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14 पुत्र ने सीखा

मिसेज शर्मा ने ऊपर जय के चेहरे पर देखा तो उसकी आंखों में माँ के प्रति पुत्र का निश्छल प्यार उमड़ता पाया। फिर उन्होंने उसके काले फड़कते लन्ड के सुपाड़े को अपनी लाल चूत के होंठों को पाटे हुए देखा। पुत्र को इस घोर पाप का कृत्य करने जाते देख उनके होश उड़ गए। हालंकि उनकी माद इड़ियाँम चीख-चीख कर उन्हें उकसा रहीं थीं, पर उनके मन में कहीं तो समाज का डर था जो प्रेम की इस अभिव्यक्ति को पाप की संज्ञा देता था।

“रुको जय! हम … हम ऐसा नहीं कर सकते !” मिसेज शर्मा ने पुत्र को दूर हटाने की एक दुर्बल सी चेष्टा की। पर पुत्र प्रेम ने उनके तन को दुर्बल कर दिया था। इससे पहले कि वो अगला लफ़्ज़ कह पायें जय ने निर्दयता से एक ही झटके में अपना पूरा लन्ड माता की योनि में घुसा डाला।

“ जय! क्या चीर डालेगा माँ को ?” पुत्र के भीमकाय लिंग को एक ही बलशाली झटके में अपनी योनि की गहराइयों में उतरता महसूस कर के टीना जी बोलीं।
आहिस्त! मादरचोद आहिस्ता से! दर्द होता है! मेरे लाल प्लीज जरा धीरे-धीरे।”

** ओह अम्मा! कितनी टाईट हो तुम! सालः . जय खुल कर बोल नहीं पाया।

बोल जय! खुल कर बोल मम्मी से !”

“म मैं कह रहा था! साली चूत तो इलास्टिक जैसी टाइट है!” अपने बेटे के मुंह से बेधड़क बेशर्मी से निकलती रंडीखाने वाली भाशा ने टीना जी को और अधिक उत्तेजित कर दिया। माता ने अपने कूल्हे उचका कर पुत्र के अधीर लिंग की पूर्ण लम्बाई को अपनी गहरी योनि में निगल लिया।

जाँघों के बीच देखा तो पाया कि पुत्र का काला मोटा लिंग उनकी योनि के फैले हुए होंठों के बीच चपा-चप्प आवाज करता हुआ कोख की गहराईयों को छू रहा है। । “हरामजादा! बाप जितना बड़ा है!” बेटे के पौरुष तथा बल पर एक आश्चर्य हो रहा था उन्हें। आश्चर्य के साथ ही आनन्द भी। उनके सत्रह बरस के पुत्र का लिंग उनकी लचीली योनि सामान्य से कुछ अधिक खींच कर एक मीठा दर्द दे रहा था।

आश्चर्य जय को भी था। माता की योनि शिशु के जनं के बाद कुच बड़ी और ढीली हो जाती है। पर अनुमान के विपरीत योनि को तंग और लचीली पा कर उसे एक सुखद आश्चर्य हुआ था। इतनी तंग थी योनि कि उसकी एक- एक माँसपेशी, एक एक धमनी को अपने लिंग की संवेदनशील त्वचा पर अनुभर कर सकता था – जैसे रबड़ के दस्ताने पर।

जय ने अब माँ को बदस्तूर चोदना चालू किया। अपने ताकतवर शरीर का भार कोहनी पर टेक कर अपने कुल्हे आगे पीछे चलाने लगा, पहले तो साधारण गति में और फिर जैसे-जैसे माता के तरल मादा-द्रवों से लिंग और योनि का संगम स्थल चिकना होता चला गया, तो अधिक गति से।
। जय अपने लिंग को दनादन बलपूर्वक अंदर अपनी माता की योनि में मारता और बाहर खिंचता

पुत्र के लिंग की घर्ष क्रिया में इतना बल था कि टीना जी काँटे पर फसी मछली जैसे हुए बिस्तर पर मचलते हुए हाँफ़ने लगीं। माता-पुत्र की सैक्स-क्रीड़ा में वो ऊर्जा थी की टीना जी सिसकियाँ लेने लगीं – मालूम नहीं मारे लज्जा के या मारे आनन्द के। जगली बिल्लि जैसे पंजों से बिस्तर की चादर को मुट्ठी में भिंचने लगीं। अपने कूल्हे को ऊपर उठा कर पुत्र के लिंग के हर बलशाली झटके को उतने ही प्रबल ममता भाव से ग्रहण करतीं। उन्माद से सर को पीट रहीं थीं जैसे बदन में प्रेतात्मा का कब्जा हो।

