परिवार हो तो ऐसा – Update 9 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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राज उसकी पीले रंग की कॉटन की पॅंटी को देखने लगा.. जो गीली हो उसकी बिना बालों की चूत से चिपक सी आई थी… वो उसकी टाँगो के बीच आया और उसकी चूत को पॅंटी के उपर से सूंघने लगा… चूत के महक ने उसे मदहोश सा कर दिया… वो नाक को उसकी चूत के अगल बगल रगड़ने लगा….. राज अपनी नाक साथ अपनी जीब उस जगह फिराने लगा जहाँ से पॅंटी गीली हो चुकी थी.. पॅंटी से रिस्ते रस को वो चाटने लगा…

“ऑश राज इस तरह तड़पाव मत ना…. प्लीज़ पॅंटी को उतार अछी तरह चॅटो और चूसो’ प्रीति बड़बड़ा उठी.

प्रीति ने अपनी गंद को पलंग से थोड़ा उठा दिया और राज ने उसकी पॅंटी नीचे खिसका के उतार दी… बिना बालों की चूत बहोत ही प्यारी नज़र आ रही थी… वो अपनी जीब चूत के चारों और फिराने लगा… राज ने अपनी उंगलियों से उसकी चूत को थोडा चौड़ा किया और अपनी जीब उसके अंदर घुसा दी…फिर अपनी जीब को अंदर बाहर करने लगा… फिर वो कभी चूत के दाने को अपने मुँह मे ले काट लेता तो कभी उसकी पंखुड़ियों को चूस लेता..

“ऑश राज हाआँ ऐसे ही चूसो ऑश हां चॅटो और ज़ोर ज़ोर से चूसो… ओह कितना अछा लग रहा है… हां चूस लो सारा रस मेरी चूत का आअज” प्रीति सिसकने लगी.. राज उसकी चूत को चूस रहा था.. लेकिन प्रीति के दीमाग मे स्वीटी आने लगी.. वो सोचने लगी… कि क्या एक बार फिर स्वीटी उसकी चूत को चूस उसे वही आनंद देगी… ख़यालों मे अपने बदन को स्वीटी के नंगे बदन को रगड़ते हुए वो अपनी कमर उठा राज मे मुँह पर अपनी चूत दबाने लगी.. और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया…

प्रीति ने राज को खींच कर अपने बगल मे लीटा लिया और उसके होठों को चूसने लगी.. अपने ही रस का स्वाद उसे मिलने लगा.. “ओह्ह राज तुम कितने आछे हो?’ “अब तुम्हारी चूत कैसी है.. अंदर से कैसा महसूस कर रही हो… क्या अब भी चूत के अंदर जलन हो रही है?” राज ने उसे चूमते हुए पूछा…

“नही राज ऐसा कुछ नही है.. बस उस दिन बहोत दर्द हुआ तो में थोड़ा डर गयी थी… पर आज सब कुछ ठीक है..” प्रीति ने कहा. “तो क्या आज फिर चुदवाना चाहोगी?” राज ने पूछा. “नही पागल अभी नही.. बहोत देर हो चुकी है.. मम्मी को शक हो जाएगा…” प्रीति ने जवाब दिया.

“ठीक है जब तुम्हारा दिल चाहे मुझसे कह देना अपने लंड को तुम्हारी चूत मे घुसा तुम्हे चोदने मे मुझे खुशी होगी” राज ने कहा. प्रीति को लगा की राज उसे टाइट कस रहा है.. “मेरा विश्वास करो राज में खुद तुम्हारे लंड को अपनी चूत मे अछी तरह महसूस करना चाहती हूँ.. लेकिन में अभी खुद को तय्यार नही कर पा रही हूँ… बस सही वक्त आने दो फिर करेंगे” प्रीति ने पानी भाई को चूमते हुए कहा और अपने कपड़े पहन कमरे से बाहर चली गयी.

