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राजू की बात मानते हुए सोनी अपने सारे कपड़े उतार कर नंगी हो चुकी थी और वादे के मुताबिक रात भर सोने को बिना कपड़ों के नंगी ही रहना था यह एहसास सोनी के तन बदन में अजीब सी हलचल पैदा कर रहा था,,,,,, एक अद्भुत अनुभव के लिए वह भी तैयार हो चुकी थी लेकिन अपने कपड़े उतारने के बाद उसने राजू को भी बिना कपड़ों के हवेली में घूमने के लिए बोली थी,,, जिसमें राजू को किसी बात का एतराज नहीं था वह भी जल्दी से अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया था और राजू को निर्वस्त्र अवस्था में देखकर सोनी मुस्कुराते हुए अपनी गोल-गोल गांड को पानी भरे गुब्बारे की तरह हिलोरे मारते हुए खाना बनाने के लिए जाने लगी,,,, सोनी की गदराई गांड को देखकर राजू से रहा नहीं गया और वह भी,,, सोनी के पीछे पीछे चल दिया,,,,।

इतनी बड़ी हवेली में सोनी और राजू के सिवा तीसरा कोई भी नहीं था लाला पहले से ही दोनों को समय देने के लिए एक बहाने से हवेली से बाहर निकल गया था राजू की खुशी का ठिकाना ना था लाला ने बहुत बड़ी जिम्मेदारी में उसे हिस्सेदारी जो दे दिया था अब वह भी लाला से कम नहीं था वह भी मालिक ही बन गया था और तो और जमीन जायदाद के साथ-साथ सोनी के रूप में जोरु भी मिल गई थी,,,, इसलिए उसकी खुशी दोगुनी हो चुकी थी खुशी के मारे वह काफी उत्तेजित भी था आज की रात में सोने के साथ खूब मजे करने वाला था,,,,।

देखते ही देखते सोनी रसोई घर में पहुंच गई संपूर्ण नग्न अवस्था में एकदम नंगी पहली बार उसे इस बात का अनुभव हो रहा था कि घर में नंगी घूमने पर कैसा महसूस होता है वह काफी उत्तेजित और अच्छा महसूस कर रही थी,,,,,,, सोनी को कुछ ज्यादा बना नहीं था सिर्फ थोड़ी सी खीर और थोड़ी सी पूरी बनाना था 2 दिन के लिए इसलिए वह जल्दी से चूल्हा जलाई हो उस पर खीर रख दी,,,, भले ही सोनी हवेली में रहती थी लेकिन,,, खाना बनाने का जुगाड़ चूल्हे पर ही था और रसोईघर हवेली से सटकर हवेली के पीछे की तरफ था जो कि पूरी तरह से दीवार से घिरा हुआ था,,,,, राजू पीछे-पीछे रसोई घर में पहुंच गया था जहां पर सोनी नंगी होकर खाना बना रही थी संजू थोड़ी सी दूरी पर खड़ा होकर सोने की खूबसूरती को अपनी आंखों से पी रहा था नंगी होने के बाद तो सोनी स्वर्ग से उतरी हुई अप्सरा लगती थी बदन में जरा सा भी ज्यादा चर्बी नहीं थी जो भी थी एकदम सीमित थी जिसकी वजह से उसकी खूबसूरती में चार चांद लग जाता था कमर के नीचे नितंबों का गहरा हो तो बेहद अद्भुत था मानो कि जैसे चांद खिल गया हो,,,,, जरा सा दबा देने पर गांड एकदम टमाटर की तरह लाल हो जाती थी जिसे देखने में भी एक अद्भुत आनंद प्राप्त होता था,,,।

अंधेरा छा चुका था इसलिए रसोई घर में लालटेन जलाया हुआ था जिसकी पीली रोशनी में सब कुछ साफ नजर आ रहा था राजू की नंगा और सोनी भी नंगी दोनों इस समय अद्भुत जोड़ी लग रहे थे,,, सोनी को इस बात का एहसास था कि उसके ठीक पीछे राजू खड़ा होकर उसे देख रहा है वैसे तो राजू से सोनी को शर्माने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं थी लेकिन इस तरह के हालात पहली बार उसके सामने आ रहे थे इसलिए वह खाना बनाते समय राजू की मौजूदगी से शर्म आ रही थी और यह शर्म पन उसके तन बदन में उत्तेजना की हवा भर रहा था,,,, बैठी हुई थी जिसकी वजह से उसकी मदमस्त कर देने वाली गांड और ज्यादा बड़ी लग रही थी जिसे देख देख राजू अपने लंड को पकड़ कर हिला रहा था,,,,, सोनी तुरंत आटा एक बड़े से बर्तन में लेकर उसमें पानी डालकर उसे मिलाने लगी ताकि पूरी बना सके और ऐसा करते हुए देखकर राजू से सोने की मदमस्त कर देने वाली जवानी देखी नहीं गई और वह तुरंत सोनी के करीब आकर बैठ गया और उसकी नंगी पीठ पर अपने होंठ रख कर चुंबन करने लगा,,,।

आहहहह राजू कुछ देर तक तो रुक जाओ उसके बाद तो मैं तुम्हें रोकने वाली नहीं हूं,,,,

हाय मेरी रानी है मुझसे तो बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है,,,(ऐसा कहते हुए राजू सोने की पीठ पर चुंबन करते हुए अपने एक हाथ को उसकी दोनों टांगों के बीच से आगे की तरफ ले जाकर उसकी बुर पर अपनी हथेली रखकर उसकी बुर को पूरी तरह से अपनी हथेली के नीचे ढक लिया,,,, सोनी संपूर्ण रुप से जवानी से भरी हुई थी इसलिए राजू की यह हरकत से वह पूरी तरह से मदहोश हो गई और उसके मुख्य हल्की सी सिसकारी फूट पड़ी,,,।

सहहहह आहहहहह,,,, राजू अभी रहने दो वरना मैं खाना नहीं बना पाऊंगी,,,,

कोई बात नहीं मैं तुम्हारा दूध पीकर अपनी भूख मिटा लूंगा,,,

(राजू किस तरह की बात सुनकर और उसकी कामुक हरकत की वजह से मदहोशी के आलम में मुस्कुराते हुए सोनी बोली)

थोड़ा सब्र करो मेरे राजा तुम्हें दूध के साथ-साथ अपनी बुर की मलाई भी खिलाऊंगी,,,

ओहहहह मेरी रानी,,,,(इस तरह की बातें सुनकर राजू से रहा नहीं गया और वह अपनी बीच वाली उंगली को तुरंत सोनी की बुर में प्रवेश करा दिया) तुम तो मुझे पागल बना कर छोड़ोगी,,,,,,,

(और राजू की इस कामुक हरकत पर सोनी आटा गूथते हुए पूरी तरह से सिहर उठी और उसके मुख से गर्म सिसकारी फूट पड़ी,,,,)

सहहहरह आहहहहह,,,,, राजू रहने दे नहीं तो यही मेरा पानी निकल जाएगा,,,,

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पानी मत बोलो रानी अमृत है अमृत थोड़ा सा साथ दो तो तुम्हारी बुर से निकले अमृत को अपने गले में गटक जाऊं,,,,,

नहीं रहने दो राजा मैं कहां भागी जा रही हूं,,,,,(सोनी एकदम मदहोशी भरे स्वर में बोली हालांकि राजू की हरकत की वजह से उसकी बुर पानी आने लगी थी उसका भी मन कर रहा था अपना गर्म पानी निकालने को उससे भी सफर नहीं था वह तो सिर्फ यूं ही राजू को बोल रही थी लेकिन फिर भी राजू मानने वाला नहीं था वह सोनी की नंगी गांड को दोनों हाथों से पकड़ कर उसे ऊपर की तरफ उठाते हुए बोला,,,)

