44 टीना जी की सेवा
सोनिया उनके पास बिस्तर पर लेटी पड़ी थी। कराहती हुई वो माँ की मलाईदार गुदा को पिता के आक्रोशित लिंग द्वारा छिद्रित होते देख रही थी। किशोरी नवयौवना अपनी सूनी पड़ी योनि में हस्तमैथुन करती हुई एक नहीं: ‘दो नहीं: ‘तीन-तीन कुरेदती उंगलियाँ घुसेड़े अपनी माँ को दक्षता से एक साथ दो-दो भारी-भरकम लिंगों के प्रचण्ड प्राहारों को असीम ममता और प्तिव्रता द्वारा प्रेमपूर्वक ग्रहण करते देख रही थी। माता के मुख पर आछंद अलौकिक आनन्द को देख, सोनिया ने निर्णय कर लिया की अगली बार वह भी दोहरे मैथुन का अनुभव लेगी, चाहे उसे अपने पिता और भाई के थके लिंगों को पुनरुक्ति करने के लिये कितना भी चूसना ना पड़े।
अपनी योनि को पुत्र के लिंग के तने पर मसलती हुई, टीना जी कराहीं, बिलबिलायीं। उनके पति का विशालकाय लिंग उनकी गुदा में पूरी तरह से गड़ गया था। जीवन में प्रथम बार उन्होंने दो मोटे लिंगों को अपनी देह में इकट्ठे ग्रहण किया था: कैसा दिव्य अनुभव था! अचानक उन्हें प्रतीत हुआ, कि उनका तन को जीवन की सर्वाधिक आवेगपूर्ण वासना के अनुभव के समक्ष घुटने टेक रहा है। कितना मीठा था पिता और पित्र के लिंग का दबाव। दोनों के शिला जैसे कठोर लिंगों की तने जैसी मोटाई किस कदर लुभावनी अनुभूतियों से उनकी योनि तथा गुदा की इंद्रियों को आनन्दित कर रही थी।
उनकी योनि स्वतः ही पुत्र के कामांग को चूस-चूस कर सिकोड़ रही थी, और उनका पुलकित गुदा छिद्र भी धड़क-धड़क कर पति के लिंग को दबोच रहा था। दो लिंगों को इकट्ठे ग्रहण करने के फलस्वरूप टीना जी को उनका आकार भी दुगुना प्रतीत होता था। उनके सम्पूर्ण जीवन में ऐसे आवेगपूर्ण दैहिक आनन्द का अनुभव अप्रत्याशित था।
“मजा आ रहा है, मम्मी ?”, सोनिया ने धीमे स्वर में पूछा। किशोरी अपने पूरे हाथ को योनि में गाड़े अधीरता से अपनी दव- रंजित योनि को रगड़ती हुई हस्तमैथुन कर रही थी, और अपनी माँ को दो पुरुषों से मैथुन करते देख रही थी।
“अम्मम, हाँ सोनिया !”, टीना जी ने हुंकार कर कहा, “सच, इस चूत ने घाट घाट का पानी पिया है, पर आज तो चुदाई का असली मजा आ रहा है !” ।
“डैडी, अपने बेटीचोद लन्ड से मम्मी की गाँड मारो!” सोनिया चीखी। “अ’अहह ! चोद कुतिया की चूत , जय!” वासना के मारे, बैचैन नवयौवना सोनिया की स्वयं की योनि व गुदा अनियंत्रित होकर फड़क रही थीं। “कह देती हूँ मम्मी, अगली बारी मेरी !”
