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राजू के होश उड़े हुए थे,,,, जिंदगी में पहली बार उसके गांव में डाकू आए थे वरना उसने आज तक केवल डाकुओं के किस्से ही सुने थे लेकिन आज पहली बार डाकुओं को अपने गांव में आया हुआ देखकर और वह भी अपने ही घर के ठीक सामने डाकुओं के घोड़ों की टापों की आवाज सुनकर राजू के होश उड़े जा रहे थे उसका दिल जोरों से धड़क रहा था उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उसे क्या करना है,,,, लेकिन समझदारी दिखाते हुए उसने अपनी मां और अपनी बुआ को कमरे के अंदर भेजकर कमरा बंद करवा दिया था और बाहर से भी दरवाजे को बंद कर दिया था,,,,। क्योंकि वह इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि भले ही उसके घर में डाकुओं के लूटने लायक रुपए पैसे गहने ना हो लेकिन उनसे भी कई बेशकीमती खजाना था उसके घर में जवानी से लबालब भरी हुई उसकी मां और मदहोश जवान की मालकिन उसकी बुआ अच्छी तरह से जानता था कि डाकुओं की नजर अगर उसकी मां पर और बुआ पर पड़ गई तो वह लोग बिना कहे उन दोनों को उठा ले जाएंगे,,,,

चारों तरफ अफरा-तफरी मची हुई थी,,,, पूरे गांव में शोर-शराबा हो रहा था डाकुओं के आने से गांव वालों की क्या हालत हुई थी यह तो उन लोगों की चीख और पुकार की आवाज सुनकर ही अंदाजा लगाया जा सकता था,,,,, हरिया जोकि पूरी तरह से घबराया हुआ था लेकिन फिर भी वह राजू से बोला,,,।

राजू हमें डरने की कोई जरूरत नहीं है हम लोगों के घर में ऐसा कुछ भी नहीं है जिसे डाकु लूट के ले जा सके,,,

(अपने पिताजी की बात सुनकर राजू थोड़ा गुस्सा दिखाते हुए बोला)

पागल हो गए हो क्या पिताजी तुम्हें क्या लगता है कि डाकू लोग सिर्फ रुपया पैसा गहना ही लूट कर ले जाते हैं यह कैसे भूल गए कि रुपया पैसा गहने से भी कहीं ज्यादा बेशकीमती घर में दो-दो जवान औरते हैं और उनकी खूबसूरती देखकर डाकुओं के मुंह में पानी आ जाएगा और वह लोग बिना कहे दोनों को उठाकर अपने साथ ले जाएंगे,,,,

(राजू के मुंह से घर की दोनों औरतों के बारे में इस तरह की बातें सुनकर पहले तो हरिया को थोड़ा आश्चर्य हुआ लेकिन मौके की नजाकत को समझते हुए वह अच्छी तरह से समझ गया था कि राजू जो कुछ भी कह रहा है वह सच है इसलिए वह बोला,,,,)

तो फिर अब क्या करना है,,,,

(अपने पिताजी की बात सुनकर राजू इधर-उधर देखते हुए बोला)

वही तो मैं भी सोच रहा हूं,,,,,,

(राजू की बात सुनकर हरिया को भी अब डर लगने लगा था उसे समझ में आ गया था की राजू जो कुछ भी कह रहा है सच कह रहे हैं कुछ नहीं मिलेगा तो डाकू लोग उसकी बीवी और उसकी बहन को उठाकर ले जा सकते हैं और फिर उनकी इज्जत से जी भर कर खेलेंगे इस बात को सोच कर ही उसका दिल बैठा जा रहा था,,,,, तभी बाहर से आवाज आने लगी,,,)

नहीं साहब हमको छोड़ दो हमारे पास कुछ नहीं है,,,,

साला बुड्ढा झूठ बोलता है,,,,, इला जो कुछ भी है सब मेरे हवाले कर दी वरना इस बंदुक की एक गोली तुझ पर बिगाड़ने में मुझे जरा भी झिझक नहीं होगी ,,,,

मैं सच कह रहा हूं माई बाप मेरे पास कुछ भी नहीं है,,,

(राजू और हरिया घर के अंदर से यह बात सुन ही रहे थे कि तभी डाकुओं के 1 साथी की आवाज आई,,,,)

