Reading Mode

15 आवेश

मिसेज शर्मा का पूरा बदन जवान बेटे के अद्भुत जोशीले कामबल को झेल-झेल कर निरंकुश वासना से जल रहा था। लन्ड के बाहर खिंचने पर उनकी योनि उस पर लिपटती जाती और लन्ड के वापस उनके अन्दर झोंकने पर योनि फैल कर कठोर पुर्षाग के हर इंच को निगल लेती।

टीना जी ने अपनी जाँघे पूरी फैला कर योनि को अपने उन्मत्त पुत्र के दनदनाते लन्ड के झटकों के लिये समर्पित कर रखा था। अपने बुरी तरह से चुदती हुई योनि की गहराईयों से अगले ऑरगैसम की उमड़ती गर्माहट ने उनके होंठों से एक सिसकी निकाल दी थी। बेटे के चेहरे की तरफ़ पलके फड़का कर जब उन्होंने अपनी आँखें खोली तो पाया कि जय की भी आँखों में वैस ही शुरूर था। जाहिर था कि वो भी अब झड़ने ही वाला था।

“ऊउंह! चोद! ओओओओ, चोद डाल मम्मी को! मैं तो झड़ी !” टीना जी चीखीं। काम -संतुष्टी की लहरें उनकी धमकती ऐंठती योनि के हिरोबिन्दु से बाहर पुरे बदन पर उमड़-उमड़ कर फैल रहीं थीं।

माँ की वासना भरी बेशरम चीखें सुन कर जय और अधिक उतावला हुआ और अपनी माता को और बल से चोदने लगा। उसके कूल्हे दे पटक पटक ऊपर-नीचे हरकत कर रहे थे। जय का कठोर लिंग माता की फड़कती योनि की नर्म गहराईयों में पुत्र- प्रेम की पावन भावना से गर्माहाट उड़ेले देता था।

अपने प्रति पुत्र के हृदयानुराग की इस अभिव्यक्ति ने माँ को निहाल कर दिया। अपनी सिहरती कोख़ पर पुत्र के बलशाली लिंग के हथौड़े जैसे प्रहारों के तले टीना जी को अपनी जाँघे मोम की तरह पिघलती सी लगीं, नेत्रों के सामने चरमानन्द की धुंधलाहट छाने लगी। वे अपनी ऐंठती कमर को ऊंचा उठा कर योनि के संवेदनशील शिरोबिन्दु को पुत्रलिंग पर मसलते हुए झड़ने लगीं। पुत्र से सम्पन्न हुई पाशविक संभोग के आनन्द – भंवर में डुबती सी चली जा रहीं थीं।

“मेरे लाल! ओहह, जय” मिसेज शर्मा कईं बार कराहीं थीं। जय की उखड़ती साँसों, मन्द पलकों और भिंचते जबड़े से उस पर बड़ता तनाव साफ़ जाहिर होता था। टीना जी ने चर्मानन्द की दिव्य अनुभुति में उसके फुदकते हुए नितम्बों को ने अपनी बाहों के मातृ पाश में ले कर अपनी कोख में और अन्दर खेंच लिया। काम क्रीड़ा के परमानन्द के अन्तिम पलों में उनका पूरा बदन थरथरा उठा। स्फुटित होती आनन्द तरोंगों से योनि जकड़- जक्ड़ कर पुत्र के दीर्घ लिंग को भिंचती जाती थी। अपनी चीख को दबाने के लिये टीना जी ने निचले होंठ को दाँतों से काट खाया। उनके तीखे नाखुन जय कि भींची हुई गाँड पर निर्दयता से कसे जाते थे। |