राज का दिल अभी भरा नही था.. उसका लंड मचल रहा था.. प्रीति के जाते ही उसने कंप्यूटर ऑन किया की शायद गीली चूत दीखाई दे जाए..उसकी किस्मत अछी थी… गीली चूत ऑन लाइन थी.

>गीली चूत> है राज.. कहा रहे इतने दिन?

>राज_मस्ताना> बस कुछ काम मे बिज़ी था… सच बोलूं तो अपनी पहली चुदाई का मज़ा ले रहा था..

>गीली चूत> अरे वाह! ये तो बहोट खुशी की बात है.बहोत मज़ा आया होगा तुम्हे? कौन है वो खुशनसीब लड़की?

> राज_मस्ताना> हाँ मज़ा भी बहोत आया.. और सबसे खुशी की बात है कि में इस लड़की को कई सालों से जानता हूँ.

>गीली चूत> बहोत ही अछी बात है.

> गीली चूत> क्या आज मुझे यहाँ देख कर तुम्हारा लंड खड़ा नही हो रहा?

>राज_मस्ताना> वो तो तुम्हारा नाम सोचते ही खड़ा हो जाता है.

>गीली चूत> हां वो तो दीख रहा है.. क्या तुम्हारे पास आज कोई पॅंटी है?

राज कमरे मे इधर उधर देखने लगा.. जाते वक्त प्रीति अपनी पॅंटी पहन गयी थी.. उसे निराश होने लगी.. इस वक्त उसकी पॅंटी बड़े काम आ सकती थी..

>गीली चूत> लगता है कि नही है…

>राज_मस्ताना> तुम रूको में लेकर आता हूँ

>गीली चूत> ठीक है

राज दौड़ कर बाथरूम मे गया और कपड़े धोने की बाल्टी मे पॅंटी ढूँदने लगा… उसे वहाँ एक पॅंटी दीखाई दी लेकिन वो सोच नही पाया कि ये पॅंटी उसकी बेहन प्रीति की है या फिर उसकी मा की… उसने वो पॅंटी उठा ली.. मा की बिना बालों की चूत के ख्याल से ही वो उत्तेजित होने लगा था..

>राज_मस्ताना> में वापस आ गया हूँ. राज कमेरे के सामने काले रंग की पॅंटी दीखाने लगा.. उसे मिल गयी थी..

वहीं अपने कमरे मे वसुंधरा उस पॅंटी को देख अपनी कुर्सी से गिरते गिरते बची… वो काले रंग की पॅंटी उसकी ही थी… जो आज उसने दिन मे पहन रखी थी.. और राज उसकी पॅंटी को बाथरूम से ले आया था.. मूठ मारने के लिए.. वो सोचने लगी कि क्या उसे मालूम है कि ये पॅंटी उसकी बेहन की नही है.

>गीली चूत> अछी है.. क्या ये तुम्हारी बेहन की है?

>राज_मस्ताना> पक्का नही कह सकता लेकिन शायद मेरी मा की है.

>गीली चूत> क्या सच मे?

>राज_मस्ताना> हां

>गीली चूत> क्या तुम अपन मा की पॅंटी भी लंड पर लपेट मूठ मारते हो?

>राज_मस्ताना> हां कभी कभी

>गीली चूत> क्या तुम्हारी मा को देख तुम उत्तेजित हो जाते हो?

>राज_मस्ताना> हां.. मेरी मा किसी विश्वा सुंदरी से कम नही है.

वसुंधरा अपने ही बेटे के मुँह से अपनी तारीफ सुन शर्मा गयी…

>गीली चूत> तुम कब से अपनी मा की पॅंटी मे मूठ मार रहे हो?

>राज_मस्ताना> यही कोई एक महीने से..

वसुंधरा की उत्सुकता बढ़ने लगी.. वो तो अभी तक यही सोच रही थी.. कि उसने अपने ही बेटे को इंटरनेट पर पटाया है.. लेकिन ये तो इससे पहले ही उसकी पॅंटी मे मूठ मारता रहा था.. उसके दीमाग मे कई ख़याल आने लगे.. अब वो ये जाने के लिए उत्सुक हो गयी कि उसके बेटे के दीमाग मे उसकी पॅंटी इस्टामाल करने का ख़याल क्यों और कैसे आया.

