परिवार हो तो ऐसा – Update 45 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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राज ने स्वीटी का हाथ पकड़ उसे अपने कंधों पर उठा लिया और

बेडरूम की ओर बढ़ गया..

जैसे ही स्वीटी राज के कंधों पर आई प्रीति ने उसकी शॉर्ट्स के

किनारे को पकड़ उसकी पॅंटी के साथ साथ उसे उतार दिया… अब स्वीटी

नंगी राज के कंधों पर लटकी थी.

राज ने स्वीटी को लेकर अपने मम्मी डॅडी के बेडरूम मे लाकर उसे पलंग

पर डाल दिया.. क्यों कि उनके पलंग के कोने अच्छे थे.. प्रीति भी

उनके पीछे पीछे कमरे मे आ गयी..

प्रीति ने अपनी मम्मी के ड्रॉयर से चार स्कार्फ निकाल लिए जिससे स्वीटी

को बाँधा जा सके.. राज स्वीटी के उपर चढ़ उसके दोनो हाथो को

उसके सिर के उपर कर पकड़ लिया.. और प्रीति उसके हाथों को पलंग

के हत्थे से बाँधने लगी..

फिर प्रीति ने स्वीटी की दोनो टाँगो को फैला दिया और और उन्हे दोनो

किनारों पर बाँध दिया.. अब स्वीटी किसी क़ैदी की तरह पलंग पर

थी और उसकी दोनो टाँगे फैली हुई थी…

“इस तरह पलंग से बँधी हुई सच मे बहुत सेक्सी लग रही हो”

प्रीति अपनी चचेरी बेहन के होठों को चूस्ते हुए बोली.

राज स्वीटी की दूसरी तरफ आ गया और उसके निपल को चूसने लगा..

दोनो भाई बेहन मिलकर अब स्वीटी के बदन को चूमने लगे मसल्ने

लगे… स्वीटी के बदन मे उत्तेजना बढ़ने लगी.. एक मीठी मीठी

गुदगुदी उसके बदन मे छाई थी.. वो भी कुछ करना चाहती थी…

लेकिन बँधी होने से वो मजबूर असहाय उस वेदना को सहने लगी..

“राज एक काम करते है इसे इसी तरह छोड़ देते हैं.. और हम दोनो

चुदाई करते है.. ये हमे देख उत्तेजित होती रहेगी.. इसकी चूत

मच्चल्ने लगेगी.. लेकिन ये सिर्फ़ तड़प के रह जाएगी… ” प्रीति ने

कहा.

“हां प्रीति ये सही रहेगा.. इसे जलाने मे बहुत मज़ा आएगा” राज

ने कहा.

“देखो में कहे देती हूँ तुम दोनो ऐसा कुछ मेरे बिना नही करना”

स्वीटी ने कहा.. लेकिन दोनो भाई बेहन उसके बगल से हाथ अब पलंग

के किनारे पर खड़े एक दूसरे के कपड़े उतारने लगे.. स्वीटी मजबूर

लच्चार फटी आँखों से दोनो की हरकतें देखती रही..

प्रीति घुटनो के बल अपने भाई के सामने बैठ गयी और उसके लंड को

पहले तो अपनी मुट्ठी मे भर चूमने लगी.. उसके सूपदे पर अपनी जीब

फिरा स्वीटी की ओर देखते हुए उसने अपना पूरा मुँह खोल उसे अंदर

लिया और किसी लॉलीपोप की तरह चूसने लगी..

स्वीटी ललचाई नज़रों से राज के खड़े लंड को देख रही थी.. मोटा

लंबा लंड प्रीति के मुँह के अंदर बाहर हो रहा था…

“प्रीति और राज देखना में तुम दोनो की जिंदगी झन्नुम बना

दूँगी..मुझे चिढ़ाने मे बहुत मज़ा आ रहा है ना” स्वीटी

चिल्लाई….

प्रीति और जोरों से राज के लंड को चूस्ते हुए उसे चिढ़ाने

लगी,, “म्‍म्म्ममम क्या स्वाद है… स्वीटी रानी क्या चूसना चाहोगी?”

“हां और नही तो क्या….” स्वीटी ने जवाब दिया.

