मै एक दिन अपने घर पर बैठा हुआ था उस दिन घर पर कुछ मेहमान आ गये और उसी दिन मेरे पिता जी के भी रिस्तेदार आ गए वह कहने लगे तुम्हारा बेटा बड़ा हो चुका है तुम उसके लिए कोई लड़की क्यों नहीं देखते, वहीं पर बैठे मेरे मामा जी के साले बोल पड़े की आप चिंता ना करें हमारी नजरों में एक बहुत अच्छी लड़की है आप लोग उसे देखेंगे तो मना नहीं करेंगे।
यह बात मेरे पिताजी को बहुत अच्छी लगी और उन्होंने कहा कि अब आप देरी ना करें आप जल्दी से उस लड़की की तस्वीर हमें दिखा दे, वह बडी ही स्मार्ट और तेजतरार हैं। उन्होंने तुरंत ही अपने फोन से उस लड़की की फोटो मेरे पिताजी को दिखा दिया और कहा कि इसका नाम रूपा है, मेरे पिताजी ने चश्मा लगा कर देखा तो वह कहने लगे लड़की तो बहुत सुंदर है, उन्होंने मेरी मां को भी अपने मोबाइल पर रूपा की तस्वीर दिखाई रूपा उन्हें बहुत अच्छी लगी तो उन्होंने कहा कि आप जल्दी से इस लड़की के रिश्ते की बात कीजिए, वह कहने लगे आप उसकी बिल्कुल भी चिंता ना करें बस आप लोग हां कह दीजिए।
मेरी मम्मी कहने लगी कि मेरी तो हां ही है और उसके बाद मेरा और रूपा का रिश्ता हो गया, कुछ ही समय बाद हम दोनों की शादी बड़े धूम-धड़ाके से हुई और हमारे सब रिश्तेदार हमारी शादी में आए हुए थे, शादी के बाद रूपा और मेरे बीच में खुलकर बात होने लगी क्योंकि इससे पहले हम दोनों एक दूसरे को ज्यादा समय दे ही नहीं पाए थे, शादी के बाद हम दोनों ने एक दूसरे को काफी समय दिया जब समय बीतता चला गया तो मैं रूपा को अच्छे से समझने लगा था।
मेरी पत्नी रूपा और मेरी बहन आशा के बीच झगड़े होते रहते थे, मेरी पत्नी रूपा भी अपनी जगह बिल्कुल सही थी क्योंकि आशा का तलाक होने के बाद वह हमारे साथ ही रहने लगी थी लेकिन वह हम दोनों के बीच में कुछ ज्यादा ही हस्तक्षेप करने लगी थी इसलिए यह बात रूपा को बिल्कुल पसंद नहीं आती थी और इस बात को लेकर कई बार उन दोनों के बीच झगड़े भी हो जाते थे। शुरुआत में तो मुझे लगा कि चलो यह सब ठीक हो जाएगा यह सब ठीक हो भी जाया करता था मेरे पापा मम्मी आशा को समझाते थे कि बेटा तुम्हें यह सब नहीं करना चाहिए लेकिन वह अपने रिश्ते की नाकामयाबी को रूपा के ऊपर उतार देती और वह उस पर सारा गुस्सा निकालती थी। मुझे शुरुआत में तो लगा की चलो आशा समझ जाएगी लेकिन वह तो बिल्कुल भी समझने को तैयार नहीं थी और इस वजह से रूपा और उसके झगड़े बढ़ते ही चले गए।
एक दिन तो बहुत ज्यादा हद हो गई जब आशा ने रूपा को बहुत बुरा भला कह दिया वह भी गुस्से में अपने मायके चली गई, मैं जब अपने काम से घर लौटा तो मैंने देखा की मुझे रूपा कहीं दिखाई नहीं दे रही है मैंने उसे फोन किया तो वह मेरा फोन नहीं उठा रही थी, मैंने जब अपनी मम्मी से पूछा तो उन्होंने भी पहले मुझे कुछ नहीं बताया लेकिन जब मैंने उन्हें जोर देकर पूछा तो उन्होंने मुझे कहा कि वह अपने मायके चली गई है। मैं भी तुरंत उसी वक्त रूपा को लेने के लिए उसके घर पर चला गया मैं जब उसके घर पर गया तो मैंने अपनी सासू से बात की तो वग कहने लगी कि देखो रचित हम लोग तुम्हें बहुत अच्छा लड़का मानते हैं और यदि तुम्हारी बहन की वजह से हमारी लड़की को कुछ तकलीफ होगी तो हम लोग बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं करेंगे।
