फिर राज ने अपनी उंगलियों को बाहर निकाला और अपने लंड को अपनी मम्मी
की चूत से लगा उसे अंदर घुसा दिया…. इस चूत को कई बार चोद
चुका था लेकिन आज उसका चेहरे देखते हुए लंड को अंदर घुसाने मे
उसे एक अलग ही आनंद आ रहा था…
“ऑश राज मेरे बेटे ऑश हाआँ चोदो अपनी मा को ऑश हां और
अंदर तक घुसा के चोदो ऑश आहह ” सिसकते हुए वासू अपनी कमर
भी हिलाने लगी…
वासू ने अपने हाथों को पीछे सेल्फ़ पर रख अपने आप को सहारा दे
रखा था कि तभी राज ने उसके टॉप को पकड़ा और एक झटके मे खींच
दिया.. ब्लाउस बटन की जगह से फटता चला गया… फिर राज ने
उसकी सॅटिन की ब्रा को एक झटके मे खींचा और उसका हुक टूट वो ब्रा
उसके हाथों मे आ गयी.. अब उसकी मा की बड़ी बड़ी चुचियाँ आज़ाद
थी…
अपनी मा की बड़ी बड़ी चुचियों को देख राज के मुँह मे पानी आ
गया.. उसने एक निपल को पकड़ अपनी ओर खींचा और उसे मुँह मे ले
चूसने लगा.. फिर उसे अपने मुँह मे अंदर की ओर खींचने लगा…
वासू की उत्तेजना अपने चरम सीमा पर थी उसने अपने आपको एक हाथ के
सहारे पर डाला और दूसरे हाथ को नीचे लेजाकार अपनी चूत की
पंखुड़ियों को मसल्ने लगीजहाँ राज का लंड उसकी चूत के अंदर बाहर
हो रहा था..
थोड़ी ही देर मे वासू का शरीर काँपने लगा.. वो जोरोंसे अपनी चूत
को मसल्ने लगी और तभी उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया,..राज ने अपनी
मा के शरीर को कानपता महसूस किया साथ ही उसका लंड चूत के रस
सा लबालब भीग गया.. उसने भी दो तीन ज़ोर के धक्के लगाए और
अपने वीर्य की बौछार अपनी मा की चूत मे कर दी..
राज ने अपना लंड बाहर निकाला तो वासू ने घड़ी की ओर देखा काफ़ी देर
हो चुकी थी और उसके कपड़े भी फटी हालत मे ज़मीन पर पड़े थे…
“बहुत बदमाश हो तुम देखो मेरे कपड़ों की क्या दुर्दशा की है..
तुम्हारे पापा आते ही होंगे … मुझे तुरंत कपड़े बदल लेने
चाहिए.. ” कहकर वासू किचन टेबल से नीचे उतरी और अपने फटे
हुए कपड़े उठा किचन से बाहर निकल गयी…
राज अपनी मा को किचन से बाहर जाते देख रहा था..उसके वीर्य की
की बूंदे अभी भी उसकी चूत से टपक रही थी.. वो अपनी मा के
पीछे पीछे उसके कमरे मे आ गया..
“अब तुम यहाँ क्या कर रहे हो?” वासू ने राज से पूछा.
“बस मैं तुम्हे कपड़े बदलते देखना चाहता हूँ” उसने पलंग पर
बैठ धीरे से कहा.. वासू ने अपने कपड़े उतारे और अपने बदन को
पौंच्छ कर काले रंग की टाइट पॅंट्स और उस पर एक लाल रंग का टॉप
पहन लिया.. तब तक राज अपनी मा को देख अपने लंड को मसल्ते
रहा..
“मम्मी आज तो पापा आपको इन कपड़ों मे देखकर तो दंग रह जाएँगे
और ज़रूर आपकी चूत की धुनाई कर के रख देंगे” राज ने कहा….
“हां और में रोकूंगी भी नही क्यों कि मेरी खुद की चूत मे अभी
भी आग लगी हुई है” वासू ने हंसते हुए कहा… और तुम्हे भी मुझे
नए कपड़े खरीद कर देने होंगे.. देखे किस तरह मेरे कपड़े फाड़ कर
रख दिए तुमने” वासू ने अपने बेटे से कहा.
“फिर तो हमे शॉपिंग के लिए जाना चाहिए” राज ने कहा..
