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अपनी बहन की मादकबदन   और उसकी मतवाली चाल देखकर राजू की आंखों में वासना की चमक यह सब लाला को अंदर ही अंदर बहुत खुश कर रही थी क्योंकि लाला जैसा चाह रहा था वैसा ही शुरुआत हो चुका था,,,, लाला को किसी भी हालत में अपनी पुश्तैनी जमीन जायदाद और इज्जत बचाने की इसके लिए वह अपनी बहन की इज्जत दांव पर लगाने के लिए तैयार हो गया वैसे तो विक्रम सिंह लाला की बहन की इज्जत से खेलना चाहता था लेकिन लाला चाहता था कि सोनी राजू से अपनी इज्जत का सौदा करें क्योंकि विक्रम सिंह और राजू में जमीन आसमान का फर्क था,,,, राजू कर सोने की इज्जत से खेलता तो उसकी जमीन जा जात बचाने के लिए और विक्रम सिंह जमीन जा जात ले लेने के बाद उसकी इज्जत से खेलता,,,,,,

सोनी जानबूझकर अपने भाई के सामने राजू को दिखाते हुए अपनी गोल-गोल बड़ी-बड़ी गांड को मटका कर चल रही थी और सीढ़ियां चढ़ते हुए तो उसकी मादक नितंबों की चाल बेहद जानलेवा नजर आ रही थी,,,, और राजू आंखें फाड़े सोने की मतवाली चाल को देखकर अंदर ही अंदर उत्तेजित हो रहा था ऐसा नहीं था कि राजू पहली बार सोने की मदमस्त जवानी के जलवे को देख रहा था वह तो महीनों से लाला की बहन सोनी की जवानी से खेल रहा था लेकिन आज बात कुछ और थी,,,,, देखते ही देखते सोनी राजू की आंखों से ओझल हो गई तो वह लाला से मुखातिब होते हुए बोला,,,।

गोदाम का काम बहुत अच्छा चल रहा है लाला जी आप समय निकालकर हिसाब किताब देख लीजिएगा,,,,

अरे राजू तुझ पर मुझे पूरा भरोसा है अब कहां तो हिसाब किताब की बात कर रहा है मैं तो सोच रहा हूं कि व्यापार में तुझे अपना साथी बना लूं क्योंकि तू तो जानता ही है मेरी कोई औलाद नहीं है मेरे बाद इस जमीन ज्यादा स्कोर देखने वाला और कोई नहीं है एक तू ही है जो भरोसे के लायक है और अच्छे से व्यापार को चला भी रहा है और उसकी रखवाली भी कर रहा है,,,,

आप क्या कहना चाहते हो लाला जी मैं कुछ समझा नहीं,,,,,,

समझ जाओगे राजु बेटा,,,,, लो सोनी भी आ गई पहले चाय नाश्ता कर लो फिर मैं तुम्हें बताता हूं,,,,,,

(उसका इतना कहना था कि सोनी चाय नाश्ता लेकर हाजिर हो गई और जैसे ही टेबल पर चाय की प्लेट रखने को हुई,,,, वैसे ही उसकी साड़ी का पल्लू उसके कंधे से सीधे नीचे गिर गया और उसकी मदमस्त कर देने वाली खरबूजे जैसी गोल गोल चुचियां एकदम से ब्लाउज फाड़ कर बाहर आने को आतुर नजर आने लगी यह नजारा देखकर राजू का लंड एकदम से तन गया,,,, ना जाने कितनी बार सोनी की चूची को अपने मुंह में लेकर पीने का आनंद ले चुका राजू इस समय सोनी की मदमस्त जलवे को देखकर पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था,,,, साड़ी का पल्लू कंधे से गिरा तो गिरा लेकिन ब्लाउज का उत्तर का एक बटन पूरी तरह से खुला हुआ था जिसकी वजह से उसकी गोल-गोल बड़ी बड़ी चूची ब्लाउज फाड़ कर बाहर निकलने के लिए फड़फड़ा रही थी जिसे आंखें फाड़े राजू देखता ही रह गया जो कि इस हरकत को सोनी जानबूझकर की थी वह जानबूझकर अपने कंधे से साड़ी को गिराई थी ताकि राजू की नजर उसकी भारी-भरकम छातियों पर टिकी रह जाए,,,, सोनी अपने भाई के सामने जानबूझकर इस तरह की हरकत को कर रही थी ताकि उसके भाई को ऐसा ही लगेगी पहली बार सब कुछ हो रहा है क्योंकि उसका भाई इस बात को बिल्कुल नहीं जानता था कि उसकी पीठ पीछे उसकी बहन राजू के साथ ना जाने कितनी बार चुदाई का आनंद लूट चुकी है,,, और तो और हवेली में अपने कमरे में ही राजू को बुलाकर जमकर चुदाई का आनंद ले चुकी थी,,,,

