परिवार हो तो ऐसा – Update 6 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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“अरे तुम नही जानती इन मर्दों को.. वो जिस तरह तुम्हे घूर रहा था में समझ गयी और फिर वो भी तो जवान है.. अगर तुम कहो तो में उससे बात करके देखूं.” प्रीति ने कहा.

“ठीक है.” स्वीटी ने कहा.

” तो फिर में उससे बात करके तुम्हे बता दूँगी.. क्या तुम्हारा बेडरूम ठीक रहेगा.?”

“तुम्हारा मतलब है आज रात को.” स्वीटी ने अस्चर्य से पूछा.

“हां और नही तो क्या.. क्या पता आज की रात के बाद हमारा कब मिलना हो.” प्रीति ने कहा.

स्वीटी थोड़ी देर सोचने लगी..अपनी ड्रिंक से एक बड़ा घूंठ लेते हुए बोली, “ठीक है मेरे कमरे मे लेकिन देखना कहीं कोई गड़बड़ ना हो जाए.”

प्रीति अपने भाई को ढूँदने लगी.. जो हॉल मे शमा की सहेलियों के साथ खड़ा उन से बात कर रहा था.. वो राज का अकेले होने का इंतेज़ार करने लगी. और जब वो अकेला हुआ तो उसे पकड़ एक कोने मे ले गयी.

“स्वीटी तुम्हारा लंड देखना चाहती है.. क्या तुम उसे अपना लंड दीखाने को तय्यार हो?” प्रीति ने पूछा.

“उसे लंड दीखा के मुझे क्या मिलेगा?” राज ने पूछा.

“ये तो मेने नही पूछा लेकिन जहाँ तक मुझे लगता है कि अगर वो मेरी जैसी हुई तो तुम्हारा लंड देख कर वो अपने आपको नही रोक पाएगी… और नही तो कम से कम छू कर तो ज़रूर देखेगी.. वैसे भी वो पहले चुदाई का मज़ा ले चुकी है इसलिए मुझे विश्वास है कि वो अपने पर काबू नही रख पाएगी.” प्रीति ने अपने भाई से कहा.

“क्या में उसे नंगी देख सकूँगा?”

“मुझे पता नही.. तुम खुद ही पूछ लेना.. ” प्रीति ने जवाब दिया.

“यार क्या ये बखेड़ा लेकर आ गयी. कितनी मेहनत से उन दो लड़कियों का पटा रहा था.. और शायद आज की रात तक तो एक पट ही जाती.” राज ने थोडा झल्लाते हुए कहा.

“राज क्यों गुस्सा कर रहे हो.. में तो हू ना रात के लिए.. में तुम्हारा लंड चूस दूँगी.” प्रीति ने कहा.

“वो तो में भी जानता हूँ कि तुम ऐसा क्यों कह रही हो. तुम्हारी खुद की चूत मे कीड़े रेंग रहे है और तुम खुद चाहती हो कि कोई तुम्हारी चूत चाते.” राज ने हंसते हुए कहा.

प्रीति सोचती रही फिर बोली, “ठीक है आज की रात तुम जो कहोगे में करूँगी.. लेकिन चुदाई नही और कुछ भी.” प्रीति ने कहा.

राज के आँखों के सामने गीली चूत की बिना बालों की चूत घूमने लगी… “ठीक है तुम मेरा एक काम अगर करो तो में अपना लंड स्वीटी को दिखाने को तय्यार हूँ.”

“ये हुई ना बात.. अब तुम स्वीटी के कमरे मे जाकर हमारा इंतेज़ार करो.. हम थोड़ी देर मे आते है.” प्रीति ने मुस्कुराते हुए कहा.

राज स्वीटी के कमरे मे बैठा दोनो का इंतेज़ार कर रहा था.. कि तभी उसने कमरे का दरवाज़ा खुलते देखा और दोनो कमरे के अंदर आ गयी.. दोनो ने कमरे का दरवाज़ा अंदर से बंद किया.. और उस पलंग के पास आ गयी जिस पर राज बैठा था.