“तो फिर ज़रा प्यार से गिड़गिदा कर कहो ना” प्रीति ने हंसते हुए कहा.

“राज प्लीज़ मुझे अपना लंड चूसने दो ना… प्लीज़ इसे मेरे मुँह मे

घुसा दो……” स्वीटी गिगीडा उठी.

प्रीति ने राज का लंड चूस्ते हुए अपने हाथ को स्वीटी की चूत पर

रखा और उसे मसल्ने लगी.. स्वीटी तड़प उठी..अपने हाथों को

छुड़ाने के लिए वो मच्छल उठी…

प्रीति ने पानी दो उंगलियाँ उसकी चूत मे घुसा दी और उसे अंदर

बाहर करने लगी.. राज अपने लंड के धक्के अपनी बेहन के मुँह मे

मारने लगा… उसका लंड और अकड़ता जा रहा था…

प्रीति की उंगलियों ने स्वीटी की उत्तेजना को और भड़का दिया.. वो अपनी

कमर को उठा उसकी उंगलियों को और अपनी चूत के अंदर तक लेने

लगी.. प्रीति ने राज के लंड को अपने मुँह से निकाला और अपने मुँह को

स्वीटी की चूत पर लगा दिया.. और चूसने लगी.. तभी स्वीटी की

चूत का बाँध खुल गया.. रस की धारा बहने लगी जिसे प्रीति गटक

गटक कर पीने लगी..

“तुम भी मेरी चूत चूसना चाहोगी ना? ” प्रीति ने स्वीटी से पूछा.

“हां प्रीति हाआँ अपनी चूत मुझे दो… ” स्वीटी बोल पड़ी.

“राज पहले अपने लंड को मेरी चूत मे घुसा दो और फिर स्वीटी के

मुँह मे देकर उसे मेरी चूत का स्वाद चखाओ” प्रीति ने अपने भाई से कहा.

राज प्रीति के पीछे आ गया और अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा दो

तीन धक्के मारे.. फिर उसकी चूत के रस से भीगे लंड को उसने

स्वीटी के मुँह मे दे दिया…

स्वीटी किसी भूके बच्चे की तरह राज के लंड पर टूट पड़ी और ज़ोर

ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी… राज की उत्तेजना भी अपनी चरम

सीमा पर थी. वो तेज़ी से अपने लंड को उसके मुँह के अंदर बाहर

करने लगा.

“राज बहुत हो गया अब इस छीनाल की चूत मे लंड डाल इसकी चूत को

फाड़ दो” प्रीति ने राज से कहा….

राज स्वीटी की टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी गीली

चूत पर घिसने लगा… स्वीटी की चूत मे मानो हज़ारों चींतियाँ

एक साथ रेंगने लगी.. वो कमर को उठा राज के लंड को अंदर लेने की

कोशिश करने लगी.. लेकिन राज था कि उसे तो आज स्वीटी को तडपाने

मे मज़ा आ रहा था…

“ऑश राज क्यों तडपा रहे हो…ऑश प्लीज़ डाल दो ना अपना लंड मेरी

चूत मे…. उईईई अब नही रहा जाता राज प्लीज़.ईई ” स्वीटी

गिड़गिदा उठी…

आख़िर राज को उसकी हालत पर दया आ गयी उसनेआपने लंड को उसकी

चूत से लगा एक ज़ोर का धक्का मारा… स्रर्र्र्र्र्ररर करता उसका लंड

जड़ तक धँस गया…. अब वो अपने लंड को सूपदे तक बाहर खींच

ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा…

“हाआअँ ऐसे ही कस के छोड़ूऊ ऑश हाां मज़ा आ गया.. ऑश

राज क्या लंड है तुम्हारा… चूत को हिला के रख देता है”

प्रीति कहाँ पीछे रहने वाली थी वो इस कदर उस पर झुक गयी कि

उसकी चुचियाँ स्वीटी के चेहरे के सामने थी.. स्वीटी ने उसके निपल

को मुँह मे लिया और दन्तो से काटते हुए चूसने लगी..

राज ने अपनी दो उंगलियाँ लंड के साथ साथ स्वीटी की चूत मे घुसा

दी.. अब लंड और उंगली दोनो उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी..

