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वैध के घर के सामने बैलगाड़ी आकर रुक गई थी मधु अपने मन में सोचने लगी कि अच्छा हुआ कि उसकी मंजिल आ गई थी वरना उसका बेटा अपनी बातों से एक बार फिर से उसका पानी झाड़ दिया होता लेकिन अपनी बातों से वह पूरी बुर चिपचिपी कर दिया था ऐसा लग रहा था कि जैसे अभी अभी बारिश होकर बंद हो गई हो और जमीन पूरी गीली हो गई हो,,,,, राजू तुरंत बेल गाड़ी रोककर पीछे आया और अपनी मां को उतारने में मदद करने लगा,,,।


वैध के घर 10 लोग जैसे बैठे हुए थे जो दवा लेने के लिए आए थे यह बड़ा ही नामचीन वेध था,, इसीलिए तो लोग दूर-दूर से यहां दवा लेने के लिए अपना इलाज कराने के लिए आते थे,,, एक अच्छी सी साफ-सुथरी जगह देखकर,,, मधु बैठ गई थी और राजू कुछ देर तक वही अपनी मां के साथ बैठा रहा है लेकिन उसे इस तरह से बैठे हैं ना अच्छा नहीं लग रहा था इसलिए वह अपनी मां से बोला,,,।

लगता है यहां पर कुछ समय लग जाएगा मैं तब तक इधर-उधर घूम कर आता हूं,,,,

ठीक है लेकिन जल्दी आ जाना,,,

तुम चिंता मत करो मैं दूर नहीं जाऊंगा बस यही आस-पास ही हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू गांव का जायजा लेने के लिए इधर उधर घूमने लगा गांव कुछ खास बड़ा नहीं था सिर्फ इस वैद्य के वजह से गांव का नाम दूर-दूर तक माना हुआ था,,,, राजू इधर उधर घूमने लगा,,, घूमते घूमते हुए गांव के थोड़ा बाहर निकल आया ,,, गांव के बाहर बड़ा सा तालाब था और राजू बड़े से पत्थर पर बैठकर तालाब में धीरे-धीरे कंकड़ मारने लगा उसका समय गुजर नहीं रहा था वह जल्द से जल्द दवा लेकर वापस जाना चाहता था ताकि सफर में अपनी मां के साथ थोड़ी मस्ती कर सके अपनी गंदी बातों से उसका मन बहला सके,,,,,,,
राजू बड़े से पत्थर पर बैठकर पानी में कंकर मारता हुआ इधर उधर नजर दौड़ा कर देख रहा था चारों तरफ बड़ी-बड़ी साड़ियां होगी हुई थी और इस समय तालाब पर कोई भी नहीं था क्योंकि दोपहर का समय था लेकिन आसमान में रह-रहकर बादल उमड़ आते थे जो कि बारिश आने का अंदेशा दे रहे थे,,,,,, तभी झाड़ियों में थोड़ी सी हरकत हुई ऐसा लग रहा था कोई जंगली जानवर झाड़ियों के बीच में बैठा हुआ है लेकिन तभी उसके सोचने के विरुद्ध ही एक औरत जो कि लगभग 35 या 36 साल की लग रही थी वह झाड़ियों में से निकल कर बाहर आई और जैसे ही झाड़ियों से बाहर निकल कर आई राजू उसको देखकर एकदम से हक्का-बक्का रह गया क्योंकि वह औरत थोड़ा सा झुक कर और अपनी साड़ी को कमर तक उठाकर धीरे-धीरे झुक कर ही चल रही थी वह तालाब के पानी के पास आ रही थी उसकी नजर अभी तक राजू पर बिल्कुल भी नहीं पड़ी थी लेकिन राजू की नजर उस पर पड़ चुकी थी और राजू को समझते देर नहीं लगी कि वह औरत सोच करके आ रही थी,,,,,,,,।

औरत को ऐसे हालात में देखकर एक अच्छे संस्कार इंसान को वहां से हट जाना चाहिए था लेकिन राजू अब संस्कारी बिल्कुल भी नहीं था औरतों के मामले में तो खास करके वह बेशर्मी दिखाता हुआ एकदम से वहीं बैठा ही रह गया लेकिन अभी तक उस औरत की नजर उस पर पड़ी नहीं थी और वह तालाब के किनारे बैठ कर पानी का इस्तेमाल करते हुए गांड धोने लगी,,, यह देखकर राजू का लंड एकदम से खड़ा हो गया हालांकि अभी तक राजू इतनी दूर से ना तो उस औरत की गांड देख पाया था और न ही उसकी बुर लेकिन फिर भी उसके बदन की बनावट देखकर समझ गया था कि उसकी बुर कितनी जानदार होगी,,,, वह औरत निश्चिंत होकर तालाब के पानी का उपयोग कर रही थी लेकिन उसे नहीं मालूम था कि उसके सामने बड़े से पत्थर पर बैठकर एक जवान लड़का उसकी हरकत को देख रहा है और जैसे ही उस औरत की नजर राजू पर पड़ी वह एकदम से हक्की बक्की रह गई,,,,,, वह तुरंत खड़ी हो गई लेकिन खड़ी होकर जब तक अपनी साड़ी को कमर से नीचे छोड़ती राजू की नजर उसकी घुंघराले बालों से गिरी हुई बुर पर पड़ गई और उसकी बुर देखकर गर्म आहहह भरने लगा,,,, वह औरत एकदम संस्कारी थी इसलिए वह राजू की हरकत पर सिर्फ गुस्सा करके रह गई और वहां से जाने लगी,,,, राजू अपने चारों तरफ नजर दौड़ाया वहां पर कोई भी नहीं था यह स्थान एकदम सुनसान था इसलिए वह इस मौके का फायदा उठाना चाहता था वह उस औरत से बात करना चाहता था उसके मन की हालत को समझना चाहता था इसलिए तुरंत घूम कर गया और वह और झाड़ियों से बाहर निकलती से पहले ही ठीक उसके सामने जाकर खड़ा हो गया,,, और मुस्कुराते हुए बोला,,,।

