रमेश ने रश्मि का हाथ अपने लंड पर रखवा दिया और उसकी चूचियों को भींचने लगा.
वो सिहर उठी- आह्ह … आराम से अंकल … दर्द हो रहा है. आपका ये भी बहुत बड़ा है.
वो उसकी चूचियों के निप्पलों को खींचते हुए बोला- क्या बड़ा है मेरा?
रश्मि- आपका ये हथियार काफी बड़ा है.
रमेश- इसको नाम लेकर बुलाओ ना एक बार!
रश्मि ने शरमाते हुए कहा- आपका ये … ये लंड बहुत बडा़ है अंकल।
रमेश- हां बेशक … जब ये तुम्हारी चूत में जायेगा तो ये तुम्हें परम सुख देगा. मगर उससे पहले तुम्हें इसको अपनी चूत चुदाई के लिए उकसाना होगा. आओ मैं तुम्हें इसको उकसाने का तरीका बताता हूं.
अपने कदम बढ़ा कर रमेश बेड के एक छोर पर बैठ गया और उसने अपनी जांघें फैला लीं.
बेड पर बैठ कर रमेश ने कहा- आओ रश्मि, तुम्हारा परिचय अपने लंड से करवाता हूं. तुम्हें लंड को चूसना सिखाता हूं. एक बार तू सीख गयी तो तेरे ग्राहक तेरे आगे पीछे घूमा करेंगे. हमेशा तुझसे खुश रहेंगे. लड़की के मुंह का कमाल मर्द को बहुत पसंद आता है.
रमेश के कहने पर रश्मि शरमाती हुए उसके सामने अपने घुटनों पर बैठने लगी।
रमेश- पैंटी उतार कर बैठ बेटी!
न जाने रमेश के मुंह से कैसे ये ‘बेटी’ शब्द निकल गया. शायद अपने दोस्त रवि की बेटी में उसको अपनी बेटी रिया ही नजर आ रही थी.
मगर उसने तुरंत बात को बदलते हुए कहा- मेरा मतलब है पैंटी उतार कर बैठो रश्मि।
बात पलट कर रमेश ने खुद उसकी पैंटी को नीचे खिसका दिया और बोला- हां अब बैठ जा और जैसा मैं कहूं करना। शुरुआत में थोड़ा गंदा लगेगा मगर तू सही ढंग से कोशिश करेगी तो कामयाब हो जाएगी.
रमेश की बात सुन कर वो वापस अपने घुटनों पर बैठ गयी. अपने सिर को नीचे झुकाते हुए उसने लंड की एक्सट्रा लेंग्थ पर गौर किया. जिसे देख कर रश्मि के मन में एक ही बात आई- अद्भुत!
रश्मि- अंकल पहले क्या करूं?
उसने अपने होंठ लंड के सुपारे पर टिकाते हुए पूछा।
रमेश- पहली बात तो ये कि तू मुझे अंकल बोलना छोड़ दे. और इस तपते हुए लौड़े को मुंह खोल कर अपने मुंह में भर ले. स्सस … इतनी देर से अपने होंठ मेरे लंड के टोपे पर छुआ कर बैठी है, जान निकालेगी क्या? फटाफट चूस इसे.
बार-बार अंकल शब्द सुन कर रमेश खीजने लगा था. उसे रश्मि के बचपने पर भी गुस्सा आया कि साली यहां पर रंडी बन कर चुदने आई है और इसे लंड चूसना भी नहीं आता. या तो ये लड़की बहुत ही शातिर है या फिर मुझे ही चूतिया बना रही है.
अपनी जीभ बाहर निकाल कर रश्मि लंड के टोपे पर गोल-गोल घुमाने लगी. वैसे थी तो वो भी चालू लेकिन रमेश की बातों में खो कर उसे बचपना सूझ रहा था।
कुछ देर टोपे पर अपनी जीभ का खुरदरा अहसास दे कर वो लंड की टिप से चाटती हुई टट्टों की तरफ बढ़ने लगी. एकदम स्लो मोशन से उसने रमेश की गांड का छेद सिकुड़वा दिया. टट्टों पर उगे बालों को दाँत में भींच कर उसने टट्टों में गुदगुदी पैदा की और बारी बारी दोनों बॉल्स को मुंह में भर कर चूसना शुरू कर दिया.
रमेश सिसकार उठा- आह्हह … साली रांड … तू तो सब जानती है, मेरे सामने नाटक कर रही थी? नौटंकी कहीं की! आह्ह .. चुसाई की असली शुरूआत तो जड़ से ही शुरू होती है.
रमेश की बात का मतलब साफ था कि रश्मि लंड चूसने में एक्सपर्ट थी.
सूजे सुपारे को होंठों में जकड़ कर रश्मि ने तेज़ी से उसे चूसना चालू कर दिया. लंड की जड़ उसके हाथ में थी जिसे ऊपर नीचे हिला-हिला कर वो सुपाडे़ की खाल को बंद-खोल रही थी.
रमेश को देख कर वो मुस्कराती हुई अपने घुटनों पर बैठी हुई उसके लंड को अपने हाथ में लेकर हिलाने लगी और फिर एकदम से पूरा का पूरा लंड मुंह में भर कर चूसने लगी- आउमम … म्म … हम्म … उम्म मच … पुच … आह्ह … म्मम … आ … करते हुए वो मस्ती में उसके लौड़े को चूसने लगी.
मस्ती में आकर वो उसके लंड पूरा मुंह में भर रही थी. उसका लंड अब बेहद टाइट होकर एकदम से रॉड बन गया था. फिर रमेश ने रश्मि को अपनी गोद में उठा लिया. फिर उसे ले जाकर बेड पर पटक दिया.
फिर रमेश ने उसकी दोनों टाँगों के बीच में बैठ कर अपने लंड को रश्मि की चूत पर लगा दिया और धीरे-धीरे दबाव देने लगा. रश्मि के चेहरे पर मादकता बिखर रही थी. लंड की छुअन चूत पर पाकर वो अपना सब कुछ रमेश को सौंप देने के लिए उतारू हो रही थी.
रमेश ने उसके चेहरे को देखा और एकदम से धक्का लगाते हुए लंड को झटके के साथ उसकी चूत में घुसा दिया. ऐसे प्रहार से रश्मि का सारा मजा खराब हो गया क्योंकि इतना मोटा और लम्बा लंड चूत में देने के लिए एक टेकनीक की जरूरत होती है.
रश्मि की चूत दर्द से बिलबिला उठी जिसके भाव रश्मि के चेहरे पर साफ साफ दिख रहे थे. रश्मि की आंखों में पानी आ गया और वो रोने लगी. माना कि वो एक बार अपने बॉयफ्रेंड के साथ सेक्स कर चुकी थी मगर उसकी चूत की झिल्ली फटते ही उसने लौड़े को बाहर निकलवा दिया था.

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