परिवार हो तो ऐसा – Update 8 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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“राज नेतुम्हे अपना लंड दिखाया इसके लिए मेने उसे वादा किया था कि मैं कुछ भी करूँगी इसलिए राज ने कुछ दिन पहले ये सब किया है.” प्रीति ने जवाब दिया. “प्रीति सही में मुझे नही पता था कि तुम मेरे लिए इतना आगे तक जा सकती थी.. इसके लिए फिर से शुक्रिया.. पर ऐसे नही आज में शुक्रिया एक अलग से ढंग से दूँगी.” स्वीटी ने कहा. प्रीति ने अपनी आँखे बंद कर ली… और स्वीटी की उंगलियों के स्पर्श का आनंद अपनी चूत पर लेने लगी..

राज दरवाज़े के पीछे छुपा अपनी बेहन और स्वीटी की बातों का आनंद ले रहा था.. जब एक बार उसे लगा कि प्रीति उसे नही देख पाएगी तो वो वापस खुले दरवाज़े के बीच आ अपने लंड को मसल्ने लगा… अब उसे स्वीटी की नंगी गंद दीखाई दे रही थी जो उसकी बेहन की चूत पर झुकी उसे चूस रही थी…. ये सब देख अब राज से से अब नही रहा गया उसने अंदर जाकर उन दोनो के साथ इस खेल मे शामिल होने का फ़ैसला कर लिया.. वो दबे पावं अंदर आया और स्वीटी के ठीक पीछे आ अपने लंड को उसकी चूत पर रख दिया…

जब स्वीटी को राज के लंड का दबाव अपनी चूत पर हुआ तो वो अपनी जीब और तेज़ी से प्रीति की चूत के अंदर बाहर करने लगी.. राज ने अपना लंड उसकी चूत के अंदर तक घुसा दिया था. .. वो राज के लंड को अपनी चूत के अंदर सहन नही कर पा रही थी… अब राज के हर धक्के के साथ स्वीटी की जीब प्रीति की चूत के अंदर तक घुस जाती.. दोनो ताल से ताल मिला चुदाई का मज़ा लेने लगे…

प्रीति ने अपनी आँखे खोली और अपने भाई को स्वीटी के पीछे खड़े उसे चोद्ते देखा तो वो और गरमा गयी.. वो अपनी चूत को उठा उठा कर स्वीटी के मुँह मे देने लगी.. जैसे ही प्रीति की नज़रे अपने भाई से मिली तो वो उसकी आँखों मे झलकते प्यार को पहचान गई.. और उसके लिए इतना ही काफ़ी था.. उसने अपनी कमर उठा अपनी चूत को और स्वीटी के मुँह मे घुसा दिया.. “ओह्ह्ह राज यहाँ मेरे पास आओ और अपने लंड को मेरे मुँह मे दे इसे अपने पानी से भर दो.”

राज ने अपने लंड को स्वीटी की चूत से निकाला और अपनी बेहन के पास आ कर अपने लंड को उसके मुँह के सामने कर दिया… प्रीति ने उसके लंड को पकड़ अपनी और खींचा और अपने मुँह मे ले चूसने लगी.. उसकी मुट्ठी स्वीटी की चूत से चूते रस से भीग गयी जो राज के लंड पर लगा था.. वो किसी भूकि बच्ची की तरह उसके लंड को चूसने लगी..

राज अपनी बेहन को अपना लंड चूस्ते देख रहा था… उसे बहोत मज़ा आ रहा था कि स्वीटी ने अपने हाथ बढ़ा प्रीति की चुचियों को मुट्ठी मे भर मसल्ने लगी… तभी राज के लंड ने पिचकारी छोड़ी जिसे प्रीति आराम से गटक गयी और फिर उसके लंड को पकड़ उसके पानी को पीने लगी.. आख़िर राज ने अपने लंड को उसके मुँह से बाहर निकाल लिया..

