परिवार हो तो ऐसा – Update 37 | Erotic Family Incest Story

परिवार हो तो ऐसा - Family Incest Saga
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“ओह प्रीति तुम भी अब किसी कुँवारी लड़की की तरह शर्मा रही

हो..अरे जब तुम्हारे ही भाई के कमरे मे कोई सोया हुआ हो और अपने ही

भाई के साथ चुदाई करते तुम्हे शरम नही आई तो अब अपने नंगे

बदन को दिखाने मे क्यों शर्मा रही हो?”

“तुम्हारा दिमाग़ खराब हो गया और मेरी तो समझ मे नही आ रहा कि

तुम क्या कहना चाहते हो?” प्रीति ने जानबूझ कर अंजान बनते हुए

कहा… और उसे लगने लगा कि रात मे ज़रूर रवि सोया हुआ नही था

और उसने सभी कुछ अपनी आँखों से देखा लिया है..

“तुम सही सोच रही हो प्रीति जब तुम कमरे मे आई तब मे वास्तव

मे सोया हुआ था लेकिन तुम दोनो की बातों ने मेरी नींद खोल दी.. और

फिर में वो सब कुछ देखा जो तुमने और राज ने आपस मे किया…. रात

के अंधेरे मे में तुम्हे अच्छी तरह देख नही पाया इसलिए अब दिन के

उजाले मे तुम्हारे इस जानलेवा बदन को अच्छी तरह देखना चाहता हूँ”

रवि ने बेशर्मी से कहा…

“मैं किसी हालत मे ऐसा नही होने दूँगी” प्रीति ने कहा…

“एक बार फिर से सोच लो प्रीति नही तो आज की रात खाने के टेबल पर

मुझे सभी को ये बात बतानी पड़ेगी.. ” रवि ने धमकी देते हुए

कहा…

“तुम ऐसा नही कर सकते ”

“अगर तुम चाहती हो कि मैं ऐसा नही करूँ तो एक बार दरवाज़ा खोल

मुझे तुम्हारे नग्न बदन को देखने दो” रवि ने कहा.

प्रीति सोच मे पड़ गयी.. कि क्या सही मे रवि ऐसी बात पूरे परिवार

को बताने की हिम्मत कर सकता है और अगर सही मे उसने बता दिया तो

फिर आगे क्या होगा… वो तो परिवार के सभी मर्दों से चुदवा चुकी

है.. फ़र्क सिर्फ़ इतना था कि हर मर्द यही समझता है कि वो सिर्फ़

उसी से चुदवाति है.. और अब सभी को उसकी छिनलीयत का पता चल

जाएगा… उससे यही अच्छा लगा कि सभी आपस के रिश्तों से अंजान

रहे तो अच्छा है….

“ठीक है में एक बार तुम्हे अपना जिस्म दीखा दूँगी फिर तुम यहाँ से

चले जाना” प्रीति ने कहा…

“हां चला जाउन्गा अगर तुम्हे मुझे कुछ नही चाहिएगा तो?” रवि ने

जवाब दिया..

“मुझे नही लगता कि मुझे तुमसे कुछ चाहिएगा” प्रीति ने जवाब

दिया. और बाथरूम का दरवाज़ा खोल दिया… और चुप चाप खड़ी अपने

ममेरे भाई को बाथरूम के अंदर आकर अपने नंगे बदन को घूरते

देखती रही…

“ऊऊ प्रीति तुम्हारी चुचियाँ तो बड़ी जानदार है” रवि ने अपनी

नज़रे प्रीति की बड़ी और भारी चुचियों पर गढ़ाते हुए कहा.. और

जैसे ही उसकी नज़रे नीचे की ओर फिसली वो बोल पड़ा, “अरे तुमने तो

अपनी झांते सॉफ कर अपनी चूत को भी एक दम सफ़ा सत कर रखा

है.”