बाद की बाद में देखेंगे रानी थोड़ा सा गांड उपर उठा लो,,,,(इतना कहते हुए राजू बिना सोनी की इजाजत ही वह उसकी गोल-गोल गांड को ऊपर की तरफ उठा दिया और ऐसे हालात में राजू को सोनी का गुलाबी छेद लालटेन की पीली रोशनी में भी एकदम साफ नजर आ रहा था,,,, राजू और सोनी दोनों संपूर्ण रूप से निर्वस्त्र अवस्था में थे इस तरह के माहौल में जीन६ इस पल को महसूस करना बहुत ही कम लोगों के नसीब में आता है और इस समय सोनी और राजू दोनों नसीब के बलवान थे,,,,, राजू एक बार फिर से सोनी के गुलाबी छेद पर हथेली रखकर  सीहरते हुए बोला,,,)

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सहहहरह आहहहहहह मेरी रानी तुम्हारी बुर कितना पानी छोड़ा है और तुम कहती हो बाद में,,,,, तुम्हारी तड़प देख कर मुझसे रहा नहीं जा रहा,,,

(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने होठों को सीधे सोनी की बुर पर लगा दिया और चाटना शुरू कर दिया,,,, अगले ही पल सोनी एकदम से गनगना गई एकदम से मदहोश हो गई और उसके मुख से गरमा गरम सिसकारी फूट पड़ी वह अपनी गांड को हवा में ऊपर उठाए हुए आटे को जोर जोर से अपनी हथेली में दबाकर अपनी उत्तेजना को काबू में करने की कोशिश कर रही थी लेकिन ऐसा हो नहीं पा रहा था क्योंकि राजू पूरी तरह से उसके गुलाबी छेद पर छाया हुआ,, था,,,

हवेली के पीछे बने रसोई घर में सोनी राजू को पूरी तरह से अपने वश में किए हुए उससे अपनी बुर चटवा रही थी और साथ में भोजन भी बना रही थी,,,,

सहहहह आहहहहह राजू,,,,आहहहहहहह,(उत्तेजना के मारे अपने लाल लाल होंठ को दांत से दबाते हुए वह गरमा गरम सिसकारी ले रही थी वह पूरी तरह से मस्त हुए जा रही थी और राजू उसकी उत्तेजना को और ज्यादा बढ़ाते हुए उसके गुलाबी छेद में एक उंगली डालकर उसे अंदर बाहर करता हुआ अपनी जीभ से उसे चाट कर मस्त भी कर रहा था,,,,, लालटेन की पीली रोशनी में राजू अपनी मालिक की छोटी बहन से पूरी तरह से मदहोश बनाया हुआ था लाला की बहन भी अपनी गांड को ऊपर उठा कर मजा ले रही थी हालांकि उसे ऐसा ही लग रहा था कि राजू अपना लंड उसकी बुर में डालकर उसे चोदने के लिए तड़प रहा हूं लेकिन राजू उसकी तड़प को और ज्यादा बढ़ाना चाहता था,,,, सोनी का गला उत्तेजना के मारे सूखता चला जा रहा था जिसे वह बार-बार अपने थूक से गीला करने की कोशिश कर रही थी,,,,,,

गजब का काम रस टपक रहा था इस दृश्य से रसोई घर में सोनी पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में अपनी गांड को ऊपर उठाएं हुए आटा भी गुंथ रही थी और राजू को अपनी बुर का मजा भी दे रही थी राजू पागलों की तरह उसकी बुर की मलाई को जीभ से चाट कर अपने गले के नीचे उतारकर तर हो रहा था,,,, देखते-देखते सोनी की सांसे बड़ी तेजी से चलने लगी,,,, वह अपने चरम सुख के बेहद करीब पहुंच चुकी थी इसलिए राजू उसे और ज्यादा मस्त करते हुए एक साथ अपनी दो उंगली को उसकी बुर में डालकर अंदर बहार करके मजा देने लगा राजू चाहता तो उसकी बुर में लंड डालकर भी उसे चोद सकता था लेकिन वह अभी उंगली से उसकी बुर को चोदना चाहता था,,,, किसी भी पल सोनी का पानी निकलने वाला था इसलिए वह गूथे हुए आटे को कसके अपनी हथेली में दबा ली थी और अगले ही पल अपनी दूर से काम रस का फव्वारा बाहर मारने लगी बुर से निकला हुआ काम रस का फव्वारा सीधे राजू के मुंह में गिरने लगा और राजू उसे अमृत की बूंद समझकर गटकने लगा,,,,।

रात की शुरुआत बेहद धमाकेदार हुई थी सोनी झड़ चुकी थी और फिर उसने अपना सारा ध्यान रसोई तैयार करने में लगा दी और जल्दी से फिर और पूरी बनाकर तैयार भी कर दी,,,, इस दौरान वह पूरी तरह से निर्वस्त्र अवस्था में थी और राज्यों की पूरी तरह से नंगा होकर दीवारों से घीरी हुई उस जगह पर इधर से उधर घूम रहा था नंगा होकर घूमने मुझे बहुत मजा भी आ रहा था वह बार-बार अपने लंड को पकड़ कर हिला दे रहा था रसोई तैयार होने तक उसका लंड ज्यों का त्यों खड़ा का खड़ा रहा था,,,, रसोई तैयार करने के बाद सोनी दो थाली में खाना लगाकर राजू की तरफ देखी तो राजू उसकी तरफ ही देखकर अपने लंड को मुठिया रहा था यह देखकर सोनी मुस्कुराते हुए बोली,,,।

अरे अब खाना भी खाओगे या लंड ही हिलाते रहोगे,,,,

क्या करूं जान जब तक तुम्हें चोद कर अपना पानी निकाल ना दु तब तक यह खड़ा का खड़ा रहेगा,,,,। डाल भी लेना और अपना पानी भी निकाल लेना लेकिन पहले खाना तो खा लो,,,

हाय हाय मेरी रानी इतने प्यार से बुलाती हो कि पूछो मत रुको अभी आया,,,,

(इतना सुनते ही सोनी खिलखिला कर हंसते हुए दोनों हाथ में थाली लेकर रसोई घर से बाहर आ गई और हवेली के अंदर जाने लगी उसकी गोरी गोरी मटकती हुई गांड लालटेन की रोशनी में भी एकदम साफ झलक रही थी और राजू वहां पहुंच कर तुरंत लालटेन को अपने हाथ में ले लिया और रोशनी दिखाते हुए सोनी को आगे बढ़ने दिया क्योंकि वहां पर अंधेरा बहुत था,,,,, देखते ही देखते दोनों मेहमान कच्छ में आ गई और कुर्सी पर बैठने के बजाय सोनी नीचे ही दरी बिछाकर थाली को रख दी और दोनों नग्न अवस्था में ही पलाथी मारकर बैठ गए,,,। राजू को भूख भी लगी थी इसलिए वह जल्दी से खीर पुरी खाने लगा और खाना इतना स्वादिष्ट था कि बार-बार सोनी की तरफ देख कर खाने की सारी कर रहा था और राजू के मुंह से अपने बनाए खाने की तारीख सुनकर सोनी फुले नहीं समा रही थी,,,, थोड़ी ही देर में दोनों खाना खाकर तेरी तो हो चुके थे पेट की भूख तो मिल चुकी थी लेकिन जिस्म की भूख अभी भी बाकी थी दोनों में बरकरार भी थी,,,, राजू से आप सब्र करना मुश्किल हो जा रहा था इसलिए मैं तुरंत आगे बढ़ा और सोनी को अपनी गोद में उठा लिया और बोला,,,।

अब तो मुझे बिल्कुल भी सब्र नहीं हो रहा है जल्दी चलो मेरी रानी तुम्हारी बुर में लंड डालना है,,,

अरे अरे पगला गए हो क्या,,,, मुझे नीचे उतारो मुझे जोरों की पेशाब लगी है,,,,

नहीं अब मैं तुम्हें कहीं नहीं जाने दूंगा मेरे मुंह में ही मुत लेना,,,,

(राजू के मुंह से यह बात सुनकर सोनी हैरान भी हुई और हंसने लगी और हंसते हुए बोली)

क्या,,,, क्या बकवास कर रहे हो मैं भला तुम्हारे मुंह में क्यों मुतु,,,,,

क्यों इसमें क्या खराबी है तुम्हारी बुर की मलाई चाट सकता हूं तो क्या तुम्हारे घर से निकला हुआ पेशाब नहीं पी सकता,,,