तीनो पलंग पर तक कर निढाल पड़े थे तभी उन्हे घर के बाहर कोई गाड़ी के रुकने की आवाज़ सुनाई पड़ी.. वो समझ गये कि राज और प्रीति की मम्मी घर आ गयी है.. तीनो दौड़ते हुए उठे और अपने कपड़े पहनने लगे… फिर हॉल मे आकर सोफे पर बैठ गये… तभी वसुंधरा ने घर मे कदम रखा और तीनो को हेलो कहते हुए अपने कमरे मे चली गयी..

वसुंधरा ने कपड़े बदल थोड़ी देर तीनो बच्चो से बात की और फिर स्वीटी ने कहा कि वो घर जा रही है.. तीनो उसे छोड़ने घर के बाहर तक आए…

वसुंधरा सफ़र से काफ़ी थक चुकी थी और वो चुदासी भी काफ़ी हो रही थी… वो सोच रही थी कि क्या वो आज की रात अपने बेटे को नेट पर देख पाएगी.. क्या आज एक बार फिर वो अपने ही बेटे के मोटे लंबे लंड को देख पाएगी… उसके दीमग मे यही ख़याल दौड़ते रहे और उसकी चूत गीली होती रही…

रात के खाने के बाद वो बहाना बना के कि वो थक गयी है और आराम करना चाहती है.. अपने कमरे मे आ गयी और कंप्यूटर ऑन कर अपने बेटे राज यानी राज_मस्ताना का इंतेज़ार करने लगी…

वसुंधरा काफ़ी देर तक कंप्यूटर के सामने बैठी अपने बेटे का ऑन लाइन आने का इंतजार करती रही…. जब वो काफ़ी देर तक ऑन लाइन नही आया तो वो टाय्लेट के बहाने अपने क्मरे से निकल देखना चाहती थी कि राज कंप्यूटर पर बैठेगा की नही..

जब वो राज के कमरे के पास पहुँची तो उसे अंदर से प्रीति की आवाज़ सुनाई पड़ी… वो वापस अपने कमरे मे आकर इंतेज़ार करने लगी… राज और प्रीति दोनो आज दिन मे स्वीटी के साथ बीताए समय पर बात कर रहे थे… प्रीति उससे पूछ रही थी कि उसे स्वीटी के साथ पहली चुदाई कैसी लगी.. और राज उससे पूछ रहा था कि जिंदगी मे पहली बार किसी लड़की की चूत चूस कर उसे कैसा लगा…

“पहले तुम बताओ तुम मेरे कमरे मे कैसे आ गये?” प्रीति ने पूछा. “वो क्या है ना … जब स्वीटी को ज़्यादा टाइम लग गया तो मेने सोचा कि तुम दोनो से तुम्हारे कमरे मे ही मिल लूँ.. लेकिन जब स्वीटी को तुम्हारी चूत चूस्ते देखा और उसकी खुली चूत दीखाई दी तो में अपने आप को रोक नही पाया.” राज ने जवाब दिया.

“हां राज हम दोनो एक जैसे ही है.. में भी अपने आपको नही रोक पाई थी.. जब तुम स्वीटी को तुम कमरे मे चोद रहे थे.. में तुम्हारे कमरे के बाहर खड़ी सब सुन रही थी… और इतना गरमा गयी थी मेने अपनी तीन उंगली अपनी चूत मे डाल ली थी.” प्रीति ने कहा.

“चलो अछा है फिर तो हम दोनो का हिसाब किताब बराबर हो गया.” राज ने हंसते हुए कहा.

“अछा एक बताओ तुम कंप्यूटर पर पूरी रात बैठ कर क्या करते हो?” प्रीति ने पूछा.

“चट्टिंग करता हूँ और नई औरतों को ढूंढता रहता हूँ” राज ने जवाब दिया… “कोई अछी मिली की नही” “हां एक मिली है.. बहोत ही गरम औरत है.. उसका आईडी ‘गीली चूत’ है.. पहले ही दिन उसने मेरा लंड देखने की इच्छा जाहिर की.” राज ने कहा. “फिर क्या तुमने उसे दिखाया” प्रीति ने पूछा.

