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राजू ने आज वो कर दिखाया था जिसके बारे में कभी किसी ने कल्पना भी नहीं किया था और ना ही कभी राजू ने सोचा था कि वह इतनी बहादुरी दिखा पाएगा और वह भी डाकुओं की टोली के सामने,,,,,, आखिरकार वह कहावत यहां पर सही बैठ रही थी मरता क्या न करता अगर राजू इस तरह के कदम ना उठाया होता तो आज निश्चित था कि उसके घर के सोना चांदी रुपया पैसा तो नहीं लुटता लेकिन घर की इज्जत जरूर लूटी जाती और वह भी डाकुओं के हाथ से,,,,, जवानी से भरी हुई उसकी मां जो की पूरी तरह से गदराई हुस्न की मालकिन थी उस पर नजर पड़ते ही डाकुओं की नियत डोर जाती और वह उसे लिए बिना वहां से बिल्कुल भी नहीं हीलते,,, और गुलाबी जिसकी जवानी अभी गुलाब की तरह खेलना शुरू हुई थी उससे तो वह बिल्कुल भी किसी भी हालत में छोड़ने को तैयार नहीं होते और घर की दोनों हुस्न की रानी को डाकू अपने साथ उठाकर ले जाते राजू इस बारे में सोच कर ही एकदम घबरा गया था कि अगर ऐसा हुआ तो क्या होगा उसकी मां और उसकी बुआ के साथ डाकू लोग कैसा सलूक करेंगे मन में ही वह कल्पना कर चुका था और कल्पना ही इतना भयानक था कि हकीकत के बारे में सोच कर ही उसकी रूह कांपने लगती थी,,,,,।

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कल्पना में वह देख चुका था कि अगर उसकी मां को और उसकी बुआ को डाकुओं की टोली उठाकर ले गई तो अपने अड्डे पर ले जाकर के डाकू रोज उन दोनों की जवानी से खेलेंगे उन दोनों की भरपूर चुदाई करेंगे और ऐसा राजू बिल्कुल भी नहीं चाहता था इसीलिए तो हाथ में बंदूक उठा लिया था उसे आज तक चला गया नहीं था लेकिन फिर भी बहादुरी दिखाते हुए दो गोली से दो डाकू को ढेर कर चुका था और वह भी उसमें से एक उनका सरदार था जिस को गोली लगते ही वह लोग वहां से भाग खड़े हुए और वह डाकू जो कि उसके घर का ही दरवाजा तोड़कर घर पर प्रवेश कर चुका था गोली की आवाज और यह आभास होते हैं क्योंकि सरदार को गोली लग गई है वह तुरंत बाहर निकल आया था और अपने दोनों साथी को लेकर क्यों वहां से चंपत हो गए थे,,,,

रात में डाकुओं पर गोली किसने चलाया इस बारे में गांव का कोई भी शख्स नहीं जानता था यहां तक कि वह बूढ़ा आदमी जिसकी लड़की को वह डाकू उठा ले जाने की तैयारी में थे वह दोनों वहीं पर खड़े थे लेकिन उन दोनों को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ था कि डाकुओं पर गोली किसने चलाया था,,,, रात के सन्नाटे में गोली की आवाज पूरे गांव में गूंज रही थी और गोली की आवाज सुनकर गांव के सभी लोग एकदम सन्न मार गए थे,,,,, सभी को ऐसा ही लग रहा था की गोली डाकू लोग नहीं चलाया है लेकिन जब उन्हें इस बात का पता चला कि उनके दो साथी मारे गए हैं तब उन्हें आश्चर्य हुआ कि आखिरकार गोली किसने चलाया लेकिन फिर पूरे गांव वालों का यही मानना था कि बंदूक सिर्फ लाला के पास है और ऐसा करनामा सिर्फ लाला ही कर सकते हैं,,,, इसलिए गांव वालों के दिल में लाला के लिए इज्जत और ज्यादा बढ़ गई थी,,,,, सुबह सवेरे गांव के बड़े बुजुर्ग लाला की हवेली पर पहुंच गए थे और लाला को इस बात की खबर दिए थे कि डाकू की टोली में से 2 लोगों की जान जा चुकी है और यह कारनामा खुद लाला ने हीं कर दिखाया है,,,,, गांव वालों की बात सुनकर लाला फूला नहीं समा रहा था क्योंकि जहां पर एक तरफ डाकू से लड़ने की उसकी वीरता की कहानी लोग एक दूसरे को सुना कर प्रसन्न हो रहे थे वहीं दूसरी तरफ लाला अच्छी तरह से जानता था कि अगर यह कारनामा गांव में कोई कर सकता है तो वह सिर्फ राजू है क्योंकि बंदूक राजू के ही पास थी जिसे उसने ही किया था और इसी बात से लाला बहुत खुश नजर आ रहा था,,,, जल्द ही लाला ने अपना आदमी भेज कर  राजू को हवेली पर आने के लिए आमंत्रण दे दिया था,,,।