“किसी दिन ज़रूर चलेंगे” वासू ने कहा.
तभी मैं दरवाज़ा खुलने की आवाज़ सुनाई पड़ी और राज उठ कर कमरे
से बाहर चला गया… पर बाहर जाने से पहले उसने अपनी मा के
होठों को ज़ोर से चूसा और अपनी जीब भी उसके मुँहे मे घुसा दी
थी..
उस रात जब प्रीति और राज टीवी देख रहे थे प्रीति ने राज से
पूछा, “क्या बात है आज बहुत खुश नज़र आ रहे हो?”
वासू देव, अश्विन और नीता रात के खाने के लिए के बाहर गये थे
और रवि और सोनिया भी बाहर थे..कुछ पिज़्ज़ा खाने के लिए लाने
घर मे प्रीति और राज ही थे..
“कुछ खास नही बस आज की शाम काफ़ी अच्छी गुज़री” राज ने आँख
मारते हुए प्रीति को जवाब दिया.
“वो तो तुम्हारे चेहरे से ही पता चल रहा है.. में तो ये जानना
चाहती हूँ कि आज किसकी चुदाई की तुमने?” प्रीति ने पूछा.
“क्या चुदाई करने से ही शाम अच्छी गुज़रती है.. क्या और कोई वजह
नही हो सकती?” राज ने पलट के सवाल किया.
“राज ये याद रखो कि में तुम्हारी बेहन हूँ.. और मुझसे बेहतर
तुम्हे कोई नही जानता.. तुम्हारे चेहरे की खुशी बता रही है कि
तुमने आज किसी की चोदा है” प्रीति ने कहा..” हंसते हुए प्रीति ने
कहा और उसके लंड को पकड़ जोरों से दबा दिया.
“अगर तुम ये जानना चाहती हो तो सुनो आज शाम मेने मम्मी की चुदाई
की है”
“सच क्या आज फिर से तुम होटेल मे गये थे?”
“नही होटेल नही गया था आज मेने मम्मी के साथ किचन मे चुदाई
की और अब मम्मी ये भी जानती है कि हम दोनो आपस मे चुदाई करते
है.”
“क्या मम्मी ने इस बारे मे कुछ कहा नही?”
“नही मम्मी चुदाई मे इतनी मगन थी कि उसे कुछ कहना याद ही नही
रहा.. और मुझे लगता है अब हम दोनो बराबर हो गये है.. मेने
मम्मी को चोदा और तुम डेडी से चुदवा चुकी हो” राज ने हंसते हुए
कहा.
“नही मुझे दुख है कि हम बराबर नही है क्यों कि में मम्मी के
साथ भी सेक्स कर चुकी हूँ”
“क्या कह रही हो? कब और कहाँ.. और तुमने पहले मुझे क्यों नही
बताया.” राज ने असचर्या से पूछा…
तब प्रीति ने राज को बताया की किस तरह शॉपिंग के बाद स्वीटी और
उसने मम्मी के साथ किया और किस तरह एक दूसरे को खरीदे गये नई
खिलोने के साथ मज़ा दिया.
“बड़ी बदमाश हो तुम.. आज तक तुमने ये बात मुझसे छुपा के रखी”
राज ने कहा.
“जानबूझ कर नही किया राज बस दिमाग़ मे ही नही आया तुम्हे
बताना .. लाओ इसके बदले मे तुम्हारा लंड चूस देती हूँ” प्रीति ने
उसकी जीन्स की ज़िप को खोलते हुए कहा…
“ह्म्म्म्म ख़याल बुरा नही है” राज ने कहा.. प्रीति ने उसकी जीन्स को
थोड़ा नीचे खिसकाया और उसके लंड को बाहर निकाल चूसने लगी…
तभी मेन दरवाज़ा खुला और उनके ममरे भाई बेहन लौट आए…
“में रुक जाऊ या फिर चूस्ति रहूं?” प्रीति ने राज से पूछा..
“मेरा ख़याल है रुक जाओगी तो बेहतर रहेगा.. क्योंकि पता नही उस
रात के बाद उनके दिल मे क्या है?” राज ने कहा.
रवि और सोनिया हाथों मे पिज़्ज़ा लिए कमरे मे दाखिल हुए.. राज
किचन मे ड्रिंक के लिए ग्लास लाने चला गया और सोनिया प्रीति के
बगल मे आकर बैठ गयी.. उसने देखा कि राज का लंड पूरी तरह
तन कर खड़ा था.. वो सोचने लगी कि पता नही ये दोनो क्या कर रहे
थे..