ठीक है बेटा! तू भी चुद लेना डैडी और भैया से! ऊहः ‘अ’आँह” ‘ऊहः ‘आँह ‘आँहः ‘आँह !”, बेसुध होकर टीना जी मस्त हथीनी जैसी चीत्कार कर रही थीं। । अचानक उनकी देह में न जाने किस ऊर्जा का संचार हुआ, कि वे रौद्र रूप धारण करके उचकने लगीं। एक पल अपनी योनि को जय के लिंग पर ऊपर-नीचे मसलतीं, दूसरे पल अपनी गुदा को पति के अंधाधुन्ध पेलते लिंग पर ठेल देतीं ::: अपने सगों से किये पापी सम्भोग के दोहरे आनन्द में एकदम तल्लीन हो गयी थीं! । “चोद मेरी चूत, जय!”, वे चिल्लायीं। * शाबाश दीपक ‘आँह ‘चोद बेटीचोदः ‘आँह ‘सदके जावां मेरे लालः ‘अ’आँह, घुसा अन्दर लन्ड ! ऍह: ।
“मत तड़पाओ हरामजादों! अहहह अमम, आँह ऐंह! अबे दीपक, दम लगा के गाँड मार साले!आँह, देख तेरा बेटा तुझसे अच्छा चोद रहा है! : ऊई ‘आँहः उऊँह हरामी, बेटी की चूत चाटता है, तुझसे तो अच्छा तेरा बेटा चोद रहा है !” यह नहीं कि टीना जी को पति में कोई दुर्बलता नजर आयी थी। वे तो केवल अपने पति की स्पर्धात्मक भावना को जगा कर उनके पौरुष व कामबल को भड़काना चाहती थीं।
“साली रान्डी, पति की पीठ पीछे बेटे से चुदवाती है ? ठहर मैं तुझे सिखाता हूँ लन्ड क्या चीज है! चोद चोद कर सुन्न नहीं कर दिया, तो नसबन्दी करवा लूंगा !”, मिस्टर शर्मा ने पत्नी की चुनौती को स्वीकारा, और अत्यन्त तीव्रता से कामक्रिया करने लगे। फिर उन्हें अपने अनुभव का भी सहारा था, जिसके आधार पर उन्हें ठीक-ठीक पता था कि टीना जी किस शैली में गुदा-मैथुन का सर्वाधिक आनन्द प्राप्त करती हैं।
शाबाश दीपकः ‘आँह ऊँह आइयाँहः ये हुई मर्दो वाली बात ! देख मादरचोद जय, सीख ले बाप से गाँड मारना !”, टीना जी बोलीं, वे मन ही मन पति के लिंग के बढ़ असाधारण आवेग की दाद दे रही थीं। । “हाँ बेटा, तेरी कुतिया मम्मी की गाँड मारनी हो तो उसका स्टाइल चोदने से अलग होता है। आगे को नहीं , बल्कि ऊपर को झटके देने होते हैं।”, मिस्टर शर्मा ने पुत्र के दिव्य ज्ञान से अवगत कराया।
“ठीक है डैडी, पर थोड़ा सम्भल के, आपके टटटे मेरे टटटों को पीट रहे हैं। टीना जी ने पलट कर नीचे देखा, तो सचमुच उनके पति के अण्डकोष पुत्र के अण्डकोष पर छप्प – छप्प ध्वनि के साथ टक्कर कर रहे थे। टीना जी का मुख सैक्स और वासना के भावों के कारणवश विकृत हो रहा था, उनकी छरहरी देह कामना की तड़प के मारे ऐंठ रही थी।
“मादरचोदों, चोदो मुझे! चोदो सालों! शिट, बड़वों, चोदो और और कस के! प्लीज, चोदो मुझे … ओहहह, प्लीज ! जय चोद, माँ की चूत! मार मेरी गाँड दीपक! पिलाओ मुझे दोनो लन्डों का वीर्य !”