नमस्ते भाभी,,,, अपनी गलती के लिए शर्मिंदा हूं,,,

तुम अगर शर्मिंदा होते तो अपनी नजर को दूसरी तरफ फेर लेते,,,,(वह घुंघट मैं अपना मुखड़ा छुपा कर बोली)

मैं माफी चाहूंगा भाभी तुम जो कुछ भी कह रही हो वह बिल्कुल सच है अगर मैं शर्मिंदा हुआ होता तो मैं अपनी नजरों को घुमा देता लेकिन मैं एक बात कहना चाहूंगा कि तुम अगर खूबसूरत ना होती तो शायद मैं ऐसा जरूर करता था कि मैंने पहली बार ऐसी खूबसूरत औरत देखा हूं,,,,।
(राजू अपनी बातों का जाल बुनना शुरू कर दिया,,,, औरतों की कमजोरी को अच्छी तरह से जानती थी लेकिन यहां पर उसका पासा पलटना हुआ नजर आ रहा था क्योंकि वह बेहद सीधी-सादी औरत थी,,,, और हो राजू की बात सुनकर एकदम से घबराते हुए बोली,,)

यह क्या कह रहे हो मुझसे इस तरह की बात करते हुए तुम्हें शर्म आनी चाहिए,,,,,,
(उसकी ऐसी बात सुनकर राजू समझ गया कि सोच समझकर कदम उठाना होगा वह अपने चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आ रहा था क्योंकि यह जगह गांव से थोड़ी दूर पर थी,,, राजू बात को संभालते हुए बोला,,,)


मुझे मालूम था भाभी कि तुम्हें मेरी बात बुरी लगेगी लेकिन मैं हकीकत कहने से पीछे नहीं होता जो बात सच होती है मैं उसे कहने से डरता नहीं बने चाहे कुछ भी हो जाए मैं जानता था कि तुम मुझसे नाराज हो जाओगी मेरी बात सुनकर तुम्हें गुस्सा भी आएगा लेकिन हकीकत ‌को टाला तो नहीं जा सकता तुम खूबसूरत हो तो हो,,,,(राजू अपनी बातों को कह भी रहा था और अपनी आंखों से उसकी खूबसूरत बदन को ऊपर से नीचे तक टटोलते हुए उसके बदन का जायजा भी ले रहा था,,, तभी उसकी नजर उसके थोड़े से फटे हुए ब्लाउज पर गई ,, और उसका ब्लाउज जिस जगह से थोड़ा सा फटा हुआ था वहां से उसकी चूची का किसमिस नजर आ रहा था जिस पर नजर पड़ते ही राजू का लंड खड़ा होने लगा,,,,,, राजू उस औरत के लिए बिल्कुल अनजान था और राजू के लिए औरत बिल्कुल अनजान थी दोनों में किसी भी प्रकार की रिश्तेदारी है पहचान नहीं थी राजू उस औरत को पहली बार देख रहा था,,, शायद वह उसके पीछे आता भी नहीं लेकिन उसे साड़ी उठाकर झुके हुए चलते हुए देखकर उसकी काम इच्छा जाग गई थी,,, ऐसा नहीं था कि राजू की बातों से उसे गुस्सा आ रहा था उसे राजू की बात अच्छी भी लग रही थी क्योंकि,,,, उसे किस बात का एहसास हो रहा था कि किसी को तो वह खूबसूरत नजर आ रही है,,,,, उस औरत का रंग हल्का सा दबा हुआ था लेकिन बदन का भराव सुगठित था इसलिए वह खूबसूरत लग रही थी,,,,,, राजू अपनी बात खत्म करके कुछ देर तक नहीं खड़ा रहा लेकिन वह कुछ बोल नहीं रही थी और अपना काम करने लग गई थी वह पेड़ों से सूखी हुई लकड़ियां तोडकर इंधन जुटा रही थी ताकि खाना पका सके,,, उससे लकड़ियों का देर बांधा नहीं जा रहा था और वैसे भी आसमान में बादल देखकर वह कुछ ज्यादा ही लकड़ियां इकट्ठा कर ली थी ताकि अगर बरसात हो जाए तो दूसरे दिन के लिए इंधन के लिए इधर-उधर भटकना ना पड़े राजू उसके करीब ही खड़ा था और वह नीचे बैठकर लकड़ियां बांधने की कोशिश कर रही थी उससे ठीक से बंध नहीं रही थी इसलिए राजू बोला,,,।)

लाओ भाभी मैं बांध देता हूं तुमसे नहीं बंधेगी,,,,
(इतना कहने के साथ ही राजू उसके पास जाकर बैठ गया और उसके नानूकुर करने के बावजूद भी जबरदस्ती लकड़ियों को इकट्ठा करके बाद में लगा देखते ही देखते राजू दो गट्ठर बांध लिया था,,,, लकड़ियों के दो ढेर देखकर वह औरत को समझ में नहीं आ रहा था कि वह घर कैसे लेकर जाएगी जबकि घर उसका ठीक सामने ही था,,,, जब वह लकड़ियों को इकट्ठा करके उसे बांध रहा था तब वह औरत अपने मन में सोच रही थी कि यह जवान लड़का है कौन किसके घर आया है किसका रिश्तेदार है इससे पहले तो उसने कभी भी इसे गांव में देखी नहीं तो ही अनजान लड़का यहां क्या कर रहा है,,,, राजू को देखकर उस औरत के मन में ढेर सारे सवाल पैदा हो रहे थे और उसकी हरकत से वह थोड़ी सेहमी हुई भी थी,,, इन सब के बावजूद भी ना जाने क्यों उस औरत का राजू के प्रति अजीब सा आकर्षण होता जा रहा था राजू का भोला भाला चेहरा उसे भा रहा था,,, राजू आखरी बाोजे को कस के बांधता हुआ बोला,,,,)