राजू एकटक सोनी की मदमस्त गोरी गोरी चूचियों को देखता ही रह गया उसे लाला की मौजूदगी का बिल्कुल भी आभास नहीं हुआ था वह निश्चिंत होकर सोने की मदमस्त कर देने वाली चूची का रसपान अपनी नजरों से कर रहा था लाला राजू की हालत देखकर बहुत खुश हो रहा था हालांकि अपनी बहन की इस तरह की अदाकारी को देखकर वह खुद उत्तेजित हुआ जा रहा था,,,,, कुछ छण तक का यह नजारा राजू को पूरी तरह से उत्तेजित कर गया था,,,, चाय की प्लेट और नाश्ते को टेबल पर रख कर वह तुरंत अपनी साड़ी के पल्लू को उठाकर वापस कंधे पर रखकर अपनी गोल-गोल छातियों को पर्दे में कर दी तब जाकर राजू की तंद्रा भंग हुई,,,,,, और वह लगभग लगभग हक लाते हुए बोला,,,।

अरे अरे इसकी क्या जरूरत थी,,,,, मैं कोई मेहमान थोड़ी हूं,,,,

अरे राजू मेहमान तुम बिल्कुल भी नहीं हो क्योंकि अब तो तुम इस हवेली के सदस्य बनने वाले हो,,,,(सोने की बात सुनकर लाला मुस्कुरा रहा था लेकिन राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह आश्चर्य से राजू की तरफ तो कभी लाला की तरफ देख रहा था यह देखकर लाला बोला)

तुम निश्चिंत होकर पहले चाय नाश्ता तो कर लो फिर मैं तुम्हें बताता हूं,,,

क्या बताता हूं लालाजी मुझे तो कुछ समझ में ही नहीं आ रहा है छोटी मालकिन क्या कह रही है,,,

अरे तुम चाय शुरु तो करो,,,,

पहले आप लीजिए लालाजी,,,(इतना कहने के साथ ही चाय का प्याला  लेकर राजू लाला की तरफ आगे बढ़ाकर उसे पकड़ाने लगा जिसे लाला एकदम संभाल कर राजू के हाथ से अपने हाथ में दे दिया सोनी वहीं पर कुर्सी को अपनी तरफ खींच कर बैठ गई थी,,,, और लाला गर्म चाय की चुस्की लेने लगा,,,,, राजू को चाय पीने की आदत बिल्कुल भी नहीं थी क्योंकि वह चाय पीता ही नहीं था लेकिन आज औपचारिक रूप से वह चाय को अपने हाथ में लेकर गरम चाय को फूंक-फूंक कर उसे ठंडा कर रहा था यह देखकर सोनी मुस्कुराने लगी और राजू सोनी की तरफ देख कर बोला,,,)

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छोटी मालकिन आप क्यों मुस्कुरा रही हैं,,,?

देख रही हूं कि तुम चाय पीना बिल्कुल भी नहीं जानते,,,

हां छोटी मालकिन है बिल्कुल सच है सच कहूं तो मैं चाय पीता ही नहीं हूं मैं तो सुबह सुबह खाना खाकर घर से निकल जाता हूं चाय हमारे घर में बनती भी नहीं है,,,,

तुम्हारी आदत अच्छी है राजू वैसे भी चाय सेहत के लिए बिल्कुल भी ठीक नहीं है लेकिन अब क्या करें आदत पड़ चुकी है इसलिए मजबूरी है,,,, लेकिन तुम पियो पहली बार में आदत नहीं बन जाएगी,,,