कमरे मे अंधेरा छाया था सिर्फ़ खिड़की से बाहर पार्टी की रोशनी आ रही थी…

“ओह राज मुझे तो अभी भी विश्वास नही हो रहा है कि तुम मुझे अपना लंड दीखाने वाले हो” स्वीटी धीरे से बोली और दोनो उसके बगल मे बैठ गयी.

“हां उसके पहले मेरी एक शर्त है.” राज ने कहा.

“और वो शर्त क्या है?” प्रीति और स्वीटी ने साथ साथ पूछा.

“तुम दोनो को कपड़े उतार कर नंगी होना पड़ेगा.” राज ने जवाब दिया.

“क्या सही मे राज? स्वीटी ने पूछा.. उसकी समझ मे नही आ रहा था कि वो हां करे या ना करे…

“अरे इतना घबरा क्यों रही हो स्वीटी? याद है तुम्हे हम साथ साथ

नहाया करते थे.. लेकिन हां तब हमारे बदन पर ये खिलोना नही था.. ” प्रीति ने अपनी चुचियों को मसल्ते हुए कहा… ” पर मुझे लगता है कि भाई ये देखना चाहता है कि वक्त के साथ हमारे बदन मे कितना बदलाव आ गया है.. फिर क्या फरक पड़ता है नंगा होने से हम भी तो इसका लंड देखेंगे ही.”

“वो तो सब ठीक है.. लेकिन में पहले राज का लंड देखना चाहूँगी” स्वीटी ने कहा.

“ठीक है” कहकर राज खड़ा हुआ और अपनी पॅंट के बटन खोलने लगा फिर उसने पॅंट को पैरों मे गीरा दी… और साथ ही अपनी अंडरवेर को भी… उसका लंड फड़फदा कर खड़ा हो गया… स्वीटी की आँखे तो फटी की फटी रह गयी उसके लंबे और मोटे लंड को देख कर.

“हे भगवान मैने तो सोच भी नही था कि इतना बड़ा और मोटा होगा.”

स्वीटी प्रीति से बोली जो बड़े प्यार से अपने प्यारे खिलोने को देख रही थी.

“क्यों मेने सच कहा था ना?”

“हां तुम सही थी.. क्या में इसे छू सकती हूँ?” उसने राज से पूछा.. इस वक्त ये भूल चुकी थी कि सामने जो शक्स खड़ा है वो उसका चाहेरा भाई है.

“हां छू सकती हो लेकिन शायद तुम ये भूल गयी कि तुम्हे मेरे लिए पहले नंगी होना है.” राज ने उसे याद दिलाया.

“ओह्ह्ह हाआँ” स्वीटी ने एक गहरी साँस ली और अपने टॉप को सिर से उठा कर निकाल दिया… उसकी सेव जैसी चुचियाँ नज़र आ रही थी जिस पर उसके मोती जैसे निपल तन कर खड़े थे.

“वाह क्या बदन पाया है” राज उसके बदन को निहारते हुए बोला और स्वीटी अपने कपड़े उतारती रही… उसने अपनी स्कर्ट को पॅंटी के साथ नीचे कर उतार दिया.. उसकी झांते तराशि हुई थी.. वो काफ़ी सेक्सी लग रही थी.

“प्रीति तुम्हारा क्या इरादा है” राज ने अपनी बेहन से कहा.. प्रीति जल्दी जल्दी अपने कपड़े उतार नंघी हो गयी. स्वीटी और वो दोनो एक दूसरे के बदन को निहारने लगे.. स्वीटी की नज़रें तो उसकी बड़ी चुचियों पर ही गढ़ी हुई थी…

प्रीति अपनी चचेरी बेहन की कामुक नज़रों से शर्मा गयी और उसकी चूत गीली होने लगी… उसे स्वीटी का बदन भी बहोत पसंद आया था और वो सोचने लगी कि उसकी छोटी लेकिन प्यारी चुचि को चूसने से कैसा लगेगा और इस ख़याल से अपने बदन मे उठी कपन से वो चौंक पड़ी.