अब तो ठीक है ना भाभी,,,।

हां अब ठीक है,,,,,,(इतना कहने के साथ ही वह औरत जैसे ही लकड़ी के बोझ को उठाने के लिए नीचे झुकी उसके कंधे पर से साड़ी का पल्लू नीचे गिर गया और उसकी जवानी से लबलबाती हुई चूचियां,,, आधे से ज्यादा,,, ब्लाउज में से बाहर झांकने लगी,,, ब्लाउज के ऊपरी हिस्से का बटन टूटा हुआ था इसलिए अपनी मचलती उफान मारती जवानी को खेत करने के लिए ब्लाउज में बटन का अंकुश नहीं था,,, अगर एक और बटन खुला होता तो शायद उसकी चूचियां बाहर छलक उठती,,,, राजू आंखें फाड़े उसकी मदहोश जवानी को छलकते हुए देख रहा था उसकी चुचियों को देखकर राजू समझ गया था कि चुचियों में बहुत रस भरा हुआ है,,,,,,, वह औरत को जैसे ही इस बात का आभास हुआ वह राजू की तरफ देखी तो शर्म से एकदम सहमत ही क्योंकि उसकी नजरें उसकी चुचियों पर जमी हुई थी और अपनी छातियों की तरफ देखी तो उसके होश उड़ गए,,, ब्लाउज का ऊपरी बटन टूटा हुआ था यह तो अच्छी तरह से जानती थी लेकिन झुकने पर उसकी आधे से ज्यादा चूचियां नजर आने लगेगी शायद इस बात का अंदाजा उसे बिल्कुल भी नहीं था इसलिए वह तुरंत खड़ी हो गई और अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करने लगी,,,,,,,।

वह औरत गांव के आखिरी छोर पर अकेले ही रहती थी उसका पति कई कई दिन तक घर नहीं वापस आता था इधर उधर काम की तलाश में जो काम मिल जाए उसे करके अपने परिवार का भरण पोषण कर रहा था,,,, राजू की नजरों से वह शर्म का अनुभव कर रही थी,,, एक जवान लड़का प्यासी नजरों से उसकी चूची को ताड़ रहा था और तालाब के किनारे उसे गांड धोते हुए देख लिया था और वह उसकी मदद करने के लिए यहां तक पहुंच गया था वह औरत समझ नहीं पा रही थी कि राजू के मन में क्या चल रहा है अभी तक कुछ नहीं उसका नाम भी नहीं पूछी थी,,, लेकिन उसकी हरकतों से कुछ ठीक नहीं लग रही थी उसकी आंखों में जवानी चखने की प्यास एकदम साफ नजर आ रही थी,,,, वह खुद हैरान थी कि उसकी नजरों से उसे शर्म भी आ रही थी और ना जाने कि उसके तन बदन में हलचल सी भी हो रही थी,,,,, देखते ही देखते अपनी साड़ी के पल्लू को ठीक करके वह वापस लकड़ियों का बोझ उठाने लगी लेकिन लकड़िया कुछ ज्यादा ही करती हो चुकी थी इसलिए वह ठीक से उठा नहीं पा रही थी यह देखकर राजू बोला,,,।

तुम रहने दो भाभी मैं उठा देता हूं तुमसे नहीं उठने वाला कुछ ज्यादा ही वजन है,,,

नहीं नहीं रहने दो मैं उठा लूंगी,,, तुम जाओ अपना काम करो,,,

अरे नहीं नहीं ऐसे कैसे मेरे होते हुए तुम लकड़ियों का इतना भारी बोझ उठाओ यह मुझसे देखा थोड़ी जाएगा,,, तुम खड़ी रहो मैं उठा देता हूं,,,,।
(राजू लकड़ियों को उठाने के लिए नीचे झुक गया था और लकड़ी उठाने की कोशिश कर रहा था लेकिन वह औरत उसे लकड़ीया उठाने नहीं दे रही थी क्योंकि वह नहीं चाहती थी कि वह लड़का उसके पीछे पीछे उसके घर तक आए क्योंकि उसका नजरिया और इरादा दोनों ठीक नहीं लग रहा था लेकिन उठाने और नहीं उठाने के चक्कर में राजू ने अनजान बनते हुए ही जानबूझकर उसकी कलाई पकड़ लिया था और जैसे ही कलाई पकड़ा दोनों की नजरें आपस में टकरा गई राजू तो पूरी तरह से खेला खाया था और औरतों को कैसे अपने बस में किया जाता है इसका उन्हें अच्छी तरह से जानता था लेकिन वह औरत इन सब से अनजान थी वह अपने पति को छोड़कर अभी तक किसी गैर मर्द से इस तरह से नजर तक नहीं मिली थी इसलिए पहली बार एक जवान लड़के से नजर मिलते ही उसके तन बदन में अजीब सी हलचल होने लगी,, खास करके उसकी दोनों टांगों के बीच की स्थिति कुछ ज्यादा ही दयनीय नजर आ रही थी,,,, कुछ देर तक राजू उस औरत की कलाई को पकड़े रह गया खेतों में काम करने की वजह से उसकी कलाई मजबूत महसूस हो रही थी और राजू अपने मन ही मन सोच रहा था कि इस गठीले बदन वाली मजबूत बांहो वाली औरत को चोदने में कितना मजा आएगा,,,,, अपनी कलाई किसी गैर जवान लड़के के हाथ में पाकर उससे कुछ बोला नहीं जा रहा था वह आंखें फाड़े राजू को ही देख रही थी,,,, और राजू था कि उसकी आंखों की गहराई में उतर कर उसके दोनों टांगों के बीच की जगह पर अपना स्थान बनाना चाहता था,,,,, राजू की आंखों और उसकी हरकत ने अपना असर दिखाना शुरू कर दिया था वह औरत कुछ बोल नहीं पा रही थी बस वह भी एकटक राजू को ही देखे जा रही थी इसलिए राजू मुस्कुराता हुआ उसकी हाथ की कलाई को छोड़ता हुआ बोलो,,,।

