प्रोग्राम में जाने के लिए नाजिम के साथ साथ उसका पूरा परिवार तैयार हो गया। नजमा ने एक काले रंग का हिजाब पहना हुआ था जिसमे वो बेहद खूबसूरत लग रही थी। हिसाब उसके जिस्म पर पूरी तरह से फिट था और शरीर के आकार को अच्छे से दिखा रहा था। नजमा ने तैयार होने में काफी देर लगा दी तो नाजिम बोला
” अरे बेटी जल्दी आओ, हम लेट हो रहे है।
नजमा ने अपना पर्स हाथ में लिया और तेजी से चलती हुई आ गई। नजमा को देखकर नाजिम को उसकी सुंदरता और उसके जिस्म का असली एहसास आज हुआ।

सभी लोग प्रोग्राम में पहुंच गए और सबसे बड़ी बात ये थी कि रियायत के नवाब असगर साहब भी आए हुए थे। असगर ने नाजिम को सम्मानित किया और बोले:”
” बहुत बहुत मुबारक हो तुझे नाजिम। सच में तुमने गांव के साथ साथ देश का भी मान रख लिया क्योंकि तुझे एक विदेशी पहलवान को हराया है।
नाजिम:” जी बहुत बहुत शुक्रिया जनाब आपका। ये सब तो अल्लाह का कर्म हैं जो इस नाचीज़ को इतनी इज्जत बक्शी जा रही है।
उसके बाद नवाब साहब नाजिम के परिवार से मिले और नजमा को देखकर उनकी आंखे खुली से चमक उठी और बोले:”
” माशा अल्लाह आपकी बेटी तो बड़ी खूबसूरत है नाजिम। अल्लाह इसे बुरी नजर से बचाए।
नजमा ने उसकी बात सुनकर मन ही मन उसे गाली कि बुड्ढे पहले अपनी नजर को खुद तो ठीक कर ले तू। प्रोग्राम के खत्म होने पर नवाब साहब चले गए और उन्होंने नाजिम को परिवार सहित अपने घर आने का न्यौता दिया।
घर आकर नजमा अपने कमरे में चली गई और दिन भर की थकान के कारण थक गई। वही दूसरी तरफ नाजिम दूसरे कमरे मे सलमा के साथ था और उसे पूरी नंगी किया हुआ था और उसके ऊपर चढ़ कर उसकी छोटे संतरे के आकार की चुचियों को मसल रहा था और सलमा दर्द और मजे से कराह रही थी। सलमा के दुबले पतले जिस्म पर नाजिम का भारी भरकम जिस्म इस तरह फैला हुआ था कि सलमा उसके नीचे हैं ठीक से दिख नही रही थी।
तभी नाजिम ने अपने लंड को उसकी चूत के छेद पर रगड़ा तो सलमा ने हाथ नीचे ले जाकर उसका लंड पकड़ लिया और बोली:”
” नाजिम रुको न, मैं खुद धीरे धीरे लूंगी।
इतना कहकर नाजिम के लंड को वो अपनी चूत पर रखकर अपनी टांगो को पूरा खोल कर धीरे धीरे अंदर लेने की कोशिश करने लगी और जैसे ही सुपाड़ा अंदर घुसा तो सलमा के मुंह से दर्द भरी आह निकल पड़ी और वही लंड को रोक दिया और दर्द सहने लगी और फिर हिम्मत करके फिर से अंदर थोड़ा सा घुसाया और दर्द से तपड़ते कराहते हुए वो हमेशा की तरह पांच इंच लंड अंदर में कामयाब हो गई और अपने हाथ से ही पकड़ कर उसे अंदर बाहर बहुत धीरे धीरे कर रही थी और दर्द को किसी तरह बर्दाश्त कर रही थी। नाजिम उसके ऊपर पड़ा हुआ था और कुछ नही कर रहा था क्योंकि उसका लंड पूरी तरह से सलमा के अधीन था। नाजिम चाहकर भी धक्का नही मार पा रहा था क्योंकि सलमा उसे फिर थोड़ा सा भी चोदने नही देती। धीरे धीरे उसकी रसीली चूत मे लंड का आना जाना आसान हुआ और सलमा ने लंड को अब तेजी से घुसाना शुरू कर दिया और नाजिम को बेहद अच्छा लग रहा था। वो जैसे ही लंड पर धक्का मारने के लिए दबाव बनाता तो सलमा ने उसे अपने हाथ से रोक लेती और इससे ज्यादा अंदर नही घुसने देती। सलमा की दर्द और मस्ती भरी सिसकियां गूंज रही थी और नाजिम उसकी चूचियां बेमन से उसकी चूचियां सहला रहा था।
