पापी परिवार की पापी वासना – Update 53 | Incest Story

पापी परिवार की पापी वासना – Dirty Incest Sex Story
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53  मेजबान

डॉली अच्छी तरह से वाक़िफ़ थी कि उसकी मम्मी की चूत झड़ रही है। क्यों न हो, उसकी जीभ जो मम्मी की चूत से फेंके हुए वीर्य से लबालब चुपड़ी हुई थी, सुर्ख जीभ पर राज का हलका पीला वीर्य और चूत का मवाद लथेड़ा हुआ था। डॉली ने अपनी जीभ को रजनी जी की माड में और अंदर पेला, और खुशी की किलकारियाँ मारती हुई ‘सुपड़-चुपड़-गड़प्प’ की आवाजें करती हुई, मजे से माँ की चूत को दुहती गयी, और चटखारे ले ले कर गुनहगार सैक्स का लुफ्त उठाती गयी। | मोहतरमा रजनी शर्मा अब हिल- हिल कर कराह रही थीं, उनका हूरों सा बदन वहशियाना अंदाज में सिहर रहा था, क्योंकि बेपनाह सुकून के झटके -दर-झटके उनके कंपकंपाते जिस्म में उमड़ते जा रहे थे।

“मम्मी, इत्मिनान से झड़िये, मेरे मुँह पर !”, डॉली कराही। उसकी आवाज उसकी मम्मी की झाँटेदार कसमसाती चूत में कही दब गयी। “झड़ती रहो मम्मी!” । | डॉली का मुँह माँ की चूत से फूटे वीर्य के एक और सैलाब से भर गया : उबलता हुआ, गरमा गरम और खुशबूदार वीर्य। उसने अपने पूरे चेहरे को मम्मी की बुर पर रगड़-रगड़ के पोंछा, और सिलसिलेवार अपनी जीभ को, जितना अंदर जा सकती थी, रजनी जी की गरम, काँपती चूत में घोंपती रही, बीच-बीच में उनके झाँटेदार चूत को बाहर से चूसती भी रहती।। | ऑरगैस्म की आखिरी लहर उनके जिस्म में उठी, और फिर रजनी जी का पूरा बदन ऐंठ गया। उन्होंने टाँगों को चौड़ा कर फैलाया, दोनों हाथों से बेटी के सर को दबोचा और अपनी चूत को गजब से सिकोड़ने-ढिलाने लगीं।

सोनिया को अपनी जवान टाइट चूत में राज के मोटे लन्ड की दनदनाहट से बड़ी मस्ती आ रही थी। उसने राज के कूल्हों पर बैठकर धीमे से अपनी नाजुक मुलायम चूत को उसके नौजवान तगड़े लन्ड पर उतारा था, फिर कुछ मिनट तक अपनी चूत में राज के लन्ड को थामे उसकी लम्बाई और मोटाई का ठीक से जायजा किया। अपनी जवान बुर को फिर एक दफ़े राज के लम्बे और टनाटन फड़कते लौड़े के गोश्त से टूसा हुआ पाकर कितना चहकी थी सोनिया। | अट्ठारह साल की परी जैसी लड़की सोनिया ने फिर उसके लन्ड पर बैठे बैठे फुदकना शुरू कर दिया। राज तो अपने रौंदते लन्ड के हर इन्च को उसकी टाइट चटखाती चूत से कसता हुआ पाकर ऐसा उतावला हो रहा था, जैसे जन्नत का सवाब मिल गया हो। उसके खम्बे जैसे लन्ड की रगों में खून खौलने लगा, उसका सुपाड़ा सूज गया, जब सोनिया की कसी फिसलन भरी बुर के गोश्त ने उसे अपनी गिरफ़्त में भींचा, और उसके तने को ऐसे पकड़ के ऊपर और नीचे मसल-मसल कर निचोड़ा, जैसे चूत से मुठ मार रही हो।

उसकी टाइट चूत राज के लन्ड पर कसती गयी, जैसे साँचे में गरम मोम उडेल कर मोमबत्ती बनी हो। उसके नारंगी जैसे मम्मे राज की आँखों के सामने झूल-झूल कर ललचाता हुआ नाच कर रहे थे, सो राज ने आगे बढ़ कर उसके निप्पलों को चाटा, फिर अपने चेहरे को दिलफ़रेब हसीना के मखमल से मुलायम मम्मों पर दबा दिया। | ‘या भगवानया, तेरा लाख शुक्र जो आज सोनिया जैसी गुलबदन लड़की की चुदाई का मौक़ा बख्शा!’, राज ने सोचा। | सोनिया तो, जाहिर था, चुदाई की शौक़ीन थी, और राज दावे के साथ कह सकता था, कि जब तक उसकी संगत में रहेगी, चुदाई से कभी महरूम नहीं रहेगी। इसके अलावा, सोनिया की तरकीब भी कामयाब हुई थी, लिहाजा देर-सवेर उसे सोनिया की बेहद दिलकश, और मोटे-मोटे मम्मों वाली माँ को चोदने का भी मौक़ा मिल ही जायेगा।