नहीं नहीं बिल्कुल भी नहीं मुझे शर्म आ रही है मुझे नीचे उतारो,,,,(राजू के प्रस्ताव को सुनकर सोनी पूरी तरह से हतप्रभ हो गई थी उसे समझ में नहीं आता कि वह क्या करें कुछ पल के लिए तो कल्पना भी करने लगी थी कि कैसे वहां अपनी दोनों टांगें फैलाकर अपनी बुर में से पेशाब की धार मार रही है जो कि सीधे राजू के मुंह में गिर रही हो राजू बेझिझक पेशाब की धार को अमृत की धार समझ कर उसे अपने गले के अंदर गटक रहा हैं,,,, इस कल्पना से ही सोने के तन बदन में आग लगे वह पूरी तरह से मदहोश हो गई लेकिन उसे शर्म आ रही थी क्योंकि इस बारे में उसने आज तक सोची भी नहीं थी,,,, इसलिए फिर से बोली,,,)

लाला की बहन और राजू

नहीं राजू मैं ऐसा नहीं कर सकती तुम मुझे नीचे उतारो मुझे बड़े जोरों की पेशाब लगी है,,,,

अच्छा कोई बात नहीं तुम्हें मैं इसी तरह से पेशाब कराने के लिए ले चलता हूं,,,, बोलो कहां पर जाना है,,,,

वहीं पर हवेली के पीछे,,,,

ठीक है,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू उसी तरह से उसे गोद में उठाए हुए हवेली के पीछे रसोई घर के आगे की तरफ ले जाने लगा और देखते-देखते सोनी को हवेली के पीछे एकदम कोने में ले जाकर खड़ा हो गया जहां पर थोड़ी बहुत झाड़ियां उगी हुई थी वहां पर पहुंचते ही सोनी बोली,,,)

बस यहीं पर उतार दो,,,

(ओर इतना सुनते ही राजू से नीचे जमीन पर उतारते हुए बोला,,,,)

चलो कोई बात नहीं मेरी बात नहीं मानी तो ना सही लेकिन तुम्हें पैसा आप खड़े होकर करना होगा बैठ कर नहीं जैसा कि हम लोग करते हैं,,,

क्या राजू अब यह क्या पागलपन है,,,

Raju lala ki bahan k nange badan se khelta hua

पागलपन नहीं मेरी जानू तुम्हारे प्रति मेरा प्यार है मैं तुम्हें हर एक रुप में देखना चाहता हूं,,,

तुमने एकदम पागल हो मैंने आज तक इस तरह से पेशाब नहीं की हुं,

तभी तो कह रहा हूं खड़ी होकर करो जैसा कि मैं कर रहा हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने लंड को पकड़ कर पेशाब करने लगा उसके लंड से पेशाब की धार बहुत दूर तक जा रही है जिसे देखकर सोनी के तन बदन में आग लग गई उसके मन में काम भावना एकदम से प्रज्वलित होने लगी और हर राजू की बात मानते हो उसी की तरह खड़ी होकर अपनी दोनों टांगों को थोड़ा सा खोल लिया और अपनी कमर को आगे की तरफ करके अपनी बुर से पेशाब की धार मारने लगी जो कि राजू के जितना दूर तो नहीं जा रही थी लेकिन लगभग लगभग वहां तक पहुंच जरूर जा रही थी क्योंकि सोनी को बड़े जोरों की पेशाब लगी हुई थी सोनी को इस तरह से पेशाब करता हुआ देखकर राजू के लंड का तनाव और ज्यादा बढ़ने लगा राजू पूरी तरह से मस्ती के सागर में गोते लगाने लगा और वह पेशाब करने के बाद तुरंत अपने हाथ को सोनी की बुर पर रहती है जिसमें से पेशाब की धार अभी भी फूट रही थी और उसकी हथेली की उंगलियों को भी कहते हुए झरने की तरह उसकी उंगलियों के बीच में से पेशाब की धार निकलने लगी अब राजू के तन बदन में काम भावना पूरी तरह से अपना असर दिखाने लगी वह एकदम से मस्त हो गया,,,, और वह सोनी की इजाजत लिए बिना ही,,,, सोने की दोनों टांगों की तरफ झुक कर अपनी जीभ बाहर निकाल कर उसकी बुर से निकल रही पेशाब की धार पर अपनी जीभ लगाने लगा और उसकी पेशाब की धार उसकी जीभ से स्पर्श करने लगे,,, यह एहसास सोनी के तन बदन में अद्भुत उत्तेजना का संचार भर रहा था वह पागल हो जा रही थी इस नजारे को देखकर वो एकदम मदहोश हो गई थी उससे रहा नहीं जा रहा था वह साफ तौर पर देख रही थी कि,,,, लालटेन की पीली रोशनी में जो कि उसे गोद में उठाए हुए ही नीचे झुक कर वहां लालटेन को अपने हाथ में ले लिया था,,, शायद अपनी आंखों से यही देखने के लिए और इस समय सोनी एकदम साफ तौर पर देख रही थी कि राजू एकदम कामा दूर होकर उसके पेशाब की धार को अपनी जीभ से स्पर्श कर रहा था,,,, और उसकी बुंदो को अपने गले के अंदर गटक रहा था,,,, कुछ देर पहले राजू यही उससे बोल रहा था यही क्रिया का आनंद लेना चाहता था लेकिन सोनी शर्म के मारे इनकार कर चुकी थी लेकिन इसमें राजू की हरकत उसकी शर्म को एकदम से दूर कर दी थी और वह पागलों की तरह अपने बुर में से निकल रही पेशाब की धार कमजोर पड़ जाए इससे पहले अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर राजू के सर पर रख दी और तुरंत उसके बाल को कस के पकड़ कर उसके होठों को अपनी बुर से लगा ली जिसमें से अभी भी पेशाब की धार निकल रही थी,,,, राजू को तो मुंह मांगी मुराद मिल गई थी सोनी की हरकत की वजह से वह पूरी तरह से पागल हो गया था और अगले ही पल अपने दोनों हाथों से सोनी की गांड को पकड़कर राजू पागलों की तरह उसकी बुर पर अपने होंठ लगाकर उसके पेशाब की धार को अपने गले के नीचे उतारने लगा या अनुभव यह पल दोनों को पूरी तरह से अपने अंदर डूबोए लिए चला जा रहा था,,,।

Is tarah se Soni raju ko apni taange khol k boor dikhati huyi

राजू एक तरफ अपना मुंह लगाकर सोने की बोल से उसकी पैसा आपको पी रहा था और दूसरे हाथ से अपने लंड को पकड़ कर जोर जोर से हिला रहा था क्योंकि उसकी उत्तेजना बढ़ती जा रही थी वह पागल हुआ जा रहा था जब उसे इस बात का एहसास हुआ कि सोनी कीबोर्ड से पेशाब की धार निकलना बंद हो गई है तो वह पागलों की तरह एक झटके से उठा और तुरंत सोनी को दीवाल के सहारे खड़ी करके उसकी कमर को दोनों हाथों से पकड़कर अपनी तरफ खींचा और उसकी गोल गोल गांड को थोड़ा ऊपर की तरफ उठाकर पीछे से उसकी बुर में अपना लंड डाल दिया,,,

यह सब बड़ी जल्दबाजी में हो रहा था सोनी को भी समझ में नहीं आ रहा था लेकिन राजू की हर एक हरकतों से पागल बना रही थी इसीलिए वह किसी भी प्रकार का सवाल करना उचित नहीं समझ रही थी और जिस तरह से राजू उसके बदन को मोड़ रहा था वह उसी स्थिति में होती चली जा रही थी उसके मुंह से हल्की सी चीख तब निकली जब राजू का लंड उसकी बुर में एक झटके में ही पूरा का पूरा घुस गया और राजू उसकी कमर पकड़कर अपनी कमर हिलाना शुरू कर दिया,,,, हवेली के पीछे लाला की बहन छोटी मालकिन के मोसे गरमा गरम सिसकारी की आवाज बोल रही थी लेकिन उसे सुनने वाला यहां कोई नहीं था और उसकी गरमा गरम सिसकारी की आवाज सुनकर राजू का जोश बढ़ता जा रहा था और वह कभी उसकी कमर पकड़ता तो कभी उसके दोनों संतरो को जोर से पकड़ कर दबा देता है और अपनी कमर को जोर-जोर से हिलाना शुरू कर देता,,,,