जी लाला जी,,,(और इतना कहकर राजू चाय के प्याले को अपने होठों से लगाकर बड़े संभाल कर उसकी चुस्की लेने लगा जो कि अभी भी थोड़ी गर्म थी,,,, सोनी बड़े गौर से है राजू की तरफ देख रही थी और लाला सोनी की तरफ देख रहा था लाला मन ही मन में सोच रहा था कि सोनी उसकी बात मान कर उस पर एहसान कर रही है लेकिन लाला यह बात कहां जानता था कि सोनी मन ही मन में राजू से प्रेम करती थी उसके साथ शारीरिक संबंध बनाकर अपनी इच्छाओं की पूर्ति करती थी इसलिए राजू को बड़े गौर से देख रही थी कि यह लड़का उसके भाई के सामने कैसे छोटी मां की छोटी मालकिन कह कर बुलाता है,,,, अगर अकेले मिल जाऊं तो पागलों की तरह नोचने खरोच ने लगता है बुर में मोटा लंड डालकर बुर फाडने की कोशिश करता है और अभी देखो भैया के सामने कितना सीधा बंद कर देता हूं मतलब ऐसा की औरतों के बारे में कुछ जानता ही नहीं है,,,, सोनी राजू को देख रही थी और राजू चाय की चुस्की लेते हुए सोनी को देख रहा था दोनों की नजरें आपस में टकरा रही थी और दोनों एक दूसरे की नजरों में डूब जाना चाहते थे ना जाने क्यों लाला के सामने सोनी को उत्तेजित अवस्था में निहारने में राजू को बेहद आनंद की प्राप्ति हो रही थी उसे बहुत मजा आ रहा था,,,,,

लाला की बहन सोनी कुछ इस तरह से

देखते ही देखते पहले लाला ने और फिर राजू ने चाय को खत्म करके प्याला को टेबल पर रख दिया और लाला कुछ देर सोचने के बाद बोला,,,।

राजू तुम तो अच्छी तरह से जानते हो कि हमारा व्यापार कितना है कहां तक है और कितना फैला हुआ है इसका हिसाब किताब तुम्हारे हाथों में है लेकिन कब तक,,, हमारी तो कोई संतान नहीं है,,,(लाला बोले जा रहा था और राजू बड़े गौर से सुनता चला जा रहा था),,, हमारे बाद इस हवेली को खेत खलियान जमीदारी और व्यापार को कौन देखेगा बस इसी की चिंता खाई जाती है,,,,,

लालाजी कोई तो होगा आपका रिश्तेदार जिस पर आपको भरोसा हो,,,

सोनी अपने भाई को मस्त करते हुए

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नहीं ऐसा कोई भी नहीं है लेकिन मुझे अब लगता है कि मेरी समस्या का हल मुझे मिल गया है,,,

कैसे,,,?(राजू आश्चर्य से लाला की तरफ देखते हुए बोला)

राजू तुम पर विश्वास करके मैंने कोई गलती नहीं किया हूं तुमने जिस तरह से व्यापार को आगे बढ़ाने में और से संभाल लेना मेरी मदद किए हो मैं कभी सोच भी नहीं सकता था कि तुम इतनी जल्दी मेरे व्यापार को संभाल लोगे,,,,,,

लाला चाहिए तो आपका बड़प्पन है कि आपने भरोसा करके मुझे अपना कारोबार की देखभाल करने के लिए चुना है,,,,,

सोनी की रसीली बुर को लाला चाटते हुए

यह तो ठीक है राजू लेकिन अब समय आ गया है कि मैं तुम्हें इससे भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपु,,,,

कैसी जिम्मेदारी,,,,

इस हवेली की कारोबार के जमीदारी ,,,, जैसे एक बेटा अपने बाप के कारोबार को संभालता है ठीक उसी तरह से वह भी मजदूरी की तौर पर नहीं मालिक के तौर पर,,,,

(लाला की बात सुनकर राजू आश्चर्य से कभी लाला की तरफ तो कभी सोने की तरफ देख रहा था सोनी मंद मंद मुस्कुरा रही थी राजू को कुछ समझ में नहीं आ रहा था वह बड़े आश्चर्य से दोनों की तरफ देख रहा था तो लाला अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला,,,)

अपनी बहन को मस्त करता हुआ लाला

राजू तुम तो जानते ही हो कि मेरी कोई संतान नहीं है और मेरे बात इस हवेली को कारोबार को देखने वाला कोई नहीं है मैं जानता हूं कि मेरे बात सब कुछ बर्बाद हो जाएगा हवेली से लेकर कारोबार तक किसी दूसरे के हाथों में चला जाएगा हमारे बाप दादा की बनाई हुई सल्तनत सब मिट्टी में मिल जाएगी इसलिए मैं चाहता हूं कि एक बेटे की तरह तुम मेरा कारोबार में साथ दो बदले में मजदूरी नहीं बल्कि,,, मालिक बनकर मतलब मेरा बेटा बनकर सब कुछ तुम्हारा,,,,, गोदाम का कारोबार तुम्हारा आम का बगीचा खेत खलियान सबकी देखरेख तुम्हारी जिम्मेदारी,,,,

