पापी परिवार की पापी वासना – Update 11 | Incest Story

पापी परिवार की पापी वासना – Dirty Incest Sex Story
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11 और चाभी खो जाए

*आन नहीं बेटा! तुमहारी मम्मी मेरा इन्तजार करती होंगी। मुझे अब चलना चाहिये।” मिस्टर शर्म वहां से नौ-दो-ग्यारह हो गये। इससे पहले कि कोई उनके तने लन्ड को देख लेता। | मर्दो की सैक्स इन्द्रियों को जागृइत करने की अपनी शक्ती को पा कर वो बड़ी खुश थी। उसके सैक्सी जाँ जिस्म की आग मर्दो को मोम की तरह पिघला देती थी। खासकर अगर डैडी को भी उसने उत्तेजित कर के उसने साबित कर दिया था कि अब वो बच्ची नहीं थी। ये भी साबित हो चुका था कि डैडी उस पर ऐसे ही आकर्षित हो रहे थे जैसे की मम्मी पर होने चाहिये।

पति दीपक के जाने के बाद टीना ने गृइहिंइयों की तरह अपने घर की सफ़ाई करनी चालु कर दी। पूरा घर बिखरा पड़ा था। पहले तो हर रूम से धोने के कपड़े उठाने थे। सोनिया का कमरा तो एकदम चमाचम साफ़ था। पर जय का कमरा तो हमेशा ही गन्दा रहता है। मिसेज शर्म बेधड़क कमरे का दर्वाजा खोल कर अंदर घुस गयीं। अन्दर जो नजारा उनकी आँखों ने देखा, उससे उनके पैर जमीन पर गड़ गये।

उनका बेटा जय बिस्तर पर अधनंगा लेटा हुआ था और हाथ मे लन्ड पकड़ कर पूरे जोर से लगा हुआ था मुठ मारने । मिसेज शर्मा ने आश्चर्य में गहरी साँस ली। अचरज उन्हें अपने बेटे के मुठ मारने पर नहीं हुआ। हैरान तो थीं वे अपने बेटे के लन्ड के XXL साईज पर। इसका लन्ड इतना बड़ा कब हुआ! मिसेज शर्मा को हमेशा से बड़े और मोटे लन्ड पर मरती थीं और जय का लन्ड तो उसके देखे बड़े-बड़े महारथी लन्ड – स्वामियों की टक्कर का था! पति के लन्ड से क्या कम होगा। और देखने मे तो कहीं मोटा लगता है। जय ने मुंह दूसरी ओर फेरा हुआ था और वो हस्तमैथुन मैण इतना लीन थे कि उसने ना तो मम्मी को अन्दर आते देखा न ही आहट सुनी।

मिसेज शर्मा की आँखें अभी भी अपने बेटे के विशाल फड़कते लन्ड पर गड़ी हुई थीं। मारे रोमाण्च के दिल धक-धक बोल रहा था। जय को अपनी मुट्ठी से अपने तने हुए काले लन्ड की चमड़ी को जानवरों सा ऊपर-नीचे रगड़ता देख मिसेज शर्मा की चूत सैक्स की चाह में रिसने लगी। जय ने पलकें भींच रखीं थी और कमर को बिस्तर से उठा-पटक कर लन्ड को बेतहाशा मुट्ठी मे घुसाता और निकलाता जा रहा था।

मिसेज़ शर्मा असमंजस में थीं कि एक साधारण माँ
की तरह चुपचाप कमरा छोड़ दें या फिर चूत में उमड़ती वासना के सामने आत्मसमर्पण कर दें। | 4 रब्बा! कैसी आग लगायी तू ने चूत में !” सोच कर टीना जी ने पीछे दरवाजा लगा दिया।

हे भगवान! पापी चूत का सवाल है !” मिसेज शर्मा ने दरवाजे की चाभी घुमाई और जय के लन्ड से नजर हटाए बगैर धीमे से बिस्तर के करीब आयीं। बेटे जय का पुश्तैनी लन्ड तो बाप की तरह बड़ा था ही। मुठ मारते हुए वो लोहे सा सख्त और काला हो गया था जिसे देख

देख कर मिसेज शर्मा की चूत में सैक्स – इच्छा की उमड़ती लहरें उन्हें गुदगुदा रहीं थीं।

टीना जी खुद-ब-खुद अपनी छरहरी जाँघों से अपनी चूत को भींच -भींच कर दबाने लगीं। कामोत्तेजित हो जाने पर भी किसी लन्ड के चूत में न होने के समय वो अक्सर ऐसा ही करती थीं। उनका एक हाथ खुद-ब-खुद पैजामे के अन्दर सरक कर पैंटी के गीले कपड़े से चूत को मसलने लगा। मुठ मारते अपने बेटे से उन्होंने नशीली अवाज़ में फुसफुसा कर कहा:
* जय !”