Laalten ki roshni me ek hi bistar par raju or soni

राजू की अद्भुत कामलीला हवेली में हवेली की मालकिन के साथ जारी था वह पागलों की तरह अपने मोटे लंड को सोनी की बुर में अंदर बाहर कर रहा था लड के मोटे पन और उसकी रगड़ से सोने की बुर की अंदरूनी दीवारें पूरी तरह से पसीज रही थी,, उसे बहुत मजा आ रहा था वह राजू के हर धक्के का जवाब अपनी गांड को पीछे ठेल कर दे रही थी,,,,, कुछ देर तक गरमा गरम घमासान चुदाई के बाद दोनों एक साथ झड़ गए,,,, सोनी अपनी उखडती सांसो को दुरुस्त करते हुए बोली,,,।

बाप रे तू तो एकदम पागल हो जाता है,,,,

हो नहीं जाता हूं तुम बना देती हो तुम्हारी जवानी देख कर तो कोई भी पागल हो जाए,,,,

चलो रहने दो अब चलो कमरे में चलते हैं लेकिन पहले अपना मुंह धो लो वरना मैं तुम्हें अपने होठों का रस पीने नहीं दूंगी,,,

अरे तुम्हारा ही तो पैसाब  लगा है किसी और का थोड़ी है,,,

राजु सोनी की जबरदस्त चुदाई करता हूआ

भले किसी का भी हो लेकिन मैं तुम्हें अपने होठों का रस पीने नहीं दूंगी अगर अपना मुंह नहीं दोगे तो तुम्हें करने भी नहीं दूंगी,,,,

तुम्हें चोदने से तो आप मुझे कोई नहीं रोक सकता क्योंकि इस हवेली के मालिक ने भी इजाजत दे दिया है जाओ मेरी बहन को जी भर कर चोदो,,,,

तुम ना बिलकुल भी नहीं सुधरोगो,,,,(इतना कहते हुए हवेली के पीछे ही उसी जगह पर बने हुए हेडपंप के लग पहुंच गई और हेडपंप को चलाते हुए बोली,,,)

अब चलो जल्दी से धो लो,,,,

(राजू सोनी की बात मानते हुए अपने मुंह को पानी से धो लिया और फिर दोनों सोनी के कमरे में पहुंच गए सोनी का कमरा हवेली की ऊपरी मंजिल पर बना हुआ था जिसकी खिड़की खुली हुई थी और उसमें से ठंडी ठंडी हवा आ रही थी कि कमरे में दोनों तरफ लालटेन जल रही थी जिसकी पीली रोशनी में पूरा कमरा जगमगा रहा था,,, खिड़की के पास ही एक कुर्सी खींचकर खुद बैठ गई और दूसरी कुर्सी की तरफ इशारा करके राजू को भी बैठने के लिए बोली राजू की कुर्सी पर बैठ गया और दोनों खिड़की से बाहर देखने लगे जहां पर दरबान खड़े थे और,,,, सामने की तरफ देख कर बड़ी ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहे थे यह देखकर राजू मुस्कुराते हुए बोला,,,।)

सोनी को मजा देता हुआ

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देख रही हो तुम्हारे दरबान को बड़ी ईमानदारी से अपना फर्ज निभा रहे हैं,,,

तुम्हारा दरबन क्या यह तुम्हारे नहीं है आखिरकार भैया ने तुम्हें भी तो अब आधा मालिक बना ही दिया है तो यह तुम्हारे भी हुए ना,,,

हां तुम सच कह रही हो यह तो मेरे भी हुए,,,, बड़ा अच्छा लग रहा है मालिक बनकर कल से देखना मैं और भी अच्छा काम करूंगा और व्यापार कारोबार को और ज्यादा बढ़ाऊंगा ,,,

तभी तो भैया तुम पर विश्वास करके आधा मालिक बना दिए हैं क्योंकि वह जानते थे कि उनके बाद तुम ही एक ऐसे हो जो उनके व्यापार हो जमीदारी को अच्छी तरह से संभाल सकते हो किसी की बुरी नजर लगने नहीं दोगे,,,,

उनके बाद अरे अभी दादा जी को कुछ थोड़ी होने वाला है,,,

दुश्मन भी तो बैठे हैं उनका बुरा करने के लिए,,,,

कौन है मुझे बताओ मैं उसे मार मार कर ठीक कर दूंगा,,,।

(सोनी राजू की बात सुनकर अंदर ही अंदर खुश हो रही थी और अच्छी तरह से समझ रही थी कि यही मौका है राजू को सच बताने का और राजू से कसम देने का कि वह जी जान से लाला के साथ साथ घर की इज्जत और हवेली के साथ साथ कारोबार की रखवाली करेगा और वह बोली)

दोनों एकसाथ मजा लेते हुए

० तुम्हारे बस का नहीं है राजू जो लोग इस हवेली का भैया का बुरा करना चाहते हैं वह लोग बहुत बड़े आदमी है,,,

अरे कौन है मुझे बताओ गी,,,,।

अरे तुम्हारा लंड तो एकदम सिकुड़ गया अभी तो मैं पूरी बात बताई भी नहीं हूं अभी से घबराहट होने लगी,,,(राजू के दोनों टांगों के बीच झूलते हुए उसके लंड की तरफ देखकर सोनी बोली)

तुम इसकी चिंता मत करो सोनी एक बार अपनी बुर की झलक दिखा दो कि फिर भी यह खड़ा हो जाएगा,,,, पहले तुम दुश्मन के बारे में बताओ,,,

राजू जमकर चोदते हुए

अब क्या बताऊं राजू भैया बड़ी मुसीबत में हूं इसीलिए तो सुबह कारोबार का मालिक तुम्हें बना रहे हैं ताकि तुम इसकी इजाजत कर सको लेकिन मुझे लगता नहीं है कि तुम भैया की उम्मीद पर खरा उतर पाओगे,,,

ऐसा कोई भी काम नहीं है सोनी जो मैं कर ना पाऊं,,,

(सोनी जानबूझकर राजू को उकसा रही थी और राजू उसकी बात को सुनकर गुस्से में उत्तेजित भी हो रहा था,,,)

यह बात है,,, तो सुनो विक्रम सिंह को तो जानते ही होगे,,,

विक्रम सिंह,,,(कुछ देर सोचने के बाद) हां याद आया 1 दिन गोदाम पर आया था लेकिन उसे देखते ही लाला को ना जाने क्या हो गया था लाला एकदम घबरा गए थे,,,

बस यही तो राजू विक्रम सिंह की ताकत बहुत ज्यादा है और हमारे पिताजी ने ना जाने कब उनके पिताजी से कुछ कर्जा लिया था जिसके एवज में जमीन जायदाद के कागजात उनके पास गिरवी रखे थे लेकिन दोस्ती के चलती है उनके पिताजी ने जमीन जायदाद के कागज को पिताजी के हाथों लौटा दिया था लेकिन आप विक्रम सिंह धमकी देकर हमारी जायदाद हवेली और कारोबार को हथियाना चाहता है यहां तक कि मुझ पर भी उसकी गंदी नजर है,,,,

सोनी मजा लेती हुई

क्या कह रही हो सोनी,,,(एकदम से क्रोधित अवस्था में)

मैं सच कह रही हूं राजू भैया नहीं चाहते कि विक्रम सिंह के हाथ में बापदादा पुरखों की जमीन दारी और हवेली के साथ-साथ करो बार उस दुष्ट विक्रम सिंह के हाथों में चली जाए और यहां तक कि मेरी इज्जत भी इसीलिए तो भैया तुम पर पूरा विश्वास करके आधा मालिक बना दिए हैं ताकि अगर उन्हें कुछ हो जाए तो तुम उनके जमीन जायदाद की रक्षा कर सको मेरी इज्जत की रक्षा कर सको,,,,

