उधर स्विमिंग पूल में, टीना जी राज के हाथ को थामकर पानी से बाहर निकलीं और उस नौजवान को अपने पीछे खींचती हुई चल पड़ीं।
“आप दोनों किधर चले मम्मी ?” सोनिया मुस्कुरायी थी।
बेटा मैं अंदर जा रही हैं। राज चाय-नमकीन परोसने में मेरी मदद करेगा। चाहो तो तुम भी हमारे साथ आ जाओ ?”
“अभी नहीं मम्मी, मैं जाकर देखती हूँ जय और रजनी आँटी जैकूजी में क्या खिचड़ी पका रहे हैं।”
टीना जी को जय को लगभग घसीटते हुए अंदर ले जाते देख , सोनिया ने उनकी दिशा में अर्थपूर्ण मुस्कान दी।
* खूब समझती हूँ आपका चाय-नमकीन !’, राज के हाथों को अपनी माँ के कसैल नितम्बों को उनकी बिकीनी की जाँघिया के ऊपर से दबाते हुए देखकर उसने सोचा। सोनिया जैकूजी की दिशा में यह पता लगाने चली कि रजनी जी ने उसके भाई के साथ कितनी प्रगति कर ली थी। |
मिस्टर शर्मा और डॉली ने स्विमिंग पूल में ही रहना उपयुक्त समझा, और जब उन्हें एकांत का अहसास हुआ, तो उनके बीच मर्यादा की बची-खुची सीमायें भी लुप्त हो गयीं। मिस्टर शर्मा उसे गोद में उठाकर अपने हाथों को बेतहाशा उसकी किशोर देह के प्रत्येक भाग पर फेरने लगे, और हर क्षण उसकी कामोत्तेजना को बढ़ाते चले गये।
“ऊहह , छोड़िये ना शर्मा अंकल, कोई देख लेगा!”, सोनिया ने अदृढ़ विरोध प्रकट किया था, और साथ ही अपने तप्त योनि स्थल को उनके टटोलते हाथ पर दबाने लगी।
“आ भी जाओ मेरी जान ! इनकार मत करो डॉली बेटा! मुझे मालूम है तेरी चूत कब से सैक्स के लिये तरस रही है !” । | डॉली ने अपना एक हाथ उनके ट्रैक के भीतर घुसाकर उनके लिंग को कस के हथेली में दबोचा, और अपनी उंगलियों के बीच उस फूले हुए वासना उद्रिक्त अंग की सशक्त फड़कनों का अनुभव करने लगी। ।
“हाँ, आप सच कहते हैं! मैं इस लन्ड की प्यासी हूँ, अंकल ! ::: मुझे आपका लन्ड चाहिये! ::: पर … पर टीना आँटी ?” भर्राये स्वर में डॉली ने कहा और समाज की बनायी कृत्रिम सीमाओं को लांघ कर अपनी वासना की भूख को स्वीकर लिया। उत्तर में मिस्टर शर्मा ने अपने एक हाथ को उसकी बिकीनी जाँघिया के इलास्टिक में डालकर उसके योनि स्थल पर फेरा। | फिर उसकी फिसलन भरी टाइट मांद में एक उंगली को घुसाकर मिस्टर शर्मा ने उसके सुन्दर मुख को देखा, और उसकी काजल से सजी, हरे रंग की गोल-गोल आँखों में उसकी तीव्र कामेच्छा को भाँपा।।
“देखा नहीं, तुम्हारी टीना आँटी किस स्पीड से राज को इधर से घसीट कर ले गयी थीं, मुझे पक्का मालूम है कि उसने अपने लिये तुम्हारे भाई के लन्ड को रिजर्व कर लिया होगा,” उन्होंने फंकार कर कहा, और अपनी उंगली को हौले हौले उसकी जकड़ती योनि के भीतर मसलने लगे,
“कसम से मेरी जान! ::: तेरी चूत गजब की गर्माने लगी है !” ।
“ओह, शर्मा अंकल !”, डॉली अपनी योनि को उनकी खोदती उंगली पर मसलते हुए कराहने लगी। “चोद मुझे ! • • • इसी वक़्त! • • • • यहीं पर, शर्मा अंकल! :: यहीं पानी में ही मुझे चोद ले !” ।
अपनी देह की वासना के शिकार पड़ोसी नितांत बेसब्री से एक दूसरे के वस्त्रों को उतारने लगे, और मिस्टर शर्मा आत्मीयता से किशोरी डॉली का चुम्बन लेने लगे। जब दोनो एकदम नग्न हो गये, तो मिस्टर शर्मा उसे स्विमिंग पूल के किनारे पर ले गये और उसे ऊपर उठा लिया। डॉली ने अपनी टाँगों को उठाकर भली भांति फैला दिया ताकि वे आसानी से उसकी योनि में लिंग को प्रविष्ट करा सकें। संध्या की रोमांचक सरगर्मियों के उपरांत, डॉली की योनि में प्रचुर चिकनाहट उत्पन्न हो चुकी थी और वो सर्वथा सम्भोग क्रीड़ा के लिये प्रशस्त थी। मिस्टर शर्मा का लिंग उसकी पटी हुई योनि कोपलों को इस सरलता से भेद ग्या, जैसे मक्खन में गरम चाकू उतर जाता है। | अपनी योनि में लिंग के अचानक और उत्कृष्ट रूप से प्रविष्ट होने के कारण डॉली ने कंठ की गहराई से एक कराह निकाली, और यौनक्रीड़ा में अपने नवीनतम सहभागी के नितम्बों पर अपनी लम्बी , सुडौल टाँगों को सहारे के लिये बाँध लिया। उसने घुटने मोड़ रखे थे और वो अपनी जाँघों को चौड़ी फैलाये हुए थी। मिस्टर शर्मा का लिंग उनकी ठूसी हुई योनि के भीतर गतिशील हो गया था, तीव्र और सशक्त लय से भीतर फिर बाहर कूद-कूद कर यौनक्रिया कर रहा था।
“ओहहहह, ऐ भगवान! कैसा मस्त लन्ड है! ::: ओह, मुझे चोदो शर्मा अंकल ! आँह, मुझे चोदो !”