“अबे रन्डी, इतनी क्या जल्दी है, अभी तो तेरी बेटी भी लाईन में है !”, ऐसा कह कर मिस्टर शर्मा ने सोनिया की दिशा में देखकर आँख मारी। “बोल बिटिया, जितनी तसल्ली से मम्मी की गाँड मारूंगा, बाद में तुझे उतना ही मज़ा आने वाला है।”
हाँ डैडी, आप मारो गाँड, फिर मैं प्यार से आपके लन्ड को चूस कर फिर खड़ा कर लूंगी !”, सोनिया ने चहकते हुए कहा।
“देख रन्डी, तेरी बेटी अभी से हरामीपना दिखा रही है!”, मिस्टर शर्मा ने पत्नी का चेहरा अपने चौड़े हाथों में लेकर उनकी मुंडी पीछे को घुमायी। पति – पत्नी आँखें मूंद कर मुंह से मुँह जोड़े चुम्बन करने लगे।
आँह ‘बेटीचोदः’ अँह, हरामी है तो तेरे लवड़े को ही फ़ायदा है! ऐं अः ऐंह ‘आँह” “अच्छा रन्डी, अपने बेटे जय का लन्ड कैसा लग रहा है चूत में ?” । “आँह ऐंह ‘अरे दीपक ! तेरा बेटा तो तुझ पर ही गया है, मादरचोद का लन्ड नहीं अः आः ‘आँह हथौड़ा है!”
मादरचोद बचपन से तेरे मम्मों से दूध पी-पी कर लन्ड में मलाई जो जमा कर रहा है! क्यों बे ?”, पुत्र के सामने ही अपनी पत्नी के दोनों स्तनों को हाथों में मसलते हुए मिस्टर शर्मा ने पूछा। । “हाँ डैडी! आपके नक्शे कदम पर चलूंगा तो एक दिन अपनी कुतिया माँ से पिल्ले जनूंगा। फिर अपनी कुत्ती बेटियों को चोदूंगा!”
“अबे! बाप की जागीर पे हाथ मारता है ? हरामी, मेरी वाईफ़ को चोदेगा तो बदले में मुझे अपनी बेटियों को चोदने को देगा।”
“कमाल करते हैं आप। दादा जी के आशिर्वाद के बिना तो उनकी गाँड ही नहीं खिलेगी! गजब की गाँड मारते हैं आप डैडी !” ।
मिस्टर शर्मा ने पुत्र के मुख से अपनी कामकला की प्रशंसा सुनकार अपने कूल्हों की एक नियमित लय स्थापित कर दी। अपने भीमकाय लिंग को टीना जी के मलद्वार में पेलते हुए वे कराहते जा रहे थे। उनके लिंग के छिद्र से बराबर रिसाव हो रहा था, जो टीना जी की गुदा को चिकने मवाद से लथेड़कर उनके बलवान लिंग की सरसराती हलचल को और अधिक आनन्कारी और सुलभ कर दे रहा था।
शिट मम्मी! मजा आ रहा है !”, जय हाँफ़ता हुआ बोला। मिस्टर शर्मा की लय से लय मिला कर जय भी अधिक वेग से टीना जी से सम्भोग-क्रीड़ा करने लगा। जैसे ही पिता के लिंग को माँ की गुदा में कूदने का अहसास पाता, जय अपनी माँ की योनि को नौजवान लिंग की मोटाई को ठेल देता। अपने अनुभवी पिता से प्रणय कला के गुर सीख रहा था। ।
“ओह, माँ के लवड़ों, चोदो कस के !” टीना जी कराहीं। उनके त्रिया-चरित्र ने उनसे कहा कि पति और पुत्र के पौरुष बल को फिर परखा जाये। । “हिजड़ों, तुम्हारा लन्ड तो चूहे जैसे कुतर रहा है! ऐसे ही चलता रहा तो मुझे मोहल्ले से किराये के लौन्डों को बुलाकर चुदना पड़ेगा !” ।