“हां दिखाया भी और देखा भी” “देखा भी क्या मतलब है तुम्हारा?” प्रीति ने फिर पूछा.

“मेने भी कह दिया कि अगर तुम अपनी चूत दीखओगि तो ही में अपना लंड दिखाउन्गा.. . फिर क्या था उसने अपनी सफ़ा चट चूत दीखाई और मेने उसे अपना लंड दीखा दिया..” राज ने जवाब दिया..

“फिर तो तुम्हारी बराबर बात होती होगी?”

“हां और शायद आज भी वो मेरा इंतेज़ार कर रही होगी” राज ने कहा.

“मुझे भी दीखाओ ना.. प्लीज़” प्रीति ने ज़िद करते हुए कहा.

राज ने अपना कंप्यूटर ऑन किया कि तभी ‘गीली चूत’ का फ्लश मेसेज आया.

>गीली चूत> राज कहाँ थे अब तक? मेने तो आज की रात तुम्हारे आने की उम्मीद ही छ्चोड़ दी थी..

>राज_मस्ताना> हाई.. वो क्या है आज मेरे साथ कोई था..इसलिए ऑनलाइन नही आया.

>गीली चूत> एम्म्म कोई बात नही.. क्या अब अकेले हो?

>राज_मस्ताना> नही वो अभी भी मेरे साथ है.. क्या तुम ज़्यादा देर तक रुकोगी?

>गीली चूत> पता नही हो भी सकता है और नही भी.

>राज_मस्ताना> ठीक है में फ्री होते ही तुम्हे बज़्ज़ करता हूँ.

> गीली चूत> ठीक है.

वसुंधरा समझ गयी कि उसके बेटे के साथ आज उसकी बेटी भी थी.. इसलिए उसने ज़्यादा कुछ नही कहा.. वो नही चाहती थी कि वो ऐसा कुछ लीखे जिससे राज को प्रीति को सब कुछ बताना पड़े.. लेकिन वो क्या जानती थी कि प्रीति को पहले से ही सब कुछ पता है…

“राज आज में भी तुम्हारी उस ‘गीली चूत’ की चूत देखना चाहती हूँ जिसे देख तुम अपना लंड मुठियाते हो.” प्रीति ने अपने भाई से कहा.

“ठीक है लेकिन एक शर्त पर तुम्हे मेरा पानी चाटना होगा” राज ने कहा. “तुम भी ना भाई.. जब में कुछ कहती हूँ तुम कोई ना कोई शर्त लगा देते हो… लेकिन फिर भी में तुम्हारी बात मानती हूँ… आज मुझे उस ‘गीली चूत’ की चूत तो देखनी ही है.

“ठीक है तुम उस कुर्सी पर बैठ जाओ.. जिससे तुम कमेरे मे ना आओ…” राज ने कहा.

>राज_मस्ताना> **बज़्ज़**

.>गीली चूत> हाई राज

>राज_मस्ताना> तो क्या इरादा है आज रात का?

>गीली चूत> वही तुम्हारा प्यारा और मोटा लंड देखना चाहती हूँ.

>राज_मस्ताना> अगर तुम अपनी चूत दीखओगि तो.

>गीली चूत> वो तो दिखानी ही पड़ेगी ना.. वरना तुम नाराज़ हो जाओगे..

>राज_मस्ताना> हां वो तो है.. ठीक है में कॅम ऑन करता हूँ.

प्रीति चुप चाप कुर्सी पर बैठी अपने भाई को देखती रही.. राज ने कॅम ऑन किया और अपनी शॉर्ट्स उतार दी.. राज ने कॅमरा का आंगल इस तरह कर दिया कि प्रीति को स्क्रीन तो दीख रही थी.. लेकिन वो कॅमरा मेनही थी.. राज ने उससे कहा की उसके कंप्यूटर से साउंड अटॅच नही है इसलिए वो चाहे तो उससे बात कर सकती थी. हर बार की तरह गीली चूत स्क्रीन पर आई… कॅमरा का आंगल ठीक उसकी चूत पर था.. आज उसने सॅटिन की गुलाबी रंग की पॅंटी पहन रखी थी.

