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Update 32
“नही साहब वो तो कल रात अपने हवेली में ही था …”

मेरा खबरी कह रहा था..

“सच कह रहा है कही निकला नही .”

“नही साहब कल तो कुछ लोगो के साथ ही था,कोई बाहर से आये थे “

“और उसकी गाड़ी लेकर कौन गया था ..”

“कौन सी कई गाड़िया है उसके पास तो …”

“वो सफेद रंग की मर्सडीज नंबर ****** “

“वो कल रात को यंहा नही थी,शायद ड्राइवर उसे लेके किसी काम से ले गया हो …”

“ड्राइवर से पता करके बता की किस काम से गया था और कहा गया था ..”

“ओके साहब ..”

मैं सोच में पड़ गया था की अगर अब्दुल अपने हवेली में मीटिंग में था और वही रहा तो रात में मोना के साथ गोदाम में कौन था …गाड़ी तो अब्दुल की ही थी ,शायद ड्राइवर ही कुछ बता पाए …

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मैं ट्रक की लोकेशन देख रहा था वो गोदाम से निकल कर फिर एक सुनसान जगह पर जा रुका था,वो असल में अब्दुल का फॉर्महाउस था ,वँहा से वो ट्रक फिर से गोदाम चला गया ,माल को इकठ्ठा करके फॉर्महाउस में ट्रांसफर कर दिया गया था ,अब क्लाइंट के आने का इंतजार था ,…मुझे फॉर्महाउस के लिए निकलना था ताकि मैं उस जगह को अच्छे से समझ कर अपना प्लान बना सकू क्योकि मुझे उम्मीद थी की सब खेल वही होगा,वो शहर से लगभग 20 किलो मीटर बाहर था और वँहा से समुद्र की दूरी कुछ 50 किलोमीटर की ही थी ,माल वही से देश के बाहर जाना था ,और जंहा तक मुझे आभस था की क्लाइंट को भी वही से आना था ,…लेकिन कुछ कहा नही जा सकता था …क्योकि इसके बारे में किसी खबरी को कोई पुख्ता जानकारी अभी तक नही थी …

मैं निकलने ही वाला था की मेरा फोन घनघनाया …

“हल्लो “

“हा साहब वो ड्राइवर कल किसी काम से गोदाम गया था अब्दुल को लेके लेकिन फिर वो नया इंस्पेक्टर आ पहुचा वँहा ,अब्दुल की रांड ने उसे कहा की वो वँहा से निकल जाए तो वो दूसरी गाड़ी लेके निकल गया ,और वो लड़की इंस्पेक्टर के साथ वही रुक गई,फिर उन दोनो को ही ड्राइवर घुमाने ले गया था फिर जाकर गोदाम में ही छोड़ा और फिर उस लड़की को उसके घर छोड़ कर वापस हवेली में आ गया …”

“अब्दुल की रांड…?”

“हा वो एक औरत है आजकल अब्दुल के साथ ही दिख जाती है ,मुझे लगा की वो अब्दुल की कोई माल होगी ,ऐसे ड्राइवर ने बताया की उसने इंस्पेक्टर को अच्छे से सेट कर लिया शायद पुरानी जानपहचान थी दोनो में,वो तलाशी लेने आया था लेकिन कुछ ही नही किया,वो बाहर गए और दारू पीकर वापस आये ,ड्राइवर बता रहा था की वापस आते वक्त इंस्पेक्टर ने लड़की को बुरी तरह से मसला हा हा हा ..”

वो एक घिनोनि सी हँसी में हंसा ..

“हा चल ठीक है ,तू अब्दुल पर नजर रख लड़की कोई भी हो हमे उससे कोई मतलब नही है …अभी वो कहा है..”

“साहब वो शायद फॉर्महाउस को ही निकला है ,अपनी उसी आइटम के साथ …”

“ओके..”

मैंने घड़ी देखी दिन के 2 बजे थे इसवक्त तो मोना को अपने ऑफिस में होना चाहिए था लेकिन वो अब्दुल के साथ ही ,दोनो का याराना कुछ ज्यादा ही बढ़ गया था…

और कल वो अब्दुल नही बल्कि विक्रम के साथ थी ….मतलब अब्दुल उसे अपने हथियार की तरह भी यूज़ कर रहा था…

मैंने एक गहरी सांस ली क्योकि मेरे लिए ये जरूरी था …मैं तुरंत ही तैयार होकर फॉर्महाउस की तरफ निकल कर भागा ….