स्वीटी की टाँगे और हाथ बँधे हुए थे इसलिए वो अपनी कमर को उठा

उसके लंड के धक्कों का साथ देने लगी और तभी एक बार फिर उसकी

चूत ने अमृत वर्षा कर दी….

“राज अब इसे थोड़ा आराम करने दो.. और तुम अब मेरी चूत चूस मेरी

भी गर्मी शांत कर दो” कहकर प्रीति पलंग के किनारे बैठ गयी

और अपनी टाँगो को फैला दिया…

राज उसके नज़दीक आया और अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगा

और मुँह मे भर चूसने लगा…. थोड़ी ही देर मे प्रीति की चूत ने

भी पानी छोड़ दिया.

तीनो थोड़ी देर के लिए शांत हो सुसताने लगे.. कि तभी प्रीति उठ

कर कमरे से बाहर चली गयी….

थोड़ी देर बाद प्रीति कमरे मे लौटी तो उसके हाथों मे कुछ चीज़ें

थी जिसे उसने नीचे ज़मीन पर रख दिया… बँधी होने के कारण

स्वीटी को कुछ दीखाई नही दे रहा था…

राज ने नीचे झुक उन चीज़ों को देखा तो पाया कि प्रीति अपने साथ

किचन से दो लंबी गाजर और दो नकली लंड यानी की डिल्डो और एक

क्रीम की ट्यूब लेकर आई थी… राज कुछ कहना चाहता था कि प्रीति

ने इशारे से उसे चुप रहने को कहा.

“राज ज़रा मेरी चूत को एक बार फिर पीछे से चोदो” प्रीति ने राज से कहा…

राज प्रीति के पीछे आ गया और अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा दो

तीन धक्के मारे.. फिर उसकी चूत के रस से भीगे लंड को उसने

स्वीटी के मुँह मे दे दिया…

स्वीटी किसी भूके बच्चे की तरह राज के लंड पर टूट पड़ी और ज़ोर

ज़ोर से उसके लंड को चूसने लगी… राज की उत्तेजना भी अपनी चरम

सीमा पर थी. वो तेज़ी से अपने लंड को उसके मुँह के अंदर बाहर

करने लगा.

“राज बहुत हो गया अब इस छीनाल की चूत मे लंड डाल इसकी चूत को

फाड़ दो” प्रीति ने राज से कहा….

राज स्वीटी की टाँगो के बीच आ गया और अपने लंड को उसकी गीली

चूत पर घिसने लगा… स्वीटी की चूत मे मानो हज़ारों चींतियाँ

एक साथ रेंगने लगी.. वो कमर को उठा राज के लंड को अंदर लेने की

कोशिश करने लगी.. लेकिन राज था कि उसे तो आज स्वीटी को तडपाने

मे मज़ा आ रहा था…

“ऑश राज क्यों तडपा रहे हो…ऑश प्लीज़ डाल दो ना अपना लंड मेरी

चूत मे…. उईईई अब नही रहा जाता राज प्लीज़.ईई ” स्वीटी

गिड़गिदा उठी…

आख़िर राज को उसकी हालत पर दया आ गयी उसनेआपने लंड को उसकी

चूत से लगा एक ज़ोर का धक्का मारा… स्रर्र्र्र्र्ररर करता उसका लंड

जड़ तक धँस गया…. अब वो अपने लंड को सूपदे तक बाहर खींच

ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा…

“हाआअँ ऐसे ही कस के छोड़ूऊ ऑश हाां मज़ा आ गया.. ऑश

राज क्या लंड है तुम्हारा… चूत को हिला के रख देता है”

प्रीति कहाँ पीछे रहने वाली थी वो इस कदर उस पर झुक गयी कि

उसकी चुचियाँ स्वीटी के चेहरे के सामने थी.. स्वीटी ने उसके निपल

को मुँह मे लिया और दन्तो से काटते हुए चूसने लगी..

राज ने अपनी दो उंगलियाँ लंड के साथ साथ स्वीटी की चूत मे घुसा

दी.. अब लंड और उंगली दोनो उसकी चूत के अंदर बाहर हो रही थी..