“रन्डी, आज तो तेरी गाँड मार-मार के भोंसड़ी बना दूंगा! फिर तेरी हिम्मत नहीं होने कि किसी पराये मर्द के लन्ड को चूत में लेने की !”, ऐसा कह कर मिस्टर शर्मा अमानवीय गती से अपने फ़ौलादी लिंग द्वारा पत्नी के संग गुदा-मैथुन करने लगे। । “आह ! शाबाश मेरे शेर, अ आँह: अब आया ना गाँड में मजा : ‘आँह ऐंहः आँह : आँह: ऐं ऐंह हह आँह ::., टीना जी ने मिस्टर शर्मा को इस आवेग से पहले कभी क्रियारत नहीं देखा था। वे उनकी दाद दिये बिना नहीं रह पा रही थीं।
(4 अ आँह देख मादरचोद रवीः ‘आँह, तेरा बाप क्या गाँड मारता है ‘आँह मेरी गाँड का छेद अगर कोई लौन्डा देख ले तो मजाल है हिम्मत करे लन्ड डालने की!’ ‘आँह मार बेटीचोद !”, टीना जी दहाड़ीं। लाचार होकर वे अपनी देह को पति व पुत्र की वासना का पात्र बनते देख रही थीं। निरंकुशता से कामानन्द के वश में अपनी योनि को ऐंठ-सिकोड़ कर उचकाये जा रही थीं। दो-दो रौन्दते लिंगो के तले उनकी गुदा व योनि की बेहतरीन सेवा हो रही थी।
“अब मजा आया! : ‘आँह ऊँह उ उ ऊँह उचक मादरचोद! बिस्तर से उचक-उचक कर मार! : ऊँह बजा दे अपने टट्टे! : ऊँह ‘अ’आँहचोदो कुत्तों ! उ ऊँह ऊँहकस के चोदो, नहीं तो दोनों की गाँड में बेलन दूंगी! ए ऐं: माँ की चूत के पट्ठों, चोदो जितना दम है तुम्हारे लन्ड में ! ऊँह : ऊँह” ।
जय ने अपनी गति में वृद्धी की, उसे अपने अण्डकोष में घुमड़ते वीर्य का आभास होने लगा। वो कराहता हुआ अपने लिंग को पाश्विक आवेग से माँ की कस कर भिंची हुई योनि में ताबड़तोड़ मारने लगा। मिस्टर शर्मा ने जल्द ही अपने पुत्र की लय का अनुसरण किया, अपने तड़पते पुरुषां द्वारा क्रमवार पत्नी की कसी हुई गुदा में हथौड़े जैसे प्रहार कर रहे थे वे। अपने ऑरगैस्म की अपेक्षा में टीना जी का सम्पूर्ण तन दर्द के मारे छटपटा रहा था। वे चीखती हुई अपने चेहरे को भींच रही थीं। कोड़े की तरह अपने नितम्बों द्वारा सटा-सट टांगेवाली जैसे वार करती हुई दोनों लिंगों को मीठी-मीठी प्रताड़ना दे रही थीं।
“आँहः ‘पुच, मेरे लाल, मेरी कोख के पिल्ले, चोद माँ की चूत! ”आअहः ‘चोद अपनी कुतिया माँ की चूत ! :ऊँह ऊँह तेरी कुतिया माँ तेरे पिल्ले जनेगी! चोद! :: ‘आँह ऊँहः ‘आँहः ‘आँह ‘ऊँह
“दीपक, मार मेरी गाँड! :: ‘ऊऊऊऊऊँह : ! डार्लिंग, और कस के! मैं जानती हूँ तेरे लन्ड में और जान है!आँहह ‘ऐंह ‘ऐंह.”
ये हुई ना बात ! ऐंह ऐंह हरामी, अब तू मेरी बेटी को चोदने के लायक है! आँह ऐंह ऐंह !”