>राज_मस्ताना> आज तो बहोत ही सुंदर पॅंटी पहन रखी है

>गीली चूत> तुम्हे पॅंटी पसंद है ना इसलिए ख़ास तुम्हारे लिए नई खरीद कर लाई हूँ.

>राज_मस्ताना> किसी को खुश करना तो कोई तुमसे सीखे

>गीली चूत> और मुझे दीख रहा है कि तुम्हे ये बहोत पसंद आई है. राज अपने लंड को मसल रहा था.. कॅमरा का आंगल ठीक उसके लंड पर था… उसके हाथ उसके मोटे और लंबे लंड पर उपर नीचे हो रहे थे.

>राज_मस्ताना> क्या आज तुम्हारे पास ऐसा कुछ है जिसे तुम अपनी चूत मे घुसा सको?”

>गीली चूत> हां मुझे पता है जब में नकली लंड अपनी चूत मे घुसाती हूँ तो तुम्हे लगता है कि वो तुम्हारा लंड है जो मेरी चूत मे जा रहा है.. इसलिए आज में तुम्हारे लंड के साइज़ का एक गुलाबी रंग का नया डिल्डो खरीद कर लाई हूँ. तभी स्क्रीन पर एक गुलाबी रंग का डिल्डो दीखाई देने लगा.. वो सही मे बहोत लंबा था.. उसे राज के लंड से मापना मुश्किल था.. वो लंड गीली चूत की चूत की दीवारो को चीरता हुआ अंदर घुस रहा था… जैसे ही वो लंड गीली चूत की बिना बालों वाली चूत मे गायब हुआ प्रीति ने अपनी पॅंटी उतार दी.. और अपनी चूत मे अपनी उंगलियाँ डाल अपने आप से खेलने लगी… और राज से कहने लगी कि एक दिन उसे भी इसी तरह अपनी चूत मे नकली लंड या फिर कुछ और डालकर मज़ा लेना पड़ेगा.

>राज_मस्ताना> बड़ा प्यारा ही डिल्डो लाई हो?.. इसे तो तुम्हारी चूत पूरी तरह चौड़ा गयी है.

>गीली चूत> हां.. अब अपने लंड पर क्रीम लगाकर उसे चिकना कर लो.

राज ने प्रीति के क्मरे से लाई हुई क्रीम अपने हाथों पर लगाई और अपने लंड पर मलने लगा… और प्रीति राज और गीली चूत की बातो का मज़ा लेते हुए राज से बातें कर रही थी. वो उसे बता रही थी कि उसका चिकना लंड कितना अछा लग रहा है.. और वो बाद मे उसके सारे पानी को अपनी जीब से चाट लेगी.. वो साथ ही अपनी चूत मे तेज़ी से उंगलियाँ अंदर बाहर कर रही थी…

राज और प्रीति दोनो के नज़रे स्क्रीन पर टिकी हुई थी जहाँ वो नकली लंड गीली चूत के अंदर बाहर हो रहा था…

>राज_मस्ताना> मेरा छूटने वाला है इतना लीखकर राज अपने हाथ पर अपने लंड को ज़ोर ज़ोर से मसल्ने लगा.. और उसके लंड ने उसके हाथो पर वीर्य उगल दिया…

प्रीति और राज दोनो गीली चूत्को झाड़ते देखते रहे..और प्रीति की चूत ने भी पानी छोड़ दिया.. वो अपने हाथों मे अपने वीर्य को पकड़े रहा.. और तभी गीली चूत ऑफ लाइन हुई और राज ने भी कंप्यूटर बंद कर दिया.. प्रीति खिसक कर उसके पास आ गयी…

राज ने अपना हाथ प्रीति के मुँह के आगे कर दिया.. और वो उसके हाथो पर से उसके वीर्य को चाटने लगी.. राज का लंड फिर फुदकने लगा.. पूरी तरह उसके हाथों को साफ करने के बाद खड़ी हुई और अपने कमरे मे चली गयी..