मैं उठा देता हूं भाभी तुम चिंता मत करो सिर्फ मुझे बता दो कहां लेकर जाना है,,,,।
(राजू की बात सुनकर उस औरत को समझ में नहीं आ रहा था कि अपने घर पर उसे ले जाना उचित रहेगा या नहीं क्योंकि उसकी हरकतें बता रही थी कि उसका इरादा कुछ ठीक नहीं लग रहा था और वैसे भी वह गांव के आखिरी छोर पर रहती थी दूर-दूर तक कोई नजर नहीं आता था चारों तरफ से खेत ही खेत थे अगर ऐसे में यहां उसके साथ जबरदस्ती करेगा तब वह क्या कर पाएगी,,, फिर भी ना चाहते हुए भी वह बोली)
वो रहा,(उंगली के निर्देश से उसे अपना घर बताते हुए,,, जो कि थोड़ी ही दूरी पर था) वह नीम के पेड़ के नीचे,,,

ठीक है मैं पहुंचा देता हूं,,,,(इतना कहने के साथ ही राजू में लकड़ियों के ढेर का बोजा उठाकर अपने सर पर रख लिया,,, और दूसरे बोजे को एक हाथ से उठा लिया राजू की ताकत को देखकर वह औरत भी हैरान रह गई क्योंकि राजू बड़े आराम से इतने वजनदार लकड़ियों के बोझ को उठाया था ,,,, बोझ को तो उसने उठा लिया था लेकिन उस औरत की नजर ऐसी जगह पड़ी कि उसे देख कर उस औरत के होश उड़ गए,,,, उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,,,,, क्योंकि उस औरत की मदहोश जवानी को देखकर राजू उत्तेजित हो चुका था,,, और उसकी उत्तेजना का तापमान थर्मामीटर बनकर उसका लंड नाप रहा था जो कि इस समय उत्तेजित अवस्था में था और पजामे के आगे वाले भाग में तंबू बनाया हुआ था यह देखकर उस औरत के होश उड़ गए थे उसकी दोनों टांगों के बीच की पत्नी दरार में अपने आप ही हलचल होना शुरू हो गया था,,,, एक खूबसूरत संस्कारी जवानी से भरी हुई औरत भले ही अपने आप को दुनिया की नजरों से बचा कर रखे लेकिन जब उसकी आंखों के सामने इस तरह के दृश्य नजर आ जाते हैं तो वह भी अपने आप को संभाल पाने में असमर्थ महसूस करने लग जाती है और यही उस औरत के साथ भी हो रहा था,,,, राजू की नजर उसकी नजरों पर ना पड़ जाए इसलिए वह तुरंत अपनी नजरों को दूसरी तरफ कर ली थी लेकिन इससे पहले राजू ने उसकी नजरों के निशान को अच्छी तरह से भांप लिया था और मन ही मन खुश हो रहा था,,,,,।

राजू चाहता था कि वह औरत आगे आगे चले ताकि वह उसके बदन की बनावट को पीछे से अपनी नजरों से नाप सके और वैसे भी उसकी अनुभवी आंखों ने आंखों ही आंखों में उस औरत के बदन के बनावट का हर जगह से नाप ले लिया था,,, लेकिन वह चाहता था कि वह औरत आगे आगे चले ताकि वह उसकी मटकती हुई गांड को देख सकें,,, उसकी कसी हुई जवानी को देख सके,,,, इसलिए वह उससे बोला,,,।

भाभी तुम आगे आगे चलो,,,,,
(राजू की बात वह इंकार नहीं कर पाई और वह दो कदम आगे हो गई और चलने लगी राजू यही चाहता ही था उसकी बलखाती कमर और कमर के नीचे की तौर पर वह कामुक गड्ढा जिसको देखकर ही मर्दों का मन मचल उठता था और पीठ के बीचो बीच की गहरी लकीर ,,,,, ऐसा लगता था कि कुदरत ने अपनी कलाकारी से उसकी मदहोश जवानी को अलग-अलग हिस्सों में बांट दिया है ताकि एक साथ देखने पर कहीं मर्दों की सांस ना अटक जाए,,,, ऊंचे नीचे पगडंडी पर औरत आगे-आगे चल रही थी और उसके इस तरह से चलने पर उसकी भारी-भरकम गोल-गोल कहां पानी भरे गुब्बारों की तरह लहर मार रही थी,,,, जिसे देखकर राजू का पजामा और ज्यादा तनता चला जा रहा था,,,,। रह रहे करवा औरत ना चाहते हुए भी पीछे की तरफ देख ले रही थी और पीछे की तरफ देखने पर उसकी ज्यादातर निगाह राजू के पजामे की ओर चली जा रही थी जो कि पहले से कुछ ज्यादा ही बड़ा होता नजर आ रहा था वह अपनी मन में सोचने लगी थी बाप रे पजामे में क्या छुपाया है इस लड़के ने,,,, क्योंकि वह आज तक अपने पति के उत्तेजित अवस्था में भी पैजामा में इस तरह से तंबू नहीं देखी थी,,, इसलिए उसकी स्थिति खराब होती चली जा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह अपने आप पर काबू कैसे कर पाएगी,,,, और राजू था कि कसी हुई साड़ी में उसकी गांड के दोनों फांकों को देखकर उसमें जीभ डाल कर चाटने का उसका मन कर रहा था,,,,,।