अगर यह बात है सोनी तो मैं लाला के भरोसे को टूटने नहीं दूंगा,,, क्योंकि अब लाला के साथ-साथ मेरी भी इज्जत का सवाल है कोई सहेली की तरफ कारोबार की तरफ जमीदारी की तरफ आंख उठाकर देखेगा तुम्हें उसकी आंख फोड़ दूंगा और तो और सोनी तुम्हारी इज्जत से कोई खेलने की कोशिश किया तो मैं उसे जिंदा नहीं छोडूंगा,,,,(तुरंत अपने हाथ को सोनी के सर पर रखकर कसम खाते हुए,) मैं कसम खाता हूं सोनी की तुम्हारे सर की इस हवेली और जमीन जायदाद मैं जरा सा भी हिस्सा किसी को लूटने नहीं दूंगा क्योंकि अब यह मेरा भी है,,,

(राजू की आंखों में गुस्सा साफ नजर आ रहा था और यह भरोसा भी नजर आ रहा था कि वह लाला के विश्वास को टूटने नहीं देगा वह किसी भी कीमत पर हवेली के साथ-साथ जमीन जायदाद का एक हिस्सा भी किसी गैर के हाथ में जाने नहीं देगा,,,,,, यह देखकर सोनी बहुत खुश थी अंदर ही अंदर वह बहुत प्रसन्न हो रही थी उसे इस बात का विश्वास हो गया था कि अब उसके भैया की चिंता दूर हो जाएगी अच्छी तरह से जानती थी कि राजू किसी से भी बैठ जाएगा और उस में विजय प्राप्त करेगा,,, क्योंकि वह अपनी ताकत का परिचय दिखाते हुए दो डाकुओं को ढेर कर चुका था जिन से लड़ने की गांव में किसी की भी हिम्मत नहीं थी और उन लोगों से वीरता दिखाते हुए राजू ने विजय प्राप्त करते हुए गांव को गांव की बहू बेटी की इज्जत को भी बचाया था,,,,, एक बात का तो उसे विश्वास हो गया था कि उसकी जमीन जायदाद की रक्षा करने वाला अब मिल गया है और अब उसे एक बार फिर से अपनी जवानी की तरफ आकर्षित करके उसे पूरी तरह से अपना बनाना था औरत के जिस्म का दीवाना बनाना था जो कि वह पहले से ही था,,, उसकी सर की कसम खाने के लिए राजू अपनी जगह से खड़ा हो गया था और बात को दूसरी तरफ घुमाते हुए सोनी उसके झूलते हुए लंड की तरफ देखकर बोली,,,)

सोनी के पसीने छुड़ाता हुआ राजू

लगता है तुम्हारे बंदूक की गोली खत्म हो गई है राजा,,,,

(हाथ आगे बढ़ा कर राजू के ढीले पड़े लंड को पकड़ते हुए बोली,,,, जवाब में राजू सोनी की चूची को दोनों हाथों से पकड़कर दबाते हुए बोला,,,)

एक बार दुश्मन नजर आ जाए तो फिर अपने आप इसमें गोली भर जाती है मेरी रानी एक बार अपनी टांग खोल कर अपनी बउर दिखा दो फिर देखना मेरा लंड कैसा दागता है,,,

हममम बड़ी जल्दी है दुश्मन की झलक पाने के लिए,,,

क्या करूं मेरी रानी,,,,(राजू एक झटके से उसकी बांह पकड़कर कुर्सी से उठाते हुए अपने सीने से लगा लिया और उसकी आंखों में आंखें डाले हुए बोला) जब जंग के मैदान में उतरे हैं तो दुश्मन सीना तान कर मिलना तो होगा ही,,,,

(राजू की हरकत और उसकी बातें सोनी के तन बदन में फिर से उत्तेजना की लहर बढ़ा रहा था लेकिन तभी उसकी नजर खिड़की से बाहर गई बाहर दरबान अभी भी जाग रहे थे और कमरे में लालटेन की रोशनी पूरी तरह से फैली हुई थी और वह दोनों नग्न अवस्था में खिड़की पर खड़े थे ऐसे में उन दोनों की नजर खिड़की पर पड़ना स्वाभाविक था इसलिए वो एकदम से हडबढ़ाते हुए बोली,,,)

राजू छोड़ो मुझे दरबार की नजर अगर पड़ गई तो गजब हो जाएगा,,,

हो जाने दो मेरी रानी,,,(सोनी की गांड को दोनों हाथों में पकड़ कर दबाते हुए राजू बोला)

अरे पागल हो गए हो क्या अगर वालों की नजर हम दोनों पर पड़ गई तो मैं बदनाम हो जाऊंगी,,,,

तो क्या हो गया तुम तो मेरी रानी हो,,,,

तुम्हारी रानी हूं तभी तो कहती हूं मैं बदनाम हो जाऊंगी तो क्या तुम्हें अच्छा लगेगा,,,,

यह बात है लेकिन वादा करो कि मुझे कुछ भी करने से रोकोगी  नहीं,,,

नहीं रोकुंगी छोड़ो मुझे,,,,

(इतना कहने के साथ ही सोनी की बात पर राजू उसे अपनी बाहों की कैद से आजाद करता हुआ तुरंत लालटेन की तरफ गया और लालटेन को बुझा दिया और यही वह  दूसरे लालटेन के साथ भी किया,,,, कमरे में अंधेरा छा गया लेकिन खिड़की खुली होने की वजह से चांदनी अंदर कमरे तक आ रही थी जिससे उजाला बरकरार था बस इस बात की तसल्ली थी कि बाहर से कोई अंदर देखने की कोशिश करने पर भी देख नहीं सकता कि क्या हो रहा है कौन खड़ा है,,,,,)

राजू का दिल धक-धका रहा था बहुत बार लाला की बहन की जवानी का रस रखने के बावजूद कि राजू एक बार फिर से उसके अंदर समाने के लिए पूरी तरह से तड़प रहा था,,,, यही हाल सोनी का भी था,,, कुछ देर पहले ही राजू जबरदस्त चुदाई करते हुए उसकी बुर की प्यास बुझा चुका था लेकिन इस समय फिर से उसकी बुर पानी छोड़ रही थी,,,, सोनी के कहने पर उसके हवेली के बाहर खड़े पहरेदार उसे इस स्थिति में देखना है इसलिए वह कमरे के दोनों लालटेन को बुझा चुका था लेकिन चांदनी रात की रोशनी खिड़की से कमरे मैं आ रही थी और पूरी ताकत से कमरे को प्रकाशित करने की कोशिश कर रही थी राजू को चांदनी रात की रोशनी में सोनी का खूबसूरत नंगा बदन कहार एक कोना साफ-साफ नजर आ रहा था,,,, सोनी अपनी भैया की मजबूरी बता चुकी थी और राजू बिना विचलित हुए लाला के द्वारा दिए गए जिम्मेदारी को अपने सर पर उठा लिया था इसके पीछे उसका भी एक लालच था वह आधा मालिक बन चुका था और साथ ही हवेली की खूबसूरत औरत को भोगने का सुख हमेशा हमेशा के लिए प्राप्त होने वाला था इसलिए वह इस मौके को अपने हाथ से जाने नहीं देना चाहता था लेकिन वह यह नहीं जानता था कि विक्रम सिंह जैसे मजबूत और बलिष्ठ जमीदार आदमी से कैसे मुकाबला कर पाएगा,,,, लेकिन इस समय वह विक्रम सिंह के बारे में सोच कर अपना सारा मजा किरकिरा नहीं करना चाहता था इसलिए अपना सारा ध्यान वह लाला की बहन पर केंद्रित किया हुआ था क्योंकि वह जानता था कि तब की तब देखेंगे लेकिन इस समय का मजा तो उठा लिया जाना चाहिए,,,,,

कमरे में पूरी तरह से मदहोशी का आलम छाया हुआ था दो बदन पूरी तरह से उत्तेजना से भरे हुए थे राजू का लंड पूरी तरह से अपनी औकात में था और सोनी के बुर पानी से लबालब  थी,,,, चांदनी रात की रोशनी में राजू मदहोशी भरी नजरों से सोनी के नंगे बदन को देख रहा था उसकी बड़ी बड़ी छातियों को देख रहा था उसकी टांग के बीच की पतली दरार को देख रहा था और सोनी शर्म से पानी पानी हुई जा रही थी भले ही वह राजू के साथ अनेकों बार संभोग रत हो चुकी थी लेकिन फिर भी उसकी आंखों में शर्म साफ नजर आ रही थी राजू तुरंत उसका हाथ पकड़ कर अपनी तरफ खींचा और उसे अपनी बाहों में भर कर उसकी आंखों में आंखें डाल कर बोला,,,,