राज ग्लास लेकर वापस लौटा और अपनी बेहन की दूसरी ओर बैठ गया
जिससे प्रीति अब राज और सोनिया के बीच थी.. रवि एक कुर्सी पर आराम
से बैठ गया.. उसकी नज़रे तीनो पर टीकी हुई थी और सोच रहा था
कि क्या आज की रात पिछली रात की तरह गुज़रेगी.. क्या उसे प्रीति को
चोद्ने का मौका मिलेगा….
तभी सोनिया ने एक मूवी लगा दी और सभी पिक्चर देखने लगे..
लेकिन प्रीति कहाँ शांत बैठने वाली थी..उसकी चूत मे तो हर वक़्त
आग लगी रहती थी.. चींतिया रेंगती रहती थी… अपने भाई का लंड
चूसने से उसकी चूत गीली हो चुकी थी.. लेकिन वो बेचारी क्या
करती सोनिया उसके बगल मे बैठी थी.. उसने अपना एक हाथ सोनिया की
जांघों पर रखा और सहलाने लगी….और फिर अपने हाथ को धीरे
धीरे उसकी चूत की ओर बढ़ाने लगी…
प्रीति की हरकतों से सोनिया को भी आनंद आने लगा था उसने अपने आप
को थोड़ा अड्जस्ट कर अपनी टाँगे फैला दी… प्रीति के चेहरे पर
मुस्कुराहट आ गयी और अपनी आँखो को टीवी पर गड़ाए रख अब वो सोनिया
की चूत को सहलाने लगी… फिर उसने अपना दूसरा हाथ राज के लंड
पर रख उसे मसल्ने लगी…
रवि ने तिर्छि नज़रों से अपनी निगाह टीवी से हटा कर अपनी बेहन और
प्रीति पर डाली तो चौंक पड़ा… प्रीति ने अपने भाई के लंड को
बाहर निकाल लिया था और मसल रही थी और दूसरे हाथ से उसकी
बेहन की चूत मसल रही थी.. इस तरह का द्रिश्य देख उसका लंड
पॅंट मे फड़फदा उठा…
तभी सोनिया ने अपने हाथ बढ़ा कर प्रीति की चुचियों को उसकी टी-
शर्ट के उपर से पकड़ लिया और मसल्ने लगी… रवि सोचने लगा कि
क्या उसे एक बार फिर अपनी बेहन की चुचियों को पकड़ने का मौका
मिलेगा क्या उसे फिर अपनी बेहन की चूत मे लंड घुसाने को मिलेगा…इन्ही
ख़यालों मे खोया वो तीनो देखता रहा.
तभी प्रीति अपनी जगह से उठी और कहा उसे टाय्लेट जाना है.. वो राज के
खुले लंड को वैसे ही छोड़ वहाँ से चली गयी… जाते हुए उसने
रवि की ओर मुकुरकर देखा.. सोनिया ने कोशिश की वो टीवी पर चल
रही पिक्चर देखे लेकिन उसकी नज़रे रह रह कर राज के मूसल लंड
पर ठहर जाती… उसे वो पल याद आ गये जब राज ने अपने भारी
भरकम लंड से उसे चोदा था.. कितना अच्छा महसूस हुआ था उसे वो राज
के लंड को एक बार फिर अपनी चूत मे महसूस करना चाहती थी.. उसने
आगे बढ़ कर उसके लंड को अपने हाथों मे ले लिया और धीरे धीरे
सहलाने लगी… फिर उसे अपनी मुट्ठी मे कस मसल्ने लगी. उसकी मुट्ठी
उस लंबे मोटे लंड उपर नीचे होने लगी…
राज के मुँह से कराहतों के साथ सिसकियाँ फूटने लगी…
‘एम्म ऑश हाां ऊहह” और उसने सोनिया को अपनी ओर घूमा लिया और
उसकी चुचियों को पकड़ मसल्ने लगा… उसने देखा कि रवि की नज़रे
उन्ही पर लगी हुई थी.. उसने मुस्कुरा कर उसे आँख मार दी… और
तभी उसने महसूस किया कि सोनिया ने उसके लंड को मुँह मे ले लिया है
और चूस रही है..