>गीली चूत> तुम्हे ये कब लगा कि तुम्हे अपनी ही मा की पॅंटी इस्टामाल करनी चाहिए?

>राज_मस्ताना> जब मेने पहली बार उनकी बिना बालों की चूत देखी.

>गीली चूत> अछा. कब और कहाँ देखी तुमने?

वहीं वसुंधरा सोचने लगी. कि उसके बेटे ने कब और कैसे उसकी चूत देख ली.. वो तो आज तक यही सोचती आ रही थी.. की उसकी बिना बालों की चूत को उसके पति के सिवाय किसी ने नही देखा है..

>राज_मस्ताना> सच कहूँ तो ये एक हादसा था जो हो गया.. में देखना चाहता था कि मेरी बेहन नंगी कैसी दीखती है.. इसलिए मेने बाथरूम मे कॅमरा छुपा दिया था.. पर मेरी मा मेरी बेहन से पहले नहाने के लिए बाथरूम मे आ गयी और सब कुछ कॅमरा मे क़ैद हो गया.. और जब में फिल्म देखने लगा तो मुझे लगा कि मम्मी की चूत देख मेरा लंड हरकत कर रहा है.. . तुम पागल तो नही हो गयी ना.. मेरी नादानी सुन कर.

>गीली चूत> नही इसमे पागल होने वाली क्या बात है? तुम पहले ही अपनी बेहन की पॅंटी मे मूठ मारते रहे हो.. लेकिन हां क्या तुम परेशान हो इस बात को लेकर.

>राज_मस्ताना> नही कुछ ख़ास नही.

वसुधारा सोचने लगी की उसे उसके बेटे के साथ आगे बढ़ना चाहिए कि नही.. आख़िर वो उसकी मा थी.. लेकिन जिस्म की गर्मी और गीली चूत उसके विचारों पर हावी हो गयी.

>गीइ चूत> क्या तुम अपनी मा की पॅंटी को अपने लंड पर लपेट मेरे लिए मूठ मरोगे?

>राज_मस्ताना> हां क्यों नही इसीलिए तो लाया हूँ.

राज ने अपना लंड अपनी शॉर्ट्स से बाहर निकाल लिया.. उसका लंड पूरी तरह से तन कर खड़ा था… वो उस काले रंग की पॅंटी को अपने लंड पर लपेट मसल्ने लगा… स्क्रीन पर गीली चूत की बिना बालों की चूत दीख रही थी… वो सोचने लगा कि अगर इस गीली चूत की चूत की जगह उसकी मा की बिना बालों की चूत होती तो कैसी लगती.. और अगर मेरा लंड उनकी चूत मे घुस्सता तो कैसा लगता.. वाशुंढरा देख रही थी कि किस तरह उसका बेटा उसी की पॅंटी को अपने लंड पर लपेटे मूठ मार रहा था… उसकी चूत मे चिंतियाँ रेगञे लगी… उसने अपनी चूत मे अपनी दो उंगली घुसा दी और अंदर बाहर करने लगी… उसके के भी ख्याल मे उसके बेटे का लंड उसकी चूत के अंदर बाहर होने लगा.. चूत से रस बहकर उसकी गंद को गीला करने लगा… उत्तेजना और उन्माद मे खोई हुई उसने अपना एक पावं उठा कर टेबल से टीका दिया और अपनी उंगली को चूत से निकाल अपनी गंद के छेद पर फिराने लगी.. फिर उसे अपने ही रस से गीला कर उसने अपनी उंगली अपनी गंद मे घुसा दी… अब वो एक हाथ से अपनी चूत को मसल रही थी और दूसरे हाथ की उंगलियों को गंद के अंदर बाहर कर रही थी.

