पापी परिवार की पापी वासना – Update 58 | Incest Story

पापी परिवार की पापी वासना – Dirty Incest Sex Story
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58 साम्प्रदायिक भाईचारा

बड़ी सहजता से सोनिया ने अपनी माँ को शर्मा परीवार को फ़ार्म-हाऊस में पार्टी के लिये निमन्त्रित करने के लिये सहमत करा लिया। मिसेज शर्मा ने झट से हाँ कह दिया जब सोनिया ने संकेतात्मक रूप में उन्हें यह सूचित करा दिया कि राज उनपर लट्टू है। उनके तो मन में लड्डू फूटने लगे। अर्से से उनकी निगाह पड़ोस के बाँके नवयुवक पर थी, और अब उनके कुटुम्ब की नवी नवेली लैंगिक स्वतंत्रता के परिवेश में, उन्हें अपनी वर्जित कल्पनाएं साकार करने का अद्भुत अवसार हाथ लगा था।

जब उसके पिता दफ़्तर से घर लौटे, तो सोनिया ने उन्हें भी पट्टी पढ़ा दी। उन्हें बस ऐसा विश्वास दिला दिया कि डॉली उनके पौरुष की कायल है। उसे अपने सदैव कामतत्पर रहने वाले भाई को तो कुछ कहने की आवश्यकता ही नहीं थी, उसके नेत्रों के दीपक तो स्वतः ही प्रज्वलित हो गये। कितनी ही बार वो माँ-बेटी को अपनी ब्रा और पैन्टी सुखाने के लिये रस्सी पर टांगते हुए देख चुका था, ब्रा इतनी बड़ी होगी, तो स्तन कैसे विशाल होंगे ? स्वयं अपने अनुमान की तुष्टि करने के लिये वो आतुर हो उठा।

शहर से बत्तीस किलोमीटर दूर, मिस्टर शर्मा की पुश्तैनी जमीन थी, जिसे अब उन्होंने एक आलीशान फ़ार्महाऊस में तब्दील कर दिया था, थोड़ी खेती थी, और भैंसें पाल रखी थीं। अंदर ड्राइंग रूम, दो बड़े बेडरूम, अटैच बाथ, और एक स्विमिंग पूल भी था। इतवार की शाम छह बजे, निर्धारित समय पर शर्मा परिवार का फ़ार्म हाउस में आगमन हुआ। सैक्स और रोमांच की एक लहर शर्मा परिवार के हर सदस्य के हृदय में उमड़ रही थी। तीनों आरामदेह कपड़े पहनकर आये थे :: डॉली ने श्वेत रंग की कट-स्लीव्ज़ वाली सलवार-कमीज, जिसका लो-कट गला उसके भरपूर रसीले स्तनों को कठिनाई से ढाँक पा रहा था ::: मिस्टर शर्मा और जय ने बड़े हर्ष के साथ नोट किया कि जब भी वो नीचे को झुकती थी, तो स्तनों का वक्र आकार और लुभावनी क्लीवेज साफ़ दिखलाई देती थी। | रजनी जी ने हलके हरे रंग की साड़ी पहन रखी थी जो उनकी हरी रंग की आँखों से खूब में खाती थी। साड़ी का ब्लाऊज बैकलेस था, पीछे केवल दो डोरों से बंधा हुआ, उनकी नंगी छरहरी पीठ का प्रदर्शन करता था। आगे से ब्लाऊज़ के महीन सूती कपड़े में बन्दी बने दो विशाल तरबूजों जैसे स्तन, जिनके सिर्फ़ निप्पल ही कपड़े से ढके हुए थे, ऊपर का आधा भाग अपने दूधिया रंग के आकर्षण से जय और मिस्टर शर्मा की आँखें चकाचौंध कर दे रहा था। उनके बदन में तनिक भी हरकत होती, तो दोनो स्तन झूलने लगते मानो अभी उछल कार ब्लाऊज की कैद से विमुक्त हो जायेंगे। राज ने टी-शर्ट और टाईट जीन्स पहन रखी थी, जिसे टीना जी तुरन्त ही घूरने लगी थीं। राज के तो फ़ार्म हाउस में पाँव पड़ते ही उनकी आँखें उसकी जाँघों के बीच स्थित भरपूर उभार पर गड़ गयी थीं। पहली बार उन्होंने गौर किया कि पड़ोस का ये जवान लड़का एक बाँके लिंग का स्वामी भी था!

“अरे राज !”, टीना जी बोलीं, वे अब भी प्रशंसात्मक निगाहों से उसे घूर रही थीं। “बाप रे बाप! देखते-देखते कितना बड़ा हो गया है रे तू !”

राज हँसा और पहलवानों जैसे बाजुएं फड़काता हुआ शक्ति -प्रदर्शन करने लगा। “माँ का दूध !”, वो हँसा।

रजनी जी टीना जी की ललचाई निगाहों को उनके पुत्र की जाँघों के बीच की दिशा में बार-बार फिसलते देख मुस्कुराईं।

“सच टीना, मालूम ही नहीं चला मेरी आँखों के सामने नालायक कब बड़ा हो गया। मेरा मुन्ना अब जवान हो गया है !” राज के चूतड़ों को हाथों में दबोच कर रजनी जी ने कहा।

“मम्मी जान !” राज ने उन्हें लताड़ा, “आप भी मुझसे बच्चों सा सुलूक करती हैं !”

“बदमाश! बड़ा आया जवान बनने, देखिये ना, सुबह से बच्चों जैसा आप सबसे मिलने को उतावला हो रहा है, डॉली और मुझे तो ठीक से कपड़े भी नहीं पहनने दिये, जबरन घसीटता ले आया, कि देर हो रही है, शर्मा आँटी इंतजार करती होंगी !”’, रजनी जी हँसी और टीना जी के गले मिलकर बोली, “टीना जी, आपसे मिलकर बेहद खुशी हुई। हम सब आपके ऐहसानमन्द हैं कि आपने हमें इतनी मुहब्बत से अपने फ़ार्म हाउस बुलाया।”

टीना जी की योनि में बिजली सी कौन्ध गयी जब रजनी जी के स्तन उनके स्तनों से टकराये। ‘हे ईश्वर !’ उन्होंने सोचा, “क्या मुझे सैक्स के इतने लाले पड़ गये, कि एक औरत का बदन मुझे मस्त कर दे रहा है ?’ उन्होंने झट से खुद को सम्भाला और आतिथ्य दायित्व निभाती हुई शर्मा परिवार को फ़ार्म हाउस के ड्राइंग रूम में तशरीफ़ लेने को कहा।

शीघ्र ही दोनो परिवार आपस में घुलमिल गये और ड्राइंग रूम में प्रेम और मेलमिलाप का वातावरण बन गया, शिष्टाचार का स्थान बन्धुत्व और सहज अनौपचारिकता ने ले लिया। आदर्श मेजबान की तरह, मिस्टर शर्मा अपने अतिथीयों का सत्कार कर रहे थे – राज के लिये व्हिस्की, रजनी जी के लिये विदेशी शैम्पेन, और डॉली के लिये कोल्डड्रिक, बस किसी को हाथ में खाली गिलास थामे नहीं देख सकते थे। डॉली और सोनिया ने भी शैम्पेन । की माँग की तो जिन्दादिली के मूड में सहर्ष तैयार हो गये, जहाँ दो दिन पहले इसी बात पर आगबबूले हो पड़ते।

 

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