बाप रे! ओह, बड़वों, ‘आँह मैं झड़ने वाली हूँ! चोद मेरी चूत , चोद मेरी गाँड! :: ‘आँहः ‘आँह::: मादरचोदों चोदो टीना को! :: ‘ओहह ऊऊँह: ऐं ऐंह ऐं: मैं झड़ रही हूँ! हे राम! हरामजादों! मैं झः ‘झड़ रही हूँ !! ”
टीना जी के जीवन का सर्वाधिक अवेगपूर्ण ऑरगैस्म था यह। एक मिनट तक शक्तिशाली ऐंठनों के तले उनकी देह फड़कती रही, अपने पुत्र के रौन्दते लिंग को चारों दिशा से उनकी योनि सिकोड़ती रही, और वे गुदा द्वारा पति के चीरते लिंग को प्रेम से चूसती रहीं। मारे वासना के टीना जी की आँखें नम हो चलीं, उनकी हालत बेहोशी के कगार पर थी।
आखिरकार चरमानन्द की मादकता कुछ थमने लगी, और वे बगैर हिले-डुले लेटी पड़ी थीं, दो हाँफ़ते नरों के दरम्यान मसली हुई लाचार स्त्री जैसे।।
“तालियाँ, तालियाँ, मम्मी, आपने आज हरामीपन की हद कर दी! क्या सैक्सी स्टाइल से चुदी हैं आप !”, सोनिया कराही, अपनी जवान योनि से उंगलियाँ निकालकर बोली, “अब मेरी बारी !” ।
| मिस्टर शर्मा ने अपने भीमकाय लिंग को पत्नी के चिपटते गुदा छिद्र से खींच निकाला। उनके चमचमाते, काले, माँसल अंग के सिरे से दूधिया वीर्य की बूंदें टपक रही थीं। बुरी तरह थकी हुई, लेकीन पूर्णतय तृप्त टीना जी अपने पुत्र के लिंग से अलग हुईं, और अपनी पुत्री को अपना स्थान ग्रहण करते देखा।
सोनिया ने मुंह पलट कर ललचाती निगाहों से पिता के दैत्याकारी लिंग को ताड़ते हुए भाई के बदन पर आसन जमाया। मिस्टर शर्मा का लिंग सामान्य से कहीं दीर्घ प्रतीत होता था, हवा में लहराकर धड़कता हुआ, उसकी माँ के गुदा-द्रवों से सना हुआ काला माँस का लोथड़ा।
उसनी नीचे देखकर पाया कि जय का लिंग भी उतना ही मोटा और चिपचिपाहट से सना, वैसा ही चममा रहा था। फ़रक केवल इतना कि वो माँ की योनि से रिसे स्वादिष्ट सैक्स – द्रवों से सना था। । “ओह, जय भैया,”, अपने स्तनों को भाई की देह के ऊपर हिलाते हुए बड़ी मासूमियत से सोनिया पुचकारती हुई बोली, “पहले तुम्हारा लन्ड तो जरा चूस लू !” | मिस्टर और मिसेज शर्मा ने हैरानी से सोनिया को भाई के तने लिंग को चूसते देखा। सोनिया सुपड़ -सुपड़ आवाजें निकालती हुई जीभ को कुतिया की भांति लटकाती हुई उसके लिंग-स्तम्भ के चटखारे लेने लगी। मारे मस्ती के जय कराहने लगा, बहन के चूसते मुख ने उसके लिंग में रक्त – प्रवाह की अवृद्धी कर उसका लिंग सुजा कर और अधिक बड़ा कर दिया था! सोनिया भाई के वीर्य का पान करने के लिये अधीर हो रही थी, पर जानती थी कि जल्दी का काम शैतान का। भ्रातृ – लिंग से ‘पॉप्प’ की आवाज के साथ सोनिया ने अपने होंठ हटाये, और अपने दोनों घुटनों को जय के कूल्हों के आजू-बाजू गाड़कर उसके लिंग का योनि-ग्रहण करने के लिये चढ़कर ऊपर बैठ गयी।
“चोद अपना लन्ड मेरे अन्दर, जय, वो मिमियाई, और अपनी नाजुक जाँघों के बीच हाथ घुसा कर उसके अकड़े हुए लिंग को दबोचा। “चोद साले, चोद बहन को! चोद ::…
उसके ये अल्फ़ाज बेलगाम कराहों में तब्दील हो गये। उसने अपने भाई के सुपाड़े को अपनी स्वर्ण – रोम-मण्डित योनि-द्वार पर ऊपर-नीचे रगड़ कर, फिर अपनी चिपचिपी योनि में घुसा दिया। | सोनिया आगे को झुकी और जय के कन्दों पर हाथ टेक दिया। उसके पुखता जवान स्तन जय के सीने के ऊपर झूम रहे थे। फिर वो आतुरता से मचलती हुई उचकने लगी, कराहती हुई अपनी तंग, मक्खन सी चिकनी योनि को भाई के मोटे, लम्बे लिम्रा की संतोषजनक कठोरता पर नीचे फिसलाकर उतारने लगी।
“ओह, जय! चोद मुझे! कितना मोटा और हार्ड है तेरा मुस्टंडा लन्ड !”, उसने आह भरी। “बहनचोद पूरा का पूरा अन्दर घुस रहा है! ऊउह, जय, टाइट है ना मेरी चूत ? मम्मी की चूत जितना ही मज़ा आ रहा है ना ?”