सोते सोते नजमा ने एक बेहद डरावना ख्वाब देखा और उसकी डर के मारे आंख खुल गई और फिर उसे एहसास हुआ कि ये तो सिर्फ सपना था। वो पसीने पसीने हो गई थी और उसने अपना पसीना साफ किया और पानी पीने के लिए किचन की तरफ चल पड़ी और जैसे ही अपनी अम्मी के कमरे के सामने से गुजरी तो उसके कानो में मधुर सिसकियां सुनाई पड़ी तो उसके कदम अपने आप ही आगे बढ़ने से रुक गए। नजमा एक जबरदस्त जवान लड़की थी और उसे इतना एहसास हो गया था कि इस तरह की सिसकियां औरत किस हालत में लेती हैं।
वो गेट के बिलकुल पास पहुंच गई और उसे सलमा की आवाज सुनाई दी
” आआह्ह्हह नाजिम, मना कर दिया तो कर तुम समझो न मुझे। पूरा घुसा तो मैं मर जाउंगी।
नाजिम:” मेरी भी मजबूरी समझो, एक तो महीनों में सेक्स करने देती हो। आज तो ठीक से करने दो मुझे।
सलमा:” आआह्ह्ह्ह्ह सीईईईई तुम जानते हो न कि इतना बड़ा मैं नही ले सकती। कितना दर्द होता हैं पांच इंच घुसने से भी बस मै ही समझती हु।
तभी सलमा जोर से आह्ह्ह्ह्ह कर उठी क्योंकि नाजिम ने लंड का दबाव बढ़ाया तो सलमा ने बीच में अपनी हाथ को ला दिया और लंड का धक्का सीधे सलमा की हथेली पर पड़ा तो सलमा दर्द से कराह उठी और बोली
” तुम समझते क्यों नहीं हो, मारना चाहते हो क्या मुझे ? मैं पूरा अंदर नही ले सकती ये बात तुम क्यों नही समझते हो !!
दोनो की बाते सुनकर नजमा की सांसे तेज़ हो गई क्योंकि उसने तो सुना था कि पूरा लंड अंदर जाने से बेहद मजा आता है और उसकी अम्मी हैं जो लड़ने मरने के लिए तैयार हैं लेकिन पूरा अंदर नही लेना चाहती। इसका मतलब क्या मेरे पापा का लंड सच में बहुत ज्यादा बड़ा हैं जो अम्मी कह रही है कि पूरा घुसा तो मर जाऊंगी। नजमा की दिल तेजी से धड़क रहा था और उसने गेट से अंदर देखने की कोशिश करी लेकिन कुछ नजर आया क्योंकि गेट पूरी तरह से बंद था लेकिन एक बात अच्छी थी कि अंदर लाइट जली हुई थी।
नजमा मेहनत करती और अंत में उसकी नजर एक रोशनदान पर पड़ी जो और उम्मीद की एक किरण लगी। अपनी पूरी लंबाई का इस्तेमाल किया लेकिन फिर भी रोशदान तक नहीं पहुंच सकी तो उसके दिमाग में एक उपाय आया और रोशनदान से स्टूल ले आई और उस पर खड़ी हो गई और अंदर झांका तो उसकी सांस रुकी की रुकी रह गई। उसे सिर्फ बेड पर अपना पापा नजर आ रहा था और अम्मी मानो बेड थी ही नहीं, बल्कि नाजिम की हल्की हल्की कमर हिल रही थी और सलमा की सिसकियों से उसे एहसास हुआ कि सच में सलमा नाजिम के नीचे पूरी तरह से दबी हुई थी। नजमा जानती थी कि उसके पापा बहुत लंबे तगड़े और मोटे हैं लेकिन कितने हैं आज उसे सही में अंदाजा हो गया था और उसे सलमा की आवाज फिर से सुनाई पड़ी
” नाजिम ऐसा मत करो, देखो जितना मिल रहा हैं उतने से खुश रहो तुम। मैं पूरा अंदर अपनी भरी जवानी में नही ले पाई तो अब क्या खाक ले पाऊंगी।
नाजिम:” सलमा तुम कोशिश तो करो एक बार, दर्द हुआ तो मैं नही करूंगा।
सलमा दर्द से कराहती हुई जोर से बोली:”
” अह्ह्ह्ज एक बार कोशिश करी थी लेकिन नही ले पाई थी उल्टा बेहोश हो गई थी। तुम्हे याद होगा न वो सब ?