अपनी वासना लिप्त माँ के मादा जानवर जैसे ऐंठते तन को देख कर जय के सब्र का बाँध टूट पड़ा। हाँफ़ता हुआ, साँड सा हुंकारता हुआ, अपने सर को पिच्छे कि तरफ़ फेंकता हुआ अपने गरम, खौलते वीर्य की लबालब बौछारें माँ कि योनि की गहराईयों मे उडेलने लगा। पुत्र के वीर्य की फुहार ने टीना जी कि योनि में उन्माद की कईं फड़कती थरथराहटें पैदा कर दी। योनि के जकड़ाव – फैलाव की तीव्रता और बढ़ गई। वीर्य स्खलन के आवेग में जय के हाथ लपक कर माँ के पसीने से तर स्तनों पर जकड़ गये थे और उनके मातृ – गौरव को निचोड़ रहे थे। साथ ही वो अपने पौरुष के पिघलते मलाईदार वीर्य से माता की योनि को लबालब भरे देता था। टीना जी चीख पड़ीं – चीख में उनके पाप – कृत्य से उत्पन्न लज्जा और अभूतपूर्व वासना सम्मिश्रित थी। उनका पुत्र उनकी योनि में वीर्य स्खलित कर रहा था। उन्होंने अपने ही पुत्र को काम – क्रिया का सहभागी बनाया था। कितना उत्तेजक था यह कृत्य! जैसे ही पुत्र-वीर्य की पहली बौछार का अनुभव उन्हें हुआ था, उन्होंने जय के फौव्वारे से लिंग को कस के भींच लिया था, कहीं उनके जवान बेटे के उपजाऊ वीर्य की एक भी बूंद व्यर्थ न हो जाए। बेटे जय को और उकसाते हुए बोलीं थीं वे :

* शाबाश बेटा जय! उडेल दे सारा जूस मम्मी की गरम चूत में !” ।
हरामी कैसे चूस चूस कर निप्पल से दूध पीता था! अब वैसे ही तेरे लन्ड को निचोड़ दूगी !”

देखें कितने लीटर स्टोर कर रखा था टट्टों में !” * मेरी कोख़ लबालब कर दे मेरे लाल !”

जय कराहता हुआ अपने अडकोष को निचोड़- निचोड़ कर सर्र- सर्र माता की योनि में विर्या को खाली कर रहा था। टीना जी हर बौछार को गिनती जा रही थीं:

“आठ! आह! नौ! एक और बार! दस्स !” हर बौछार के साथ टीना जी जय के नितम्बों को पंजों में जकड़े अपनि योनि के और भीतर धकेले देती थीं।

. ‘ ‘तेरह ।” टीना जी हैरान थीं कि वीर्य की आखिरी बौछार के बाद भी जय ने काम-क्रीड़ा बन्द नहीं की थी। अलौकिक सैक्स- संतुष्टि के बाद भी उसका लिंग काफ़ी कठोर था। यही तो अन्तर है जवान लड़कों में और मेरे पति में – झड़ने के बाद तुरन्त दूसरी बार लन्ड तन जाता

“ऊ, जय लाजवाब सैक्स था !” टिन्न जी ने कमर मटकाते हुए चहचहा कर कहा।

मुस्टन्डे! मम्मी की चूत में एक दर्जन बौछारें उन्डेली और तेरा लन्ड अभी भी तना हुआ है! लगता है ये लन्ड मांगे मोर ?” ।

“ये प्यास है बड़ी!” दोनों पेप्सी-कोला के विज्ञापन की इन लाइनों को दुहरा कर खिलखिलाते हुए हस पड़े।

जय बड़े लाड़ से अपने लिंग की लम्बाई को माँ की योनि के अन्दर आगे-पीछे सड़प – सड़प फिसलाने लगा। टीना जी की योनि सैक्स के उपरान्त स्त्राव के लिप्त हो कर गरम और लिसलिसी हो गई थी। उनकि चूत का चोचला एक गुलाबी जीभ की तरह लपक कर उनके बेटे के काले लन्ड को चाट रहा था। मिसेज शर्मा को विश्वास नहीं हो रहा था कि इतने शीघ्र ही उनका बेटा उन्हें फिर उत्तेजित कर लेगा। कुछ सैकेन्दों में उन्हें फिर वही मीठा सा दर्द अपनी इन्द्रीयों मे उमड़ता सा प्रतीत हुआ। सिर्फ आधे घन्टे में ही क्या वे तीसरी बार झड़ने वाली थीं

Please complete the required fields.