वहीं दूसरी तरफ हरिया को छोड़कर मधु और गुलाबी भी इस बात को बिल्कुल भी नहीं जानते थे कि डाकुओं को मारने वाला राजू ही है,,,, डाकुओं के जाने के बाद जैसे ही राजू अपनी मां को दरवाजा खोलकर बाहर आने के लिए बोला था वह लोग अंदर ही अंदर एकदम खुश हो गए थे लेकिन जैसे ही बाहर आने पर हरियाने मधु और गुलाबी को यह बात बताया कि डाकू को मारने वाला और कोई नहीं उनका बेटा राजू ही है तो इस बात को सुनकर मधु और गुलाबी दोनों खुशी से झूम उठे मधु की छाती गर्व से फूले नहीं समा रही थी लेकिन तभी इस बात की चिंता मधु के दिमाग में बैठ गई कि अब क्या होगा क्योंकि उसके बेटे ने डाकू को मार गिराया था अब डाकू बदला जरूर लेंगे अपनी मां को चिंतित देखकर उसे शांत करते हुए राजू बोला,,,,।

तुम फिक्र क्यों करती हो मां पिताजी को छोड़कर गांव में किसी को भी इस बात की भनक तक नहीं है की गोली किसने चलाया यहां तक कि डाकू को भी पता नहीं है कि गोली किसने चलाया है वह लोग तो उनके दो साथी को गोली लगते ही वहां से उन दोनों को लेकर रफूचक्कर हो गए और वैसे भी डाकुओं को इतना तो पता ही है कि गांव के लोग जहां खाने के लिए तरसते हैं वहां उन लोगों के पास बंदूक कंहा से आएगी,,,,

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तू सच कह रहा है ना बेटा डाकू लोग बहुत खतरनाक होते हैं वह अपना बदला जरूर लेते हैं,,,,,, मुझे तो बहुत डर लगा है बेटा,,,

इसमें घबराने वाली कौन सी बात है मां मेरे पास बंदूक है तुम दोनों को दिस बात का पता नहीं था पिताजी भी अब जाकर अपने आंखों से देखें कि मेरे पास बंदूक है जो कि लाला ने मुझे दिया है,,,,, गांव वालों को तो इस बात की भनक तक नहीं है कि मेरे पास बंदूक है,,,,, तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो,,,, और वैसे भी मां अगर आज में अपने हाथ में बंदूक ना उठाता तो आज तुम दोनों की घर पर नहीं होती बल्कि डाकुओं की अड्डे पर होती,,,,

यह क्या कह रहा है राजू,,,,

राजू बिल्कुल ठीक कह रहा है डाकू घर का मुख्य दरवाजा तोड़ चुके हैं और अंदर आने ही वाले थे कि सही समय पर राजू में बंदूक से गोली दाग दिया ओर दो डाकू मारे गए और वो डाकू तुरंत भाग खड़ा हुआ,,,, वरना आज गजब हो जाता राजू ने सही समय पर बहादुरी दिखाते हुए मेरे घर की इज्जत बचाया है,,,,,