>राज_मस्ताना> अरे ये क्या.. तुमने अपनी उंगली अपनी गंद मे डाल रखी है.?

वसुंधरा ने अपना हाथ अपनी चूत से हटाया और टाइप करने लगी..

>गीली चूत> हां

>राज_मस्ताना> क्या तुम्हे मज़ा आ रहा है?

>गीली चूत> हां बहोत अछा लग रहा है.

>राज_मस्ताना> वाउ.. लेकिन मेने पहले ऐसा करते कभी को देखा नही है.. क्या तुम्हे नही लगता ये सब गंदा है.

>गीली चूत> हां हर किसी को पसंद नही आता लेकिन मुझे पसंद है.

>राज_मस्ताना> मुझे विश्वास नही हो रहा.. क्या तुम मुझे और ये दीखा सकती हो?

>गीली चूत> मेरी उंगलियों की जगह अगर कोई लंड होता तो तुम्हे देखने मे और मज़ा आता

>राज_मस्ताना> क्या तुम अपनी गंद मे लंड भी घुस्वाति हो?

>गीली चूत> हां जब कभी मूड होता है.

> राज_मस्ताना> क्या तुम मुझे और दीखा सकती हो..में अपना पानी तुम्हारी गंद को देखते हुए छुड़ाना चाहता हूँ.

>गीली चूत> ठीक है फिर देखो ये.वसुंधरा ने अपनी दूसरी टांग भी टेबल की पुष्ट से टीका दी और अपनी गंद को थोड़ा उठा दिया.. अब उसकी गंद ठीक कॅमरा के सीध मे थी.. उसने अपनी बीच वाली उंगली गंद मे घुसा घुमाने लगी… इस ख्याल से ही कि उसका बेटा ये सब देख रहा है वो पूरी तरह गरमा चुकी थी.. उसने अपनी दूसरी उंगली गंद मे घुसा दी और अंदर बाहर करने लगी.. वो स्क्रीन पर देख रही थी कि किस तरह उसका बेटा अपने लंड को उसकी पॅंटी से लपेटे मूठ मार रहा था…

>गीली चूत> हाँ और ज़ोर ज़ोर से मेरे लिए मस्लो.. और अपना पानी छोड़ दो..

>राज_मस्ताना> हां हाँ

वसुंधरा अपने एक हाथ से गंद मे उंगली करती रही और दूसरे हाथ से अपनी चूत को मसालते हुए स्क्रीन पर अपने बेटे के लंड से छूटती वीर्य की पिचकारी देखते रही… तभी उसकी चूत और गंद दोनो कड़ीहो गई और चूत ने पानी छोड़ दिया..

>गीली चूत> ओह्ह आज तो मज़ा आ गया..

>राज_मस्ताना> हां आज तुमने तो कमाल ही कर दिया.

>गीली चूत> हां अब में थक गयी हूँ सोना चाहती हूँ… गुड नाइट.

>राज_मस्ताना> ओके.. गुड नाइट.

दोनो ने अपने अपने कंप्यूटर बंद किए और सॉफ सफाई कर कपड़े पहन पलंग पर गिर कर सो गये.. दूसरे दिन राज सुबह सो कर उठा तो बहोत खुश था.. आज की रात वो और प्रीति स्वीटी के घर रहने वाले थे… और उसे पक्का विश्वास था की उसे स्वीटी की चूत का एक बार फिर मज़ा मिलने वाला था…

और अगर उसने अपना दाँव सही खेला तो शायद उसे प्रीति को चोदने का भी फिर से मौका मिल सकता था… उसे मालूम था कि अगर प्रीति ने उसे और स्वीटी को चुदाई करते देख लिया तो वो अपने आप को रोक नही पाएगी….

