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धड़कनें बढ़ते ही उसने ने अपनी आँखें बंद कर लीं और अगले ही पल रमेश ने अपने होंठों से उसकी गर्दन के सेंटर पर एक गहरा चुम्मा जड़ दिया. रश्मि का रोम रोम सिहर गया. हालांकि रमेश के मुंह से आती शराब की गंध उसको अच्छी नहीं लग रही थी.

रमेश- ठीक है, कॉलेज के बारे में नहीं पूछ रहा. मगर आँखें तो खोल लो.
रमेश का कहा मानकर रश्मि ने अपनी आँखें खोलीं लेकिन इस बार उसकी नज़रें रमेश के टॉवल में बने तंबू से चिपक कर रह गयीं. उसका मुंह ऐसे खुला रह गया जैसे लंड चूसने के लिए खोला हुआ हो.

रमेश- ज़्यादा परेशान नहीं करेगा ये तुम्हें, चाहो तो छू कर देख सकती हो.
रमेश उसके मुलायम हाथ को पकड़ कर लंड पर रखने लगा. रश्मि ने थोड़ा ज़ोर लगाया ताकि अपना हाथ छुड़ा सके लेकिन अगले ही पल उसे याद आ गया कि वो यहाँ रमेश की रात रंगीन करने आई है ना कि कोई विरोध करने।

हाथ का स्पर्श अध-खड़े लंड पर महसूस कर दोनों की हालत पतली हो गयी. जहाँ रमेश उसके कोमल हुस्न को देख कर पागल हुआ जा रहा था वहीं रश्मि लंड की लंबाई और चौड़ाई का अहसास कर पानी-पानी होने लगी थी।

रमेश- अपने कपड़े उतारो।
उसने जैसे फ़ैसला सुनाकर कहा.

रश्मि ने हां में अपनी गर्दन हिलाई और रमेश का हाथ उसके टॉप के निचले छोर को पकड़ कर ऊपर उठाने लगा. रश्मि ने खुद-ब-खुद अपने दोनों हाथ हवा में ऊपर उठा लिए और टॉप उसके बदन से अलग हो गया.

ब्रा में जकड़ी बड़ी-बड़ी कड़क चूचियों को देखकर रमेश के लंड ने ठुमकी मारी और वो अपने दोनों हाथ बूब्स के साइड में रखते हुए पूरी क्लीवेज को अपनी जीभ से चाटने लगा.
रश्मि- उफ्फ… अम्म … आह्ह अंकल।
उसने एक ज़ोरदार अंगड़ाई ली और रमेश की बांहों से चिपक गयी.

रमेश- शर्म आ रही है मेरी जान? रमेश उसके चेहरे की तरफ झुकते हुए बोला.
एक बार फिर शराब की बदबू से रश्मि की रूह काँप गयी. बिना आवाज़ के उसने हां में जवाब दिया और अपने बूब्स पर हाथ रख कर उन्हें छुपाने लगी.

रमेश- ऐसे शरमाने से क्या फ़ायदा? आज की रात मैं तुम्हें प्यार करूँगा, तुम मुझे करना … ये समझ लो कि हम दोनों एक रात के पति पत्नी हैं.
फिर रमेश ने कहा- जीन्स भी उतार दो। रहने दो, रुको मैं ही उतार देता हूं.

इससे पहले रश्मि कुछ और कह पाती तब तक रमेश अपने घुटनों पर बैठ चुका था. बिना बेल्ट की शॉर्ट ज़िप जीन्स के फ्रंट पार्ट से चूत के उभार का अनुमान लगाकर रमेश के मुंह में पानी आ गया.

बिना देर किए उसने बटन अनलॉक किया और सर ऊपर उठा कर रश्मि के रिएक्शन को नोट करने लगा।
रश्मि- अंकल मत देखिए मुझे ऐसे. मैं पिघल रही हूं.

इसके आगे रश्मि कुछ नहीं बोल पाई और जीन्स को कमर से पकड़ कर रमेश ने उसकी जाँघ तक खींच दी.

रमेश- शरमाओ मत, एंजाय करो।
उसने अपना चेहरा पैंटी की तरफ बढ़ाया और चूत से निकले द्रव्य की मादक सुगंध लेने लगा. कई बार रमेश के मुंह से साँस अंदर-बाहर होने से रश्मि को उस हिस्से पर गर्म और ठंडा मिश्रित अहसास हो रहा था।

अब रमेश से रहा नहीं गया और उसने जीन्स को पूरी तरह उसकी टाँगों से नीचे उतार दिया. रश्मि ने अपने हाथ से उसके कंधों पर वजन डाला और बारी बारी से टाँग उठा कर जीन्स अपने पैरों से अलग कर दी।

रमेश- मैं तुम्हारी चूत देखना चाहता हूँ. फिर साथ में ड्रिंक लेंगे.
इतना कहकर रमेश ने उसकी टाँगों को छुड़ाया और पैंटी की साइड छोर सरका कर चूत का मुआईना करने लगा.