राजू,,,, मेरे बेटे,,,(और इतना कहने के साथ ही मधु खुश होते हुए आगे बढ़ कर राजू को अपने सीने से लगा ली,,, राजू भी खुशी के मारे अपनी मां से लिपट गया मैं तुमसे ही उसकी भारी-भरकम छाती का कसाव राजू अपनी छाती पर महसूस किया वह पूरी तरह से उत्तेजना से भर गया पल भर में इसके तन बदन में मदहोशी की चिंगारी फूटने लगी,,, वह अपने पिताजी के सामने ही अपनी मां को कसके अपनी बाहों में जकड़ लिया था,,,,, जिस तरह का माहौल था उसे देखते हुए हरिया को बिल्कुल भी शक नहीं हुआ कि इस तरह से पकड़ने में राजू का अपना अलग ही मतलब है,,,,,,)

सुनते हो आज आप अकेले ही सो जाइए मैं आज राजू और गुलाबी के साथ सोऊंगी,,,,

क्यों अभी मेरे साथ सोने में कोई दिक्कत है क्या,,,?

नहीं आज मेरा मन बिल्कुल भी नहीं कर रहा है कि मुझे थोड़ी घबराहट हो रही है डाकू के नाम से,,,,

लेकिन डाकू तो चले गए मुझ पर भरोसा नहीं है क्या,,,?

नहीं बिल्कुल भी नहीं मुझे तो अपने बेटे पर पूरा भरोसा है देखे नहीं किस तरह से दोनों डाकुओं को मार गिराया,,,

अरे मां चिल्लाने की जरूरत नहीं है यह राज

हम लोगों के बीच में ही रहना चाहिए किसी को कानों कान खबर नहीं होनी चाहिए वरना मेरे लिए मुसीबत हो सकती है,,,

तू ठीक कह रहा है बेटा,,,,, अब इस बारे में हम में से कोई भी जिक्र भी नहीं करेगा,,,,,।

(राजू के साथ सोने के नाम से ही गुलाबी के तन बदन में भी आग लगने लगी थी क्योंकि वह अच्छी तरह से जानती थी कि उसकी भाभी का अपनी बेटी के साथ सोने का मतलब था कि आज फिर से तीनों का काम बनने वाला है,,,,,, और राजू का लंड तो अपनी मां की बात सुनते ही पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था और अपनी मां की बुर में जाने के लिए तड़प रहा था लेकिन हरिया का मन ना होते हुए भी उसे अपनी बीवी की बात माननी पड़ी लेकिन एक बार कमरे में जाने से पहले वह बोला,,,)

चलो कोई बात नहीं है लेकिन एक बार देख तो ले कि दरवाजे की हालत क्या हुई है,,,

हां हमें दरवाजे की हालत को देख लेना चाहिए,,,(राजू की अपने पिताजी की बात में सुर मिलाता हुआ बोला,,,,, और फिर चारों अंदर का दरवाजा खोलकर मुख्य द्वार पर आजा जहां पर दरवाजा पूरी तरह से टुट चुका था,,, टूटे हुए दरवाजे को देखकर राजू बोला,,,,।)

देख रही हो मां दरवाजे की हालत,,,, तुम दोनों की इज्जत ज्यादा देर तक बची नहीं रह सकती थी,,,,

सच कह रहा है राजू तू,,, आज तो गुलाबी और तेरी मां की इज्जत लूटने ही वाली थी,,,,,

लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है मेरे बेटे के होते हुए कोई हम दोनों की तरफ आंख उठाकर तो देखें,,,,,,,

अरे ,,,, भाग्यवान मुझे भी पता है,,,, राजू के होते हुए हम लोगों का कोई कुछ भी बिगाड़ नहीं सकता लेकिन तुम चिल्ला चिल्ला कर पूरे गांव में ढिंढोरा मत भेज दो ताकि हम लोगों के लिए ही मुसीबत बन जाए,,,,,