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कई एकड़ में फैला हुआ वो फार्महाउस बेहद ही सुनसान लग रहा था,लेकिन बाहर से ही अंदर की सच्चाई का मुझे अभी तक तो पता भी था मैंने हमेशा की तरह पहले अपने बाइक को ठिकाने लगाया और फिर दीवाल खुदकर अंदर पहुच गया था …

जैसा की मुझे लगा था की बाहर से सुनसान दिखाने वाली ये जगह अंदर से कुछ और ही होगी ,बिल्कुल वही हो रहा था ,वँहा कई लोग उपस्थित थे,कुछ गार्ड बाहर दिख गए जो बेहद ही चौकन्ने दिख रहे थे ,वही कुछ कार भी खड़ी थी ,चारो ओर बड़े बड़े पेड़ थे और बीचों बीच में एक बड़ा सा भवन बना हुआ था ,दो मंजिल के इस घर में मुझे सेंध मारनी थी,मैं ऐसे कई काम पहले भी कर चुका था इसलिए उतना डर मेरे अंदर नही था ,मैं जानता था की ऐसी जगहों में बाहर ही गार्ड्स ज्यादा होते है लेकिन अंदर मुझे कोई भी नही मिलने वाला क्योकि ऐसी जगह अधिकतर लोगो के ऐयासी की अड्डे होते है ,मैं धीरे धीरे बस जगह पहुच गया जंहा से मुझे अंदर जाना था,वो भवन के पीछे का हिस्सा था,अपने दूरबीन से पहले तो अच्छे से नुमाइना किया फिर एक ड्रोन की सहायता से पूरा जायजा भी ले लिया,ऊपर वाली खिड़की खुली थी वही एक खिड़की जो की नीचे थी वँहा से कुछ लोग बैठे हुए दिख रहे थे,ऐसे दो गार्ड भी थे लेकिन वो एक इंटरवेल में ही वँहा आते और सब ठीक देखकर जाते थे मैं वो इंटरवेल भी नोट कर चुका था अब मुझे उसी इंटरवेल में अंदर दाखिल होना था ,मेरे लिए ये छोटी बात थी…

मैं अंदर पहुच गया और जो काम करने आया था वो करने लगा,मुझे छोटे छोटे माइक्रोफोन सारे घर में लगाने थे,जंहा तक मैं लगा सकू,क्योकि मैं वँहा कैमरा नही लगा सकता था ,इस बार ऐसे माइक्रोफोन लगाए थे जो किसी डिवाइस के पकड़ में ना आ सके क्योकि मोना ने मुझे पहले ही सबक दे दिया था ,मैं सचेत हो चुका था…मैं एक कमरे को छोड़कर सभी में कोई ना कोई माइक्रोफोन लगाने में सफल रहा एक वही कमरा बच गया था जिसमे कुछ लोग बैठे थे,मैं ऊपर गया और नीचे उस कमरे को ध्यान से देखने लगा,पूरे घर में कोई नही था कुछ लोग बस एक ही कमरे में थे शायद कोई बड़ी मीटिंग हो रही हो …

मुझे मोना की याद आयी और मैने उसे फोन लगा दिया,रिंग बहुत देर तक बजा लेकिन वो नही उठाई मैंने दुबारा लगाया इस बार वो कमरा खुला और मोना बाहर हाल में पहुची मैं ऊपर से उसे देख पा रहा था वो मेरे सामने ही थी लेकिन नीचे थी,कमरा खुला तो मैंने देखा वो एक बड़ा कमरा है जो की शायद किसमीटिंग के लिए ही बनाया गया हो ..

“हल्लो “

“कहा है मेरी जान ..”

वो हल्के से हँसी ,मैं देख सकता था वो अब भी इठला रही थी,एक पीले रंग की साड़ी में वो मेरे सामने खड़ी थी जिसे पहन कर वो घर से निकली थी …

“क्या हुआ जान आज दोपहर में ही काल कर लिया..”

“बस सोच रहा था की तुम कहा होगी ..”

“कहा होंगी वही ऑफिस में हु और आप ..??”

“मैं बाहर जा रहा हु शाम तक आऊंगा ,मंन्त्री जी ने रोहित और डॉली के शादी के काम की जिम्मेदारी मुझे ही सौप दी है …”

वो थोड़ी अपसेट हो गई ..

“बस अब आपका यही काम बच गया है की अब उनकी शादी में काम भी करोगे ..”मैं हँस पड़ा ऐसे ये गलत तो नही था की मंन्त्री जी ने मुझे ये कहा था,उन्होंने कहा जरूर था लेकिन मैं वो सब काम दुसरो को सौप कर इस केस में भिड़ा हुआ था..

“अरे जान तुम नाराज क्यो हो रही हो …ऐसे तुम्हारे लिए एक सरप्राइज है मेरे पास ..”

“क्या ..??”

“आओगी तो बताऊंगा ऐसे आज तो जल्दी आओगी ना ..”

उसने एक नजर उस कमरे की ओर देखा ..

“हा पुराने समय में ऑफिस से छूट कर ..”