उनकी बातो के बीच नजमा के दिल में अपने बाप का लंड देखने की इच्छा हुई और उसने सलमा की टांगो के बीच देखा तो उसे अपनी मां का हाथ नजर आया जिसमे लंड थमा हुआ था।
उसे देखते ही नजमा के शरीर का पूरा खून मानो जाम सा हो गया क्योंकि लंबाई का तो नही लेकिन मोटाई का ठीक से उसे एहसास हो गया था। नाजिम का लंड उसकी मां की कलाई से सिर्फ मोटा नही बल्कि बहुत ज्यादा मोटा था और नजमा को तो ये यकीन नही हो रहा था कि पांच इंच तो छोड़ों ये एक इंच भी अंदर कैसा घुसा हुआ है।
नजमा ने अपना पसीना साफ किया और देखा कि उसकी मां के हाथ में उसे करीब पांच से छह इंच लंड नजर आ रहा था तो फिर अंदर क्या घुसा है। इसका मतलब उसके पापा का लंड सच में बहुत ज्यादा बड़ा है।
तभी कमरे मे सलमा की सिसकियां तेज होने लगी और उसका हाथ जोर जोर से हिलने लगा और देखते ही देखते सलमा के मुंह से एक जोरदार आह निकल पड़ी और उसकी चूत ने इसके साथ ही अपना सारा रस छोड़ते हुए आखिरी झटका मारा और लंबी लंबी सांस लेने लगी।
नाजिम ने बुरा सा मुंह बनाया और सलमा ने अब अपना हाथ बाहर निकाल कर अपनी टांगो को कस लिया और नाजिम से बोली:”
” अब तुम करो अपना।
नाजिम ने एक बुरा सा मुंह बनाया और जोर जोर से उसकी टांगो के बीच में धक्के लगाने लगा। लंड सिर्फ उनकी जांघो से टकरा रहा था और जोर जोर से थप थप थप की आवाजे आ रही थी। नाजिम की गति बढ़ती गई और इतनी तेज हो गई कि नजमा को उसकी हिलती हुई कमर ठीक से नही दिख रही थी और सलमा दर्द से कराह रही थी
” आह्ह्ह्ह्ह नाजिम धीरे धीरे, मेरी जांघ दर्द कर रही है।
नाजिम मानो उसकी सुन ही नहीं रहा था और गुस्से से तेज बेहद तेज धक्के लगाने लगा और उसके मुंह से अब हुंकार सी निकल रही थी और नाजिम ने जोश में आकर अपने दोनो हाथो से बेड का सिरा पकड़ा और जैसे कमरे मे तूफान सा आ गया क्योंकि अब नाजिम की स्पीड पहले से कहीं ज्यादा हो गई थी और नाजिम जोर जोर से हुंकार भरते हुए धक्के लगा रहा था और सलमा दर्द से कराह रही थी, तड़प रही थी, चींख रही थी चिल्ला रही थी और नाजिम किसी जंगली जानवर की तरह बिना उसकी परवाह किए बस लगा हुआ था मानो गुस्से से उसकी हड्डियां तोड़ देना चाहता हो। नजमा को आज अपने बाप की ताकत का असली एहसास हो रहा था और वो उसे अब समझ आ रहा था कि उसकी अम्मी ने चूत में पूरा लंड क्यों नही घुसाने दिया और जितना घुसा भी घुसा तो वो अपने हाथ में क्यों थामा हुआ था। अगर वो अपने हाथ में नही थामती तो उसकी चूत का कबाड़ा हो जाना तय था। सच ही तो कह रही थी कि सलमा कि पूरा अंदर घुसने से तो मर जायेगी।