डॉली जोर से चीखी और अपनी पीठ को तानने लगी। मिस्टर शर्मा ने उसके भरपूर कूल्हों को पकड़ा और अतिरिक्त शक्ति लगाकर ठेलने लगे। डॉली की तपती और आतुर योनि के अद्भुत कसाव के मारे वे रोमांचित हो रहे थे।
“डॉली बेटी, बड़े दिन बाद हाथ आयी है तेरी ये कमसिन चूत !”, मिस्टर शर्मा गुर्राये, और दरिन्दगी से अपने विशालकाय लिंग को किशोरी की योनि में ठेलने लगे। इस टाइट चूत को ऐसा चोदूंगा, ऐसा चोदूंगा कि तुझे नानी याद आ जायेगी! ::: आज की तारीख याद कर ले, आज की चुदाई तुझे जमाने तक याद रहेगी, मेरी जानेमन !”
डॉली अब भी सहारे के लिये स्विमिंग पूल के किनारे को थामे हुए थी, और मिस्टर शर्मा अपने इस्पात से कठोर लिंग को उसके भीतर पटके जा रहे थे, हर झटके के साथ वह शिलास्तम्भ उसके चोंचले पर घिसता जा रहा था। उसके स्तन हिचकोले खाते हुए फुदक रहे थे, और जब भी वे अंदर को ठेलते , उसकी कमर निरंकुशता से झूमती बलखाती जाती थी। मिस्टर शर्मा ने डॉली कि नितम्बों को पानी की स्तह से हलका सा ऊपर उठा रखा था, उन्होंने उसके नितम्बों के चिकने और कसैल माँस को अतिरिक्त बलसंवर्धन के वास्ते कस के जकड़ा हुआ था। उनका स्थूलकाय लिंग उसकी योनि को गहनता से भेदे हुए था, और हर ठेले के साथ योनि के कोष्ठ को खींच -तान रहा था। डॉली को अपनी योनि पूरी तरह से भरी हुई अनुभव होती थी, परन्तु फिर भी, हर ठेले के साथ, वो मिस्टर शर्मा के रौद्र बलवान लिंग के हर फड़कते इन्च को अपने अंदर समा लेने का यथेष्ट प्रयत्न कर रही थी।
“और अंदर! • और अंदर, अंकल! अँहहह! अपने मोटे काले लन्ड को मेरी चूत में और अंदर घुसा, बेटीचोद !”, डॉली चीखी थी। वो अनियंत्रित वासना के मारे चीख-बिलख रही थी, अपने पिता की उमर के पड़ोसी अंकल को उसके साथ आनन्ददायक अश्लीलता भरी हरकतें करने के लिये उकसा रही थी।
“ऊ ऊ ऊह! ऊपर वाले, कैसा शैतान लन्ड है! ::: अहहहह, चोद मुझे, बड़वे! ::: दम लगा के चोद, और बहा दे अपना वीर्य मेरी चूत में ! ::: म्म्म्म! झड़ा दे मुझे बेटीचोद! ::: मेरी चूत को अपने काले लन्ड से चोद-चोद कर झड़ा दे साले! ऊह, शर्मा अंकल, मुझे चोदो ::: मेरी चूत को चोदो ::: मेरी गाँड चोदो ::: मेरे मुँह में चोदो! …. ऊपर वाले, मेरे हर छेद में चोदो.. चोद, चोद के बेहोश कर दे मुझे !” मिस्टर शर्मा मुस्कुराये। ऐसा ही करने का इरादा था उनका।।