“ओह तो आज अपने आशिक अब्दुल के पास नही जा रही हो “

वो फिर से हँसी

“क्यो चले जाऊ क्या कल तो बहुत मजे किये आपने भी “

तभी कमरे का गेट फिर से खुला अब्दुल बाहर आ चुका था ,मोना ने उसे उंगली में हाथ रखकर इशारा किया की वो चुप ही रहे ..लेकिन वो चहरे में शरारत लिए उसके पास आया और पीछे से उसके गले से लग गया,उस लंबा चौड़ा आदमी के अंदर मोना जैसे गायब ही हो गई थी ,मोना ने उसे हाथो से मारा लेकिन वो हटा नही ..

“ऊमह छोड़ो ना अभी का फोन है सुन लेगा तो ..”

मोना ने फोन को थोड़ा दूर किया लेकिन उसे नही पता था की मैं ऊपर से भी उसकी बात सुन सकता था ..

“तो क्या कल जैसे आज भी मजे लेगा सोच सोचकर ..”अब्दुल की बात से जैसे मेरे सीने में एक तेज दर्द हुआ,मतलब साफ था की अब्दुल को भी पता था की मैं हमारे रिलेशनशिप को लेकर क्या फेंटेसी लिए हुआ हु …

मोना हँसी और उसने जोरो से अब्दुल को धक्का दिया और फिर से फोन अपने कानो से लगा ली ..

“आज कही नही जा रही, आ जाऊंगी शाम तक चलो रखती हु काम पर जाना है …”

मोना ने तुरंत ही फोन काट दिया क्योकि अब्दुल उसे फिर से पकड़ चुका था ..

“तुम ना मरवाओगे मुझे एक दिन ..”

“अरे जब वो भी यही चाहता है तो फिर ..”

“चाहता तो क्या उसके सामने ही करे …भड़क गया ना तो तुम्हारा कुछ भी नही छोड़ेगा जानते हो ना उसका गुस्सा ,”

अब्दुल थोड़ा चिंतित हुआ ..

“लेकिन फिर हमारा क्या होगा..”

“जो अभी है हम वैसे ही रहेंगे,उसे हल्के हल्के से पता चलने दो उसे भी मजा आएगा और हमे भी ,ऐसे भी मैं उससे बहुत प्यार करती हु ..”

मोना हंसते हुए उसके बांहो में सिमट गई …

मेरी बीवी मेरे सामने थी वो कह रही थी की वो मुझसे प्यार करती है लेकिन थी वो किसी दूसरे की बांहो में …

दोनो के होठ मिल गए और मैं गुस्से से भरने लगा,मैं कुछ भी ऐसा नही करना चाहता था की ताकि मुझे और मेरे प्लान को कोई प्रॉब्लम हो जाए ..मैं चुप चाप ही वँहा से निकलने की सोची लेकिन एक चीज मुझे अभी भी करनी थी वो था एक पावरफुल माइक्रोफोन उस कमरे में पहुचना ,मेरे दिमाग में एक आईडिया आया की इंतजार ही इसका एक रास्ता है ,और मैं वापस ऊपर के कमरे में चला गया…मैं बहुत देर तक वेट करता रहा ,लगभग शाम 5 बज चुके थे जब उनकी मीटिंग खत्म हुई सभी लोग जा चुके थे,मोना ने भी मुझे फोन कर बता दिया था की वो घर पहुच रही है …

मैं उस कमरे में दाखिल हुआ अपना काम कर 7 बजे तक घर पहुचा …

“अरे मेरी जान कितने थके हुए लग रहे हो ..”

“हा यार इतना काम तो मैं अपने शादी में नही किया ..”

मैं हंसते हुए उसके होठो को अपने होठो में ले लिया …

“कुछ सरप्राइज देने वाले थे..”

“हा मंन्त्री जी ने मुझे एक ईमान दिया है ..”

मोना की आंखे खुली की खुली रह गई..

“क्या ..??”

मैंने एक इन्वलोप उसके सामने रख दिया ..

“ये क्या है ..??”

“खोल कर देखो ..”

उसने उसे खोला और फिर कभी उसे तो कभी मुझे देखने लगी ..

“क्या हुआ तुम्हे पसंद नही आया ..”

“वाओ जान “वो खड़ी हुई और फिर से मुझसे लिपट गई

“लेकिन ये तो उसी रात की फ्लाइट है जिस रात रोहित और डॉली की शादी होगी ..??”

“हा समझ लो की हमे पहले जाना होगा “

“कितने कमीने है साले हम जाकर उनके स्वागत के लिए वँहा खड़े रहे फिर वो आएंगे “

“देखो यार उनकी शादी कोई बड़े समारोह में तो होनी नही है दूसरे दिन ही उन दोनो की फ्लाइट है स्विटीजरलैंड की तो एक दिन पहले हम चले जायेगे तो क्या हो जाएगा ..ऐसे भी मंन्त्री जी चाहते है हम दोनो भी अपना सेकंड हनीमून मना आये तो बुराई क्या है …मैं तो कभी अपने इतने कम पेमेंट में तुम्हे नही घुमा पाऊंगा ..”

वो बड़ी इमोशनल होकर मुझे देखने लगी और फिर हमारे होठ फिर से मिल गए ….

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