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भाग 16

दीदी (गुस्से से): कमीने …. वहशी …. मैं मर जाती तो ?

मैं (रोनी सूरत बना के): दीदी …. मुझे माफ़ कर दो …. जब निकलने वाला था तो मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा था …. ना जाने कैसे हो गया … अपने-आप

दीदी (इतराते हुए): ये माफ़ी-वाफी से काम नहीं चलने वाला … समझा … अब मेरी बारी है … चल शुरू हो जा

ओह, क्या अदा है दीदी तेरी |

मैं (उत्साहित होते हुए): हाँ, क्यों नहीं दीदी … बताओ ना … आपका सेवक आपकी सेवा में हाज़िर है |

इतना कहते हुए मैं सीट से नंगा ही उठ गया। दीदी ने तुरंत अपने पैर फैलाए और अपने दोनों हाथों को सिर के पीछे ले गयी |

दीदी (रोब से): “इधर आओ ….. चलो शुरू हो जाओ …. मेरे दोनों हाथों को चाटो ।

मैं: दीदी हाथ क्या … मैं तो आपका पूरा शरीर चाटूंगा ।

दीदी: बस .. बस … अब मुंह से बोलना छोड़ … चाटना शुरू कर |

दीदी सीट पर बैठी हुई थी और मैं उसके सामने खड़ा हुआ था | मैं पूरा जन्मजात नंगा था जबकि दीदी ने अभी भी नीचे सलवार पहनी हुई थी | दीदी का भी ऊपरी हिस्सा नंगा था और उसके बड़े-२ बोबे खुली हवा झूल रहे थे | दीदी ने जब चाटने के लिए कहा तो मैं अपने दोनों हाथ दीदी के दोनों तरफ रख के उनकी तरफ झुक गया | मैंने अपने शरीर का भार अपने हाथों पर लिया हुआ था ।

मैं धीरे-२ दीदी के हाथों की उँगलियों को चाटने लगा | चाटते-२ मैं उसकी बाँहों तक पहुँच गया | उसकी बाँहों को अच्छे से चाटने के बाद मैं उसकी काखों तक पहुँच गया | अब मुझे ज़्यादा झुकना पड़ रहा था | उसके बोबे मेरे कन्धों से रगड़ खाने लगे | मैं अपने कन्धों पर उसके उत्तेजक लंबे, सख्त रबर जैसे निप्पल साफ़ महसूस कर पा रहा था | मैं पूरी लगन से दीदी को चाटने में लगा हुआ था | बीच-२ में दीदी के मुंह से निकलती सिसकारी माहौल को और कामुक बना रही थी | दीदी भी धीरे-२ मेरी पीठ सहला रही थी |

दीदी की बगलों को धीरे-धीरे चाटने के बाद मैं उसके कंधे पर चला गया । उसके कंधों को चाटते हुए मैंने अपने दोनों हाथ उसके बोबों पर कस कर रख दिए और उसके बोबों को दबा दिया । दीदी मुंह से एक तेज सिसकी निकली | मैंने दीदी के दोनों निप्पल पकडे और उसके निप्पल को दबाने और मरोड़ने लगा | थोड़ी देर निप्पल दबाने के बाद भी जब मुझे राहत नहीं मिली तो और मैं थोड़ा नीचे खिसक गया और अपना मुँह उसके कड़े चुचों पर रख दिया। दीदी के मुंह से उतेज़ना से भरी की एक चीख निकल गई ।

मैं बहुत खुश था की मैं दीदी को इतना उत्तेजित कर पा रहा था और दीदी को इतना मज़ा दे पा रहा था । उसके बोबों को दोनों हाथों से पकड़ कर मैंने उसे चूसना शुरू कर दिया । मैं बीच-२ में उसके निप्पलों को अपने होंठों में लेकर दबाना और चबाता भी जा रहा था | मैं बहुत देर तक उसके बोबों को चूसता और चाटता रहा लेकिन मन नहीं भरा | मन मार कर मैं नीचे की तरफ खिसका, चूची के चक्कर में चूत थोड़ा ना छोड़नी थी |

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