परिवार हो तो ऐसा – Update 55 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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ट्रिन ट्रिन ट्रिन…….डोरबेल लगातार बजती जा रही थी जिसकी आवाज़ से वाशु अचानक नींद से उठती है और जल्दी से अपने कपड़े पहनने लगती है इसी दोरान उसकी नज़र नेहा पर पड़ती है और जो अभी भी बिल्कुल नंगी बेसूध सो रही है वाशु एक चादर खींच कर उसके शरीर पर डाल देती है और फिर दरवाजा खोलने चली जाती है… दरवाजा होलते ही सामने शमा खड़ी नज़र आती है… हेलो आंटी बड़ी देर लगा दी दरवाजा खोलने में… कहकर शमा अंदर आ जाती है… “ सॉरी बेटा वो मैं सो रही थी इसलिए डोरबेल सुनाई नही दी” वाशु ने शमा को देर से दरवाजा खोलने की वजह बताई. आंटी बहुत भूक लगी है जल्दी खाना लगाओ शमा ने वाशु से कहा. बेटा वो हमने आज खाना बनाया ही नही क्योंकि हमारा आज खाना बनाने का मूड नही तो सोचा था जब तुम आ जाओगी तो बाहर से ऑर्डर कर देंगे तुम जाके फ्रेश हो जाओ मैं ऑर्डर कर देती हूँ… वाशु ने हालात को संभालते हुए कहा. आंटी मम्मी दिखाई नही दे रही है शमा ने फिर पूछा. वो अपने रूम में सो रही है शायद रात में नींद नही आई होगी. ठीक आंटी आप जल्दी से खाना ऑर्डर करें में फ्रेश होकेर आती हूँ …. शमा ने कहा.

वाशु ने जल्दी से खाना ऑर्डर किया और नेहा को उठाने उसके रूम में चली गयी. वाशु ने रूम घुसते ही देखा नेहा वैसे ही बेसूध सो रही है वाशु ने आगे बढ़ कर नेहा के उप्पेर पड़ी चादर उतार दी और उसके चूतदों पर एक चपत लगाई जिससे नेहा एक दम से हड़बड़ा कर उठ जाती है और बदहवास सी वाशु की ओर देखने लगती है.. नींद पूरी नही हुई अभी तक वाशु नेहा को अपनी ओर देखता पाकर पूछती है.. नेहा को जैसे ही अपने नंगे होने का अहसास होता है वह अपने होश में आती है वो चादर खींच कर अपने शरीर पर डाल लेती. शमा आ गयी क्या नेहा वाशु को पूछती है… हां आ गयी है और मैने खाने का ऑर्डर दिया है अब मैं शमा को क्या बताती कि खाना क्यूँ नही बना अब जल्दी से तय्यार होकेर बाहर आ जाओ फिर हम तीनो मिलकर खाना खाएँगे… वाशु ने नेहा को सारी बात विस्तार से बताई ओर बाहर आ गयी…..

ट्रिन ट्रिन ट्रिन…. डोर बेल बजी और वाशु दरवाजा खोलने के लिए आई दरवाजा खोला तो सामने डेलिवरी बॉय खड़ा था जो सब खाने का सामान लाया था जो वाशु ने ऑर्डर किया था… मैं अभी पैसे लेके आती हूँ ये कहकर वाशु ने उससे समान लिया और उसको वहीं खड़े होने को कहा और सब सामान डाइनिंग टेबल पर रख कर अपने रूम से पैसे लेकेर उस बॉय देने के बाद दरवाजा बंद करके फिर डाइनिंग टेबल पर आकर खाने को प्लेटो में लगाने लगती है…. तभी शमा भी उप्पेर से नीचे आती है है डाइनिंग टेबल पर आकेर बैठ जाती है… नेहा भी अपने रूम से निकल कर बाहर आती है और वाशु का हाथ बटाती है और फिर तीनो मिलकर बातें करते हुए खाना खाते है….