अरे यार मैं सब समझती हूं अब आप जाओ मैं भी जा रही हूं,,,,, देख नहीं रहे हो कोई गांव वाला बाहर दिखाई नहीं दे रहा है सब सदमे में है हमें भी यूं घर के बाहर खड़े नहीं रहना चाहिए,,,,

चलो मां घर में आप भी पिताजी जाकर सो जाइए,,,,।

(राजू की बातों से लग रहा था कि राजू बहुत जल्दबाजी में था अपनी मां को अपने कमरे में ले जाने के लिए क्योंकि डाकू के आने से पहले वह अपनी बुआ के खूबसूरत बदन से पूरी तरह से मस्ती कर लेने के बाद उसकी बुर में लंड डालने वाला था कि डाकू आ गए थे उसके सारे किए कराए पर पानी फिर चुका था उसका सारा मजा किरकिरा हो चुका था लेकिन अब ऐसा लग रहा था कि सब कुछ सुधर गया है अब अपनी बुआ की कसर अपनी मां से उतारना चाहता था,,,, इसलिए उसने जैसे देखा कि उसके पिताजी अपने कमरे में जाकर दरवाजा बंद कर लिए हैं तो राजू भी तुरंत अपने कमरे में प्रवेश करके दरवाजा बंद करके कड़ी लगा दिया था लालटेन की पीली रोशनी को थोड़ा और तेज कर दिया था ताकि सब कुछ साफ-साफ नजर आए,,, कमरे में प्रवेश करते ही गुलाबी अपनी भाभी से बोली,,,)

क्या सच में भाभी डाकू हम दोनों को उठा ले जाता,,,,

अरे तो क्या हुआ आखिर डाकू को चाहिए क्या खजाना और वह चाहे जैसे भी रूप में हो रुपया पैसा देना हो या खूबसूरत औरत उन्हें तो सिर्फ खजाना से मतलब है और तुम दोनों की टांगों के बीच जो खूबसूरत खजाना है उसे पाकर तो डाकू लोग एक दम मस्त हो जाएंगे,,,,, मैं तो यही सोच कर डर रहा था कि अगर डाकू लोग तुम दोनों को उठा ले गए तो तुम दोनों का क्या होगा बारी-बारी से सारे डाकू तुम दोनों पर चढ़ेंगे,,,,, तुम दोनों की बुर का भोसड़ा बना देने के बाद ही छोड़ते,,,,(अपनी कुर्ते को उतारते हुए राजू एकदम बेशर्म होता हुआ बोला)

चल हट मेरी बुर में डालने से पहले में कुल्हाड़ी लेकर सभी डाकुओं के लंड को काट,, देती,,,,,

लंड काट देती तो वह बेशर्म डाकू तुम्हारी बुर में केला डालकर मजा लेते,,

उन लोगों के गंदे लंड से तो अच्छा केला ही है,,,।

हाय मेरी रानी मतलब कुछ ना कुछ बुर में जाना चाहिए,,,,(अपने पजामे को उतार कर अपनी मां और बुआ के सामने पूरी तरह से नंगा होते हुए और अपने हाथ में लंड पकड़ कर हिलाते हुए राजू बोला,,,)

तो क्या,,,,(मधु मुस्कुराते हुए राजू के मोटे तगड़े  लंड की तरफ देखते हुए बोली,,,)

चलो तब की तब देखेंगे अभी तो मेरे लंड को मुंह मे लेकर मुझे मस्त कर दो,,,,,।

(राजू का इतना कहना था कि मधु मुस्कुराते हुए अपने बेटे के लंड को अपने हाथ से पकड़ कर,, बेझिझक उसे अपने मुंह में ले ली और चूसना शुरू कर दी गुलाबी से इतना गरमा-गरम दृश्य अपनी आंखों से देखा नहीं जा रहा था और वहां तुरंत अपने ही हाथों से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो गई और घुटनों के बल बैठकर अपनी भाभी के हाथ से राजू के लंड को पकड़कर उसे अपने मुंह में भर ले और चूसना शुरू कर दी भाभी और ननद बारी-बारी से राजू के लंड को अपने अपने मुंह में ले रही थी और अपनी इस प्रक्रिया से राजू को पूरी तरह से मस्त कर रही थी राजू पूरी तरह से पागल हुआ जा रहा था वह अपनी बुआ और अपनी मां दोनों के सर पर हाथ रखकर बारी बारी से अपने लंड को अपनी मां और अपनी बुआ दोनों के मुंह में डालकर अपनी कमर हिला रहा था,,,, दोनों एकदम मस्त हो चुकी थी,,,,।