रविवार की सुबह पूरा परिवार आराम से सोकर उठा… और घर के काम काज़ मे जूट गया… वसुंधरा की सफ़र की थकान अभी भी उत्तरी नही थी इसलिए वो दोपहर को फिर बच्चो से कह अपने कमरे मे सोने चली गयी… और उसे रात के खाने पर ही जगाने को कहा…

राज और प्रीति दोनो ही रात से ही काफ़ी उत्तेजित थे और एक दूसरे के स्पर्श के लिए तड़प रहे थे… जैसे ही प्रीति को विश्वास हो गया कि उसकी मा सो गयी है वो राज को घसीटते हुए उसके कमरे मे ले गयी… और कमरे मे आते ही वो उसके लंड को पकड़ मसल्ने लगी.. प्रीति ने अपने कपड़े उतार दिए और कुर्सी पर बैठ गयी और अपनी चूत पर हाथ फिराने लगी… “देखो ना राज ये कैसे रात से तुम्हारी जीब के लिए तरस रही है.. प्लीज़ आज इसकी प्यास अछी तरह बुझा दो ना? ” राज ने भी अपने कपड़े उतार दिए.. और उसके पास आकर उसकी टाँगो के बीच बैठ गया.. उसकी टाँगो को फैलाते हुए उसने अपनी जीब उसकी चूत पर रख डी… वो अपनी जीब को उसकी चूत को उपर से नीचे फिरा चाटने लगा…

राज अपनी जीब को अपनी बेहन की बिना बालों की चूत पर फिरा रहा था.. प्रीति की चूत उत्तेजना मे थिरक रही थी… की तभी प्रीति ने राज के मुँह कोअपनी चूत पर से हटा दिया… राज को लगा कि प्रीति उत्तेजना के मारे जल्दी ही झाड़ गयी है… उसने देख की प्रीति उसे ही देख रही थी…

“राज में चाहती हूँ की आज तुम मुझे चोदो” “क्या तुम सही मे ये चाहती हो?” राज ने असचर्या से पूछा. “हां में बहोत सीरीयस हूँ में भी इस बात का अनुभव लेना चाहती हूँ कि जब लंड चूत मे घूस्ता है तो कैसा महसूस होता है.. क्यों लड़कियाँ बड़े मोटे लंड को देख चुदवाने को बैतब हो जाती हैं.” प्रीति ने जवाब दिया..

“अगर तुम यही चाहती हो तो तुम्हे ये अनुभव देकर मुझे खुशी होगी” राज ने खुशी से कहा…. प्रीति कुर्सी से खड़ी हो राज के पलंग पर लेट गयी…. राज अपनी बेहन की टाँगे के बीच आ गया और उसे चूमते हुए उपर तरफ बढ़ने लगा.. आख़िर उसके होंठ उसके सपाट पेट को चूमते हुए उसकी चुचियों पर आए फिर उसके होंठों को अपने होठों से क़ैद कर लिया…

प्रीति को जब अपने भाई का लंड अपनी चूत पर रगड़ ख़ाता महसूस हुआ तो उसने अपनी टाँगे और फैला दी… राज ने जैसे ही अपने लंड को पकड़ उसकी चूत के मुँह से लगाया उसने अपने होंठो को दाँतों से भींच लिया… राज का लंड जब उसकी चूत की दीवारों को भेदता हुआ अंदर घुसा तो एक दर्द की लहर उसके बदन मे दौड़ गयी.. राज का लंड थोड़ा अंदर घुसा तो उसे लगा कि प्रीति के अंदर कोई चीज़ है जो उसके लंड को रोक रही है.. वो समझ गया कि ये प्रीति की चूत की झिल्ली है…

राज वहीं से अपने लंड को धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगा… वो बहोत धीरे धीरे धक्के लगा रहा था.. वो प्रीति को तकलीफ़ नही देना चाहता था…

‘हाआँ राज अब घुसा दो ज़ोर से और फाड़ दो मेरी चूत को ऑश हां अच्छा लग रहा है..”