रूपा की मम्मी बहुत ज्यादा गुस्से में थी वह स्कूल में अध्यापिका भी हैं लेकिन उस दिन उनका गुस्सा देख कर मुझे लगा कि वह वाकई में बहुत ज्यादा गुस्से में हो गई है, मैंने उन्हें शांत कराते हुए कहा कि आप मेरी बात रूपा से करवा दीजिए, रूपा अपने कमरे में बैठी हुई थी और वह रो रही थी मैंने रूपा को कहा कि मैं इस बारे में आशा से बात करूंगा और आगे से तुम्हें कभी भी कोई तकलीफ नहीं होगी, वह कहने लगी कि यदि तुम मुझसे वादा करते हो तो ही मैं तुम्हारे साथ चलूंगी नहीं तो मैं तुम्हारे साथ नहीं आऊंगी। उसने मेरे सामने जैसे शर्त रख दी थी मुझे उसकी शर्त माननी पड़ी और मैं उसे अपने साथ घर ले आया, मैं जब उसे घर लाया तो मैंने आशा को समझा दिया था कि तुम रूपा से बिल्कुल भी बात मत करना और ना ही तुम दोनों के बीच झगड़े होने चाहिए, मैंने अपनी मम्मी से भी कह दिया था लेकिन मेरी मम्मी भी क्या करती इसलिए मुझे भी उसका कुछ हल ढूंढना था।
मैंने सोचा की चलो क्यों ना हम लोग कहीं घूमने के लिए चलते हैं, मैंने घूमने का प्लान बना लिया और मैंने जयपुर जाने की सोची क्योंकि मैंने सिर्फ एक हफ्ते की छुट्टियां ली थी तो मैं अपने परिवार के साथ जयपुर चला गया, मुझे लगा कि चलो इस बहाने सब लोगों का मूड तो अच्छा हो जाएगा, हम लोग ट्रेन में साथ में ही बैठे हुए थे रूपा और आशा भी अच्छे से बात कर रहे थे मुझे लगा चलो इस बहाने यह दोनों अच्छे से तो बात करेंगे, जब हम लोग जयपुर पहुंचे तो सब का मूड बहुत अच्छा था और सब लोग बहुत खुश थे मुझे भी बहुत अच्छा लग रहा था सबके चेहरे पर खुशी थी। हम लोग जिस होटल में ठहरे हुए थे वहां पर हमारे एक रिलेटिव भी जॉब करते हैं जब हम लोग घूम रहे थे तो मैंने आशा से कहा कि चलो आज पानी पुरी खाते हैं, आशा को पानी पुरी बहुत पसंद है और रूपा को भी पानी पुरी बहुत पसंद है वह दोनों पानी पुरी खा रहे थे तो उनके चेहरे पर बडी ही अच्छी मुस्कान थी मैं उन दोनों के बीच के झगड़े को खत्म करना चाहता था और जब उन दोनों का मूड अच्छा था तो हम लोग पैदल पैदल चल रहे थे, मैंने रूपा और आशा को समझाया, वह दोनों अब मेरी बात समझ चुकी थी और उन दोनों ने मुझसे कहा कि आज के बाद आपको कभी भी हमारी तरफ से कोई शिकायत नहीं मिलेगी।
मैं बहुत खुश था और इस बात से मेरे अंदर इतनी खुशी थी कि मैं सोचने लगा चलो कम से कम मुझे इन सब चीजों से छुटकारा तो मिल जाएगा नहीं तो मैं जब भी अपने काम से घर लौटता तो हमेशा ही कुछ ना कुछ दिक्कत उन दोनों के बीच रहती थी, मुझे पता था कि आशा को भी अपने रिश्ते की नाकामयाबी से बहुत तकलीफ है लेकिन यह उसका ही फैसला था क्योंकि उसने ही लव मैरिज की थी, आशा को मैंने कहा कि यदि तुम्हें किसी और लड़के से शादी करनी है तो तुम कर लो लेकिन वह शादी करना ही नहीं चाहती थी और कहने लगी मुझे अब शादी करनी ही नहीं है।