लालटेन की पीली रोशनी सब कुछ साफ नजर आ रहा था राजू और गुलाबी दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे लेकिन अभी भी मधु के बदन पर कपड़े थे,,, लेकिन उसके साड़ी का पल्लू उसकी भारी-भरकम छातीयो से नीचे गिरा हुआ था जिसकी वजह से,,, उसके दोनों खरबूजा एकदम साफ नजर आ रहे थे जो कि छोटे से ब्लाउज में कैद थे और वह भी उसका ऊपर का बटन खुला होने की वजह से आधे से ज्यादा खरबूजा बाहर निकलने के लिए तड़प रहा था संजू से यह नजारा देखा नहीं क्या और वह अपने दोनों हाथ आगे बढ़ा कर अपनी मां की चूची को पकड़कर जोर जोर से दबाने लगा देखते ही देखते राजू के बदन में मदहोशी छाने लगी एक तो पहले से ही उसकी बुआ और उसकी मां ने मिलकर उसके लंड की हालत को खराब कर दी थी,,,, अब राजू को केवल अपनी मां की बुर चाहिए थी जिसमें अपना मोटा लंड डालकर अपने बदन की गर्मी को शांत कर सकता था,,,,,।

और इसीलिए वह अपनी मां के ब्लाउज का बटन खोलने लगा देखते-देखते वह अपनी मां के पतन पर से ब्लाउज को उतार दिया और कमर के ऊपर उसे पूरी तरह से नंगी कर दिया अपनी भाभी की बड़ी-बड़ी चूचियां देखकर गुलाबी के मुंह में पानी आ गया और वह खुद अपनी भाभी की चूची को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे मुंह में भर कर पीना शुरू कर दी गुलाबी की इस हरकत से मधु के तन बदन में आग लगने लगे वह पागल होने लगी और अगले ही पल राजू अपनी मां की साड़ी को खोलते हुए उसकी पेटीकोट को भी उतार कर उसे भी नंगी कर दिया कमरे के अंदर मां बेटा और वह तीनों नंगे हो चुके थे डाकू के आने-जाने का आप बिल्कुल भी उन तीनों को होश नहीं था इतना बड़ा हादसा होते-होते रह गया था लेकिन उस हादसे का असर इन तीनों पर बिल्कुल भी नहीं था यह तीनों तो अपनी दुनिया में मस्त होकर जवानी का मजा लूटने लगे थे,,,,, मधु‌ गुलाबी को इस बात की खुशी थी कि राजू के चलते दोनों की इज्जत जाते-जाते बची थी,,,, वह दोनों यही सोच कर खुश थे कि डाकू से चुदवाने से कहीं लाख गुना बेहतर राजू से चुदवाने का,,, था,,, इसीलिए तो दोनों औरतें खुलकर राजू को मजा दे रही थी राजू अपनी मां की दोनों टांगों के बीच उसकी गुलाबी बुर को होठ लगाकर चाट रहा था वह गुलाबी खुद अपनी भाभी के ऊपर घुटनों के बल बैठकर उसके सर को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे अब ऊपर की तरफ उठाकर अपनी बुर से लगा दी थी और मधु भी बेझिझक अपनी ननद की भूल से खेल रही थी दोनों की आग बढ़ती जा रही थी दोनों एकदम चुदवासी हुई जा रही थी,,,,