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शाम के समय शमा अपने रूम मे कंप्यूटर के सामने बैठी पॉर्न साइट्स पर सेक्स वीडियोज का मज़ा ले रही है और साथ अपने हाथों से अपनी चूत को कपड़ों के उप्पेर सहला रही है…. आज उसे राज की बहुत याद आ रही है आज राज से चुदाई के वो पल याद कर कर के उसकी चूत पानी छोड़ती जा रही है…… कुछ देर ऐसे ही अपनी चूत से खेलने के बाद जब उसकी उत्तेजना कम होने के बजाए और बढ़ जाती है तो वह उठ कर बेड पर आ जाती है और अपने सारे कपड़े एक झटके में उतार फेंकती है…. सामने कंप्यूटर स्क्रीन पर चल रहे गरम चुदाई के सीन को देख कर उसकी उत्तेजना और बढ़ जाती है अब शमा अपने हाथों से अपनी चूचियों को दबाना सुरू कर देती है अपनी निपल्स को अपनी दो उंगलियों के बीच दबा दबा कर और भी उत्तेजित होती जाती है… एकाएक उसका हाथ उसकी चूत तक पहुँच जाता है और वह अपने हाथ की उंगलियों को अपनी चूत पर उप्पेर से नीचे तक रगड़ने लगती है… उसकी चूत पहले से गीली हो चुकी थी अपने हाथ को अपनी ही चूत पर महसूस कर उसकी चूत और भी पानी छोड़ना सुरू कर देती है….. कुछ देर ऐसे ही अपनी चूत से खेलने के बाद शमा अपनी चूत की क्लिट को अपनी दो उंगलियों के बीच दबा कर मसल्ने लगती है……. सहलाने लगती है…

अब शमा बेड पर पीठ के बल लेट जाती है और फिर से अपन हाथ की दो उंगलिया अपनी चूत मे डालने लगती है उसकी उंगलिया उसकी गीली चूत में आसानी से चली जाती है शमा अब धीरे धीरे अपनी उंगलियों को अंदर बाहर करने लगती है… शमा का दूसरा हाथ उसकी चूचियों को बारी बारी से दबा रहा था ऐसा करने से शमा की उत्तेजना बढ़ती ही जा रही थी उसे लग रहा था कि उसके अंदर का लावा कभी भी फॅट सकता है और वह तेज़ी से अपने हाथ को चलाने लगती है और तेज़ी से उसकी उंगलिया उसकी चूत में तेज़ी से अंदर बाहर हो रही थी और थोड़ी ही देर में उसकी चूत ने अपना रस छोड़ दिया और वह निढाल होकेर बेड पर पसर गयी………..

रात के समय चारो डाइनिंग टेबल पर बैठे खाना खा रहे थे..” तुम्हारा मन लग गया बेटा अकेली बोर तो नही हुई ना यहाँ” देव ने शमा से पूछा. नही अंकल मैं बिल्कुल बोर नही हुई शमा ने जवाब दिया. तो क्या क्या किया दिन भर देव ने फिर पूछा.. सुभह में मैं अपनी फ्रेंड के यहाँ चली गयी थी और दोपहर तक वहीं थी. और वापस आने के बाद खाना खाने के बाद सो गयी थी… इसलिए दिन कैसे बीता पता ही नही चला.. शमा ने फिर से जवाब दिया. ऐसे ही बाते करते करते सभी ने अपना खाना फिनिश किया. वाशु मैं स्टडी रूम में हूँ मुझे कुछ काम है. ऑफीस का कहकर देव उठकर अपने रूम मे चले गये. थोड़ी देर बाद शमा भी उठकर उप्पेर अपने रूम में चली गयी. वाशु और नेहा झूठे बर्तनो को समेट कर उन्हे सिंक में धुलने के लिए डाल रही थी.. दोनो रसोई की साफ सफाई में लगी हुई धीरे धीरे बातें कर थी.