सोनिया दीवानगी से अपने सुडौल चूतड़ों को आजू-बाजू फटक रही थी और अपनी कमर को राज के तने हुए लन्ड पर ऊपर-नीचे पटके जा रही थी। चूत के ऊपर और नीचे घिसाव के अलावा, वो अपनी कमर को बलखाती हुई, उसे राज के लन्ड पर ताकीद कर रही थी। राज भी अपने कूल्हों को उचका कर सोनिया के नीचे पटकते चूतड़ से टकराता, और अपने मोटे लन्ड को उसकी भाप छोड़ती, और रिसती मांद में ऊपर को घुसेड़ डालता।

राज का लन्ड उसके जिस्म को ढूंसे दे रहा था, और उसकी मस्त जवान बुर से खोद – खोद कर चूत के मवाद को बाहर बहा रहा था। उसका फूला कटुवा सुपाड़ा किसी मूसल की तरह चूत के पेंदे को कूटता जा रहा था, जिसके कारण सोनिया की चूत लबालब मवाद बहा रही थी।

सोनिया किसी कुतिया जैसी हाँफ़ रही थी .:. उसका पाकीजा चेहरा हवस के मारे दमक रहा था :: :: पलकें भींची हुई और मुंह खुला हुआ था। और वो माहिर चुदाई से पैदा होने वाली बेपनाह जिस्मानी लज्जत के मारे हाँफ़-हाँफ़ कर कराहती जा रही थी!

राज का लम्बा तगड़ा लन्ड उनकी कस के जकड़ती योनि में इस क़दर वार कर रहा था कि सोनिया को लगा जैसे चूत को फाड़कर उनके मुंह से निकल आयेगा ::: और उनके मुँह से चीरता हुआ बाहर वीर्य निकालने लगेगा। । “चोद चोद चोद चोद.. ‘, रजनी जी जप रही थीं, जैसे ही वे राज के रौंदते शैतानी लन्ड पर नीचे फिसलती, तो उस लफ़्ज़ को बोल देती

राज गुर्राता हुआ और दम लगाकर उसकी चूत में पेल रहा था, सोनिया की हड्डियों को झकझोर रहा था, और उसकी टाइट कुलुबुलाती मांद में ऐसे ठूस रहा था, कि सोनिया को एक पल लगा उसके कूल्हे टूट जायेंगे! बड़ा शौक़ था उसे राज की पहलवानी चुदाई का :: : पिछली रात अपने मजबूत बाप से की चुदाई की याद दिलाता था ::: दनादन, गहरे, खूब गहरे, और देर तक चलने वाली चुदाई ::::

दोनो ने इकट्ठे और भी फुर्ती से मसलना शुरू कर दिया, क्योंकि दोनो ही सैक्स के इंतेहाई सुकून की चोटी के करीब परवाज हो रहे थे। सुलगती हवस और मस्ती की लपटें सोनिया की जवान पसीने से सनी जाँघों में उमड़ती,
और उसकी अकड़ी पीठ में कौंधती हुई, दीवानगी के घूमते भंवर में तब्दील होकर उसकी लन्ड भरी चूत में गहरी उतर जाती।

राज के टट्टे फूल गये थे, अब वो हवस के लावा की बौछारें उडेलने को बस तैयार हो चुके थे। वो बेतहाशा अपने भूखे गोश्त को अपने ऊपर बैठी जवान लौन्डिया के अंदर पीटे जा रहा था, उसकी चूत के पेंदे पर चाबुक जैसा मार रहा था, और उसकी कंपकंपाती जवान बुर को अपने तमतमाते लन्ड से चोदता हुआ शदीद धक्कों से उसके बदन को झकझोर रहा था।

| सोनिया आगे को गिरी और राज की गरम जीभ को अपने मुँह में चूस कर उसे चूम लिया। उसकी तो ये तमन्ना थी कि काश राज के एक नहीं, दो लन्ड होते, तो वो एक को चूस लेती और दूसरे से चुद लेती … दो से भले तीन होते, ताकि अपनी गाँड में एक लन्ड को भरकर वो लुफ्त भी उठा लेती। फिर उसे एहसास हुआ की उसकी चाहतों का हल तो उसके खुद के घर में है! थे तो सही उसके पास तीन लन्ड, बस देर थी, तो उन्हें एक साथ, एक कमरे में इकट्ठा करने की, बाक़ी अपने आप हो जाता। सोनिया तो उस मुबारक घड़ी के लिये बेताब हुई जा रही थी! ।

राज की जीभ को, जिससे अब भी उसकी मम्मी की चूत के मवाद का जायका आ रहा था, चूसते हुए सोनिया ने अपनी गाँड के नीचे हाथ किया और प्यार से उसके टट्टों को सहलाया। दूसरे हाथ से वो कभी अपने तने निप्पलों को मसलती, तो कभी अपनी गाँड के सुराख में घुसेड़-घुसेड़ कर उंगल करती। वो अपनी जवानी की हवस के मारे बड़े जुनून से अपने क़ायनाती जिस्म के हर हिस्से पर अपना हाथ फेरती जा रही थी।

“ऊ ऊहहहह, मादरचोद! राज मैं झड़ने वाली हूँ! साले कटुवे! मैं झड़ने वाली हूँ !”, सोनिया ने राज के हाँफ़ते मुँह में गरम साँसें फेंकते हुए बोला। “साले मादरचोद! तू भी मेरी चूत में अपना लन्ड झड़ा! तेरे वास्ते हरामी पिल्ले पैदा करूंगी मैं ! तेरे जैसे कटुवे पिल्ले, जो तेरे जैसे मादरचोद भी होंगे! अहहहह! मादरचोद !”

 

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