क्या कह रहे हैं लाला जी इतनी बड़ी जिम्मेदारी,,,,

जिम्मेदारी नहीं बल्कि मालीकी,,,, राजू तुम मेरे बेटे की तरह हो और तुम से ज्यादा भरोसा में किसी पर नहीं कर सकता इसलिए तुम पर यह जिम्मेदारी सौंप रहा हूं,,,,

यह तो मेरे लिए बड़ी खुशी की बात है लाला जी मैं तो यह सुनकर पागल हुआ जा रहा हूं मजदूर बनकर और मालिक बनने में जमीन आसमान का फर्क है,,,,

तभी तो मैं कह रहा हूं राजू तुम्हें सब कुछ एक मालिक की तरह संभालना होगा क्या तुम तैयार हो,,,,,(लाला राजू की तरफ देखते हुए बोलकर सोने की तरफ तिरछी नजर करके देख ले रहा था सोनी भी बहुत खुश हो रही थी राजू के चेहरे पर आई खुशी को देखकर लाला को अपना काम बनता हुआ मालूम पड़ रहा था)

बिल्कुल मैं तैयार हूं लालाजी,,,,,

लाला अपनी बहन की जमकर चुदाई करता हुआ

तुमने बहुत सही फैसला लिए हो बेटा,,,(इतना कहने के साथ ही लाना राजू की हथेली को अपनी हथेली में लेकर गर्मजोशी से दबाते हुए अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बोला) तुमने मेरे सर से बहुत बड़ी जिम्मेदारी को अपने सर पर ले लिया है इसके लिए तुम्हें ढेर सारी बधाई,,,,,

जी लाला जी यह तो मेरा सौभाग्य है,,,,,(सोनी की तरफ देखते हुए राजू बोला और लाला राजू की निगाहों को बड़े गौर से देख रहा था राजू बार-बार सोने की तरफ देख ले रहा था इस बात से लाला भी बहुत खुश था तो वह जानता था कि राजू खुशी-खुशी पूरी जिम्मेदारी अपने सर पर ले लिया है लेकिन हो सकता है विक्रम सिंह वाला खतरा अपने सर पर वरना भी ले और उस खतरे को अपने सर पर लेने के लिए सोनी को अपनी खूबसूरती का मायाजाल राजू पर बिछाना ही होगा राजू को अपने बस में लेना ही होगा तभी वह इस जिम्मेदारी को अपना समझ कर निभाएगा,,,,)

राजू मेरे लिए आज बहुत खुशी की बात है क्यों सोनी,,,

लाला और सोनी दोनों राजु की आंखों के सामने मजा लेते हुए

हां भैया आप ठीक है कह रहे हो यह तो हमारे लिए भी बहुत खुशी की बात है,,,,,

तो राजू आज से, तुम इस हवेली में रहोगे तुम्हारे रहने का बंदोबस्त में हवेली के कमरे में कर देता हूं,,,,

(लाला की बात सुनते ही और रात को यहां रुकने की बात से पलभर में ही राजू की आंखों के सामने उसकी खूबसूरत मां और उसकी बुआ का नंगा बदन उसकी आंखों के सामने नाचने लगा वह अपनी मां और अपनी बुआ को छोड़कर रात यहां नहीं बता सकता था क्योंकि रोज रात को वह अपने घर पर स्वर्ग का मजा लूटता था इसलिए कुछ देर खामोश रहने के बाद वह बोला)

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नहीं लाला जी ऐसा नहीं हो सकता मुझे घर पर भी रहना बहुत जरूरी है कब मेरी जरूरत पड़ जाए पता नहीं लेकिन मैं कभी कबार यहां पर रुक जाऊंगा,,,

कभी कबार क्यों आज ही रुक जाओ आज की रात तुम यहां रुक जाओ कल से भले अपने घर पर रुक जाना,,,,,