देखते ही देखते राजू उसके घर पर पहुंच गया था,,,,

लकड़ियां कहां रखना है,,,।

(वैसे तो वह औरत लकड़ियों के ढेर को घर के पीछे रख दी थी लेकिन आसमान में बादल का जमावट देखकर उसे आशंका थी कि कभी भी बारिश हो जाएगी अगर ऐसे में वहां लकड़िया बाहर रखेगी तो लकड़िया भीग जाने का डर है और फिर खाना बनाने में दिक्कत आ जाएगी इसलिए वह राजू से बोली,,,)

रुक जाओ इसे घर में रखना है,,, बारिश का कोई ठिकाना नहीं है कभी भी आ जाएगी,,,,(और इतना कहने के साथ ही लकड़ियों के पट्टी से बने दरवाजे को वहां खोलकर अंदर आ गई और राजू को भी अंदर आने के लिए बोली,,,, उस औरत का मकान एकदम कच्चा था छत घास फूस के ढेर से बनाया गया था दीवारें मिट्टी से लिपी हुई थी,,,,,, उस औरत का इशारा पाते ही राजू लकड़ियों के ढेर को घर में लेकर जाने लगा और घर के बीचो बीच पहुंचकर वह चारों तरफ नजर घुमा कर देखने लगा घर वैसे तो ठीक-ठाक ही था घर के किनारे पर चारपाई बिछी हुई थी और रस्सी पर बच्चों के भी कपड़े टंगे हुए थे जिसे देखकर समझ में आ रहा था कि इस औरत के बच्चे भी थे,,, इसलिए राजू लकड़ियों का ढेर सर पर लिए हुए ही बोला,,,)

बच्चे कहां हैं नजर नहीं आ रहे हैं,,,

होंगे यहीं कहीं खेल रहे होंगे,,

कितने हैं,,,?

दो बच्चे हैं,,,
(इतना सुनकर राजू अपने मन में सोचने लगा कि 2 बच्चे की मां हो गई है लेकिन जवानी का रस हर जगह से टपक रहा है बिल्कुल भी कोई कमी नहीं आई है,,, अपनी भावनाओं पर तो काबू कर सकने में किसी तरह से कामयाब हो जा रहा था लेकिन अपनी उत्तेजना के थर्मामीटर के पारा को काबू कर पाने में वह बिल्कुल भी समर्थ नहीं था इसलिए तो पैजामा में तंबू पूरी तरह से अपनी औकात में आ चुका था जिस पर उस औरत की नजर पड़ते ही उसकी बुर अपने आप पानी छोड़ रही थी यह कैसे हो रहा है या उसे भी नहीं पता चल रहा था शायद 20 25 दिन हो गए थे वह पति से मिली नहीं थी उसका पति काम के सिलसिले में बाहर गया हुआ था शायद इसीलिए ही पति का सुख ना मिल पाने के कारण ही 1 जवान लड़के के पैजामा में बने तंबू को देखकर वह अंदर ही अंदर उत्तेजित हुए जा रही थी,,,।

अरे भाभी मेरे सर पर से बोझ तो उठाओ मेरा सर दर्द करने लगा है,,,

अरे हां,,, मैं तो भूल ही गई,,,,(और इतना कहने के साथ ही वह औरत लकड़ियों का बोझ उठाने के लिए राजू के करीब पहुंच गई राजू की लंबाई उससे थोड़ा ज्यादा थी इसलिए वह बोझ उठाने के लिए जैसे अपना हाथ ऊपर कि उसे और करीब आना पड़ा और देखते ही देखते वह इतनी करीब आ गई कि उसकी मदमस्त पपैया जैसी तनी हुई चूची राजू की छाती पर घर्षण करने लगी उस औरत की पपाया जैसी चूची का स्पर्श अपनी छातियों पर महसूस करते ही राजू का लंड और ज्यादा कड़क हो गया,,, वह औरत अपने आप को राजू के बदन के स्पर्श से बचाना चाहती थी लेकिन लकड़ियों को उतारने के लिए उसे इतना करीब आना बेहद जरूरी था वरना वह लकड़ियों के ढेर को हाथ का सहारा देकर उतार नहीं सकती थी,,,,,, लेकिन उसे इस बात का एहसास हो गया था कि उसकी चुचियों का स्पर्श उस लड़के की छाती पर होने लगा था और इसीलिए वह कसमसा रही थी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,)