प्रीति ने अपनी नज़रे रवि की जांघों के बीच दौड़ाई… वो जानती थी

कि उसका लंड ये मनमोहक नज़ारा देख तन कर खड़ा हो गया होगा…

“अब यहाँ से दफ़ा हो जाओ रवि… ” प्रीति ने दरवाज़े को बंद करने

की कोशिश करते हुए कहा.. ” अगर तुमने ये बच्चो जैसी हरकत ना

की होती तो और किसी शरीफ लड़के की तरह मुझे बेहकाने की

कोशिश की होती तो शायद में तुम्हे बहुत मज़ा देती लेकिन इस

हरकत के बाद तो में तुम्हारी बेहन के साथ ही सेक्स का खेल खेलूँगी

जिससे तुम्हे जलन होती रहे”

रवि को अपनी ग़लती का एहसास हुआ और ये सोचते हुए वो बाथरूम से

बाहर आ गया कि सही मे उसने जो किया वो अच्छा नही किया.. जो कुछ

उसने देखा उससे उसका लंड तन कर खड़ा हो चुका था और प्रीति की

बात सुनकर तो और तन गया था क्या सच मे प्रीति सोनिया के साथ सेक्स

का मज़ा लेगी… अब वो ये सोचने लगा कि वो कैसे उन दोनो को सेक्स का

खेल खेलते देखे….

उस रात अपने घर पर प्रीति अपने कमरे मे सोनिया से बात कर रही

थी.. दोनो ने सिर्फ़ पॅंटी और टी-शर्ट पहन रखी थी.. प्रीति अपने

बिस्तर पर थी और सोनिया नीचे ज़मीन पर बिछे बिस्तर पर… “क्या

तुम्हारा भाई ऐसे ही लड़कियों के आगे पीछे मंडराता रहता है..

क्या उसकी कोई गर्ल फ्रेंड नही है?” प्रीति ने सोनिया से पूछा.

“तुम कहना क्या चाहती हो?” सोनिया प्रीति के अचानक पूछे जाने से

चौंक पड़ी थी. “उसकी तो कई गर्ल फ़्रेंड रह चुकी है और वो

हमेशा से लड़कियों की इज़्ज़त करता है..तुम क्यों ऐसे पूछ रही हो?”

“वो बस ऐसे ही.. आज उसने कुछ मुझसे पूछा था इसलिए में सोच मे

पड़ गयी थी… ” प्रीति ने जवाब दिया.. “लेकिन तुम इसकी चिंता मत

करो..हम कोई दूसरी बात करते है”

“हां यही ठीक रहेगा.. अच्छा तुम बताओ तुम्हारा कोई बॉय फ़्रेंड है

या नही?” ”

सोनिया ने प्रीति से पूछा…

“नही कोई ख़ास नही है तुम सूनाओ अगर तुम्हारी चूत मे खुजली हो

रही हो तो में तुम्हारी मदद कर सकती हूँ” प्रीति ने जवाब दिया..

“नही अभी तो ऐसा कुछ नही है.. फिलहाल मेरी गर्मी शांत हो चुकी

है” सोनिया ने कहा.

“अरे वाह ये तो कमाल हो गया… कब और कैसे?” प्रीति ने पूछा..

“असल मे क्या है वो जब हम मोहन अंकल के घर थे तब मेने और

स्वीटी ने एक दूसरे की गर्मी को शांत किया था”

“मुझे नही विश्वास होता कि तुमने स्वीटी के साथ मज़ा किया” प्रीति

बोली.

“बस कब कैसे अचानक हो गया कुछ पता ही नही चला” सोनिया ने

जवाब दिया.

“तब तो तुम्हे स्वीटी के साथ बहुत मज़ा आया होगा.”

“अगर स्वीटी जैसी गरम लड़की साथ हो तो मज़ा क्यों नही आता” सोनिया

ने हंसते हुए कहा.

“क्या तुम मुझे खुल कर बतओगि कि तुमने उसके साथ कैसे और क्या

किया?” प्रीति ने पूछा.

“तुम ये चाहती हो कि में तुम्हे बताऊ की तुम्हारी चचेरी बेहन के

साथ मेने सेक्स का खेल कैसे खेला?”

“हां अगर तुम बताना चाहो तो?” प्रीति ने कहा.

“इसमे छुपाने जैसे कुछ नही है…” सोनिया ने कहा..

