57 अलविदा
डॉली और सोनिया बिस्तर पर उनके करीब होती सरगर्मियों से पूरी तरह बेख़बर थीं। दोनो अपने खुद के ऑरगैस्मों की कगार पर आ चुकी थीं, और एक दूसरे की टपकती और कस के फैलायी बुर को बेसुध होकर चाटती, टटोलती और चूसती जा रही थीं।
डॉली ने हर नस्ल की औरतों की चूत को चाट रखा था, पर जवान सोनिया की चूत का जायका जरा हट के था, और जिस से सोनिया उसका जवाब दे रही थी, उससे तो यही अन्दाजा लगाया जा सकता था, कि उस मासूम लड़की ने भी चूत चटाई में महारत हासिल कर ली थी।
सोनिया की जिस्मानी प्यास अब बस बुझने वाली ही थी। डॉली के तपते, चूसते होंठ कस के उसके फड़कते चोंचले को दबाये हुए थे और वो उस अट्ठारह बरस की नाजनीना को अपनी उंगलियों पर नचा रही थी! वो अपनी नाजुक कमर को छोटे-छोटे चक्कर लगाती हूई घुमा रही थी, और अपनी चूती बुर को बड़ी लड़की के चेहरे पर मसलती जा रही थी, और साथ में मस्ती भरी कराहें भी निकाल रही थी। डॉली भी अपनी टपकती झाँटेदार बुर को गोरी डॉली के शौक़ से चूसते होठों पर चुपड़ती जा रही थी।
दोनो चूत चाटती हसीनाएं आपस में चूसती, चुपड़ती और जीभ से चोदती – चोदती कुदरत के खिलाफ़ सैक्स करती हई दोजख की गहराइयों में उतर रही थीं। भूखी बिल्लियों जैसी एक दूसरे की चूत चाटती हईं, आखिरकार दोनो झड़ गयीं, कराहती, कुलबुलाती और काँपती हुई दोनों एक दूसरे की चूत के बहाव को चाट चाट कर निगलने लगीं। और आखिर में ठंडी पड़कर बिल्लियों जैसी ही कराहती हुई एक दूसरे की चूत के चारों ओर चाट – चाट कर सफ़ाचट्ट करने लगीं।
जब दोनो लड़कियाँ एक दूसरे की गिरफ्त से जुदा होकर उठीं, तो उन्होंने रजनी जी और राज को उनके चूत के रिसाव से चुपड़े चेहरों की ओर देखकर मुस्कुराते हुए पाया।
साली रन्डियों! खूब मस्ती से चूत चाट रही थीं? हम मर्दो का ख़याल कौन रखेगा ?”, राज हँस कर बोला। सोनिया ने निचले होंठ को दाँतों तले दबाया, और नजरें अदा से उसके ढीले लन्ड पर झुकायीं और बोली, हुजूर, आपका लन्ड तो आपकी मम्मी की गाँड मारते-मारते थक कर बेहाल हो गया है। अगर इस बेवफ़ा लन्ड के सहारे जियें तो हमारी चूत तो सूनी ही रह जायेगी। भई हमसे तो नहीं होता सब्र !”, वो पलट कर मुस्कुरायी। | पुरा कमरा तीनों के ठहाकों से गूंज उठा, और सब एक दूसरे के गले मिल गये। फिर सोनिया ने पिछली रात उसके घर में हुए वाक़ये को उनसे कह दिया, ये भी खुलासा किया कि कितनी आसानी से उसने अपने घरवालों को चुदाई के लिये रजामन्द कर लिया था।
… फिर जय और डैडी, दोनो ने मिल कर मुझे चोदा। खूब मजा आया। उम्मीद से दुगुना !”, सोनिया ने चटखारे लेते हुए दास्तन बयान की। उसकी हवस भरी दास्तान खत्म होते-होते, रजनी जी और डॉली की चूतें फिर से गर्म हो गयी थीं और रिसने लगी थीं, और राज का लन्ड भी बाक़ायदा तनने लगा था।
अब आगे का क्या प्रोग्राम है?”, राज ने पूछा। “आगे-आगे देखिये हजूर, होता है क्या। मैं घर जाकर मम्मी और डैडी को तुम सब के लिये हमारे फ़ार्म हाऊस में एक पार्टी रखने के लिये मना लूंगी, सोनिया मुस्कुरायी, “आने वाला इतवार ठीक रहेगा। फिर जिसकी जैसी क़िस्मत, मंजूर ?”
बेशक़, मंजूर !”, राज ने कहा। वो अचानक सोनिया की ग़जब की हसीन माँ को चोदने के ख़याल से गर्मा गया।
डॉली और रजनी जी भी मिस्टर शर्मा और जय के ताजातरीन लन्डों पर झपटने का मौक़ा ताड़ कर बड़े उतावले हो रहे थे, लन्ड की मोहताज रहने वाली हसीनायें अपने जिस्मों की तड़प को ठन्डा करने के नये जरीये को, और मुँह में चूसने के वास्ते गैर मर्दो के मोटे गोश्त को पाकर फूली नहीं समा रही थीं।
राज का लन्ड खुद-ब-खुद उठने लगा, जिससे डॉली सबसे पहले आगाह हुई। उसने झपट्टा मारकर अपने भाई के लन्ड पर अपना दावा ठोक दिया।
“अब मेरी बारी, मम्मी !”, वो खिलखिलायी, और राज को धकेल कर बिस्तर पर पीठ के बल लिटाती हुई, उसके मजबूत पुढेदार कूल्हों पर आसन जमाकर बैठ गयी।
डॉली ने उसके लन्ड को पकड़ कर अपनी बुर में पैठ बनायी, और नीचे को खिसकती हुई अपने भाई के बुलन्द लन्ड को अंदर निगलने लगी। जैसे जैसे वो छड़नुमा काला चमचमाता कटुवा लन्ड उसकी सैक्स की भूखी बुर में गहरा घुसता रहा, डॉली मस्ती से कराहती रही और उसके घोंपते लन्ड पर ऊपर और नीचे फुदकने लगी।
रजनी जी पीछे रहने वाली नहीं थीं, कराहती हुई अपने बेटे के चेहरे पर जा बैठीं, और अपनी टपकती चूत को उसके खुले मुंह पर जमा दिया। राज जीभ फटका – फटका कर अपनी मम्मी की लजीज बुर को चूसने और चाटने लगा … जैसे रेगिस्तान में भटके मुसाफ़िर को दरिया मिल गया हो। जल्द ही पसीने से सने जिस्मों के दरम्यान होती हवस भरी मशक्कत और सैक्स की गरम, चुपड़ती आवाजें उस बेडरूम में गूंजने लगीं।
सोनिया का मन तो बड़ा किया, कि सरगर्मियों में शामिल हो, पर उसकी खुराफ़ाती खोपड़ी में नयी तरक़ीब और मनसूबे बंध रहे थे। शैतानी मुस्कान देती हुई, हसीन जवान लड़की बिस्तर से लपक कर उठी और झटपट कपड़े पहना कर, इतवार की पार्टी के इन्तजामात के बारे में सोचती हुई अपने घर को रवाना हो गयी।

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