स्वीटी की टाँगे और हाथ बँधे हुए थे इसलिए वो अपनी कमर को उठा

उसके लंड के धक्कों का साथ देने लगी और तभी एक बार फिर उसकी

चूत ने अमृत वर्षा कर दी….

“राज अब इसे थोड़ा आराम करने दो.. और तुम अब मेरी चूत चूस मेरी

भी गर्मी शांत कर दो” कहकर प्रीति पलंग के किनारे बैठ गयी

और अपनी टाँगो को फैला दिया…

राज उसके नज़दीक आया और अपनी जीब से उसकी चूत को चाटने लगा

और मुँह मे भर चूसने लगा…. थोड़ी ही देर मे प्रीति की चूत ने

भी पानी छोड़ दिया.

तीनो थोड़ी देर के लिए शांत हो सुसताने लगे.. कि तभी प्रीति उठ

कर कमरे से बाहर चली गयी….

थोड़ी देर बाद प्रीति कमरे मे लौटी तो उसके हाथों मे कुछ चीज़ें

थी जिसे उसने नीचे ज़मीन पर रख दिया… बँधी होने के कारण

स्वीटी को कुछ दीखाई नही दे रहा था…

राज ने नीचे झुक उन चीज़ों को देखा तो पाया कि प्रीति अपने साथ

किचन से दो लंबी गाजर और दो नकली लंड यानी की डिल्डो और एक

क्रीम की ट्यूब लेकर आई थी… राज कुछ कहना चाहता था कि प्रीति

ने इशारे से उसे चुप रहने को कहा.

“राज ज़रा मेरी चूत को एक बार फिर पीछे से चोदो” प्रीति ने राज

से कहा…

राज अपनी बेहन के पीछे आ गया और उसकी चूत मे अपना लंड घुसा

धक्के मारने लगा… कि तभी प्रीति ने उसे लंड बाहर निकालने कहा

और राज ने वैसे ही किया… अब प्रीति स्वीटी की टाँगो के पास आई

और ज़मीन से लंबी वाली गाजर उठा ली और उसकी चूत मे घुसा अंदर

बाहर करने लगी….

“राज ज़रा इसकी टाँगे तो खोल दो” प्रीति ने राज से कहा.

राज ने स्वीटी की टाँगो को खोल दिया.

“स्वीटी अब तुम अपनी टाँगो को अपन छाती से चिपका लो” प्रीति ने कहा.

स्वीटी ने वैसे ही किया. तब प्रीति ने क्रीम की ट्यूब ली और ढेर

सारी क्रीम लेकर स्वीटी की गंद के छेद पर मल दी…और फिर नकली

लंड को उठा उसकी चूत से लेकर उसकी गंद तक घिसने लगी…

राज चुप चाप अपनी बेहन की हरकतों को देख रहा था.. प्रीति ने उस

डिल्डो को तो स्वीटी की चूत मे घुसा दिया और फिर अपनी एक उंगली उसकी

गंद मे घुसा अंदर बाहर करने लगी.. फिर थोड़ी देर बाद उसने दूसरी

उंगली भी अंदर घुसा दी.. अपनी उंगली को थोड़ी देर उसकी गंद मे

अंदर बाहर करने के बाद उसने अपनी उंगलियाँ बाहर निकाल ली और और

उस मोटी लंबी गाजर को अंदर घुसा दी और अंदर बाहर करने लगी…

“स्वीटी आज में तुम्हारी गंद को इतना चौड़ा और गहरा कर दूँगी कि

तुम्हे भविश्य मे किसी घोड़े का लंड भी अपनी गंद मे लेने मे

तकलीफ़ नही होगी” स्वीटी ने उसकी गंद मे उस लंबी गाजर को अंदर

बाहर करते हुए कहा.

“राज अब तुम पहले थोड़ी देर इसकी चूत को चोदो जसिसे इसे तकलीफ़

कम हो” प्रीति ने राज से कहा..

प्रीति ने स्वीटी को पलंग पर घोड़ी बना दिया.. और राज उस्के

पीछे आ कर अपने लंड को उसकी चूत मे घुसा अंदर बाहर करने

लगा.. उसने साथ ही अपने हाथ के अंगूठे को उसकी गंद मे घुसा गोल

गोल घुमाने लगा.. एक अनोखा मज़ा स्वीटी को आ रहा था…

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