हम लोग होटल वापस लौट आये और जब हम लोग होटल वापस लौटे तो हम सब ने उस दिन साथ में बैठकर डिनर किया, काफी समय बाद सब लोग इतने खुश होकर एक साथ डिनर कर रहे थे मुझे भी बहुत अच्छा लगा। इतनी खुशी देखकर मैं बहुत खुश था मैंने अपनी पत्नी से कहा आज आशा और मैं साथ में बैठ कर बात करेंगे हम दोनों एक ही रूम में बैठ कर बात कर रहे थे। रूपा आशा को समझा रही थी हम लोगों को बात करते हुए काफी समय हो चुका था पता ही नहीं चला कब बातों बातों में नींद आने लगी मुझे भी नींद आने लगी थी।
मैंने जब रूपा की तरफ देखा तो वह सो चुकी थी आशा और मैं बात कर रहे थे मैं उसे समझा रहा था।
वह मुझे कहने लगी मैं अभी आती हूं वह जब बाथरूम में गई तो मैंने रूपा की तरफ देखा मुझे रूपा को देखकर बड़ा अच्छा लग रहा था मैंने सोचा जब तक आशा आती है तब तक मैं उसकी चूत मार लेता हूं। मैंने उसे चोदना शुरू कर दिया वह नींद मे थी मुझे उसे चोदने में बड़ा मजा आ रहा था मैंने अपने वीर्य को उसके ऊपर ही गिरा दिया। जब मैं खड़ा उठा तो मेरे सामने आशा भी खड़ी थी आशा मेरे लंड को देख रही थी रूपा तो सोई हुई थी। आशा मेरे लंड को देख रही थी तो जैसे वह मेरे लंड को खाना चाहती थी उसने मेरे लंड को अपने हाथों में ले लिया वह उसे हिलाने लगी। मैं तो समझ ही नहीं पाया आखिर यह क्या हो रहा है लेकिन जब उसने मेरे लंड को अपने मुंह में लिया तो मेरे अंदर जोश पैदा हो गया। मैं उसे बाथरूम में लेकर गया उसने अपने सारे कपड़े खोल दिए मैंने उसकी बड़ी गांड को देखा तो मुझे ऐसा बिलकुल एहसास नहीं हुआ कि वह मेरी बहन है।
मेरे दिमाग में तो सिर्फ उसे चोदने की इच्छा जाग उठी थी मैंने उसकी गांड को बड़े अच्छे से दबाया। उसने बाथरूम में रखी तेल की शीशी को अपने चूत पर लगा लिया और मेरे लंड पर बड़े अच्छे से मालिश की और मुझे कहा अब तुम मझे चोदो मैंने भी तुरंत अपने मोटे लंड को उसकी चूत में घुसा दिया। उसकी चूत के अंदर मेरा लंड प्रवेश होते ही उसे बड़ा मजा आ रहा था वह अपनी चूतडो को मुझसे मिलाए जा रही थी मेरा लंड भी मजे ले रहा था। उसने मुझे कहा अब आप मेरी गांड के अंदर भी अपने लंड को डाल दो उसने मेरे लंड को अपनी चूत से निकालते हुए मेरे लंड को अपने मुंह में लिया और उसकी दोबारा से तेल मालिश की मेरा लंड एकदम चिकना और कड़क हो चुका था। मैंने जब लंड को उसके गांड में धकेलने की कोशिश की तो मेरा लंड उसकी गांड में नहीं जा रहा था परंतु मैंने कोशिश करते हुए अपने मोटे और तगड़े लंड को उसकी गांड में डाल ही दिया जब मेरा लंड उसकी गांड में घुसा तो उसके मुंह से चीख निकल पड़ी। जब मैं उसे धक्के देता तो मुझे बड़ा आनंद आ रहा था मैं उसे तेजी से धक्के दिए जा रहा था वह भी अपनी चूतड़ों को मुझसे मिला रही थी।
मैंने उसकी गांड के मजे 2 मिनट तक लिए 2 मिनट बाद जब मैंने अपने वीर्य को उसकी गांड में गिराया तो उसकी भूख मिट चुकी थी। मैंने जब अपने लंड को उसकी गांड से बाहर निकाला तो उसकी गांड से मेरा वीर्य बाहर निकल रहा था हम दोनों बाथरूम से बाहर आ गए। मैंने देखा रूपा गहरी नींद में सोई हुई है मैंने आशा से कहा तुम भी हमारे बगल में लेट जाओ वह मेरे बगल में ही लेट गई मैं उसे लिपट कर लेटा हुआ था।
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बहन ने मेरे लंड को देख लिया – Erotic Bhai Behan Ki Chudai

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