सोनी अब तो ठीक है ना अब तो पहरेदार की नजर नहीं पड़ेगी ना,,,,

नही,,,,(उत्तेजना के मारे कांपते होठों से उसके मुंह से इतना ही निकला और राजू उसके लाल लाल होंठ पर अपने होंठ रख दिया और कुछ देर तक उसके होठों का रसपान करने के बाद उसकी कलाई पकड़ कर उसे कुर्सी तक लाया और कुर्सी पर बिठा दिया और खुद घुटनों के बल बैठ गया कुर्सी पर बैठी हुई सोने की दोनों टांगों को फैला कर और उसके नितंबों को आगे की तरफ खींचकर एकदम किनारे कर लिया और उसकी काम रस से भरी हुई बुर पर अपने होंठ रख कर उसे चाटना शुरू कर दिया,,,,,,,, सोनी उत्तेजना से सिहर उठी वह तुरंत अपना हाथ आगे बढ़ाकर राजू के बालों को अपनी मुट्ठी में भींच ली और उसके होठों का दबाव अपनी बुर पर बढ़ाने लगी,,, और राजू पागलों की तरह अपनी जीभ को सोनी के बुर में डूबो डूबो कर चाटने लगा ,,, पूरे कमरे में सोनी की गरमा गरम सिसकारी गूंज रही थी ,,,,, राजू भले ही सोनी की बुर चाट रहा था लेकिन उसके दिमाग में कुछ और चल रहा था और अपनी सोच के मुताबिक ही वह अपने होठों को उसकी बुर से अलग किया और खुद खड़े होकर सोनी को भी खड़े होने के लिए बोल दिया सोनी को समझ में नहीं आ रहा था कि राजू अब क्या करने वाला है राजू ने तुरंत उसे कुर्सी के ऊपर ही अपने दोनों घुटने रखकर कुर्सी के पार्टियों को पकड़कर अपनी गोल-गोल गांव को ऊपर की तरफ उठाने के लिए बोला,,,, राजू की बात सुनकर सोनी को ऐसा लगा कि अब राजू पीछे से उसकी लेने वाला है इसलिए वह भी राजू की बात मानते हैं वह अपने दोनों घुटनों को कुर्सी के ऊपर रखकर कुर्सी के पार्टी को पकड़कर अच्छे से बैठ गई और अपनी गांड को हवा में उठा दी और लहराने लगी चांदनी रात में सोनी की गोरी गोरी गांड और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी जिसे देखकर राजू के मुंह में पानी आ रहा था वह उसकी गोल-गोल गांड को देखकर अपने पर काबू नहीं रख पाया और तुरंत उसकी गांड पर चपत लगाने लगा इससे सोनी को दर्द तो हो रहा था लेकिन उसे दर्द के बदले आनंद भी अत्यधिक प्राप्त हो रहा था देखते ही देखते राजू ने उसकी गांड की दोनों फांकों पर चपत लगाते हुए उसे टमाटर की तरह लाल कर दिया,,,,

सहहहह हाएएएए,,,, मेरी रानी तेरी गांड कितनी गोल गोल है कसम से तभी तो लाला भी तुझ पर पागल हुआ है,,,,(सोनी की गांड को सहलाते हुए राजू बोला,,,) सच-सच बताना लाला के साथ मजा आता है कि नहीं,,,.

नहीं रे राजू मजा तो मुझे सिर्फ तेरे साथ ही आता है,,, तेरा लंड जब मेरी बुर के अंदर जाता है ना तो ऐसा लगता है कि जैसे कोई ने मुंसल डाल दिया हो,,,, ऐसा लगता ही नहीं कि किसी इंसान का लैंड है ऐसा लगता है कि गधा का अंदर जा रहा है,,,,

क्या बात कर रही है मेरी रानी,,,,ऊफफ,,, तेरे मुंह से इस तरह की गंदी बातें सुनकर तो मेरा लंड फटने जैसा हो जाता है,,,,,

आहहह देखना फट ना जाए फिर मेरा क्या होगा,,,,

तू चिंता मत कर मेरी रानी फटेगा भी तो तेरी बुर में,,,,उफफ तेरा गुलाबी छेद,,,(थोड़ी सी गर्दन तो नीचे झुका कर सोनी की बड़ी बड़ी गांड के बीचो-बीच देखते हुए बोला,,,) अब तो मुझसे बिल्कुल भी रहा नहीं जा रहा है,,,,आहहहह मेरी जान,,,(और इतना कहने के साथ ही राजू अपने घुटनों के बल नीचे बैठ गया उसकी गोल-गोल गांड को अपने दोनों हाथों से पकड़े हुए बस थोड़ा सा और ऊपर उठाकर अपनी जीभ को उसकी टपकती हुई बुर पर रखकर चाटना शुरु कर दिया और एक बार फिर से सोनी के मुंह से गरमा गरम सिसकारी की आवाज आने लगी,,,,, राजू भले ही सोनी की बुर चाट रहा था लेकिन उसका ध्यान उसके दूसरे छेद पर था जो कि इस समय बहुत ही खूबसूरत लग रहा था और बिल्कुल भी देर किए बिना राजू अपने पैसे होठों को सोनी के भूरे रंग के छेद पर रख दिया और जीभ निकाल कर चाटने लगा इस तरह एकाएक,,,, अपनी गांड के छोटे से छेद पर राजू के होठ और उसकी जीभ को महसूस करते ही सोनी एकदम से गनगना गई और अंदर ही अंदर सिहर उठे पल भर में उसे आम के बगीचे वाला दृश्य नजर आने लगा जब राजू ने पहली बार उसकी गांड के छेद को अपने लंड की मोटाई से खोला था उस समय दर्द तो बहुत हुआ था लेकिन मजा भी बहुत आया था लेकिन फिर से उस दर्द के बारे में सोच कर ही उसके पसीने छूटने लगे थे लेकिन वह अच्छी तरह से जानती थी कि राजू को उसकी मनमानी करने से वह रोक नहीं पाएगी क्योंकि वह पहले से ही उसे वचन दे चुकी है और वैसे भी भले ही दर्द क्यों ना महसूस हो मजे की चाहत उसे भी थे जो कि गांड मरा ने में कुछ अजीब ही मजा आता है,,,,,

सोनी इस बात को अच्छी तरह से जानती थी कि उसके भाई की बस का बिल्कुल भी नहीं है उसकी गांड मारना क्योंकि वह जानती थी कि उसके भाई के लंड का कड़ापन  राजू के लंड के कड़क पन जितना बिल्कुल भी नहीं है,,,,, और लाला तो उसकी गांड मारने के बारे में सोच‌ ही नहीं सकता था और राजू था कि उसकी गांड के उस छोटे से छेद को अपनी जीभ से चाट रहा था और जैसे-जैसे जीभ उसकी गांड के छेद पर घूम रही थी वैसे वैसे सोनी के तन बदन में अजीब सी हलचल हो रही थी वह पागल हुए जा रही थी,,,।

राजू बड़ी दिलचस्पी लेकर सोनी की गांड को चाट रहा था दोनों हाथों से गांड को पकड़कर गांड चाटने का मजा ही कुछ और है,,, राजू इस बात को भी अच्छी तरह से जानता था कि गांड मरवाने के लिए अच्छा खासा जिगर चाहिए सबके बस की बात भी नहीं है और तब तो और भी कोई भी औरत हिम्मत नहीं कर सकती जब गांड के छेद में जाने वाला लंड कुछ ज्यादा ही मोटा और लंबा हो इसीलिए तो वह सोनी की हिम्मत को सलाम करता था सोनी अपनी गांड को गोल-गोल घुमा कर राजू की चटाई का मजा ले रही थी,,,, और देखते ही देखते राजू में अपनी जीभ का कमाल दिखाते हुए सोनी को पूरी तरह से मस्त कर दिया और गांड मरवाने के लिए उत्सुक भी कर दिया,,,,,