जय ने तत्परता से स्वीकृती में सर हिलाया। बहन की दबोचती प्रजनन -गुहा उसके लिंग पर नीचे सरकती जा रही थी, और वो साँड जैसे कराह रहा था। सोनिया आगे को पसर गयी, और स्तनों को भाई के सीने पर दबा डाला। मुन्डी मोड़ कर सोनिया ने पिता के लिंग को देखा।
कुछ ही देर पहले माँ की आँखों में उसी भाव को देखा होने के कारणवश जय को जल्द ही ज्ञात हो गया कि उसकी बहन क्या चाहती थी। हाथों को बढ़ा कर, उसने सोनिया के नितम्बों को हाथ में लिया, और खिंचकर अच्छी तरह से पाट दिया। पितृ-धर्म की निवृत्ति करते हुए जय ने बहन का गुदा-मार्ग पिता के लिंग के लिये खोल दिया था।
“डैडी, मेरी भी गाँड मारो !”, सोनिया गिड़गिड़ायी, और अपनी छोटी सी योनि को आतुरता से भाई के लिंग की दिशा में पटक दिया। “डैडी आपके लिये कबसे मेरी गाँड सूज कर फुदक रही है। दिखाओ अपनी मर्दानगी, डैडी, मारो बेटी की गाँड … जैसे माँ की मरी थी! जल्दी डैडी !” ।
मिस्टर शर्मा लपक कर पुत्री की तंग गुदा के पीछे आ चढ़े। लगातार दो नाजुक गुदाओं पर आक्रमण करने की आस के मारे उनका विशाल लिंग धड़क रहा था। उनके निकट, बिस्तर पर पसरी हुई टीना जी अपने पति को पुत्री से गुदा- सम्भोग के लिये तैयार होते देख , अपनी योनि में ताजे स्त्राव का आभास कर रही थीं। उन्हें तो आँखों देखे पर विश्वास नहीं आता था। पहले तो अपने पुत्र द्वारा मुख-मैथुन और सम्भोग का आनन्द लिया, फिर पुत्र और पति के संग दोहरे संभोग की मस्ती, और अब दोनो मर्दो को अपनी अट्ठारह बरस की जवान बेटी के संग वही वहशियाना हरकत करने की तैयारी करते देख रही थीं वे ! अविश्वस्नीय कामुकता!
“बाप! मार मेरी गाँड !”, सोनिया ने अधीरता के मारे आदर त्याग कर पिता के पौरुष को ललकारा, “बेटीचोद, ऐसी टाइटम-टाइट गाँड है, तेरे लन्ड को छील देगी, असली मर्द है तो घुसा !” । | मिस्टर शर्मा ने हर्षपूर्वक पुत्री की गुदा पर लिंग के प्रस्थापन के लिये तैयार हो गये, और अपने रिसते सुपाड़े को सोनिया की रबड़ जैसे लचीले गुदा-छिद्र पर दबा डाला। जैसे उसका गुदा-छिद्र खिंच कर अपने पिता के मोटे लिंग की पृविष्टि के लिये खुलने लगा, सोनिया तीव्र आनन्द की अनुभूति से कंपकंपा उठी।

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