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अरे भाभी थोड़ा हाथ लगाओ मेरा सर और हाथ दोनों दुखने लगा है,,,।
(वह अच्छी तरह से समझ गई थी कि वह बहाना कर रहा है और ज्यादा आगे बढ़ने का वरना वह इतने आराम से बोझ उठाकर लेकर आ गया था क्या बोझ उतार नहीं सकता था लेकिन वह कर भी क्या सकती थी थोड़ा सा हां तभी उसका पहुंचना बाकी था इसलिए वह थोड़ा सा हाथ और ऊपर पहुंचाने के लिए थोड़ा सा और आगे बढ़ी और अपने पैर के पंजों के सहारे ऊपर की तरफ खड़े होने लगी ऐसा करने पर उसे अपनी दोनों टांगों के बीच कड़क चीज चूभती हुई महसूस होने लगी और उसे समझते देर नहीं लगी कि वह कड़क चुभती हुई चीज क्या है वह समझ गई कि उस लड़के का लंड उसकी दोनों टांगों के बीच स्पर्श हो रहा है ,, और पल भर में ही उसकी सांसे तेज होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें अभी तक वह लकड़ियों के ढेरों तक अपने हाथ को पहुंचा नहीं पाई थी और उस जवान लड़की के लंड को अपनी बुर पर महसूस करने लगी थी यह एहसास राजू को सातवें आसमान पर ले जा रहा था वह औरत अपने आप को बचाने की कोशिश करते हुए अपने पैरों को अपने बदन को राजू से दूर करना चाहती थी लेकिन तभी उसका पैर फिसल गया और वह अपनी स्थिति को नियंत्रण में नहीं कर पाई और सीधे राजू के ऊपर गिरी और राजू भी पीछे की तरफ कितने लगा और अगले ही पल राजू नीचे जमीन पर गिरा हुआ था और वह औरत उसके ऊपर गिरी हुई थी और इस तरह गिरने की वजह से उसकी साड़ी पीछे से एकदम उठकर कमर तक आ गई थी उसकी बड़ी बड़ी गांड दम नंगी हो गई थी इस बात का आभास उसे बिल्कुल भी नहीं था उसकी सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी राजू की मजबूत बाहों में वह पूरी तरह से समाई हुई थी राजू ने उसे अच्छे से संभाल लिया था वरना उसे भी चोट लग जाती राजू तो इस पल के लिए बेताब था उसकी आंखों में चमक नजर आ रही थी राजू उस औरत की आंखों में देखने लगा औरत भी राजू की आंखों में डूबती चली जा रही थी अपनी छातियों को राजू की मजबूत छातियों पर रगडती हुई महसूस करके उसके बदन में उत्तेजना का संचार होने लगा था,,,,,,, राजू अपनी छातियों पर उस औरत की बड़ी बड़ी चूचीयो के दबाव को अच्छी तरह से ही महसूस कर रहा था ऐसा लग रहा था कि जैसे रूई को गोल गोल करके उसका गेंद बना कर उसकी छाती पर कोई दबा रहा हो राजू को बहुत मजा आ रहा था,,,, राजू अच्छी तरह से जानता था कि उसके लिए यही अच्छा मौका था उस औरत के बदन से खेलने के लिए उसके बदन में उत्तेजना का बीज रोपने के लिए,,,, इसीलिए वह अपना दोनों हाथ उसकी चिकनी कमर पर रख दिया और फल कैसे उस पर दबाव देता हुआ बोला,,,।

ओहह भाभी क्या करती हो अभी तो तुम्हें चोट लग गई होती तो अच्छा हुआ कि तुम मेरे ऊपर गिरी हो वरना तुम अपनी हड्डीया तोड़वा लेती,,,,(इतना कहने के साथ ही उस औरत की पतली चिकनी कमर को अपने दोनों हाथों में लेकर दबा दिया था इस बात का एहसास कमर पर अनजान जवान हथेली का स्पर्श उस औरत के बदन में गर्मी पैदा कर रहा था वह राजू की बाहों में कसमसा रही थी,,,,,,, उस औरत से कुछ बोला नहीं जा रहा था वह मारे शर्म से घड़ी जा रही थी,,,, उसके गाल पल भर में लाल हो गए थे जिसे देखकर राजू समझ गया था कि यह उत्तेजित हो रही है और इसीलिए उसकी उत्तेजना का फायदा उठाते हुए राजू अपने दोनों हथेली को उसकी कमर से हटाकर,,, उसकी गांड पर रख दिया राजू को ऐसा ही था कि वह साड़ी के ऊपर से उसकी गाल को पकड़ रहा है लेकिन गिरने की वजह से उसकी साड़ी कमर तक उठ गई थी और उसकी गांड एकदम नंगी हो गई थी इसलिए उसकी गांड पर अपनी हथेली का स्पर्श पाते ही और उसकी नंगी चिकनी गांड महसूस करते ही राजू के तन बदन में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से होने लगा ,,,, राजू को पूरी तरह से एहसास हो चुका था कि गिरने की वजह से उसकी साड़ी कमर तक उठ चुकी है और जैसे ही उस औरत ने राजू की हथेली को अपनी नंगी गांड पर महसूस की हुआ है एकदम से सिकुड़ गई शर्म के मारे वह पानी पानी होने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,, वह दोनों तरफ से पीस रही थी ऊपर से वह अपनी हथेली उसकी गांड का रखा हुआ था और नीचे से उसका खड़ा लंड पर जाने के ऊपर से ही सारी सहित उसकी बुर पर दस्तक दे रहा था एक मोटे तगड़े लंड को अपनी बुर पर दस्तक देता महसूस करके,, उस औरत में उत्तेजना परम शिखर पर पहुंचने लगी वह कसमसाने लगी उसे समझ में नहीं आ रहा था कि वह क्या करें,,,,,।

दोनों एक दूसरे की आंखों में देख रहे थे उस औरत की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी थी राजू अपनी दोनों हथेलियों का कमाल दिखाते हुए उसकी बड़ी-बड़ी गांड की दोनों फांकों को अपनी हथेली में लेकर जोर जोर से दबाना शुरू कर दिया,,,,,, उसकी उभरती हुई सांसो को देखकर राजू उसकी गांड को जोर-जोर से दबाता हुआ बोला,,,।

क्या हुआ भाभी,, तुम चिंता मत करो तुम्हें कुछ होने नहीं दूंगा,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू उसकी गांड की फोटो के बीच अपनी पूरी हथेली ले जाकर अपनी उंगली को उसकी गुलाबी बुर पर रखकर दबा दिया,,, अभी तक की राजू की हरकतों की वजह से उस औरत में उत्तेजना का संचार बड़ी तेजी से हो रहा था वह भी एकदम से चुदवा‌सी हुए जा रही थी इसलिए उसकी बुर से मदन रस झड़ रहा था,,,। राजू की उंगली उसकी बुर से जैसे स्पर्श हुई ना चाहते हुए भी उस औरत के मुंह से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी,,,)

सहहहससस ,,,,आहहहहहहह,,,,, यह क्या कर रहे हो,,,

कुछ नहीं भाभी देख रहा हूं कि तुम्हारी बुर बहुत पानी छोड़ रही है,,,,

तुम्हें शर्म नहीं आती इस तरह की बात करते हुए,,,(उस औरत के शब्दों में बिल्कुल भी गुस्सा नहीं था वह बड़े सहज रूप से बोल रही थी राजू समझ गया था कि वह औरत धीरे-धीरे लाइन पर आ चुकी है,,,)