कुछ देर तक तीनों इसी तरह से एक दूसरे के अंगों से खेलते रहे राजू एक साथ दो दो नंगी औरतों को देखकर अपने आप पर काबू नहीं कर पा रहा था,,, इसीलिए वह अपनी मां की दोनों टांगों को खोलकर अपने मोटे तगडे लंड को उसकी गुलाबी छेद में डालकर,,, चोदना शुरू कर दिया मधु को बहुत मजा आने लगा अपने बेटे के मर्दा ना जोश पर वह पूरी तरह से फिदा हो चुकी थी,,, गुलाबी ठीक उसके सामने अपनी गांड राजू की तरफ करके अपनी बुर को अपनी भाभी के मुंह से चटवा रही थी,,, राजू अपने दोनों हाथों से अपनी बुआ की गांड को पकड़कर उसे जोर जोर से दबा रहा था कुछ देर तक अपनी मां को चोदने के बाद वह तुरंत अपनी मां की बुर में से अपना लंड निकाल कर गुलाबी की कमर को पकड़ कर अपनी तरफ खींच लिया और घोड़ी बनाकर उसे चोदना शुरु कर दिया ऐसा वह बारी-बारी से कर रहा था कभी अपनी बुआ की बुर में डाल रहा था तो कभी अपनी मां की गोद में इस तरह से चोदने में उसे बहुत मजा आ रहा था और ननद और भाभी दोनों पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी,,,,

गुलाबी और मधु दोनों को राजू के ऊपर पूरा विश्वास था कि वह अपने लंड से दोनों की गर्मी शांत कर देगा और ऐसा ही हुआ कुछ देर तक की घमासान चुदाई के बाद मधु और गुलाबी दोनों की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी राजू अच्छी तरह से जानता था कि दोनों का पानी निकलने वाला है और साथ में उसका भी कभी भी निकल जाएगा इसलिए वह अपनी बुआ की बुर में अपने लंड को बड़ी जोर जोर से धक्का देते हुए अंदर-बाहर करने लगा वह देखते ही देखते गरमा गरम सिसकारी लेते हुए पानी छोड़ने लगी,,,, गुलाबी का काम तमाम हो चुका था अब बारी थी मधु की, अब वह पूरा ध्यान अपनी मां की बुर पर देने वाला था,,, इसलिए अपने लंड के गर्म सुपाड़े को अपनी मां की दहकती हुई बुर पर रखकर एक करारा धक्का मारा और पूरा का पूरा लंड मधु की बुर के अंदर घुस गया अब राजू रुकने का नाम लेने वाला नहीं था वह ताबड़तोड़ अपनी मां की बुर में धक्के पर धक्का मारने लगा उसकी मां की चीख निकलने लगी वह पूरी तरह से मस्त होने लगी,,,,, और फिर 15‌,,,,, 20 धक्कों के बाद आराधना के साथ-साथ राजू भी झड़ गया,,,,,।

दूसरे दिन पूरे गांव में और अगल-बगल के 10 गांव में यह खबर फैल गई कि रात को इस गांव में डाकू आए थे लेकिन उनमें से उनके सरदार हो रहे एक आदमी को गोली लग गई जिसकी वजह से डाकू दुम दबाकर भाग गए थे,,, किसी को निश्चित तौर पर यह पता नहीं था कि डाकुओं पर गोली किसने चलाई लेकिन सभी को ऐसा लग रहा था कि डाकुओं को मार गिराने वाला और कोई नहीं बल्कि लाला ही थे,,,, इसलिए तो गांव के बड़े बुजुर्गों लाला को बधाई देने के लिए लाला की हवेली पर पहुंच गए थे लेकिन लाला को तो इस बात की भनक तक नहीं थी लेकिन वह कुछ बोला नहीं और गांव वालों के चले जाने के बाद अपना आदमी भेज करो राजू को हवेली पर आने के लिए बोला क्योंकि लाला यह बात अच्छी तरह से जानता था कि अगर यह कारनामा कोई कर सकता है तो वह राजू और राजू के हाथ में ही उसने बंदूक सौंपी थी,,,,।

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