सरदार इसके घर से तो कुछ मिला नहीं लेकिन सबसे बड़ा खजाना हाथ लगा है,,,,

( वह डाकु इतना कहा ही था कि गांव के उसी बुजुर्गों की रोने की आवाज आई और वह चीख चीख कर बोलने लगा)

नहीं माई बाप ऐसा जुर्म ना कीजिए मेरी बेटी को छोड़ दो उसका विवाह होने वाला है,,,,।

विवाह बाद में होगा लेकिन उससे पहले तेरी बेटी के साथ हम लोगों का सुहागरात होगा,,,,,,,

(इतना सुनते ही हरिया और राजू दोनों चौक गए उन दोनों को समझ में आ गया कि पैसे और गहने ना मिलने पर डाकु,, उसकी बेटी को लेकर जा रहे थे,,,,, उस डाकू की बात सुनकर राजू अपने पिताजी की तरफ देख कर बोला,,)

देख लिए पिताजी,,,, मैं ना कहता था,,,

हां राजू तो सच कह रहा था अब तो मुझे डर लगने लगा है कहीं बाहर लोग इस घर में आ गए तो गजब हो जाएगा,,,,

हां पिताजी ईसी बात का मुझे भी डर है,,,,

(अभी दोनों बाप बेटे आपस में बातें ही कर रहे थे कि तभी डाकुओं के सरदार की आवाज आई और उसकी बात सुनकर तो राजु और हरिया दोनों के होश उड़ गए,,,)

तुम 2 लोग जाओ और हर घर में जाकर देखो कुछ मिलता है तो ठीक वरना घर की बहू बेटी जो बहुत खूबसूरत हो उसे उठा लो वैसे भी कई दिन हो गए रात रंगीन करने को,,,,

सच कह रहे हो सरदार मेरा तो सोचकर ही खड़ा हो रहा है,,,

चिंता मत कर इस बुड्ढे की बेटी है ना आज ही रात को इसकी सुहागरात हो गई,,,,

(इतना सुनते ही वह बुरा जिसकी बेटी को डाकू पकड़ कर लाए थे वह जोर-जोर से रोने लगा)

नहीं माई बाप ऐसा जुल्म ना करिए मैं कहीं का ना रह जाऊंगा उसका विवाह हो गया है,,,,

तो क्या हुआ विवाह से पहले ही चुदाई का मजा ले लेगी,,,,

हरामजादे तुझे यह कहते शर्म नहीं आती तेरी बेटी की उम्र की है,,,,

(उस बूढ़े ने जैसे ही सरदार को गाली दिया वैसे ही उन लोगों में से एक घोड़े पर से उतर कर आया और उस बुढे को एक लात मारकर गिरा दिया और बोला)

हरामजादे तेरी यह हिम्मत तु हमारे सरदार को गाली देता है,,,, रुक अभी तुझे बताता हूं,,,,(उसका इतना कहना था कि वह बंदूक की नाली उस घोड़े की तरफ करके घोड़ा दबाने ही वाला था कि उसका सरदार  उसे रोकते हुए बोला,,,)

जाने दे छोड़ ईसे यह तो ऐसे ही मर जाएगा इस पर अपनी कीमती गोली क्यों बर्बाद करता है,,,,, तुम दोनों अभी तक यहीं हो जाकर देखते क्यों नहीं जो मिले लेकर आओ और कुछ भी ना मिले तो बहू बेटी को लेकर आओ,,, जाओ जल्दी करो,,,,।

(पूरे गांव की हालत खराब हो चुकी थी कम से कम 10 12 डाकू थे सभी घोड़ों पर सवार थे और घोड़ों के पैरों की आवाज एकदम साफ कानों में सुनाई दे रही थी,,, डाकू का सरदार हर घर की तलाशी लेने के लिए बोल रहा था जिसे सुनकर गांव के सभी लोग एकदम से घबरा गए थे डाकुओं से टक्कर लेने की किसी में हिम्मत बिल्कुल भी नहीं थी और वैसे भी आज से पहले इस गांव में डाकू कभी आए ही नहीं थे आज पहली मर्तबा था जब डाकू इस गांव में कदम रखे थे तभी तो सबके होश उड़ गए थे सरदार की बात सुनते ही वह दोनों सबसे पहले राजू के घर का दरवाजा जोर-जोर से पीटने लगे,,,,।)