जैसी आपकी मर्जी लालाजी आज की रात में यही रुक जाता हूं,,,,,

(लाला जानबूझकर आज की रात राजू को हवेली में रुकने का न्योता दे रहा था क्योंकि वह जानता था कि सोनी अपनी जवानी से भरे हुए जिस्म का जलवा दिखाकर राजू को संभोग के लिए ललाईत कर देगी,,,, और यही लालच एक औरत को भोगने का सुख राजू को विक्रम सिंह से बचाने में मदद करेगा,,,,,,,, राजू सोनी की तरफ देख कर मुस्कुरा रहा था अब वह भी इस हवेली का मालिक बन चुका था,,,, राजू को ऐसा ही लग रहा था कि उसकी वफादारी उसके काम को देखकर लाला उसे इतनी बड़ी जिम्मेदारी और हवेली के साथ-साथ कारोबार का भाव उसके कंधों पर डाल दिया है और वह भी एकदम मालिक की तरह और इस बात का उसे अंदाजा तक नहीं था कि लाला अपनी जरूरत की पूर्ति और विक्रम सिंह से रक्षा के लिए राजू को इतनी बड़ी जिम्मेदारी सौंप रहा था हालांकि लाला के मन में राजू से किसी भी प्रकार की दगाबाजी करने का इरादा बिल्कुल भी नहीं था वह वास्तव में राजू को अपने कारोबार का हिस्सेदार बना रहा था क्योंकि इस बात का एहसास उसे भी अच्छी तरह से था कि उसके बाद इस हवेली और कारोबार को संभालने वाला कोई भी नहीं होगा और विक्रम सिंह से बचाने वाला भी कोई नहीं है विक्रम सिंह वैसे भी उसी से सब कुछ वापस ले लेने वाला था और इसी के चलते लाला अपने मन में सोच रहा था कि विक्रम सिंह के हाथों लूटने से अच्छा है कि राजू जैसे ईमानदार लड़के को अपने व्यापार का हिस्सेदार बनाकर इस व्यापार और जमीदारी की रक्षा भी कर सकेगा,,,,,,, थोड़ी देर इसी तरह से बातचीत चलती रही दोपहर का समय था राजू लाला की बात मानकर हवेली में ही दोपहर के समय आराम कर रहा था और सोनी अपने भाई के कमरे में उससे बातें कर रही थी,,,,)

भैया तुमने तो राजू को कारोबार का हिस्सेदार बना कर विक्रम सिंह से रक्षा करने का पूरा इंतजाम कर लिए हो,,,

हां मेरी बहन राजू को इतनी बड़ी जिम्मेदारी देकर मैं ठीक ही किया हूं मैं जानता हूं कि राजू ही एक ऐसा शख्स है जो विक्रम सिंह से लड़ सकता है उससे हमारी जमीन जा जात के कागजात वापस ले सकता है लेकिन बिना लालच के नहीं अब वह हमारे व्यापार को अपना भी व्यापार समझकर काम करेगा और कोई अगर आंख उठाकर देखेगा तो वह उसकी आंखों को नोच सकने में पूरी तरह से समर्थ भी है,,, लेकिन आगे का काम तुम्हें ही करना होगा सारी जिम्मेदारी अब तुम्हारे ऊपर भी है तुम्हें अपनी जवानी का जलवा दिखा कर राजू को अपनी तरफ से रीझाना होगा उसके साथ शारीरिक संबंध बनाना होगा,, एक बार अगर राजू तुम्हारी बुर देख लेगा,,,(साड़ी के ऊपर से ही अपनी बहन की बुर पर हाथ लगाते हुए) तब वो जिंदगी भर तुम्हारा दीवाना हो जाएगा,,,,, और फिर विक्रम सिंह से हमारे जमीन जा जात के साथ-साथ तुम्हारी जवानी की रक्षा भी करेगा,,,,

बात तो तुम ठीक ही कह रहे हो भैया,,,, तुम्हारी बात मान कर अब मैं भी पूरी तरह से बेकरार हो गई हूं राजू को अपनी जवानी दिखाने के लिए मैं भी देखना चाहती हूं कि एक औरत की जवानी उसके नंगे बदन को देख कर एक जवान लड़का जो कि एकदम सीधा साधा है कैसे अपनी राह भटक कर औरत का दीवाना बन जाता है,,,,।

(सोनी जानबूझकर अपने भाई के सामने इस तरह की बातें कर रही थी वह तो पहले से ही राजू की दीवानी हो चुकी थी राजू पहले से ही उसके बदन को भोगता आ रहा था,,, अपनी बहन की बात को सुनकर खुश होता हुआ लाला बोला,,,)