सलमा की हालत अब जल दिन मछली की तरह हो गई थी उसकी आंखो से आंसू बह रहे थे और दर्द से आंखे चौड़ी होकर फैल गई थी लेकिन नाजिम उसकी परवाह किए बिना अपनी स्पीड कम करने की बजाय बढ़ा रहा था और बेड के चरमराने की आवाज सुनकर नजमा ने अपने दांतो तले उंगली दबा ली और सलमा दर्द से कराह रही थी, चींख रही थी और अंत मे नाजिम ने एक आखिरी जोरदार धक्का मारा और सलमा अपना गाल फाड़कर चींख उठी मानो उसकी गर्दन काट दी गई हो और नाजिम लंबी लंबी सांसे लेता हुआ उसके उपर ही पड़ा रहा। नाजिम का जिस्म पसीने से भीग गया था और तेज सांस लेने के कारण उपर नीचे हो रहा था।
नजमा स्टूल से नीचे उतरी और अपने कमरे की तरफ चल पड़ी। उसे अभी तक यकीन नहीं हो रहा था कि उसने जो कुछ देखा क्या वो सच था। नजमा सोने की कोशिश कर रही थी लेकिन नींद उसकी आंखो से जैसे गायब हो गई थी और बड़ी मुश्किल से देर रात वो सो पाई।
अगले दिन सुबह जब वो उठी तो देखा कि उसकी अम्मी बड़ी मुश्किल से लंगड़ा लंगड़ा कर चल रही थी और नजमा ने पूछा
” क्या हुआ अम्मी ?
नजमा सब जानती थी कि अम्मी ऐसे क्यों चल रही है लेकिज पूछना मजबूरी था। सलमा धीरे से बोली:”
” रात बाथरूम जाने के लिए निकली तो अंधेरे में गिर गई थी जिससे चोट लग गई पैर में।
उसका बच्चो जैसा बहाना सुनकर नजमा हंस पड़ी तो सलमा गुस्से से तुनक कर बोली:”
” मुझे चोट लगी है और तुझे हंसी आ रही है, हद होती हैं बेशर्मी की भी नजमा!!
नजमा:” अरे मैं इसलिए हंस रही थी कि आप इतनी बड़ी होकर भी गिर गई। चलो बुरा मत मानो, नही हंसती।
उसके बाद सब ने नाश्ता किया और उसके बाद उन्हे नवाब के घर जाना था तो सलमा ने तो जाने से साफ मना कर दिया और और नजमा और नाजिम दोनो चल पड़े।
नवाब असगर अली एक महलनुमा घर में रहते थे जिसकी छवि देखते ही बन रही थी। एक आलिशान महल अपने आप में नवाब और उनकी रहीसी की सारी कहानी कह रहा था। घर के अंदर जरूरत का हर एक सामान मौजूद था और साथ में थी नौकरों और नौकरानियों की एक लंबी सी फौज। नवाब असगर ने बेहद गर्म जोशी से उनका स्वागत किया और सिर से लेकर पैर तक नजमा का मुआयना किया और बोले
” आपकी बेगम साहिबा नही आई क्या ?