तुम जैसी खूबसूरत औरत के सामने अगर मैं शर्म कर गया तो फिर मेरी मर्दानगी पर धिक्कार है,,, क्योंकि मैं जानता हूं कि तुम्हारा भी मन वही कर रहा है जो कि मेरा मन करने को कर रहा है तभी तो तुम्हारी बुर पानी छोड़ रही है,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपनी बीच वाली उंगली को सीधे उसकी बुर के अंदर प्रवेश करा दिया,,,,)

आरहररह,,,, यह क्या किया,,,

जो तुम चाहती थी भाभी और एक जवान औरत के साथ जो करना था वही किया हूं,,,,,(इतना कहने के साथ ही राजू अपने प्यासे होठों को उसके लाल-लाल होठों पर रखकर चुंबन करना शुरू कर दिया यह उस औरत का पहला चुंबन था जब किसी मर्द ने उसके होंठों पर होठ रखकर चुंबन किया था,,,, एकदम से सिहर उठी उसके बदन में कंपन होने लगा और राजू उसको चुंबन करते हुए उसको अपनी बाहों में भर लिया और पलट कर उसे जमीन पर कर दिया और खुद पर आ गया,,,,, उस औरत के लिए यह पल बिल्कुल भी अपने आप को काबू में करने जैसा नहीं था वह मदहोशी के भावनाओं में बहती चली जा रही थी राजू ने एक औरत पर काबू पाने के सारे हथकंडे उस औरत पर आजमा चुके थे और उसका हथकंडा काम कर रहा था,,, उसकी बुर लगातार पानी छोड़ रही थी,,,,, और वह इस मौके का पूरी तरह से फायदा उठाते हुए उस औरत का ब्लाउज का बटन खोलने लगा जो कि पहले से ही एक टूटा हुआ था ,,,, उसे ब्लाउज का बटन खोलने से वह औरत रोकते हुए बोली,,,।

यह क्या कर रहे हो कोई देख लेगा तो,,,,

कोई नहीं देखेगा वैसे भी तुम गांव के एकदम किनारे रहती हो यहां कोई आने वाला नहीं है,,,

दरवाजा खुला है,,,,।(वह औरत ने एकदम उत्तेजनात्मक स्वर में बोली,,,, जो कि उसकी तरफ से राजू को पूरी तरह से छूट मिलने का प्रमाण मिल चुका था राजू उसकी यह बात सुनकर एकदम से खुश हो गया था वह समझ गया था कि अब वह कुछ भी करेगा यह औरत कुछ भी बोलेगी नहीं बल्कि उसे मजा आ रहा था,,, इसलिए राजू उत्साहित होते हुए बोला,,)

रुक जाओ भाभी में दरवाजा बंद करके आता हूं,,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू उठा और जाकर दरवाजे की कड़ी लगाने लगा,,,, राजू के पास ज्यादा समय नहीं था और वह औरत शर्म से पानी पानी हुए जा रही थी,,,जिंदगी में पहली बार वह किसी गैर मर्द के साथ वह जिस्मानी ताल्लुकात बनाने जा रही थी,,, इसलिए वह राजू से ठीक से नजर भी नहीं मिला पा रही थी वह उसी तरह से पीठ के बल लेटी हुई थी उसकी साड़ी जांघो तक उठी हुई थी,,,। दरवाजे की कड़ी बंद करके राजू तुरंत पलटा और एक झटके में अपना पजामा उतार कर एक तरफ रख दिया,,,, कमर के नीचे राजू पूरी तरह से नंगा हो गया था उसका मोटा तगड़ा लंबा लंड हवा में लहरा रहा था,,,, जिस पर नजर पड़ते ही वह औरत एकदम से सिहर उठी,,,,।

राजू तुरंत उसके पास आया और,,, उसकी दोनों टांगों को फैलाने लगा अभी तक राजू ने उस औरत की बुर नहीं देखा था,,, उसकी दोनों टांगों के बीच घुटनों के बल बैठकर राजू उसकी साड़ी को अपने हाथों से उसकी कमर तक उठाने लगा,,,, लेकिन उसकी साड़ी उसकी भारी-भरकम गांड के नीचे दबी हुई थी,,, यह पल उस औरत के लिए शर्म से गड़ जाने जैसा था क्योंकि वह पहली बार किसी अनजान जवान लड़के के सामने अपनी दोनों टांगे फैला रही थी उसे ठीक से जानती भी नहीं थी वह कौन है कहां से आया है कहां रहता है इस बात का उसे बिल्कुल भी ज्ञान नहीं था लेकिन फिर भी उसकी हरकतों से विवश होकर औरत उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने को तैयार हो गई थी,,,, भारी भरकम गांड के नीचे दबी साड़ी को कमर तक ले जाने के लिए खुद उस औरत ने राजू का साथ देते हुए अपनी गांड को थोड़ा सा ऊपर की तरफ उठा दी,,, राजू उसकी साड़ी को कमर तक उठा दिया और राजू की आंखों के सामने उसकी दोनों टांगों के बीच घुंघराले बालों से गिरी हुई उसकी बुर मुझे आने लगी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आने लगा उसे चाटने का अभी राजू के पास बिल्कुल भी समय नहीं था क्योंकि वह जानता था वह काफी देर से यहां पर है,,,, इसलिए उस औरत की बुर की तारीफ करते हुए उस पर हथेली रखकर जोर से दबाते हुए बोला,,,,।