तभी प्रीति वापस कमरे आई ओर देखा कि सोनिया राज का लंड चूस
रही है.. तो बोल पड़ी.. “अरे मैं तो सिर्फ़ पेशाब करने गयी थी और
तुम तो झपट ही पड़ी इस लॉली पोप पर ”
“क्या करूँ ये लॉली पोप है ही ऐसी कि रहा ना गया… तुम कहो तो रुक
जाती हूँ” सोनिया ने राज के लंड को अपने मुँह से बाहर निकालते हुए
कहा.
“नही नही में तो मज़ाक कर रही थी तुम चालू रखो ” कहकर
प्रीति सोनिया के बगल मे आकर बैठ गयी. सोनिया नेएक बार फिर राज
के लंड को अपने मुँह मे लिया और चूसने लगी..
प्रीति ने सोनिया की ट्रॅक पॅंट जो उसने पहन रखी थी उसे उतार दिया
और अपनी उंगलिओ से उसकी चूत को सहलाने लगी… उसने देखा कि सोनिया की चूत
गीली हो चुकी थी तो उसने अपनी दो उंगलियो को उसकी चूत मे घुसा
अंदर बाहर करने लगी… फिर उन उंगलियों को बाहर निकाल एक बार उसकी
चूत के रस को चखा और फिर उसकी चूत मे उंगली करने लगी… फिर
उसकी टाँगों के बीच आ गयी जिससे वो उसकी चूत को चूस सके…
“ये तो तुम तीनो की बहुत ज़्यादती है.. खुद तो मज़े कर रहे हो
मुझे ऐसे ही छोड़ रखा है” रवि ने अपने लंड को पॅंट के उपर से
मसल्ते हुए तीनो से शिकायत की.
“उसके लिए तुम्हे अपनी बेहन से बात करनी होगी. क्यों कि में पहले
ही कह चुकी हूँ कि में तुम्हारे साथ कुछ नही करूँगी.. ” प्रीति
ने जवाब दिया और अपनी जीब को सोनिया की चूत से लगा दिया.
“मेने कब मना किया है ये चाहे तो राज का चूस भी सकता है और
इसे चोद सकता है… ” सोनिया ने हंसते हुए कहा.. और अब जोरों से
राज के लंड को चूसने लगी.. प्रीति की जीब सोनिया की चूत पर चल
रही थी. सोनिया का बदन उत्तेजना मे हिल रहा था. उससे अब सहन नही
हो रहा था.. उसने राज के लंड को मुँह से बाहर निकाला और बड़बड़ाने
लगी….
“ऑश प्रीति क्या कर रही हो ऑश हाआँ अंदर तक घुसा कर
चूवसो…ओह राज्ज्ज तुम क्या देख रहे हो .. घुसा दो ना अपने लंड को
मेरी चूत मे अब बर्दाश्त नही होता…. श प्ल्स चोदो ना मुझे
अयाया”
प्रीति ने अपने चेहरे को सोनिया की चूत से हटा दिया और सोनिया खड़ी
होकर राज की गोद पर चढ़ गयी फिर उसके लंड को पकड़ उसने पहले तो
अपनी गीली चूत पर थोड़ा घिसा और फिर अपनी चूत से लगा बैठते
हुए उसके लंड को अपनी चूत मे ले लिया… प्रीति सोनिया को राज के
लंड पर उछलते देखती रही और साथ ही उसकी चुचियों को मसल्ति
रही…
“रवि वहाँ बैठे बैठे क्या अपने लंड को मसल रहे हो… यहाँ आकर
देखो तुम्हारी बेहन की चुचियाँ कितनी जानदार है.. एक काम करो एक
चुचि से में खेलती हू और दूसरी को तुम चूसो” सोनिया की
चुचि को पकड़ प्रीति रवि को दिखाती हुई बोली.. रवि सोनिया के पास
आया और अपनी बेहन को चूम लिया जैसे कि पूछ रहा हो कि उसे कोई
ऐतराज़ तो नही है.
“ज़्यादा शरीफ मत बनो और सिर्फ़ मेरी चुचि को मस्लो और चूसो”
सोनिया बोली… उसकी उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी और उसकी चूत
किसी भी वक्त पानी छोड़ सकती थी.. वो और जोरों से राज के लंड पर
उछल उछल कर धक्के लगाने लगी.

Leave a Reply
You must be logged in to post a comment.