नाजिम:” जी नहीं, उनकी तबियत ठीक नहीं थी तो वो आ नही पाई।
नवाब:” अच्छा चलो कोई बात नही अगली बार आ जायेगी, अब तो आगे आपका आना जाना लगा रहेगा।
थोड़ी देर और इधर उधर की बाते होती रही और नवाब की नजरे बार बार नजमा पर टिक रही थी और नजमा का मन कर रहा था कि उसकी आंखे फोड़ डाले। खाना खाने के बाद जब नाजिम विदा लेने के लिए बोला:”
” अच्छा नवाब साहब अब मुझे चलना चाहिए। थोड़े काम भी हैं तो वो भी जाते हुए कर लूंगा।
नवाब नाजिम की बात सुनकर बोले:” मेरा महल तो तुमने देख ही लिया नाजिम। मैं एक बात कहना चाहता था तुमसे।
नाजिम चेहरे पर अजीब से भाव लिए हुए बोला:”
” जी कहिए नवाब साहब।
नवाब:” समझ नही आ रहा कि कैसे शुरू करू। बात दरअसल ये है कि पहली बीवी के तलाक के बाद बच्चे भी उसके साथ ही चल गए और अब इस महल और सारी जायदाद का मालिक मैं अकेला ही हु। मुझे आपकी बेटी नजमा बेहद पसंद आई है और मैं उससे निकाह करके ये सब उसके नाम करना चाहता हूं।
56 साल के बूढ़े खुसट नवाब की बाते सुनकर नाजिम और नजमा दोनो को मानो सांप सूंघ गया और कुछ नहीं बोले तो नवाब बोला:”
” मुझे जल्दी नही है। आराम से। एक दो दिन में सोच कर बता देना तुम। ऐसे फैसले जल्दी में नही किए जाते।
नजमा उसकी बात सुनकर इस बार गुस्से से बिफर पड़ी और बोली:”
” उम्र देखी है अपनी मेरे दादा की उम्र के हो आप। शर्म नाम की जरा भी चीज नही है आपके अंदर। आपसे निकाह करने से अच्छा मैं सारी जिंदगी कुंवारी रहना पसंद करूंगी।
इतना कहकर नजमा गुस्से से खड़ी हुई और बाहर चल पड़ी तो नवाब साहब नाजिम से बोले:”
” नाजिम तुम तो समझदार हो, तुम्ही समझाओ इसे कि ऐसा मौका जिंदगी बार बार नही देती।
नाजिम ने गुस्से से उसे देखा और मन किया कि उसका मुंह तोड़ डाले लेकिन अपने गुस्से पर काबू करते हुए बोला:”
” नवाब साहब इस उम्र में फरिश्ते आते हैं रिश्ते नही।
और इतना कहकर वो गुस्से से बाहर निकल गया तो पीछे से नवाब साहब जोर से बोले:”
” सोचा लेना घर जाके अच्छे से फिर बता देना तुम।
नाजिम:” तुम्हे एक बार में समझ नही आता क्या ? लगता हैं कि तुम्हारा दिमाग सटीया गया है।
नवाब:” ठीक है नाजिम तो फिर एक बात याद रखना, अगर एक हफ्ते के अंदर तुम मेरी चौखट पर नाक रगड़ते हुए अपनी बेटी का रिश्ता नही लेकर आए तो मेरा नाम भी नवाब असगर अली खान नही। याद रखना मेरी बात तुम।
उसके बाद नाजिम और नजमा दोनो घर आ गए और उन्होंने ये बात सलमा को बताई तो सलमा को बेहद हंसी आई और बोली
” कब्र में लटका हुआ बुड्ढा दूल्हा बनना चाहता हैं पागल कहीं का।
उसकी बात सुनकर सब हंस पड़े और सलमा बोली:”
” लेकिन उससे बचके रहना आप, कुछ भरोसा नही उसका क्योंकि उसकी जान पहचान बहुत दूर दूर और ऊपर तक है।
नाजिम:” तुम डरो मत, मैं भी कोई बच्चा नही हु। हाथ पैर तोड़ दूंगा उसके मेरी बेटी भी नजर भी डाली तो उसने गलती से भी।
नजमा:” आप चिंता मत करो, आपकी जरूरत नही पड़ेगा क्योंकि मैं खुद ही उसके हाथ पैर तोड़ कर उसे सबक सिखा दूंगी।
नजमा की बात सुनकर नाजिम खुश हुआ और बोला”
” मुझे तुझ पर पूरा यकीन हैं बेटी।
उसके बाद सबने खाना खाया और फिर सो गए।