स्वीटी ने आगे बढ़कर अपने चचेरे भाई के लंड को अपने कोमल हाथों मे पकड़ लिया था वो उसकी लंबाई और मोटाई माप रही थी.. राज था कि उसे उकसा रहा था कि उसके हाथ का स्पर्श कितना अछा लग रहा था और वो खुद नंगी बहोत अछी लग रही थी.

“राज मुझे तो विश्वास नही हो रहा कि कोई लंड इस तरह सख़्त भी हो सकता है… ठीक किसी लोहे की सलाख की तरह.. ” वो उसके लंड को अपनी मुट्ठी मे भींचते हुए बोली.. “क्या तुम्हारा लंड बहोत सारा पानी छोड़ता है? उसने पूछा.

“हाँ छोड़ता तो है.” राज ने जवाब दिया.

“क्या तुम मुझे दीखा सकते हो?”

“हां दीखा सकता हूँ अगर तुम मेरे लंड को थोड़ा सा चूस दो तो” उसने जवाब दिया.. स्वीटी को तभी ख़याल आया कि वो किससे बात कर रही है.. वो दुविधा मे फँसी वैसे ही खड़ी रही.

“अब इतना भी क्या सोच रही है.. स्वीटी? तुमने ही मुझे बताया कि तुम चुदाई का मज़ा ले चुकी हो.. तो चूसने मे क्या हर्ज़ है ” प्रीति अपनी चहेरी बेहन के नज़दीक खिसकती हुई बोली. उसने अपना हाथ स्वीटी के हाथ पर रखा जो राज के लंड को पकड़े हुए था… और फिर धीरे धीरे मसल्नेलगि. .. जब उसने देखा की स्वीटी खुद उसके लंड को मसल रही है तो उसने राज के लंड को अब नीचे से अपनी मुट्ठी मे भर लिया और अब दोनो मिल कर राज के लंड को मुठियाने लगे.

“मुझे विश्वास नही हो रहा कि तुम अपने सगे भाई का लंड मुठिया रही हो? स्वीटी ने कहा.

“क्या करूँ में भी.. ऐसा शानदार लंड रोज़ कहाँ मिलता है.. ” प्रीति ने जवाब दिया और नीचे घूटनों के बल बैठ गयी… स्वीटी आँखे फाडे प्रीति को देख रही थी.. प्रीति ने अपने भाई के लंड को अपने मुँह मे ले लिया..

प्रीति के नंगे बदन की गर्मी स्वीटी को अपने पैरों के पास महसूस हो रही थी.. वो देख रही थी कि किस तरह वो अपने ही भाई का लंड चूस रही है.. और उसकी चूत गीली होने लगी.. उसका दिल लंड चूसने को मचल उठा.. वो अपनी बेहन के पास बैठ गयी.. प्रीति ने राज के लंड को बाहर निकाल दिया जिससे अब स्वीटी उस लंड को चूस सके.

प्रीति देख रही थी कि किस तरह उसके भाई का लंड स्वीटी के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था.. उसकी निगाहें स्वीटी के बदन पर फिसलती हुई उसकी चुचियों पर पहुँची.. जहाँ उसकी छोटी चुचियाँ कड़ी दीख रही थी.. साथ ही निपल तने हुए थे.. . उत्तेजना मे उसके भी निपल तन कर खड़े हो चुके थे.. वो देखना चाहती थी कि उसके निपल ज़्यादा कड़े थे या फिर स्वीटी के. प्रीति ने हाथ बढ़कर उसकी चुचि को अपनी मुट्ठी मे भर लिया और मसल्ने लगी.. अपनी खुद की चुचियों को तो उसने कई बार मसला था लेकिन आज दूसरी लड़की की चुचि पकड़ मसल्ने मे उसे मज़ा आ रहा था…