नाश्ते के टेबल पर वसुंधरा शरम के मारे अपने बेटे से आँख नही मिला पा रही थी… कल रात से जब से उसे पता चला की उसका बेटा उसकी पॅंटी से अपने लंड को लपेट मूठ मारता है.. उसके दीमाग मे अनेक ख़याल और इच्छाए जनम ले रही थी.. वो जानती भी थी और समझती भी थी की ये सब ग़लत है.. उसे ऐसा नही सोचना चाहिए.. लेकिन वो अपने दिल के हाथो मजबूर थी.. बार बार उसका ध्यान राज के मोटे और लंबे लंड की तरफ चला जाता… जब से राज ने उसे बताया था कि वो अपनी जीब उसकी चूत मे घुसा उसे चूसना चाहता है.. या फिर अपने लंड को उसकी चूत मे डाल चोदना चाहता है. वो सोचने लगी कि कास वो अभी इसी वक्त उसकी पॅंट खींच उसके मोटे लंड को वहीं टेबल के नीचे अपने मुँह मे लेकर चूसे तो कैसा रहेगा…

इन्ही सब ख़यालों मे खोई वसुंधरा टेबल पर चुप चाप बैठी नाश्ता कर रही थी और अपने दोनो बच्चो की बातें सुन रही थी…जैसे ही राज टेबल से उठ किचन मे गया और कुछ लेकर लौटा तो उसकी निगाहें उसकी जाँघ के बीच उसके खड़े लंड के उभार पर ही टिकी हुई थी.. मन मे उठी इच्छाए और बदन मे उठती उत्तेजना उससे सहन नही हो रही थी.. उसकी समझ मे नही आ रहा था कि पति के बगैर वो इतने दिन कैसे गुज़र पाएगी.. उसके पति को आने मे तो अभी एक हफ़्ता पड़ा था… इन्ही सब बातों ने उसे एक बार फिर उत्तेजित कर दिया और वो अपने बच्चो से बहाना बना अपने कमरे मे आ गयी उसका इरादा अपनी चूत मे नकली लंड डाल चूत की गर्मी को शांत करने का था…

प्रीति को शाम की पार्टी के लिए कुछ शॉपिंग करनी थी..इसलिए वो गाड़ी लेकर चली गयी.. राज अपने कमरे मे आ गया.. पूरे दिन वसुंधरा घर की सफाई और बाकी के काम निपटाने मे लगी रही.. इसी बीच उसने अपनी चूत मे नकली लंड डाल कर अपनी चूत की गर्मी शांत की और फिर अपनी चूत पर उगी झांते फिर से सॉफ कर ली…

राज अपने कमरे मे थोड़ी देर तो कंप्यूटर पर सरफिंग करता रहा फिर सो गया…..

“राज क्या तुम चलने के लिए तय्यार हो… जल्दी से नीचे आ जाओ” प्रीति नीचे गाड़ी के पास ज़ोर से चिल्ला अपने भाई को बुलाने लगी… प्रीति की आवाज़ सुनकर राज हड़बड़ा कर पलंग से उठा…. पूरे दिन प्रीति शॉपिंग के लिए घर से बाहर रही थी और अब जल्दी मचा रही थी…

“बस पाँच मिनिट रूको… कल के लिए दो जोड़ी कपड़े बॅग मे डाल कर आता हूँ” राज ने चिल्ला कर जवाब दिया…. और अपनी स्पोर्ट्स बॅग मे से अपना फुटबॉल का समान बाहर निकाल उसमे अपने कपड़े रखने लगा…

प्रीति नीचे एक ट्रॅक पॅंट्स और स्लीव्ले टॉप मे खड़ी थी… उसके खड़े निपल टॉप से बिल्कुल सॉफ दीखाई दे रहे थे… तभी राज अपने कमरे से बाहर आया और अपनी मा से ये कहकर कीओ दोनो स्वीटी के घर जा रहे है और कल शाम को लौटेंगे… गाड़ी के पास आ गया.

राज और प्रीति अपनी मम्मी को बाइ बाइ कर गाड़ी मे बैठे और स्वीटी के घर की ओर चल पड़े….