राज ने अपने लंड को थोड़ा बाहर खींचा और एक ज़ोर का धक्का मारा… उसका लंड उसकी चूत की झिल्ली को फाड़ता हुआ अंदर घुस गया…

‘राज…! वो दर्द से चिल्ला उठी.. प्लीज़ थोड़ी देर के लिए रुक जाओ.. दर्द सहन नही हो रहा..” प्रीति दर्द से कराह उठी. राज रुक गया… प्रीति अपनी गंद हिला हिला कर उसके लंड को अपनी चूत मे अड्जस्ट करने लगी… जब राज ने देखा कि उसके बदन की कपन थोड़ी शांति हुई है… तो उसने फिर से धीमे धीमे धक्के लगाने शुरू कर दिए… लेकिन प्रीति से सहन नही हुआ उसके बदन मे तीव्र दर्द फिर शुरू हो गया..

“प्लीज़ राज रुक जाओ नही सहन हो रहा है.. काफ़ी दर्द हो रहा है..” राज ने अपना लंड बाहर निकाल लिया…. प्रीति ने उससे कहा कि वो मूठ कर उसका पानी छुड़ा देती है लेकिन राज ने मना कर दिया.. प्रीति लड़खड़ाते कदमों से उठी और अपने कपड़े पहन अपने भाई को चूम कर उसके कमरे से चली गयी..

अगले दिन सुबह प्रीति ने अपने भाई को बताया कि स्वीटी का फोन आया था और उसने उन दोनो को शुक्रवार की शाम को घर पर बुलाया है.. असल मे स्वीटी और शमा के कुछ दोस्त आ रहे थे और वो चाहती थी कि वो दोनो भी इस गेट टुगेदर मे शामिल हो जाएँ… दोनो आने वाले शुक्रवार का इंतेज़ार करने लगे..

गुरुवार की रात राज कंप्यूटर पर पॉर्न मूवीस देख रहा था कि प्रीति उसके कमरे मे आ गयी.. राज अपने लंड को शॉर्ट्स से निकाल मसल रहा था…. “भाई ये क्या अकेले अकेले ” कहकर प्रीति उसकी टाँगो के पास नीचे बैठ गयी और उसके लंड को अपने मुँह मे ले चूसने लगी…”

राज ने अपनी टाँगे फैला दी… प्रीति ने उसके लंड को पहले तो उपर से नीचे तक चॅटा फिर उसकी गोलियों को मुट्ठी मे भर उसके लंड को अपने गले तक ले लिया और मुँह को उपर नीचे कर चूसने लगी.प्रीति की जीब से रगड़ खा लंड जब उसके गले तक घुसता तो राज को बहोत आनंद आता..

“ऑश हाआँ प्रीति चूसो और ज़ोर से चूसो ऑश हां ऐसे…” राज अपना हाथ उसके सिर पर रख कहने लगा… प्रीति ज़ोर ज़ोर से उसके लंड को मुट्ठी मे भर चूसने लगी.. थोड़ी ही देर मे राज के लंड ने उबाल खाया और अपना वीर्य उसके मुँह मे छोड़ दिया.. ..

“अब तुम मुझे भी कुछ मज़ा दो… मेरी चूत मे खुजली मच रही है..” प्रीति ने कहा.

“तुम्हे में कैसे मना कर सकता हूँ.. तुम तो मेरी प्यारी गुड़िया बेहन हो” राज ने कहा. प्रीति ने अपने कपड़े उतारने की जहमत नही उठाई सिर्फ़ अपनी स्क्रिट को उपर कर पलंग के किनारे पर अपनी टाँगे नीचे किए लेट गयी…

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