अरे खोल हरामजादे वरना हम दरवाजा तोड़ देंगे और फिर ऐसा हश्र करेंगे कि जिंदगी भर याद रखोगे,,,

(अपना खुद का दरवाजा पीते जाने पर राजू और हरिया दोनों एकदम से चौक गए दोनों घबरा गए दोनों के बदन पर पसीने की बूंदें उपज ने रखी और दरवाजा पीटने की आवाज अंदर कमरे में मधु और गुलाबी दोनों को साफ सुनाई दे रहा था तो एकदम से घबरा गए थे मधु गुलाबी को पकड़े हुए थे गुलाबी भी कसके मधु के बदन से चिपक  सी गई थी दोनों घबराए हुए थे,,,, हरिया एकदम परेशान होता हुआ बोला,,,)

अब क्या होगा राजू अब तो निश्चित तौर पर वार डाकू तेरी मां और तेरी बुआ को ले जाएंगे,,,,

हराम जादू दरवाजा खोलते हो कि तोड़ दूं लोग ऐसे नहीं मानोगे जब इस बंदूक की गोली तुम्हारे सीने में जाएगी तभी समझ में आएगा,,,,।

(बाप बेटे मधु और गुलाबी सबके साथ एकदम घबराए हुए थे चारों के पसीने छूट रहे थे,,, लेकिन उस डाकू के मुंह से बंदूक शब्द सुनकर राजू को जैसे कुछ याद आया हो,,, वह एकदम से बोला,,,)

पिताजी कुछ भी हो जाए तुम दरवाजा मत खोलना एक दरवाजा वह लोग तोड़ भी देंगे तो दूसरे दरवाजे को तोड़ने में समय जरूर लगेगा लेकिन तुम किसी भी हाल में दरवाजा खोलना नहीं मैं अभी कुछ करता हूं,,,,

तु क्या करेगा बेटा तुझसे कुछ नहीं हो पाएगा,,,,।

(अपने पिताजी की बात को अनसुनी करके राजू उस कमरे की ओर भागा जहां पर उसने बंदूक ऊपर के हिस्से में छुपाया था,,,, हरिया के पसीने छूट रहे थे बाहर उस डाकू की आवाज उसकी गालियां साफ सुनाई दे रही थी पुस्तकों की आवाज को सुनकर और उनके इरादों के बारे में जानकर मधु और गुलाबी के भी पसीने छूट रहे थे उन दोनों के तो होश सबसे ज्यादा खराब थे क्योंकि दोनों को इस बात का एहसास हो गया था कि कुछ ही देर में डाकू उन दोनों को उठाकर ले जाएंगे और मनमानी करेंगे,,,,, इस बारे में सोच कर मधु की आंखों से आंसू बह रहे थे वह रोने लगी थी और उसे देखकर गुलाबी भी रोने लगी थी,,,,, आधी रात का समय हो चुका था,,,, गांव में किसी को इस बात का अहसास तक नहीं था कि आज उनके गांव में कहर बरसने वाला है डाकू आने वाले हैं इसीलिए तो लोग निश्चिंत होकर चैन की नींद सो रहे थे और रोज की तरह आज भी राजू अपनी बुआ की खूबसूरत जवानी का रस चख रहा था और अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच कर वहां अपनी बुआ की बुर में लंड डालने ही वाला था कि शोर शराबा सुनकर वाह एकदम से खामोश हो गया था और जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि डाकू आ गए हैं तो उसके होश उड़ गए थे,,,,, राजू कुछ देर पहले कुछ भी कर सकने की स्थिति में नहीं था क्योंकि उसे इस बात का अहसास नहीं था कि खुदा को उसके घर में घुसने की कोशिश करेंगे लेकिन जब उसे इस बात का एहसास होगा कि डाक उसके घर में घुसने की कोशिश कर रहे हैं तब उसे रहा नहीं जा और वह लाला की दी हुई बंदूक को लेने के लिए कमरे में चले गया था और अगले ही पल बंदूक लेकर वह अपने पिताजी के पास आ गया हरिया अपने बेटे के हाथ में बंदूक देख कर एकदम से होश खो बैठा उसे समझ में नहीं आया कि वह क्या करें उसने इससे पहले बंदूक को इतने नजदीक से कभी देखा नहीं था,,,, इसलिए अपने बेटे के हाथ में बंदूक देखकर एकदम हैरान हो गया था और वह बोला,,,।