राज अपनी दोनो बहनो की नज़रों का आनंद ले रहा था..वो देख रहा था कि एक बेहन किस तरह उसके लंड को चूस रही थी. तो दूसरी अपनी बेहन की चुचि को मसल रही थी.. उसकी उत्तेजना और बढ़ने लगी…

स्वीटी ने जब देखा कि राज के लंड से पानी रिस रहा है तो उसने अपने आपमे पूरी हिम्मत जुटाई और उसके लंड को अपने गले तक ले लिया.. राज के लंड ने पिचकारी छोड़ी और वो उस वीर्य को पीने लगी…. उससे सारा रस नही पीया गया.. कुछ उसकी होठों के किनारे से बहने लगा तो उसने लंड को अपने मुँह से बाहर निकाल दिया..

प्रीति ने तुरंत राज के लंड को अपने मुँह मे लिया और बचा हुआ सारा रस पीने लगी.. “थॅंक्स स्वीटी तुम सही मे बहोत अछा लंड चूस्ति हो” राज ने पलंग पर पसरते हुए कहा.

“वो तो ठीक है राज लेकिन मुझे अभी भी विश्वास नही हो रहा कि कोई लंड इतना लंबा और मोटा हो सकता है क्या? स्वीटी ने अपने कपड़े उठाते हुए कहा, “अब हमे पार्टी मे चलना चाहिए इसके पहले कि किसी को कुछ पता चले. तीनो ने अपने कपड़े पहने और वापस पार्टी मे आ गये.

पार्टी ख़तम होने के बाद जब सब विदा लेने लगे तो स्वीटी ने अपने चचेरे भाई को खींच एक कोने मे किया और उसके होठों को चूसने लगी.. उसने अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी… और राज का लंड आने वाले दिनो याद मे खड़ा होने लगा.

“राज मुझे इसकी कोई परवाह नही कि तुम मेरे चचेरे भाई हो… एक ना एक दिन में तुमसे चुदवा के रहूंगी.. मुझे ये तुम्हारा घोड़े जैसा लंड बहोत पसंद आ गया है.. में चाहती हूँ कि तुम इसे मेरी चूत मे घुसा मेरी चूत के चिथड़े चिथड़े कर दो.. क्या तुम मेरी तमन्ना पूरी करोगे? ” स्वीटी ने उसके होठों को चूस्टे हुए कहा.

राज तो खुद कामग्नी मे जल रहा था.. वो तो खुद किसी को चोदने के लिए तड़प रहा था.. “हां हां क्यों नही” उसने जवाब दिया.

“ओह्ह राज तुमने तो मेरा दिल ही जीत लिया” कहकर स्वीटी ने उसे चूमा और छोड़ दिया..

वसुंधरा और प्रीति दोनो राज के साथ कार मे थी और दोनो एक दूसरे से नज़रे चुरा कर राज के खड़े लंड को देख रही थी जो पॅंट मे तंबू बनाए हुए था.

आने वाले दीनो मे राज यही सोचता रहा कि उसे कब मौका मिलेगा चूत को चोदने का.. वो चूत चाहे उसकी चचेरी बेहन की ही क्यों ना हो… और आख़िर भगवान ने उसकी सुन ली.