राज और प्रीति जब स्वीटी के घर पहुँचे तो देख की स्वीटी और शमा घर के आँगन की सफाई कर रही थी….

“हाई कैसे हो तुम दोनो?” स्वीटी ने उन्हे देख कहा…. राज अपनी चचेरी बेहन को देखने लगा… स्वीटी ने डेनिम की एक छोटी और टाइट शॉर्ट्स पहन रखी थी जो उसके कुल्हों पर अछी तरह चिपकी हुई थी और उसकी गंद की गोलाइयाँ पूरे आकार मे दीख रही थी…. उसके उपर उसने बॅगी टी-शर्ट पहन रखी थी..जिसे देख कर राज को थोड़ी निराशा हुई… उसने अपने बालों को पीछे की ओर बाँध एक पोनी टेल बना रखी थी जहाँ से उसकी सुराही दार गर्दन नज़र आ रही थी.. राज का दिल किया की वो अपने होठों को उसकी गर्दन पर रख चूम ले…

“हाई स्वीटी” कहकर प्रीति उसकी ओर बढ़ गयी और वो अपनी दूसरी चचेरी बेहन शमा की ओर बढ़ गया.. वो भी स्वीटी की तरह लंबी और पतली थी… उसके बाल थोड़े भूरे थे और उसने काट कर उन्हे कंधों तक किया हुआ था… उसकी चुचियाँ भी स्वीटी की तरह छोटी और गोल गोल थी…

“हाई प्रीति.. हाई राज” उसने कहा…

राज और प्रीति स्वीटी के साथ घर के अंदर आ गये.. और शमा वहीं काम मे लगी रही..

“प्रीति तुम मेरे साथ मेरे कमरे मे रहोगी…” स्वीटी ने प्रीति से कहा, “और राज तुम बाहर इस दीवान पर रहोगे… तुम अपना बॅग यहीं पर रख दो… लेकिन शायद रात को सोने के लिए तुम्हे दीवान की ज़रूरत ही ना पडे” कहकर वो हँसने लगी…

जैसे ही राज अपना बॅग रखने के लिए हिला.. स्वीटी ने प्रीति को अपने पास खींचा और उसके होठों पर अपने होंठ रखते हुए अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी… प्रीति भी उसकी जीब से अपनी जीब मिला चूसने लगी… प्रीति ने स्वीटी के चूतदों पर हाथ रख उसे अपने और नज़दीक किया और उसकी चुचियों से अपनी चुचि रगड़ने लगी…

राज चुपचाप अपनी बहनो को एक दूसरे को चूमते और खिलवाड़ करते देखता रहा.. उसका लंड तनकर फड़फदा रहा था… “कुछ हो रहा है क्या राज?” स्वीटी ने अपना मुँह प्रीति के मुँह पर हटाया और उसे चिढ़ाते हुए उसके लंड को देखने लगी..

“हां.. वो क्या है मेने आज से पहले कभी दो लड़कियों को इस तरह चूमते नही देखा है… ” वो हंस कर बोला.. स्वीटी उसके पास आई और उसे प्रीति की तरह चूमने लगी.. उसकी जीब को अपने मुँह मे ले चूसने लगी… राज ने अपना हाथ उसके टॉप मे डाल दिया तो उसने देखा कि वो ब्रा नही पहने हुई थी… वो उसकी चुचि को मसल्ने लगा.. और उसका लंड और फुदकने लगा…

“अभी नही.. अभी हमे शमा की मदद करनी चाहिए” स्वीटी ने उसके हाथो को अपनी चुचि पर से हटाते हुए कहा. तीनो नीचे शमा के पास आ गये और शाम की पार्टी की तय्यारी करने लगे… जब सब कुछ व्यवस्थित हो गया तो चारों लोग बैठ कर ड्रिंक सीप करने लगे…

थोड़ी देर बाद स्वीटी उठी, “चलो अब सब कोई तय्यार हो जाओ” वो अपनी जगह से उठती हुई बोली, “प्रीति तुम मेरे साथ आओ.” कमरे मे आकर दोनो ने साथ साथ शवर के नीचे स्नान किया… और अपने बदन पौंछ बाहर आ गयी… प्रीति नंगी ही अपने बालों को संवार रही थी…फिर प्रीति अपनी बॅग से अपने कपड़े निकालने लगी..