योनि की बाहरी संवेदनशील त्वचा पर पुत्र के मोटे लिंग की घर्ष क्रिया से उत्पन्न अनुभूतियों में उनका सर झूम रहा था। गाँड तो ऐसे चक्कर मार रही थी जैसे गन्ने का रस निकालने वालि मशीन। अपने उन्माद में उन्हें इस बात का बिल्कुल खयाल नहीं था कि उन्हें का सत्रह बरस का पुत्र उनकी काम-क्रीड़ा में सहभागी है।

* मादरचोद जय! माँ का दूध पिया है तो चोद अपने काले मोटे लन्ड से मम्मी की चूत !” टीना जी ने दाँत भींचते हुए नागिन सा फुफकारा।।

जय ने नीचे अपनी माँ की पटी हुई जाँघों के बीच अपने लिंग को मातृ योनि में भीतर-बाहर फिसलते हुए देखा। लिंग बाहर को खिंचता तो घने रोमदार योनि-पटल उससे चिपके हुए बाहर दिखते, जब लिंग भीतर को लपकता तो अपने साथ उन्हें भी अंदर छिपा देता। वो लचीली मातृ योनि को अपने लिंग पर लिपटता और उससे खिंचता देख भी सकता था और अनुभव कर सकता था। इस लाजवाब खयाल ने उसकी उत्तेजना को हज़ार गुना बढ़ा दिया था।

कराहते और हुंकारते हुए मिसेज शर्मा ने अपनी टांगें ऊपर को उठा कर अपने घुटने छाती से लगाये और पुत्र के लिंग से अपने जननांगों के संगम स्थल को और तंग भींच दिया। उनके पति को यह कामासन अति प्रिय था। स्त्री जब अपनी टांगें ऊपर को उठा कर घुटनों को स्तनों पर भींचती है तो योनि सबसे अधिक फैली होती है। योनि के अति संवेदनशील शिरा भाग के पुरुष की हड्डी के ऐन नीचे होने से स्त्री को भी अत्यंत आनन्द मिलता है। यह पाश्विक मुद्रा पुरुष को अचानक और बहुत उत्तेजित कर सकती है। साथ ही जननांगों का संगम भी बहुत गहरा होने के कारं गर्भ धारण के लिये भी उत्तम आसन है यह।

| जय के झूलते उदर का सीधा प्रहार उनकी टंगों के द्वारा अब टीना जी की छाती पर हो रहा था जो उनके फेफड़ों से हवा को पम्प की तर्ह निकाल फेंकता था। हाँफ़ते हुए भी माँ ने अपनी कोख के लाल को लाड़ से गालियाँ देना जारी रखा।

“कुतिया की औलाद! चोद अपनी माँ का भोंसड़ा! देखें कितना जोर है !” “साले पिल्ले अपनी छाती से तुझे दूध पिलाया था इसी दिन के लिये !” आज तेरे टट्टे नहीं सुखा दिये तो कुत्ते का सड़का पियूँगी !” हरामजादे एक सैकन्ड भी रुका तो गाँड फाड़ दूंगी।” बाहर क्या हिला रहा है ? और अंदर घुसा !” मादरचोद तेरे बाप का लन्ड था यहाँ कल रात ।” उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह ! आउच! उन्घ्ह उन्ह उन्ह उन्ह उन्ह” मम्मी! देख तेरा बेटा तुझे चोद रहा है!”

मम्मी! मेरा लन्ड आपकी चूत में बहने वाला है !” * इंह आह ! इंह आह्ह! इंह आह !” ऊह्ह्ह! जय बेटा! उडेल दे अपने टट्टों का तेल मेरी चूत में! मेरी चूत तेरे गरम वीर्य की प्यासी है! बस बेटा ऐसे ही! अब झड़ने ही वाली हूं! और जोर से! ओह मादरचोद !”

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