शुक्रवार की रात थी.. राज की मम्मी को किसी काम से सहर से बाहर जाना पड़ा… प्रीति और राज घर मे अकेले थे.. राज और प्रीति दोनो खाने की टेबल पर बैठे थे.. प्रीति आज अपने पूरे यौवन पर थी.. वो आज की रात राज के लंड की एक एक बूँद पीना चाहती थी.. वो हर तरीके से उसे रिझाने मे लगी हुई थी.. लेकिन राज…. वो तो अपने ख्यालों मे खोया हुआ था.. उसके ख़यालों मे थी स्वीटी की मुलायम और गोरी चूत जिसे चोदने का उसने वादा किया था.. राज अपनी बेहन की अदाओं को नज़र अंदाज़ कर टीवी देख रहा था… प्रीति उसके बगल मे बैठ गयी और उसने अपनी टी-शर्ट और ब्रा उतार कर अपने दोनो कबूतर आज़ाद कर दिए.. उसने अपना हाथ अपने भाई के लंड पर रखा और कहा कि वो उसे चूसना चाहती है.

प्रीति राज के लंड को उसकी पॅंट से आज़ाद करने लगी कि तभी राज उसकी ओर घूमा और बोला, ” प्रीति तुम्हे याद है जब शमा की पार्टी मे तुम मुझे स्वीटी के कमरे मे ले गयी थी.?”

“हां अछी तरह याद है और उसके बाद क्या हुआ वो भी याद है” प्रीति ने जवाब दिया.

“याद है तुमने मुझसे वादा किया था कि तुम मेरे लिए कुछ भी करोगी.. आज वो रात आ गयी है कि तुम अपना वादा निभाओ.” राज ने कहा.

“अरे मेरे प्यारे भैया वो रात में कैसे भूल सकती हूँ.. ठीक है बोलो तुम मुझसे क्या चाहते हो? ” प्रीति ने पूछा.

“में तुम्हारी चूत के बालों को सॉफ करना चाहता हूँ” राज ने जवाब दिया.

प्रीति थोड़ी देर सोचती रही फिर बोली, “ठीक है मुझे कोई फराक नही पड़ता.. राज तुरंत खड़ा हुआ और अपनी बेहन को बाथरूम मे चलने को. कहा….बाथरूम मे पहुँच राज ने प्रीति को एक टवल पर लीटा दिया और उसकी पॅंटी खींच उतारने लगा….

वो ये देख कर खुश हो गया कि प्रीति की चूत उत्तेजना मे गीली थी… उसने अपना शेविंग क्रीम और रेज़र निकाल लिया..

पहले तो राज ने रेज़र लिया और उसकी झान्टो को तरीके से तराशने लगा.. जब भी रेज़र की खुरदरी ब्लेड प्रीति की चूत की त्वचा को छूती तो एक अजीब सरसराहट सी होती और हर सरसराहट के साथ वो उत्तेजित होती जा रही थी…

राज ने शेविंग क्रीम उठाई और उसकी चूत के चारों और लगाने लगा… जब भी राज की उंगलियाँ उसकी चूत के आस पास छूती तो वो फिर चूहांक पड़ती.. राज ने अपनी एक उंगली उसकी चूत मे डाली तो वो उछल पड़ी.. .. फिर उसने रेज़र उठाया और उसके बालों को सॉफ करने लगा…

जब उसकी चूत एक दम सॉफ हो गयी तो वो खुश हो गया.. “हां अब लगती है ना तुम्हारी चूत की किसी चिकने सपाट मैदान की तरह.. चाहे कोई जितने मर्ज़ी घोड़े दौड़ाए.. सब सरपट सरपट भागेंगे” राज ने हंसते हुए कहा. “अब एक काम करो तुम नहा लो और अपनी चूत को रगड़ रगड़ के सॉफ कर लो जिससे सारी क्रीम धूल जाए.. क्यों कि बाद मे तुम्हारी चूत को चाटना और चूसना चाहता हूँ… और फिर तुम्हारी चूत से बहते रस को पीना चाहता हूँ.”

“में नहाउंगी अगर तुम अपना हथियार साथ मे लाओ तो?