ययययय‌ यह क्या है राजू कहां से ले आया,,,

पिताजी आज यही हमारे घर की इज्जत बच जाएगी वरना उसे लूटने में बिल्कुल भी देर नहीं लगेगी तुम बस दरवाजा मत खोलना,,,,,,

(इतना कहने के साथ ही राजू धीरे से घर के ऊपर चढ़ने लगा हरिया उसे आंखें फाड़े देख रहा था और बाहर दरवाजे पर शोर-शराबा बढ़ता जा रहा था राजू घर के ऊपर चढ़कर  डाकुओं से नजर बचाकर पीछे के रास्ते से जाना चाहता था हरिया को अभी तक समझ में नहीं आ रहा था कि उसका बेटा करने क्या वाला है राजू धीरे से घर की छत पर चढ़ गया,,,, छत मिट्टी के खपड़े से बना हुआ था जिस पर धीरे-धीरे चढ़कर राजू घर के पीछे कूद गया और वहां से तुरंत डाकुओं से नजर बचाकर बड़े-बड़े पेड़ के पीछे छुपते छुपाते एक ऐसी जगह पर पहुंच गया जहां से डाकू एकदम साफ नजर आ रहे थे वह साफ तौर पर देख पा रहा था कि उसके घर के सामने ही 10-12 घोड़े और घोड़ों के ऊपर डाकू थे जिनके हाथों में बंदूकें थी उन लोगों को देखकर राजू एकदम से घबरा गया था वह समझ गया था कि आज उसकी मां और उसकी बुआ दोनों डाकू के हाथ से बच नहीं पाएंगे और इससे पहले उसे कुछ करना था वह बिल्कुल भी नहीं चाहता था कि डाकू के हाथ में उसकी मां और उसकी बुआ पड़े,,,, क्योंकि ना चाहते हुए भी ऐसे हालात में भी उसकी आंखों के सामने वह दृश्य नजर आने लगा जब डाकू उसकी मां और बुआ को उठाकर अपने अड्डे पर ले जाएंगे तो कैसा होगा वह उस अदृश्य के बारे में कल्पना करके ही दम से कांप उठा था,,,,, वह कल्पना कर रहा था कि अगर वाकई में ऐसा हो गया तो क्या होगा इस समय उसकी आंखों के सामने 10  12 डाकू थे और सब के सब औरतों के बदन की प्यासे,,,, ना चाहते हुए भी उसके जेहन में कल्पना के बादल साफ नजर आ रहे थे कि कैसे उसकी मां और बुआ डाकू के अड्डे पर बिल्कुल नंगी होकर उनकी बिस्तर पर लेटी हुई है और एक के बाद एक डाकू उन दोनों पर चढ़कर मजा लेकर हट रहे हैं दोनों चेक रहेंगे चिल्ला रही है लेकिन इन सब का डाकू पर कोई भी असर नहीं पड़ रहा है,,,,, ऐसी कल्पना करते हैं राजू की आंखों में खून सवार हो गया वह कुछ भी करने को तैयार हो गया वह लाला से बंदूक और तीन गोलियां लेकर आया था वैसे तो बंदूक चलाने का मौका उसे बिल्कुल भी मिला नहीं था लेकिन जब कभी भी घर पर कोई नहीं होता था तो वह बंदूक निकालकर उसमें गोली भरता था और उसे वापस निकालता था वैसे ही बंदूक से निशाना भी लेता था इसलिए उसे थोड़ा आत्मविश्वास था कि अगर वह थोड़ी कोशिश करेगा तो बंदूक चलाने में कामयाब हो जाएगा इसलिए वह बंदूक लेकर के धीरे-धीरे पेड़ के ऊपर चढ़ गया,,,, ऊपर चढ़कर वाला देखने लगा उसके पड़ोस की ही लड़की उन डाकुओं के कब्जे में थे जो कि जोर-जोर से रो रही थी एकदम से डरी हुई थी और उसके पिताजी जिसे लात से मारकर एक डाकू ने गिरा दिया था वह अभी भी नीचे गिरा कहर रहा था,,,,। राजू जल्दी से बंदूक में एक गोली डाला और उसे एकदम से तैयार कर लिया तभी उसके कानों में उन डाकुओं के सरदार की आवाज आई,,,,।