हाय मेरी रानी राजू को बाद में देना लेकिन पहले मुझे दे दो अब मुझसे रहा नहीं जा रहा,,, है,,,(इतना कहने के साथ ही डाला अपनी बहन की कलाई को पकड़कर उसे अपने बिस्तर पर खींच लिया और अगले ही पल सोनी अपने भाई के ऊपर उसके बदन के ऊपर लेट गई थी और लाला अपनी बहन के लाल लाल होठों का रसपान करते हुए साड़ी के ऊपर से ही उसकी गोल-गोल गांड को दोनों हाथों से जोर जोर से दबा रहा था देखते ही देखते लाला अपनी बहन के बदन से उसकी साड़ी को उतारने लगा और पलक झपकते ही वह अपनी बहन के बदन से सारे कपड़े उतार कर पूरी तरह से नंगी कर दिया,,,, लाला अपनी बहन के कसे हुए बदन का पूरी तरह से दीवाना था लाला को अपनी बहन की चूची उसकी गांड उसकी बुर सब कुछ अच्छी लगती थी क्योंकि बुर का कसाव अभी भी बरकरार था चूचियों का कड़ापन उसे हमेशा अपनी तरफ आकर्षित करता था और गांड का उभार एकदम जानलेवा था जो कि लाला को हमेशा परास्त कर देता था,,,,,,,

लाला अगले ही पल अपनी बहन के दोनों टांगों के बीच झुक कर उसकी बुर को अपने होठों से चाट रहा था अपनी जीभ उसकी बुर की गहराई में डाल रहा था और सोनी बिस्तर पर मचल रही थी कुछ देर तक अपनी बहन की बुर की सेवा करने के बाद लाला अपने लंड को अपनी बहन के मुंह में डालकर अंदर-बाहर करते हुए उसके मुंह को ही चोदना शुरु कर दिया,,,,,,, एक तरफ हवेली के कमरे में भाई अपनी बहन की चुदाई कर रहा था और दूसरी तरफ राजू जोकि लाला के कमरे से दो-तीन कमरा छोड़कर आराम कर रहा था सुबह से ही आज हवेली में था,,,, उसे किस तरह से हवेली में कमरे में कैद रहना अच्छा नहीं लग रहा था और इसीलिए वह अपने कमरे से बाहर आकर लैला से इजाजत मांग कर गोदाम पर जाना चाहता था वहां का कारोबार देखना चाहता था अब तो उसे इस बात का एहसास होने लगा था कि वह मालिक हो गया है इसीलिए वह गोदाम के काम में बिल्कुल भी कोताही नहीं बरतना चाहता था अपने कमरे से बाहर आ गया और लाला के कमरे की तरफ जाने लगा लेकिन लाला के कमरे के करीब पहुंचते ही उसे लाला के कमरे से गरमा गरम सिसकारी की आवाज आने लगी और उस गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर राजू का लंड खड़ा होने लगा क्योंकि वह जानता था कि लाला के कमरे में क्या हो रहा है और किसके साथ हो रहा है,,,,, राजू पहले भी लाना और सोनी को दोनों भाई बहन को रंगे हाथ पकड़ चुका था इसलिए राजू के मन में भी किसी भी प्रकार की झिझक नहीं थी और वह तुरंत दरवाजे पर खड़ा हो गया और अपने हाथ को छाती से बांधकर बड़े आराम से उस नजारे को देखने लगा जो कि बिस्तर पर लाला पीठ के बल लेटा हुआ था और सोनी एकदम नंगी होकर अपने भाई के लंड पर कूद रही थी,,,, लाला की नजर जैसे ही राजू पर पड़ी लाला बिल्कुल भी घबराया नहीं वह एकदम सहज होकर बोला,,,,।

ओहहह राजू तुम जल्दी उठ गए,,,

हां मुझे नींद नहीं आ रही थी,,,,।

(सोनी भी पीछे पलटकर राजू की तरफ देखने लगी और मुस्कुराने लगी राजू सोने की गोल गोल गांड को ही देख रहा था जो कि अपने भाई के लंड पर कूद रही थी,,, पहली बार जब राजू ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ा था तो दोनों एकदम घबरा चुके थे एकदम हक्के बक्के रह गए थे लेकिन अब राजू का इस हवेली से गहरा नाता हो चुका था इसलिए दोनों में किसी भी प्रकार की शर्म नहीं थी इसलिए तो लाला अपनी बहन की चुची को दोनों हाथों से दबाते हुए राजू से बोला,,,,।)