अपनी माँ की आवाज सुन कर जय लपक कर बिस्तर पर सीधा बैठ गया।
“अह! अ अ आ मम्मी! आप यहाँ कब आयीं!” मिमियाते हुए बोला। झेप से उसके कान लाल हो रहे थे। आश्चर्यचकित होने की बारी अब जय की थी। मम्मी के अचानक आने से अधिक अचरज उसे ये देख कर हो रहा था कि मम्मी का एक हाथ पैजामे के अन्दर चूत को मसल रहा है !!!

अपने बेटे के चेहरे पे हवाईयाँ उरते देख टीना जी मुस्करा पड़ीं।

“अरे बेटा इसमें शरम कैसी ? जो तुम कर रहे हो वो तो बस कुदरत की बात है। सब करते हैं!” आगे बढ़ कर मिसेज़ टीना बोलीं।

जय वहाँ खड़ा ये नहीं तय कर पा रहा था कि अपने गुप्तांगों को ढके या नहीं। आखिर उसकी माँ उसके ही सामने खड़े उसके लन्ड को ऐसे ताक रही थी जैसे बच्चा लॉलीपॉप को। और तो और, साथ- साथ अपने पेड़ पर हाथों से मसल भी रही थी। जय को विश्वास नहीं हो रहा था! उसकी मम्मी उससे तो फुट की दूरी पर खड़ी थी।

जय का लन्ड सपेरे की बीन की तरह मिसेज़ टीना की आँखों की पुतलीयों को अपनी सम्मोहक ताल पर नचा रहा था। कुच देर मूर्खता से उसका चेहरा ताकने के बाद जय का ध्यान माँ के जिस्म की तरफ़ हुआ।

टीना जी के गोरे-चिट्टे बदन पर पीला सलवार सूट कमाल का सैक्सी लग रहा था। केवल पैंसिल स्टैप ही थे गोरी-चिकनी छाती पर। इस उम्र में भी ये पतली, लचीली कमर। उस पर सूट की टाईट फ़िटिंग। हालंकी सूट के घेर ने नितम्बों के उभार को छिपा लिया था पर उनके परिपक्व स्तनों का उभार साफ़ दिखता था। ये स्तन दो शिशुओं को दूध पिला चुके थे पर मजाल है कि जरा भी विकार या लटकाव हो। मातृ-गौरव से सदैव गगनोन्मुख रहते थे। क्या लोच और पुख्तापन था उनमें! उम्र के साथ खरबूजे जितने बड़े और मीठे लगने लगे थे! आषाढ़ के मीठे पके जामुनों जैसे निप्पल सूट के पतले कपड़े के नीचे से मानों चूसने को आमट्रित करते थे। टीना जी की साँसें तेज हो चली थीं – उठती-गिरती छाती उनके स्तनों को जय की आँखों के सामने नचा रही थी।

सिहरते हुए मिसेज शर्मा ने आगे बढ़ कर उनके और जय के बीच की बाकी बची दो फुट की दूरी भी समाप्त कर दी। उन्हें पास आते देख जय के कंठ में एक दबी गट-गट सी हुई। मम्मी इतनी करीब थीं कि वो उनके जिस्म की गर्माहट को महसूस कर पा रहा था। मिसेज टीना ने चेहरा जय के चेहरे पर झुका कर नजरें चार कीं। नजरों में बात हुई और टीना जी ने झिझकते हुए अपना एक हाथ दोनों के कंपकंपाते बदनों के दर्मयान नीचे की ओर बढ़ाया। टीना जी की अधीर उंगलियों का ममता भरा स्पर्श अपने लन्ड पर पा कर जय एक बार तो वासना से कांप उठा। फिर अचानक उसके चेहरे पर चिटा के बादल मंडरा गए।