“ये कैसी रहेगी” प्रीति ने एक छोटी पॅंटी निकाल कर उसे दीखाते हुए पूछा.. और फिर उसके उपर ब्रा बेहन ली..

“सच मे प्रीति अछा हुआ तुम मुझे अपने साथ शॉपिंग के लिए नही ले गयी.. नही तो सही मे में तुम्हारी चूत को वहीं चेंजिंग रूम मे खा जाती..” स्वीटी हंसते हुए बोली. “अरे यार इससे भी अछी चीज़ है जो हमे साथ साथ करनी है” प्रीति मुस्कुराते हुए बोली और एक छोटी डेनिम की स्कर्ट निकाल कर पहने लगी…

स्वीटी उठ कर उसके पास आ गयी.. “सच मे प्रीति दिल तो कर रहा है कि पार्टी को गोली मार दूँ और पूरी रात तुम्हारे इस मखमली बदन से खेलती रहूं”

“नही आज की रात पार्टी पहले फिर सब कुछ ” प्रीति ने प्यार से उसके गालों पर हाथ फिराते हुए कहा, “अब जल्दी से उठ कर कोई सेक्सी ड्रेस पहन लो.. में देखना चाहती हूँ कि राज का लंड हमे देख कर कितना फुदकता है?”

“स्वीटी उठी और अपनी अलमारी से एक लेदर की स्कर्ट निकाल ली और फिर प्रीति से बोली, “तुमने तो बहोत छोटी पॅंटी पहन रखी है.. इसलिए तुम्हारा मुक़ाबला करने के लिए में ऐसा करती हूँ कि आज पॅंटी पहनती ही नही हूँ… ” कहर उसने वो स्कर्ट पहन ली. “वो सब तो ठीक है.. लेकिन अगर मेरे हाथ बार बार तुम्हारी स्कर्ट के अंदर चले जाएँ तो चौंकना नही.” प्रीति ने हंसते हुए कहा. “तुम उसकी चिंता मत करो” कहकर स्वीटी ने एक ब्लू रंग का टॉप पहन लिया… फिर दोनो कमरे से बाहर आ कर राज और शमा के पास आकर बैठ गयी.. अब चारों अपने आने वाले मेहमआनो का इंतेज़ार करने लगे..

“क्या बात है.. तुम दोनो मेरे आने वाले दोस्तों पर बिज़लियाँ तो नही गिराना चाहती ना? शमा ने दोनो को देखते हुए कहा. “तुम्हारी सहलियों को तो कुछ नही होगा.. हाँ उनके साथ आने वाले उनके बॉय फ्रेंड के लिए हम कुछ नही कह सकते… ” प्रीति ने खिलखिलाते हुए कहा..

“तुम दोनो कुछ लेना पसंद करोगी?” राज ने प्रीति और स्वीटी से पूछा. “हां में वाइट वाइन लूँगी” स्वीटी ने कहा और प्रीति ने भी अपने लिए वही कह दिया… राज उठा और किचन मे जाकर अपने लंड को मसलने लगा.. जो उन दोनो को देख कर बुरी तरह मचल रहा था… दोनो शमा से भी सेक्सी लग रही थी.. किचन से आते हुए राज ने अपनी निगाह शमा पर डाली.. जिसने एक टाइट जीन्स पहन रखी थी.. और उसके उपर गुलाबी रंग की टी – शर्ट जिसने उसके समूचे बदन को जाकड़ रखा था… पर राज ने देखा कि आज उसकी चुचियाँ कुछ ज़्यादा बड़ी लग रही थी.. ज़रूर उसने कोई खास ब्रा पहन रखी थी..

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