ओहहहह राजू अब तुमसे क्या छुपाना तुम तो अब ईस हवेली के सदस्य बन चुके हो,,,, और जल्दबाजी में दरवाजा बंद करना भूल गया तुम तो जानते हो राजू सोनी की जवानी देख कर मुझसे भी रहा नहीं जाता,,,,, क्या करूं सोनी इतनी खूबसूरत है कि देखने वालों का लंड खड़ा हो जाता है साली की बुर इतनी कसी हुई है कि ऐसा लगता है कि जैसे एक जवान लड़की को चोद रहा हूं,,,,(लगा जानबूझकर इस तरह की लुभावनी बातें राजू के सामने कर रहा था क्योंकि वह चाहता था कि इस तरह की बातें सुनकर राजू सोनी को चोदने के लिए तड़प उठे,,,,,)

वह तो देख रहा हूं लालाजी तुम्हारा लंड छोटी मालकिन की बुर में एकदम सटासट जा रहा है,,,,(दरवाजे पर कंधे को सटाए खड़े राजू का लंड भी खड़ा होने लगा था जिस पर लाला की नजर पड़ चुकी थी और वह बोला)

राजू तुम्हारा भी पैजामा तन रहा है,,,।

(इतना सुनकर राजू थोड़ा सा  सक पका गया,,, अगर वो चाहता तो इसी समय इस खेल में शामिल होकर लाला की आंखों के सामने ही सोनी की बुर में लंड डालकर चुदाई कर दिया होता लेकिन वह इस समय ऐसा नहीं करना चाहता था,,, इसलिए वह बोला)

लाला और उसकी बहन सोनी

पता नहीं लाला जी ऐसा क्यों हो रहा है तुम अपना काम करो मैं थोड़ा बाहर घूम कर आता हूं,,,,।

ठीक है राजू जाते समय दरवाजा बंद कर देना,,,,।

(और इतना सुनते ही राजू कमरे का दरवाजा बंद करके पजामे के ऊपर से अपने लंड को दबाता हुआ हवेली से बाहर निकलकर राजू की उत्तेजना देखकर लाला बहुत खुश हो रहा था और सोनी को बिस्तर पर पीठ के बल लेटाते हुए उसकी दोनों टांगों के बीच आ गया और उसकी बुर में अपना लंड डालकर कमर हिलाते हुए बोला,,,)

देखी सोनी तुम्हें नंगी देखकर राजू का भी लंड खड़ा होने लगा था मुझे पूरा यकीन है कि अपना काम बन जाएगा,,, आज राजू हवेली में रुकेगा और आज की रात तुम से पूरी तरह से मस्त कर देना फिर देखना वह रोज रात को हवेली में रुकेगा अगर नहीं रुकेगा तो भी हवेली के चक्कर रोज लगाएगा तुम्हारी खातिर,,,

तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो भैया मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश करुंगी,,,,।

जैसे तैसे शाम होने लगी और राजू सोनी के नंगे बदन को देखकर बुरी तरह से उत्तेजित हो चुका था इसलिए इधर-उधर घूमने के बाद वह शाम को अंधेरा होने के बाद हवेली पर आया वह जानता था कि आज की रात उसे हवेली पर रुकना है और आज की रात हुआ सोनी से पूरी तरह से मस्ती करना चाहता था,,,,, और लाला भी उन दोनों को पूरा मौका मिले इसलिए जानबूझकर राजू से बोला,,,,।

राजू मैं एक जमीदार के घर शादी है वहां जा रहा हूं अच्छा हुआ कि तुम आज रात को ही रुक रहे हो,,, क्योंकि सोनी भी अकेली रहती है,,,,।

(लाला की शादी में जाने की बात सुनकर राजू मन ही मन खुश होने लगा और खुश होता हुआ बोला)

ठीक है आप निश्चिंत होकर चाहिए मैं हूं ना किसी भी प्रकार की चिंता करने की जरूरत नहीं है,,,

ठीक है राजू सोनी को मैं तुम्हारे भरोसे छोड़कर जा रहा हूं,,,,,

(और इतना कहने के साथ ही लाला सोनी की तरफ नजर डालकर मुस्कुराता हुआ हवेली से बाहर निकल गया)

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