राजू अच्छी तरह से जानता था कि आज सोने की गांड मारने में तेल की जरूरत पड़ने वाली थी इसलिए वह उसी स्थिति में सोनी को छोड़कर तुम्हें तो भागता हुआ गया और रसोई घर में से एक कटोरी सरसों का तेल लेकर आ गया और उसकी धार को सोनी की गांड पर गिराने लगा,,,, सोनी तेल की धार को अपनी गांड के छेद पर महसूस करके पूरी तरह से मदहोश में जा रही थी थोड़ा सा तेल राजू ने अपने लंड पर भी लगा लिया था की गांड के छेद में घुसने किसी भी प्रकार की परेशानी ना हो,,,,

राजू आधी कटोरी सरसों का तेल अपने लंड और सोनी की गांड के छेद पर बर्बाद कर चुका था लेकिन वहां अच्छी तरह से जानता था कि सरसों के तेल की बर्बादी उसे कामयाबी तक ले जाएगी और देखते ही देखते राजू अपने लंड के सुपाड़े को सोने की गांड के छोटे से छेद पर सटा दिया और जैसे ही सोनी को अपनी गांड के छेद पर गरमा गरम लंड का सुपाड़ा महसूस हुआ वह तुरंत पीछे की तरफ देखते हुए अपना हाथ पीछे की तरफ ले गई और राजू के लंड को पकड़ कर उसे रोकते हुए बोली,,,।)

नहीं राजा ,,,, मुझे बहुत दर्द करता है,,,

मस्त भी तो कर देता हैं,,,,

नहीं नहीं तुम मेरी बुर ले लो लेकिन गांड को छोड़ दो,,,

नहीं मेरी जान,,,(उसकी कलाई पकड़ कर उसे अपने लंड से हटाते हुए) आज बहुत दिनों बाद ऐसा मौका मिला है कि  में जमकर आज तुम्हारी गांड मार सकता हूं,,,(और इतना कहने के साथ ही एक बार फिर से लंड को उसकी गांड के छेद पर लगा दिया और हल्का सा धक्का मारा था लंड का सुपाड़ा आधा प्रवेश करा दिया इतना तो राजू को विश्वास ही था कि वह बड़े आराम से सोनी की गांड मार सकता है क्योंकि एक बार वह इस का सुख प्राप्त कर चुका था,,, लेकिन इस हल्के से प्रहार से भी उसके मुंह से हल्की सी चीख निकल गई राजू अच्छी तरह से जानता था कि जितना दर्द वह झेल पाएगी उससे ज्यादा मजा भी वह ले पाएगी,,,, और इसीलिए अपना प्रयास जारी रखते हुए राजू उसकी गोल-गोल गांड को अपने दोनों हथेली में दबाए हुए सकासा और अपनी कमर को आगे की तरफ ठेला,,, और इस बार उसके थोक की चिकनाहट पाकर एंड का आधा बचा भाग भी गांड के छेद में समा गया और एक बार मुंह चला जाने के बाद तो पूरा का पूरा दस्ता ही अंदर घुस जाता है इसीलिए राजू के चेहरे पर मुस्कुराहट आ गई और वह तुरंत बाकी बचा लंड हल्के हल्के धक्के के पहाड़ के साथ वह पूरा का पूरा सोनी की गांड में उतार दिया,,,,,

देख रही है छीनार पूरा का पूरा लंड तुने अपनी गांड से खा गई है,,,,।

आहहहह तेरा लंड इतना स्वादिष्ट है कि थोड़ा सा खाने में मजा ही नहीं आती पूरा का पूरा खाने में ही मजा आता है,,,

तो फिर देर किस बात की है रानी पूरा का पूरा तो तु खा चुकी है अब देखने तेरी कैसे गांड मारता हूं,,,,।

(शुरू से लाला अपनी बहन की चुदाई करता रहा है लेकिन गांड मारने के बारे में उसने कभी सोचा भी नहीं था लेकिन राजू उसे सब सुख दे रहा था थोड़ी सी भी कसर बाकी नहीं रख रहा था इसीलिए तो सोनी राजू की दीवानी थी,,,, राजू कुर्सी पर घोड़ी बनाकर सोनी की गांड मार रहा था सोनी कुर्सी के हत्थे को कस के पकड़ कर अपने आप को संभाले हुए थी,,, शुरू शुरू में तो सोनी को बहुत दर्द हो रहा था ऐसा लग रहा था कि उसकी गांड के छेद में लंड नहीं बल्कि गरम सरिया जा रहा हो लेकिन देखते ही देखते थोड़ी ही देर में राजू का लंड गांड के छोटे से छेद में भी आनंद भरने लगा सोनी पूरी तरह से मदहोश होने लगे और देखते-देखते उसके मुंह से गर्मागर्म सिसकारी की आवाज आने लगी राजू पागलों की तरह उसकी कमर पकड़े अपनी कमर को हिला रहा था वह सोनी की गांड मार रहा था महीनों बाद उसे गांड मारने का शुख प्राप्त हो रहा था,,,,

राजू जोर-जोर से अपनी कमर हिला रहा था और खिड़की से बाहर हवेली की पहरेदारी कर रहे दोनों पहरेदार को भी देख रहा था जो कि बीड़ी जलाकर बीड़ी का कस खींच रहे थे लेकिन उन दोनों का ध्यान हवेली के ऊपर बिल्कुल भी नहीं था बल्कि वालों सामने की ओर ध्यान करके बैठे हुए थे और ऐसा करना भी था,,, राजू भी इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि पहरेदार की नजर खिड़की पर पड़ जाने से लालटेन की रोशनी में दोनों को पहचाने जाने की आशंका थी राजू तो लड़का था उसका तो कुछ भी नहीं होता लेकिन सोनी बदनाम हो जाती,,, इसलिए तो राजू ने लालटेन को बुझा दिया था और चांदनी रात की रोशनी में सोनी की गांड मार रहा था,,,,,

राजू सोने की गांड मारने में अपनी पूरी ताकत झोंक दे रहा था वह जानता था कि पुर से ज्यादा गांड मारने में मेहनत लगती है और अगर ज्यादा देर ठहर ना पाओ तो सारा मजा किरकिरा हो जाता है लेकिन राजू को अपने लंड की मर्दाना ताकत पर पूरा भरोसा था और वैसे भी कुछ भ पहले ही वह अपना पानी निकाल कर आया था इसलिए इस बार पानी निकलने में थोड़ा समय लग रहा था और इसी का फायदा उठाते हुए राजू लाला की बहन की गांड मारने का शुभ प्राप्त कर रहा था लाला की बहन कुर्सी पर घोड़ी बनी बैठी हुई थी एकदम नंगी और राजू का लंड उसकी गांड के छेद में घुसकर छल्ला बनाया हुआ था,,,, राजू अपने दोनों हाथ को आगे की तरफ लाकर सोनी के दोनों दशहरी आम को पकड़कर जोर-जोर से दबाते हुए अपनी कमर हिला रहा था सोने की गवाही गोल-गोल रिदम नरम नरम थी ऐसा लग रहा था कि जैसे पूर्वी भरकर तकिया बनाया हो और ऐसे हालात में जब-जब राजू का प्रहार गांड के छेद पर पड़ रहा था तो सोने की बड़ी-बड़ी गांड पानी भरे गुब्बारे की तरह लहरा उठ रहे थे जिसे देखकर राजू की उत्तेजना ओर बढ़  जा रही थी,,,।

सोनी के कमरे की खिड़की खुली हुई थी और खिड़की का पर्दा एक तरफ होकर हवा के झोंकों से लहरा रहा था सोनी अभी भी चाहती थी कि राजू खिड़की का पर्दा भी लगा दे लेकिन वह जानती थी कि ऐसा राजू नहीं करेगा क्योंकि एकदम अंधेरे में राजू को चोदने में मजा नहीं आता उसे चुदाई का मजा तभी ज्यादा आता है जब एक दूसरे का बदन साफ साफ दिखाई देता हो,,,