“हां क्यों नही”

प्रीति खड़ी हुई और अपनी बालों रहित चूत को देखने लगी.. उसने अपनी उंगलियाँ अपनी चूत पर फिराई तो उसे बहोत अछा लगा… प्रीति ने शवर चालू कर दिया और राज अपने कपड़े उतार उसके साथ शवर के नीचे हो गया.. अब दोनो एक दूसरे को बाहों मे लिए एक दूसरे के बदन से खेलने लगे..

राज देख रहा था कि उसकी बेहन उसके लंड को घूर रही थी और बार बार अपने होठों पर अपनी जीब फिरा रही है.. उसे याद आ गया कि किस तरह स्वीटी ने उसे चूम अपनी जीब उसके मुँह मे डाल दी थी.. आज वो अपनी छोटी बेहन के होठों का स्वाद चखना चाहता था.. उसकी जीब से ठीक उसकी तरह खेलना चाहता था… प्रीति भी शायद यही चाह रही थी.. वो अपने भाई की ओर देख मुक्सुरा रही थी.. कि राज ने अपने होंठ उसके होठों पर रख दिए.. और प्रीति ने कस के उसके होंठो को अपने होठों की गीरफ्त मे ले लिया.

शवर के नीचे खड़े दोनो एक दूसरे के होठों को चूस रहे थे.. जीब से जीब लड़ा खेल रहे थे.. एक अजीब ही मज़ा दोनो को आ रहा था… अपनी उखड़ी सांस को संभालने जब दोनो अलग हुए तो गहरी गहरी साँस लेने लगा.. तब प्रीति ने अपने भाई को उसकी चूत चाटने के लिए कहा… “में चाहती हूँ कि आज तुम मेरी इस बिना बालों की चूत को चूसो…”

दोनो ने पहले अपने गीले बदन को टवल से पौंचा और फिर वापस प्रीति के कमरे मे आ गये.. प्रीति अपने पलंग पर टांग फैला कर लेट गयी… राज पलंग के कीनारे उसकी प्यारी चूत को निहारता रहा फिर झुक कर उसने अपनी जीब उसकी चूत पर रख दी.. उपर से नीचे तक चाट कर वो उस नयी चूत का मज़ा लेता रहा फिर उसने चूत को थोड़ा फैलाया और अपनी जीब उसकी चूत के अंदर घुसा दी… “ओह हां आशीए ही चूसो श हां और ज़ोर ज़ोर से ऑश ऑश” प्रीति सिसकने लगी.

राज और ज़ोर ज़ोर से उसकी चूत के अंदर जीब डाल चूसने लगा…. उसकी बेहन का बदन काँपा और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया.. राज ने अपनी जीब उसके मुँह से निकाल ली और बड़े प्यार से उसके गोरे बदन को देखने लगा…

“प्रीति में तुम्हारी चुचियों के बीच अपने लंड को फँसा तुम्हारी चुचियों को चोदना चाहता हूँ” राज उसके बगल मे लेटकर उसे चूमते हुए होला.

“ठीक है भाई” प्रीति ने कहा.

राज ने उसके साइड तले से वही क्रीम की शीशी उठा ली जो उसने गीली चूत के समय इस्तेमाल की थी… फिर उसकी कमर पर चढ़ उसके पेट पर बैठ गया… राज का लंड प्रीति के ठीक मुँह के सामने था.. वो थोड़ा उपर को उठी और उसके लंड को खींचते हुए अपने मुँह मे ले चूसने लगी…

राज वही क्रीम उसकी चुचियो पर मल चिकना करने लगा… जब प्रीति ने उसके लंड को बाहर निकाल दिया तो उसने उसकी दोनो चुहियों को पकड़ा और अपना लंड उसकी घाटी के बीच रख दिया.. राज ने प्रीति को अपनी चुचियों को और लंड पर जकड़ने को कहा.. और जब उसने वैसा किया तो वो अपनी कमर हिला अपने लंड को आगे पीछे करने लगा…

“ओःः प्रीति तुम्हारी नाज़ुक और मुलायम चुचियाँ कितनी अछी लग रही है” राज ने कहा.

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