क्या कर रहा है तुझसे एक दरवाजा नहीं टूट रहा है,,, जरूर इस घर में ढेर सारा खजाना या तो फिर जवानी से भरी हुई औरत है तभी अंदर से कोई टस से मस नहीं हो रहा है तोड डाल ईस दरवाजे को और जो कुछ भी है बाहर लेकर आ,,,

जी सरदार अभी तोड़ देता हूं,,,,

(इतना सुनते ही राजू एकदम से घबरा गया था अब उसके पास बिल्कुल भी समय नहीं था वह किसी भी तरह से इन डाकुओ को रोकना चाहता था,,,, क्योंकि वह डाकू जोर-जोर से उसके दरवाजे को बंदूक की ठोकर से मार रहा था किसी भी वक्त उसका दरवाजा टूट सकता था यह देखकर राजू भगवान का नाम लेकर जिंदगी में पहली बार अपने घर की इज्जत बचाने के लिए,,, वह बंदूक हाथ में लिया था और वह भी चलाने के लिए,,,,, राजू घोड़े पर सवार एक डाकू का निशाना लगा दिया था और उसका दरवाजा एक डाकू के द्वारा जोर-जोर से पीटा जा रहा था तभी वह एक कसके लात मारा और दरवाजा एकदम से टूट गया वह दरवाजा टूटा और यहां राजू के हाथ से बंदूक की नाल दब गई और तुरंत बंदूक में से गोली छोटी और सीधा जाकर उस डाकू को लगी जिसका व निशाना लगाया था बंदूक के चलने की आवाज सुनते ही सभी डाकू एकदम से चौक गए जिसने दरवाजा तोड़ा था वह अंदर घर में प्रवेश किया ही था कि वह दौड़ कर बाहर वापस आ गया,,,,, डाकुओं में अफरा-तफरी मच गई,,,

अरे सरदार को गोली लग गई सरदार को गोली लग गई,,,

(राजू जानता था कि अगर वह दूसरी गोली नहीं चलाएगा तो वह डाकू लोग गुस्से में किसी को भी नहीं छोड़ेंगे इसलिए राजू ने तुरंत बंदूक में दूसरी गोली भरा और वापस निशाना लगाया और फिर से लाल को दबा दिया और इस बार भी बंदूक से गोली छोटी और घोड़े पर सवार दूसरे डाकू को गोली लगी और वह तुरंत नीचे जमीन पर गिर गया डाकुओं में हड़कंप मच गया नीचे गिरे डाकू को जैसे तैसे करके वह डाकु को उठाकर घोड़े पर रखे और उनमें से एक डाकू बोला,,,,।)

यहां रुकना बिल्कुल भी ठीक नहीं है जल्दी से चलो,,,,,

(इतना सुनकर राजू को राहत भी वह डाकू लोग दुम दबाकर भाग गए थे अनजाने में ही राजू के हाथों डाकुओं के सरदार को गोली लग गई थी और वह पूरी तरह से घायल हो चुका था शायद रास्ते में ही उसकी मृत्यु भी होना संभव था क्योंकि गोली ठीक उसके सीने में लगी थी दूसरा डाकू तो तुरंत स्थान पर ही मर गया था इसलिए आप लोग घबरा गए थे उन्हें यकीन नहीं था कि कोई उन पर इस तरह से हमला करेगा और गोली की आवाज सुनकर तो पूरे गांव में हड़कंप मच गई थी सब लोग सनन  मार गए थे,,,, वह बूढ़ा आदमी जिसकी बेटी को डाकू लोग ले जाना चाहते थे वह लोग अफरा-तफरी में उसकी लड़की को वहीं छोड़ दिए थे जिसे वह पूरा आदमी अपने साथ लेकर वापस अपने घर में चला गया था वह बुरी तरह से घबराया हुआ था इसलिए तुमसे दरवाजा बंद करके वह किसी भी तरह से अपनी बेटी को सुरक्षित कर लेना चाहता था डर का माहौल इस कदर बना हुआ था कि अभी भी घर से कोई बाहर नहीं निकला था और राजू इसी मौके का फायदा उठा कर दे जैसे पेड़ से नीचे उतरा और अपने घर में प्रवेश कर गया अंदर का दरवाजा बंद था इसलिए बाहर से जोर-जोर से दरवाजा खटखटा ते हुए बोला,,,