“मम्मी! कोई आ जाएगा।” जय फुसफुसाया। उसे डर के मारे हाथ-पाँव नहीं सूझ रहा था।

“फ़िक्र मत कर! दरवाजा बंद है!” मिसेज टीना ने अपने बेटे के लंबे, काले लन्ड पर मुट्ठी कसते हुए कहा।

“तेरे डैडी बाजार गए हैं। सोनिया स्विमिंग पूल में है। हमें डिस्टर्ब करने वाला कोई नहीं। फिर भी तू सब काम खामोशी से करना। ठीक ?” टीना जी ने नागिन सा फुकारते हुए कहा।

ऊह्ह! म्म! बिलकुल ठीक मम्मी!” उसने हामी भरी। जय का लन्ड माँ के हाथ में फुदकने लगा।

अः : कैसा लगता है मेरा हाथ अपने काले लन्ड पर मेरे लाल ?” “क्या बात है मम्मी! आपकी गोरी नरम उंगलियों में तो जादू है !”

* जय बेटा! मुझे तो इतने बरसों पता भी लनीं चला कब तेरा मुस्टन्डा लन्ड इतना बड़ा हो गया! अपने हाथ से तो कहीं ज्यादा मजा तो मम्मी के प्यारे हाथों में रहा है ना?”

हाँम मम्मी। काश पहले इतना प्यार मिला होता मेरे लन्ड को !”

“माँ के यहाँम देर है, अंधेर नहीं! अब देखना कितना लाड करती हूं बेटे के लन्ड को।” टिना जी जय के मोटे लन्ड पर दौड़ते हुए खून से फड़कती नसों को एकटक देखती जा रहीं थीं।

जय आन्ण्द से कराहा और अपनी मम्मी की चौड़ी कमर को हाथों से जकड़ कर अपनी तरफ़ खींच कर अपने सरिये से सख्त लन्ड को उसकी जाँघों से रगड़ने लगा। टीना जी ने मादा सिंगनी जैसे अपने बेटे की गर्दन पर दाँतों से काटते हाए जाँघों का दबाव लन्ड पर डाला। उमड़ती ममता और सुलगती वासना के विचित्र सम्मिश्रण से भरे भाव में उन्होंने बेटे जय को गर्दन पर चूमा। जय की बाहें माँ की कमर पर और कसती गईं। टीना जी के सुलगते होंठ चुमते – चुमते उसके होंठों तक पहुंचे और उनके – चुंबन से माँ-बेटे के बीच अब औरत मर्द का सैक्स सम्बद्ध प्रस्थापित होने लगा।

दोनों के होंठ स्वाभाविक रूप से खुले और टीना जी की लपकती जीभ बेटे के मुंह घुसी। घुस कर दोनों के मुंह में थूक का आदान-प्रदान हुआ। बड़ी महत्वपूर्ण क्रिया होती है यह। कामोत्तेजना से उत्पन्न हारमॉन थूक के जरिये मादा और नर दोनों को एक दूसरे की कामोत्तेजना का संकेत दे कर दोनों के जननांगों को होने वाली सैक्स क्रीड़ा के लिये और सक्रीय कर देते हैं। जय की जीभ भी माँ के मुंह में लपक लपक कर वो संकेत दे रही थी।

जय के चुंबन में एक कोमलता और अधीरता थी। जिसके विपरीत उसके पति का चुंबन कठोर मर्दाना आग़ोश से भरा होता था। जय की जीभ उसके दांतों पर दौड़ती और मुंह के हर कोने-कोने को छती। टीना जी ने जवाब में अपनी कमर को टमकाते हुए बेटे की जवान देह पर मसली। अपने हाथों से पकड़ कर उसके लन्ड को अपनी जाँघों के बीच में ऐन चूत की पावन दहलीज पर टेक दिया।

वे जानती थीं कि ये पाप की पूजा है और इसका संचालन अधिक अनुभवी होने के कारण उन्हें ही करना होगा। लन्ड पर जकड़ी मुठ्ठी को खोल कर अपने हाथों को जय के कढों पर जड़ा और उसके सीने को अपनी मातृत्व भरी छाती पर दबाया। निचले होंठ को दाँतों तले दबाते हुए तवायफ़ों वाली अदा से म्हा-स्तनों को उसके पसीने से तर सीने पर मसलने लगीं। साथ ही साथ उनकी चूत तने हुए लन्ड को गुदगुदाती हुई ललकार रही थी

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