55 दरवज्जा खुल्ला छोड़ आयी ::
राज ने चेहरे पर लटके अपने बालों को हाथ से हटाया, और मुस्तैदी से अपनी मम्मी की मोटी कमर को हाथों में दबोचकर, उनके चूतड़ों को पीछे अपने बेलगाम लन्ड पर खींचा। फिर अपने फूले सुपाड़े को उनकी गाँड के झुरींदार सुराख़ पर दागा। राज का जवाँ लन्ड वालिदा की चिपचिपी गाँड में ऐसे इत्मिनान से अंदर फिसलता चला गया, मानो गरम चाकू मक्खन की डली को काट रहा हो। रजनी जी और अपने बेटे के लम्बे लन्ड की मोटाई को पीछे की ओर झपट-झपट कर अपनी गाँड की तपती गहराई में निगलती हुईं, गहरा सुकून पा रही थीं, और घायल शेरनी सी कराहती जा रही थीं।
“ऊ :: ऊहहह … ऊहह :: या ऊपर वाले! आँहह … ! मेरे जिगर, मम्मी को जन्नत का मजा आ रहा है ! जन्नत का !”, वे चीखीं, और निहायत बेहयाई से अपने चूतड़ों को बेटे के लोहे की छड़ जैसे कड़े लन्ड पर पीट पीट कर मारने लगीं।
राज ने अपने लन्ड को अपनी मम्मी की कस के भींचती गाँड में पम्प करना शुरू कर दिया, और उनकी कमर पर राज के पुट्ठों की ताक़तवर झटकों की वजह से रजनी जी के चूतड़ों पर माँस के लोथड़े फुदक रहे थे, और उनके मोटे-मोटे मम्मे बेहूदगी से झूल रहे थे। रजनी जी कराहती रहीं, हौले-हौले, जनाना अदा से , अपने बेटे के झाँटेदार टट्टों की अपनी चूत पर सिलसिलेवार टक्कर से उन्हें बेहद मज़ा आ रहा था।
टट्टों का हर पुरतशद वार उनके फड़कते चोंचले में हवस की टीस उठा देता था। | मम्मी की सुकून भरी कराहों ने राज में और भी जोश भर दिया, वो और फुर्ती से उनकी गाँड मारने लगा। उनकि कुलबुलाती, मोटी कमर को हाथों में दबोचकर वो अपने लन्ड को उनकी कास के जकड़ती गाँड में लम्बे, तगड़े और सफ़्फ़काना ठेले देकर पम्प करने लगा, जिसकी हैवानी कुव्वत ने रजनी जी के तंदुरुस्त बदन को भी झकझोर रखा था।
“मार मेरी गाँड मादरचोद! बहा दे अपना वीर्य मेरी गाँड में, मेरी कोख के लाल ! भर दे मम्मी जान की गाँड को अपने वीर्य से, मेरे आशिक़ !”, भर्रायी आवाज में रजनी जी बोली थीं।
रजनी जी का बदन अब पसीने की महीन परत की वजह से दमकने लगा था। राज का भी ऐसा ही हाल था • • • जल्द ही रजनी जी के चिकने चूतड़ों का माँस उनके बेटे की मजबूत पुट्ठेदार जाँघों पर थपेड़े मारने लगा। अपने हवस के गुनाह की मीठी-मीठी सजा, जो उन्हें इन थपेड़ों से मिल रही थी, बेशक़ रजनी जी को बेहिसाब लुफ्त दे रही थी।
“साला लन्ड आराम से नहीं फिसल रहा, सोनिया वैसलीन !”, राज ने ताक़ीद की। सोनिया ने झट से हाथ में रखी वैसलीन की डिबिया से उंगलियों पर और वैसलीन निकाली और राज के लन्ड के उस हिस्से पर, जो ठेलते-ठेलते रजनी जी की गाँड से बाहर नजर आता था, लथेड़ दिया। राज का लन्ड लथेड़ी हुई वैसलीन को अंदर घुसते वक़्त अपने साथ गाँड में ले चलता था। जब चिकनायी वापस बरक़रार हो गयी, तो राज ने खुशी से सोनिया को आँख मारी और बोला:
* देख मम्मी, कैसी होशियारी से काफ़िर लौन्डी गाँड चुदाई सीख गयी है !”