चिपचिपी फूली हुई, हल्के रोयें से भरी चूत देख कर उसे अपनी बेटी रिया की याद आ गयी. तुरंत ही रमेश ने उंगली से चूत की फांकों को कुरेदना शुरू कर दिया. लंबाई उसे लगभग 3 इंच के बराबर जान पड़ी. जैसे ही रमेश ने अपनी मिडिल फिंगर अंदर डालनी चाही तो रश्मि ने टाँगों की जड़ को चिपका लिया और थोड़ा पीछे हट कर खड़ी हो गयी।

रमेश- क्या हुआ रश्मि?
रश्मि- अंकल सॉरी.

उसके चेहरे पर ग्लानि के भाव देख कर रमेश मुस्करा दिया- तुम कुँवारी नहीं हो. मेरी नज़र से कुछ नहीं बचता और शायद यही तुम्हारी परेशानी का कारण भी है. सही कहा ना मैंने?

फिर रमेश ने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपने पास खींचा और अगले ही पल किसी फूल की तरह अपनी गोद में उठा लिया। उमर ज़्यादा होने पर भी रमेश की मर्दाना ताकत से इंप्रेस होकर रश्मि ने अपना झूठ स्वीकार करने का फ़ैसला कर लिया।

वो बोली- जी अंकल, आपने सही पहचाना है, मैं वर्जिन नहीं हूं. लेकिन मैंने केवल एक बार ही किया हुआ है. मैं खून देख कर घबरा गयी थी और उसके बाद कभी मेरी हिम्मत नहीं हुई.

रश्मि के मुंह से सच सुन कर रमेश हँसने लगा और बोला- तो झूठ बोलने की कोई वजह?
रमेश ने उसे गोद से नीचे उतार कर कहा।

रश्मि- पैसे ज़्यादा मिल रहे थे, इसलिए बोल दिया था.
रश्मि के मुंह से ये स्वर बहुत ही धीमी आवाज में निकले.
रमेश- तो फिर अभी कितने दिये हैं उसने? रमेश ने उसका गंभीर चेहरा देख कर पूछा.
वो बोली- पचास हज़ार.

रमेश ने अपना हाथ रश्मि के सर पर ले जाकर रश्मि के बालों की पिन निकाल दी जिससे उसके लंबे बाल खुल कर पूरी पीठ पर फैल गये।
फिर रमेश ने मादक से स्वर में पूछा- लंड चूसना आता है? ये पूछते हुए रमेश अपने टॉवल के ऊपर से ही अपने तने हुए लंड को सहला रहा था.

चुदाई से पहले लंड चुसवाने का ये उसका शौक बहुत पुराना था.
रश्मि ने शरमाते हुए कहा- आता तो नहीं है, मगर आपकी खातिर चूस दूंगी.

रश्मि की इस भोली अदा पर तो रमेश एकदम से फिदा हो गया. उसने तुरंत अपना टॉवल खोल कर फर्श पर गिरा दिया. टॉवल गिरते हुए उसका मोटा तगड़ा लौड़ा जो इतनी देर से तौलिया की दीवार के पीछे कैद था अब हवा में खुले रूप से लहराने लगा.

बार बार उछाला देकर उसका लंड ये बता रहा था कि रश्मि के कोमल जिस्म को भोगने के लिए कितनी प्यास है उसके अंदर। रमेश ने धीरे से रश्मि का कोमल मुलायम हाथ पकड़ लिया और आहिस्ता से अपने झटके दे रहे लंड पर टिका दिया.

उसने अब अपनी बनियान निकाल दी और पूरा नंगा हो गया. साथ ही उसने रश्मि की ब्रा को भी निकाल दिया. रश्मि की नंगी चूची देख कर जैसे उसको कोई पुराना गड़ा हुआ खजाना मिल गया हो, कुछ ऐसी चमक आ गयी थी उसकी आंखों में।

धीरज खोकर उसने रश्मि की चूचियों को अपने हाथों में भर लिया और उनको आराम आराम से भींचना शुरू कर दिया. चूचियों पर रमेश के हाथ कसते ही रश्मि का हाथ भी रमेश के गर्म गर्म लोहे की तरह तप रहे लौड़े पर कस गया. रमेश लड़की को गर्म करने की कला में पूरा मास्टर था जिसका असर रश्मि पर साफ दिख रहा था.

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