CAHPTER – 5
सपने की दुनिया
सोनिया को हल खुद-ब-खुद ही सूझ गया –
राज शर्मा, पड़ोस में एक लड़का था।
उम्र उन्नीस लम्बे फैशनेबल बाल, नशीली आँखें।
दो साल पहले ही तो शर्मा परिवार पड़ोस में आया था।
माँ रजनी शर्मा, जुड़वाँ बहन डॉली।
डॉली का तो उसके घर अच्छा आना जाना भी था।
“राज ही ठीक रहेगा! पर साले को लाइन कैसे मारू ?
घर के प्रईवेट स्विमिंग पूल की मरम्मत करने जब आयेगा तभी मौका मिल सकता है।”
सोनिया यूं योजना बना चुकी थी।
राज को पटाने की इस साजिश उसके चेहरे पर वासना भरी एक मुस्कान ले आयी थी। |
नींद के आगोश में अब उसके मन में बाप के बारे में पाप भरी तस्वीरें नाच रहीं थीं।
सपने मे उसने देखा कि डैडी अपने भारि-भरकम लन्ड
को हाथ मे लिये उसकी फैली हुई जाँघों के बिच झुके हुए थे।

पास ही उसकी मम्मी और भाई बिलकुल नगे खड़े थे।
भाई जय का लंड बिलकुल बाप जैस लम्बा और कड़क तना हुआ।
डैडी ने जैसे अपने लन्ड के सिरे से उसकी चूत के दरवाजे को खटखटाया,
सोनिया शरम से माँ से कहने लगी।
“मम्मी मुझे माफ़ करना।
मैं खुद को रोक नहीं पायी!”
पर मम्मी के चेहरे पर वासना की लाली थी और
वो नजारा देख कर रन्डीयो जैसे बेशरम हो कर मुस्कुरा रही थी।
“मुझे कोई ऐतराज नहीं बेटी! मेरे वास्ते मस्ती की चीज तो मेरी मुठी में ही है!”
माँ रीटा जी की हथेली प्यार से बेटे जय के कड़क लन्ड पर लिपटी हुई थी।
जय जवाब में एक हाथ से मम्मी के उभरे हुए पुख्ता मम्मों को दबा हुआ था
और दूसरे से मम्मी की रिसती हुई झांटेदार चूत को टोल रहा था।
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“पर मम्मिं अपने ही बेटे से !!”
माँ को भाई जय के तने लन्ड को अपनी चूत के झोलों में डालते देख वो बोली।
“तो क्या मेरा बेटा चोदना नहीं जानता ?
एक बार तु भी आजमा कर देख मादरचोद को !”
सोनिया को यकीन नहीं हुआ
जब मम्मी ने एक झटके में भाई का लोहे सा तना
लन्ड चूत मे हड़प लिया।
ठीक उसी समय उसने अपने डैडी का बम्बू अपनी
चूत को चीरता हुआ महसूस किया।
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फिर उसके मुँह से जो चीख निकली उसमे दर्द नहीं,
केवल रोमांच था।
अपने सपने की झूमती कल्पना में उसने अपनी माँ
को भी उसी मिठे पाप के उन्माद में चीखते सुना।

