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17 जल बिन मछली

“सोनिया, ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा तुम्हें। मेझे बस आधा घन्टे का वक़्त दो। फिर आरम से पूल के मजे लेन।” राज मुस्कुराते हुए पूल पर तैरते कचरे को साफ़ करता हुआ बोला।

“बैंक्स राज !” सोनिया ने जवाब में कहा। “जल्दी किसे है यार !” राज के तंग मजबूत पुट्ठों को निहारते हुमे उसने मन में सोचा।

जंघाओं के बीच गर्माती तपन के करं उसे टंगें कुछ खोलनी पड़ी। सोनिया का ध्यान राज को काम करते उसके चौड़े मजबूत कन्धों और टंगों की मजबूत पिंडलियों को देख कर अपने नॉवल पर नहीं टिक पा रहा था। जब वो झुकता तो उसकी जाँघों के बीच उसके पौरुष का उभार खासा भारी-भरकम था। उसने अपने बाथरोब को ऊपर से ढीला कर के अपने वक्ष स्थल के यौवन को बेपर्दा किया।

राज ने तो पहली ही नज़र में सोनिया के बिकीनी में लिपटे हुए जिस्म को ठीक से जाँच लिया था। उसकी नजरें क्षं भर के लिए उसकी जाँघों फर फिसलती हुई सोनिया के स्तनों के उभार पर टिक गयीं। सोनिया की चढ़ती जवानी ने उसके स्तनों को राज की उपेक्षा से कहीं अधिक विकसित कर दिया था। “क्या उम्र होगी ? चौदह ? पन्द्रह ? साले जेल जाना पड़ेगा। चोदने का मौका मिले तो जेल भी क़बूल है। लौन्डी पका हुआ आम है। चूत भी बड़ी टाइट होगी !”

राज ने किसी तरह मन में उठते वासना भरे खयालों को दबाया। उसे डर था कहीं सोनिया उसकी जाँघों के बीच तनते हुए तंबू को नहीं देख ले। पर सोनिया की तीक्ष्ण गिद्ध निगाहें राज के मचलते हुए उभार को भाँप चुकी थीं।

“चल गया मेरा जादू !” बाथरोब को सरका कर कुछ और खोलते हुए उसने सोचा। राज सोच रहा था की सोनिया अपनी माँ का ही युवा रूप थी। बस बाल लम्बे नहीं थे, चुंघराले और छोटे थे। पर फ़िगर तो एकदम माँ जैसा था। माँ और बेटी का चेहरा और हावभाव हू-ब-हू मेल खाते थे। | सोनिया किताब में लीन होने का नाटक कर रही थी। जब भी मौका मिलता एक नजर राज को काम करते हुए देख लेती थी। रह रह कर बड़ी अदाओं से अगड़ाइयाँ ले कर अपने यौवन से उसे रिझाने के लिये जिस्म का प्रदर्शन भि करती। उसका बाथरोब तो कन्धों से नीचे गिरा ही जाता था। उसकी चिकनी लम्बी टांगें जाँघों तक न नंगी थीं। जैसे जैसे सोनिया अपने यौवन के जलवे दिखाती जा रही थी, वैसे वैसे राज का ध्या अपने काम पर लगना और कठिन होता जा रहा था। आखिरकार सोनिया तन के उठ खड़ी हुई और नीचे सरका कर बाथरोब को अपने तन से उतार डाला। राज ने उसके इस रूप को देखा तो मारे हैरानी के पूल में गिरते-गिरते बचा। माशाल्लाह! क्या पोशाक पहन रखी है। ये बिकीनी तो सोनिया के कीसी अंग को भी ढक नहीं पा रही है!

उसका लन्ड चौंकाने वाली तेजी से साँप जैसा सनसना कर जीन्स के कपड़े को उठा कर तन गया। सोनिया ने राज को अपने स्तनों को नज़र भर देख लेने दिया और फिर आरामकुर्सी पर पेट के बल औन्धे-मुँह लेट गयी। राज ने सोनिया की ओर देखा और उसकी जवान गाँड के गोल-गोल गालों पर नजरें सेकीं। “वल्लाह! जवाब नहीं।” मुँह में बुदबुदाया। दिसम्बर की दोपहर के सूरज में उसका तन चमचमा रहा था। सोनिया के शैतान चेहरे पर एक मुस्कान लोट रही थी। उसे अच्छी तरह मालूम था कि राज उसे घूरे जा रहा है। यह बात उसके जिस्म को गुदगुदा रही थी। “फष गया साला! अब कुछ ही देर की बात है।” उसने खुद से कहा।

राज पूल के दुसरे किनारे से चलता हुअ उसके पास आ खड़ा हुआ। “सोनिया मैने अपना काम तो कर दिया है। बन्दे के लिये और कुछ काम हो तो … ?” उसकी गोल गुदगुदी गाँड को निहारते हुए राज ने पूछा।

सोनिया लोट कर सीधी हुई और बेधड़क अन्दाज में ऊपर देख कर नजरें मिलाति हुई सोचने लगी “बच्चू ! डबल मीनींग डायलॉग कहते हो ।” “बस! तुम्हारे लिये और कोई काम नहीं। तुम्हारे घर पर स्विमिंग पूल नहीं है न ? क्यों न तुम यहीं स्विमिंग कर लेते ? मुझे अकेले स्विमिंग करने में मुझे बड़ी बोरियत होती है।” दातों तले निचले होंठ को दाबे हुए गर्दन मटकाते हुए और अदा से सकुचाते हुए सोनिया बोली।

राज ने लन्ड का एक और जबरदस्त झटका पैन्ट के अन्दर महसूस किया। “मैडम तो मुझसे भी दो कदम आगे हैं। चलो क़िस्मत आजमा कर देखते हैं।” राज ने सोचा। “ठीक है। पर मेरे पास स्विमिंग ट्रन्क नहीं है।”

कोई बात नहीं। मैं तुम्हें जय का स्विमिंग ट्रन्क दे दूंगी। थोड़ा टाइट होगा पर काम चल जाएगा।” कह कर सोनिया दौड़ कर घर के अन्दर चली गई।

राज ने पीछे से किशोर- सुन्दरी को दौड़ते हुए देखा और बिकीनी के अन्दर उसकी जवान माँसल गाँड को फुदकते देख कर उसके मुंह से लार टपकने लगी ::::

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