मैं हूं पिताजी दरवाजा खोलिए डाकू चले गए,,,,

क्या डाकू चले गए,,,(हरिया एकदम से खुश हो गया और वह‌ तुरंत दरवाजा खोला तो सामने हाथ में बंदूक लिए राजू था राजू के चेहरे पर राहत साफ नजर आ रहे थे वह खुश था,,,, घर में प्रवेश करने लगा और तुरंत दरवाजा बंद भी कर दिया हरिया अभी भी दुविधा में था वह बोला,,,)

राजू बेटा बाहर गोली चलने की आवाज आई थी,,,

पिता जी यह बात किसी को बता मैंने उनके दो डाकू को मार गिराया और उन्हें जरा भी शक नहीं हुआ,,,,

क्या कह रहा है राजू,,,(हरिया एकदम से घबराए स्वर में बोला,,,)

हां पिताजी मैं सच कह रहा हूं और मेरे पास कोई रास्ता भी नहीं था,,,,(इतना कहने के साथ ही वह उस कमरे का दरवाजा खोलने लगा जिसमें उसकी मां और उसकी दुआ छुपी हुई थी)

बाहर से खुल गया है अब बाहर आ जाओ,,,,

(इतना सुनते ही मधु और गुलाबी भी खुश होते भी जल्दी से दरवाजा खोलकर बाहर आ गई और मधु हैरानी से बोली)

राजू डाकू चले गए क्या,,,,

तुम्हारे बेटे ने दो डाकू को मार गिराया है,,,,,

यह क्या कह रहे हैं आप,,,,

हां देख नहीं रही हो इसके हाथ में बंदूक है,,,

बंदूक,,,,यह तेरे पास कैसे आई बेटा,,,

समझ लो मा आज के दिन के लिए ही मेरे पास यह बंदूक आई थी,,,, अगर आज मेरे पास ही बंदूक ना होती तो तुम दोनों को डाकू लोग उठा ले जाते देख नहीं रही हो बाहर का दरवाजा तोड़ दिए थे,,,,।

(स्थिति का भान होते ही मधु  अपने बेटे को गले से लगा ली और बोली,,,)

ओहहह बेटी मुझे तुझ पर बहुत नाज है तो अगर सच में इतनी हिम्मत ना दिखाता तो शायद हम दोनों आज घर पर नहीं मिलते,,,,,

तुम सच कह रही हो मैं तुम राजू ने जो कुछ भी किया बहुत अच्छा किया है,,,,

लेकिन पिताजी इस बारे में किसी को कानों कान खबर तक नहीं होनी चाहिए बाहर भी किसी को इस बात का पता नहीं है कि गोली कहां से चली कौन चलाया क्या हुआ सब लोग अपने अपने घरों में तुम दबाए बैठे थे इसलिए किसी को भी पता नहीं चलना चाहिए वरना किसी ने अगर डाकुओं को मुख भरी कर दी तो हमारा परिवार मुसीबत में आ जाएगा,,,,

ऐसा कुछ भी नहीं होगा बेटा जा जाकर बंदूक को छुपा दे,,,,

सुबह तक तो यह खबर गांव के पास पड़ोस के सभी गांव में आग की तरह फैल गई,,,,, सब को इस बात का पता चल चुका था कि डाकुओं के गिरोह के दो डाकू मारे गए थे और सबको ऐसा ही लग रहा था कि उन डाकुओं को मारने वाला और कोई नहीं जमींदार लाला ही था इसलिए सभी लोग लाला की वाहवाही कर रहे थे लेकिन जैसे ही यह खबर लाला के कानों में पहुंचे लाला को समझते देर नहीं लगी कि यह कारनामा किस ने कर दिखाया है वह बहुत खुश हुआ,,,, क्योंकि राजू के इस कारनामे में उसे अपना भविष्य सुरक्षित दिखाई दे रहा था वह तुरंत राजू को खबर भिजवाया उससे मिलने के लिए,,,।

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