वाह भाभी तुम्हारे पास कितनी खूबसूरत बुर है,,,, वाह आज तो मजा आ जाएगा और इतना कहने के साथ ही अपनी हथेली हटाकर राजू घुटनों के बल बैठ कर उसकी कमर पकड़कर उसे अपनी तरफ खींच कर उसकी आधी गांड को अपनी जांघों पर चढ़ा लिया,,, राजू की हरकत की वजह से उस औरत की सांसे बड़ी तेजी से चल रही थी वह काफी उत्तेजित हो गई थी देखते ही देखते राजू अपने मोटे लंड को उसकी बुर पर रखकर हल्के से धक्का लगाया,,, बुर पहले से ही पानी पानी हो चुकी थी इसलिए अंदर जाने में बिल्कुल भी तकलीफ नहीं हुई लेकिन उस औरत को इस बात का अहसास हो गया कि राजू का लंड कुछ ज्यादा ही मोटा है,,, और इसीलिए जैसे ही लंड का सुपाड़ा बुर के अंदर प्रवेश किया उस औरत के मुंह से आह निकल गई,,,, और देखते ही देखते राजू अपना पूरा लंड धीरे-धीरे करके उस औरत की बुर में डाल दिया,,,, और उसे चोदने से पहले उसके ब्लाउज के बाकी बटन को खोलते हुए बोला,,,।

हां भाभी दो दो बच्चों की मां हो गई हो लेकिन अभी भी तुम्हारी बुर एकदम कसी हुई है,,,,(राजू के मुंह से अपनी जवानी और अपनी बुर की तारीफ सुनकर वह औरत उत्तेजना और खुशी में एकदम गदगद हो गई क्योंकि इस तरह से उसके पति ने कभी भी उसकी तारीफ नहीं किया था,,,, जैसे ही राजू के हाथों में उसकी नंगी चूचियां आई वह उन्हें जोर जोर से दबाता हुआ अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,,,, थोड़ी ही देर में फच्च फच्च की आवाज से पूरा कमरा गुंजने लगा,,,, उस औरत की गर्म सिसकारी से माहौल पूरी तरह से गर्म आ चुका था उसके चेहरे को देखकर राजू समझ गया था कि उसे बहुत मजा आ रहा है राजू अपना पूरा लंड उसकी बुर की गहराई में डाल कर वापस निकाल कर फिर धक्का लगा रहा था और तगड़े तगड़े धक्के लगा रहा था हर धक्के के साथ उसकी बड़ी-बड़ी चूचियां पानी भरे गुब्बारों की तरह छाती पर लौटने लगती थी जिसे राजू अपने हाथ में पकड़ कर जोर जोर से दबा रहा था,,,,, राजू अपने मन में सोच रहा था कि अगर उसके पास पर्याप्त समय होता तो इस औरत के साथ वह जी भर कर मजा लेता और रात भर इसकी चुदाई करता लेकिन उसके पास समय नहीं था,,,

कैसा लग रहा है भाभी,,,(अपने तेज धकको को जारी रखते हुए राजू बोला लेकिन उसकी बात सुनकर एकदम से शरमा गई और दूसरी तरफ मुंह फेर ली,,,, देखते ही देखते राजू के धक्के बड़े तेज होते जा रहे थे और उसकी सिसकारी भी तेज होती जा रही थी उसका बदन एकदम से अकड़ने लगा और वह कसके राजू को पकड़ ली राजू समझ गया कि उसका पानी निकलने वाला है इसलिए लगातार धक्के पर धक्का पैलने लगा ,,, और जैसे ही उसका पानी निकला राजू ने भी अपना लावा पूरी तरह से उसकी बुर में गिराना शुरू कर दिया और कसके उसे अपनी बाहों में जकड़ लिया था वह इतनी जोर से उसे अपनी बाहों में पकड़ा था कि उस औरत को लगने लगा था कि उसकी हड्डियां चटक जाएंगी लेकिन उसे बहुत मजा आ रहा था राजू तब तक अपने लंड को उसकी बुर से बाहर नहीं निकाला जब तक कि पूरा पानी उसकी बुर में गिर नहीं किया और उसके ऊपर हांफने लगा,,,,,।

राजू के पास समय बहुत कम था वह थोड़ी देर में उसके ऊपर से उठा और अपने पजामे को पहनने लगा,,,,, उस औरत को राजू के साथ संभोग करके पूरी तरह से तृप्ति का एहसास हुआ था इसलिए उसे इस तरह से पैजामा पहनता देखकर ना चाहते हुए भी उसके मुंह से निकल गया,,,,

जा रहे हो,,,

हां मुझे जाना होगा,,,

फिर कब आओगे,,,

जरूर आऊंगा तुम्हारे साथ मुझे बहुत मजा आया है इसलिए आना ही पड़ेगा,,


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,,(इतना कहने के साथ ही वह घर से बाहर निकल गया और मुस्कुराता हुआ गांव की तरफ जाने लगा वह औरत उसी तरह से नीचे जमीन पर लेटी रह गई वह पूरी तरह से तृप्त हो चुकी थी थोड़ी देर में राजू गांव में पहुंच गया तो देखा उसकी मां बैलगाड़ी के पास खड़ी थी और तुरंत भागते हुए उसके पास गया और बोला,,,)

दवा ले ली,,,

हां हां अभी लेकर ही आ रही हूं और तू कहां चला गया था,,

बस ऐसे ही गांव की सैर करने गया था,,,

चल अब जल्दी कर देख बादल घेरता आ रहा है कभी भी बारिश होने लगेगी,,,

हां तुम सच कह रही हो मां हमें जल्दी निकलना पड़ेगा जल्दी से बैठो,,,।

थोड़ी देर में राजू बैलगाड़ी को गांव से बाहर ले कर आ गया वह भी जल्दी पहुंचना चाहता था क्योंकि बारिश कभी भी आ सकती थी,,,,,,,, शाम होने वाली थी और आसमान में बादल अपना रूप बदलते हुए नजर आ रहे थे किसी भी वक्त बारिश आ सकती थी,,,, बादलों को देखकर मधु को घबराहट हो रही थी क्योंकि अभी गांव बहुत दूर था अगर रास्ते में तेज बारिश आ गई तो वह लोग कहां रुकेंगे क्या करेंगे कुछ समझ में नहीं आ रहा था,,,,

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