उसके बाद से लेकर और आज तक रश्मि ने फिर कभी अपनी चूत में लंड नहीं लिया था. वो केवल अपने बॉयफ्रेंड के लंड की चुसाई करके ही उसको खुश करती आ रही थी.
रमेश ने रश्मि की चूत में धक्के लगाने शुरू कर दिये थे. वो उस पर रहम नहीं कर रहा था और रश्मि के मुंह से दर्द भरी चीखें निकल रही थीं- आह्ह आईई … अंकल … नो … प्लीज … स्टॉप … आईई मां … आह्ह निकाल लो प्लीज।
मगर रमेश उसकी नहीं सुन रहा था और लगातार उसकी चूत में धक्के लगाये जा रहा था. चुदाई ऐसे ही 10 मिनट तक चलती रही और इन दस मिनटों में रश्मि की चूत को रमेश के लंड ने खोल कर रख दिया.
अब जो धक्के उसकी चूत में लग रहे थे उनमें अब दर्द की जगह कामुक सिसकारियां उतर आई थीं- आह्ह अंकल … य्सस … हम्म … वाहह … ओह्ह … अंकल … आह्ह अंकल … गुड … आह्ह … फास्ट।
रमेश ऐसे ही चोदता रहा और फिर उसने अपना लंड उसकी चूत से निकाल कर उसके मुंह के सामने कर दिया. रश्मि ने उठ कर उसके लंड को अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी.
कुछ देर लौड़ा चुसवाने के बाद रमेश उठा और उसने रश्मि को लिटा कर उसके दोनों पैरों को हवा में उठा कर उसके सर के उपर मोड़ दिया. इससे रश्मि की गांड अपने आप ही हवा में उठ गयी.
अब रमेश रश्मि की गांड के छेद को उंगली से फैलाते हुए चाटने लगा।
वो सिसकारते हुए बोली- उफ्फ … यह क्या कर रहे हो? रतनलाल ने कहा था कि आप गांड नहीं मारोगे?
रमेश- चुप कर साली रंडी … पूरे पचास हज़ार दिए हैं मैंने तुझे. तेरी गांड नहीं लूँगा तो क्या तेरी माँ की गांड मारूंगा बहन की लौड़ी?
रश्मि रमेश की डांट से थोड़ा सहम गई और उसने टांगें खोल दीं और दर्द सहने के लिए खुद को तैयार करने लगी।
मस्त कुँवारी गांड देख रमेश का लंड फड़फड़ा उठा. करीब 9 इंच का लोहे के सरिया के जैसा था.
रश्मि- अंकल … यह तो बहुत बड़ा और मोटा है. ये मेरी गांड में नहीं जा पाएगा.
रमेश- रश्मि तू फिक्र मत कर. मैं आराम से करूँगा. तुझे कुछ नहीं होने दूँगा।
उसने अपना लंड रश्मि की छोटी सी गांड की तरफ बढ़ाया लेकिन पहली बार में जरा सा भी अंदर नहीं जा पाया.
तभी रमेश बोला- रश्मि … थोड़ा चूसकर और गिला कर न इसे?
रश्मि ने अपने हाथों से रमेश के लंड को मुँह में लिया और उसके आंड सहलाने लगी।
रमेश- आह्ह्ह ,.. साली दिल कर रहा है कि तुझे पट्टा डालकर अपने पास ही पालतू कुतिया बनाकर रखूँ. आह्ह्ह … सेक्स की गुड़िया है रे तू … मेरी रानी।
उसके बाद रमेश ने रश्मि को आराम से बेड पर लिटा दिया। रश्मि सोच रही थी कि जो हालत पिछली बार चूत की हुई थी, फिर से वही हालत अब मेरी गांड की होने वाली है। रश्मि अपने बाप की उम्र के अंकल से गांड मरवाने जा रही थी।
रमेश के लंड के टच करते ही रश्मि की गांड में सिरहन होने लगी। रश्मि बुरी तरह तड़प रही थी। रमेश दो मिनट तक रश्मि की गांड को अपने लंड से सहलाता रहा. फिर उसने रश्मि की गांड पर थूक लगा कर हल्का सा ज़ोर लगाया.
रश्मि- आहह्ह्ह … मम्मी … उफ्फ्फ … अंकल … प्लीज़ … धीरे धीरे!
उसकी चीख निकल गई.
रमेश का लंड अन्दर नहीं जा रहा था। उसने कहा- शुरू में थोड़ा दर्द होगा लेकिन फिर ठीक हो जाएगा।
रश्मि- ओके. लेकिन अंकल प्लीज़ आराम से करना।
रमेश ने ज़ोर से अन्दर डाला तो उसका आधा लंड रश्मि के अन्दर जैसे कुछ चीरते हुए अन्दर घुसता चला गया.
रश्मि की आँखों में आँसू आ गए- आह … मैं मर जाऊँगी अंकल … प्लीज़ निकालो … बहुत दर्द हो रहा है … उम्म्ह … अहह… हह … याह … ओफ्फ.. मम्माआ.. आहह … मम्मी … आइई.. सीईईई।
दर्द में कराहते हुए रश्मि गिड़गिड़ाने लगी मगर रमेश नहीं माना. उसने रश्मि के मम्मों पर अपने होंठ लगा दिये और धक्के मारने लग गया. रश्मि छटपटाते हुए रोने लगी.
वो दर्द में कराहते हुए बोल रही थी- आआआ अंकल … बहुत मोटा है आपका लं. लंड.. आआ … ओह्ह … मेरी तो गां.. गांड फट ही जायेगी … आईई मां … फट गयी … ऊह्हह आह्ह … ईईस्सस … स्सस।
रमेश रगड़ रगड़ कर रश्मि की गांड मारता रहा. रश्मि उसका लंड अपनी गांड में लेते हुए चिल्लाती रही. कुछ देर की गांड चुदाई के बाद रश्मि को भी अच्छा लगने लगा.
अब रश्मि भी मस्ती में आकर अपनी गांड को उठा उठा कर चुदवाना शुरू कर चुकी थी. रमेश को भी अब उसका साथ मिलने के बाद उसकी गांड चुदाई करने में और ज्यादा मजा आ रहा था.
कुछ देर तक उसकी गांड को चोदने के बाद रमेश ने अपने लंड को बाहर निकाल लिया. उसने लंड को निकाल कर रश्मि के मुंह में ठूंस दिया. रश्मि ने आनंद लेते हुए उसके लंड को चूसना शुरू कर दिया.
उसके बाद रमेश सीधा होकर बेड पर लेट गया और रश्मि ने उठ कर अपनी गांड का छेद रमेश के तने हुए लौड़े के टोपे पर अच्छी तरह से रख कर सेट कर लिया.
धीरे धीरे वो अपना भार उसके लंड पर बढ़ाने लगी और सरक सरक कर रमेश का लंड रश्मि की गांड को चौड़ी फाड़ता हुआ अंदर घुसने लगा. रश्मि ने बैठते हुए पूरा लंड अपनी गांड में समा लिया.

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