रजनी जी ने गर्दन घुमा कर पूरा वाक़या देख लिया था, देखकर उनकी जाँघे कॉपी और गाँड सिकुड़ गयी। राज ने उन्हें आहें भरते सुना, एक बाद एक भरी हुई साँसों का सिलसिला। उसने अपने ठेलों की ताल को जरा धीमा कर दिया। वो अपनी मम्मी को झड़ने के कगार पर ले आया था, और कगार पर ही रोक कर उन्हें तड़पाना चाहता था।
अपनी जिम्मेवारी निबाह कर सोनिया और डॉली ने फिर से आपस में चूत चटायी शुरू कर दी थी। दोनो पागलों जैसी एक दूसरे की चूतों को चाटती, चूसती और उंगली घुसाती जा रही थीं, और अपनी गैर-कुदरती हवस के सुलगते जुनून में पूरी तरह मसरूफ़ हो गयी थीं। राज ने गाँड मारने की रफ़्तार धीमी करके अपनी बहन को देखा, जो जीभ बाहर को लटकाये हुए किसी कुतिया के माफ़िक सोनिया की सुर्ख – लाल चूत को चाटे जा रही थी।
“चूस मेरी चूत , डॉली !” सोनिया चीखी, उसका बदन तूफ़ान में पत्ते की तरह काँप रहा था। “चूस जहाँ मेरे बाप ने मुझे चोदा है! चाट मेरी बुर को! ओहहह, डॉली, डॉली, डॉली ! और मत तड़पा ! रन्डी, कैसी-कैसी कमीनगी भरी है तेरे खानदान में ! चूस हरामजादी !”
राज ने देखा, कि सोनिया ने अपना मुँह उसकी बहन डॉली की चूत पर दबाया, और अपनी जीभ से उसकी अंधेरी उमस भरी चूत के दर को खोलकर, बार-बार अंधाधुंध अंदर, और अंदर मारने लगी: ‘सोनिया उसकी बहन की गरम, उबलती चूत को नये जोश से चाट रही थी और अंदर टटोल रही थी। दोनो नाजनीने मुंह से बेहूदी ‘सुपड़-चुपड़ – सड़ाप्प’ आवाजें निकालती हुई भूखों की तरह एक दूसरे की रिसती चूतों को चूस चूस कर चाटते जा रही थीं।
इस दौरान, राज ने अपने लन्ड को मम्मी की गरम, पिघलती गाँड में ठेलना जारी रखा था, जिससे रजनी जी मारे मस्ती के कुलबुला रही थीं। जाहिर था कि वे तरस रहीं थी झड़ने के लिये। उनका बेटा उन्हें ऑरगैस्म के कगार पर रोके हुए बड़ी अदा से उन्हें सता रहा था। रजनी जी अपने गुनाहगार बदन की हवस की प्यास से हर हाल में निजात पाने के लिये बेचैन हो चली थीं!
“ऊँह ऊँह ऊँह ऊहहह, राज ! मेरे भगवान, राज ! और कस के चोद मुझे, बेटा! खूब कस के मार मम्मी की गाँड! ऊहह, अपनी गुनाहगार मम्मी की गाँड को सजा दे, बेटा! मेरे अंदर तेरा लन्ड कितना मोटा, कितना गरम और कितना मजबूत है !”
“और तेज हिला, नामर्द! और तेज! आँह ‘आँहह शाबाश! बहुत खूब, राज ! मुझे चोद, बेटा! मेरी गाँड मार, मेरे आशिक़ !”
“देख बेटी सोनिया, मेरी चूत से पैदा हुआ है ये पिल्ला, और आज मेरी गाँड मार रहा है! “, इस तरह वे कराहती रहीं, अपने संगीन गुनाह की हवस की आग में डूब गयी थीं रजनी जी। । राज अपने पूरे हौसले से अपनी मम्मी की कसी हुई और मुलायम गाँड को चोदे जा रहा थे, उसका अंग-अंग अब अपने दिमाग में बैठा शैतान के क़ाबू में था। रजनी जी भी लगातार उसपर अपनी चूतड़ों को पटके जा रही थीं, हर जोरदार झटके के साथ उनकी गाँड पर दो मोटे माँस के लोथड़े हिल- हिल कर झूलते थे, और उनकी छाती के नीचे उनके तरबूजों जैसे मम्मे झूम-झूम कर फुदकते थे।
ओहहहह! शाबाश! मार मेरी गाँड राज ! जोर-जोर से, खूब गहरा चोद अपनी रन्डी मम्मी की गाँड को !” वे मन्तर जपने लगीं, “ऊ ऊ ऊ ऊह, मेरे पिल्ले ! ऊपर वाले, तुझसे गाँड मरवाने में खूब मस्ती आ रही है, हरामजादे, ऊपर वाले तुझे इस नेकी का सवाब दे !”
“अंहह अँह उँहह, ऊपर वाले! सच मम्मी, गाँड हो तो ऐसी, साली रन्डी गाँड मेरे लन्ड को निचोड़ रही है, कसम से ऐश हो रही है !” राज जोर से कराहा। | मेरी भी ऐश हो रही है, मादरचोद ! अब ज्यादा बक मत, मुझे मेरे मम्मों के दूध का सवाब चाहिये, कुछ तेरे लन्ड में दम है या नहीं ?” हाँफ़ते हुए रजनी जी ने ललकारा, हवस के मारे उनकी आवाज भर्रा रही थीं और साँसें उखड़ रही थीं।