सोनिया अब उस रात के द्रिश्य को याद करते हुए प्रीति को सब बताने

लगी.. प्रीति भी उसे गरम करने के लिए उससे कुरेद कुरेद कर सब

बाते डीटेल मे पूछने लगी…

सोनिया ने देखा कि प्रीति ने अपनी एक टांग अपने नीचे इस तरह दबा

रखी थी कि उसके पैरों की उंगलियों ठीक उसकी चूत पर टीकी हुई

थी और वो थोड़ा आगे पीछे होते हुए अपनी चूत को अपनी उंगली से

कुरेद रही थी.. सोनिया खुद भी इस तरह से अपनी चूत से खेल चुकी

थी… अपनी ममेरी बेहन को इस तरह गर्माते देख उसकी चूत मे भी

हलचल मचने लगी…

“अगर तुम अपनी चूत से खेलना चाहो तो खेल सकती हो मुझे कोई

ऐतराज़ नही है” सोनिया ने प्रीति से कहा..

“सच तब तो मज़ा आ जाएगा” प्रीति ने उछल कर कहा और अपनी

कॉटन की पॅंटी उतार दी और साथ ही अपनी टी-शर्ट भी अलग कर दी…

सोनिया नीचे ज़मीन पर और बिस्तर के नज़दीक आ गयी और प्रीति की

बिना बालों की चूत को निहारने लगी..जहाँ उत्तेजना मे रस से भीग

उसकी प्यारी और मुलायम चूत चमक रही थी…

“अगर ये मेरी ममेरी बेहन ना होती तो ज़रूर इसकी चूत को अपने

मुँहे मे भर जोरों से चूस्ति अपने हाथों इससे सहलाती खेलती”

सोनिया ने मन ही मन सोचा.

“मुझे उस रात के बारे मे और बताओ?” प्रीति ने अपनी दो उंगलियों को

अपनी चूत मे घुसा कर सोनिया से कहा…

“प्रीति एक बात कहूँ तुम्हारी ये बिना बालों की चूत देख मुझे

स्वीटी की चूत बहुत याद आ रही है.. तुम्हे पता है वो भी अपनी

झांते सॉफ करके रखती है” सोनिया ने अपनी उंगलयों को उसकी मुलायम

चूत पर फिराते हुए कहा…

“म्‍म्म्ममम” प्रीति ने कहा उसकी चूत ने तभी पानी छोड़ दिया….

“प्रीति वो भी तुम्हारी तरह बहुत ही गरम लड़की है… सच कहती

हूँ उसकी चूत चूसने मे मुझे बहुत मज़ा आया था.. ”

“मुझे पता है” प्रीति अपनी उत्तेजना मे कहने को तो ये कह गयी….

लेकिन तुरंत उसे एहसास हुआ कि ये उसने क्या कह दिया…

“तुम्हे पता है?” सोनिया ने चौंकते हुए पूछा.. “इसका मतलब है कि

तुम भी उसकी चूत का मज़ा ले चुकी हो?”

“हां ” आख़िर प्रीति को कबूल करना ही पड़ा

“हे भगवान… मुझे बताओ ये सब कैसे और कब हुआ” सोनिया ने

पूछा.. दोनो बहने थी और वो तो ऐसे रिश्ते के बारे मे सोच भी

नही सकती थी इसलिए प्रीति की बात पर उसे हैरानी हो रही थी..

प्रीति की समझ मे नही आ रहा था कि उसे कितना और क्या बताए

लेकिन अब तो ज़ुबान से बात निकल चुक्की थी.. लेकिन वो उसे ये भी

नही बता सकती थी कि किस तरह उसने सिर्फ़ स्वीटी के साथ ही नही

बल्कि परिवार के सभी मर्दों से चुदवाया है और साथ ही अपनी मम्मी

की चूत का भी मज़ा लिया है..

“वो क्या है ना एक दिन हम शॉपिंग कर के लौटे और ड्रेसस पहन

कर देख रहे थे कि सब कुछ अचानक हो गया.. ” प्रीति ने गोल गोल

जवाब दिया..

“ज़रा खुल कर बताओ ना सब कुछ कैसे हुआ?” सोनिया ने ज़ोर देकर

पूछा और साथ ही अपनी पॅंटी और अंडरवेर उतार उसके बगल मे आकर

लेट गयी…

प्रीति ने उसकी महीन बालों से ढाकी चूत को देखा और उसे बताने

लगी कि किस तरह वो और स्वीटी शॉपिंग के लिए गये थे और कैसे

उन्होने बाज़ार से एक नकली लंड खरीदा था और फिर घर आकर कैसे

एक दूसरे की चूत का मज़ा लिया था…

अपनी बात बताते वक्त प्रीति सोनिया को देख रही थी जो अपनी चूत को

अपनी ही उंगली से चोद रही थी… उसका एक हाथ खुद बा खुद सोनिया के

जांघों पर आ गया और वो उसकी जांघों को सहलाने लगी…

उत्तेजना मे सोनिया की साँसे फूलने लगी थी…. “प्रीति क्या वो नकली

लंड अब भी है तुम्हारे पास?” उसने पूछा..

