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40 छैयाँ छैयाँ

जय का लिंग मातृ योनि की चिपचिपी गिरफ़्त से ‘प्लॉप्प’ की जोरदार आवाज के साथ मुक्त हुआ। टीना जी ने करवट ली और टाँगों को चौड़ा पसार कर जय के सम्मुख मेज के कोने पर बैठ गयीं। अब वे अपने पुत्र की आँखों में आँखें डाल कर सम्भोग का आनन्द उठा सकती थीं। उन्होंने जब अपनी पतली बाँहों में जय की गर्दन को लपेटा और अपनी योनि की दिशा में खींचा, तो जय ने ऐसी निरी कामुक दृष्टि से उन्हें देखा, कि वे पुत्र पर लट्टू हो गयीं। किशोर जय ने जैसे अपने श्याम वर्ण के लिंग को माँ की भाप उगलती योनि में दोबारा प्रविष्ट कराया, उनके हृष्ट-पुष्ट स्तन जय के सीने पर दब गये। कामावेग पीड़ित माता-पुत्र के भीगे होंठों का नम मिलन हुआ। सम्भोग की शुरुआत के उपरान्त पहली बार माता-पुत्र चुम्बन कर रहे थे। चुम्बन अत्यन्त आवेग-युक्त और कामुक था, दोनो पापी प्रेमियों की दैहिक तड़प से भरा हुआ। टीना जी ने हाँफ़ते हुए अपना मुख जय के चूसते होंठों से अलग किया।

“जय, तेरा लन्ड मम्मी को बहुत प्यारा है! देख कैसे मुआ मेरी चूत को फाड़ता हुआ चोंचले पर रगड़ रहा है!”, जय की माँ ने फुकारते हुए कहा, और उसके कान को अपने होंठों मे पकड़कर चबाने लगीं। टीना जी ने अपनी उचक कर जय के गहरे जुते हुए लिंग पर कसा, तो उनके उभरे हुए निप्पल उसके सीने पर चुभने लगे।

बोल जय बेटा, मैगजीन में फ़ोटो देखते हुए मुठ मारने से ज्यादा मस्ती तो मम्मी को चोदने में है ना ?”

“अँहह! बिलकुल मम्मी, तेरी चूत की कसम, मः ‘मादरचुदाई में तो अहह बहुत मस्ती है !”, जय बोला।

“क्या मुठ मारते हुए मैं अक्सर तेरे ख्यालों में आती हैं, जय !?”, मिसेज शर्मा ने एक आगे को एक जोरदार झटका देकर, अपने पेड़ को जय के लिंग के तने पर रगड़ा।

“अः ‘अक्सर मम्मी! पर कभी-कभी कमलाबाई, अऔर मूड बना तो सोनिया के नाम पर भी मुठ मार लेता

“ओहो ! जनाब का लन्ड बहन सोनिया को देख कर भी फुदकता है ?”, टीना जी की दिलचस्पी जाग उठी थी। मेरे लाडले, बोल कब से तेरे खुराफ़ाती दिमाग में बहनचोदी का भूत चढ़ा हुआ है ?” ।

अरे मम्मी, उसी ट्रेन के सफ़र की रात से।”, जय अपनी माँ का कस के आलिंगन करता हुआ बोला। “मैं मजबूर था मम्मी। तुझे बाप से चुदते देख कर मेरा लन्ड शांत होने का नाम नहीं लेता था। चादर के अन्दर टार्च जला कर मैं मुठ मारने लगा था। पहले तो तेरी चूत के नाम पर मार रहा था, पर फिर अचानक मेरे सामने वाली बर्थ पर सोनिया नींद में कराहने लगी। सुनकर मैं तो चौंक गया, पर फिर देखा तो वो गहरी नींद में थी। गौर से देखा तो मम्मी, सोनिया की सैक्सी बॉडी को देख कर मेरे मन में शैतान जाग गया। उसकी नारंगी जैसे चूचियाँ नाइटी के नीचे से उभरी हुई थीं। मेरी बहन तो एकदम टोट माल है, निप्पल ऐसे कड़क, मेरा मूड तो बहनचोदी का हो गया !”

बहनचोद पापी, फिर क्या किया तूने ? मेरी बेटी को चोद डाला ?”, आशा भरे स्वर में जय की माँ ने पूछा।

“नहीं, मम्मी। मेरी हिम्मत नहीं हुई। पर लन्ड की कसम, मन तो करता था, कि लगाऊं छलांग और घोंप दू साली की चूत में अपना लन्ड! ऐसी बेशर्मी से बिना चादर ओढ़े सो रही थी, नाइटी उठकर नंगी टांगें दिखा रही थी, हरामजादी की पैन्टी तक दिख रही थी। मेरे दिमाग में तो ये नजारा देख कर बुखार चढ़ रहा था, मम्मी!” टीना जी ने अपनी अनुभवी योनि को पुत्र-लिंग पर सिकोड़ा और अपनी हथेलियों में उसके बलिष्ठ युवा नितम्बों को जकड़ा।

“बहन के बड़वे! फिर क्या किया !”, भारी साँसों के बीच मिसेज़ शर्मा ने पूछा।

“अब तो सोनिया को छुये बगैर नहीं रहा जा रहा था, मम्मी! मेरा लन्ड तो गधे की तरह दुलत्ती मार रहा था। मैने बढ़ कर अपना हाथ उसकी टांगों के बीच घुसा दिया।” टीना जी ने जय के कस के पेड़ को अपने पेड़ पर भींच लिया, और अपने चोंचले को उसके फिसलते लिंगस्तम्भ पर रगड़ती हुई सुनने लगीं।

अहहह! माँ के लवड़े! वो गरम थी क्या?”, उसकी माँ कराही, “सोनिया की चूत का टेंपरेचर कैसा था ?”

हाँ मम्मी! सोनिया की चूत में तो कोयले जल रहे थे, हालांकि मैने उसकी पैन्टी के पार से छुआ था! सोनिया जरूर कोई सैक्सी सपना देख रही होगी! मैने जैसे ही छुआ, साली ने झट से अपनी टांगें खोल दीं, फिर मैं एक हाथ से उसकी चूत मसलने लगा, दूसरे हाथ में अपने लन्ड की मालिश करता रहा। क्या मजा आ रहा था, मेरा सारा डर हवा हो गया! रगड़ते – रगड़ते, मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूत खुलती जा रही है। साली का चोंचला भी कड़ाने लगा, मम्मी। देखते ही देखते, उसकी पैन्टी भीग कर गीली हो गयी। हैं, हैं करके जोर-जोर से उसकी साँसें चलने लगीं। माँ कसम, मैं भी क्या ताव खा रहा था! फिर मेरे दिमाग में आयी कि क्यों ना सोनिया की चूत को उसकी पैन्टी उतार कर छुआ जाये। तो मैने एक सैकन्ड के लिये लन्ड से अपना हाथ हटा कर, हौले से उसकी गाँड को बर्थ से ऊपर उठाकर, उसकी नींद में खलल डाले बिना, बड़ी सावधानी से उसकी पैन्टी उतार दी।” ।

“उसकी पैन्टी बिलकुल गीली हो गयी थी, मम्मी! मैने उठा कर उसे सुंघा भी। क्या नशीली स्मैल थी मम्मी! माँ कसम, जैसे आपकी चूत की सोची थी, वैसी ही स्मैल थी, मम्मी!”, जय ने माँ के खुले होंठों का फिर चुम्बन लिया, और आगे की कहानी कहने से पहले उनके मुँह के अन्दर अपनी जिह्वा से टटोला।

 

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