राजू का लंड बेहद बलिस्ठ था इसीलिए तो बड़े आराम से बिल्कुल भी नरम पड़े बिना सोनी की गांड के छोटे से छेद में अंदर बाहर हो रहा था राजू का मोटा लंड सोनी की गांड के छोटे से छेद को छल्ला नुमा बना दिया था,,,, धीरे-धीरे राजू चरम सुख के करीब पहुंच रहा था जिसे जिसे वह चरम सुख के करीब पहुंचता जा रहा था वैसे वैसे उत्तेजना और बढ़ती जा रही थी वह दोनों हाथों को आगे बढ़ा कर नीचे की तरफ से ला करके उसके कंधों को दोनों हाथों से पकड़ लिया था और उसे हल्के से उठाते हुए अपनी तरफ खींच लिया था लेकिन इस तरह से उसके बदन को कमान की तरह ताना था कि उसकी गांड ऊपर की तरफ उठी हुई थी और कमर अंदर की तरफ धंसी हुई थी एकदम धनुष की तरह ऐसे में उसकी गोल-गोल गांड एकदम लंड गहराई तक जाने पर राजू के बदन से फटी हुई थी और राजू को सोनी की गोल-गोल नरम नरम गांव का स्पर्श इतना जबरदस्त लग रहा था कि वह पागलों की तरह अपनी कमर हीलाता हुआ सोने की गांड मार रहा था सोनी पूरी तरह से मदहोश हो चुकी थी,,, सोनी को इस बात का अहसास हो रहा था की चुदाई करते समय राजू और भी ज्यादा ताकतवर हो जाता था इसीलिए तो वह बड़े आराम से अपनी कमर हिलाता हुआ उसकी गांड मार रहा था,,,,,।

खिड़की से शीतल पवन का झोंका पूरे कमरे में फेल जा रहा था लेकिन फिर भी दोनों के बदन की जवानी की गर्मी के कारण दोनों के बदन से पसीना टपक रहा था दोनों पसीने से तरबतर हो चुके थे लेकिन फिर भी पीछे हटने का नाम नहीं ले रहे थे,,,, देखते ही देखते राजू की सांसें उखड़ने लगी सुबह चर्मसुख के बेहद करीब पहुंच चुका था और इस दौरान वह बड़ी ही तीव्रता से अपनी कमर को हिला रहा था मानो कि जैसे कोई मोटर हो,,, और देखते ही देखते हल्की चीख के साथ वह अपना गरम लावा सोनी की गांड में भरने लगा,,,,

दोनों एकदम शांत हो चुके थे राजू ने धीरे से अपने लंड को सोनी की गांड से बाहर निकाला जो की पूरी तरह से गरमा गरम था,,,, और लंड को पकड़ कर हिलाते हुए बोला,.

मुझे आज अपने लंड पर बहुत गर्व हो रहा है कि तुम जैसी खूबसूरत औरत की गांड में पूरा का पूरा घुसकर एकदम मस्त कर दिया,,,

तुम्हें तो गर्व हो रहा है लेकिन मेरी तो हालत खराब हो गई मेरी गांड फाड़ के रख दीए,,,,(कमर पर हाथ रखे हुए वह धीरे से उठते हुए बोली)

मजा तो ऐसी ही चुराई में आती है जब गांड और बुर दोनों फट जाए,,,

ना बाबा ना चुदाई से तो मैं दूर ही रहती हूं और हां अपने लंड को धो कर आना वरना मैं इसे अपने मुंह में नहीं लूंगी,,,।

(सोनी की इस तरह की बातें सुनकर राजू मुस्कुराने लगा कि कि वह जानता था कि सोनी ऐसा क्यों कह रही है क्योंकि लंदन में उसकी गांड के छेद का सफर जो करके आया था इसलिए वह गहरी  सांस लेते हुए बोला)

कोई बात नहीं मैं अभी जाता हूं और धोकर आता हूं क्योंकि रात भर मजा जो करना है,,,,।

(राजू जल्दी से हवेली के बाहर वाली जगह पर गया जहां पर वह मुंह धोया था और सोनी मोटा तगड़ा लंड गांड के छेद में जाने से ठीक से चल नहीं पा रही थी वह अपनी कमर पर हाथ रखकर धीरे-धीरे चल रही थी उसे हल्का हल्का दर्द हो रहा था लेकिन जो मजा राजू ने दिया था वह बेहद अद्भुत और मदहोश कर देने वाला था थोड़ी देर में राजू अपने लंड को धोकर वापस आ गया था तब तक सोनी अपने नरम नरम बिस्तर पर पीठ के बल लेटी हुई थी चांदनी रात की चांदनी बिस्तर तक थोड़ी धीमी पड़ जा रही थी इसलिए राजू कमरे में आते ही कोने में पड़ी एक लालटेन को जला दिया और उसकी पीली रोशनी में पूरा कमरा जगमगा उठा,,,, और फिर बिस्तर पर बैठ कर कुछ देर बातें करने के बाद राजू ने फिर से सोने की दोनों टांगों को फैला कर अपने होठों को उसकी बुर पर लगा दिया लेकिन इस बार वह  आसन की कला दिखाते हुए एक साथ दोनों को मजा मिले किस तरह की तरकीब लगाया था और राजू सुदूर को चाट रहा था और सोनी उसके लंड को मुंह में लेकर चूसने ही थी इस तरह से दोनों एक दूसरे के अंगों को आनंद ले रहे थे,,,, और कुछ देर बाद राजू ने सोने की दोनों टांगों को अपने कंधे पर रखकर अपने लंड को उसकी बुर में डालकर चोदना शुरू कर दिया और यह सिलसिला सुबह तक चला जब तक कि सूरज की पहली किरण ना दिख जाए,,,,, सुबह होते ही राजू हवेली से बाहर निकल गया और रात भर की चुदाई से सोनी पूरी तरह से थक चुकी थी इसलिए नंगी ही बिस्तर पर सो गई थी,,,,

लाला जब हवेली में प्रवेश किया तो सीधा अपनी बहन के कमरे में पहुंच गया दरवाजा खुला हुआ था दरवाजे पर खड़ा होकर उसकी नजर बिस्तर पर पड़ी तो सोने की हालत देखकर उसकी आंखें चौंधिया गई और उसके चेहरे पर मुस्कान तैरने लगी,,,, अपनी बहन को बिस्तर पर नंगी देखकर और उसे चैन की नींद लेता हुआ देखकर उसे समझते देर नहीं लगी कि सोनी अपनी जवानी का जलवा राजू को दिखा चुकी है और अपनी जवानी का रस उसे पीला भी चुकी है अब उसका काम एकदम आसान हो जाएगा लेकिन इस समय अपनी बहन के नंगे बदन को देखकर लाला की आंखों में वासना की चमक उठने लगी और वह धीरे से बिस्तर की तरफ आगे बढ़ा,,,, और बिना कुछ बोले अपने सारे कपड़े उतार कर नंगा हो गया पर अपनी बहन की दोनों टांगों को खींचकर उसे बिस्तर के किनारे कर दिया उसकी बुर उसे साफ दिख रही थी जो कि पूरी तरह से भीगी हुई थी,,,, जिसे लाला ने अपनी धोती से साफ किया और फिर उसमें लैंड डालने का प्रयास करने लगा तो तुरंत सोनी की नींद खुल गई और वह चकर पकर देखने लगी,,, तो लाला बोला,,,।

घबराओ मत में हूं,,,

राजू कहां है,,,?

राजू के चला गया था जब मैं घर आया हमारी हालत देख कर लग रहा है कि रात भर तुमने राजू को मजा दि हो,,,

(अपने भाई की बात सुनकर सोनी मुस्कुराने लगी और उसकी मुस्कुराहट देखकर लाना तुरंत उसकी टांगों को फैला कर उसके अंदर समा गया और अपनी कमर हिलाने लगा अपनी कमर हिलाते हुए बहुत सोनी से बोला,,,)

क्या राजू इतना बड़ा खतरा अपने सर पर लेगा,,,

वह तैयार है भैया मैं उसे सब कुछ बता दि हूं,,,

ओहह सोनी तुमने मेरा कितना बड़ा काम की हो यह तुम भी जानती हो मैं बहुत खुश हूं तुमसे सोनी,,,।

(और फिर जोर-जोर से अपनी कमर हिला कर वहीं ढेर हो गया)

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