“क्या तुम इस्तेमाल करना चाहती हो?”

“हां प्रीति सहन नही हो रहा.. लगता है कि जैसे चूत मे

चिंतिया रेंग रही हो” सोनिया ने उत्तेजित होकर कहा…

प्रीति बिस्तर से उठी और अपनी अलमारी खोल दो मुँहे वाले डिल्डो लेकर

वापस पलंग पर आ गयी…..

सोनिया ने जैसे ही उस खिलोने को देखा तो उछल पड़ी… “प्रीति क्या

सही मे ये जैसा दिखता है वैसे ही काम करता है?” सोनिया ने

पूछा..

“अच्छा एक बात बता सोनिया क्या तुमने कभी कुछ अपनी गंद मे घुसाया है?”

प्रीति ने पूछा….

“पागल हो गयी हो क्या?” सोनिया ने जवाब दिया… “लेकिन क्या तुमने ऐसा

किया है?”

“हां मेने तो अपनी गंद मे घुसाया है” प्रीति ने कहा..

“क्या तुम्हे घृणा नही हुई… ” सोनिया ने पूछा..

“शुरू मे तो ऐसा लगा था लेकिन जब एक बार इसका मज़ा लिया तो फिर

अच्छा लगने लगा.. और तुम्हे विश्वास नही होगा जब भी कोई वास्तु मेरी

गंद मे घुसती है तो मेरी चूत पानी छोड़ने लगती है.. सही मे अब

तो बहुत मज़ा आता है” प्रीति ने जवाब दिया..

“में तो कभी ऐसा नही करूँगी और ना ही किसी को ऐसा करने

दूँगी” सोनिया ने कहा..

“फिर तो में यही कहूँगी कि तुम नही जानती की तुम किसी मज़े से

वंचित रह जाओगी..” प्रीति ने कहा…

“वो बाद की बात है हां अगर तुम इसे अपनी गंद मे इस्तेमाल करना

चाहो तो में तुम्हे ऐसा करते ज़रूर देखना चाहूँगी” सोनिया ने

कहा..

“तुम एक शर्त पर देख सकती हो अगर तुम खुद अपने ही हाथों से इस

डिल्डो को मेरी गंद मे घुसाओ तो?” प्रीति ने चंचल मुस्कान अपने

चेहरे पर लाते हुए कहा..

“ठीक है मुझे मंजूर है” सोनिया ने कहा…

“ये हुई ना बात… अब आएगा मज़ा” प्रीति ने खुश होकर अपनी ही

चुचियों को मसल्ते हुए कहा….

प्रीति को अपनी चुचियों को मसल्ते देख सोनिया के दिल मे आया कि वो

अपने हाथ आगे बढ़ा उसकी भारी चुचियों को अपनी हथेली मे भर ले

और खूब ज़ोर ज़ोर से मसले….

प्रीति ने फिर बेड के साइड से माय्स्चुरिज़र की शीशी उठाई और उस

नकली लंड को चिकना करने लगी.. फिर बिस्तर पर घोड़ी बन अपने

चूतदों को हवा मे उठा दिया…. और फिर थोड़ा माय्स्चुरिज़र अपनी

उंगलियों पर लगा उसने उन उंगलियों को अपनी गंद के छेद मे घुसा गोल

गोल घूमाने लगी…

“सोनिया अब एक काम करो इस डिल्डो का जो चौड़ा वाला मुँह है उसे पहले

मेरी चूत मे घुसा दो” प्रीति ने सोनिया से कहा..

सोनिया ने उस डिल्डो के चौड़े वाले को मुँह को प्रीति की चूत से

लगाया और उसे धीरे धीरे अंदर घुसाने लगी… मोटे डिल्डो के

चूत मे घूसटे ही प्रीति का बदन एक बार के लिए काँपा…. सोनिया

उस नकली लंड को अंदर घुसाते गयी और करीब आधा लंड अंदर घुस

गया तो वो रुक गयी….

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