नेहा प्लान के अनुसार देव से बात करके थोड़ी देर में रूम में आती हूँ फिर तुम्हे सब समझा दूँगी कैसे करना है….. वाशु ने नेहा से कहा. मैं तो अभी से नर्वस हो रही हूँ और एक्शिटेड भी…. नेहा ने अपनी हालत वाशु को बताई. देव से चुदने को तुम्ही तो बेचैन थी और कह रही हो नर्वस हो रही हूँ तुम्हारा भी जवाब नही…. वाशु हैरान होते हुए नेहा से कहती है. क्या बताउ वाशु जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है मेरी तो हालत ही खराब होती जा रही है… नेहा ने आगे कहा. तुम कहो तो आज का प्रोग्राम ही कॅन्सल कर दें फिर किसी दिन चुद लेना देव से जब तुम्हारा मन हो… वाशु ने कहा. नही नही ऐसा मौका फिर नही मिलेगा मैं आज ही अपनी ख्वाहिश पूरी करना चाहती हूँ… नेहा ने अपनी जिग्यासा बताई. क्यों अब नर्वस नही हो या चूत के कीड़े ने तुम्हारा डर दूर कर दिया… वाशु ने नेहा के चूतदों पर हाथ मारते हुए कहा…. मेरी तो चूत अभी से गीली होने लगी है ऐसा लग रहा है जैसे अभी भाग कर देव के रूम में चली जाउ और देव से कहूँ की आज मुझे इतना चोदो इतना चोदो की मेरी चूत के चीथड़ें चीथड़ें हो जायें… नेहा ने उत्तेजना वश वाशु से ये बातें कही. अब आई हो ना लाइन पर.. वाशु ने नेहा को छेड़ते हुए कहा. और इस तरह बातें करते करते दोनो नेसब काम निपटा लिए… वाशु मैं रूम मे जा रही हूँ जल्दी से कुछ करो.. कहकर नेहा अपने रूम में जाने लगी. ठीक है मैं अभी थोड़ी देर में सब सेट करके आती हूँ तुम मेरा इंतज़ार करो रूम में जाकर… वाशु ने नेहा से कहा. वाशु ने देव के लिए दूध बनाया और लेकर अपने रूम में चली गयी.

वाशु ने अपने रूम में पहुँच कर देखा देव वहाँ नही थे… फिर वाशु को याद आया कि देव तो स्टडी रूम में हैं और वाशु स्टडी रूम में देखने चली गयी जहाँ देव कंप्यूटर के सामने बैठे कुछ टाइप करते हुए दिखाई दिए … वाशु ने पास जाकर देखा तो देव अपने ऑफीस का कुछ काम कर रहे थे… कितना काम करोगे देव कुछ तो आराम कर लिया करो और ऑफीस का काम ऑफीस में ही किया करो.. वाशु ने देव को जैसा चोंका ही दिया था. कुछ ज़रूरी मेल्स भेजनी थी बस हो ही गया और अगर ऑफीस में ही करता तो लेट हो जाता इसलिए जल्दी आया और यहाँ पर पूरा कर रहा हूँ.. देव ने वाशु को जवाब दिया.. ओके ठीक है पहले दूध पीलो फिर पूरा करना जो भी बाकी है… वाशु ने डबल मीनिंग में देव से कहा. देव ने वाशु से दूध का ग्लास लिया दूध को पीने लगे… थोड़ी ही देर में देव ने दूध पी लिया और खाली ग्लास वाशु को पकड़ा दिया.. देव काम ख़तम करके जल्दी से रूम में आ जाओ मुझे तुमसे कुछ बात करनी है.. वाशु ने देव से कहा. क्या बात करनी यहीं पर बता दो.. देव ने वाशु से कहा. नही यहाँ नही अपने रूम में जल्दी आओ और ये कहकर वाशु रूम से बाहर आ गयी और रसोई में झूठा ग्लास रखने चली गयी….

थोड़ी देर बाद वाशु अपने रूम में बेचैनी से देव का वेट कर थी… कुछ देर बाद देव रूम में आते हैं और वाशु को बेचैन देखकर वाशु से पूछते है क्या हुआ. देव पता है रात को शायद नेहा ने हमे चुदाई करते देख लिया है… वाशु ने घबराहट के जैसा मुँह बनाते हुए देव से कहा.. (ये सब वाशु के प्लान का हिस्सा था इस लिए वाशु देव को ये सब बता रही थी)… तो इसमे घबराने की क्या बात हम पति पत्नी हैं और हम ने कोई गुनाह नही किया है… हर पति पत्नी चुदाई करते है… देव ने वाशु से कहा और वाशु को अपनी बाहों में भर लिया… ये सही नही हुआ मुझे लगता है जब तक नेहा और शमा यहाँ हैं हमे कुछ दिन ऐसे ही बिना कुछ किए गुजारने होंगे… वाशु ने अपनी राई प्रकट की…(जबकि वह जानती थी कि देव एक दिन भी उसे चोदे बिना नही रह सकता… )… नही ऐसा कैसे हो सकता है तुम्हे मालूम है जब तक मैं चुदाई ना कर लूँ मुझे नींद नही आती… देव अपने हाथों से वाशु की चूचियों को दबाते हुए कहा….. फिर भी वो क्या सोचती होगी कि ये कुछ दिन भी रुकभी नही सकते .. वाशु फिर से कहा और देव की जाँघो पर हाथ फिराने लगी… देव भी वाशु चूचियों को कपड़ों के उप्पेर से ही मसल्ने लगे…

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