्या है गोदाम में जो तुम घूमना चाहती हो,,,(बाल्टी को नीचे रखते हुए मधु की तरफ देखकर हरिया बोला तो मधु की अपनी स्थिति को संभालते हुए बोली)
अरे वह क्या है ना कि गोदाम में आजकल दशहरी आम को बक्से में रखकर शहर भेजा जा रहा है तो सोच रही हूं कि मैं थोड़ा घूम भी लूंगी और दशहरी आम भी घर पर लेकर आ जाऊंगी,,,
हां यह तुमने ठीक सोचा है जरूर चली जाना कब जाना है,,,
अब राजू बताएं तब ना,,,
कल ही चलते हैं क्योंकि कल मजदूरों की छुट्टी है उन्हें किसी काम से बाहर जाना है कल गोदाम पर कोई नहीं रहेगा,,,,
(राजू अपनी मां और अपने पिताजी की तरफ देखते हुए बोला,,,)
ठीक है राजू अपनी मां को थोड़ा घुमा देना वैसे भी घर पर काम कर कर के थक जाती है,,,, और वैसे भी तुम्हारा रुतबा गांव में कुछ ज्यादा ही बढ़ने लगा है मुझे भी बहुत खुशी होती है जब गांव वाले तुम्हारी इज्जत करते हैं,,,
यह तो आप दोनों का आशीर्वाद है पिताजी,,,,
(इतना कहते ही राजू घर से बाहर चला गया और मधु अपने काम में लग गई दोनों एकदम साफ बच गए थे लेकिन आज राजू से चुदवाते समय वह अपने मन में ठान ली थी कि अगर राजू के पिता जी दोनों को इस हालत में देख लेंगे तो मधु जरूर अपने पति से अपनी बहन की चुदाई की बात कह कर अपने पति का मुंह दबा लेगी लेकिन ऐसा कुछ हुआ ही नहीं था दोनों एकदम साफ बच गए थे)

